बारिश नहीं होने के कारण सूख गये मधेपुरा जिले के 250 तालाब

मौसम की बेरुखी के कारण सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 250 से अधिक तालाब अब तक मधेपुरा जिले में सूख चुके हैं। सूखे तालाबों की सूची जिला प्रशासन द्वारा तैयार की जा चुकी है।

बता दें कि जिले में सरकारी तालाबों से कहीं अधिक संख्या में निजी तालाब हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जहाँ सरकारी तालाबों की संख्या 167 है…… वहीं जिले के अंतर्गत निजी तालाबों की संख्या 400 के आस-पास, परंतु इसमें से अधिकांश तालाब मृत अवस्था को प्राप्त कर चुके हैं।

यह भी जानिए कि अब सरकारी स्तर पर इन तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना बनाई जा रही है। इन तालाबों का जीर्णोद्धार कब तक पूरा होगा यह सरकारी अधिकारियों द्वारा कह पाना मुश्किल है। क्योंकि, मधेपुरा जिला प्रशासन ने जिला मत्स्य विभाग से सूख चुके सरकारी तालाबों की सूची लिया है। सूखे तालाबों को ‘मनरेगा योजना’ से जीर्णोद्धार की बात कही जा रही है।

जहाँ तक निजी तालाबों के जीर्णोद्धार की बात है उसके लिए आम लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। हाँलाकि जल संरक्षण को लेकर किसानों को प्रशासनिक स्तर पर जागरूक करने की पहल भी की जा रही है जबकि कोसी के इस इलाके में अभी तक पानी की समस्या नहीं देखी गई थी। लेकिन अब यहाँ का भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। इसी कारण कोसी के इलाके में भी तालाब-पोखर सूखने लगे हैं। सरकारी और निजी मिलाकर कुल 250 से अधिक तालाब सूख चुके हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिन तालाबों में अभी भी कुछ पानी बचा हुआ है उसमें पंप से पानी डालकर मछलियों को बचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र आलमनगर, चौसा, पुरैनी आदि क्षेत्रों में जहाँ पानी जमा रहता था वहाँ का जलकर क्षेत्र भी इस बार पूरी तरह सूख चुका है।

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