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राष्ट्र को समर्पित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”

आज 31 अक्टूबर को कृतज्ञ राष्ट्र संपूर्ण श्रद्धा के साथ लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की 143 वीं जयंती मना रहा है। सुबह सवेरे आयोजित “रन फॉर यूनिटी” ने यह साबित कर दिया कि संसार में सबसे बड़े हैं हमारे लौह पुरुष……. और लौह पुरुष की 182 मीटर सर्वाधिक ऊंची  स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी उन्हीं के समान है- अटल और अडिग। मजबूती ऐसी की 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और 6.5 रिक्टर पैमाने पर आये भूकंप के झटकों में भी मूर्ति की स्थिति बरकरार रहेगी।

Sardar Ballabh Bhai Patel
Sardar Ballabh Bhai Patel

बता दें कि आज ही गुजरात के नर्मदा जिले के केवाडिया में सुबह 10:00 बजे लौह पुरुष की प्रतिमा का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने- अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-
सरदार पटेल एक ऐसी महान शख्सियत थे जिनकी भूमिका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण रही। वे एक ऐसे जननेता थे जो सदैव किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहे। सरदार पटेल को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में याद किया जाता रहेगा…..! 550 से अधिक देशी रियासतों का एकीकरण कर एक संगठित भारत की रचना में उनके महत्वपूर्ण योगदानों को हमेशा याद करते रहेंगे हम…. सब ! भारत को एकता के सूत्र में पिरोने वाले उस महान शख्सियत सरदार पटेल की “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के प्रति आज यह कृतज्ञ राष्ट्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
संपूर्ण भारत इस मायने में एक मत है कि एकीकृत भारत का पूरा श्रेय सरदार वल्लभ भाई पटेल के रणनीतिक कौशल और उनकी बुद्धिमत्ता को जाता है। पटेल ने एक के बाद एक समाधान निकाला और देश को एक सूत्र में बांधा। उन्होंने जूनागढ़ , हैदराबाद……. राजस्थान आदि अनेकानेक राजवाड़ा को मिला-मिला कर एकीकृत भारत का निर्माण किया। तभी तो पटेल को एक मात्र सक्षम व्यक्ति मानते हुए महात्मा गांधी ने राज्यों की जटिल समस्याओं का हल निकालने हेतु उनसे कदम बढ़ाने के लिए कहा था।
देश के ऐसे लौह पुरुष की प्रतिमा की ऊंचाई दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति के रूप में होने से भारत गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पद्मश्री रामवनजी सुतार जैसे मूर्तिकार द्वारा डिजाइन किये गये “स्टेचू ऑफ यूनिटी” को तैयार करने में 33 महीने लगे और लगे 1700 टन ब्राँज एवं 6500 टन स्टील तथा कुल व्यय  2989 करोड़ लगे जहां मूर्ति निर्माण में सिर्फ 1653 करोड़ लगे।
भला क्यों न होगा चार धातुओं से बनी स्टेचू पर इतना खर्च जबकि 1,80,000 (एक लाख अस्सी हजार) टन सीमेंट-कंक्रीट एवं 18500 (अठारह हज़ार पाँच सौ) टन स्टील नींव में ही डाला गया है। इसके अलावे 169000 गांवों के किसानों से 135 मेट्रिक टन लोहे मूर्ति निर्माण हेतु दान मिले। यही कारण है कि अमेरिका की “स्टैचू ऑफ लिबर्टी” से दुगुनी ऊंची प्रतिमा बनी है भारत में पटेल की “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”- जिसे अनावरण करने के बाद प्रधानमंत्री ने भारत की 30 नदियों के जल से जलाभिषेक किया और सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा बरसाए गए फूल। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मची रही धूम।
इस राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर जब मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से बातें की गई तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि सरदार पटेल जैसे राष्ट्र पुरुष को सम्मान दिये जाने पर देश के रहनुमाओं को किसी प्रकार की ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए। सरदार पटेल न होते तो क्या आज यह एकीकृत भारत होता…….! कदापि नहीं !!

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कोहली ने छोड़ा सचिन को पीछे

कोहली ने स्वयं को और ‘विराट’ कर लिया है। जी हाँ, वे वनडे इतिहास में सबसे तेज 10 हजार रन पूरा करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। भारत-वेस्टइंडीज के बीच दूसरे वनडे मैच में उन्होंने ये शानदार रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यही नहीं, मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 259 पारियों में ये आंकड़ा छुआ था, जबकि कोहली को यहां पहुंचने के लिए महज 205 पारियों की ही जरूरत पड़ी।

गौरतलब है कि विराट कोहली ने 73 टेस्ट की 124 पारियों में 8 बार नाबाद रहते 6331 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 24 शतक, 19 अर्धशतक और 6 दोहरे शतक जड़े हैं। बात अगर 213 वनडे मैचों की करें, तो इसकी 205 पारियों में 36 बार नाबाद रहते हुए विराट 10,000 रन बना चुके हैं। एकदिवसीय मैचों में वे 36 शतक और 49 अर्द्धशतक लगा चुके हैं। वहीं टी20 में उन्होंने 62 मुकाबलों में 18 अर्द्धशतक की मदद से 2102 रन बनाए हैं। उधर भारतरत्न तेन्दुलकर की बात करें तो कुल 463 वनडे मैचों में उन्होंने 86.23 की स्ट्राइक के साथ 18,426 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 49 शतक समेत 96 अर्धशतक भी जमाए। बात अगर टेस्ट की करें तो 200 मैचों में उन्होंने 51 शतक और 68 अर्धशतक की मदद से 15,921 रन बनाए।

चलते-चलते बता दें कि कोहली से पहले विश्व के 12 बल्लेबाजों ने वनडे में 10,000 रन पूरे किए हैं। इनमें उनके और तेन्दुलकर (18,426 रन) के अलावे भारत के तीन और महान खिलाड़ी – सौरव गांगुली (11,363), राहुल द्रविड़ (10,889) और महेंद्र सिंह धोनी – (10,123) शामिल हैं। कुल मिलाकर, विराट कोहली का सिर्फ नाम ही विराट नहीं है। ये शख्स अपने नाम की तरह ‘विराट’ काम भी कर रहा है। रिकार्डों का अंबार लगा चुका ये नायाब खिलाड़ी वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में भी सचिन को पीछे छोड़ चुका है।

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दशहरे का दर्द ! रावण ने 60 को मार डाला !!

अमृतसर में दशहरे की शाम हुई एक बड़ी दुर्घटना के कारण दशहरे का उत्सव बड़े मातम में तब्दील हो गया। अमृतसर शहर से सटे जोड़ा फाटक के पास शाम क़रीब साढ़े छह बजे रावण दहन का कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें मुख्य अतिथि थीं पंजाब सरकार के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की धर्मपत्नी नवजोत कौर सिद्धू। बताया जा रहा है कि जब रावण के पुतले को आग लगाई गई तो मंच से लोगों को पीछे हटने की अपील की गई।भीड़ बहुत ज्यादा थी लोग रेल ट्रैक पर खड़े होकर रावण वध का वीडियो अपने-अपने मोबाइल से बनाने में मशगूल थे।ज्ञातव्य हो कि ना तो आयोजकों की ओर से और ना ही रेल कर्मियों की ओर से ही लोगों को रेल ट्रैक पर खड़ा होने से मना किया गया। जबकि लगभग 5000 लोग रेलवे ट्रैक पर खड़े थे। तभी तेज़ रफ़्तार से  आती हुई जालंधर-अमृतसर डीएमयू ट्रेन ने रेलवे लाइन पर खड़े लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। मात्र 5 सेकेंड के बाद ट्रेन के गुजरते ही चारों तरफ लाशें ही लाशें बिखरी पड़ी थी। हृृृृदय विदारक दृृृष्य…..!!

दूसरी ओर महाविजयादशमी के पवित्र अवसर पर संपूर्ण देश में दुर्गा पूजनोत्सव को लेकर भव्य आयोजनों की धूम मची थी। चारों ओर बस यही आवाजें गूंज रही थी-

हे माँ दुर्गे भवानी। जन-जन और कण-कण का कल्याण करो…. हे कल्याणी !!

जानकारी मिलते ही सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इजरायल की यात्रा रद्द कर दी और हादसे की जाँच करने की घोषणा भी कर दी। साथ ही जहाँ मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मृतक-परिवार को 5-5 लाख रुपये देने की घोषणा की वहीं प्रधानमंत्री ने प्रत्येक मृतक परिवार को 2-2 लाख देने की घोषणा की। सीएम ने घटना स्थल का मुआयना भी किया। अमृतसर रेल हादसे के बाबत एफ आई आर भी दर्ज किया गया। 4 हफ्ते में जांच रिपोर्ट भी मांगी गई। रेलवे द्वारा भी जाँच कराने की बात कही गई।

कुछ नेता लोग मृतक परिवार को सांत्वना देने के बजाय राजनीति करने में लगे हैं। कुछ इसे “हादसा” नहीं “हत्या” बता रहे हैं। कुछ 60 मृतकों के हत्यारे को तलाशने में लगे हैं….. लेकिन उन बच्चों का क्या होगा जो अनाथ हो गये…. उस परिवार का क्या होगा जिसमें कोई कमाने वाला नहीं बचा…..!!

अंत में यह भी कि इस हादसे में बिहार के 5 लोगों के मरने की पुष्टि की गई है जिनके नाम हैं- राजेश भगत (सलोना), चंद्रिका यादव (मुजौना), जितेंद्र दास एवं उनके दो वर्षीय पुत्र शिवम (ममलखा) तथा नीतीश महतो (घोसवारी)। इन बिहार निवासी पाँचो मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार द्वारा 2-2 लाख रुपये अनुदान राशि दिए जाने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके परिजनों को अनुग्रह राशि के रूप में एक लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से और एक लाख प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना से देने की बात कही है। यूं तो हादसे पर सबने अपना पल्ला झाड़ लिया, परंतु सीएम नीतीश कुमार ने इतना ही कहा कि सचेत रहने पर नहीं होती ऐसी घटना…..!

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आखिरी ओवर की अंतिम गेंद पर अविस्मरणीय जीत

एशिया कप का फाइनल मुकाबला वैसा ही रहा जैसे मुकाबलों के कारण क्रिकेट के प्रति लोगों की दीवानगी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में भारत ने अंतिम गेंद पर बाजी मारी, लेकिन अपेक्षाकृत कमजोर समझी जाने वाली बांग्लादेश की टीम ने भी अपने जुझारू खेल से खेलप्रेमियों का दिल जीतने में कोई कसर ना छोड़ी।

भारत को सातवीं बार एशिया कप जीतने के लिए 223 रनों की दरकार थी। आखिरी दो ओवर में तो उसे केवल 9 रन चाहिए थे, लेकिन 49वें ओवर में केवल 3 रन ही बने। इस तरह आखिरी ओवर में 6 रनों की जरूरत थी। महमूदुल्लाह के इस ओवर की पहली गेंद पर कुलदीप यादव ने एक और दूसरी पर केदार जाधव ने एक रन लिया। तीसरी गेंद पर कुलदीप ने दो रन लिए, लेकिन अगली गेंद पर रन नहीं बन सका। इसके बाद 5वीं और छठी गेंद पर एक एक रन लेकर कुलदीप और केदार ने भारत को जबरदस्त जुझारूपन का प्रदर्शन करने वाली बांग्लादेशी टीम पर जीत दिलाई।

दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत के लिए कप्तान रोहित शर्मा ने 55 गेंद में 3 चौकों और 3 छक्कों के साथ 48 रन बनाए। दिनेश कार्तिक ने 37 और महेंद्र सिंह धोनी ने 36 रन का योगदान दिया। चोट लगने के कारण कुछ देर मैदान छोड़कर जाने वाले केदार ने नाबाद 23 रन बनाए।

इससे पहले खिलाड़ियों की चोट से जूझ रही बांग्लादेशी टीम ने अच्छा आगाज किया। लिटन दास ने 117 गेंद में 121 रन बनाकर बांग्लादेश को अच्छी शुरुआत दी, लेकिन बाद के बल्लेबाज लय कायम नहीं रख सके। दास और मेहदी हसन मिराज (32) ने पहले विकेट के लिए 120 रन जोड़े। ऐसा लगने लगा था कि बांग्लादेश बड़ा स्कोर बनाएगा, लेकिन इसके बाद 10 विकेट 102 रन के भीतर गिर गए और पूरी पारी 48.3 ओवर में सिमट गई। चाइनामैन कुलदीप ने 45 रन देकर 3 विकेट लिए, जबकि केदार ने 9 ओवर में 41 रन देकर दो विकेट चटकाए।

चलते-चलते बता दें कि इस पूरे टूर्नामेंट में भारत अजेय रहा और सोने पर सुहागा ये कि चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को उसने इस टूर्नामेंट में दो बार हराया।

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भारत में कम हुई गरीबी, स्थिति फिर भी भयावह

गरीबी कम करने की दिशा में भारत ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र के द्वारा गरीबी को लेकर दी गई जानकारी के अनुसार साल 2005-06 से लेकर 2015-16 के बीच गरीबी दर घटकर आधी रह गई है। गरीबी दर पहले 55 फीसदी थी जो इन दस वर्षों में 28 फीसदी पर आ गई। संख्या के हिसाब से देखें तो साल 2005-06 में देश में गरीबों की तादाद 63.5 करोड़ थी, जो 2015-16 तक घटकर 36.4 करोड़ रह गई। इस आंकड़े का एक दिलचस्प पहलू यह है कि इस अवधि में कुल 27.1 करोड़ लोग गरीबी के दलदल से बाहर निकले हैं और यह आंकड़ा इंडोनेशिया की कुल आबादी से भी ज्यादा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस एक दशक में भारत में तेजी से कम हो रही गरीबी का अहम ट्रेंड यह रहा कि समाज के सबसे गरीब तबके की स्थिति में खासा सुधार हुआ है। खासकर मुस्लिम, दलित और एसटी कैटिगरी के लोगों ने इस दौरान सबसे ज्यादा विकास किया। गरीबी को दूर करने की दिशा में किए जा रहे अपने प्रयत्नों के कारण ताजा मानव विकास सूचकांक में भारत 189 देशों में एक स्थान ऊपर चढ़कर 130वें स्थान पर पहुंच गया है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि ऊपर के सारे आंकड़े हमें आश्वस्त करते हैं, लेकिन हम इस सच से हरगिज मुंह नहीं चुरा सकते कि अब भी हमारे देश में 36 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में गरीबी झेल रहे हैं। हमें पता होना चाहिए कि भारत में अब भी दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब रहते हैं और यह संख्या अमेरिका की आबादी से ज्यादा है।

आपको बता दें कि भारत में रहने वाले कुल गरीबों के आधे से भी ज्यादा यानि 19.6 करोड़ लोग केवल चार राज्यों – बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश – में रहते हैं, जबकि दिल्ली, केरल और गोवा में इनकी संख्या सबसे कम है। इन आंकड़ों की एक भयानक तस्वीर यह भी है कि 41 फीसदी भारतीय बच्चे या 10 साल से कम उम्र के हर 5 में से 2 बच्चे हर तरह से गरीब हैं। वहीं, वयस्कों यानि 18-60 साल उम्र वर्ग के लोगों में लगभग एक चौथाई (24 फीसदी) गरीब हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार की बेटी श्रेयसी को मिलेगा अर्जुन पुरस्कार

बिहार के लिए गौरव का पल। ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप की डबल ट्रैप शूटिंग स्पर्धा मे गोल्ड मेडल जीत कर बिहार का नाम रोशन करने वाली अंतर्राष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह को केन्द्र सरकार ने अर्जुन पुरस्कार देने की घोषणा की है। श्रेयसी को यह पुरस्कार 25 सितंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रदान करेंगे।

गौरतलब है कि श्रेयसी सिंह बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर की रहनेवाली हैं। वो पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बांका के पूर्व सांसद स्वर्गीय दिग्विजय सिंह तथा बांका की निवर्तमान सांसद पुतुल कुमारी की बेटी हैं। दिल्ली के हंसराज कॉलेज से स्नातक और तुगलकाबाद से शूटिंग का अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण लेने वाली श्रेयसी सिंह का अगला लक्ष्य ओलंपिक है। वो अब ओलंपिक की शूटिंग स्पर्द्धा में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना चाहती हैं।

अर्जुन पुरस्कार के लिए श्रेयसी के चुने जाने पर पूरे बिहार में खुशी और गर्व का माहौल है। इस बेहद खास मौके पर श्रेयसी की मां व पूर्व सांसद पुतुल कुमारी ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज उसके पिता (स्व. दिग्विजय सिंह) हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे जहां कहीं भी हैं, उन्हें इस बात की खुशी होगी कि उनका सपना आज पूरा हुआ।

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खिलाड़ियों के लिए हर राज्य में शुरू होंगी कई योजनाएं

जो हिमाचल प्रदेश पहले केवल एक लाख रूपये देता था खिलाड़ियों को वहीं अब ओलंपिक मेडल पाने वाले को मिलेंगे दो करोड़ की राशि यानी हिमाचल प्रदेश ने एशियाड के गोल्ड मेडलिस्ट की प्राइज मनी 200 गुना बढ़ाई है |

मध्य प्रदेश सरकार अब प्रत्येक साल 10 खिलाड़ियों को योग्यता के अनुसार नौकरी देगी | इस योजना को लागू करने हेतु बजट को बढ़ाकर 212 करोड़ किया गया है |

बता दें कि विभिन्न राज्यों में दी जाने वाली प्राइज मनी में ढेर सारी भिन्नताएं हैं | खिलाड़ियों से लेकर कोच तक सभी इस बारे में अपनी-अपनी बातें रखी हैं |

यह भी जानिए कि अब हिमाचल प्रदेश सहित पाँच राज्यों – हिमाचल, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड, दिल्ली में नई स्पोर्ट्स पॉलिसी की बातें कही गई हैं | यूँ कई राज्यों में खेल बजट कम होने के कारण बड़े बदलाव शीघ्र संभव नहीं है |

जानिए कि जहाँ हरियाणा की बजट 394 करोड़ है वहीं हिमाचल का बजट मात्र 24 करोड़ | तभी तो हरियाणा के खिलाड़ियों ने एशियाड में सबसे ज्यादा मेडल जीते हैं |

ज्यादा से ज्यादा मेडल जीतने के लिए खिलाड़ियों को खेलने की सुविधाएं, अच्छे अनुभवी कोच एवं प्राइज मनी में वृद्धि के साथ-साथ समाज एवं सरकार की सोच में समरूपता होनी चाहिए | देश का सम्मान और स्वाभिमान सर्वोपरि होना चाहिए |

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हिन्दी दिवस को आप कितना जानते हैं ?

आज दुनिया भर में भारत की पहचान जितनी अपनी सांस्कृतिक विविधताओं और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए है, उतना ही इसे हिन्दी के लिए भी पहचाना जाता है। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष भारत आएं और उन्हें भारत से निकटता प्रदर्शित करने के लिए कोई एक शब्द या वाक्य बोलना हो तो वो हिन्दी का होता है और दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनी के लिए भारत के बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए हिन्दी का सहारा लेना अनिवार्य-सा है। कारण स्पष्ट है कि हमारे देश में 77% लोग हिन्दी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं।
भारत की अनेकता में एकता का स्वर हिन्दी के माध्यम से जैसे आज गूंजता है वैसे ही 1947 से पहले भी गूंजा करता था। यही कारण है कि 1946 में स्वतंत्र भारत के संविधान के लिए बनी समिति के सामने जब राष्ट्र की भाषा का सवाल खड़ा हुआ तब संविधान निर्माताओं के लिए हिन्दी ही सबसे बेहतर विकल्प थी। यह अलग बात है कि हिन्दी को सम्पूर्ण राष्ट्र की भाषा बनाए जाने को लेकर कुछ लोग विरोध में भी थे। इसलिए हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया। खैर, जिस दिन देश को राजभाषा का दर्जा दिया गया था वो 14 सितंबर 1949 का था और इस दिन को हम आज हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं।
गौरतलब है कि पहली बार राजभाषा घोषित किए जाने के 4 साल बाद यानि 14 सितंबर 1953 को हिन्दी दिवस मनाया गया था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यह फैसला किया था। इस दिन विभिन्न सरकारी संस्थानों में हिन्दी को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत में जहां 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है वहीं दुनिया भर में हिन्दी दिवस मनाने की तारीख अलग है और वो तारीख है 10 जनवरी।
दरअसल, दुनिया भर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व हिन्दी सम्मेलन का हर साल आयोजन किया जाता है। पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस दिन के महत्व को ध्यान में रखते हुए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दुनिया भर में 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस दिन विदेशों में भारतीय दूतावास विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

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विपक्षी दलों का शक्ति-परीक्षण है भारत बंद

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और कमजोर होते रुपये के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया है। कैलास मानसरोवर की यात्रा पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अनुपस्थिति में खुद सोनिया गांधी मोर्चा संभालेंगी। दिल्ली में सोनिया गांधी की अगुआई में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर सुबह 8 बजे से धरने पर बैठेंगे। पार्टी ने कार्यकर्ताओं से बंद के दौरान शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा न करने की अपील की है। कांग्रेस का दावा है कि 21 विपक्षी दलों और कई व्यापार संगठनों ने बंद को समर्थन दिया है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने नरेंद्र मोदी सरकार पर पिछले 52 महीनों में देश की जनता से 11 लाख करोड़ रुपये ‘लूट’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार नहीं बल्कि ‘मुनाफाखोर कंपनी’ चला रहे हैं। कांग्रेस की मांग है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए जिससे इसकी कीमतें 15 से 18 रुपये प्रति लीटर गिर सकती हैं।

सोमवार के बंद को समाजवादी पार्टी, डीएमके, एनसीपी, आरएलडी, जेडीएस, आरजेडी समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने समर्थन का ऐलान किया है। वाम दलों एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने भी कांग्रेस के बंद को समर्थन का ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी की टीएमसी ने बंद से खुद को दूर रखा है। टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी ने कहा कि जिस मुद्दे पर बंद बुलाया गया है, उसे हमारा समर्थन है लेकिन पार्टी किसी भी तरह के बंद या हड़ताल के खिलाफ है। वहीं एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने जहां बंद को समर्थन की कांग्रेस की अपील ठुकरा दी है, वहीं बीजू जनता दल ने तटस्थ रुख अपनाया है। बीजेडी प्रवक्ता समीर रंजन दास ने कहा, ‘हम भारत बंद का न तो समर्थन कर रहे हैं और न ही विरोध।’

बहरहाल, कहना गलत ना होगा कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस भारत बंद को सफल बनाने के लिए एड़ी-चोटी का पसीना एक कर देंगे। उन्हें पता है कि ये बंद एक तरह से उनकी ताकत और एकता दोनों का शक्ति-परीक्षण है।

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‘अजेय भाजपा’ के नारे के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

भारतीय जनता पार्टी ने 2019 की चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। इसके लिए भाजपा संगठन चुनावों को टालते हुए आम चुनाव में मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में ही लड़ने का फैसला ले सकती है। बता दें कि अमित शाह का तीन साल का कार्यकाल अगले साल जनवरी में ही समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक संगठन चुनाव को लोकसभा चुनाव के बाद कराए जाने के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव मार्च या अप्रैल में हो सकते हैं। ऐसे में भाजपा नई टीम के साथ चुनाव में नहीं उतरना चाहती। इसलिए उसने मौजूदा टीम को ही बनाए रखने का फैसला लिया है।

बहरहाल, शनिवार सुबह भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुरुआत हुई। इस बैठक में पार्टी ने ‘अजेय भाजपा’ का नारा दिया है। बैठक का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि हम 2019 में स्पष्ट बहुमत के साथ जीत हासिल करेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद हो रही इस पहली महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी तथा सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हैं।

बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 की जीत का फॉर्म्युला पेश किया। अपने भाषण में उन्होंने साफ कर दिया कि इस बार पार्टी नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और मजबूत संगठन के अलावा गांव, गरीब, किसान, दलित, ओबीसी, आदिवासी और विपक्षी विभाजन की बदौलत जीत हासिल करेगी। शाह ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे इस बार दिवाली से पहले ही गांवों में जाकर मोदी सरकार की उपलब्धियों को पेश करते हुए दिवाली मनाकर संदेश दें कि किस तरह से मोदी सरकार की उपलब्धियों से देश जगमगा रहा है। उन्होंने विपक्षी महागठबंधन को ज्यादा तरजीह न देते हुए कहा कि यह झूठ पर आधारित महागठबंधन है और इसका कोई असर नहीं होने वाला है।

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