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बिहार की नीतीश सरकार ने इंजीनियरिंग और मेडिकल में बेटियों को 33% सीटें आरक्षित की

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुनः मिसाल पेश करने की तैयारी हेतु कदम बढ़ा दिया है। सूबे के सीएम ने लड़कियों के लिए न्यूनतम एक तिहाई सीटें (यानि 33%) आरक्षित करने की घोषणा बुधवार को कर दी है। ऐसा होने पर बिहार देश का पहला राज्य तो बन ही जाएगा साथ ही महिला सशक्तिकरण का पुनः मिसाल पेश करेगा। नीतीश ने नौकरियों में पहले ही महिलाओं को 35% आरक्षण दे दिया है। इस बाबत सारे आलाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया जा चुका है।

बता दें कि वर्तमान में बिहार के 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में कुल 9275 सीटें हैं और 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1125 सीटें हैं। यह भी जानिए कि सूबे की सभी इंजीनियरिंग कॉलेज अभियंत्रण विश्वविद्यालय के अधीन होंगे तथा सभी मेडिकल कॉलेज चिकित्सा विश्वविद्यालय के अधीन होंगे। यह भी जान लीजिए कि मेडिकल विश्वविद्यालय का नाम “बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज” और इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय का नाम “द बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी” होगा।

चलते-चलते यह भी जानिए कि समाजसेवी शिक्षाविद्  प्रो.(डाॅ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस पहल की शुभानुसंशा करते हुए कहा कि इससे सूबे की छात्राएं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की ओर सर्वाधिक प्रेरित होंगी। डॉ.मधेपुरी ने विधानमंडल के अगले सत्र में इस विधेयक को पारित कर कानून बनाने हेतु कोटि-कोटि शुभकामनाएं व्यक्त की तथा सभी सदस्यों को अग्रिम बधाई भी दी।

 

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नीतीश सरकार ने एक बार फिर 1 जून के बाद से 8 जून तक के लिए लाॅकडाउन- 4 का विस्तार किया है

कोरोना की दूसरी लहर से मुकाबला करने के लिए बिहार में नीतीश सरकार ने मई में लॉकडाउन लगाना शुरू किया और आहिस्ता-आहिस्ता कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में सफलता मिलने के कारण उसे बढ़ाते हुए तीसरा लॉकडाउन 1 जून तक लगा दिया।

बता दें कि संतोषप्रद सफलता नहीं मिलने पर क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक मुख्यमंत्री के निर्देश पर बुलाई गई और विचारोंपरांत यह निर्णय लिया गया कि लाॅकडाउन-4 की आवश्यकता महसूस की जा रही है। फलस्वरूप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही सर्वप्रथम ट्वीट कर बिहार वासियों को यह जानकारी दी कि 2 जून से 8 जून तक बिहार में फिर से लॉकडाउन- 4 जारी रहेगा।

मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण के अनुसार जानिए कि इस बार बिहार सरकार ने लॉकडाउन-4 में लोगों को कुछ विशेष राहत देने की कोशिश की है-

1. सिर्फ सरकारी कार्यालय 25 कर्मचारियों के साथ 4:00 शाम तक खुले रहेंगे।

2. ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की सभी दुकानों व प्रतिष्ठानों को एक दिन बीच करके अल्टरनेट-डे प्रातः 6:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक खुलने की छूट दी गई है। शेष सभी डीएम पर छोड़ा गया है कि वे किस दिन कौन सी दुकानों को खोलने की इजाजत देंगे।

3. आवश्यक वस्तुओं की दुकानों के साथ-साथ उर्वरक, फल-सब्जी, मांस-मछली, पीडीएस, कीटनाशक की दुकानें भी प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से दिन के 2:00 बजे तक खुली रहेगी।

4. इस दौरान सभी दुकानों में मास्क पहनकर ही लोग सामान खरीदेंगे और बेचेंगे। तथा हाथों को सैनिटाइज करेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे।

5. शादी-विवाह एवं श्राद्ध के लिए सारे निर्देश यथावत रहेंगे। अवहेलना करने वालों को प्रशासन दंडित करने के अधिकारी बने रहेंगे।

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राज्य में कुछ विशेष छूटों के साथ लॉकडाउन- 4 की संभावना

जब देश और प्रदेश कोरोना की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित होने लगा तब नीतीश सरकार ने 5 मई 2021 से बिहार में प्रथम चरण का लॉकडाउन 15 मई तक लगाने की स्वीकृति दी। स्थिति में सुधार लाने हेतु बाद में इसे 25 मई तक बढ़ाकर लॉकडाउन- 2 नाम दिया गया। हालात की समीक्षा करते हुए सरकार ने 1 सप्ताह यानि 1 जून 2021 तक और बढ़ाने का फैसला लेते हुए इसे लॉकडाउन-3 नाम रख दिया। फिलहाल कल तक (1 जून तक) बिहार में लाॅकडाउन- 3 प्रभावी रहेगा।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में सरकार एवं प्रशासन की सख्ती तथा भरपूर जन सहयोग के फलस्वरूप कोरोना संक्रमण में सुधार को देखते हुए नीतीश सरकार कुछ नई छूट के साथ बिहार में लाॅकडाउन की समय सीमा को एक सप्ताह के लिए बढ़ा सकती है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि एक-दो दिनों में यानि आज से कल तक में आपदा प्रबंधन समूह की बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि लॉकडॉन- 3 की मियाद 1 जून 2021 मंगलवार को समाप्त हो रही है या उसे कितने दिनों के लिए लाॅकडाउन- 4 का नाम देकर बढ़ाया जाएगा।

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बोले सीएम नीतीश- यास चक्रवात के कारण सूबे में बिजली-पानी की सुविधाएं जल्द हो बहाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चक्रवाती तूफान यास के बाद जिले में पानी-बिजली आवागमन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं बहाल रखने के लिए हर तरह के जरूरी कदम उठाने हेतु संबंधित विभागों के पदाधिकारियों एवं जिला प्रशासन को निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से भी कहा कि भले ही सूबे में चक्रवाती तूफान का असर कम हो रहा है, लेकिन अभी सभी को सजग रहना आवश्यक है।

बता दें कि तूफान ने सूबे में बिजली-पानी की किल्लत और जलजमाव सहित कई प्रकार की परेशानियां खड़ी कर दी है। राज्य भर में 500 से अधिक बिजली के खंभे ध्वस्त हो गए। पेड़ों के बिजली तारों पर गिरने के कारण विद्युत आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा। ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति अभी भी प्रभावित है शहरी क्षेत्रों में जल जमाव के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानियां हो रही है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि प्रशासन की ओर से बंद बिजली आपूर्ति, बंद आवागमन को चालू करने की कवायद द्रुत गति से आरंभ कर दी गई है। बंद पीपा पुल को भी चालू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। शीघ्र ही शहरी जनजीवन सामान्य हो जाएगी। जन सहयोग के चलते कोरोना संक्रमण में भी तेजी से कमी आ रही है। जन सहयोग के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को साधुवाद दिया है।

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चक्रवाती तूफान ‘यास’ को लेकर बिहारी अधिकारियों व अभियंताओं को 24 घंटे अलर्ट रहने की दी गई हिदायत

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘यास’ बुधवार को सबेरे उड़ीसा के बालासोर में तट से टकराया। इस दौरान हवा की रफ्तार 130-140 किलोमीटर प्रति घंटे रही। उड़ीसा के बाद तूफान पश्चिम बंगाल होते हुए झारखंड की ओर बढ़ा।

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को आधी रात के बाद बिहार राज्य के बांका, जमुई, कटिहार, लखीसराय, भागलपुर होते हुए बिहार के 26 जिलों में भारी बारिश के अंदेशा की सूचना जारी की गई। हालांकि, इस चक्रवाती तूफान का प्रभाव बुधवार को दिनभर बिहार के सभी हिस्सों में दिखाई दिया और इस तूफान का प्रभाव 27 से 30 मई तक रहने की बात कही गई है।

बताया गया कि भागलपुर सहित बिहार के सभी हिस्सों में तूफान का प्रभाव 4 दिनों तक रहेगा। इस दौरान सूबे के अधिकांश हिस्सों में 60 से 255 एमएम बारिश होने के आसार बताए गए हैं। साथ ही 40 से 55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने की बात भी कही गई है।

जानिए कि 7 जिलों में येलो अलर्ट और अन्य शेष सभी जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। सारण, शिवहर, पूर्वी चंपारण, कटिहार, किशनगंज, रोहतास व भोजपुर जैसे 7 जिलों में यह येलो और शेष सभी जिलों में रेड अलर्ट हैं। यहां तक कि आपदा राहत पहुंचाने वाले एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी अलर्ट मोड में हैं। आपातकालीन कंट्रोल रूम सहित विभाग का कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहे हैं। सभी नदियों एवं बराजों पर निगरानी बढ़ा दी गई है

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सरस्वती के वरद् पुत्र डॉ.रवि के साथ उनकी धर्मपत्नी विदुषी डॉ.मीरा भी चल बसी

14 मई को ईद के दिन सरस्वती के वरद् पुत्र डॉ.रवि ने पटना के पालिका हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली और आज 25 मई मंगलवार को हनुमान के दिन पटना के पारस में उनकी धर्मपत्नी विदुषी डॉ.मीरा ने दिन के 9:10 बजे अंतिम सांस ली। उस समय उनके दो पुत्र डॉ.चंद्रदीप और डॉ.अमरदीप वहां मौजूद थे। डॉ.रवि हिन्दी के और डॉ.मीरा मैथिली के प्रोसेसर थे। संयोग देखिए, डॉ.रवि ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में और डॉ.मीरा पार्वती विज्ञान महाविद्यालय में कार्यरत थे। आजकल के बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि ठाकुर प्रसाद की धर्मपत्नी है पार्वती देवी।

होनी को तो कोई टाल नहीं सकता। मजदूर दिवस (1 मई) के दिन इन दोनों के समधी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से हो रही बातचीत के दरमियान डॉ.रवि एवं डॉ.मीरा द्वारा यही कहा गया कि हम दोनों तो घर से निकलते ही नहीं तो कोरोना क्या बिगाड़ लेगा ?

हाँ, ये सच है कि वे स्थानीय चतरा कोठी से नहीं निकलते थे, परंतु राजनेता, प्राचार्य व कुलपति रहने के कारण उपकृत हुए लोगों का आना-जाना तो लगा ही रहता था। पता नहीं कब, कैसे और किसके साथ कोरोना ने उन्हें चुपके-चुपके अपनी गिरफ्त में ले लिया और आहिस्ता-आहिस्ता उनकी धर्मपत्नी डॉ.मीरा भी कोरोना संक्रमित हो गई। सर्दी-खांसी-बुखार तक तो खुद डॉक्टर बने रहे, जब सांस लेने में कठिनाई हुई तब फोन से जानकारी मिलते ही पटना में रह रहे कनिष्ठ पुत्र प्रदेश मीडिया सेल के अध्यक्ष डॉ.अमरदीप अपने चिकित्सक साढुभाई डॉ.बरूण कुमार के साथ डीएम श्याम बिहारी मीणा से सहयोग प्राप्त कर ऑक्सीजन प्राप्त किया और इलाज आरंभ हुआ।

सीएम हाउस से भी डीएम के माध्यम से डॉ.रवि सहित डॉ.मीरा की स्थिति का जायजा बराबर लिया जाता रहा। बाद में जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती, फिर स्थिति बिगड़ते देख डीएम मीणा ने बेहतर इलाज हेतु अलग-अलग एंबुलेंस में विशेषज्ञों के साथ 13 मई को पटना रवाना कर दिया। मई 14 को दिन के 1:30 बजे डॉ.रवि ने पालिका में और डॉ.मीरा ने 25 मई को सवेरे 9:10 बजे पारस में अंतिम सांस ली।

इधर डॉ.रवि के पुत्र द्वय डॉ.चंद्रदीप व डॉ.अमरदीप ने वैदिक रीति से अपने पिताश्री डॉ.रवि का श्राद्ध कर्म 25 मई को सबेरे समाप्त किया कि ताजिंदगी पति के कार्यों में सहयोग करने वाली धर्मपरायण पत्नी डॉ.मीरा ने 15 मई से ही आंखें बंद कर पति के कार्यों में निरंतर सहयोग करते हुए 25 मई को अंतिम सांस ली। इन घटनाओं को सुन साहित्यकार समधी डॉ.मधेपुरी ने अवरुद्ध कंठ से अपनी चार पंक्तियां श्रद्धांजलि स्वरुप दोहराते हुए कहा-  दुनिया रंगमंच है अपनी / सभी भूमिका निभा रहे हैं / कोई आकर हंसा गए जी / कोई जाकर रुला रहे हैं।

डॉ.रवि ने जनहित में ताजिंदगी ऐसी भूमिका निभाई थी कि जाने के बाद एक सप्ताह तक अखबारों एवं सोशल मीडिया पर छाए रहे। लोग उनके किए गए कर्मों को याद करते रहे तथा नम आंखों से श्रद्धांजलि देते रहे। आज परम विदुषी एवं धर्म परायण अर्धांगिनी डॉ.मीरा भी चली गई। जिनने आते-जाते डॉ.मीरा से सम्मान एवं वात्सल्य प्यार पाया था, वे सभी आज उदास हैं, शोकाकुल हैं। जो पल-पल उनके स्वास्थ्य सुधार की जानकारी पाने को व्याकुल रहते थे और उनके समधीश्री डॉ.मधेपुरी से जानकारी मांगते रहते थे, वे हैं-

पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह, रमण कुमार सिंह समाजसेवी, प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार,  प्राचार्य डॉ.शिव नारायण यादव, प्राचार्य डॉ सुरेश प्रसाद यादव, डॉ.शांति यादव, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, जदयू जिला अध्यक्ष गुड्डी देवी, सहरसा आरएम कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.मणिभूषण वर्मा, साहित्यकार डॉ.विनय कुमार बेसुध सहित कुलपति के निजी सचिव शंभू नारायण यादव व प्रो.मनोज भटनागर आदि ढेर सारे लोग। सभी शोकाकुल हैं। इस आदर्श दंपत्ति के अचानक चले जाने से आम लोगों के साथ-साथ बिहार का जदयू परिवार भी मर्माहत है।

डॉ.मीरा लगभग 10 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुई थी और तब से पारिवारिक जीवन जी रही थी। वह एक धर्मपरायण महिला के रूप में दिनभर पूजा-पाठ में लगी रहती। 74 वर्षीय डॉ.मीरा अपने पीछे तीन पुत्रों डॉ.रतनदीप, डॉ.चंद्रदीप, डाॅ.अमरदीप एवं एक पुत्री मधुनंदा सहित ढेर सारे नाती-पोते से भरा पूरा परिवार छोड़ कर गई हैं। उनका अंतिम संस्कार पटना के उसी गुलबी घाट पर हुआ जहां उनके पति डॉ.रवि को उनके पुत्र डॉ.चंद्रदीप ने मुखाग्नि दी थी और आज वहीं पर 25 मई को दिन के 3:00 बजे उनके कनिष्ठ पुत्र डॉ.अमरदीप ने मां डॉ.मीरा को मुखाग्नि दी। उनकी अंत्येष्टि में एचआईजी बहादुरपुर एवं प्रदेश मीडिया सेल के चाहने वाले अच्छे-खासे लोग मौजूद दिखे।

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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बिहार सरकार द्वारा बनाई जा रही कार्य योजना

बिहार की नीतीश सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा सभी जिले के जिलाधिकारियों को बताया कि ग्रामीण इलाकों में जिन 1454 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों (एपीएचसी) को मार्च महीने में बंद किया गया था और वहां के चिकित्सकों को कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) एवं डेडीकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेंटर (डीसीएचसी) में तैनात किया था, अब पुनः तीसरी लहर को लेकर यह निर्देश दिया जाता है कि इन अस्पतालों के सभी डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को पुनः उसी एपीएचसी में तैनात किया जाए।

अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में 15000 स्वास्थ्य कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार गांव में कोरोना मरीजों की पहचान तथा होम आइसोलेशन में इलाजरत कोरोना रोगियों के सहयोग के लिए प्रशिक्षित ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सेवा ली जाए।

चलते-चलते यह भी कि राज्य में जिन 15000 ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित होकर उत्तीर्णता प्राप्त की है, उन्हें ही नियुक्त किया जाए और कार्य समाप्ति के बाद प्रत्येक का मानदेय सीधे उनके बैंक खाते में डाल दिया जाए।

 

 

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अब कोरोना मरीजों के मृत्यु-प्रमाण पत्र ईमेल/एसएमएस द्वारा मिल जाएंगे

एक साल से अधिक समय से देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर तो देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ बच्चों के क्लास से लेकर उच्च शिक्षा तक की स्थिति दयनीय बना दी है।

बता दें कि देश की वर्तमान कोरोना स्थिति यही है- अब तक देश में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 2 करोड़ 63 लाख है। जिसमें कोरोना को हराने वालों की संख्या 2 करोड़ के पार पहुंची है। और अब तक मरने वालों की संख्या 2 लाख 95 हजार तक पहुंच गई है।

जानिए की कोरोना से मृत्यु के बढ़ रहे मामलों के मद्देनजर परिजनों को मृत्यु-प्रमाण पत्रों की जरूरतें जल्द होने लगी है। अस्तु मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार के नगर विकास विभाग ने नई व्यवस्था के तहत ईमेल द्वारा देने का निर्णय लिया है।

यह भी कि विभागीय प्रधान सचिव आनंद किशोर ने राज्य के सभी नगर निकायों को यह आदेश दिया है कि वे अपने क्षेत्र में कोरोना या अन्य कारणों से होने वाली मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र देने के लिए ईमेल का प्रयोग करेंगे। श्री किशोर ने यह भी कहा कि ऐसे प्राप्त आवेदनों के आवेदकों का ईमेल एवं फोन नंबर जरूर ले लिया जाए, ताकि बाद में आवेदक को उनके परिजन का मृत्यु प्रमाण पत्र उनके ईमेल के माध्यम से शीघ्र भेज दिए जाएं अथवा एसएमएस के माध्यम से भी।

यदि गांव या शहर के ऐसे आवेदक जिन्हें ई-मेल आदि ना हो तो उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र की हार्ड कॉपी मांग करने पर रजिस्टर्ड डाक से भेज दिए जाएं बशर्ते कि रजिस्टर्ड डाक खर्च आवेदकों को ही देना होगा। जबकि डाकघर से प्रमाणित कॉपी नहीं मांगने की स्थिति में वे सीधे नगर निकाय कार्यालय से प्रमाण पत्र ले सकते हैं।

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कोरोना पीड़ितों के लिए 7 करोड़ जुटाने में लगे हैं विराट और अनुष्का

कोरोना काल में मानवता की रक्षा के लिए सभी देशों ने भारत की मदद करनी शुरू की तो भारतीय खिलाड़ी, फिल्म सितारे और उद्योगपति भी मदद को सामने आने लगे। जब तेंदुलकर ने एक करोड़ की घोषणा की तो लगे हाथ विराट और अनुष्का ने दो करोड़ रुपए दान किए और 7 दिनों में 7 करोड रुपए जुटाने की योजना भी बना डाली है। कैंपेन की शुरुआत करते ही 2.5 करोड़ से अधिक राशि जमा हो गई।

बता दें कि 2 सप्ताह पहले भारत में ऑक्सीजन से लेकर वैक्सीन तक की डिमांड जीरो थी और आज 55 गुना बढ़ गई है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय अपने परिजनों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजने में लगे हैं। भारत में ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत के कारण एनआरआई विदेशों से अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इंतजाम कर रहे हैं। कईयों के माता-पिता भारत में अकेले हैं और वे चाहकर भी उन तक नहीं पहुंच सकते हैं।

जानिए कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत सरकार ने फिलहाल मेडिकल इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, लेकिन एक घर के लिए सिर्फ दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को आयात करने की इजाजत दी है।

चलते-चलते यह भी कि भारत की राजनीतिक विपक्षी पार्टियों ने कोरोना की तीसरी लहर को रोकने हेतु जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दे रही है। साथ ही यह भी कि कोरोना के सभी म्यूटेशन पर जल्द से जल्द सभी उपलब्ध वैक्सीन का टेस्ट अविलंब करने की प्रक्रिया आरंभ की जाए।

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कोरोना के कारण माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों का चाइल्ड केयर रखेगा ख्याल

बिहार सरकार के कल्याण विभाग के निदेशक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने सभी जिले के जिलाधिकारियों को कोविड महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा हेतु आदेश जारी किया है।

नीतीश सरकार के समाज कल्याण विभाग ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर बेहतर स्वास्थ सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु गंभीरता दिखाई है। साथ ही कल्याण विभाग को कहा गया है कि वंचित समूहों को जिला स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु तैयार रहें। कोरोना संक्रमण की स्थिति में यदि कोई बच्चा अनाथ होता है तो प्रभावित बालक और बालिका को अविलंब ‘चाइल्ड केयर होम’ में रखने हेतु जरूरी व्यवस्था की जाए।

बता दें कि सरकारी स्तर पर जहाँ ऐसी परिस्थितियों में ऐसे अनाथ बच्चों के ट्रैफिकिंग में वृद्धि होने की आशंका पर नियमित अनुश्रवण की आवश्यकता जताई गई है वहीं कोरोना संक्रमित माता-पिता की संतान को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘छत्रछाया’ और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने वाले ‘प्रांगण’ जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं देश के प्रत्येक राज्य के प्रायः जिलों में क्रियाशील हैं। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि आस-पास के लोग भी ऐसे परिवार से दूरी बना लेते हैं। इस प्रकार की स्वयंसेवी संस्थाओं में जितने भी कोरोना वरियर्स समर्पित होकर मानवता की सेवा में लगे हुए हैं, उनके जज्बे को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी  सैल्यूट करते हैं तथा कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करने हेतु अनुरोध करते हैं।

 

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