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क्या आपको आखिरी बार ‘अप्पा’ पुकार सकता हूँ ?

करीब छह दशक तक तमिलनाडु की सियासत के केन्द्र बिन्दु रहे, द्रविड़ अस्मिता के प्रतीक, डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि बुधवार शाम चेन्नई के मरीना बीच पर चिर निद्रा में सो गए। करुणानिधि को उनके लाखों चाहने वालों की मौजूदगी में उनके गुरु अन्‍नादुरई के समीप पूरे राजकीय सम्‍मान के साथ समाधि दी गई। करुणानिधि को द्रविड़ नेताओं द्वारा अपनाई परम्परा के मुताबिक एक ताबूत में रखकर दफनाया गया जिस पर 33 साल पहले खुद उन्‍हीं का लिखा हुआ स्मृति-लेख अंकित था। तमिल में लिखे इस स्‍मृति लेख का हिन्दी में अर्थ है – “एक शख्स जो बिना आराम किए काम करता रहा, अब वह आराम कर रहा है।” करुणानिधि के इस स्‍मृति लेख में उनके पूरे जीवन का सार छिपा हुआ है।

इससे पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक नेता और कार्यकर्ता की भूमिका से आगे बढ़कर एक बेटे के नाते दिवंगत कलाईनार (कलाकार) से उन्हें ‘अप्पा’ कहने की इजाजत मांगते हुए बेहद मार्मिक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्‍होंने करुणानिधि के स्‍मृति लेख का जिक्र करते हुए लिखा है – “आप जहां भी जाते थे ,वह जगह मुझे बताते थे। अब आप मुझे बिना बताए कहां चले गए? आप हमें लड़खड़ाता छोड़ कहां चले गए? 33 साल पहले आपने बताया था कि आपकी स्मृति में क्या लिखा जाना चाहिए – ‘यहां वह शख्स लेटा है जिसने सारी जिंदगी बिना थके काम किया।’ क्या अब आपने तय कर लिया है कि आप तमिल समाज के लिए काम कर चुके हैं?”

स्टालिन ने आगे लिखा – “या आप कहीं छिप कर देख रहे हैं कि क्या कोई आपके 80 साल के सामाजिक जीवन की उपलब्धियों को पीछे छोड़ सकता है? 3 जून को अपने जन्मदिन पर मैंने आपसे आपकी क्षमता का आधा मांगा था… क्या आप अपना दिल मुझे देंगे? क्योंकि उस बड़े दान से हम आपके अधूरे सपनों और आदर्शों को पूरा करेंगे।”

पत्र के अंत में स्टालिन ने करुणानिधि से उन्हें एक आखिरी बार ‘पिता’ कहने की इजाजत मांगी, तो जिसने भी इसे पढ़ा उसकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने लिखा “करोड़ों उडनपिरपुक्कलों (डीएमके काडर) की ओर से मैं आपसे अपील करता हूं कि बस एक बार ‘उडनपिरप्पे’ बोल दीजिए और हम एक सदी तक काम करते रहेंगे। मैं आपको अप्पा कहने की जगह अपने जीवन में ज्यादातर समय ‘थलाइवर’ (नेता) कहता रहा। क्या आपको आखिरी बार ‘अप्पा’ पुकार सकता हूँ?”

बता दें कि पांच बार तमिलनाडु के सीएम रहे एम करुणानिधि का मंगलवार देर शाम चेन्‍नई के कावेरी हॉस्पिटल में निधन हो गया था। तमिलनाडु की राजनीति में उनका करीब 6 दशकों तक दखल रहा। एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के अलावा वह इकलौते ऐसे नेता थे जिन्होंने हर वर्ग में अपनी जगह बनाई। अनवरत साठ वर्षों तक विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री आदि पदों पर रहते हुए उन्होंने केन्द्र में प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र तक के कार्यकाल को देखा – ऐसा बिरला अवसर देश में किसी को नहीं मिला। करुणानिधि केवल एक दिग्गज नेता ही नहीं थे, वे एक आला दर्जे के कलाकार (कलाईनार), साहित्यकार और संपादक भी थे। उनकी शख्सियत एक संस्था में तब्दील हो चुकी थी, जिसने कई पीढ़ियों को संस्कारित और आंदोलित किया था। अखिल भारतीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति रखने वाले और 94 साल तक हम सबके बीच रहे उस हाड़-मांस वाले ‘आंदोलन’ को हमारा प्रणाम..!

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मधेपुरा जिला को 31 दिसम्बर तक ओडीएफ घोषित करें- डीएम

डीआरडीए के झल्लू बाबू सभागार में जिले के विकास योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता कर रहे डीएम नवदीप शुक्ला ने जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों को शौचालय निर्माण को लेकर कई निर्देश दिए और गंभीरता पूर्वक उपस्थित अधिकारियों, पदाधिकारियों एवं इस कार्य में लगे कर्मचारियों से यही कहा कि हर हाल में जिले को 31 दिसंबर 2018 तक ओडीएफ घोषित करने में लग जाएं।

बता दें कि जिले को ओडीएफ घोषित किए जाने के अलावे मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से बन रहे गली नाली योजना,  प्रधानमंत्री आवास योजना एवं दाखिल-खारिज सहित अन्य विभिन्न योजनाओं की समीक्षा डीएम ने गंभीरता पूर्वक की तथा पीएम आवास योजना की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अन्य सभी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर बल दिया।

यह भी कि डीएम नवदीप शुक्ला (भा.प्र.से.) ने मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे बसेरा अभियान कार्य में तेजी लाने का निर्देश देते हुए सख्त हिदायत दी कि किसी भी योजना को समय से पूरा नहीं करने की लापरवाही को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम ने जिले के सभी सीओ को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि 8 अगस्त तक हर हाल में “दाखिल-खारिज” के कार्यों का निष्पादन करें।

अंत में सूबे में धड़ल्ले से हो रहे महिला यौन शोषण एवं उत्पीड़न के मद्देनजर जिले भर में महिला सशक्तिकरण को लेकर डीएम ने महिला उत्थान के निमित्त जिला, अनुमंडल, प्रखंड एवं पंचायत स्तर तक ‘यौन उत्पीड़न शिकायत निवारण केंद्र’ खोले जाने की घोषणा की। उस कमिटी में स्थानीय स्तर पर एक सामाजिक कार्यकर्ता को नामित किया जाएगा वहीं समाज कल्याण तथा महिला विकास का एक पदाधिकारी भी होगा।

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मधेपुरा के एथलीट गीतांजलि की राह चलें

बिहार की उड़नपरी कहलाने वाली राष्ट्रीय एथलीट एवं सूबे की राजधानी पटना के सीआईडी विभाग में कार्यरत कोसी की बेटी गीतांजलि की स्मृति में पांचवी बार आयोजित गीतांजलि स्मृति रोड रेस में भाग ले रहे सौ धावकों को समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्रभारी एसपी वसी अहमद, एसडीएम वृंदा लाल एवं उप प्रमुख जयकांत यादव ने सम्मिलित रूप से हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। मालूम हो कि बिहार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों मेडल जीतने वाली धाविका गीतांजलि की असामयिक मृत्यु 6 अगस्त 2013 को पटना के कुर्जी हॉस्पिटल में हो गई थी।

बता दें कि गीतांजलि की स्मृति में लगभग 5 किलोमीटर का यह मैराथन दौड़ साहुगढ़ दुर्गा स्थान के मैदान से मधेपुरा भूपेन्द्र चौक के बीच खेल प्रशिक्षक संत कुमार की सतर्कता एवं सुरक्षा व्यवस्थानुरूप आयोजित की गई थी। लड़कियों के लिए खेदन बाबा चौक से ही यह दौड़ शुरू की गई । भले ही लड़कियों की संख्या इस बार कम थी परंतु ये जज्बाती धाविकाएं गीतांजलि को कभी मरने नहीं देंगी…..। इतनी लंबी दौड़ पूरी कर समस्त धावक-धाविकाओं ने गीतांजलि को श्रद्धांजलि दी और वे सभी गीतांजलि फाउंडेशन की ओर से पुरस्कृत भी हुए।

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri in presence of Up-Pramukh Jaikant Yadav, Dr.Alok Kumar, Prithwiraj Yaduvanshi, Sanjeev Kumar, Anand Kumar & others giving Special Prize to "Khel Guru" Sant Kumar on the occasion of the 5th Gitanjali Memorial Road Race at Madhepura.
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri in presence of Up-Pramukh Jaikant Yadav, Dr.Alok Kumar, Prithwiraj Yaduvanshi, Sanjeev Kumar, Anand Kumar & others giving Special Prize to “Khel Guru” Sant Kumar on the occasion of the 5th Gitanjali Memorial Road Race at Madhepura.

यह भी जानिए की गीतांजलि रोड रेस कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया समस्त सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों को तत्परता के साथ संपन्न करने/कराने में लगे रहने वाले मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। आगे डॉ.मधेपुरी ने सर्वप्रथम गीतांजलि की तस्वीर पर पुष्पांजलि किया तथा उपस्थित धावक-धाविकाओं व गणमान्यों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज उसी को याद करता है जो अखंड जुनून के साथ समर्पित होकर समाज व राष्ट्र को कुछ देता है……. आज यदि गीतांजलि जीवित रही होती तो निश्चय ही वह ओलंपिक की उड़ान भर रही होती…. । डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा कि मधेपुरा के एथलीट गीतांजलि की राह चलें और भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह अभाव में रहकर भी बड़े-बड़े सपने देखें……।

मौके पर इस कार्यक्रम की रीढ़ पृथ्वीराज यदुवंशी सहित जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष व उप प्रमुख जयकांत यादव एवं डॉ.आलोक कुमार द्वारा उद्गार व्यक्त किया गया और इनके अलावा सुशील कुमार, संजीव कुमार, नंद कुमार, अमरेश कुमार, समीक्षा यदुवंशी, मनीष कुमार, अमित कुमार, दिलखुश आनंद आदि द्वारा सर्वाधिक धावकों को घड़ी-जर्सी आदि देकर पुरस्कृत किया गया। उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने प्रथम स्थान पाने वाले धावक एवं धाविका सहित खेल प्रशिक्षक संत कुमार को पुरस्कार देकर मान ही नहीं किया बल्कि सहृदय होकर उन्हें सर्वाधिक सम्मान भी दिया। अंत में खेल के प्रति संत कुमार के समर्पण को देखकर डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के समस्त खेल-प्रेमियों से अनुरोध किया कि वे आज से ही उन्हें ‘खेल गुरु’ कह कर सम्मानित करते रहेंगे…… जिसे गगनभेदी करतल ध्वनि के साथ सहमति प्रदान की गई।

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अमित शाह का मिशन 22 करोड़

2014 में भाजपा जिस धूम और धमक के साथ केन्द्र की सत्ता में आई थी, इस बार वैसी बात नहीं दिखती। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब भी आकर्षण के केन्द्र हैं लेकिन 2019 में उनका आभामंडल 2014 की तरह होगा, इसका दावा शायद उनके कट्टर समर्थक भी ना करें। महागठबंधन की बढ़ती सक्रियता से भी एनडीए को और सतर्क होने की जरूरत आन पड़ी है। ऐसे में भाजपा के चाणक्य अमित शाह कुछ ऐसा फार्मूला बनाना चाह रहे हैं जिससे 2019 में भाजपा की नैया निर्विघ्न पार हो जाए। उनके मिशन 22 करोड़ को ऐसा ही फार्मूला माना जा रहा है। आखिर क्या है ये मिशन 22 करोड़? चलिए, जानते हैं।
दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अमित शाह एक नये डेटा के साथ तैयार बैठे हैं। ये डेटा है 22 करोड़ का, जिससे भाजपा को वोटों की उम्मीद है। आपको बता दें कि ये 22 करोड़ का आंकड़ा देश के उन परिवारों का है जिनके बारे में भाजपा मानती है कि उन्हें नरेन्द्र मोदी सरकार की किसी ना किसी योजना का लाभ मिला है। 2019 में पार्टी इस आंकड़े को वोट में बदलना चाहती है। अमित शाह ने पार्टी को इन 22 करोड़ परिवारों तक पहुँचने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यही कारण है कि भाजपा इन सभी 22 करोड़ परिवारों को खंगालने में लग गई है। टेलिग्राफ इंडिया डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर राज्य में एक मॉनिटरिंग सेल बनाया जाएगा। इसके बाद पार्टी कैडर को इन परिवारों से लगातार संपर्क में रहने को कहा जाएगा।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी सरकार की योजना के लाभार्थियों तक पहुँचने के लिए भाजपा ने ‘हर बूथ, 20 यूथ’ का नारा तैयार किया है। इसके तहत हर पोलिंग स्टेशन के लिए 20 युवा तैयार किए जाएंगे जिनका काम केन्द्र की योजना के लाभार्थियों से लगातार संपर्क बनाए रखना और अंतत: उन्हें वोट में तब्दील करना होगा। भाजपा का मानना है कि अगर 22 करोड़ परिवारों के लक्ष्य का आधा भी हासिल कर लिया जाए तो भाजपा का काम हो जाएगा। 2019 के चुनाव में 2014 से भी बड़ी जीत के अमित शाह के दावे और आत्मविश्वास के पीछे इन्हीं 22 करोड़ परिवारों का गणित है और साथ में 11 करोड़ कार्यकर्ताओं के समर्थन भरोसा। आपको पता ही होगा कि भाजपा 11 करोड़ सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है।
चलते-चलते बता दें कि पिछले चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर 282 सीट जीते थे। उस चुनाव में उसे कुल 17 करोड़ वोट मिले थे जो कि कुल वोटों का 31 प्रतिशत है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी की निजी लोकप्रियता और मिशन 22 करोड़ से बढ़े वोटों को जोड़ कर भाजपा पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है।

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बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का आगाज़ 9 अगस्त से ही

सामाजिक न्याय के वैज्ञानिक बी.पी.मंडल का जन्म सौ साल पूर्व 25 अगस्त 1918 को कबीर की नगरी काशी में हुआ था। 100वें सालगिरह पर जन्मोत्सव का आगाज़ 9 अगस्त यानि क्रांति दिवस के दिन से ही करने का निर्णय लिया गया है। तैयारी समिति ने निर्णय लिया है कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी की अध्यक्षता में बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ दिन के 1:45 बजेे अपराह्न से किया जाएगा।

बता दें कि कार्यक्रम का श्रीगणेश ‘मंडल गीत’ एवं सृजन दर्पण द्वारा “मंडल मसीहा की आवाज” नाटक की प्रस्तुति द्वारा किया जाएगा….। तैयारी समिति में मंडल विचार के प्रधान संपादक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.भागवत प्रसाद यादव सहित संयोजनकर्ता पीजी भौतिकी के डॉ.विमल सागर आदि गणमान्यों की उपस्थिति देखी गई। अध्यक्षता कर रहे डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा-

बी.पी.मंडल कुल 632 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहे….. और उन्होंने सभी धर्मों एवं सभी वर्णों के 3743 जातियों की पहचान की जो सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में आते हैं, जिनकी संख्या उन दिनों भारत की कुल जनसंख्या का करीब 52% हुआ करता था। परंतु, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण सीमा 50% दिए जाने के सुझाव के तहत मंडल कमीशन ने इन समस्त 3743 जातियों (जिनमें ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ….. आदि भी हैं) के लिए 27% आरक्षण देने की अनुशंसा की थी।

डॉ मधेपुरी ने आगे कहा कि मंडल रिपोर्ट को लागू करने हेतु ढेर सारी कुर्बानियां दी गईं । प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह कैबिनेट ने अपनी कुर्सियाँ गंवा दी और शरद-लालू-नीतीश, रामविलास-रंजन-रमई…….. सहित बहुतों ने अपना सुख-चैन गँवा दिया, फिर भी मंडल रिपोर्ट हु-ब-हू लागू नहीं किया जा सका। शरद यादव का ‘मंडल-रथ’ भी देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरता हुआ अंततः क्रीमी लेयर के कीचड़ में फंस ही गया।

आगे डाॅ.मधेपुरी ने विनम्रता पूर्वक समाजवादी चिंतक मधुलिमये को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान के प्रावधानों में लुक-छिपकर संशोधन करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में संशोधन करने का काम अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए।

अंत में मंडल की लौ को धीमी होने पर चिंता व्यक्त करने के बाद डॉ.मधेपुरी ने इस बाबत हाल ही में मधेपुरा आये पूर्व सांसद डॉ.रंजन प्रसाद यादव एवं उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक डॉ.विद्यासागर यादव की चर्चा करते हुए यही कहा-

मेरे सीने में नहीं, तेरे ही सीने में सही……

हो जहाँ भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए !!

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मधेपुरा के राजशेखर को मिला दिल्ली हिन्दी अकादमी का काव्य-सम्मान

मधेपुरा जिले के  भेलवा गाँव निवासी प्रसिद्धि प्राप्त युवा गीतकार राजशेखर को हिन्दी अकादमी का “काव्य-सम्मान” दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिया। इस सम्मान अर्पण समारोह की अध्यक्षता हिन्दी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष विष्णु खरे ने की। समारोह में दिल्ली हिन्दी अकादमी के सदस्यों के साथ-साथ साहित्य से जुड़े गणमान्यों की अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई।

बता दें कि फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ से ही अनवरत लोकप्रियता बटोरते रहे इस धरती पुत्र राजशेखर को 2017-18 के लिए हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा यह काव्य सम्मान दिया गया है। जानिए कि पूर्व में यह सम्मान उन विद्वान विभूतियों को दिए गए हैं जिन्होंने साहित्य, संस्कृति, समाज सेवा एवं पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है।

यह भी बता दें कि मौके पर दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम इस समारोह में विशिष्ट अतिथि रहे। इस कार्यक्रम में युवा गीतकार राजशेखर को 1लाख रूपया, ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र एवं शाॅल आदि देकर डिप्टी सीएम द्वारा सम्मानित किया गया।

अंत में दिल्ली सरकार की कला संस्कृति व भाषा विभाग की सचिव रिंकू दुग्गा की उपस्थिति में अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

 

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कमाल के कोहली

कप्तान विराट कोहली की इंग्लैंड में पहली टेस्ट सेंचुरी की बदौलत बर्मिंगम टेस्ट में भारत की उम्मीदें अभी भी जिन्दा हैं। गुरुवार को बर्मिंगम में बेन स्टोक्स की गेंद पर चौका मारते ही कोहली ने इंग्लिश धरती पर पहली बार टेस्ट शतक लगाया। यह उनके टेस्ट करियर का 22वां शतक है। कोहली ने इस पारी में 149 रन बनाए। उनकी जुझारू पारी की बदौलत पहली पारी में भारत ने 274 रन जुटाए। हालांकि इंग्लैंड के स्कोर 287 से फिर भी वह 13 रन पीछे रहा। उधर दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने एलिस्टर कुक का विकेट खोकर 9 रन बनाए और इस तरह उसकी कुल बढ़त 22 रनों की हो गई है।

बहरहाल, कोहली ने 172 गेंद की पारी में 14 चौके लगाकर अपनी सेंचुरी पूरी की। यह पारी उनकी आक्रामक पारी के विपरीत रही। उन्हें इंग्लैंड की मजबूत गेंदबाजी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा पारी में काफी लंबे समय तक उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ उपयोगी साझेदारी की। उन्होंने पहले नौवें विकेट के लिए इशांत शर्मा के साथ 35 रन जोड़े जिसमें इशांत का योगदान पांच रनों का रहा। कोहली को इसके बाद उमेश यादव का अच्छा साथ मिला। यादव ने हालांकि एक ही रन बनाया लेकिन उन्होंने दसवें विकेट के लिए कोहली के साथ 57 रन जोड़े। कोहली की इस पारी की क्या अहमियत है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके बाद दूसरा सबसे बड़ा स्कोर शिखर धवन का रहा जो केवल 26 रनों का है।

गौरतलब है कि कोहली की 149 रनों की पारी किसी भारतीय कप्तान द्वारा खेली गई दूसरी सबसे बड़ी पारी है। 1990 में मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मैनचेस्टर में 179 रनों की पारी खेली थी। वहीं मंसूर अली खान पटौदी ने 1967 के इंग्लैंड दौरे पर लीड्स में 148 रनों की पारी खेली थी।

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गावस्कर, कपिल, सिद्धू और आमिर होंगे इमरान के मेहमान

कभी खेल जगत के शीर्ष पर रहे व्यक्ति का अपने देश के शासन के शीर्ष पर जाना बड़ी बात है। इमरान खान ने यह उपलब्धि हासिल कर दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्हें चाहने वाले पहले भी दुनिया के हर हिस्से में थे पर सियासत में सक्रिय होने से लेकर उसके शिखर को छूने तक उनके व्यक्तित्व का दायरा काफी बढ़ चुका है। अब बात 11 अगस्त को होने वाले उनके शपथ-ग्रहण समारोह को ही लीजिए, भारत में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि उनकी ओर से किन शख्सियतों को बुलावा आएगा। मानकर चला जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले व्यक्ति होंगे जिन्हें इमरान निमंत्रण देंगे, लेकिन यह बड़े स्तर का कूटनीतिक निर्णय है जिसे लेने में पाकिस्तान को कई बिन्दुओं पर सोचना पड़ रहा है। लेकिन इस बीच भारत की चार शख्सियतों को इमरान का न्योता मिल चुका है। चलिए जानते हैं कौन हैं ये चारों..?

इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ओर से जिन चार शख्सियतों को न्योता भेजा गया है उनमें दो भारतीय क्रिकेट के पर्याय और इमरान के साथ दर्जनों यादगार मैच खेले सुनील गावस्कर और कपिल देव हैं। न्योता पाने वाली तीसरी शख्सियत भी क्रिकेट से जुड़ी है और अब राजनीति में भी दखल रखती है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं नवजोत सिंह सिद्धू की। और चौथी शख्सियत जिन्हें इमरान ने आमंत्रित किया है, वो हैं भारतीय सिनेमा के महत्वपूर्ण नाम आमिर खान। इमरान की पार्टी पीटीआई के प्रवक्ता फवाद चौधरी ने ये जानकारी मीडिया से साझा की।

इससे पहले इस तरह की भी खबरें आई थीं कि इमरान की ताजपोशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य विदेशी नेताओं को न्योता दिया जा सकता है। इसका खंडन करते हुए प्रवक्ता फवाद चौधरी ने मंगलवार को ट्वीट कर लिखा कि मीडिया में जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वह सही नहीं है, उनकी पार्टी पाकिस्तान के विदेश कार्यालयों से परामर्श करने के बाद सार्क देशों के प्रमुखों को बुलाने के बारे में निर्णय लेगी।

गौरतलब है कि 25 जुलाई को होने वाले आम चुनावों के नतीजों में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी थी। हालांकि सरकार बनाने के लिए 272 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में 137 सदस्यों की जरूरत होगी। वहीं इमरान की पार्टी 116 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है और वो बहुमत से 21 सीट दूर है। इस बाबत फवाद चौधरी का दावा है कि पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बकौल चौधरी इमरान की पार्टी को नेशनल असेंबली में 168 सदस्यों का समर्थन हासिल है।

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गोपालकृष्ण गांधी को राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार

सांप्रदायिक सद्भाव एवं शांति को बढ़ावा देने के प्रति सक्रियता और योगदान को देखते हुए इस साल के राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार के लिए पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी को चुना गया है। इस पुरस्कार से जुड़ी सलाहकार समिति के सदस्य सचिव मोतालाल वोरा ने कहा कि गोपालकृष्ण गांधी को यह पुरस्कार सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और भाईचारे के संवर्द्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण दिया जा रहा है। सलाहकार समिति ने यह निर्णय 28 जुलाई को आयोजित बैठक में लिया।

गौरतलब है कि यह पुरस्कार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर दिया जाता है। इसे शांति, सांप्रदायिक सद्भाव के संवर्धन और हिंसा के खिलाफ लड़ाई में उनके दीर्घकालिक योगदान की याद में शुरू किया गया था। इसके तहत एक प्रशस्ति पत्र और 10 लाख रुपये नकद दिए जाते हैं।

बहरहाल, गोपालकृष्ण गांधी यह पुरस्कार पाने वाले 24वें व्यक्ति हैं। उनसे पहले यह पुरस्कार मदर टेरेसा, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, मोहम्मद युनुस, लता मंगेशकर, सुनील दत्त, दिलीप कुमार, कपिला वात्सायन, तीस्ता सीतलवाड़, स्वामी अग्निवेश, केआर नारायणन, उस्ताद अमजद अली खान, मुजफ्फर अली, शुभा मुदगल आदि को मिल चुका है।

चलते-चलते बता दें कि गोपालकृष्ण गांधी को यह पुरस्कार नई दिल्ली स्थित जवाहर भवन में 20 अगस्त को एक विशेष कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।

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मंडल जन्मशताब्दी की सफलता हेतु जिले के सभी एमएलए एवं एमपी को बुलाएँ- डॉ.मधेपुरी

उप-विकास आयुक्त मुकेश कुमार की अध्यक्षता में जहाँ सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल की 100वीं जयंती (25 अगस्त) को यादगार बनाने की बातें कही गई वहीं स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के दिन, भव्यता के साथ सभी सार्वजनिक स्थलों पर, समारोहपूर्वक तिरंगा फहराने का निर्णय लिया गया।

बता दें कि समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा यह सुझाव दिया गया कि महामानव बी.पी.मंडल की 100वीं जयंती को यादगार बनाने हेतु आगे की एक बैठक में जिले के गणमान्यों के साथ-साथ यहाँ के सभी विधायकों और सांसद को भी पत्र देकर विशेष रूप से आमंत्रित किया जाय ताकि सामाजिक कार्यों में बेहद दिलचस्पी रखने वाले समाजसेवी द्वय सीताराम पंडित एवं मो.शौकत अली द्वारा दिए गए माकूल सुझावों का समाधान भी आनन-फानन में हो सके।

यह भी बता दें कि सुझावों की फेहरिस्त संक्षिप्त और सहज ही होने लायक है । एक ओर जहाँ डॉ.मधेपुरी ने गांधी-नेहरू-जयप्रकाश……. आदि की तरह बी.पी.मंडल के नाम के आगे ‘स्वर्गीय’ नहीं लिखे जाने के साथ-साथ जन्म जयंती दिवस को “सामाजिक न्याय दिवस” नाम देने का सुझाव दिया वहीं दूसरी ओर प्रो.श्यामल किशोर यादव ने एक कार्यक्रम मंडल की जन्म स्थली काशी में होने की बात कही तो डॉ.शांति यादव के द्वारा कहा गया कि इस जयंती के दिन स्मारिका प्रकाशन की जगह स्मृति-ग्रंथ बनाया जाय और अगली जयंती में उसका विमोचन करवाया जाय।

जानिए कि जहाँ शौकत अली ने सुझाव दिया कि बी.एन.मंडल स्टेडियम में 15 अगस्त से पहले ही मिट्टी भराई हो ताकि पानी नहीं लगे, टूटे हुए बीपी.मंडल चौक स्थित स्मारक को ठीक कराया जाय तथा 15 अगस्त एवं 25 अगस्त को हर घर में दीप जले वहीं सीताराम पंडित ने मधेपुरा के बी.पी.मंडल चौक से मुरहो के बी.पी.मंडल स्मारक तक सड़क को दुरुस्त करवाने हेतु सुझाव दिया।

चलते-चलते बता दें कि खेल गुरु संत कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार द्वारा खिलाडियों को पुरस्कारों के साथ-साथ जर्सी आदि दिए जाने वाले सुझावों को सराहा गया। साथ ही सभी विभागीय पदाधिकारियों द्वारा 15 अगस्त एवं 25 अगस्त को यातायात से लेकर एंबुलेंस एवं अग्निशामक गाड़ी आदि समस्त सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चाएं की गई। बैठक में सभी विभागीय प्रतिनिधियों के अलावे पूर्व विधायक मनीन्द्र कुमार मंडल, डॉ. अरुण कुमार मंडल, सुभाष चंद्र यादव, जयकृष्ण प्रसाद यादव, पृथ्वीराज यदुवंशी, मनीष सर्राफ, राजेश सर्राफ सहित स्थापना उपसमाहर्ता अल्लामा अख्तर, एसडीएम बृंदा लाल, एसडीपीओ वसी अहमद, जनसंपर्क पदाधिकारी महेश कुमार पासवान आदि उपस्थित रहे।

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