All posts by Dr. A Deep

रोबोट को इंसानों से अधिक अधिकार!

रोबोट… आधुनिक विज्ञान की उपज… इंसान की बनाई हुई एक चीज जो चाहे कितनी ही उन्नत तकनीक से क्यों न बनी हो, हमारी तरह सोच और महसूस नहीं सकती। हां, उसमें ‘समझदारी’ हम स्वयं से ज्यादा जरूर भर सकते हैं। पर क्या वो ‘समझदारी’ भी कृत्रिम नहीं होगी? क्या इस रोबोट को हम इंसानों वाली जगह दे सकते हैं? शायद ऐसा सोचना भी कुदरत की तौहीन होगी। लेकिन ‘विकास’ की सही परिभाषा से भटक चुकी हमारी सभ्यता अगर उसे इंसानों से भी ऊपर की जगह और अधिकार दे दे तो क्या कहेंगे आप?

जी हां, चौंकिए नहीं। ऊपर केवल संभावना नहीं व्यक्त की गई है। बल्कि यह अभी-अभी घटित एक कड़वी सच्चाई है। इसी हफ्ते सऊदी अरब में एक महिला रोबोट को नागरिकता दी गई है। यही नहीं, इस रोबोट को उतने अधिकार दिए गए हैं, जितने खाड़ी देशों में किसी सामान्य महिला को भी नहीं मिले हैं। सोफिया नाम की यह रोबोट अपने चेहरे के हावभाव बदल सकती है और लोगों से बातचीत भी कर सकती है।

विशेष अधिकार से नवाजी गई इस महिला रोबोट को इस हफ्ते रियाद में हुई इकोनॉमिक फोरम में पहली बार पेश किया गया। इस दौरान पैनल के साथ बातचीत करते हुए सोफिया ने कहा, इस अद्भुत मौके पर मैं बेहद सम्मान और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। यह एक ऐतिहासिक मौका है जब किसी रोबोट को नागरिक के तौर पर पहचान मिली है। कार्यक्रम में सोफिया ने पोडियम से वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया और कार्यक्रम के मॉडरेटर और पत्रकार एंड्रयू रॉस सोरकिन के सवालों के जवाब भी दिए।

बहरहाल, सोशल मीडिया पर सोफिया की ख़बर आते ही डिबेट का दौर शुरू हो गया है। लोग इस बात की आलोचना कर रहे हैं कि इस रोबोट को सऊदी अरब की महिलाओं और वहां काम करने वाले विदेशी नागरिकों से ज्यादा अधिकार दे दिए गए हैं।

बहरहाल, सऊदी की मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर एंड इन्फोर्मेशन ने रोबोट के समर्थन में ट्वीट कर बताया कि हैनसन रोबोटिक्स द्वारा बनाई यह रचना फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव समिट में प्रस्तुत होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


नेहरा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में खेला गया टी-20 मैच न्यूजीलैंड पर भारत की धमाकेदार जीत के साथ ही शानदार तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के क्रिकेट को अलविदा कहने के कारण भी याद किया जाएगा। 38 वर्षीय नेहरा ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ खिलाफ खेला जाने वाला यह मैच उनका आखिरी मैच होगा। नेहरा ने कहा था, “मेरे लिये यह अहम है कि ड्रेसिंग रुम में लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। सभी कह रहे हैं कि मैं एक-डेढ़ साल और खेल सकता था। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि ऐसे समय में संन्यास लेना चाहिए जब लोग ‘क्यों नहीं’ से ज्यादा यह कहें कि ‘क्यों’। मैं शिखर पर रहते हुए संन्यास लेना चाहता था।”

बहरहाल, अपने क्रिकेट करियर का समापन करने वाले इस तेज गेंदबाज को भारतीय टीम ने ट्रॉफी से नवाजा और उनके योगदान की सरहाना की। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने भी अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा को उनके आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले शुभकामनाएं दीं और कहा, “हर खिलाड़ी के लिए पहला और आखिरी मैच खास होता है। कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट में अपनी सेवाएं देने के बाद नेहरा अपने घर में विदाई के हकदार हैं।” नेहरा को खेल का महान दूत बताते हुए कपिल ने कहा, ‘आपने देश की सेवा काफी अच्छे से की।’

बता दें कि नेहरा की विदाई के मौके पर फिरोजशाह कोटला में साइट स्क्रीन के ऊपर ‘फेयरवेल आशीष नेहरा’ नाम का संदेश लिखा गया। यही नहीं, उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के एक छोर का नाम नेहरा के नाम पर रखा गया है। गौरतलब है कि नेहरा ने अपने 18 साल के लंबे करियर की शुरुआत फरवरी 1999 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में की थी।

नेहरा का करियर चोटों से काफी प्रभावित रहा, लेकिन वह भारत के बेहतरीन गेंदबाजों में से एक रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने कुल 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी-20 मैच खेले। टेस्ट में उनके नाम कुल 44, वनडे में 157 और टी-20 में 34 विकेट हैं। उन्हें डरबन में 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने यह शानदार प्रदर्शन बीमार होने के बावजूद किया था। इस विश्व कप में जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और नेहरा की तिकड़ी ने भारतीय टीम की सफलता में अहम रोल निभाया था। नेहरा 2011 में धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली टीम के भी सदस्य थे और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


जी हां, आइंस्टीन के एक नोट की कीमत दस करोड़ से ज्यादा

कुछ लोग मशहूर होते हैं, कुछ महान होते हैं और जिन्हें ईश्वर ये दोनों नेमत देते हैं उनके लिए माना जाना चाहिए कि वे इस धरती पर कोई विशेष कार्य करने आए हैं और उनके जीवन का हर क्षण, उनसे जुड़ी हर चीज मानव-सभ्यता की थाती है। बुद्ध, गांधी, मार्क्स, आइंस्टीन आदि ऐसे ही बिरले लोगों में शुमार हैं, जिन्होंने हमारी सभ्यता की दिशा और दशा बदली। यही कारण है कि उनसे जुड़ी छोटी-सी-छोटी चीज भी अनमोल हो जाती है और अगर उनकी बोली लगा दी जाए तो करोड़ों भी कम पड़ जाते हैं।

ऊपर कही बात के विस्तार में जाएं उससे पहले एक सवाल। जरा सोच कर बताएं, एक पन्ने की कीमत क्या हो सकती है, जिस पर महज एक नोट लिखा हुआ हो। आप चाहे जितनी उदारता से सोच लें, कुछ सौ या हजार से आगे शायद ही बढ़ पाएं। अब अगर आपसे कहा जाए कि एक नोट वाले एक पन्ने की कीमत दस करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है तो क्या आप यकीन कर पाएंगे? नहीं ना? लेकिन जनाब जब उस पन्ने पर अल्बर्ट आइंस्टीन का स्पर्श हो और लिखा हुआ नोट उनका हो तो यह भी मुमकिन है।

जी हां, महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के लिखे नोट वाला पन्ना येरूशलम में हुई एक नीलामी में दस करोड़ से भी ज्यादा (दस करोड़ तेईस लाख) में बिका। आपको बता दें कि आइंस्टीन ने यह नोट 1922 ई. में टोक्यो के इंपीरियल होटल में एक वेटर को बतौर इनाम लिखकर दिया था क्योंकि उस वक्त उनके पास उसे देने के लिए कैश नहीं था। आपको उत्सुकता हो रही होगी कि आखिर आइंस्टीन उस वेटर को इनाम क्यों देना चाह रहे थे? तो यह भी जान लें। दरअसल एक लेक्चर देने जापान आए आइंस्टीन को उस वेटर ने ही आकर संदेश दिया था कि उन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। इस संदेश के बाद इनाम देना तो बनता ही था।

अब आपको यह भी बता बता दें कि आइंस्टीन ने उस पन्ने पर लिखा क्या था। उन्होंने उस पन्ने पर जीवन की खुशी का राज बताते हुए लिखा था कि “जीवन में मंजिल हासिल करने के बाद भी खुशी मिल जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है।” जर्मन भाषा में लिखे अपने नोट में उन्होंने आगे लिखा – “कामयाबी और उसके साथ आने वाली बेचैनी के बजाय एक शांत और विनम्र जीवन आपको अधिक खुशी देगा।”

करीब इसी दौरान के एक दूसरे नोट में उन्होंने लिखा -“जहां चाह, वहां राह।” ये नोट करीब दो करोड़ रूपयों में नीलाम हुआ। नीलामी करने वाली कंपनी का कहना है कि इन दोनों नोट्स की कीमत अनुमान से कहीं अधिक है। हो भी क्यों ना? आइंस्टीन अनुमान में आने वाली शख्सियत भी नहीं। चलते–चलते बता दें कि आइंस्टीन के बेशकीमती नोट को बेचने वाला साल 1922 में आइंस्टीन तक संदेश पहुंचाने वाले व्यक्ति का भतीजा है और नोट को खरीदने वाला एक यूरोपीय।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


“जीएसटी का मतलब गब्बर सिंह टैक्स”: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों गुजरात में खासे सक्रिय हैं। देखा जाय तो राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत के बाद से गुजरात को लेकर कांग्रेस के हौसले में काफी इजाफा हुआ है। फिर हार्दिक पटेल और उनके सहयोगियों की नजदीकी और एंटी इनकम्बेंसी आदि वजहों से भी कांग्रेस वहां अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त दिख रही है। इन सबके बीच राहुल भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध रोज नए-नए ‘पंच’ लेकर सामने आ रहे हैं ताकि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का जोश बना रहे। उदाहरण के तौर पर राहुल का ताजा ‘पंच’ ही लें जो कि मोदी सरकार के आर्थिक एजेंडे पर है।

राहुल गांधी ने गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक एजेंडे पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जीएसटी का मतलब ‘गब्बर सिंह टैक्स’ है, जिसका नोटबंदी के जख्मों से उबर रहे देश पर बुरा असर पड़ा है। राहुल ने कहा कि “मोदी ने पिछले साल नोटबंदी अपनी मनमर्जी से लागू कर लाखों लोगों को परेशानी में डाल दिया। ये जो इनका जीएसटी है, ये आम आदमी पर बोझ है… ये जीएसटी नहीं गब्बर सिंह टैक्स है। इसको जल्दबाजी में लाया गया है।”

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आगे कहा, “जीएसटी कांग्रेस लाई थी लेकिन उसमें 18 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स नहीं था और अभी की तरह पांच स्लैब्स भी नहीं थे। हमने सरकार से धीरे-धीरे कानून लागू करने की गुजारिश भी की, लेकिन उन्होंने हमारी नहीं सुनी।… मोदी सरकार गरीबों के खिलाफ है और आम लोगों की भलाई के लिए काम नहीं कर रही है।”

राहुल ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री पर जमकर चुटकी ली और उनकी नकल भी उतारी। उन्होंने कहा, ‘8 नवंबर को क्या हुआ? मोदीजी टीवी पर आए और बोले कि मुझे 500 और 1000 के नोट नहीं पसंद हैं। तो मैंने फैसला किया है कि आज रात से मैं उन्हें बंद कर दूंगा। ऐसा कर के उन्होने एक ही कदम से पूरे देश को झटका दे दिया। पहले दो या तीन दिन उन्हें ही पता नहीं चला कि क्या हुआ। प्रधानमंत्री को 5-6 दिन बाद समझ आया कि उनसे गलती हुई है और वे फिर टीवी पर आए कहा कि 30 दिसंबर तक अगर मैंने काला धन खत्म नहीं किया तो मुझे सूली पर चढ़ा देना।” राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ पर भी तंज कसा और कहा कि यह पूरी तरह से फेल हो चुका है और चीनी उत्पाद भारत में भर गए हैं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि राहुल ने ख़बरों में रहने की कला सीख ली है। अब मंच पर वे पहले से अधिक परिपक्व दिखते हैं और आत्मविश्वास से लबरेज नज़र आते हैं। हालांकि ये तो गुजरात का परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि उनके ‘पंच’ में असल में दम कितना था?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


तेजस्वी ने कुछ इस तरह दी अमित शाह को जन्मदिन की बधाई

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भारतीय जनता पार्टी प्राय: रोज हमले करती है। सुशील कुमार मोदी समेत बिहार भाजपा के अन्य नेता ही नहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ऐसा कोई मौका नहीं चूकते। दूसरी तरफ लालू और उनके बेटे भी जवाब देने में कोई कसर नहीं रखते। आज आरजेडी के ‘युवराज’ को भाजपा पर तंज कसने का जबरदस्त मौका मिला और उन्होंने इसे बेहद खास तरीके से भुनाया।

जी हां, मौका था भाजपा के ‘करिश्माई’ अध्यक्ष अमित शाह के जन्मदिन का। रविवार को वे 53 साल के हो गए। देश भर से बधाईयों का तांता लगा था। ऐसे में भला तेजस्वी क्यों पीछे रहते? उन्होंने भी शाह को बधाई दी पर कुछ इस अंदाज में कि वो देखते ही देखते वायरल हो गई।

दरअसल यह बधाई कम, तंज ज्यादा था। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए बधाई दी और लिखा, “अमित शाह जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें अच्छी सेहत, सफलता दे और उनकी दौलत 256000000 (16000×16000) गुना बढ़ जाए।“ तेजस्वी के इस ट्वीट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। पर इससे पहले लोगों की बधाईयों का शुक्रिया अदा कर रहे शाह खामोश रहे। उन्होंने शायद ही अपने जन्मदिन पर ऐसी बधाई का अनुमान किया होगा!

गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले अमित शाह पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे और अब उनके बेटे जय शाह पर भी ऐसे ही आरोप लगे हैं। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक ‘मोदी-राज’ में भाजपा अध्यक्ष के बेटे की कमाई 50 हजार से 80 करोड़ जा पहुंची। जी हां, इन ख़बरों पर यकीन करें तो पिछले एक साल में जय शाह की कंपनी का टर्नओवर 16 हजार गुना बढ़ा। तेजस्वी ने अपने ट्वीट में इसी 16000 को निशाना बनाते हुए उसके 16000 गुना बढ़ने की बात कही।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


जी हां, चन्द्रमा पर है 50 किलोमीटर लंबी गुफा

पांच दशक होने को आए जब मनुष्य ने चन्द्रमा पर पहला कदम रखा था। वो दिन था 20 जुलाई 1969 जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रीन अंतरिक्ष विमान अपोलो 11 में सवार होकर चांद पर पहुंचे थे। तब से अब तक विज्ञान ने बेहिसाब तरक्की की है और नई-नई खोजों का सिलसिला अनवरत जारी है। खासकर चन्द्रमा को लेकर हमारी उत्सुकता प्रारंभ से ही कुछ अलग रही है। कहना गलत न होगा कि यह हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। न जाने कितनी ही कविताएं इस पर रची गई होंगी और कितनी ही कहानियां इससे जुड़ी हुई होंगी। अकारण नहीं कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इसके अलग-अलग पहलुओं पर तरह-तरह की जानकारियां इकट्ठी की हैं। आज हम चन्द्रमा के बारे में आपको एक ऐसी जानकारी से अवगत कराएंगे कि आप बस चौंक जाएंगे।

जी हां, सुनकर शायद अविश्वसनीय लगे लेकिन जापान के वैज्ञानिकों को चांद पर एक बहुत बड़ी गुफा का पता चला है। वैज्ञानिकों ने गुरुवार को बताया कि इस गुफा में चन्द्रमा पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट रह सकते हैं। इससे वे खतरनाक विकिरण और तापमान में बदलाव से बच सकते हैं। जापान के एईएईएनई लूनर ऑर्बिटर से मिले आंकड़ों के अनुसार चांद पर मौजूद यह गुफा 3.5 अरब साल पहले भूगर्भ के अंदर हुई हलचल की वजह से बनी होगी। इस गुफा की लंबाई 50 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह गुफा भूगर्भ से निकले लावे की वजह से तैयार हुई होगी। जापानी वैज्ञानिकों के ये आंकड़े और नतीजे अमेरिकी पत्रिका जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में भी प्रकाशित हुए हैं।
जापानी वैज्ञानिक जुनिची हारुयामा ने गुरुवार को कहा, ‘हमें अभी तक ऐसी चीज के बारे में पता था और माना जाता था कि यह लावा ट्यूब हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी की पुष्टि पहले नहीं हुई थी।’ जमीन के अंदर मौजूद यह गुफा चंद्रमा के मारियस हिल्स नामक जगह के पास है। बकौल हारुयामा इस गुफा में रह कर अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा प्रवास के दौरान विकिरण और तापमान में होने वाले तेज बदलावों के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं।
चलते-चलते बता दें कि जापान ने इसी साल जून में साल 2030 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष मिशन भेजने की घोषणा की है। इधर भारत और चीन भी अपने-अपने अंतरिक्ष यात्री चन्द्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं। चन्द्रमा पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी जोरों पर है। अब वो दिन दूर नहीं जब चंदा मामा से हम सचमुच अपने मामा के जैसे मिल पाएंगे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


‘कमजोर हिंदी के कारण नहीं बना प्रधानमंत्री’: प्रणव मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का मानना है कि वे प्रधानमंत्री इसलिए नहीं बन सके क्योंकि वे हिन्दी में कमजोर थे। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री के तौर पर उपयुक्त नहीं था क्योंकि मैं हिंदी में कमजोर होने के चलते जनता के साथ संवाद नहीं कर सकता था। कोई भी व्यक्ति जनता से संवाद करने की भाषा में सक्षम न होने पर प्रधानमंत्री नहीं बन सकता, जब तक कि कोई अन्य राजनीतिक कारण न हों।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि जब उनके नाम का ऐलान प्रधानमंत्री के तौर पर हुआ तो वे खुद हैरान थे क्योंकि प्रणब मुखर्जी उनसे अधिक योग्य व्यक्ति थे। हालांकि मुखर्जी कहते हैं कि ‘डॉक्टर साहिब (मनमोहन सिंह) हमेशा बहुत अच्छे विकल्प रहे। नि:संदेह वे बहुत अच्छे प्रधानमंत्री थे। मैंने तब भी कहा था और बाद में भी कि कांग्रेसियों में प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे अच्छे विकल्प मनमोहन सिंह ही थे।

बता दें कि प्रणब दा ने ये बातें टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के क्रम में कहीं। इस दौरान उन्होंने और भी कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। क्षेत्रीय दलों के एजेंडे के चलते राष्ट्रीय हित प्रभावित होने के विषय में उन्होंने कहा कि इस पर पर देश में गंभीर चर्चा किए जाने की जरूरत है। खासतौर पर गठबंधन सरकारों में प्रधानमंत्री अपने मन-मुताबिक फैसले लेने में सक्षम नहीं रहता है। यहां तक कि वह मंत्रियों और उनके विभागों का चुनाव भी अपने मुताबिक नहीं कर पाता है। उन्होंने बताया कि यूपीए के कार्यकाल में क्षेत्रीय दलों से निपटना चुनौती था। और आज जबकि भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में है, तब भी उसके लिए यह एक बड़ी चुनौती है। बकौल मुखर्जी क्षेत्रीय हितों के साथ राष्ट्रीय हितों का तालमेल मुश्किल हो जाता है।

यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रपति भवन से निकलने के बाद वह कांग्रेस के लिए गाइड के तौर पर उपलब्ध होंगे, उन्होंने कहा राजनीति में दोबारा आने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हालांकि वे सलाह के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने पूर्व के राष्ट्रपतियों डॉ. राजेंद्र प्रसाद, शंकर दयाल शर्मा आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सभी कांग्रेस से आकर राष्ट्रपति बने थे, वे मुझसे बड़े कांग्रेसी थे, लेकिन राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद वे दोबारा सक्रिय राजनीति में नहीं लौटे।

प्रणब मुखर्जी वर्तमान समय के उन गिने-चुने राजनतीतिज्ञों में एक हैं जिनका सम्मान दलगत सीमाओं से ऊपर है। अपने दीर्घ राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई दौर देखे हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि वर्तमान में कैसे भविष्य के बीज बोए जाते हैं और कैसे आदर्श के प्रतिमान गढ़े जाते हैं। उनकी तमाम बातों में उनके अनुभव का अक्श देखा जा सकता है। ऊपर कही बातें भी इसकी पुष्टि करती हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


भाजपा है भारत की सबसे अमीर पार्टी

पैसे का महत्व हर युग में रहा है, लेकिन आज के समय में इसकी ताकत बेहिसाब बढ़ गई है। आज यह पैसा नीयत, नीति, नियम, नैतिकता, न्याय और यहां तक कि नियति तक को बदलने की सामर्थ्य रखती है। जब पैसे की इस ताकत से बड़े-से-बड़ा और छोटे-से-छोटा हर आदमी वाकिफ है, तो भला राजनीतिक पार्टियां इससे कैसे अछूती रहें। यह संयोग से कुछ अधिक है कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है, तब-तब सभी पार्टियों की संपत्ति में इजाफा हो जाता है। क्यों होता है, यह किसी से छिपा नहीं।

दरअसल तमाम राजनीतिक पार्टियां चुनाव आने के लगभग साल भर पहले से पैसा इकट्ठा करना शुरू कर देती हैं। इनकम टैक्स विभाग चाहे जितने नियम बना लें, राजनीतिक पार्टियां अपनी आमदनी को उसमें फिट करने की ‘कला’ बखूबी जानती हैं। आज चुनाव प्रणाली के लिए पैसे की ये ताकत कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है, इस पर बात करना ही बेकार है। बात तो इस पर होनी चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों की फंडिग पारदर्शी कैसे हो।

बहरहाल, यह समस्या इतनी गंभीर है कि इस पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। फिलहाल तो आप यह जानें कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे अमीर पार्टी कौन है और उसके पास कितनी सम्पत्ति है? आपको बता दें कि हाल के वर्षों में तेजी से अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाकर देश की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टी भाजपा ने कांग्रेस से सबसे बड़ी और उसी के साथ सबसे अमीर होने का दर्जा छीन लिया है। यह तथ्य ‘रिसर्च असोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की तरफ से कोलकाता में सोमवार को ‘अनैलेसिस ऑफ असेट्स ऐंड लायबिलिटीज ऑफ नैशनल पार्टीज फाइनैंशल ईयर 2004-5 से 2015-16’ के नाम से जारी रिपोर्ट से सामने आई है।

एडीआर की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में भाजपा की सम्पत्ति 627 प्रतिशत बढ़कर 122.93 करोड़ रुपये से 893 करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा 2004-05 से 2015-16 के बीच का है। जबकि इसी समय में कांग्रेस की सम्पत्ति 167.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 758.79 करोड़ रुपये हो गई, यानि इन 10 सालों में उसकी सम्पत्ति में 353.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बता दें कि एडीआर ने इस रिपोर्ट में विश्लेषण के लिए कुल 7 पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा किए ऑडिटेड अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है। वे पार्टियां हैं: भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, एनसीपी, बसपा, सीपीआई, सीपीएम और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


धनतेरस: धन ही नहीं, स्वास्थ्य का भी पर्व

धनतेरस, एक अनोखा पर्व जो न केवल दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है बल्कि समृद्दि के लिए स्वास्थ्य का महत्व भी रेखांकित करता है। आम धारणा के अनुसार धन का पर्व दीपावली है, जो सही नहीं है। दीपावली तो धन के साथ-साथ अन्य सिद्धियों का दिन भी है। धन का दिन तो असल में धनतेरस है। साथ ही यह दिन औषधि और स्वास्थ्य के स्वामी धन्वंतरि का भी दिन है, जो इस बात का संदेश देता है कि धन का भोग करने के लिए लक्ष्मी की कृपा जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरत उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की होती है। बता दें कि आर्युवेद, जिसकी रचना ब्रह्मा ने की थी, को प्रकाश में लाने का श्रेय भी धन्वंतरि को ही जाता है।

धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। दीपावली की महानिशा से दो दिन पहले इसी खास दिन यक्ष-यक्षिणियों का जागरण होता है। यक्ष-यक्षिणी इस स्थूल जगत के उन सभी चमकीले तत्वों के नियंता कहे जाते हैं, जिन्हें दुनिया ‘दौलत’, ‘सम्पत्ति’, ‘वैभव’, ‘ऐश्वर्य’ जैसे नामों से जानती है। जानना दिलचस्प होगा कि कुबेर को यक्ष और लक्ष्मी को यक्षिणी का रूप माना जाता है। कुबेर और लक्ष्मी यक्ष-यक्षिणी के रूप में हमारे जीवन की उस ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं, जिससे हमारी जीवन-शैली निर्धारित और नियंत्रित होती है।

‘धनतेरस’ में ‘धन’ शब्द को धन-संपत्ति और धन्वंतरि दोनों से ही जोड़कर देखा जाता है। भगवान धन्वंतरि को हिन्दू धर्म में देव वैद्य का पद हासिल है। कुछ ग्रंथों में इन्हें विष्णु का अवतार भी माना गया है। मान्यता है कि समुद्र-मंथन के दौरान धन्वंतरि चांदी के कलश और शंख के साथ प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन शंख और चांदी का कोई पात्र, बर्तन या सिक्का खरीदना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार कुछ लोग चांदी की जगह सोना तो कुछ लोग पीतल या स्टील की चीज खरीदते हैं, लेकिन ये रस्म लोग निभाते जरूर हैं। दीपावली के लिए इसी दिन लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और पूजन सामग्री खरीदना भी शुभ माना गया है।

तंत्र शास्त्र में इस दिन लक्ष्मी, गणपति, विष्णु और धन्वंतरि के साथ कुबेर की साधना की जाती है। धनतेरस की रात्रि में कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, श्री यंत्र तथा लक्ष्मी स्वरूप श्री दक्षिणावर्ती शंख के पूजन को अचूक माना गया है। इस दिन अपने मस्तिष्क को स्वर्ण समझकर ध्यानस्थ होने से धन अर्जित करने की आन्तरिक क्षमता सक्रिय होती है, जो सही मायने में समृद्धि का कारक बनती है।

एक बात और, ‘धनतेरस’ में ‘धन’ से जुड़े ‘तेरस’ शब्द को लेकर एक बड़ी महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि इस दिन खरीदे गए धन, विशेषकर सोना या चांदी, में तेरह गुना वृद्धि हो जाती है। ईश्वर करे आपके धन में भी तेरह गुना की वृद्धि हो और हर धनतेरस को हो। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से इस दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

सम्बंधित खबरें


“बिहार पर सरस्वती की कृपा है, लक्ष्मी की भी होगी”: मोदी

कभी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कही जाने वाली पटना यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने पर बिहार की राजधानी एक यादगार समारोह की साक्षी बनी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, उपेन्द्र कुशवाहा और अश्विनी चौबे एवं कुलपति रासबिहारी सिंह समेत कई महत्वपूर्ण हस्तियों और वर्तमान व पूर्व शिक्षकों व छात्रों ने शिरकत की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से पटना यूनिवर्सिटी को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग की। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी को एक कदम और आगे ले जाना चाहूंगा। विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटी में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है, इसलिए 20 यूनिवर्सिटी (10 सरकारी और 10 प्राइवेट) को 10 हजार करोड़ रुपये देने की योजना है। इसका फैसला प्रदर्शन के आधार पर होगा। उनका इशारा इस यूनिवर्सिटी को इसका पुराना गौरव वापस दिलाते हुए इसे उस प्रतियोगिता के लायक बनाने की ओर था।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले के कई प्रधानमंत्री मेरे लिए अच्छा काम छोड़ गए। ऐसा ही अच्छा काम करने का मौका उन्हें आज मिला। पटना यूनिवर्सिटी ने देश को कई नामचीन चेहरे दिए। अगर आप पीढ़ियों के बारे में बताते हैं तो इंसान को बोइए। मैं मां सरस्वती और लक्ष्मी दोनों को साथ-साथ चला रहा हूं। बिहार के पास सरस्वती की कृपा है। बिहार पर लक्ष्मी की कृपा भी हो सकती है। इसमें केन्द्र पूरी तरह प्रदेश सरकार का सहयोग करेगा। हमें बिहार को 2022 तक समृद्ध राज्य बनाना है। गौरतलब है कि मोदी पटना विश्वविद्यालय आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।

पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी दिवस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के आग्रह पर प्रधानमंत्री नवनिर्मित पटना म्यूजियम पहुंचे, जहां उन्होंने म्यूजियम में रखी एक-एक चीज को बड़े चाव से देखा और सबके बारे में जानकारी ली। स्वयं मुख्यमंत्री ‘गाइड’ की भूमिका में रहे। इसके बाद वे मोकामा पहुंचे और बिहार को करीब चार हजार करोड़ रुपये की सौगात दी। यहां उन्होंने राष्ट्रीय हाईवे से जुड़े 3031 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट और 738.04 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया।

मोकामा में अपने संबोधन के प्रारंभ में स्थानीय भाषा में लोगों का अभिवादन कर प्रधानमंत्री ने सबका दिल जीत लिया। यही नहीं, उन्होंने यहां के पौराणिक-ऐतिहासिक गौरव की चर्चा भी की और राष्ट्रकवि दिनकर को याद करते हुए उनकी कविता का भी पाठ किया। और हां, मोदी ने पटना यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में इस विश्वविद्यालय व बिहार की तो मोकामा में नीतीश कुमार की दिल खोलकर तारीफ की।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

सम्बंधित खबरें