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मधेपुरा के 8 लाख लोगों की जिन्दगी खतरे में

आई एम ए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के रिपोर्ट के अनुसार कोसी के लोग खून की कमी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। खान-पान में अनियमितता के कारण एनीमिया पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कुल मिलाकर यहां लगभग 40% से अधिक लोग एनीमिया से ग्रसित हैं।

बता दें कि इस इलाके में 3 लाख महिलाएं रक्तअल्पता की शिकार हैं। साल लगते-लगते 140 लोग मौत के मुंह में धीरे-धीरे समाते चले जा रहे हैं। स्थिति भयावह है। प्रतिदिन बद् से बद्तर होती जा रही है। चिकित्सकों द्वारा मौत होने के कारण को रक्त अल्पता ही बताया जाता है।

यह भी जानिए कि डॉक्टरों के अनुसार यहाँ के लोगों की स्थिति प्राय: चाय-कॉफी एवं अन्य मिलावटी पदार्थों के सेवन से दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। हाल ही में 2000 लोगों की जाँच किए जाने के बाद 80% लोगों के शरीर में खून की कमी पाई गई। यहाँ तक कि 40% लोगों में 10 ग्राम से भी कम खून पाया गया।

चिकित्सकों के अनुसार रक्त अल्पता के लक्षणों को लोग खुद भी महसूस सकते है। जब कभी किसी भी व्यक्ति को कमजोरी होने लगे, थकावट महसूस होने लगे तथा यादाश्त में तेजी से कमी होने लगे तो उसे शीघ्रातिशीघ्र मान लेना चाहिए कि उसके शरीर में रक्त की कमी होने लगी है। इसके अतिरिक्त समय से पूर्व चमड़ी में झुर्रियों के साथ-साथ मामूली कामों में भी सांसे फूलने लगे, घाव हो जाने पर ठीक होने में अधिक समय लगने लगे और दिल की धड़कने बढ़ने लगे तो शरीर को खून की कमी की बीमारी से ग्रसित मान कर तुरंत डॉक्टर से संपर्क साधना चाहिए। यदि किसी कारण से डॉक्टर से मिलने में विलंब हो तो तत्काल रक्त अल्पता से बचाव हेतु बिल्कुल बंद कर दें- चाय-कॉफी एवं अम्ल विरोधी खाद्य पदार्थों का उपयोग……… और शुरू कर दें हरा मटर, चना, अंडा, मछली, दूध, पालक, अखरोट, हरी सब्जी, दाल, काजू-किशमिश एवं बादाम, खजूर आदि।

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इसे कहते हैं मजबूत लोकतंत्र के लिए मतदान के प्रति समर्पण

लोकसभा चुनाव को लेकर तीसरे चरण में कोसी क्षेत्र के मधेपुरा एवं सुपौल के मतदाताओं द्वारा मतदान के प्रति अटूट समर्पण देखने को मिला। मतदाताओं में मतदान के प्रति अजीबोगरीब जोश देखा गया….. कोई चचरी पर तो कोई नाव से नदी पार कर बूथ पर गए…… तो कोई स्ट्रेचर या ट्रैक्टर पर सवार होकर मतदान केंद्र तक पहुंच गए….।

यह भी बता दें कि सुपौल के एक परिवार के सर्वाधिक वृद्धजन के निधन हो जाने के बावजूद शेष सभी जन चल दिए पहले करने मतदान…… और बाद में गए श्मशान। उन लोगों ने तो “पहले मतदान फिर जलपान” जैसे स्लोगन को भी मात दे दिया।

जानिए कि अबतक 22 राज्यों के 302 लोकसभा सीटों पर चुनाव संपन्न हो चुका है। तीसरे फेज में जहां सबसे अधिक मतदान 80.74% के करीब असम में हुआ वहीं सबसे कम 12.86% वोटिंग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग सीट पर हुई। और तो और, जहां कोसी क्षेत्र के मधेपुरा व सुपौल क्षेत्र में हल्की-फुल्की बारिश के बीच सुहावने मौसम में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का निर्भीकतापूर्वक जमकर प्रयोग किया वहीं केरल में वोटिंग के दौरान बेशुमार गर्मी से 8 मतदाताओं की मौत हो गई तथा 4 पोलिंग अफसर बेहोश हो गए। देश के विकास के लिए वोटरों ने खूब बहाया अपना पसीना।

और तो और…. जहां गुजरात के जूनागढ़ लोकसभा सीट के बाणेज गाँव में मात्र 1 मतदाता के लिए एक मतदान केंद्र बनाया गया वहीं छत्तीसगढ़ के शेरडांड गांव में बनाए गए एक बूथ पर मात्र 4 मतदाताओं ने आधे घंटे में ही 100% मतदान का रिकॉर्ड बना लिया। इन दोनों बूथों पर वोट डालते हुए देखने के लिए देश ही नहीं विदेश से भी पत्रकार पहुचे थे… लाइव कवरेज भी किया गया जिसे सारा संसार देखता रहा।

यह भी बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी मतदान करने में महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं जबकि पहली बार वोट डालने वाली युवा मतदाताओं ने मधेपुरा अबतक को बताया कि धर्म, जाति एवं क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर देश की मजबूती के लिए उन्होंने मतदान किया है। सुहावने मौसम में वे 6:00 बजे प्रातः से ही वोटिंग के लिए पंक्ति में लग गई जबकि कहीं-कहीं ईवीएम में खराबी के चलते घंटे-डेढ़ घंटे तक मतदान प्रभावित रहा। उनकी शिकायत पर डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी नवदीप शुक्ला द्वारा जानकारी मिलते ही मधेपुरा प्रखंड के बूथ नंबर 121 पर उसे बदल दिया गया। मतदान शुरू होने के दौरान ही 26 बैलट यूनिट एवं 22 वी वी पेट में खराबी आने के कारण बदला गया। कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा। अपनी-अपनी जीत के दावे करने वाले तीनों प्रत्याशियों सहित मतदाताओं, चुनाव कर्मियों एवं जिला प्रशासन के शीर्ष पदाधिकारी डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार को मधेपुरा अबतक की ओर से कोटि-कोटि साधुवाद।

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तीसरे चरण में मधेपुरा समेत पांच सीटों पर मतदान संपन्न

बिहार में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण की पांच सीटों – मधेपुरा, सुपौल, अररिया, खगड़िया और झंझारपुर – के लिए मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। छिटपुट घटनाओं को छोड़ इस दौरान कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। इन सीटों पर कुल मिलाकर 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अलग-अलग देखें तो मधेपुरा में 59.12 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि सुपौल में मतदान का प्रतिशत 62.80, अररिया में 62.34, खगड़िया में 58.83 और झंझारपुर में 56.92 रहा।

बता दें कि इन पांचों लोकसभा क्षेत्रों में 89.09 लाख से ज्यादा मतदाताओं के लिए 9,076 मतदान केन्द्र केन्द्र बनाए गए थे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के नक्सल प्रभावित सिमरी बख्तियारपुर, अलौली एवं बेलदौर विधानसभा क्षेत्रों में मतदान चार बजे ही समाप्त हो गया था, जबकि अन्य सभी क्षेत्रों में मतदान का कार्य शाम छह बजे तक जारी रहा। इस चरण के मतदान को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सभी मतदान केन्द्रों पर अर्धसैनिक बलों और बिहार सैन्य बल की तैनाती की गई थी और मतदान के लिए 58 हजार से ज्यादा मतदानकर्मियों को लगाया गया। हालांकि प्रारंभ में कुछ स्थानों पर ईवीएम खराब होने की सूचना मिली थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।

गौरतलब है कि इस चरण की पांच सीटों के लिए पांच महिला उम्मीदवार सहित कुल 82 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मधेपुरा की चर्चित सीट के लिए जदयू के दिनेश चन्द्र यादव, राजद के शरद यादव और मौजूदा सांसद व जाप प्रमुख राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के बीच मुकाबला है। मुकाबले के त्रिकोणीय होने से जदयू को लाभ होने की बात कही जा रही है। मधेपुरा के अलावे झंझारपुर में भी त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। यहां जदयू के रामप्रीत मंडल, राजद के गुलाब यादव और निर्दलीय देवेन्द्र प्रसाद यादव के बीच दिलचस्प त्रिकोण बन रहा है। बाकी तीन सीटों सुपौल, अररिया और खगड़िया में आमने-सामने की लड़ाई है। सुपौल में जदयू के दिलेश्वर कामत और कांग्रेस की रंजीत रंजन, अररिया में भाजपा के प्रदीप सिंह और राजद के सरफराज आलम तथा खगड़िया में लोजपा के महबूब अली कैसर और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी के बीच सीधा मुकाबला है।

चलते-चलते बता दें कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों के लिए सभी सात चरणों में मतदान होना है। पहले चरण में 11 अप्रैल को चार तथा दूसरे चरण में 18 अप्रैल को पांच लोकसभा क्षेत्रों में मतदान संपन्न हो चुका है। मतों की गिनती 23 मई को होनी है।

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मधेपुरा ने बनाया भरपूर मतदान का मन

लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण के मतदान के लिए बिहार के मधेपुरा, सुपौल, अररिया, खगड़िया, झंझारपुर समेत देश के अन्य क्षेत्रों में प्रचार का शोर थम गया है। सारे राजनीतिक दल प्रचार के दौरान अपने-अपने वादे कर चुके हैं। अब कल 23 अप्रैल को जनता की बारी है।

बता दें कि चुनाव में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था के साथ-साथ निष्पक्ष, भयमुक्त एवं शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए मधेपुरा जिला प्रशासन संकल्पित है। चुनाव से संबंधित गश्ती दल, फ्लैग मार्च एवं अन्य तैयारियों को लेकर मधेपुरा डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार ने मधेपुरा अबतक से कहा कि मतदातागण अपने वोट का भविष्य निर्भीकतापूर्वक खुद ही तय करेंगे। भयमुक्त मतदान का संकल्प दोहराते हुए जिला प्रशासन ने कहा कि जिले के सीमाक्षेत्र के साथ-साथ सीमा से सटी नदियों में भी गश्ती दल की तैनाती की जाएगी। विशेष जानकारी के लिए हेल्पलाइन नं. 1950 जारी किया गया है।

यह भी बता दें कि जिला प्रशासन ने चुनाव आयोग के निर्देशानुसार शतप्रतिशत मतदान कराने के उद्देश्य से मधेपुरा की ‘कराटे क्वीन’ सोनी राज को जिले की इलेक्शन आइकॉन बनाया है। आज सुबह अपने दायित्व-निर्वहन के क्रम में सोनी राज मधेपुरा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पार्क पहुंची जहां बड़ी संख्या में शहर के स्त्री-पुरुष व बच्चे अपने-अपने खंडों के ओपन जिम में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे। वहीं मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के सहयोग से सोनी राज ने सबको एकत्रित किया और फिर उनसे अनुरोध किया कि वे कल के मतदान के लिए सबसे अपील करें।

इस मौके पर डॉ. मधेपुरी ने कलाम पार्क में आए बैंक लीड ऑफिसर एके झा, संतोष कुमार झा, प्रो. उपेन्द्र प्रसाद यादव, शब्बीर अहमद, निर्मल तिवारी सहित उपस्थित तमाम लोगों से कहा कि लोकसभा का यह चुनाव देश के रहनुमाओं का चुनाव है। उन्होंने कहा कि हमें ध्यान रहना चाहिए कि नेताओं के पास पथ छोड़ कुपथ पर जाने के हजारों रास्ते हो सकते हैं, परन्तु उन्हें सुपथ पर लाने के लिए हमारे पास बस एक ही हथियार है, और वह है हमारा वोट।

डॉ. मधेपुरी ने सभी को ‘पहले मतदान, फिर जलपान’ का संकल्प दिलाया और कहा कि इवीएम का बटन दबाते समय हम यह अवश्य सोचें कि देश किन हाथों में सुरक्षित रहेगा और उन्हें ही अपना बहुमूल्य मत दें। आप अपने आसपास के सभी मतदाताओं को साथ लेकर मतदान केन्द्र पर जाएं और मतदान में भागीदार बनकर लोकतंत्र को मजबूत बनाएं और देश की प्रगति का हिस्सा बनें।

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अभिनंदन के लिए ‘वीर चक्र’ की सिफारिश

बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्‍तानी विमानों की घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब देने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हाल ही में देश और दुनिया का ध्यान खींचने वाले और वीरता का पर्याय बन चुके अभिनंदन के लिए भारतीय वायुसेना ने ‘वीर चक्र’ की सिफारिश की है। इसके साथ ही खबर है कि भारतीय वायुसेना ने सुरक्षा कारणों के चलते उनका कश्‍मीर से तबादला भी कर दिया है। अभी वह श्रीनगर स्थित एयरबेस पर तैनात थे। बताया जाता है कि उन्‍हें पश्चिमी सेक्‍टर के किसी महत्‍वपूर्ण बेस पर ही तैनात किया जाएगा।

गौरतलब है कि बीते 26 फरवरी को बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने 27 फरवरी की सुबह भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश की थी। पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ते हुए विंग कमांडर अभिनंदन ने एक एफ-16 विमान को मार गिराया था। इसी क्रम में उनके मिग बाइसन विमान में भी आग लग गई थी और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना के बाद विंग कमांडर अभिनंदन विमान से इजेक्ट कर पैराशूट के सहारे सुरक्षित उतरने में कामयाब रहे, लेकिन वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में उतरे जहां स्थानीय लोगों और पाकिस्तान की सेना ने उन्हें कब्जे में ले लिया।

पाकिस्तानियों के चंगुल में फंसने और बंदी बनाए जाने के बावजूद जांबाज अभिनंदन ने भारतीय वायुसेना के बारे में दुश्‍मनों को कुछ नहीं बताया था। आखिरकार, चौतरफा अंतरराष्‍ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्‍तान को भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान को वापस सौंपना पड़ा, जिसके बाद पूरे देश ने खुशियां मनाई थीं। आज एक बार फिर पूरा देश गौरवान्वित है अपने वीर पुत्र के सम्मान पर। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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बेटियाँ बोझ नहीं, जिन्दगी का दूसरा नाम होती है

भारतीय समाज में बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता सर्वाधिक क्रूर हो चुकी है। धारणा यहाँ तक बन गयी है कि बेटियाँ परिवार के लिए बोझ होती है। बेटियाँ सिर्फ लेने के लिए होती है, देने के लिए नहीं। तभी तो अधिकांश परिवारों में बेटियों को बासी और बेटों को ताजा भोजन परोसा जाता है। बेटा को अच्छे पोशाक के साथ अच्छे स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाता है।

बता दें कि समाज में बेटी के महत्व को लेकर लोगों को जागरुक करने तथा लिंगानुपात के अंतर को पाटने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सामाजिक योजना की शुरुआत 2015 के 22 जनवरी को की। इस योजना के लागू होते ही नन्ही-मुन्नी बेटियाँ क्या कहने लगी है अपने पापा से-

चलते-चलते थक गई….. कंधे पे बिठा लो ना पापा !

अंधेरे से डर लगता है….. सीने से लगा लो ना पापा !

अब स्कूल पूरा हो गया….. कॉलेज में पढ़ने दो ना पापा !

धरती पर बोझ नहीं होती बेटियाँ…. दुनिया को समझा दो ना पापा !

ये समझाने की नहीं, बल्कि गहराई में उतर कर महसूसने की बातें हैं। हाल ही में कोलकाता की 19 वर्षीय राखी दत्ता नाम की बेटी अपने पिता के लीवर की गंभीर बीमारी का इलाज कराते-कराते थक चुकी थी। जब कोलकाता के डॉक्टरों द्वारा इलाज करने की पूरी कोशिश नाकामयाब हो गई तो वह बेटी राखी अपने पिता को लेकर हैदराबाद के एआईजी (Asian Institute of Gastroenterology) अस्पताल चली गई।

यह भी जान लीजिए कि जांचोपरांत वहाँ के सभी डॉक्टरों ने एक स्वर से यही कहा कि इस मरीज की लंबी आयु के लिए केवल और केवल लीवर ट्रांसप्लांट ही करना होगा। यह सुनते ही बेटी राखी ने तुरंत हाँ कर दी। सारी औपचारिकताओं को पूरी करने के बाद राखी दत्ता ने अपने पिता को 65% लीवर डोनेट कर उन्हें दूसरी नई जिंदगी दे दी……। तब से जितने लोगों ने यह कहानी सुनी….. सबों ने एक स्वर से यही कहा- “बेटियाँ बोझ नहीं….. जिंदगी का दूसरा नाम होती है।”

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मधेपुरा जिले में शत-प्रतिशत मतदान कराने हेतु प्रशासनिक पहल

संपूर्ण जिले में लोकसभा चुनाव में 9579 पंजीकृत दिव्यांग मतदाताओं के लिए कुल 102 दिव्यांग बूथ बनाये गये हैं। दिव्यांग मतदाताओं को सरकारी स्तर पर हर प्रकार की सुविधा दिये जाने की व्यवस्था की गई है ताकि शत-प्रतिशत दिव्यांग मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।

बता दें कि मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा में 22 दिव्यांग बूथ, बिहारीगंज विधानसभा में 34 दिव्यांग बूथ, सिंहेश्वर विधानसभा में 34 दिव्यांग बूथ एवं मधेपुरा विधानसभा में 12 दिव्यांग बूथ चिन्हित किये गये हैं। इन सभी चिन्हित 102 मतदान केंद्रों पर रैंप की व्यवस्था की गई है। साथ ही व्हील चेयर के अतिरिक्त पेयजल, बिजली एवं शौचालय की भी व्यवस्था की गई है।

यह भी बता दें कि इन दिव्यांग बूथों पर दिव्यांग एवं वृद्ध व लाचार मतदाताओं के सहायतार्थ स्काउट एवं एनसीसी कैडेट तैनात रहेंगे। जिला स्काउट एंड गाइड के जिला आयुक्त जयकृष्ण यादव ने कहा कि जिला प्रशासन ने स्काउट एंड एनसीसी कैडेटों के बेहतर कार्यों को देख देखकर उन्हें दिव्यांग बूथों पर तैनात करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांग व वृद्ध एवं लाचार मतदाताओं की सहायता के लिए स्थानीय केशव  कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्काउट एण्ड एनसीसी कैडेटों को विधिवत ट्रेनिंग देने हेतु प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया।

जिला आयुक्त श्री यादव ने मधेपुरा अबतक से कहा कि चुनाव के दिन यानि 23 अप्रैल को सभी प्रशिक्षित कैडेट अपने-अपने गणवेश में सभी चिन्हित बूथों पर तैनात रहेंगे। सभी को चुनाव विभाग द्वारा निर्गत परिचय-पत्र दिया जाएगा। इन प्रशिक्षित कैडेटों का काम होगा – दिव्यांगों को बूथ पर लाना ,बैठाना, पानी पिलाना…… मतदान कराकर वापस सही सलामत भूत से बाहर वाहन तक पहुंचाना। डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) ने हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया है जिसके जरिये दिव्यांग मतदाता मतदान संबंधी अन्य आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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विश्व धरोहर दिवस की शुरुआत कब से और क्यों जरूरी है ?

सर्वप्रथम ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल आफ माउंटेंस एंड साइट द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में 18 अप्रैल 1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा सर्वसम्मति से मान लिया गया। अगले वर्ष 1983 के नवंबर में यूनेस्को सम्मेलन के 22वें सत्र में यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया कि अब प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जायेगा यानी 18 अप्रैल 1984 से अब तक प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को World Heritage Day मनाया जाता है।

बता दें कि अबतक संसार में लगभग 1052 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है। इनमें इटली की 49, चीन की 45, स्पेन की 44, फ्रांस व जर्मनी की 38 और भारत की 35 धरोहरें शामिल हैं- जिनमें प्रमुख भारतीय धरोहरें हैं- ताजमहल, आगरा का किला, अजंता की गुफाएं, सांची का बौद्ध स्मारक, एलोरा की गुफाएं, खजुराहो, हुमायूं का मकबरा, बोध गया मंदिर, लालकिला, नालंदा विश्वविद्यालय आदि।

यह भी बता दें कि जब 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया तो विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिल गयी। विश्व धरोहर में शामिल होने वाली यह भारत की 33वीं धरोहर है।

जानिए कि इस नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आस-पास गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी…… 12वीं शताब्दी तक यह दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना रहा और इसमें दुनिया भर के 10 हज़ार छात्र रहकर शिक्षा ग्रहण करते रहे।

800 वर्षों तक शिक्षा दान का केन्द्र बना यह विश्वविद्यालय नालंदा जिसे तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी द्वारा जला दिया गया। वहाँ के पुस्तकालयों में इतनी पुस्तकें थी कि 6 महीने तक आग सुलगती रही, बुझ नहीं पायी। पांचवी से बारहवीं शताब्दी में नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा। लाल ईंट से बनी प्रार्थनालय वाली इमारतें आज भी सुरक्षित हैं | परंतु, वहाँ एक अदद अच्छा सा होटल तक पर्यटकों के लिए उपलब्ध नहीं है….. और आगे………।

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मधेपुरा जिले के 9579 पंजीकृत दिव्यांग मतदाता वोट डालेंगे

मधेपुरा जिले के 6700 पुरुष एवं 2879 महिला यानी कुल मिलाकर 9579 दिव्यांगों की पहचान कर सूचीबद्ध किया जा चुका है। इस बाबत सभी मतदान केंद्रों पर रैंप की व्यवस्था की गई है। साथ ही व्हील चेयर के अतिरिक्त पेयजल, बिजली व शौचालय की भी व्यवस्था है।

यह भी बता दें कि नि:शक्त जनों को सहज मतदान कराने में सहयोग के लिए वालंटियर की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। और हाँ ! 18 वर्ष से कम उम्र वाले इन वॉलिंटियर्स को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

यह भी जान लें कि प्रत्येक प्रखंड में नि:शक्त मतदाताओं यानी दिव्यांगों के लिए वाहन की भी व्यवस्था की गई है जिसे मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2019 में दिव्यांग जनों द्वारा सहज रूप से भागीदारी किया जा सके……. इस बाबत चुनाव आयोग के निर्देशानुसार तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

मधेपुरा समाहरणालय के सभागार में मंगलवार को राज्य नि:शक्तता आयुक्त डॉ.शिवाजी कुमार ने निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं की तैयारी की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दरमियान आयुक्त डॉ.कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि पहली बार ईवीएम में ब्रेल लिपि की व्यवस्था की गई है ताकि जो आँख से नहीं देख सकते हैं वैसे नेत्रहीन दिव्यांग भी वोट डाल सके। ऐसे दिव्यांग की पहचान करें जिन्हें आइकॉन बनाया जा सके।

यह भी जान ले कि वोटिंग के दौरान ग्रीन चैनल के माध्यम से उन्हें बिना पंक्ति में लगाये….. सीधा मतदान करने की विशेष सुविधा प्रदान की गई है। यह भी तय किया गया है कि पहली बार वोट डालने वाले सभी दिव्यांगों को सम्मान-पत्र प्रदान किया जाएगा।

और हाँ ! मानसिक और बौद्धिक रूप से दिव्यांगों को उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के सहयोग से मतदान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैठक में डीडीसी, पीजीआरओ, सिविल सर्जन, डीईओ, डीसीएलआर, डीपीआरओ रजनीश कुमार, उप-निर्वाचन पदाधिकारी पवन कुमार, डीपीओ गिरीश कुमार आदि उपस्थित थे।

चलते चलते यह भी बता दें कि वैसे दिव्यांग मतदाता जो मतदान केंद्र पर आने में असमर्थ हैं उन्हें पोस्टल बैलेट उपलब्ध कराया जाएगा, साथ ही हेल्पलाइन नंबर- 1950 के जरिये दिव्यांग मतदाता मतदान से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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मधेपुरा जिला अधिवक्ता संघ का 7वाँ द्विवार्षिक चुनाव संपन्न

मधेपुरा बार एसोसिएशन का सातवां द्विवार्षिक चुनाव सोमवार को भारी गहमागहमी के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया | कुल 21 पदों के लिए हो रहे चुनाव में कुल 37 प्रत्याशी मैदान में थे जिसमें दो प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए यानी चुनाव में तब 19 पद के विरुद्ध कुल 35 प्रत्याशी ही मैदान में रहे |

बता दें कि कुल मतदाता 493 को 19 पदों के विरुद्ध खड़े 35 प्रत्याशियों में से चुनने हेतु 5 मतदान केंद्र बनाये गए थे जिसमें प्रत्येक बूथ पर 100 मतदाताओं द्वारा मतदान करने की व्यवस्था की गई थी | कुल 480 वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया यानी कुल 97.36% मतदाताओं ने वोट डाले | ये सारे जागरूक मतदाता सवेरे से मतदान को लेकर उत्सुक दिखे |

यह भी बता दें कि सुबह से ही सारे अधिवक्ता मतदाता संघ भवन में बनाये गये मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगे और वोट डालने की होड़ सी लगी रही | यह भी कि जूनियर अधिवक्ता द्वारा अपने सिनियरों को मतदान करने या कराने में वरीयता का ध्यान हमेशा रखा जाता था | यूँ तो 12:00 बजे तक मतदान संपन्न होने के बावजूद अपराह्ण 3:00 बजे से मतों की गिनती शुरु हुई और देर शाम तक गिनती होती रही |

अधिवक्ता संघ के जिला निर्वाची पदाधिकारी सह वरीय अधिवक्ता अजय कुमार सहाय वर्मा ने मधेपुरा अबतक को बताया कि मतदान बिना किसी शिकायत के शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष वातावरण में संपन्न हुआ | पर्यवेक्षक राजकिशोर यादव, सोहन झा एवं विनोद कुमार सिंह की निगरानी में अध्यक्ष सचिव एवं कोषाध्यक्ष सहित 19 पदों के लिए खड़े 35 प्रत्याशियों को डाले गये मतों की गणना भी की गई | सारे कार्यों को संघ के मॉडल रूल के तहत किया गया…… चाहे वोटर लिस्ट प्रकाशन…… नाम सुधार…… पर्चा दाखिल करना या नाम वापस लेना अथवा पीठासीन/पर्यवेक्षक/गणक की नियुक्ति ही क्यों ना हो |

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बार भी चुनाव मैदान में अध्यक्ष पद के लिए खड़ी आर्या दास द्वारा नाम वापस लेने पर एक ही महिला उम्मीदवार सीमा कुमारी मैदान में बच गई | हालांकि अध्यक्ष चयनित हुए पुलकित यादव, प्रधान सचिव संजीव कुमार और कोषाध्यक्ष सदानंद यादव |

तीन उपाध्यक्ष चुने गये- गजेंद्र प्रसाद यादव, अशोक कुमार झा एवं शशि भूषण | संयुक्त सचिव के पद पर जिन तीन का चयन हुआ वे हैं – जय नारायण यादव, विजय कुमार और संतोष मानव | सहायक सचिव के रूप में तीन आये- रविंद्र कुमार मंडल, सीमा कुमारी एवं नवीन कुमार |

अंकेक्षक के 2 पदों पर अभिनंदन यादव और धरणीधर सिंह दोनों को निर्विरोध चुन लिया गया था और शेष कार्यकारिणी सदस्यों के नामों की घोषणा निर्वाचित पदाधिकारी द्वारा कर दी गयी |

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