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खत्म हो तीन तलाक, मोदी ने किया मुस्लिम समाज का आह्वान

इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी, दहेजबंदी और बालविवाह-उन्मूलन की बात कर रहे हैं तो उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुस्लिम समाज में व्याप्त तीन तलाक जैसी बुराई को दूर करने की पहल कर रहे हैं। काश कि राजनीति में हमेशा ऐसी ही बयार चले और राजनीति समाज को बदलने का, बेहतर करने का जरिया बने। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील करते हुए इसका हल तलाशने को मुस्लिम समाज का आह्वान किया है और साथ में उम्मीद जताई है कि मुस्लिम समाज से ही लोग आगे आएंगे और तीन तलाक के संकट से जूझ रही मुस्लिम महिलाओं के लिए रास्ता निकालेंगे।

शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 12वीं सदी के महान समाज सुधारक गुरु बसव की जयंती पर आयोजित समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समाज के अंदर के लोग ही परंपराओं को तोड़ आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने हिन्दू समाज से विधवा विवाह को खत्म करने वाले महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय की चर्चा की और कहा कि उन्होंने जब विधवा विवाह खत्म करने की बात रखी होगी, उस समय उन्हें कितनी आलोचना का शिकार होना पड़ा होगा। फिर भी वे माता-बहनों के साथ समाज में हो रहे घोर अन्याय के खिलाफ लड़े और जीत कर दिखाया। मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए आज वास्तव ऐसी ही पहल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की महान परंपरा में ऐसे कई उदाहरण हैं जब लोगों ने आगे बढ़कर बुरी परंपराओं को तोड़ा और आधुनिक परंपराओं को विकसित किया। इसीलिए तीन तलाक की समस्या के समाधान को लेकर भी वे आशावान हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों पहले से ही भारत में महिलाओं को अपनी बात कहने का हक रहा है। आज तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। देश के प्रबुद्ध मुस्लिम इसके लिए कदम उठाएं। आने वाली पीढ़ियों को इससे ताकत मिलेगी। मोदी ने विश्वास जताया कि भारत के प्रबुद्ध मुसलमान न केवल देश में बल्कि दुनिया को तीन तलाक से निपटने का रास्ता दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर देश में छुआछूत, जातिप्रथा जैसी व्यवस्था खत्म करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की नींव तभी मजबूत रहेगी जब बिना भेदभाव के सभी का विकास हो। सबको साथ लेकर और सबके प्रयत्न से ही सबका विकास किया जा सकता है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नहीं रहे विनोद खन्ना

न केवल हिन्दी सिनेमा बल्कि सम्पूर्ण भारतीय सिनेमा के चंद अत्यंत हैंडसम अभिनेताओं में शुमार विनोद खन्ना नहीं रहे। अभी कुछ ही दिन पहले उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें उनका शरीर अतंयंत जर्जर दिख रहा था। उस तस्वीर ने बॉलीवुड समेत पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। तब वो मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती थे और बताया गया था कि उनके शरीर में पानी की कमी हो गई है। और अब उनके नहीं रहने की ख़बर आई है। 70 वर्षीय विनोद ने गुरुवार सुबह अन्तिम सांस भी रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल अस्पताल में ही ली। उनका अन्तिम संस्कार मुंबई के वर्ली श्मशान घाट पर किया गया।

विनोद खन्ना को अंतिम विदाई देने उनके सैकड़ों प्रशंसकों के अतिरिक्त बॉलीवुड और राजनीति की कई दिग्गज हस्तियां पहुंचीं, जिनमें अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन, प्रफुल्ल पटेल, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, सुभाष घई, गुलजार, रमेश सिप्पी, रंजीत, उदित नारायण, रणदीप हुडा, दिया मिर्जा आदि प्रमुख हैं। मुखाग्नि उनके छोटे बेटे साक्षी खन्ना ने दी। विनोद के दो अन्य बेटे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना भी अभिनय के ही क्षेत्र में हैं।

विनोद खन्ना अभिनय के अलावा राजनीति में भी सक्रिय थे और वर्तमान में गुरुदासपुर से भाजपा के सांसद थे। उनकी मृत्यु पर ट्वीट कर श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ‘विनोद खन्ना को हम हमेशा एक प्रसिद्ध अभिनेता, समर्पित नेता और बहुत ही अच्छे इंसान के रूप में याद करेंगे। उनके परिवार को इस दुखद घड़ी में मेरी सहानुभूति।‘

विनोद खन्ना ने अभिनय की शुरुआत 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ से की और अपने करियर में 140 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ‘मेरे अपने’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘इम्तिहान’, ‘इनकार’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘लहू के दो रंग’, ‘कुर्बानी’, ‘दयावान’, ‘जुर्म’ जैसी कई फिल्में उनके यादगार अभिनय के लिए याद की जाएंगी। हाल के दिनों में विनोद सलमान खान के पिता की भूमिका में फिल्म ‘दबंग’ में और आखिरी बार शाहरुख खान के पिता की भूमिका में फिल्म ‘दिलवाले’ में नज़र आए थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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सुकमा के शहीदों के परिवार की मदद के लिए आगे आई बिहार सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सली हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस हमले में बिहार के शहीद छह जवानों के परिजनों को राज्य सरकार की और से 5 लाख रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार राज्य सरकार की ओर से पूरे पुलिस सम्मान के साथ किए जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री कार्यालय से मंगलवार को जारी बयान में नीतीश ने कहा कि इन जवानों की शहादत को देश हमेशा याद रखेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को छत्तीसगढ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस घटना में पच्चीस जवान शहीद हो गए थे, जिनमें छह जवान बिहार के थे। नक्सलियों से लड़ते हुए बिहार के जो लाल शहीद हुए, उनके नाम कृष्ण कुमार पांडेय (सासाराम), अभय कुमार लोमा (वैशाली), रंजीत कुमार (शेखपुरा), नरेश यादव (दरभंगा), सौरभ कुमार (दानापुर कैंट, पटना) और अभय मिश्र (भोजपुर) हैं।

उधर इस मामले को लेकर आरजेडी ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। पार्टी ने कहा कि केवल ट्विटर पर राष्ट्रवाद की बातों से काम नहीं चलने वाला है। एक्शन भी जरूरी है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार नक्सलियों और आतंकियों के खिलाफ एक्शन प्लान बनाए।

कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे केन्द्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार बताया। पार्टी के नेता प्रेमचंद मिश्रा ने नक्सली हमले को लेकर गृहमंत्री को घेरा और इसे गृह मंत्रालय की बड़ी विफलता बताते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस्तीफे की मांग की।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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अनर्थ होने से पहले चलिए ‘अर्थ डे’ को अर्थ दें

22 अप्रैल को दुनिया ‘अर्थ डे’ के रूप में जानती है। ‘अर्थ डे’ यानि हम सबकी मां पृथ्वी का दिन, जो आज कराह रही है। शायद इस दिन की प्रासंगिकता यही है कि हम उसके कराहने को सुन सकें, समझ सकें, महसूस कर सकें। बहरहाल, पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों और दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल 1970 को पहली बार अमेरिका में ‘अर्थ डे’ मनाया गया। इस दिन को मनाने का मकसद था राजनीतिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण संबंधी नीतियों को अमल में लाने के लिए दबाव बनाना। बीस वर्षों के बाद यानि 22 अप्रैल 1990 को ‘अर्थ डे’ के बीसवें जन्मदिन पर 141 देशों में दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था। तब से आज तक हर साल इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण प्रेमी और सरकारें धरती को बचाने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं और एकजुट होते हैं।

जीवन और पर्यावरण को हमेशा से ही एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। पर्यावरण के बगैर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मानव-जाति के लिए यह पृथ्वी ही सबसे सुरक्षित ठिकाना है लेकिन दुर्भाग्यवश आज इसका अस्तित्व ही संकट में है। अगर समय रहते इसकी रक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो इसे बचाना मुश्किल हो जाएगा। प्रश्न उठता है, आखिर ऐसी क्या समस्याएं हैं जिनके कारण आज ‘पृथ्वी दिवस’ मनाने की जरूरत आ पड़ी है। चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

A Drawing on Earth Day By Akshay Deep, Student of class 4th'B', Litera Valley School, Patna
A Drawing on Earth Day By Akshay Deep, Student of class 4th’B’, Litera Valley School, Patna .

सबसे पहले ग्लोबल वार्मिंग। आज ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व के लिए एक बड़ा और सामाजिक मुद्दा है। सूरज की रोशनी को लगातार ग्रहण करते हुए हमारी पृथ्वी दिनों-दिन गर्म होती जा रही है, जिससे वातावरण में कार्बन-डाई-ऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। पृथ्वी के तापमान में पिछले सौ सालों में 0.18 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि हो चुकी है। माना जाता है कि अगर ऐसे ही तापमान में बढ़ोतरी हुई तो 21वीं सदी के अंत तक 1.1-6.4 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान बढ़ जाएगा। ऐसा होने पर सूखा बढ़ेगा, बाढ़ की घटनाएं बढेंगी और मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

दूसरी बड़ी वजह है ग्रीन हाउस गैसें। ग्रीन हाउस गैसें वातावरण या जलवायु में परिवर्तन और अंतत: ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी होती हैं। जिन ग्रीन हाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन होता है उनमें कार्बन-डाई-ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन आदि शामिल हैं। कार्बन-डाई-ऑक्साईड की ही बात करें तो पिछले 15 सालों में ही इसका उत्सर्जन 40 गुना और औद्योगिकीकरण के बाद से 100 गुना बढ़ गया है। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन आम प्रयोग के उपकरणों, जैसे फ्रिज, कंप्यूटर, स्कूटर, कार आदि से होता है। कार्बन-डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत पेट्रोलियम ईंधन और परंपरागत चूल्हे हैं।

पृथ्वी के संकट का तीसरा बड़ा कारण है पॉलीथीन। सुविधा के लिए बनाई गई पॉलीथीन आज बहुत बड़ा सिरदर्द बन गई है। पॉलीथीन नष्ट नहीं हो सकती और इसके कारण यह धरती की उर्वरक क्षमता को खत्म कर रही है। साथ ही भूगर्मीय जल दूषित हो रहा है। इसको जलाने पर निकलने वाला धुआं ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाता है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है। एक आंकड़े के मुताबिक सिर्फ भारत में ही हर साल 500 मीट्रिक टन पॉलीथीन का निर्माण होता है और रीसाइकलिंग एक प्रतिशत से भी कम की हो पाती है।

पृथ्वी के संकट की एक और वजह है हमारी खेती का असंतुलन। आजकल आमतौर पर भूमिविशेष पर एक ही फसल की खेती की जाती है, जो कि अस्थिर पर्यावरण तंत्र को बढ़ावा देती है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई किसान सिर्फ मक्का उपजाता है तो वहां विनाशकारी कीटों को खाने वाले परभक्षियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा, जिसकी वजह से कीटनाशकों की जरूरत होगी। इस कारण दुनिया भर में करोड़ों एकड़ कृषि भूमि बेकार हो रही है और हमारी भावी पीढ़ियों के पेट भरने पर भी संकट आ रहा है।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जंगलों को खत्म कर हमने पृथ्वी के संकट को और भी गहरा कर दिया है। आज इस वजह से हमारा मौसम चक्र ही अनियमित हो गया है। पूरी दुनिया में गर्मियां लंबी होती जा रही हैं और सर्दियां छोटी। जलवायु में इस परिवर्तन का असर मनुष्यों के साथ-साथ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं पर भी हो रहा है। पेड़-पौधों पर फूल और फल अब समय से पहले लग सकते हैं और पशु-पक्षी अपने क्षेत्रों से पलायन कर दूसरी जगह जा सकते हैं। हर दिन धटती हरियाली और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण नई समस्याओं को जन्म दे रहा है।

तो ये थी ‘अर्थ डे’ मनाने की चंद बड़ी वजहें। क्या आप पल भर की भी देरी करना चाहेंगे पृथ्वी को बचाने की मुहिम से जुड़ने में। ‘अर्थ डे’ पर केवल रस्म अदायगी न करें। आईये, कुछ सार्थक करें। तभी बच पाएगी हमारी मां पृथ्वी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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नीतीश के बाद अब लालू मिलेंगे सोनिया से

अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बीते गुरुवार को सोनिया गांधी से हुई मुलाकात की चर्चा थमी भी नहीं थी कि अब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की भी कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि उनकी मुलाकात की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

बताया जाता है कि नीतीश ने देश भर में भाजपा विरोधी अभियान की शुरुआत को लेकर सोनिया से मुलाकात की थी। साथ ही इस बैठक में दोनों के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा हुई। जेडीयू का मानना है कि विपक्ष को मिलकर राष्ट्रपति पद के लिए एक ही उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए और विपक्ष की सबसे वरिष्ठ नेता होने की वजह से सोनिया गांधी को आगे आकर राजनीतिक दलों से बातचीत करनी चाहिए।

हालांकि नीतीश इससे पूर्व भी कई बार कह चुके हैं कि बिहार की तरह राष्ट्रीय स्तर पर गैर भाजपा दलों के महागठबंधन को ले कांग्रेस पहल करे। लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि महज चार दिन पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के सिलसिले में पटना में थे। इस दौरान वे नीतीश और लालू दोनों के साथ एक ही मंच पर थे। चूंकि राहुल गांधी से हुई इस मुलाकात के तुरंत बाद नीतीश ने सोनिया से मुलाकात की है, इसीलिए इसके अलग मायने भी निकाले जा रहे हैं। भाजपा खेमे के लोग इसे लालू पर दबाव बनाने की नीतीश की राजनीति बता रहे हैं।

बहरहाल, देखा जाय तो लालू की कांग्रेस के प्रति ‘निष्ठा’ पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं उठाया जा सकता। लेकिन महागठबंधन बनने के पूर्व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उन से ज्यादा नीतीश को तवज्जो दी थी। अब जबकि नीतीश और लालू दोनों अलग-अलग कांग्रेस अध्यक्ष से मिल रहे हैं, जाहिर है कुछ तो नया बिहार की राजनीति में भी देखने को मिलेगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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भाजपा ने क्यों किया चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम का बहिष्कार?

बिहार सरकार की तरफ से सोमवार को पटना में आयोजित चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम का भाजपा समेत एनडीए के तमाम घटक दलों ने बहिष्कार किया। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार ने कार्यक्रम का ‘राजनीतिकरण’ किया। पार्टी इस बात से भी नाराज है कि कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को न्योता नहीं दिया गया, जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कार्यक्रम में शिरकत की। हालांकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ जिन लोगों को मंच साझा करना था उनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह शामिल थे, लेकिन वे भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे और एक तरह से इसका ‘अघोषित बहिष्कार’ किया।

गौरतलब है कि चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार द्वारा आयोजित स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अतिरिक्त मंच पर जिन लोगों को जगह दी गई थी उनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी, शिक्षा मंत्री व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव सत्येन्द्र नारायण सिंह एवं अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एसोसिएशन के सचिव सत्यानंद याजी शामिल थे। इस सूची पर सख्त आपत्ति जताते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट किया कि ‘नीतीश, आप चारा घोटाले के दोषी लालू और नेशनल हेराल्ड केस में बेल पर चल रहे राहुल गांधी को बुलाकर फ्रीडम फाइटर्स का अपमान कर रहे या सम्मान?’ वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस कार्यक्रम के ‘राजनीतिकरण’ से आहत हैं। उनके इस बयान का आशय विशेषकर लालू को मंच पर जगह देने से था।

इस कार्यक्रम को लेकर एनडीए की अगुआ भाजपा का रुख सामने आने के बाद ही हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी ने इस कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया, जैसा कि हम के नेता जीतन राम मांझी के बयान से भी स्पष्ट होता है, जिसमें उन्होंने कहा कि एनडीए में रहने के कारण उनका इस कार्यक्रम में जाना उचित नहीं होगा।

बहरहाल, जब एनडीए खेमे की ओर से इतनी उठापठक हो रही हो तो लालू कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने भी पलटवार करते हुए कहा कि वह बीजेपी को एक हाथ से गांधी और दूसरे हाथ से उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को माला पहनाने का ‘ड्रामा’ नहीं करने देंगे। वहीं, नीतीश ने कहा कि उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों को बुलावा भेजा था, लेकिन जो नहीं पहुंच सके, उन्हें उनसे कोई शिकायत नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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योगीजी, सबसे पहले इस बच्चे की शर्ट का ताला खोलें

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे किसी से डरें या न डरें लेकिन अपने शिक्षकों की डांट का डर उनमें हमेशा बना रहता है। इसी डांट से बचने के लिए सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला एक बच्चा अपनी शर्ट का बटन टूट जाने पर उसकी जगह ताला लगाकर स्कूल पहुंच गया। ताला इसलिए कि उसके पास न तो दूसरी शर्ट थी और न ही वर्षों से पहनी जा रही अपनी एकमात्र शर्ट में लगाने को बटन। उसी शर्ट के एक और बटन की जगह उसने तार बांध कर काम चलाया, पर दूसरे बटन के लिए उस मासूम को शायद तार भी नहीं मिला और उसे ताले का सहारा लेना पड़ा।

बहरहाल, इंटरनेट पर शर्ट में ताला लगाए जिस बच्चे की तस्वीर वायरल हो रही है, वो बच्चा यूपी का है, उस यूपी का जिसका पिछले पांच साल से अखिलेश यादव ‘विकास’ कर रहे थे और अब जिसके ‘विकास के रोडमैप’ का डंका योगी आदित्यनाथ पीट रहे हैं। शत्रुहन निषाद नाम का ये बच्चा बांदा जिले के मोगरिया गांव स्थित एक माध्यमिक स्कूल में कक्षा छह का छात्र है। इसके पास एक ही स्कूल ड्रेस है जो उसे कई साल पहले स्कूल से मिली थी। अब ये ड्रेस घिसकर फटने लगी है और इसके बटन भी निकलने लगे हैं।

शर्ट में ताले के पीछे की कहानी कुछ यूं है कि निर्धन परिवार से ताल्लुक रखने वाले शत्रुहन को स्कूल जाना था लेकिन उसने देखा कि शर्ट का बटन टूटा है। घर में बटन लगाने को था नहीं और छुट्टी वो करना नहीं चाहता था। मास्टरजी की डांट का डर था सो अलग। शत्रुहन आखिर करता भी क्या? उसने बटन की जगह ताला लगा लिया। उसे लगा कि यह बटन की जगह काम करेगा और मास्टरजी उसे डांटेंगे या पीटेंगे नहीं। शर्ट में एक और जगह बटन नहीं था, वहां उसने बड़े जतन से तार बांध दिया। इसके आगे जब वह इस हालत में स्कूल पहुंचा तो उसके शिक्षक ने उसकी तस्वीर ले ली। अब वही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

जरा सोचिए, यूपी समेत तमाम राज्यों में स्कूलों और बच्चों के लिए कितनी सारी योजनाएं चला करती हैं। इन योजनाओं में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। पर असल में उन जरूरतमंदों तक सरकार द्वारा घोषित सुविधाओं का प्रचार तो पहुंच जाता है, पर सुविधाएं शायद ही पहुंचती हैं। अगर नहीं, तो शत्रुहन की फटी शर्ट पर ताला लगा होने के बावजूद असलियत यूं झांक नहीं रही होती।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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क्या है ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’?

कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिका ने अब तक के सबसे बड़े हथियार का इस्तेमाल किया है। जी हां, अमेरिका ने बीते गुरुवार को अफगानिस्तान के नंगरहार प्रोविंस में अचिन जिले की गुफाओं में (जो कि पाकिस्तान बॉर्डर के पास है) छिपे बैठे आईएसआईएस आतंकियों के खिलाफ सबसे बड़े गैर परमाणु बम जीबीयू-43 का इस्तेमाल किया, जिसमें 90 से ज्यादा आतंकी मारे गए। खास बात यह कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ बताया। आपने भी अखबारों व चैनलों में इस बम के बारे में पढ़ा-सुना होगा और किसी बम के लिए ‘मदर’ संज्ञा के प्रयोग से चौंके भी होंगे। लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि आखिर जीबीयू-43 नाम का ये बम क्यों ‘मदर ऑफ ऑल बम्स है’? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

जाहिर है, इस सबसे बड़े बम की ऊपर दी हुई तस्वीर आपने देख ही ली होगी, इसीलिए शुरुआत करते हैं इसके वजन से। तो जनाब दिल थाम कर सुनें। इस भीमकाय बम का वजन है 21600 पाउंड यानि 9797 किलो। यह जीपीएस आधारित गैर परमाणु बम है, जिसे अफगानिस्तान में लॉकहीड एमसी-130 एयरक्राफ्ट से गिराया गया। इस बम को अमेरिकी सेना के लिए अल्बर्ट वीमोर्ट ने विकसित किया था।

बता दें कि इस बम का पहला टेस्ट आज से 14 साल पहले 2003 में किया गया था। याद दिला दें कि यह साल इराक युद्ध का था। इसालिए टेस्ट के बाद इस बम को इसी युद्ध के दौरान बना भी लिया गया, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार पिछली बार जब ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ का टेस्ट किया गया था तब 20 मील यानि करीब 32 किलोमीटर दूर से भी एक बड़े मशरूम के आकार का धुआं उठते देखा गया था।

कुल मिलाकर यह कि अपने आकार, वजन और मारक क्षमता के कारण ही जीबीयू-43 ‘मदर ऑफ ऑल बम्स है’। पर बताया जाता है कि अमेरिकी के चिर प्रतिद्वंद्वी रूस ने अमेरिका के इस बम का जवाब देने के लिए ‘फादर ऑफ ऑल बम्स’ विकसित किया है, जो तथाकथित रूप से ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ से चार गुणा ज्यादा शक्तिशाली है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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अब मोदी ने लालू को 21वीं सदी का सबसे बड़ा जमींदार बताया

भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद यादव पर फिर बड़ा हमला करते हुए कहा कि वे 21वीं सदी के सबसे बड़े जमींदार हैं। बकौल मोदी उनकी एक जगह नहीं, कई जगहों पर जमीन है। फर्जी कंपनी बनाकर वे जमीन हड़पने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजद सुप्रीमो की तीस कंपनियां हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन मात्र तीन पतों पर है। ये कंपनियां काले धन को सफेद करती हैं।

गौरतलब है कि मोदी लालू और उनके परिवार पर एक के बाद एक घोटाले का आरोप लगा रहे हैं। पहले उन्होंने मिट्टी घोटाले का आरोप लगाया, फिर जमीन घोटाले की बात कही। उसके बाद कहा कि लालू ने बिहटा में शराब फैक्ट्री खुलवाकर करोड़ों की संपत्ति बनाई। सिर्फ 55 हजार निवेश कर करोड़ों की जमीन के मालिक बन गए वगैरह-वगैरह।

प्रश्न उठता है कि लालू पर लगातार हमलावर मोदी को दस्तावेजी सबूत आखिर मिल कहां से रहे हैं? कुछ लोगों का मानना है कि इसके पीछे बीएसएससी घोटाले में आईएएस सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के से उपजी आईएएस लॉबी की नाराजगी है। जेडीयू से भाजपा में आए ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू का भी कहना है कि कुछ अधिकारी मोदी के मददगार बने हुए हैं। स्वयं सुशील कुमार मोदी भी दावा कर रहे हैं कि बिहार सरकार में शामिल लोग ही उनकी मदद कर रहे हैं।

बहरहाल, इन सारे घटनाक्रम के मद्देनज़र अब कई लोग दबी जुबान से लालू-नीतीश के संबंधों में आई खटास को इन सबकी वजह बता रहे हैं। कहने की कोई जरूरत नहीं कि अगर इस कयास में थोड़ी भी सच्चाई है तो इसका अर्थ यह है कि महागठबंधन सरकार संकट में है।

उधर राजद सुप्रीमो ने अपनी पार्टी के सारे प्रवक्ताओं को बुलाकर कहा कि इन आरोपों से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। बकौल लालू तेजस्वी और तेजप्रताप की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सुशील मोदी अनर्गल और असंगत आरोप लगा रहे हैं। लालू ने यह भी कहा कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है। ये सब उनकी और उनके परिवार की छवि खराब करने की साजिश है। यही नहीं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि लालू ने अपने सारे प्रवक्ताओं को स्वयं ट्रेनिंग भी दी कि मीडिया में इन आरोपों का किस तरह मंहतोड़ जवाब दिया जाय।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने की दहेज लेने वालों की शादियों में न जाने की अपील

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से दहेज लेने वालों की शादी में शिरकत नहीं करने की अपील की है। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी शादियों में मत जाइए। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। बता दें कि नीतीश मंगलवार को मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज परिसर में चंपारण सत्याग्रह स्मृति वर्ष, 2017 को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी, फिर नशाबंदी और अब दहेजबंदी लागू कराना है। चंपारण सत्याग्रह के सौवें वर्ष में बापू को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए अभी से तैयारी करें, तभी 2019 तक यह संभव हो पाएगा। नीतीश प्रधानमंत्री को याद कराना नहीं भूले कि वे उस राज्य से आते हैं, जहां राज्य के स्थापना काल से शराबबंदी लागू है। लगे हाथ उन्होंने प्रधानमंत्री से यह आग्रह भी किया कि कुछ राज्य शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट हाइवे को डिनोटिफाइ कर परिवर्तित करने में जुट गए हैं। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे तिकड़म लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में आई कमी की चर्चा भी की और शराबबंदी के बाद राज्य को हुए लाभ व उपलब्धियां गिनाईं। इशारों ही इशारों में उन्होंने विपक्ष की जमकर खबर ली और कहा – ‘पूर्ण शराबबंदी कानून को तालिबानी कानून बताने वालों की अब बोलती बंद हो गई है’। नीतीश ने स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए कहा कि किसी भी बड़े और सार्थक प्रयास का पहले मजाक उड़ाया जाता है, फिर विरोध होता है और धीरे-धीरे लोग साथ आ जाते हैं। अब हमारा मकसद गांधी के संदेशों और विचारों को घर-घर तक पहुंचाना है। अगर दस प्रतिशत युवाओं तक यह संदेश हम पहुंचाने में सफल रहे तो यह प्रयास सार्थक साबित होगा।

बकौल नीतीश नई पीढ़ी को गांधी के विचारों से जोडऩा ही अब उनका मकसद है। उम्मीद की जानी चाहिए कि शराबबंदी के बाद वे जिस तरह दहेजबंदी के विरुद्ध कमर कस कर लग चुके हैं, इसके सुखद परिणाम से भी हम बहुत जल्द रू-ब-रू हो सकेंगे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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