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डोकलाम पर भारत की कूटनीतिक विजय

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीनों से डोकलाम में चल रहे विवाद को हल करने की दिशा में अहम सहमति बनी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देश डोकलाम से सेना हटाने को तैयार हो गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया, “हाल के हफ्तों में डोकलाम को लेकर भारत और चीन ने कूटनीतिक बातचीत जारी रखी है। इस बातचीत में हमने एक दूसरे की चिंताओं और हितों पर बात की। इस आधार पर डोकलाम पर जारी विवाद को लेकर हमने सीमा पर सेना हटाने का फैसला किया है और इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है।”

 

हालांकि चीन यहां भी अपनी चालबाजी से बाज नहीं आया। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी जीत के रूप में पेश किया। उसके प्रवक्ता के मुताबिक भारतीय सैनिक अपने उपकरणों समेत अपनी सीमा में लौट गए हैं, जबकि चीनी पक्ष डोकलाम में अपनी गश्त जारी रखे हुए है। दूसरी ओर जीत-हार के दावों से अलग कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए भारत ने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को अपने हितों-चिंताओं और रुख से अवगत कराने में सफल रहे हैं। जहां तक सिर्फ भारतीय सेना की वापसी का प्रश्न है, ये सोचने का विषय है कि भारत के एकतरफा पीछे हट जाने के लिए चीन से सहमति की भला जरूरत ही क्या थी।

 

बहरहाल, चीन चाहे जो कहे, इसमें कोई दो राय नहीं कि डोकलाम पर भारत ने कूटनीतिक विजय पाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर चीन दौरे के पहले इस विवाद का सुलझना विशेष अर्थ रखता है। चीन लाख कोशिशों के बावजूद भारत और भूटान को अलग-थलग करने में विफल रहा। बड़े देशों में किसी ने उसके तर्क पर भरोसा नहीं जताया। उसके दुष्प्रचार, धमकियों और मनोवैज्ञानिक युद्ध का विश्व भर में गलत संदेश गया वो अलग। दूसरी ओर भारत लगातार मुद्दे के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीके से हल पर जोर देता रहा। कहने की जरूरत नहीं कि अगर इस समस्या का समाधान अभी नहीं निकलता तो प्रधानमंत्री मोदी शायद ही ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेते और अगर ऐसा होता तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चीन की और किरकिरी होती।

 

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सर्वोच्च अदालत ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया

भारत के लिए बड़ा दिन। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर। मुस्लिम महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत। जी हां, देश के सबसे जटिल सामाजिक मुद्दों में से एक तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया। पांच में से तीन जजों जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस यूयू ललित ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। वहीं चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने छह महीने के लिए एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाने और तमाम राजनीतिक दलों को साथ बैठकर कानून बनाने की सलाह दी।

बहरहाल, पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 395 पेज के अपने आदेश में कहा कि पीठ तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को 3-2 के बहुमत से खारिज करती है। कोर्ट ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है, जबकि तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन करता है। यह प्रथा बिना कोई मौका दिए शादी को खत्म कर देती है। कोर्ट ने मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर लगे बैन का जिक्र किया और पूछा कि भारत इससे आजाद क्यों नहीं हो सकता?

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगाते हुए केन्द्र सरकार से कहा कि वह तीन तलाक पर कानून बनाए। इस अवधि में देश भर में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा। सर्वोच्च अदालत ने उम्मीद जताई कि राजनीतिक दलों को विश्वास में लेते हुए केन्द्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिन्ताओं का ख्याल रखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तब भी तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा।

बता दें कि इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 22 अगस्त का दिन तय किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है। ये गैर-जरूरी है। कोर्ट ने सवाल किया था कि जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है, वह कानून के तहत कैसे वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया था कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है?

चलते चलते ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का साधुवाद। ऐसे फैसलों के कारण ही अदालत के प्रति लोगों की आस्था अब तक बनी हुई है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप  

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दूसरों के कुकर्म ढोने के लिए नहीं मिला था जनादेश – नीतीश

जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी के खुला अधिवेशन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आक्रामक तेवर में दिखे। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी से निर्णायक दूरी बना चुके शरद यादव को पार्टी तोड़ने की चुनौती देते हुए बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनादेश बिहार में न्याय के साथ विकास के लिए था, न कि पिछलग्गू बनकर दूसरों के कुकर्म ढोने के लिए। उन्हें और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि हमने जनादेश का अपमान किया, वे पहले जनता के मिजाज को जान लें। उन्होंने कहा, ‘बिहार में महागठबंधन को जनादेश भ्रष्टाचार या परिवारवाद का समर्थन करने के लिए नहीं मिला था। महागठबंधन में जो हालात पैदा हो गए थे, उसमें 20 महीने तक सरकार चली, यह बड़ी बात है।’

जनादेश का अपमान किए जाने के आरोप का जवाब देते हुए कहा नीतीश कुमार ने कहा कि महागठबंधन तोड़ने का निर्णय दल का निर्णय है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘कुछ लोग जो बात करते हैं जनादेश की, हम पूछना चाहते हैं कि किस लिए जनादेश मिला था। वह जनादेश बिहार के विकास के लिए मिला था या परिवार के विकास के लिए?’ आगे उन्होंने कहा, ‘आरजेडी के सत्ता में आते ही लोगों के बीच भय पैदा हो गया था। महागठबंधन टूटने के बाद वह भय समाप्त हो गया है। सत्ता से बाहर आते ही आरजेडी के लोग तरह-तरह की हरकतें कर रहे हैं, लेकिन जनता सब देख रही है।’

शरद यादव पर तंज कसते हुए नीतीश ने कहा कि जिनको भाजपा के वोट से राज्यसभा में पहुंचाया, वो आज हमारे खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने चुनौती दी कि शरद जेडीयू को तोड़कर दिखाएं। उन्होंने कहा, पार्टी को तोड़ने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यदि उनके पास बहुमत है तो वे साबित करें। जेडीयू के टूट की किसी प्रकार की खबर को निराधार बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में कहीं टूट नहीं है। सभी विधायक, विधानपरिषद सदस्य, राज्य समितियां साथ हैं।

कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने बिहार में आई बाढ़ को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि इस वर्ष पानी में प्रवाह तेज है। राज्य के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने सभी से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने की अपील की और कहा कि सरकार मदद के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा, आपदा प्रभावित लोगों को राज्य के खजाने पर पहला हक है। इसी के साथ नीतीश ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए केन्द्र सरकार का आभार भी जताया और कहा कि दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार है। अब तेजी से बिहार का विकास होगा।

चलते-चलते बता दें कि पटना में हुई आज की बैठक में कार्यकारिणी की स्वीकृति के बाद जेडीयू के एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा हो गई। जहां तक शरद यादव पर अंतिम निर्णय लेने की बात है, उनकी ‘वरिष्ठता’ और ‘कद’ को देखते हुए पार्टी 27 अगस्त को प्रस्तावित आरजेडी की रैली में उनके शामिल होने तक की प्रतीक्षा कर सकती है। हालांकि नीतीश की बैठक के बरक्स शरद ने भी कल पटना में ‘जन अदालत’ का आयोजन किया, लेकिन अली अनवर, अरुण श्रीवास्तव, रमई राम सरीखे चेहरों के अलावे कोई और बड़ा चेहरा वहां मौजूद नहीं था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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जलमग्न हुआ बिहार, 16 जिलों में हाहाकार

बिहार पर प्रकृति का कहर जारी है। राज्य में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं। 16 जिलों में 1 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी त्रासदी झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 119 तो अन्य स्रोतों से 230 लोगों के मारे जाने की ख़बर है। गुरुवार को पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा के कई नए इलाकों में पानी आने से दहशत फैल गई। मधेपुरा में सर्वाधिक प्रभावित आलमनगर और चौसा प्रखंड के अलावा छह और प्रखंड इसकी चपेट में आ गए। जिले में भलुआही के पास एनएच 106 की सड़क लगभग 25 फीट कट जाने से यातायात ठप हो गया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब बाढ़ का पानी सहरसा जिले में भी फैल गया है। उधर कटिहार के नए इलाकों में सदर प्रखंड के भसना, मनसाही और कोढ़ा प्रखंड के कुछ हिस्सों में भी पानी फैलने लगा है। वहीं पूर्णिया जिले में बायसी अनुमंडल के बाद अब पानी बनमनखी और धमदाहा क्षेत्र में बढ़ रहा है। बनमनखी प्रखंड  की 10 पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। गुरुवार से वहां एनएच 107 पर वाहनों का परिचालन भी बाधित हो गया है। अररिया की हालत तो और भी बदतर है। इस जिले में हताहत लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है और अब तक 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।

इन जिलों के अतिरिक्त सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर भी बाढ़ से बेहाल हैं। मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में अब तक 94 लोगों की मौत हो चुकी है। वैसे गोपालगंज, वैशाली और छपरा में जहां नए इलाके बाढ़ के पानी से घिरे, वहीं कुछ प्रभावित जिलों में पानी के धीरे-धीरे उतरने की ख़बर भी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को गोपालगंज, बगहा, बेतिया, रक्सौल और मोतिहारी के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को तमाम जरूरी निर्देश दिए। बता दें कि बाढ़ प्रभावित तमाम जिलों में एनडीआरएफ की 27 टीमों के 1110 जवान अपनी 114 नौकाओं, एसडीआरएफ की 16 टीमों के 446 जवान 92 नौकाओं और सेना के 630 जवान 70 नौकाओं के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी प्रभावित इलाकों में लगा हुआ है। राहत शिविर बड़े पैमाने पर बनाए गए हैं और इनमें कुल 3.19 लाख लोगों को भोजन कराया जा रहा है। राहत शिविरों के अतिरिक्त 1112 जगहों पर बाढ़ पीड़ितों के लिए कम्यूनिटी किचेन भी शुरू किया गया है। हालांकि बाढ़ ने अपने पांव जिस कदर फैला लिए हैं, उसे देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।

चलते-चलते एक अच्छी ख़बर। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में बाढ़ का तांडव कम होगा। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के मुताबिक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से मिले पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक उत्तर बिहार के जिलों में बारिश के आसार नहीं हैं। हां, कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश जरूर हो सकती है। दक्षिण बिहार के जिलों के बारे में भी यही पूर्वानुमान है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि बाढ़ से जूझ रहे लोग थोड़ी चैन की सांस ले पाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार को बहुत जल्द विशेष पैकेज की सौगात!

राजनीति की उठापटक अपनी जगह है और राज्य व देश का हित अपनी जगह। उसे हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी सोच के कारण महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने का बड़ा निर्णय लिया था। उनके उस निर्णय का सुखद परिणाम अब सामने आने जा रहा है। जी हां, बिहार को बहुत जल्द केन्द्र से 1.25 लाख करोड़ का विशेष पैकेज मिलने जा रहा है। बता दें कि इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन भाजपा की करारी हार के बाद विशेष पैकेज की बात ठंडे बस्ते में चली गई थी।

गौरतलब है कि नीतीश ने पिछले सप्ताह ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें उनके वादे की याद दिलाई थी। दरअसल नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि एनडीए के विरुद्ध जनादेश लेने के बाद फिर उसी के साथ सरकार बनाने के निर्णय को वे तभी सही ठहरा सकते हैं जब बिहारवासियों से किया वादा वे पूरा करें। अपने हाल के निर्णय में उन्होंने राजधर्म और राज्यधर्म को महागठबंधन-धर्म पर तरजीह दी जिसे बिहार को मिलने जा रही इस सौगात से निश्चित रूप से नैतिक बल मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो जिस दिन बिहार में जेडीयू-एनडीए की सरकार बनी, उसी दिन से विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन ये खुशखबरी इतनी जल्दी मिलेगी इसकी उम्मीद नहीं थी। इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार के लिए ये सचमुच राहत की ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि जहां मोदी-नीतीश मिलकर बिहार से किये वादे पर अमल करने जा रहे हैं वहीं जेडीयू एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी शीघ्र करने जा रही है। यही नहीं, जेडीयू केन्द्र सरकार में भी शामिल होगी और ख़बर यह भी है कि नीतीश एनडीए के संयोजक हो सकते हैं। भारतीय राजनीति के दो शिखरपुरुषों के एक साथ आने से बिहार के विकास का हर अवरुद्ध मार्ग खुलेगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्यों और कैसे मनाएं जन्माष्टमी ?

कल जन्माष्टमी है। यानि विष्णु के समस्त अवतारों में पूर्वावतार कहे जाने श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव। समस्त गुणों का आगर होने के साथ-साथ कृष्ण की सबसे अनोखी बात यह है कि उनके भक्त उन्हें जिस रूप में पूजते हैं वे उनके साथ उसी रूप में हो लेते हैं। एकमात्र वही हैं जिन्हें कोई पुत्र के रूप में, कोई सखा के रूप में, कोई सारथि के रूप में, कोई गुरु के रूप में तो कोई प्रेमी और यहां तक कि पति के रूप में चाहता और पूजता है और वो उस भक्त के प्रेम को उसी रूप में स्वीकार कर लेते हैं। यही कारण है कि भक्तों का जैसा तादात्म्य श्रीकृष्ण के साथ है वैसा किन्हीं अन्य देवता के साथ नहीं।

पौराणिक धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी को पापियों से मुक्त करने हेतु श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। उनका अवतरण देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में हुआ और एक मान्यता के मुताबिक यह दिव्य घटना 5 हजार 243 वर्ष पूर्व हुई।

जन्माष्टमी का त्योहार भारत सहित पूरे विश्व में वर्णनातीत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन कहीं रंगों की होली होती है तो कहीं डांडिया का उत्सव, कहीं दही-हांडी फोड़ने की उमंग होती है तो कहीं भगवान कृष्ण की मोहक छवियों की झांकी। मंदिरों की रौनक इस दिन देखते ही बनती है। भगवान कृष्ण को इस दिन विशेष तौर पर सजाए गए झूले पर झुलाया जाता है और साथ ही कृष्ण रासलीलाओँ का आयोजन होता है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत का पालन करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है। बताया जाता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है, लक्ष्मी स्थिर होती है और सारे बिगड़ते काम बन जाते हैं। और हां, याद रखें कि इस दिन आपकी पूजा तभी पूर्ण होगी जब कृष्ण का नाम लेने के साथ ही आप देवकी, वासुदेव, नंद, यशोदा, राधा और लक्ष्मी का नाम भी श्रद्धापूर्वक लें। माना जाता है कि ये सभी कृष्ण के व्यक्तित्व के अनिवार्य अंग हैं और इन सबके बिना न तो उनकी पूजा पूरी होती है और न ही स्वीकार।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

 

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अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस

‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से 12 अगस्त यानि अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। ये संयोग है कि हमारे राष्ट्रीय युवा दिवस की तिथि भी 12 ही है, लेकिन महीना जनवरी है। 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद, जिन्हें विश्व-इतिहास में युवा-शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, का जन्मदिवस है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र-निर्माण की धुरी माना था और जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 दिसंबर 1999 को प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की घोषणा की थी, तब भी उसका उद्देश्य यही बताना था कि युवाओं के बिना कोई भी राष्ट्र अपने विकास का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता।

गौरतलब है कि पिछले साल मनाए गए विश्व युवा दिवस का विषय था – “लक्ष्य 2030: गरीबी उन्मूलन और सतत खपत और उत्पादन हासिल करना।” कहने की जरूरत नहीं कि 2030 तक इस लक्ष्य को तभी हासिल किया जा सकता है जब युवा इसके लिए अग्रणी भूमिका निभाएं। ये अत्यंत दुख व आश्चर्य का विषय है कि आज एक ओर हम मंगल तक पहुंच गए हैं, दूसरी ओर आज भी गरीबी और भूख भारत समेत पूरे विश्व की, खासकर तीसरी दुनिया कहे जाने वाले देशों की, सबसे बड़ी समस्या है। एक अर्थ में यह समस्या वैश्विक आतंकवाद से भी बड़ी है। भूख से लड़े और उससे जीते बिना हम आतंकवाद से क्या पड़ पाएंगे? सच तो यह है कि जिस दिन सबके पेट में रोटी बराबर पहुंचने लग जाएगी उस दिन आतंकवाद की समस्या ही मिट जाएगी।

जिस तरह स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा का निवास होता है, उसी तरह स्वस्थ युवाओं में ही स्वस्थ राष्ट्र और विश्व का बीज पनप सकता है। चाहे स्वास्थ्य शरीर का हो, मन और मस्तिष्क का हो, विचार और संस्कार का हो, या फिर विकास के किसी भी क्षेत्र और दुनिया के किसी भी कार्य-व्यापार का हो। भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सत्य तो भलीभांति जानते हैं। उनका शायद ही कोई भाषण हो, जिसमें वे युवाओं का आह्वान न करते हों और देश के सर्वांगीण विकास के लिए उनकी सहभागिता को अनिवार्य न बताते हों।

‘मधेपुरा अबतक’ सभी युवाओं का आह्वान करता है और कहना चाहता है कि वे जहां हैं, जिस क्षेत्र में हैं, वहां से इस देश के निमित्त अपना योगदान दे सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे खेतों में काम कर रहे हैं या विज्ञान की प्रयोगशाला में बैठे हैं, देश की सीमा की रखवाली कर रहे हैं या खेल के मैदान में पसीना बहा रहा रहे हैं, कोई साहित्य, चित्र या प्रतिमा गढ़ रहे हैं या आने वाले चुनावों में खड़े होने की तैयारी कर रहे हैं। वे जहां हैं, वहां अपना सर्वोत्तम दें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप’

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जेडीयू से विदाई की कगार पर शरद यादव

नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने के फैसले के खिलाफ शरद यादव खुलकर सामने आ गए हैं। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष बिहार में महागठबंधन टूटने से नाखुश तो पहले से थे, लेकिन वक्त की नजाकत देख उन्होंने चुप्पी साध रखी थी। पर अब उनकी चुप्पी टूट चुकी है और ‘जो’ कुछ उनके भीतर चल रहा था, ‘वो’ बाहर आ गया है।

गौरतलब है कि शरद यादव इन दिनों तीन दिनों की बिहार यात्रा पर हैं। कल दौरे के पहले दिन पटना पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार पर बिहार की जनता को ‘धोखा’ देने का आरोप लगाया और कहा कि वे यह जानने आए हैं कि जनता की इस पर क्या राय है। साथ ही उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे अब भी महागठबंधन के साथ हैं। शरद यादव के इस रुख के बाद जेडीयू द्वारा उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तयप्राय हो गई है।

बता दें कि अपनी तीन दिनों की यात्रा के दौरान शरद यादव बिहार के सात जिलों – वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा और सहरसा – में दो दर्जन से ज्यादा जगहों पर जाकर जनता से ‘संवाद’ करेंगे। उनकी इस यात्रा को नीतीश कुमार व जेडीयू से उनके औपचारिक अलगाव के तौर पर देखा जा रहा है। कल हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए जुटे लोगों में ज्यादातर आरजेडी के थे और हद तो तब हो गई जब उनके जिन्दाबाद के साथ नीतीश मुर्दाबाद के नारे भी लगे। स्वाभाविक तौर पर जेडीयू ने उनके इस कार्यक्रम से अपने तमाम कार्यकर्ताओं को दूर रहने का कड़ा निर्देश दिया है।

इस बीच बिहार जेडीयू के अध्यक्ष व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि शरद यादव की ये गतिविधियां जारी रहीं तो पार्टी निकट भविष्य में कोई भी निर्णय ले सकती है। बिहार जेडीयू ने उन पर और उनकी यात्रा में साथ दिख रहे रमई राम पर कार्रवाई की अनुशंसा भी कर दी है। इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार किसी बड़े निर्णय पर पहुंच चुके हैं। इसकी झलक तभी देखने को मिल गई थी जब राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव को गुजरात के राज्यसभा चुनाव में नीतीश के निर्णय के खिलाफ जाकर पोलिंग एजेंट बहाल करने और वहां के एकमात्र जेडीयू विधायक का वोट कांग्रेस उम्मीदवार को जाने के कारण निलंबित कर दिया गया था। अरुण श्रीवास्तव शरद के कितने करीबी हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है।

गौर करने की बात की है कि हाल के दिनों में शरद यादव ने कई बार पार्टी लाईन से अलग स्टैंड लिया है। प्रथम दृष्टया किसी मुद्दे पर अलग राय होना गलत भी नहीं। लेकिन आश्चर्य तब होता है जब तेजस्वी के मुद्दे पर महागठबंधन छोड़ने में उन्हें जनता के साथ धोखा दिखता है लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति को ताक पर रख देने में कोई आपत्ति नहीं है। लालू और उनके परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। वो यह भी नहीं देख पा रहे कि पार्टी का एक भी विधायक उनके स्टैंड के साथ नहीं है।

एक बात और, 17 अगस्त को उन्होंने दिल्ली में विपक्षी दलों के सम्मेलन की योजना भी बना रखी है। अगर उन्हें विपक्षी दलों के समर्थन का इतना ही भरोसा है तो वे राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा क्यों नहीं दे देते? डेढ़ दर्जन पार्टियों में से कोई उन्हें चुनकर दुबारा भेज दे सकती है! पर शरद जानते हैं कि ऐसा होना कितना मुश्किल है। ऐसे में कहना गलत न होगा कि उन्होंने अपनी ‘विदाई की पटकथा’ स्वयं लिखी, ताकि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे और उनकी राज्यसभा की सदस्यता बची रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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पति-पत्नी ने शुरू किया था भाई-बहन का त्योहार

यह संसार रिश्तों से बना है और हर रिश्ते की अपनी अहमियत होती है, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता अपने आप में अद्भुत है। यही एक रिश्ता है, जिसकी कोई एक परिभाषा गढ़ पाना मुश्किल है। सोच कर देखिए, अगर आपकी बहन आपसे बड़ी है तो उसमें मां की झलक पाएंगे आप, छोटी है तो बेटी लगेगी वह। दोस्त तो वो हर हाल में है ही। आप जो सुख-दुख कई बार माता-पिता से नहीं बांट पाते वो अपनी बहन से बांट लेते हैं। एक बहन ही है जो आपकी कमियों के लिए आपको डांटती नहीं और अपना ऐसा कोई सुख नहीं जो आपसे बांटती नहीं। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के इसी अटूट प्यार की निशानी है, जिसे सदियों से मनाया जाता रहा है। भाई-बहन के विश्वास को बनाए रखने वाला यह त्योहार श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। लेकिन इसकी शुरुआत कब और क्यों हुई, इसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां हैं। चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

आपको जानकर हैरत होगी कि भाई-बहन के इस त्योहार की शुरुआत पति-पत्नी ने की थी। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी शुचि ने देवताओं की हो रही हार से घबरा कर उनकी विजय के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन अपने पति इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इस रक्षासूत्र से देवताओं की शक्ति बढ़ गई और उन्होंने दानवों पर जीत प्राप्त की। उसी दिन से यह परंपरा शुरू हुई कि आप जिसकी भी रक्षा व उन्नति की इच्छा रखते हैं, उसे रक्षासूत्र यानि राखी बांध सकते हैं, चाहे वह किसी भी रिश्ते में क्यों न हो।

वैसे हमारे इतिहास, खासकर पौराणिक इतिहास में ऐसी कई कहानियां दर्ज हैं जो रक्षाबंधन या राखी के महत्व को दर्शाती हैं। इनमें एक कहानी महाभारत काल से भी जुड़ी है। इस कहानी के अनुसार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध अपने चक्र से किया था। शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस लौटा तब उसे पुन: धारण करने के क्रम में कृष्ण की उंगली थोड़ी कट गई। उंगली से रक्त बहता देख पांडवों की पत्नी द्रौपदी से रहा नहीं गया और उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर कृष्ण की उंगली में बांध दिया। इस पर भावुक होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि वे आजीवन उनकी साड़ी की लाज रखेंगे। आगे चलकर दु:शासन ने जब द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा तो उन्होंने पूरी तत्परता से अपना कहा पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी का ताल्लुक हमारे मध्यकालीन इतिहास से है। यह कहानी रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं से संबंधित है और उस दौर को दर्शाती है जब राजपूत शासकों और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा थीं। राजा की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया। अपने राज्य व प्रजा की रक्षा की खातिर चिन्तित रानी ने हुमायूं से मदद मांगी। उन्होंने हुमायूं को एक राखी भेजी और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। हुमायूं ने उस राखी की मर्यादा रखी और रानी को बहन का दर्जा देते हुए उनके राज्य को सुरक्षित कर अपना दायित्व पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी बाकी कहानियां फिर कभी। फिलहाल हमें इजाजत दें और हमारी मंगलकामनाएं स्वीकार करें। शुभ रक्षाबंधन।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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भारत ने जीत ली लंका

भारत ने कोलंबो टेस्ट मैच में श्रीलंका को पारी और 53 रन से हराकर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज अपने नाम कर ली, जबकि अभी सीरीज का एक टेस्ट खेला जाना बाकी है। भारत की इस जीत के नायक रहे रविन्द्र जडेजा और आर अश्विन। इन दोनों ने इस टेस्ट में अर्द्धशतक लगाने के साथ-साथ 7-7 विकेट भी झटके और भारत को टेस्ट सीरीज में लगातार आठवीं जीत दिलाई। गौरतलब है कि 2015 के बाद से टीम इंडिया को कोई भी टीम टेस्ट सीरीज में हरा नहीं पाई है।

बता दें कि भारत ने अपनी पहली पारी में 9 विकेट पर 622 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी। भारत की इस पारी में चेतेश्वर पुजारा ने शानदार 133 और अजिंक्य रहाणे ने 132 रन बनाए थे। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी महज 183 रनों पर सिमट गई थी। दूसरी पारी में भी श्रीलंकाई टीम 386 रनों से आगे नहीं बढ़ पाई। इस पारी में केवल दिमुथ करुणारत्ने (141 रन) और कुशल मेंडिस (110 रन) ही अपनी टीम के लिए संघर्ष कर पाए।

भारत के लिए पहली पारी में अश्विन ने 5 विकेट चटकाए थे, जबकि दूसरी पारी में यह कमाल जडेजा ने दिखाया। जडेजा ने इस टेस्ट में अपने 150 विकेट भी पूरे कर लिए। बड़ी बात यह कि इस उपलब्धि के साथ वे सबसे तेजी से 150 विकेट लेने वाले दाएं हाथ के गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने मात्र 32 टेस्टों में यह मुकाम हासिल किया। दूसरी ओर अश्विन के लिए भी यह टेस्ट उपलब्धियों भरा रहा। इस टेस्ट के बाद वे सबसे तेजी से 2000 से अधिक रन और 250 से अधिक विकेट हासिल करने वाले टेस्ट खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि 51 टेस्ट मैचों में हासिल की।

क्रिकेट के तीनों फॉरमेट में भारत की हाल की जीतों की एक बड़ी बात यह भी रही है कि इन जीतों से टीम में एक के बाद एक कई मैच विनर खिलाड़ी सामने आए। इसी टेस्ट की बात करें तो पुजारा, रहाणे, अश्विन, जडेजा, के एल राहुल सब के सब विजेता की तरह खेले। कोहली तो टीम की रीढ़ हैं ही। सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट पल्लीकेले में खेला जाएगा। एक पर एक जांबाजों से सजी विराट कोहली की टीम निश्चित तौर पर अपना विजय अभियान जारी रखना चाहेगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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