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भारत में विगत 24 घंटे में मिले 95 हजार कोरोना मरीज और अब तक मौत को गले लगा चुके हैं 75 हजार

बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में है। जानिए कि महाराष्ट्र में 2 लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमितों का इलाज वहां के अस्पतालों में चल रहा है। दूसरे और तीसरे नंबर पर आता है तमिलनाडु और दिल्ली….. चौथे व पांचवें नंबर पर क्रमशः गुजरात एवं पश्चिम बंगाल आता है। इन सभी पांचों राज्यों में कोरोना पॉजिटिवों का सर्वाधिक केस है या यह कहें कि एक्टिव कोरोना संक्रमितों के मामले में विश्व में भारत का दूसरा स्थान है यानि भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रभावित देश है। मौत के मामले में अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत का ही नंबर आता है।

चलते-चलते कोरोना अपडेट की जानकारी ले लीजिए- भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 44 लाख के पार पहुंच गई है। देश में विगत 24 घंटे में 95 हजार 735 नए मामले का रिकार्ड सामने आया है जबकि 7 सितंबर को 90 हजार 802 मामले दर्ज हुए थे। देश में 2 सितंबर से लगातार प्रतिदिन 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। अबतक भारत में कोरोना के कारण काल के गाल में जाने वालों की संख्या 75000 के पार पहुंच गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजे आंकड़े के अनुसार भारत में कोरोना  संक्रमितों की कुल संख्या 44 लाख 62 हजार हो गई है जिसमें एक्टिव केस की संख्या 9 लाख 19 हजार ही है। अब तक 34 लाख 71 हजार भारतीय ठीक हो चुके हैं। आईसीएमआर के अनुसार कुल 5 करोड़ 40 लाख सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं जिसमें 11 लाख की टेस्टिंग कल की गई है।

अंत में यह कि मृत्यु दर (1.68%) एवं एक्टिव केस रेट में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जबकि रिकवरी रेट (78%) लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावे आईजीआईएमएस द्वारा कोरोना से ठीक हुए मरीजों को फिजियोथेरेपी लाभ प्राप्त करने हेतु सलाह मुफ्त में दी जाएगी।

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डीएम द्वारा दिए गए चेक के साथ-साथ राजकीय शिक्षक सम्मान प्राप्त किया एचएम मोहम्मद ताहिर हुसैन ने

मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल के रहटा गांव स्थित ‘मदरसा’ के एचएम मोहम्मद ताहिर हुसैन को जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने राजकीय शिक्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया। डीएम शुक्ला ने मोहम्मद हुसैन को पुरस्कार स्वरूप ₹15000 का चेक, प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर पुरस्कृत किया। साथ ही डीएम ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि सरकार द्वारा मोहम्मद ताहिर हुसैन को इसके लिए चुना गया है। इनके चयन से जिले में उत्साह का माहौल बना हुआ है।

मौके पर डीपीओ (स्थापना) केएन सादा सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) ने कहा- शिक्षक का पद समाज में सबसे ऊपर है। शिक्षक ही समाज को प्रगतिशील बनाता है। ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने वाले इंसान के पीछे परिवार के साथ-साथ शिक्षक का ही हाथ होता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहां पूरे बिहार में राजकीय शिक्षक सम्मान के लिए 20 शिक्षकों का चयन किया गया वहीं राष्ट्रीय सम्मान के लिए 2 शिक्षकों- एक सारण जिले के अखिलेश्वर पाठक एवं दूसरे बेगूसराय जिला के संत कुमार सहनी को चुना गया। कोरोना के कारण राष्ट्रीय पुरस्कार राष्ट्रपति ने वेबिनार के माध्यम से तथा राजकीय पुरस्कार संबंधित जिला के जिला पदाधिकारी के माध्यम से शिक्षकों को प्रदान किया गया। समाजसेवी-साहित्यकार एवं फिजिक्स के लोकप्रिय शिक्षक रह चुके प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने  मोहम्मद ताहिर हुसैन को हृदय से साधुवाद देते हुए कहा कि डीएम नवदीप शुक्ला द्वारा आयोजित इस सम्मान कार्यक्रम से जिले के शिक्षकों का उत्साह वर्धन होता रहेगा।

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समर्पित शिक्षकों के सम्मान में आज भी कमी नहीं है- डॉ.मधेपुरी

आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मधेपुरा में फिजिक्स के ख्याति प्राप्त शिक्षक के रूप में अपनी पहचान कायम करने वाले प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने निज आवास ‘वृंदावन’ पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षक व पूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती मनाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों एवं शिक्षकों से यही कहा- एक समर्पित शिक्षक का जीवन उस दीपक की तरह होता है जो स्वयं को जलाकर औरों के रास्ते में उजाला फैलाता है।

वैसे ही शिक्षकों में शुमार किए जाते हैं- डॉ.एस राधाकृष्णन, डाॅ.जाकिर हुसैन और डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम जो राष्ट्रपति बनने से पहले शिक्षक रहते हुए ही भारत रत्न सरीखे सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए हैं। सारा देश आज के दिन वैसे समर्पित शिक्षकों के साथ-साथ प्रथम गुरु “मां” को भी सलाम करता है, याद करता है।

स्थानीय कई स्कूलों द्वारा आमंत्रित किए जाने के बावजूद कोरोना के कहर के चलते उन स्कूलों में नहीं जाकर डॉ.मधेपुरी ने डॉ.राधाकृष्णन के जन्मदिन (5 सितंबर) को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया और छात्रों से यही कहा कि आज के दिन भारत के महामहिम राष्ट्रपति देश के गिने-चुने समर्पित शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान तथा राज्य के माननीय मुख्यमंत्री कुछ चयनित शिक्षकों को राजकीय सम्मान से सम्मानित करते हैं।

डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन के अंत में यही कहा कि वर्तमान गिरावट के दौड़ में भी अच्छे-सच्चे व समर्पित शिक्षकों के सम्मान और मर्यादा में कमी नहीं आई है। आज भी विश्व के कई देशों में शिक्षक का सम्मान विधायक, सांसद, मंत्री या प्रधानमंत्री से भी ऊंचा है, क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माता ही नहीं बल्कि राष्ट्र का रक्षक, रहवर और रखवाला भी होता है। देश के सर्वाधिक सचेतन लोगों की चाहत है कि महामहिम राष्ट्रपति का पद वैसे समर्पित व ख्यातिप्राप्त शिक्षकों से भरा जाए जो अपना जीवन व्यक्तिगत नहीं रखा हो बल्कि छात्रहित के लिए सार्वजनिक कर दिया हो।

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कोसी प्रमंडल का सुपौल जिला बना धूम्रपान मुक्त

भारत में धूम्रपान के रूप में तेजी से तंबाकू का सेवन किया जा रहा है। धूम्रपान से फेफड़े के कैंसर की बीमारी होती है। अमीरों की तुलना में गरीब तथा महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक धूम्रपान करते हैं। जबकि तंबाकू का सेवन हर तरह से खतरनाक है। दुनिया में प्रतिवर्ष 70 लाख तथा भारत में  प्रतिदिन लगभग 3 हजार मौत तंबाकू सेवन की वजह से होती है।

यह भी बता दें कि धूम्रपान से हृदय गति और रक्तचाप बढ़ जाता है। दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ जाता है। तंबाकू और धूम्रपान मुंह की नाजुक मांस पेशियों को नुकसान पहुंचाता है जिससे खाने में स्वाद नहीं लगता है। अधिक धूम्रपान से सांस लेने में कठिनाई होती है एवं फेफड़े खराब हो जाते हैं और दस प्रकार के कैंसर से घिर जाते हैं लोग।

डब्ल्यूएचओ के बैनर तले विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर धूम्रपान एवं तंबाकू सेवन नहीं करने का हर कोई को संकल्प कराया जाता है। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी अपने लिए नहीं तो कम से कम अपनों के लिए ही इस बुरी आदत को छोड़ने का संकल्प प्रत्येक जिले में दिलाया जाता है। कोसी प्रमंडल के सुपौल जिले के डीएम महेंद्र कुमार ने समारोह आयोजित कर सुपौल जिला को धूम्रपान मुक्त घोषित किया। इस समारोह में डीएम के अलावे सिविल सर्जन डॉ.कृष्ण मोहन प्रसाद सहित जिले के समस्त संबंधित अधिकारीगण व कर्मियों ने भाग लिया। डीएम महेंद्र कुमार ने कहा कि इसके लिए विगत कई वर्षों से प्रयास जारी था जिसके लिए सुपौल जिले वासियों के संकल्प के साथ-साथ नोडल पदाधिकारी व संबंधित पदाधिकारी के कार्यों की सराहना अवश्य होनी चाहिए।

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पंचतत्व में लीन हुए पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी

भारत के 13वें राष्ट्रपति थे भारत रत्न प्रणब मुखर्जी और उनका कार्यकाल रहा था 2012 से 2017 तक। अपने कार्यकाल को बेहतर तरीके से पूरा करके फिलहाल वे दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग में रह रहे थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों व दिग्गजों ने राजाजी मार्ग स्थित उनके निवास पर उनके पार्थिक शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। दिवंगत प्रणब मुखर्जी को सभी वर्गों का सम्मान प्राप्त होता रहा। वे आम लोगों के बीच रहना पसंद करते थे। अंतिम यात्रा भी आम लोग की तरह ही संपन्न हुई। एक सजे हुए एंबुलेंस में उनके  पार्थिव शरीर को लोधी  विद्युत शवदाह गृह में ले जाकर पुत्र अभिजीत मुखर्जी द्वारा मुखाग्नि देने के बाद संस्कारित किया गया।

बता दें कि राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक रहे प्रणब मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसंबर 1935 को जन्म ग्रहण किया था। राजनीति शास्त्र से एमए प्रणब मुखर्जी लगभग 6 वर्षों तक विद्यानगर कॉलेज में प्राध्यापक रहने के बाद 1969 में राज्यसभा के सदस्य बने और 1982 में केंद्रीय वित्त मंत्री, 1995 में विदेश मंत्री और 2004 में रक्षा मंत्री बने। उन्हें पद्म विभूषण और फिर भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

चलते-चलते यह जानिए कि जिस कोरोना के कहर ने दुनिया में कोहराम मचा रखा है उसी कोरोना में 10 अगस्त 2020 को प्रणब मुखर्जी को अपनी चपेट में ले लिया और 31 अगस्त 2020 को उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में दिल्ली के सैन्य अस्पताल में अंतिम सांस ली… और दुनिया को अलविदा कह दिया।

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जीवन जो कुछ नहीं दे सका, मौत उसे वह दे जाती है- डॉ.मधेपुरी

वर्ष 2009 से अब तक यानि 11 वर्षों तक सुशांत सिंह राजपूत फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड (मुंबई) में कठिन परिश्रम करने के बावजूद एक भी फिल्म फेयर अवार्ड नहीं पा सका, जबकि सुशांत के लाखों चाहने वाले आज भी हैं।

बता दें कि अवार्ड और पुरस्कार के नाम पर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को वर्ष 2014 में बेस्ट मेल डेब्यू के लिए सर्वप्रथम प्रोड्यूसर गिल्ड फिल्म अवार्ड और बाद में स्क्रीन अवार्ड से नवाजा गया था।

यह भी जानिए कि 3 वर्ष बीतने के बाद 2017 में फिल्म एम एस धोनी यानि भारतीय क्रिकेट कप्तान धोनी का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए सुशांत सिंह राजपूत को बेस्ट ऐक्टर का स्क्रीन अवार्ड तथा उसी वर्ष इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबोर्न में बेस्ट एक्टर अवार्ड से नवाजा गया था।

बता दें कि दुनिया को हम कब अलविदा कहेंगे, यह कोई नहीं जानता। वह प्रतिभा संपन्न सुशांत 14 जून 2020 को दुनिया से चला जाएगा, इसे कोई नहीं जानता था। परंतु बॉलीवुड सितारों की तरह सुशांत सिंह राजपूत ने भी एक सपना देखा था-” दादा साहब फाल्के पुरस्कार” पाने का, जो उसके मरणोपरांत पूरा होने जा रहा है। सचमुच, सच्चे दिल से देखा जाए गया सपना पूरा होने में कायनात की पूरी मदद मिल जाती है। जानिए कि दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स 2021 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को मरणोपरांत दिया जाएगा। अवार्ड कमेटी ने अपनी ऑफिशल इंस्टाग्राम पेज पर घोषित कर इसकी जानकारी दुनिया को दी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 14 जून को मुंबई स्थित बांद्रा वाले अपार्टमेंट में बिहार का बेटा, पूर्णिया जिला निवासी एक्टर सुशांत को का शव मिला था। पिता ने पटना में एक एफआईआर दर्ज कराया। पुलिस ने केस की जांच शुरू की और लगे हाथ दूसरे ही दिन पूर्णिया के पूर्व लोकप्रिय सांसद पप्पू यादव और मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश सरकार से इस केस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। फिलहाल सीबीआई द्वारा की जा रही जांच प्रगति पर है।

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संवेदनशील जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विदाई समारोह का निमंत्रण किया अस्वीकार

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन ने संवेदनशील जस्टिस अरुण मिश्रा को पत्र भेजकर कहा कि बार एसोसिएशन उनके अवकाश ग्रहण करने से पहले 2 सितंबर को उनके सम्मान में विदाई समारोह आयोजित करना चाहता है। उस विदाई समारोह में भाग लेने हेतु श्रीमान द्वारा एसोसिएशन के निमंत्रण को स्वीकार करने की महती कृपा की जाय।

जानिये कि कोरोना के इस कहर काल में कोविड-19 पेनेडेमिक से जहां दुनिया त्राहिमाम कर रही है वहीं सुप्रीम कोर्ट के संवेदनशील जस्टिस श्री मिश्रा ने एसोसिएशन को पत्र के माध्यम से यही कहा कि मेरी अंतरात्मा मुझे किसी भी ऐसे विदाई समारोह में जाने की स्वीकृति नहीं देती।

सर्वाधिक संवेदनशील न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने पत्रोत्तर के माध्यम से एसोसिएशन से बार-बार क्षमा मांगते हुए यही कहा कि जब इस कोरोना के कहर एवं कोहराम से सभी लोग निकल जाएंगे और परिस्थिति नॉर्मल हो जाएगी तब मैं निश्चय ही आपके एसोसिएशन के सदस्यों के बीच आकर गर्मजोशी के साथ आपके आमंत्रण के लिए सम्मान प्रकट कर लूंगा।

चलते-चलते यह भी जानिए कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे अति संवेदनशील जस्टिस अरुण मिश्रा के ऐसे सशक्त प्रेरणादायी विचार देश के समस्त समझ वाले एवं संवेदनशील लोगों का आये दिन मार्गदर्शन करता रहेगा। संवेदनशील न्यायमूर्ति के प्रति गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने संपूर्ण संवेदना के साथ कृतज्ञता ज्ञापित की है।

 

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अनलॉक- 4 यानि 1 सितंबर से क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद ?

कोरोना के कहर और कोहराम के दरमियान ट्रेन से लेकर प्लेन तक को बंद करना पड़ा तथा सिनेमा हॉल से लेकर मॉल तक में ताला लटका रहा। कोरोना संक्रमण इतना लंबा चलेगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था। स्कूल-कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक में पढ़ाई से लेकर परीक्षा सब कुछ बंद-बंद ही रहा।

बता दें कि 1 सितंबर से पूरे देश में अनलॉक का चौथा चरण शुरू होने जा रहा है जबकि बिहार राज्य में 6 सितंबर तक लॉकडाउन घोषित है। जानिए कि भारत में अब तक कोरोना संक्रमितों की संख्या लगभग 35 लाख और बिहार में 1 लाख 32 हजार  पार कर चुकी है। पूरे देश में इस खतरनाक कोरोना वायरस से अब तक 62 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

अनलॉक के चौथे चरण में 7 सितंबर से मेट्रो सेवा जो 22 मार्च से ही दिल्ली एवं एनसीआर में रुकी हुई थी उसे चालू की जा सकती है लेकिन केंद्र सरकार के अगले आदेश (तत्काल 30 सितंबर) तक स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। मेट्रो में अब संपर्क रहित टिकटिंग सिस्टम लागू होगा और टोकन के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह भी कि कुछ क्षेत्र विशेष में यानि कर्नाटक हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में राहत के लिए सिनेमा हॉल खोलने की अनुमति दी जा सकती है। साथ ही रेस्तरां में शराब की बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जा सकता है।

यह भी कि घरेलू उड़ानों को कोलकाता में उतरने की स्वीकृति दी जा सकती है जबकि मुंबई में लोकल ट्रेन नहीं चलेगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पश्चिम बंगाल में सप्ताह में दो दिन पूर्ण लॉकडाउन रहेगा तथा चेन्नई में इंटर-स्टेट एवं इंटर-डिस्ट्रिक्ट मूवमेंट के लिए ई-पास अनिवार्य होगा।

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लेखक राजेंद्र यादव ने ही पहली बार दलित साहित्य पर गोष्ठी कराई थी

लेखक राजेंद्र यादव और ‘हंस’ की एक सिक्के के दो पहलू जैसे हैं। जीवन के 57वें बसंत पार करने के बाद उन्होंने हंस का प्रकाशन शुरू किया था। इस उम्र में प्राय: साहित्यकार सुस्त पड़ जाते हैं, परंतु राजेंद्र यादव ने जो समय जो राह इस उम्र में पकड़ी वह उनके जीवन का सबसे उर्वर समय बन गया और उन्होंने हिन्दी साहित्य और विमर्श को बिल्कुल अलग ही दिशा दे दी तथा हिन्दी में दलित साहित्य को बढ़ाने का काम किया।

ये बातें डॉ.मधेपुरी मार्ग पर अवस्थित भारतीय जन लेखक संघ के केंद्रीय कार्यालय के महासचिव महेंद्र नारायण पंकज ने 28 अगस्त को राजेंद्र यादव के जन्मदिन पर ऑनलाइन जयंती मनाने के क्रम में कही।

इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार का डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने श्रद्धा निवेदित करते हुए लेखक राजेंद्र यादव की हंस पत्रिका के बाबत यही कहा कि हंस के पुनर्प्रकाशन के बाद उन्होंने हंस को ऐसे मंच का रूप दिया जिस पर कई नए महिला व पुरुष कहानीकार भी सामने आए, जिन्हें दुनिया जानती तक नहीं थी। उनका दुस्साहस कहिए कि तमाम विवादों के बावजूद भी उन्होंने नए लेखक या लेखिकाओं को मौका देते चले गए।

मौके पर बीजेएलएस मधेपुरा जिला सचिव  डॉ.गजेंद्र नारायण यादव ने समापन करते हुए यही कहा कि उन दिनों पुरातन मानसिकता के लोगों ने हंस की तीखी आलोचना की और कुंठित वक्तव्य भी दिए थे, परंतु राजेंद्र यादव कभी झुके नहीं बल्कि उस उम्र में भी वे अपनी चाल चलते रहे। अंत में साहित्यकार द्विजराज ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

 

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मानवता की सेवा ही ईश्वरीय प्रार्थना है- डॉ.मधेपुरी

मधेपुरा अनुमंडल में 27 अगस्त की संध्या में नए एसडीएम नीरज कुमार ने पूर्व एसडीओ वृंदालाल से पदभार ग्रहण किया। कोरोना के कारण विदाई अति संक्षिप्त व सादे समारोह के रूप में किया गया। गायक बाल्मीकि की टीम एवं प्रखर गायिका शशी प्रभा के संध्या भजन में विदाई गीत के साथ समारोह संपन्न हुआ।

इस अवसर पर डीडीसी विनोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में मुख्य रूप से एडीएम उपेन्द्र कुमार व एडीएम शिवकुमार शैव के साथ-साथ एसडीपीओ वसी अहमद एवं सभी बीडीओ, सीओ की उपस्थिति में बारी-बारी से सबों ने उद्गार व्यक्त किया। सबों ने वृंदालाल के काम करने के तरीकों की चर्चाएं की और वर्तमान एसडीओ नीरज कुमार को सहयोग एवं अच्छे कामों में समर्थन देने की बातें कही।

Farewell to outgoing SDM Shri Vrindalal.
Farewell to outgoing SDM Shri Vrindalal.

मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत द्वारा तत्कालीन बंगाल प्रेसिडेंसी में आपका यह मधेपुरा 3 सितंबर 1845 में अनुमंडल बनाया गया था। उसी मधेपुरा अनुमंडल के निवर्तमान एसडीएम श्री वृंदालाल की विदाई और वर्तमान एसडीएम श्री नीरज कुमार के स्वागत समारोह में डॉ.मधेपुुरी ने यही कहा- वही प्रशासक जनता के दिल में जगह बना पाता है जो मानवता की सेवा को ही ईश्वरीय प्रार्थना मानकर चलता है।

डॉ.मधेपुरी ने वृंदालाल की संवेदनशीलता के कई उदाहरण भी दिए तथा नीरज कुमार नव पदस्थापित एसडीएम को आश्वस्त भी किया कि मधेपुरा की जनता सर्वाधिक संवेदनशील है। आप अपनी संवेदना से दिल में जगह बना लेंगे तो कभी प्रशासनिक कठिनाइयों से आपकी मुलाकात नहीं होगी। सदर बीडीओ आर्य गौतम की देख-रेख एवं कबड्डी के जिला सचिव अरुण कुमार के मंच संचालन से समारोह झमाझम बारिश के बावजूद भी सरस व सफल रहा। प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष किशोर कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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