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31 जुलाई तक बिहार में लाॅकडाउन का ऐलान किया नीतीश सरकार ने

जहां एक ओर गया और पीएमसीएच के डॉक्टर का कोरोना के कारण मौत हो गई हो और दूसरी ओर एडीएम, सीएम और राजभवन के सुरक्षाकर्मियों को कोरोना संक्रमित होने को विवश होना पड़े तो सूबे बिहार के मुखिया को सुरक्षा हेतु कड़े कदम उठाने के लिए अधिकारियों की एक हाई लेवल मीटिंग बुलानी पड़ी। आज उसी समीक्षात्मक बैठक में कोरोना संक्रमण की स्थिति का जायजा भी लिया गया।

बता दें कि सूबे बिहार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी भी हुए कोरोना पॉजिटिव पाये गये जबकि दो मंत्री कोरोना की चपेट में पूर्व से ही थे। लगातार वर्चुअल बैठक होते रहने के कारण बिहार बीजेपी के कार्यालय में छोटे-बड़े 75 नेता जब कोरोना पॉजिटिव पाए गए तो बीजेपी को ही चुनावी शोक में डुबो दिया।

यह भी बता दें कि पटना में हर जगह कोरोना की दस्तक से भय का वातावरण कायम होता देख मीठापुर सब्जी मंडी को 3 दिनों के लिए बंद करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है। राज्य के 38 जिलों से अब तक पाए गए नए कोरोना पॉजिटिवों की संख्या में 1116 की वृद्धि दर्ज की गई और इसके साथ ही राज्य में कोरोना पॉजिटिवों की संख्या 17421 पहुंच गई है। सोमवार यानि 13 जुलाई को पटना जिला में सबसे अधिक 228 कोरोना पॉजिटिव पाया गया।

इस तरह बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण पूरे बिहार में 16 जुलाई से 31 जुलाई तक लाॅकडाउन करने का फैसला नीतीश सरकार ने लिया है। ग्रामीण इलाकों को इस लाॅकडाउन में बाहर रखा गया है। बिहार में ट्रेन और प्लेन भी बाधित नहीं होगी।

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आत्मबल के धनी थे क्रांतिवीर शिवनंदन- डॉ.मधेपुरी

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान शिक्षक की नौकरी से त्याग पत्र तथा वकालत पेशे को तिलांजलि देना ईमानदारी और निर्भीकता से उपजे आत्मबल को ही तो दर्शाता है। मां के मंदिर में प्रवेश हेतु प्रशासन द्वारा दिए जा रहे पुलिसिया सहयोग को नकारना भी तो आत्मबल का ही परिचायक है। उक्त बातें डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बीएनएमयू संवाद में कही।

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सोमवार को शिवनंदन प्रसाद मंडल: साधना एवं संघर्ष के तहत ऑनलाइन व्याख्यान दे रहे थे। इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल के आत्मबल से संबंधित व्याख्यान यूट्यूब चैनल बीएनएमयू संवाद पर पीआरओ डॉ.सुधांशु द्वारा आयोजित किया गया था। डॉ.मधेपुरी ने बताया कि अंग्रेजी सल्तनत में अंग्रेज हुक्मरानों को मुंहतोड़ जवाब देने में प्रवीण थे क्रांतिवीर शिवनंदन। उन्होंने अनेक रोचक उदाहरणों के द्वारा शिवनंदन प्रसाद मंडल के आत्मबल को आकाश से भी ऊंचा बताया और यह भी कहा कि अंग्रेज पदाधिकारियों को ईंट के बदले पत्थर जैसा जवाब देने में पैर पीछे कभी नहीं हटाया उन्होंने। डॉ.मधेपुरी ने उनके रिश्तेदारों अमरेश-पप्पू व रत्नेश- प्रो.प्रमोद से सहयोग लेकर उनके नाम वालेे स्कूल में उनकी प्रतिमा लगवाई और एसएनपीएम स्कूल के सदस्य बनने पर  शिवनंदन मार्केट और शिवनंदन चौक बनवाया। उन्होंने सहयोग हेतु स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों सहित तत्कालीन आपदा मंत्री सह अध्यक्ष प्रो.चन्द्रशेखर को हृदय से साधुवाद दिया।

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कोरोना के कारण बिहार-झारखंड के बीच 13 जुलाई से रेल-सेवा बंद रहेगी

हाल-फिलहाल कोरोना के मामले बिहार में बढ़ते हुए देख झारखंड सरकार ने बिहार से आने वाली ट्रेनों पर 13 जुलाई से रोक लगा दी है इसलिए कि झारखंड में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं।

बता दें कि कोरोना के बढ़ते संकट को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे द्वारा झारखंड सरकार के आग्रह पर इतना बड़ा फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत 13 जुलाई से बिहार और झारखंड दोनों राज्यों के बीच रेल-सेवा को यात्रियों के लिए रोक दिया गया है। भारतीय रेल द्वारा लिया गया यह फैसला अगले आदेश तक लागू रहेगा।

यह भी जान लें कि दानापुर-टाटा (अप एंड डाउन) ट्रेन का परिचालन अगले आदेश तक के लिए रोक दिया गया है जबकि पटना-रांची (अप एंड डाउन) जनशताब्दी एक्सप्रेस का परिचालन अगले आदेश तक केवल पटना से गया तक ही होगा।

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दुनिया को बेहतर बनाने का सबसे अच्छा तरीका है लड़कियों की शिक्षा

दुनिया की आबादी पर नियंत्रण करने का सबसे बड़ा उपाय है लड़कियों को शिक्षित करना। दुनिया में जहां लड़कियां शिक्षित हैं वहां की आबादी बढ़ने पर स्वतः अंकुश लग जाता है। भारत में जो-जो राज्य महिला शिक्षा में अच्छा कर रहा है वहां बच्चों का जन्म दर कम है।

बता दें कि यदि प्रत्येक बच्ची दसवीं कक्षा तक भी पढ़ ले तो आगामी 2050 ईस्वी तक में दुनिया की आबादी 150 करोड़ तक कम हो जाएगी। विभिन्न इंस्टिट्यूशनों की रिपोर्ट के अनुसार लड़कियों की शिक्षा और पैदा किए जाने वाले बच्चों के जन्म दर के बीच गहरा संबंध है क्योंकि शिक्षा ही लड़कियों को परिवार नियोजन की समझ देती है। शिक्षा ही उन्हें बाल-विवाह एवं कच्ची उम्र में मां बनने से बचाती है।

यह भी जानिए कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वर्ल्ड पापुलेशन एंड ह्यूमन कैपिटल स्टडी के अनुसार यदि संसार की हर लड़की और प्रत्येक लड़के को दसवीं तक की नियमित शिक्षा मिले तो 2050 में दुनिया की आबादी 150 करोड़ तक कम हो सकती है।

चलते-चलते यह भी कि अफ्रीका में जहां महिला शिक्षा की सुविधाएं न्यूनतम है वहां की हर महिला औसतन 5.4 बच्चों को जन्म दे रही है वहीं जिन देशों में लड़कियों को दसवीं तक की शिक्षा मिल रही है वहां की हर महिला 2.7 बच्चों को जन्म दे रही है और कॉलेज तक की शिक्षा सुविधा युक्त प्रत्येक महिला औसतन 2.2 बच्चों को जन्म दे रही है। यही ट्रेंड भारत में भी है। केरल में प्रति हजार जन्म दर 13.9 है और तमिलनाडु में जन्म दर 14.7 है जो दोनों राज्य बच्चियों की पढ़ाई में आगे है।

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पूर्णिया में सुशांत के नाम पर बना ऐतिहासिक चौराहा और पटना आवास बनेगा स्मारक

प्रतिभावान फिल्म अभिनेता और बिहार के होनहार बेटे के असामयिक मौत के बाद जहां एक ओर लोगों में गुस्सा है वहीं दूसरी ओर सुशांत सिंह राजपूत के चाहने वाले उनकी यादें सदा के लिए सहेजने हेतु रोज कुछ नया करने में लगे हैं।

बता दें कि पूर्णिया नगर निगम प्रशासन ने शहर के पुराने फोर्ड कंपनी चौक का नाम जहां बदलकर ‘सुशांत सिंह राजपूत चौक’ कर दिया है वहीं मधुबनी चौक से माता स्थान चौक तक बनी नवनिर्मित सड़क का नाम ‘सुशांत सिंह राजपूत पथ’ कर दिया है। नगर निगम के सदस्यों की उपस्थिति में निगम की मेयर श्रीमती सविता देवी ने ही इसका उद्घाटन किया है। मेयर ने कहा कि चंद रोज पूर्व नगर निगम की स्थाई समिति की बैठक में इस बाबत प्राप्त आवेदन पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित कर नया चौक व पथ का नामकरण किया गया है। मेयर सविता ने बताया कि सुशांत पूर्णिया जिले के बड़हरा कोठी प्रखंड के मलडीहा गांव के रहने वाले थे। पूर्णिया वासियों की ओर से सुशांत के प्रति यह संवेदना युक्त श्रद्धांजलि ही तो है।

जानिए कि सुशांत की यादों को सहेजने हेतु उनके फैंस व परिजनों ने जिस पैतृक आवास (पटना) में रहकर सुशांत ने वर्ग 10वीं तक की पढ़ाई की थी उसे सुशांत स्मारक बना कर युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में मदद करने की ठान ली है। सुशांत स्मारक में उसका पसंदीदा टेलीस्कोप तथा स्पोर्ट्स एवं फिल्म से संबंधित किताबें, फ्लाइट सिमुलेटर सहित व्यक्तिगत चीजें भी देखने को मिलेगी। इसको विस्तार देने हेतु सुशांत फाउंडेशन बनाने की बात सोची जा रही है।

चलते-चलते यह भी कि सुशांत सरीखे प्रतिभावान कोसी के बेटे की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग  पूर्णियावासी राकेश सिंह, मेयर पति प्रताप सिंह, पूर्णिया के सांसद रहे पप्पू यादव और साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी  बराबर करते रहे हैं।

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एक सप्ताह (10 से 16 जुलाई तक) के लिए मधेपुरा जिले में पूर्णत: लॉकडाउन रहेगा- डीएम

कोरोना के कहर व कोहराम की गंभीरता के मद्देनजर जिले के डीएम नवदीप शुक्ला (भाप्रसे) सह अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मधेपुरा ने “The Bihar Epidemic Diseases, covid-19 Regulation 2020” की धारा 17 एवं 18 तथा गृह विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक- 3472 दिनांक 7-7-2020 के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन जन समुदाय के जीवन व स्वास्थ्य की रक्षा के निमित्त संपूर्ण मधेपुरा जिला में 10-7-2020 से 16-7-2020 तक के लिए पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी है।

जिला प्रशासन ने जहां उपरोक्त अवधि के दौरान खाद्यान्न /किराना की दुकानों को प्रातः 6:00 से 10:00 तक एवं संध्या 4:00 बजे से 7:00 बजे तक खोलने का आदेश जारी किया है वहीं सब्जी व फल की दुकानों को केवल सवेरे 6:00 बजे से 10:00 बजे तक ही खोलने का आदेश दिया गया है।

इन सेवाओं के अतिरिक्त अन्य आवश्यक सेवाएं पूर्व की भांति प्राप्त सरकारी दिशा निर्देशों के आलोक में जारी रहेंगी। हर परिस्थिति में दुकानदारों एवं खरीदारों को मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

चलते-चलते यह भी कि पेट्रोल पंप, अस्पताल, एलपीजी वितरक एजेंसी (गोदाम सहित) यथावत खोलने की अनुमति रहेगी। बैंक, डाकघर, एटीएम, एलआईसी, प्रेस आदि मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यथावत चलेंगे। इस दौरान निजी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल खोलने की अनुमति रहेगी। विवाह में अधिकतम 50 एवं दाह संस्कार में अधिकतम 20 लोगों के भाग लेने की अनुमति मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रहेगी।

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जिला प्रशासन ने जिलेवासियों को अगले 72 घंटों के लिए भारी वर्षापात एवं वज्रपात की चेतावनी दी

मधेपुरा जिले के डीएम नवदीप शुक्ला ने भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत मौसम विभाग केंद्र पटना (बिहार) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के आलोक में जिले वासियों को मौसम की वर्तमान गतिविधि एवं संख्यात्मक मौसम मॉडल के आकलन के अनुसार राज्य के नेपाल से सटे जिलों में 9 जुलाई से अगले 72 घंटों के दौरान अत्यंत भारी वर्षापात एवं वज्रपात से जानमाल की सुरक्षा हेतु सावधानी बरतने की सलाह दी है।

जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला ने अत्यंत भारी वज्रपात की संभावना के मद्देनजर बिजली चमकने या घड़घड़ाहट की आवाज सुनाई देने पर आम-आवाम व विशेषकर किसानों को पक्के घर में शरण लेने की सलाह दी है। डीएम शुक्ला ने कहा कि निचले स्थानों में जलजमाव के साथ-साथ यातायात व बिजली सेवा बाधित होने की संभावना भी हो सकती है। नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

चलते-चलते यह भी कि भारी वर्षापात एवं वज्रपात से दरभंगा-मधुबनी-मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर-सारण-सुपौल-सहरसा-मधेपुरा, पूर्णिया-कटिहार-किशनगंज आदि जिले के सर्वाधिक प्रभावित होने की संभावना है। जिलाधिकारी ने अनुमंडल के प्रखंड स्तरीय सभी पदाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को सचेत रहने व मुस्तैदी बरतने को कहा है। जिले के नागरिकों को उचित सावधानी एवं सुरक्षा के सभी उपाय बरतने की सलाह दी जाती है।

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है कोई जिसे कोरोना ने नहीं छुआ

हिन्दू-मुस्लिम, सिख-इसाई, जैन-पारसी… आदि धरती पर किसी भी धर्म को मानने वाला बच्चा, बूढा, नौजवान या महिला ही क्यों न हो, सभी कोरोना के कहर और कोहराम से किसी ना किसी रूप में कमोबेश प्रभावित अवश्य हुआ है। धरती पर विरले ही कोई होगा जो किसी ना किसी रूप में प्रभावित ना हुआ हो।

जब संसार के सभी यातायात के साधन बंद कर दिए गए- ट्रेन से लेकर प्लेन तक और मोटर से लेकर मेट्रो तक- तो फिर बचा कौन होगा जो प्रभावित ना हुआ होगा कोरोना से। मेडिकल में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों की परीक्षा समाप्त हो गई। वे किर्गिस्तान के शहरों से घर वापसी की गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं, कोई उसके दर्द भरी आवाज को सुनने वाला नहीं।

कोरोना के चलते श्रद्धालु भक्तों को अपने इष्टदेव से मिलने नहीं दिया जाता। पटना व देवघर का शिव मंदिर तत्काल एक-एक महीना के लिए बंद कर दिया गया तो मधेपुरा जिला के सिंहेश्वर मंदिर में दो महीने के लिए ताला लगा दिया गया है। कोरोना ने ऐसा दहशत फैला दिया है कि जान-पहचान के करीबी लोगों को भी देख कर एक दूसरे को चाय पीने को नहीं कहता है। कुछ तो कोरोना सुनकर ही खुदकुशी कर लेता है जबकि रिपोर्ट आता है कि कोरोना नेगेटिव है। बच्चे माता-पिता से तथा भक्त भगवान से दूर होते जा रहे हैं तो बचा कौन जो कोरोना से अछूता है ?

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गुरु पूर्णिमा आषाढ़ की पूर्णिमा को कही जाती है

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को कही जाती है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है। गुरु पूर्णिमा के दिन से 4 महीने तक साधु संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। इस बार 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा हो रही है।

बता दें कि इस बार समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता के शीर्ष पर बैठे लोग अलग-अलग तरीके से अपने-अपने गुरु को याद कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण गुरुओं की वंदना भी ऑनलाइन होने लगी है। यह भी जानिए कि आज के दिन ही चारों वेद व महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म हुआ था। वेदों की रचना करने के कारण इन्हें वेदव्यास भी कहा जाता है। वेदव्यास के सम्मान में ही आषाढ़ पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा कही जाती है।

चलते-चलते बता दें कि प्रत्येक वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन मंदिरों में भारी भीड़ होती थी, परंतु इस बार तो कोरोना के कारण मंदिरों में खासकर बड़े-बड़े मंदिरों में तो ताला लटका हुआ है। जो भी हो, जीवन में हम जो कुछ भी प्राप्त करते हैं कहीं ना कहीं गुरु की कृपा का ही फल है। यूं तो गुरु कोई भी हो सकता है माता-पिता, भाई-दोस्त आदि जिनका नाम सुनते ही हृदय में सम्मान का भाव जग जाए। सम्मान का भाव प्रकट करने के लिए गुरु पूर्णिमा का दिन ही गुरु के लिए नहीं है बल्कि वर्ष के 365 दिनों में से प्रत्येक दिन गुरु हमारे लिए वंदनीय होते हैं।

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मधेपुरा में 2 महीने एवं पटना में 4 अगस्त तक बंद रहेगा भोलेनाथ का मंदिर

बिहार सरकार ने सूबे की राजधानी में अवस्थित भोलेनाथ शिव के मंदिर को कोरोना के कोहराम एवं संक्रमण के तेजी से बढ़ते कदम और श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते 4 अगस्त तक के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया है।

बता दें कि आषाढ़ के गुरु पूर्णिमा के बाद से यानि 6 जुलाई से प्रारंभ हो रहे सावन को ध्यान में रखकर सूबे की सरकार द्वारा यह आदेश दिया गया है। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर एहतियाती कदम उठाया गया है। यह भी जानिए कि मंदिर के बाहर सुरक्षा को लेकर पुलिस बल भी तैनात रहने की व्यवस्था की गई है।

यह भी बता दें कि कोरोना संक्रमण के चलते सिंहेश्वर के शिव मंदिर को एक बार फिर से जुलाई एवं अगस्त यानि 2 माह के लिए बंद कर दिया गया है। श्रावणी मेला के कारण डीएम नवदीप शुक्ला ने न्यास के सदस्यों एवं विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों के साथ न्यास समिति के सभाकक्ष में बैठक की। अपार भीड़ को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमानुसार चलाना अत्यंत दुरुह कार्य मानकर मंदिर परिसर को बंद किए जाने का फैसला लिया गया। डीएम की सहमति के साथ 2 महीने के लिए मंदिर बंद किया गया और सुरक्षा को लेकर स्थानीय थाना को जिम्मेवारी दी गई।

 

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