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कोरोना संकट में बिहार के लिए सुकून भरा संकेत

क्या बिहार, क्या भारत, सम्पूर्ण संसार कोरोना वायरस की चपेट में है। लेकिन कोरोना संकट के इस दौर में भी बिहार के लिए एक सुकून भरा संकेत है और वह यह कि यहां एक भी मरीज न तो आईसीयू में भर्ती हुआ है और न ही किसी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखने की नौबत आई है। बस पॉजिटिव मरीज को अलग वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा है। कोविड-19 इलाज के लिए समर्पित एनएमसीएच, पटना में सिर्फ दो पॉजिटिव मरीजों को ही इमरजेंसी वार्ड में रखा गया है।
बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के आईसीयू में भर्ती न होने या वेंटिलेटर पर नहीं जाने को लेकर भारत सरकार के ट्रॉपिकल डिजीज संस्थान, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप दास का मानना है कि इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला, भारत और खासकर बिहार के लोगों में कोरोना-19 के वायरस का जो घातक प्रभाव है, उसका असर नहीं होने का यह कारण हो सकता है कि यहां के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अमेरिकी और यूरोपियन लोगों से अधिक हो। उनके अनुसार, इसका दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि बिहार के लोगों को बचपन से ही विभिन्न तरह के वायरस से जूझना पड़ता है।
वहीं, दूसरी ओर एनएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ. निर्मल कुमार सिन्हा का मानना है कि बिहार पुराने समय से मलेरिया संक्रमित जोन में रहा है। कोविड-19 के इलाज में अगर कोई दवा कुछ असर कर रही है, तो वह मलेरिया की है। इसी कारण अमेरिका भारत से मलेरिया की दवा मंगा रहा है। चूंकि अमेरिका और यूरोपियन देशों में मलेरिया का कभी असर ही नहीं रहा है, ऐसे में कोविड-19 वायरस का वहीं पर गंभीर अटैक हो रहा है। बिहार में मलेरिया के कारण हो सकता है कि यहां के लोगों में उस वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो गई हो। हालांकि दोनों चिकित्सकों ने यह माना कि यह एक शोध का विषय है।

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कोरोना ने भारत के वसुधैव कुटुंबकम को भी जगाया

भारत में लोगों ने कोरोना को किसी युद्ध से कम नहीं माना है। इस युद्ध को लड़ने में सभी एकजुट दिख रहे हैं। विकसित देशों के समक्ष भारत मिसाल पेश करता दिख रहा है। युद्ध काल में पहले भी माताएं और बहनें अपना नाक-कान के आभूषण उतार कर देश के नाम दान करते देखी जाती रही हैं।

बता दें कि आज जहाँ भारत के लोग एकजुट होकर 1 दिन का वेतन दे रहे हैं वहीं हमारे सारे सांसदों ने 30% वेतन कटौती कर कोरोना को भगाने हेतु डोनेट किया है। यह 30% वेतन की कटौती मात्र 1 महीने के लिए नहीं बल्कि 1 वर्ष तक यह कटौती जारी रहेगी। इस बाबत महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि के द्वारा भी 30% वेतन कटौती से कोरोना से लड़ने वाले उपकरणों की खरीदारी की जाएगी।

यह भी बता दें कि प्रत्येक सांसद के क्षेत्रीय विकास मद के 2 वर्षों (20-21 एवं 21-22) के 10-10 करोड़ की राशि को भी कोरोना से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में आज मंजूरी दी है जबकि पिछले महीने मधेपुरा के एमएलसी ललन कुमार सर्राफ ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास निधि से कोरोना वायरस के रोकथाम एवं इलाज में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न सामग्रियों जिसमें थर्मल स्केनर, मास्क, साबुन-सैनिटाइजर, ग्लब्स, स्प्रे-मशीन, चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन किट के लिए 3 करोड़ 25 लाख रुपए की अनुशंसा एवं सहमति पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रेषित कर दी है। उन्होंने लाॅकडाउन के समय लोगों को अपने घर में रहने की अपील की तथा सबों के स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन की कामना की। कई स्वयंसेवी संस्थाएं गरीबों के साथ-साथ जानवरों को भी भोजन उपलब्ध कराने में तत्पर दिखे। कई जगह बंदर और कुत्ता को भी खाना खिलाते हुए देखा गया।

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कोरोना के विरुद्ध संकल्प की दीवाली

कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर रविवार, 5 अप्रैल 2020 को बिहार समेत पूरे देश ने एकजुटता दिखाई। शहरों से लेकर गांवों तक करोड़ों लोगों ने रात नौ बजे 9 मिनट तक घरों की लाइट बुझाकर और दीये, मोमबत्ती, टॉर्च और मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर इस महामारी से मुक्ति की दुआ की।

घड़ी में जैसे ही 9 बजे कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों ने कोरोना से लड़ने का संकल्प लिया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। खुद प्रधानमंत्री ने दीप जलाते हुए अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और एक श्लोक साझा किया जो इस प्रकार है:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यो धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोsस्तुते।।

अर्थात् जो शुभ करता है, कल्याण करता है, आरोग्य करता है, धन संपदा करता है, ऐसे दीप की रोशनी को मैं नमन करता हूँ।

इधर बिहार में भी रात नौ बजे करोड़ों लोगों ने कोरोना के खिलाफ एकजुटता का शानदार उदाहरण पेश किया। लॉकडाउन से उकताए लोग अपने-अपने घरों के दरवाजे, बालकनी और छतों पर निकल आए। लोगों ने न केवल दीप-मोमबत्ती जलाए बल्कि पटाखे भी फोड़े। लगा जैसे दीवाली आ गई हो।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपने सरकारी आवास 1, अणे मार्ग में रात नौ बजे 9 मिनट तक दीप जलाकर कोरोना संक्रमण के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। यह एक तरह से सम्पूर्ण बिहार के संकल्प का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और भी मजबूत हुई है। हमें विश्वास है कि देशवासियों की एकजुटता से हम कोरोना से मुक्ति पाने में सफल होंगे।

 

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देश ने बच्चियों के कोरोना–सहयोग को किया सलाम

एक ओर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की छोटी-छोटी बच्चियों ने अपना गुल्लक तोड़ कर जमा राशियां ले आई और पुलिस व पदाधिकारियों से बोलीं- अंकल ये लो मेरी ओर से करोना मरीज और गरीबों को खाना खिला देना। वहीं दूसरी ओर लखनऊ के पीजीआई में भर्ती बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की चार बार हुई जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने से वह घबरा गई। पुनः पांचवीं बार उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टरों ने कहा कि कनिका कपूर में हाई-लोड पाया जा रहा है, फिर भी स्टाफ, नर्स एवं डाक्टर सेवा में लगे हैं।

यह भी बता दे कि संपूर्ण देश का एक-एक व्यक्ति कोरोना को परास्त करने के लिए उस नन्हीं चिड़िया की तरह जंगल की आग बुझाने में लगा है। मधेपुरा की सामाजिक संस्था सृजन दर्पण के अध्यक्ष डॉ.ओम प्रकाश एवं सचिव विकास कुमार ने बाहर से आने वाले मजदूरों के बीच मास्क वितरण की जानकारी दी तो संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें हाथ धोने हेतु डेटॉल साबुन वितरण करने के लिए सहयोग किया और कुछ करने के लिए- उत्साह भी दिखाया।

यह भी जानिए कि आज देश भर में जहाँ जिसे जो बन पड़ता है उसी से वह कोरोना को भगाने में लगा दिखता है तथा कोरोना पीड़ित मजदूरों को मदद करता दिखता है। तभी तो संवेदनशील प्रियंका गांधी वाड्रा ने एयरटेल, रिलायंस, वोडाफोन… आदि टेलीकॉम कंपनियों के प्रधान को अलग-अलग पत्र लिखकर राष्ट्र निर्माण में लगे मजदूरों को खाना, आश्रय व दवा के अतिरिक्त एक-दो महीने के लिए फोन सेवाएं फ्री कराने की बात कही है ताकि वह मजदूर श्रमिक अपने करीबियों से संपर्क कर सके… बातें कर सकें।

 

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नीतीश ने प्रधानमंत्री से कही बिहार के मन की बात

गुरुवार, 02 अप्रैल 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जो काम हुआ है उसे देखते हुए हमलोगों को भरोसा है कि जल्द ही हम इससे मुक्ति पा जाएंगे। प्रधानमंत्री ने जो निर्णय लिया है उसका हमलोग अनुपालन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को सचेत किया गया है। बीच में कुछ परेशानी आई थी क्योंकि लॉकडाउन के दौरान भी दिल्ली से लोगों को यहां भेज दिया गया था। जितने लोग बिहार के बाहर से आए उन्हें उनके गांव तक पहुंचाया गया। उनके लिए अलग रहने, भोजन व चिकित्सा आदि का प्रबंध किया गया। उन्होंने बताया कि बिहार के दूसरे राज्यों से यहां आए लोगों को चिह्नित किया गया है। ऐसे लोगों की संख्या 1 लाख 74 हजार 470 है। इनमें 12 हजार 51 लोग विदेश से आए हैं। सभी को होम क्वारंटाइन में रखा गया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार के लिए मेडिकल सॉफ्टवेयर की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हमारा आग्रह दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर है। लेबोरेट्री टेस्ट को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार से अधिकृत टेस्टिंग किट और उसके साथ उपयोग में आने वाली अन्य सामग्री जैसे बीपी, आरएनए एक्सट्रैक्शन किट आदि को समाहित करते हुए एक सेट के रूप में दिया जाए। इसका काफी अच्छा परिणाम होगा। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की रोकथाम और उपचार की सामग्री जैसे एन-95 मास्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर आदि के इंतजाम की बात भी कही।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि कोरोना संक्रमण खत्म करने के लिए हमलोगों ने कोरोना उन्मूलन कोष का गठन किया है। इसमें विधायक-विधानपार्षद अपने-अपने कोष से कम-से-कम 50 लाख की राशि हस्तांतरित करा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब बिहार के राज्यसभा और लोकसभा सांसद एक करोड़ की राशि अपने-अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसा कर रहे हैं, लेकिन इस राशि का उपयोग नहीं हो पाएगा, क्योंकि कोरोना को लेकर जो कुछ किया जा रहा है वह किसी क्षेत्रविशेष में नहीं हो रहा है। ऐसे में उनका पैसा यूं ही बचा रह जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय इस पर विचार करे कि राज्य के सांसद यदि मदद करना चाहते हैं तो वे कोरोना उन्मूलन कोष में मदद करें। सांसदों को इसकी अनुमति मिलनी चाहिए।

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30 मार्च को बिहार में कोई नया कोरोना पॉजिटिव केस नहीं

कोरोना संकट के बीच बिहार के लिए सोमवार, 30 मार्च 2020 का दिन बहुत बड़ी राहत लेकर आया। जी हाँ, इस दिन बिहार में कोई नया कोरोना पॉजिटिव केस सामने नहीं आया। बता दें कि सोमवार देर शाम तक संभावित कोरोना मरीजों के टेस्ट सैंपल की कुल संख्या 1056 हैं। इनमें निगेटिव 1041 और पॉजिटिव 15 हैं। सोमवार को एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिलना घने अंधेरे में उम्मीद की बहुत बड़ी किरण है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार जिस मजबूती से कोरोना का सामना कर रहा है उसे देख लगता है कि यह महामारी बिहार में अपने पांव नहीं पसार पाएगी।
ध्यातव्य है कि सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1, अणे मार्ग, पटना में उच्चस्तरीय बैठक की और निर्देश दिया कि बिहार के जो लोग बाहर फंसे हुए हैं उनसे फीडबैक लेकर उनकी परेशानियों को अविलंब दूर करें, जो लोग बाहर से बिहार आ गए हैं उनकी स्क्रीनिंग, भोजन, आवासन की व्यवस्था के साथ-साथ उन्हें समुचित चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराएं तथा कोरोना के संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले संदिग्ध लोगों की गहन ट्रैकिंग करें एवं टेस्टिंग में तेजी लाएं।
पाठकों को बता दें कि अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के बाहर से आए 13000 से अधिक लोगों को उनके गांव के विद्यालय तक पहुँचाने की कार्रवाई की गई है, जहां उन्हें 14 दिन क्वारंटाइन में रखा जाएगा। सीमा आपदा राहत केन्द्रों के अलावा राज्य के शहरी इलाकों में निर्धनों, निराश्रितों के लिए कुल 120 आपदा राहत केन्द्र खोले गए हैं। उधर नई दिल्ली स्थित बिहार भवन के नियंत्रण कक्ष से 207974 व्यक्तियों की समस्याओं पर कार्रवाई की गई है और मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू, सिक्किम आदि स्थानों पर 5015 अप्रवासी बिहारियों को राहत पहुँचाई गई है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर राज्यवासियों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हए प्रत्येक व्यक्ति सचेत रहें। जो जहाँ हैं, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं। हम सब मिलकर इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम होंगे।

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लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए ‘आपदा सीमा राहत शिविर’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार, 28 मार्च 2020 की शाम 1, अणे मार्ग, पटना में समीक्षा बैठक कर सीमावर्ती क्षेत्रों में लॉकडाउन में फंसे लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से ‘आपदा सीमा राहत शिविर’ की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस शिविर में दूसरे राज्यों से आने वाले बिहार के लोगों अथवा अन्य राज्यों के फंसे लोगों को भोजन, आवासन एवं चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था की समीक्षा एवं अनुश्रवण मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोरोना संक्रमण के कारण लोगों के लॉकडाउन में फंसे होने की स्थिति को आपदा मान रही है और ऐसे लोगों की मदद उसी तरह की जाएगी जैसे अन्य आपदा पीड़ितों के लिए की जाती है।
मुख्यमंत्री के इस निर्देश के आलोक में मुख्य सचिव दीपक कुमार ने राज्य के सभी सीमावर्ती जिलों – पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, कैमूर, बक्सर, छपरा, सीवान एवं गोपालगंज के जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को एक बार फिर कोरोना संक्रमण, एईएस, बर्ड फ्लू एवं स्वाइन फ्लू को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने आज एक बड़ी पहल करते हुए मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत कोरोना उन्मूलन कोष में 7 करोड़ रुपए भी दिए।

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ब्रह्माकुमारी दादी जानकी का माउंट आबू में 104 साल में परिनिर्वाण

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संचालिका रह चुकी 104 वर्षीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दादी डॉ.जानकी का जन्म अविभाज्य भारत के सिंध प्रांत में 1 जनवरी 1916 को हुआ था। उन्हें बचपन में ही अपने माता-पिता से आध्यात्मिक संस्कार विरासत के रूप में मिला था।

बता दें कि ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय की संचालिका दादी जानकी ने 140 देशों में ब्रम्हाकुमारी की स्थापना पर विश्व की लगभग 20 लाख नर-नारियों को अपने संस्थानों से जोड़कर… सुगंधयुक्त प्रेम लुटाते हुए दिनांक 27 मार्च 2020 को माउंट आबू की एक निजी चिकित्सालय (ग्लोबल हॉस्पिटल) में अंतिम सांस ली।

जानिए कि मात्र चार क्लास तक पढ़ी एवं 14 साल की गुप्त तपस्या करने वाली दादी जानकी निरंतर आध्यात्मिक प्रेम प्रवाहित करती हुई आज अपनी दैहिक लीला समाप्त कर ली। वह हमें छोड़कर दूर भले हो गई लेकिन योग शक्ति की अद्भुत मिसाल बनकर दादी जानकी लाखों नर-नारियों के जीवन में उजाला भरकर आसमान का सर्वाधिक चमकता सितारा बन गई। तभी तो एक विश्वव्यापी संस्थान ने उनके नाम की है- “दुनिया की सबसे स्थिर मन की महिला” का विश्व कीर्तिमान।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura along with Rajyogini Ranju Didi and others inaugurating the function at Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura along with Rajyogini Ranju Didi and others inaugurating the 100th Birthday Celebration of Dadi Janki at Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Madhepura. (File Photo)

यह भी बता दें कि दादी जानकी के निधन की खबर ने कोरोना लाॅकडाउन के बावजूद देश और दुनिया में शोक की लहर पैदा कर दी। ध्यातव्य है कि दादी जानकी ने 91 वर्ष की उम्र में ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुखिया का पदभार संभाली और पूरी दुनिया को प्रेम, योग एवं ध्यान का संदेश दिया। वह 46 हजार ब्रम्हाकुमारियों की अलौकिक माँ होने के साथ-साथ 12 लाख साधकों की प्रेरणापुंज भी बनी रही… भला क्यों नहीं, उम्र के इस पड़ाव पर भी दादी माँ 12 घंटे जन की सेवा में सक्रिय रहती थी। 60 वर्ष की उम्र में वह लंदन गई और 37 वर्षों तक विदेशी जमीन पर आध्यात्मिकता के बीज बोती रही….. 140 देशों के लोग को मेडिटेशन सिखाती रही। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत स्वच्छता मिशन का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया था। आज उनके नहीं रहने पर देश-विदेश के सारे ब्रम्हाकुमारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। दादी जानकी के निधन पर भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित सारे उच्चाधिकारियों व श्रद्धालुओं ने ट्वीट के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।

चलते-चलते यह भी कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मधेपुरा शाखा की संचालिका राजयोगिनी रंजू दीदी बराबर दादी जानकी के शताब्दी जन्मोत्सव पर शिक्षाविद् व मधेपुरा के सुप्रसिद्ध समाजसेवी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करती रही और डॉ.मधेपुरी ने विस्तार से दादी जानकी द्वारा किए गए जन की सेवा की विस्तृत व्याख्यान से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करते रहे। कोरोना के कारण दादी जानकी की पुण्यतिथि पर विश्व के सभी श्रद्धालुओं ने उन्हें सादगी के साथ अपने-अपने घरों में श्रद्धांजलि दी।

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कोरोना: विधायक और विधानपार्षद अपने फंड से देंगे 50 लाख रुपए

शुक्रवार, 27 मार्च 2020 को 1, अणे मार्ग, पटना स्थित ‘नेक संवाद’ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए किए जा रहे उपायों के संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधायक एवं विधानपार्षद अपने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना निधि से न्यूनतम 50 लाख रुपए की राशि कोरोना वायरस से निबटने के लिए सहयोग के रूप में स्वास्थ्य विभाग के कोरोना उन्मूलन कोष में अंशदान करेंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत विधायकों एवं विधानपार्षदों को अपने क्षेत्र में एक वर्ष में तीन करोड़ रुपए खर्च करने का अधिकार है जो कि योजना एवं विकास विभाग के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। विधायक एवं विधानपार्षद इन्हीं तीन करोड़ रुपयों में से न्यूनतम 50 लाख रुपया कोरोना उन्मूलन कोष में देंगे। हालांकि अपनी इच्छा के अनुसार इससे अधिक राशि के अंशदान की भी अनुशंसा वे कर सकते हैं।
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग को कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए राज्य सरकार की तरफ से नोडल विभाग बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग अलग से कोरोना स्पेसिफिक अकाउंट खुलवाएगा जिसमें जल्द से जल्द उक्त राशि को हस्तांतरित किया जाएगा। इस राशि से विभाग कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए जरूरी इक्यूपमेंट, दवा, मास्क, पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट आदि की व्यवस्था करेगा। राज्य सरकार ने कोरोना वायरस से निबटने के लिए लॉकडाउन से पूर्व 13 मार्च को ही सौ वेंटीलेटर खरीदने की इजाजत दी थी। अगर इससे ज्यादा वेंटीलेटर मिल पाता है तो स्वास्थ्य विभाग और वेंटीलेटर की खरीद भी कर सकता है।
बैठक के दौरान लॉकडाउन के कारण जो लोग बिहार के बाहर फंसे हुए हैं उनको दी जाने वाली राहतों के संबंध में भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री को सभी जिलों में बनने वाले आपदा राहत केन्द्रों के संबंध में भी जानकारी दी गई। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि सभी जिलों में आपदा राहत केन्द्र फंक्शनल हो गया है। जल्द ही सभी अनुमंडल में भी आपदा राहत केन्द्र फंक्शनल हो जाएगा।
बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय झा, योजना एवं विकास मंत्री महेश्वर हजारी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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कोरोना वायरस से लड़ने में करुणा है हथियार: नरेन्द्र मोदी

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रूबरू हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने काशी की जनता के सवालों को सुनकर उन्हे जवाब भी दिए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश इस समय संकट की घड़ी से गुजर रहा है और ऐसे में काशी सबको मार्गदर्शन दे सकती है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से लोगों को घरों में ही रहने के लिए कहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत के दौरान महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि महाभारत का युद्ध 18 दिनों में जीता गया था, अब कोरोना से यह युद्ध 21 दिनों में जीतने की कोशिश है। पूरे विश्व में करीब एक लाख से अधिक लोग इस वायरस के शिकंजे से बाहर आ चुके हैं, वहीं भारत में भी दर्जनों लोग कोरोना वायरस को मात दे चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत के दौरान कोरोना वायरस से जुड़े एक हेल्पलाइन नंबर का भी जिक्र किया। इस हेल्पडेस्क को सरकार ने व्हाट्सऐप के साथ मिलकर तैयार किया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि लोग 9013151515 पर ‘नमस्ते’ लिखकर व्हाट्सऐप की हेल्पडेस्क से जुड़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने इस मौके पर सभी से गलतफहमी और अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की। अपनी बातचीत में उन्होंने डॉक्टरों को भगवान बताया। इसी के साथ उन्होने यह भी कहा कि चिकित्साकर्मियों के साथ भेदभाव करने वालों के ऊपर सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना वायरस से लड़ने में प्रधानमंत्री ने करुणा को हथियार बताया। एक व्यापारी के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस नवरात्रि के मौके को देखते हुए हम 21 दिनों में नौ परिवारों की मदद कर इस नवरात्रि को सफल बना सकते हैं।
ध्यातव्य है कि कल मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा करते हुए देशवासियों से सोशल डिस्टेन्सिंग पर अमल करने की अपील की थी।

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