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सुपर-30 के आनंद कुमार मधेपुरा में

मधेपुरा के बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में फ्यूचर क्लासेस द्वारा आयोजित शिक्षा सेमिनार में जाने-माने गणितज्ञ एवं सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार ने मधेपुरा के प्रतिभा संपन्न बच्चों से यही कहा कि धैर्य के साथ लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मैदान में तब तक डटे रहना जब तक तुम अपने लक्ष्य को पा नहीं लो…… और हां ! उस अवधि में ध्यान को लक्ष्य से अलग कहीं भटकने नहीं देना….. साथ ही अपनी कमजोरियों को ताकत बनाकर सफलता प्राप्त करने तक हर पल लगे रहना…….।

Mathematician Anand Kumar addressing at BN Mandal Auditorium Madhepura.
Mathematician Anand Kumar addressing at BN Mandal Auditorium Madhepura.

बता दें कि शिक्षा सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि गणितज्ञ आनंद कुमार, बीएनएमयू के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, डीएम नवदीप शुक्ला , एसडीएम वृंदालाल, रहमानी-30 के ओबैदुर रहमान आदि अन्य लोगों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया और आनंद कुमार को श्रृंगीऋषि के सिंहेश्वरनाथ बाबा भोलेनाथ मंदिर का दिव्य चित्र भेंट किया डीएम , कुलपति , समाजसेवी भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी व कुंदन कुमार आदि ने।

मौके पर जहाँ कुलपति डॉ.ए.के.राय ने कहा कि इस तरह के आयोजन से छात्रों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है वहीं जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए धैर्य के साथ अंत तक मैदान में डटे रहना चाहिए।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri presenting his book "Chhota Lakshya Ek Apradh Hai" to Super 30 founder Anand Kumar at BN Mandal Auditorium Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri presenting his book “Chhota Lakshya Ek Apradh Hai” to Super 30 founder Anand Kumar at BN Mandal Auditorium Madhepura.

इस अवसर पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संग लिखी अपनी पुस्तक- “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” की एक प्रति गणितज्ञ आनंद कुमार को भेंट करने के बाद छात्रों से अभावों में जिंदगी जीने वाले डॉ.कलाम, आनंद कुमार जैसे अनेक उदाहरण पेश करते हुए बस यही कहा कि अपने अतीत को याद किये बिना ना तो कोई अपने भविष्य को गढ़ सकता है और ना ही वर्तमान में आगे बढ़ सकता है। डॉ.मधेपुरी ने आगे कहा कि आर्यभट्ट जैसा गणितज्ञ, गोरखनाथ जैसा अर्थशास्त्री और वशिष्ठ नारायण सिंह जैसा गणित ज्ञानी के बाद सूबे बिहार की धरती को यदि कोई गणितज्ञ गौरवान्वित करने जा रहा है तो उसका नाम है- सुपर थर्टी का सुपर आनंद कुमार।

चलते-चलते यही कि भीड़ इतनी और ऑटोग्राफ व सेल्फी लेने वाले छात्र-छात्राओं में जोश इतना कि आनंद सर को गाड़ी तक पहुंचाना पुलिस के लिए मुश्किल हो गया।

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मधेपुरा जिला में 70वाँ गणतंत्र की मची रही धूम

मधेपुरा जिला मुख्यालय से लेकर दूरस्थ सभी प्रखंडों में, विश्वविद्यालय मुख्यालय के महाविद्यालयों में तथा सरकारी व प्राइवेट विद्यालयों से लेकर छोटे-बड़े सभी चौक-चौराहों पर 70वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्साह पूर्वक तिरंगा लहराया गया। चारों ओर गणतंत्र दिवस की धूम मची रही।

Dr.Madhepuri addressing children after flag hoisting at Bhupendra Chowk , Madhepura.
Dr.Madhepuri addressing children after flag hoisting at Bhupendra Chowk , Madhepura.

बता दें कि जहाँ भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो.(डॉ.)अवध किशोर राय ने गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वजत्तोलन के बाद छात्र एवं शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर चिंतित दिखे वहीं एनर्जेटिक डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) द्वारा बीएन मंडल स्टेडियम में ध्वजोत्तोलन करने के बाद खेल  आदि अन्य विधाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के जरिये जिले को ऊंचाई प्रदान करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते देखा गया।

Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri addressing kid & guardians at Genius Public School, Misson Road Madhepura
Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri addressing kid & guardians at Genius Public School, Misson Road Madhepura

यह भी बता दें कि 70वें गणतंत्र के सूर्योदय के साथ ही प्रातः 7:00 बजे डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में सर्वप्रथम राष्ट्रीय ध्वज फहराया मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। ध्वजोत्तोलन के बाद डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से कहा कि आज की तारीख यानी 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू किया गया और आपका सुयोग्य नागरिक बनना ही संविधान का सम्मान है। उन्होंने बच्चों को भारत का भविष्य बताया।

पुनः 8:00 बजे सुबह डॉ.मधेपुरी द्वारा भूपेन्द्र चौक पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय ध्वजोत्तोलन स्कूली बच्चे-बच्चियों व गणमान्यों के बीच किया गया और तिरंगे को सलामी देने के बाद उन्होंने कहा कि संविधान सभा के 308 सदस्यों में एक चतरा निवासी कमलेश्वरी प्रसाद यादव भी थे। जहाँ एक ओर डॉ.मधेपुरी ने यू.के इंटरनेशनल और नन्हें कदम (प्ले स्कूल) के बच्चों को जमकर उत्साहित किया वहीं दूसरी ओर सेंट जॉन पब्लिक स्कूल एवं जीनीयस पब्लिक स्कूल के छात्रों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम उनसे यही कहा करते थे कि तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है उसे बच्चों को देखकर जाना- इसलिए डॉ.मधेपुरी आज दिन भर बच्चों के कार्यक्रमों में व्यस्त दिखे।

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भारतरत्न से विभूषित होंगे प्रणब, नानाजी और हजारिका

केन्द्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक नानाजी देशमुख और गायक भूपेन हजारिका को भारतरत्न देने की घोषणा की है। नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को मरणोपरांत यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलेगा। बता दें कि इस बार भारतरत्न की घोषणा चार साल बाद हुई है। इससे पहले 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं स्वतंत्रता सेनानी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को भारतरत्न से नवाजा गया था।

2012 से 2017 तक देश के राष्ट्रपति रहे प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में रहे हैं। उनका जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के मिराती में हुआ था। 1969 में वे राज्यसभा के सदस्य बने और आगे चलकर वित्त, रक्षा, विदेश, विधि और वाणिज्य जैसे मंत्रालयों को संभाला। उनके संसदीय अनुभव और अद्भुत कार्यकुशलता का लोहा विरोधी भी मानते हैं। वे न केवल बहुत बड़े व सम्मानित स्टेट्समैन बल्कि अपने आप में चलते-फिरते संस्थान हैं।

नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक, समाजसेवी और भारतीय जनसंघ के नेता थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक छोटे से कस्बे में 11 अक्टूबर 1916 को हुआ था। नानाजी बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर समाज सेवा के क्षेत्र में आए। इसके बाद संघ के सरसंघचालक डॉ. केवी हेडगेवार के संपर्क में आकर संघ के विभिन्न प्रकल्पों के जरिए पूरा जीवन राष्ट्रसेवा में लगा दिया। 27 फरवरी 2010 को 95 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 में असम के सादिया जिले में हुआ था। गायक, गीतकार और संगीतकार के रूप में उनकी अप्रतिम ख्याति है।1936 में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। 1977 में उन्हें पद्मश्री, 2001 में पद्मभूषण, 2012 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। 5 नवंबर 2011 को उनका निधन हो गया। उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि उनकी अंतिम यात्रा में 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे।

चलते-चलते बता दें कि इन तीन विभूतियों से पहले 45 हस्तियों को भारतरत्न सम्मान दिया जा चुका है। अब यह संख्या 48 हो गई है।

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मधेपुरा में कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाई गई

जननायक कर्पूरी ठाकुर की 96वीं जयंती शिवनंदन प्रसाद  प्रसाद मंडल विधि महाविद्यालय मधेपुरा में जदयू के जिलाध्यक्षता प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिसमें पार्टी नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, प्रो.गुलहसन, अशोक चौधरी, विद्यानंद महतो, अशोक कुमार सिन्हा, महासचिव योगेंद्र महतो, दयानंद शर्मा, रामानंद यादव, मनोज राय, विजय कुमार सिंह, उमेश महतो, मो.शफीक, दिलीप साह, अधिवक्ता सरोजनी देवी, डॉ.नीरज कुमार सहित विभिन्न प्रखंडों से आये कार्यकर्ताओं ने जननायक के तैलचित्र पर पुष्पांजलि की एवं अपने उद्गार व्यक्त किया |

मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ताजिंदगी अपने जीवन को सार्वजनिक बनाये रखे | एक बार डिप्टी सीएम एवं दो बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कुर्सी उन पर कभी हावी नहीं हो सकी | उन्होंने सदा समाज को जोड़ने का काम किया…… कभी किसी के प्रति घृणा या कटुता का भाव नहीं रखा | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि जननायक आसमान की ऊंचाई पाने के बावजूद भी वे हमेशा जमीन से जुड़े रहे |

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोसमय हुआ मधेपुरा

आजादी के दीवाने सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस 23 जनवरी को मधेपुरा के बीचो-बीच अवस्थित उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम नगरपालिका के प्रथम उपाध्यक्ष समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित किसान मजदूर-शिक्षक-व्यापारी सभी मिलजुलकर आज सबेरे माल्यार्पण किये एवं शेष सबों ने पुष्पाञ्जलि की।

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों से नेताजी के बाबत यही कहा कि उनका जन्म 1897 ई. में उड़ीसा के कटक में अपने पिता जानकी बोस एवं माता प्रभावती की नौवीं संतान के रूप में हुई थी। कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर उन्होंने IAS की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने नौकरी नहीं की। देश सेवा में लग गये। 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। लगे हाथ उन्होंने पूरी दुनिया का भ्रमण किया। रासबिहारी बोस के आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन किया। महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता कहकर सर्वप्रथम उन्होंने ही संबोधित किया था। अंत में डॉ.मधेपुरी ने अपनी ‘आजादी’ शीर्षक कविता की चन्द पंक्तियाँ बच्चों के साथ साझा किया।

गोखले तिलक गाँधी सुभाष, नेहरु लोहिया जयप्रकाश।

सभी दीवाने आजादी के, कर दिया एक क्षिति महाकाश।।

आओ सब मिलकर करें बंधु, आजादी का शत् अभिनंदन।

इनके ललाट पर करें नित्य, अपने अनंत श्रम का चंदन।।

DM Navdeep Shukla paying his tributes to Neta Jee Subhash Chandra Bose at Samaharnalaya Madhepura.
DM Navdeep Shukla paying his tributes to Neta Jee Subhash Chandra Bose at Samaharnalaya Madhepura.

पुनः दिन के 11 पूर्वाह्न में समाहरणालय सभाकक्ष में नेताजी सुभाष चंद्र की भव्य तस्वीर पर डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार की टीम के सारे पदाधिकारी एडीएम शिवकुमार शैव, उपेंद्र कुमार झा, डीडीसी मुकेश कुमार, खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार, एनडीसी रजनीश कुमार एवं कार्यालय कर्मियों सहित समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी द्वारा पुष्पांजलि की गई। दिनभर शहर के प्रायः सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा नेताजी को श्रद्धांजलि दी गई, उन्हें याद किया गया।

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फरवरी में होगा सभी प्रमंडलों में सम्मेलन करेगी जदयू

फरवरी में जदयू सभी प्रमंडलों में भव्य सम्मेलन का आयोजन करेगी जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल होंगे। जदयू के इस प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन में संबंधित प्रमंडल के पार्टी के सभी सांसद, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, प्रदेश पदाधिकारी, प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, सभी सक्रिय साथी एवं नीतीश कुमार की नीतियों एवं आदर्शों में आस्था रखने वाले लोग मौजूद रहेंगे।

बता दें कि जदयू के प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन की शुरुआत शनिवार 9 फरवरी 2019 को तिरहुत प्रमंडल से होगी। इसके उपरान्त रविवार 17 फरवरी को दरभंगा प्रमंडल, शनिवार 23 फरवरी को कोसी प्रमंडल, रविवार 24 फरवरी को पूर्णिया प्रमंडल, सोमवार 25 फरवरी को भागलपुर प्रमंडल, मंगलवार 26 फरवरी को मुंगेर प्रमंडल, बुधवार 27 फरवरी को मगध प्रमंडल एवं गुरुवार 28 फरवरी को सारण प्रमंडल में सम्मेलन का आयोजन होगा।

अभी जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष हैं, जदयू के इन सम्मेलनो का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने इन सम्मेलनों को ऐतिहासिक बनाने के लिए दल के सभी साथियों को अभी से जुट जाने को कहा है। उन्होंने इस संदर्भ में जारी अपने बयान में कहा है कि पार्टी की कोशिश है कि आगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए की जीत हो।

गौरतलब है कि पिछले लगभग एक वर्ष से पंचायत, प्रखंड, जिला व प्रदेश स्तर पर लगातार कार्यक्रम कर जदयू ने जिस तरह जमीन से जुड़ने और आमलोगों के बीच जाने का प्रयास किया है वह अपने आप में अभूतपूर्व है। चाहे सभी जिलों में जदयू का अतिपिछड़ा सम्मेलन और रोड शो हो, जिला व प्रमंडल स्तर पर दलित-महादिलत सम्मेलन हो, सभी जिलों में अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन एवं महिला समागम हो या फिर विभिन्न प्रकोष्ठों द्वारा चलाया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम और सभी संगठन प्रभारियों का पंचायत, प्रखंड व जिला स्तर पर लगातार बैठकों का दौर, जदयू ने हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं और समाज-सुधार अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने की प्रशंसनीय कोशिश की है।

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कोसी के महान कवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर व्याख्यान

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा एवं महाकवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य व्याख्यानकर्ता डॉ.ललितेश मिश्र, पूर्व विभागाध्यक्ष , स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग (बीएनएमयू) ने कोसी अंचल के कवियों के काव्य-कुसुमों की चर्चा करते हुए कहा कि महाकवि यदुवर राष्ट्रीय चेतना के काव्य सृजन में अग्रगण्य रहे हैं। इन्हें साहित्य एवं राष्ट्रप्रेम विरासत के रूप में प्राप्त हुआ था क्योंकि पं.यदुवर जी महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक बाबू रास बिहारी लाल मंडल के अभिन्नतम मित्र थे। उनकी भाव साधना के समान ही शब्द साधना भी विलक्षण रही है।

डॉ.मिश्र ने आगे कहा कि पं.यदुनाथ झा यदुवर की यशस्वी कृति ‘मिथिला गीतांजलि’ है जो उनकी राष्ट्रीय चेतना का सशक्त संवाहक है। यदुवर जी में राष्ट्रीयता की गंगा ताजिंदगी प्रवाहित होती रही। पूर्व में विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने ऐसी परिचर्चा की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाकवि यदुवर कोसी अंचल के काव्य मुकुटमणि हैं। यदि कहीं स्वर्ग है तो मिथिला की धरती पर ही है क्योंकि मिथिला की नदियों का तीर नंदन-कानन से कम रमणीक नहीं है। यह यदुवर जी की राष्ट्रीय भावना की उद्ददाम अभिव्यक्ति है। उनकी कविताओं में कालचक्र का स्वभाविक रूप से मौलिक चित्रण मिलता है जिस कारण पाठक देश पर मर मिटने को तत्पर हो उठते थे। वे काव्य जगत में नवीन चेतना लेकर प्रादुर्भूत हुए थे।

सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोगों के अंतर्मन में राष्ट्रीयता का संचार करना ही राष्ट्रीय कविता का लक्ष्य है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि महाकवि यदुवर सामाजिक समस्याओं को लेकर ही राष्ट्रीय कविताओं का सृजन किया है। याद रहे कि सामाजिक सद्भाव एवं पारस्परिक एकता ही तत्कालीन भारत की सामायिक समस्याएं थी।

अपने संबोधन में पूर्व कुलसचिव शचीन्द्र, प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, सुबोध कुमार सुधाकर, सुरेंद्र भारती, ध्रुव नारायण सिंह राई, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.विश्वनाथ विवेका, प्रो.मणि भूषण. डॉ.विनय कुमार चौधरी आदि ने प्रायः यही कहा कि महाकवि यदुवर की राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताओं में स्थायित्व का समावेश है और समाजिकता का प्रतिबिंब भी। सबों ने यही कहा कि सुंदर, कोमल एवं भावाभिव्यंजक शब्दों के चयन करने में कविवर यदुवर सिद्धहस्त रहे तथा अपने हृदय का रस व रंग भरकर सहज ही राष्ट्रीय काव्य संस्कार को अलंकृत करते रहे।

द्वितीय सत्र में कविवर द्वय परमेश्वरी प्रसाद मंडल दिवाकर एवं त्रिवेणीगंज के तारा नंदन तरुण की स्मृति में आयोजित काव्यगोष्ठी का संचालन किया प्रो.मणि भूषण वर्मा ने और इस काव्य गोष्ठी में जिन कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा तालियां बटोर ली, वे हैं- सुबोध कुमार सुधाकर, डॉ.सिद्धेश्वर, राई,  सुरेंद्र भारती , उल्लास मुखर्जी , सियाराम यादव मयंक, राकेश कुमार द्विजराज, संतोष कुमार सिन्हा , डॉ.कौशल कुमार, डॉ.आलोक कुमार, विकास रंगकर्मी, डॉ.विश्वनाथ विवेका, मोहम्मद मुख्तार आलम, रघुनाथ प्रसाद यादव, श्यामल कुमार सुमित्र, डॉ.हरिनंदन यादव आदि। मौके पर बैजनाथ रजक, संजय भारती, तारा शरण, प्राण मोहन यादव, किशोर श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। अंत में सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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मुख्यमंत्री ने किया सहरसा विद्युत उपकेन्द्र का शिलान्यास

शनिवार, 19 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड के सिंहौल में 300 करोड़ की लागत से बनने वाले 400/220/132 केवी विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में सर्वप्रथम केन्द्रीय विद्युत और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह को सहरसा में पावर ग्रिड निर्माण करवाने के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर काम किया गया है। जहां वर्ष 2005 में 24 लाख उपभोक्ता थे और मात्र सात सौ मेगावाट बिजली की खपत थी, वहीं वर्ष 2017 में 4,535 मेगावाट बिजली की खपत हुई और अभी 5,139 मेगावाट बिजली की खपत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 2012 के भाषण के दौरान मैंने कहा था कि अगर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराउंगा तो वर्ष 2015 के चुनाव में वोट मांगने नहीं जाऊॅगा। तब से बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। 2015 में सात निश्चय के अंतर्गत हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को समय से पूर्व ही 25 अक्टूबर 2018 को प्राप्त कर लिया गया। अब हर इच्छुक व्यक्ति जिसने बिजली का कनेक्शन लेना चाहा, उन तक बिजली पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना पर काम कर रही है और केन्द्र सरकार के सहयोग से हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में और सहुलियत हुई। समय से पूर्व लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्होंने राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के योगदान की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि 31 दिसंबर 2019 तक सभी जर्जर तारों को बदलने का नया लक्ष्य रखा गया है। हर किसान के खेतों तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये 31 दिसंबर 2019 तक अलग कृषि फीडर के निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगले तीन साल में बिहार में सभी बिजली कनेक्शन प्रीपेड हो जाएगा। इससे लोगों को बिल भुगतान में सुविधा होगी। बिजली बिल में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक बिल आने पर लोक शिकायत निवारण कानून के तहत शिकायत करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम काम के आधार पर वोट मांगते हैं, न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। हर तबके और हर इलाके के विकास में लगे हैं। बिहार की जनता जब तक मौका देगी हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति एवं काम के प्रति रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के आने से अंधेरा, भूत का डर खत्म हो गया है और ढिबरी और लालटेन की उपयोगिता समाप्त हो गयी है।

कार्यक्रम को केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, लघु जल संसाधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, एससी-एसटी कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, प्रधान सचिव ऊर्जा प्रत्यय अमृत एवं अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पावर ग्रिड आईएस झा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू, विधायक डॉ. अब्दुल गफूर, विधायक रत्नेश सदा, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, नॉर्थ बिहार कॉरपोरेशन के एमडी संदीप कुमार, कोसी प्रमंडल की आयुक्त सफीना एन., मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, सहरसा की जिलाधिकारी शैलजा शर्मा, पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारीगण, पावर ग्रिड इंडिया लिमिटेड के अधिकारीगण, अभियंतागण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

चलते-चलते बता दें कि सहरसा विद्युत उपकेन्द्र 300 करोड़ रूपये की लागत से 36 माह में बनकर तैयार होगा। इसके अलावा राज्य सरकार इसके संचरण के लिए रिंग नेटवर्क के निर्माण में 354 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च करेगी। यह भी जानें कि केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में तीन पावर ग्रिड का शिलान्यास किया गया है। बकौल मुख्यमंत्री इससे बिजली आपूर्ति में काफी सहूलियत होगी और बढ़ी हुई बिजली की आवश्कताओं को पूरा किया जा सकेगा। लोगों को पूरी गुणवत्ता के साथ बिजली मिलेगी। बात जहां तक कोसी की है, यह सुखद संयोग है कि केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री और राज्य सरकार के विद्युत मंत्री दोनों इसी कोसी क्षेत्र के हैं। इससे इस क्षेत्र में ऊर्जा संबंधी समस्याओं का समाधान और आसानी से हो सकेगा।

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मधेपुरा के वृद्धों एवं दिव्यांगों के लिए भूकम्प सुरक्षा सप्ताह !

मधेपुरा के बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन के द्वारा 18 जनवरी को माॅक ड्रिल यानि State Disaster Response Force (SDRF) की टीम के नेतृत्व में मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खासकर जिले के प्रायः सभी प्रखंडों से आये हुए दिव्यांग बच्चों एवं उनके माता-पिता व वृद्धों से इंस्पेक्टर हंसलाल गुप्ता व एसआई राम लखन की टीम के विंध्याचल प्रसाद, सिकन्दर कुमार, प्रमोद राय, अशोक शर्मा, सुनील पाल, कुंदन भारती आदि की उपस्थिति में यही कहा –

हौसले बुलंद एवं इरादे मजबूत हो तो दुनिया में कुछ भी पाना आसान हो जाता है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने दोनों पैरों से विकलांग विल्मा रूडोल्फ जैसी ओलंपिक में 4 गोल्ड मेडल जीतने वाली धाविका, कंचन गोवा जैसी नेत्रहीन पर्वतारोही जो दर्जनों अंतरराष्ट्रीय मेडल जीत चुकी है……. के साथ-साथ अन्य दिव्यांगों की कहानी को विस्तार पूर्वक सुना-सुनाकर खूब तालियां बटोरी और तमाम दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान ला दिया | उन्होंने उपस्थित जनों से यही कहा कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संदेश को आप तक पहुंचाने आया हूं- जैसा उन्होंने मुझसे कई बार कहा था-

ये आँखे दुनिया को दोबारा नहीं देख पायेगी…….

अतः तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को

देकर जाना…… बच्चों को देकर जाना |

भला क्यों नहीं, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक व वरीय उपसमाहर्ता एवं खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के अनुरोध पर तीनों जिले (मधेपुरा-सहरसा-सुपौल) के लिए आये हुए SDRF के 40 सदस्यों वाली कंपनी की एक टुकड़ी के सदस्यों द्वारा दिव्यांगों को भूकंप आने पर घर के अंदर छिपने की जानकारियां दी गई और सबों को यह भी बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को उठाने के तरीके क्या होंगे…… जिसमें एक व्यक्ति, दो व्यक्ति या तीन व्यक्ति द्वारा उठाने के तरीकों को भी डिमोंस्ट्रेट कर दिखाया गया | अन्त में डॉ.मधेपुरी ने दिव्यांगों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील डॉ.कलाम के बाबत यही कहा-

वह गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम अंतिम सांस तक दिव्यांग बच्चों के जीवन संवारने में, वृद्धों एवं रोगियों के चेहरों पर मुस्कान लाने में लगे रहे | उन्हें सर्वाधिक प्रसन्नता तब होती जब भी हृदय रोगियों की धमनियों में “कलाम- राजू कोरोनरी स्टेंट” तथा विकलांग बच्चों को “लाइटवेट फ्लोर रिएक्शन ऑर्थोसिस कैलिपर्स” लगाने के पश्चात उनकी तकलीफों को कुछ हल्का होते देखा करते | उनकी मान्यता रही कि विज्ञान के दरवाजे ऐसे हरेक व्यक्ति के लिए खुले रहेंगे जो मानवता की भलाई के लिए कार्यरत हैं | कार्यक्रम के अंत में सचिव अरुण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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दुनिया की पहली ड्राइवरलेस बुलेट ट्रेन सर्वप्रथम चीन में शुरू

350 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बिना ड्राइवर के चलने वाली दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन शनिवार से चीन में शुरू हो गई है जिसका नाम “फुकिंग्स बुलेट ट्रेन” रखा गया है |

यह भी बता दें कि पहले दिन यह बुलेट ट्रेन बीजिंग-शंघाई रेलवे लाइन पर 17 डिब्बों के साथ 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली | चायना एकेडमी ऑफ़ रेलवे साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार इस बुलेट ट्रेन की लंबाई 439 मीटर है जिसमें 1283 (एक हज़ार दो सौ तेरासी) लोग एक बार में बैठकर सफर कर सकेंगे |

उक्त एकेडमी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बुलेट ट्रेन ऑटोमेटिक ही रवाना होगी तथा भिन्न-भिन्न स्टेशनों के बीच ऑटोमेटिक ऑपरेट भी होती रहेगी | शोधकर्ताओं ने बताया कि चीन में बना यह बुलेट ट्रेन ‘फुक्सिंग’ विगत 1 वर्ष से ट्रायल किया जाता रहा है | तभी तो चीन के एक्सपर्टों का मानना है कि सेफ्टी के ख्याल से यह बुलेट ट्रेन सर्वाधिक सही है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बुलेट ट्रेन में एक अटेंडेंट तैनात किये गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस बुलेट ट्रेन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी तो नहीं है | ट्रेन में बेहतर सुधार हेतु एक अटेंडेंट दिया जाना आवश्यक भी माना गया है |

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