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क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है..?

क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है..? अगर आप नहीं जानते तो  जानना जरूरी है आपके लिए क्योंकि ये जाने बिना आप बिहार में इंटर की परीक्षा में टॉप नहीं कर सकते। जी हाँ, चौंकिए नहीं। मैं पूरे होशो-हवास में ये लिख रहा हूँ और लिखने का कारण भी है। अरे जनाब, अगर बिहार के इंटर आर्ट्स की टॉपर कह रही हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है तो जरूर होती होगी। इस एक जवाब को गलत कहकर हम अपने ‘इंजीनियर’ मुख्यमंत्री, ‘नौंवी पास’ उपमुख्यमंत्री और नाम के पहले ‘डॉ.’ लगाने वाले शिक्षा मंत्री समेत अपनी पूरी शिक्षा-व्यवस्था को कठघरे में क्यों खड़ा कर दें भला..?

मैं कतई मजाक के मूड में नहीं। बहुत तकलीफ हो रही है आज तमाम सोशल साइट्स पर बिहार की किरकिरी होते देख। आज पूरी दुनिया हमारी शिक्षा-व्यवस्था का मजाक उड़ा रही है। बिहार में प्रतिभा के धनी छात्रों की कमी हो ऐसा हरगिज नहीं। लेकिन आज बिहार के इंटर बोर्ड की परीक्षा में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स के टॉपर्स पर जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं वो शर्मसार करने वाला है।

बिहार के शिक्षामंत्री डॉ. अशोक चौधरी के निष्पक्ष और कदाचारमुक्त परीक्षा के दावों की पोल उस वक्त खुल गई जब एक स्टिंग ऑपरेशन का विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस विडियो के अनुसार इंटर आर्ट्स की टॉपर (रूबी राय) को यह पता है कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है और साइंस टॉपर (सौरभ श्रेष्ठ) इस बात से अनभिज्ञ हैं कि इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन में क्या अन्तर होता है..?

मजे की बात तो यह कि तीनों संकाय के टॉपर एक ही कॉलेज के हैं। यह कॉलेज है वैशाली जिले के पास भगवानपुर का विशुनराय कॉलेज। बता दें कि इस कॉलेज का विवादों से पुराना नाता रहा है। पिछले साल भी यह कॉलेज रिजल्ट में गड़बड़ियों के कारण चर्चा में रहा था और शिक्षा मंत्री ने इस कॉलेज का रिजल्ट रोक दिया था। अब जब कि इस साल इस कॉलेज ने अनियमितता की सारी सीमा पार कर दी है, यह स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा विभाग ने इस पर ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई थी। आज नतीजा सामने है।

बहरहाल, बिहार के शिक्षा मंत्री ने यह विडियो देखने के बाद कहा कि विडियो देखकर उन्हें भी धक्का लगा है। यह भी बता दें कि बिहार बोर्ड ने आर्ट्स और साइंस के पहले पाँच टॉपर्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया है। यही नहीं, इनकी लिखित परीक्षा भी होगी और जरूरत पड़ने पर कॉपियों का मिलान भी किया जाएगा। बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने कहा कि इंटरव्यू में फेल होने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई होगी और उनका रिजल्ट रद्द भी किया जा सकता है।

यहाँ बोर्ड के अध्यक्ष, उनके शिक्षा मंत्री, सरकार के उपमुख्यमंत्री और सर्वेसर्वा मुख्यमंत्री से एक सीधा सवाल है कि क्या केवल उन छात्रों पर कार्रवाई से ही ये समस्या हल हो जाएगी, जबकि हम जानते हैं कि ये छात्र उस पेड़ की छोटी-छोटी टहनियां भर हैं जिसकी विशाल जड़ में ‘घुन’ बहुत पहले लग चुका था और हमने कुछ करने की जहमत नहीं उठाई..?

चलते-चलते…

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि कोई कदाचार या भ्रष्टाचार केवल सरकार या प्रशासन के चाहने से दूर नहीं हो सकता। ऐसा तभी सम्भव है जब हमारे प्रथम तीन शिक्षक माता-पिता और गुरु ह्रदय से ऐसा चाहें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शरद, मीसा समेत महागठबंधन के सभी उम्मीदवारों ने किया नामांकन

तय कार्यक्रम के मुताबिक राज्य सभा के लिए महागठबंधन के चारों उम्मीदवारों ने आज नामांकन कर दिया। जेडीयू की ओर से शरद यादव और रामचन्द्र प्रसाद सिंह तो आरजेडी की ओर से मीसा भारती और राम जेठमलानी ने विधान सभा जाकर नामांकन-पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी विशेष रूप से मौजूद रहे।

अपनी बड़ी बहन मीसा के नामांकन के बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके राज्य सभा जाने से पार्टी और मजबूत होगी। तेजस्वी और तेजप्रताप को लालू बिहार की विरासत सौंप ही चुके थे। बच गई थी दिल्ली, तो इसके लिए मीसा का विकल्प था ही उनके पास। देखा जाय तो मीसा को राज्य सभा भेजकर लालू ने अपने हिसाब से अपनी राजनीतिक विरासत का एकदम सही बंटवारा किया है।

बहरहाल, राज्य सभा उम्मीदवारों के साथ-साथ महागठबंधन के विधान परिषद उम्मीदवारों ने भी आज नामांकन कर दिया। जेडीयू की ओर से गुलाम रसूल बलियावी और सीपी सिन्हा, आरजेडी की ओर से एस एम कमर आलम और रणविजय सिंह तथा कांग्रेस की ओर से तनवीर अख्तर ने नामांकन दाखिल किया।

बता दें कि भाजपा के राज्य सभा उम्मीदवार गोपाल नारायण सिंह और विधान परिषद उम्मीदवार अर्जुन सहनी कल यानि 31 मई को नामांकन दाखिल करेंगे।

अब ये देखना दिलचस्प होगा कि इन तमाम पार्टियों के वे नेता जिनकी निष्ठा और वरिष्ठता असंदिग्ध रही लेकिन उम्मीदवारी में पीछे रह गए, उन्हें ये पार्टियां कैसे समझा और मना पाती हैं। वे नेता जो केवल नाम से नहीं काम से भी बड़े थे लेकिन फिर भी अपनी जगह नहीं बना पाए, उन्हें ये बात अच्छी तरह समझ में आ गई होगी कि राजनीति विशुद्ध रूप से ‘अवसर’ का खेल है और ये भी कि ‘स्वार्थ’ के साँचे में अगर आप फिट नहीं बैठ रहे तो आज की राजनीति में आपके संघर्ष की कोई कीमत नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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राजद कोटे से राबड़ी की जगह मीसा जाएंगी राज्य सभा

राज्य सभा के लिए राजद कोटे से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नाम तय माने जा रहे थे लेकिन राजनीति के माहिर खिलाड़ी लालू ने नामांकन के महज दो दिन पहले मीसा का नाम आगे बढ़ा दिया है। राम जेठमलानी को लेकर कोई दुविधा नहीं है लेकिन राबड़ी की जगह अब मीसा राजद की राज्य सभा उम्मीदवार हो रही हैं। ख़बर है कि महागठबंधन के सभी प्रत्याशी 30 मई को एक साथ नामांकन करेंगे।

मीडिया में काफी दिनों से कहा जा रहा था कि लालू को राष्ट्रीय राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए दिल्ली में एक बड़ा आशियाना चाहिए, जो राबड़ी के राज्य सभा जाने पर ही सम्भव हो सकता था। पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण उन्हें स्वाभाविक रूप से बड़ी कोठी मिलती। जबकि मीसा पहली बार किसी सदन जाएंगी और उन्हें बड़ा आवास मिलना सामान्यतया कठिन होगा। बहरहाल, लालू ने राज्य सभा में अपनी और पार्टी की दमदार उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मीसा के पक्ष में फैसला लिया। वैसे भी दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के ज्यादातर नेताओं की अगली पीढ़ी पहले से ही सक्रिय है। उन सबको देखते हुए मीसा को लाना राजनीतिक रूप से बेहतर विकल्प था लालू के लिए।

तेजस्वी और तेजप्रताप के सक्रिय होने के बहुत पहले से मीसा राजनीति में हाथ आजमाने लगी थीं। पिछले कुछ चुनावों में आरजेडी की स्टार प्रचारक भी रहीं वो। बिहार और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर सोशल मीडिया में भी उनकी सक्रियता लगातार देखी जा सकती है। अगर लालू ने उनसे उम्मीदें बांधी हैं तो ये अकारण हरगिज नहीं। हाँ, अब लालू राज्य सभा की उम्मीद रखने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रभुनाथ सिंह और जगदानंद सिंह जैसे पार्टी के सीनियर नेताओं को कैसे समझाते और मनाते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा।

चलते-चलते बता दें कि भाजपा ने भी अपने कोटे की एक सीट के लिए उम्मीदवार तय कर लिया है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह भाजपा की ओर से राज्य सभा के उम्मीदवार होंगे। वैसे इस एक सीट के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की खूब चर्चा थी, पर आलाकमान ने गोपाल नारायण के नाम पर मुहर लगाई।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शरद यादव और आरसीपी सिन्हा होंगे जेडीयू के राज्य सभा प्रत्याशी

जेडीयू के राज्य सभा प्रत्याशियों का सस्पेंस खत्म हो गया। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को ‘सम्मान’ देते हुए उन्हें एक बार फिर राज्य सभा भेजा जा रहा है। वहीं नीतीश के करीबी आरसीपी सिन्हा पार्टी के दूसरे प्रत्याशी होंगे। हालांकि चर्चा केसी त्यागी की भी थी लेकिन दो ही सीट होने के कारण उनकी जगह ना बन सकी।

बहरहाल, आज पार्टी ने राज्य सभा के साथ-साथ विधान परिषद प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी। गुलाम रसूल बलियावी और सीपी सिन्हा जेडीयू कोटे से विधान परिषद जाएंगे। आज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य सभा और विधान परिषद के सभी प्रत्याशियों की सूची जारी करते हुए बताया कि ये सभी 30 मई को नामांकन दाखिल करेंगे।

बता दें कि 1999 में मधेपुरा से लोक सभा के सदस्य रहे शरद यादव 2004 में लालू प्रसाद यादव के हाथों ये सीट गंवा बैठे, तब पार्टी ने उन्हें राज्य सभा भेजा था। इसके बाद 2009 में उन्होंने मधेपुरा से ही लोक सभा का चुनाव जीता। पर आगे 2014 में उन्हें एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा और पार्टी ने उन्हें इस बार भी राज्य सभा भेजा। लेकिन उनका कार्यकाल दो साल का ही था। इसीलिए उन्हें 2016 में भी राज्य सभा प्रत्याशी बनाया जा रहा है।

शरद यादव को फिर से राज्य सभा भेजा जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के बाहर और भीतर भी ऐसा मानने वालों की कमी ना थी कि नीतीश के पार्टी और संगठन दोनों का ‘सर्वेसर्वा’ होने के बाद कहीं शरद यादव का हश्र भी जॉर्ज फर्नांडिस जैसा ना हो जाय। पर मानना पड़ेगा कि नीतीश ने यहाँ नैतिक और राजनीतिक मर्यादा का ख्याल रखा।

चलते-चलते ये भी बता दें कि इस साल जेडीयू के पाँच सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, पर विधायकों के संख्या बल को देखते हुए पार्टी इस बार दो लोगों को ही राज्य सभा भेज सकती थी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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लालू के कोटे से जेठमलानी जाएंगे राज्य सभा, दूसरा नाम राबड़ी का..!

देश के जाने-माने वकील राम जेठमलानी राजद के कोटे से राज्य सभा के उम्मीदवार होंगे। पिछले कई दिनों से जेठमलानी के नाम की चर्चा थी। आज राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उनके नाम पर विधिवत मुहर लगा दी। गौरतलब है कि जेठमलानी चारा घोटाला मामले में लालू के वकील हैं और कहना गलत ना होगा कि उन्हें राज्य सभा में भेजा जाना ‘अघोषित अनुबंध’ के तहत लिया गया निर्णय है। बहरहाल, पार्टी ने शनिवार को ही राज्य सभा के लिए नाम चयन करने का अधिकार लालू को देने की ‘औपचारिकता’ पूरी कर दी थी और अब जबकि आधिकारिक तौर पर जेठमलानी का नाम सामने आ गया है, वे 30 मई को नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं।

राजद कोटे से जेठमलानी के साथ ही बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का भी राज्य सभा जाना तय है। हालांकि पहले राबड़ी के साथ शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब का नाम राज्य सभा के लिए लिया जा रहा था, लेकिन सीवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या और जेल में दरबार लगाने जैसे मामलों में शहाबुद्दीन का नाम संदेह के घेरे में आने के बाद हिना दौड़ में पिछड़ गईं। अब उन्हें राजद कोटे से विधान परिषद भेजने की बात हो रही है।

अब जबकि राजद कोटे से राज्यसभा के लिए दो नाम स्पष्ट हो चुके हैं, ये देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अपने वरिष्ठ व अनुभवी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को कैसे संतुष्ट करती है। बता दें कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश राज्य सभा के प्रबल दावेदार थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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क्या व्याख्याता नियुक्ति परिनियम में बदलाव करेगी बिहार सरकार..?

भारत सरकार ने यूजीसी के 2009 के पीएचडी रेगुलेशन में संशोधन कर दिया है। इस संशोधन से बिहार के 2009 से पहले के 40 हजार पीएचडीधारकों को लाभ होगा। रेगुलेशन के संशोधन से यह स्पष्ट हो गया है कि 11 जुलाई 2009 से पूर्व पीएचडी करने वालों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) और राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (स्लेट) से छूट मिलेगी।

ये बताना जरूरी है कि यूजीसी ने इस संशोधन के माध्यम से राहत तो दी है लेकिन पाँच शर्तों के साथ। वे पाँच शर्तें हैं – 1. अभ्यर्थी को केवल नियमित पद्धति से पीएचडी उपाधि दी गई हो, 2. कम-से-कम दो बाह्य परीक्षकों ने शोधप्रबंध का मूल्यांकन किया हो, 3. पीएचडी शोधकार्य में से दो शोधपत्र प्रकाशित हों और कम-से-कम एक पत्र संदर्भित जर्नल में प्रकाशित हो, 4. पीएचडी शोधकार्य में से दो शोधपत्र संगोष्ठी या सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए हों और 5. अभ्यर्थी का मौखिक साक्षात्कार लिया गया हो।

ध्यातव्य है कि बिहार में अभी बीपीएससी व्याख्याताओं की नियुक्ति कर रहा है। केन्द्र सरकार के संशोधन के मुताबिक अगर नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव हुआ तो हजारों पीएचडीधारक लाभान्वित होंगे। लेकिन इसके लिए बिहार के व्याख्याता नियुक्ति परिनियम 2014 में अविलंब संशोधन आवश्यक होगा। यहाँ एक प्रश्न ये भी उठता है कि जिन विषयों का साक्षात्कार बीपीएससी ने पूरा कर लिया है और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी हो गई है उन विषयों के लिए सरकार क्या निर्णय लेगी..?

यूजीसी की भूल-सुधार में केन्द्र सरकार ने बेवजह बहुत वक्त लगा दिया। अब जो भी होना है वो बिहार सरकार की इच्छाशक्ति और तत्परता पर निर्भर करता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे जो वर्षों से नियुक्ति की आस में थे..!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार रचेगा इतिहास, राज्य में दौड़ेगी स्काई ट्रेन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों में एक निश्चय पाँच घंटे में बिहार के किसी भी कोने से पटना पहुँचना है। पर बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग की कोशिश इस समय को और कम करने की है। इतना कम कि शायद आप यकीन ना करें। जी हाँ, अगर विभाग की ये कोशिश रंग लाई तो बहुत जल्द बिहार में स्काई ट्रेन दौड़ती दिखाई देगी जो बिहार के जिला मुख्यालयों से पटना को 240 से 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जोड़ेगी।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार इस योजना को पीपीपी मोड (सार्वजनिक-निजी सहभागिता) पर चलाएगी। विभाग के मंत्री माहेश्वर हजारी ने स्काई ट्रेन का निर्माण करने वाली कम्पनी ‘नाईटशेड ग्लोबल इंफ्रा’ से विचार-विमर्श के बाद अधिकारियों से इस दिशा में आगे बढ़ने को कहा है। जल्द ही विभाग इस प्रोजेक्ट की तकनीकी जाँच कराएगा। रिपोर्ट में सब कुछ ठीक रहा तो सरकार इस योजना को अमलीजामा पहनाने में लग जाएगी।

बता दें कि स्काई ट्रेन को नासा ने डिजाईन किया है। पोल के सहारे चलने वाली यह ट्रेन छोटी-छोटी बोगियों का समूह होगी। एक बोगी में चार लोग बैठ सकेंगे। मेट्रो ट्रेन से तुलना करें तो स्काई ट्रेन रफ्तार में उससे लगभग चार गुना तेज और लागत में लगभग चार गुना कम होगी। मेट्रो की रफ्तार 55 से 80 किमी प्रति घंटा होती है, जबकि स्काई ट्रेन की 240 से 260 किमी प्रति घंटा। इसी तरह मेट्रो की लागत 250 से 500 करोड़ प्रति किमी होती है, जबकि स्काई ट्रेन की 90 से 120 करोड़ प्रति किमी।

स्काई ट्रेन की एक बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए भूमि अधिग्रहण की ज्यादा जरूरत नहीं होगी। यही नहीं, इसके रखरखाव पर भी ज्यादा खर्च नहीं होगा और ध्वनि प्रदूषण भी काफी कम होगा। वर्तमान में इस ट्रेन का परिचालन इजरायल में हो रहा है। जहाँ तक भारत की बात है तो बिहार स्काई ट्रेन चलाने वाला पहला राज्य होगा। बिहार सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत बुद्ध सर्किट से करना चाहती है। पहले चरण में इस योजना के तहत गया, बोधगया, राजगीर, वैशाली, केसरिया, अरेराज और लोरिया जैसे शहर पटना से जुड़ेंगे।

संसार के पहले गणतंत्र की स्थापना से लेकर सम्पूर्ण क्रांति की उद्घोषणा तक बिहार हमेशा देश और दुनिया का अगुआ रहा है। आज भी महिलाओं को समान अधिकार देने से लेकर शराबबंदी का अभियान चलाने तक बिहार बाकी राज्यों से आगे है। अगर स्काई ट्रेन जैसी यातायात की नई तकनीक का इस्तेमाल कर बिहार मूलभूत सुविधा के क्षेत्र में भी देश की अगुआई करे तो बढ़ते बिहार को बढ़ते भारत की पहचान बनने से कोई रोक नहीं सकेगा।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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तस्लीमुद्दीन ने कहा ‘दारू की बोतल’ से बाहर निकलें नीतीश..!

राजद सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मोहम्मद तस्लीमुद्दीन ने बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर आज कुछ ऐसा कह दिया जिसकी उम्मीद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरगिज ना की होगी। खासकर तब जब कि राजद स्वयं उसी सरकार का हिस्सा है और उपमुख्यमंत्री स्वयं राजद सुप्रीमो के सुपुत्र हैं। बहरहाल, संदर्भ सीवान में दैनिक हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या का था। तस्लीमुद्दीन ने इस बाबत सीधा नीतीश पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में ‘जंगलराज’ कायम हो गया है। यहाँ पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। अगर राज्य में अपराध रोकना है तो नीतीश को दारू (शराब) की बोतल (शराबबंदी) से बाहर निकलना होगा।

तस्लीमुद्दीन ने कथित जंगलराज के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि “सुशासन बाबू की सरकार में रोज सरेआम हत्याएं हो रही हैं। राज्य में अपराधियों का बोलबाला है और सरकार का अपराध पर कोई लगाम नहीं है।” राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी तस्लीमुद्दीन के ही सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि “बिहार की स्टेयरिंग नीतीश कुमार के हाथ में है, उन्हें अपराध पर लगाम लगाना चाहिए। राज्य में हत्या और अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।”

जब साथी के बोल ऐसे हों तो भला विपक्ष चुप कैसे रहे..? बिहार भाजपा के अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि विपक्ष होने के नाते भाजपा चुप नहीं बैठेगी। अब पार्टी सड़क पर उतरकर अपना विरोध जताएगी। उधर ‘हम’ के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए यहाँ तक कह डाला कि बिहार में ‘जंगलराज’ नहीं, ‘महाजंगलराज’ की शुरुआत हो चुकी है।

बहरहाल, विपक्ष की आलोचना तो समझ में आती है लेकिन राजद नेताओं के बदले सुर समझ से परे हैं। दिलचस्प पहलू यह भी है कि ये नेता उसी राजद के हैं जिसको लेकर विपक्ष ‘जंगलराज’ की बात करता है और जिससे गठबंधन के बाद से नीतीश लगातार निशाने पर हैं..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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सिविल सेवा में कोसी और मैथिली का परचम

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में इस साल कोसी और मैथिली ने अपना परचम लहराया है। सिविल सेवा हेतु चुने गए अभ्यर्थियों में ऋषभ कुमार झा (सहरसा), गोविन्द झा (सहरसा), संतोष कुमार (सुपौल) और आदित्य आनंद (मधेपुरा) ने क्रमश: 162वां, 236वां, 692वां और 863वां स्थान हासिल किया है। वहीं मैथिली विषय से सफल अभ्यर्थियों की बात करें तो इस विषय से कुल 18 अभ्यर्थी सफल हुए हैं।

162वें स्थान पर चुने गए सहरसा के ऋषभ कुमार झा स्थानीय कायस्थ टोला वार्ड नं. 29 निवासी और राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. किशोर नाथ झा एवं किरण झा के छोटे पुत्र हैं। ऐच्छिक विषय के रूप में मैथिली को चुनने वाले ऋषभ ने अपने पहले प्रयास में ही ये सफलता हासिल की है। सहरसा से ही सफल होने वाले और 236वें स्थान पर चुने गए गोविन्द झा का वैकल्पिक विषय मानवशास्त्र था। उनके पिता महेश झा मधेपुरा के मुरहो हाईस्कूल से सेवानिवृत्त हैं। वहीं 692वां स्थान पाने वाले सुपौल के होनहार छात्र संतोष कुमार के पिता किसान हैं।

863वें स्थान के लिए चुने गए मधेपुरा के आदित्य कुमार आनंद ने यह सफलता अपने पाँचवें प्रयास में पाई है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने पिछले साल यूपीएससी में 980वां स्थान हासिल किया था। आदित्य फिलहाल रेलवे विभाग में ट्रेनिंग ले रहे हैं। 863वें रैंक के साथ इस बार उन्हें कस्टम विभाग मिलने की उम्मीद है।

ये तो हुई कोसी के सपूतों की बात। अब बात करें मैथिली विषय से सफल अभ्यर्थियों की। इस विषय से इस साल 18 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इन अभ्यर्थियों में सहरसा के ऋषभ (162वां स्थान), सुपौल के संतोष (692वां स्थान) और मधेपुरा के आदित्य (863वां स्थान) के अतिरिक्त अंजनी कुमार झा (165वां स्थान), रौशन कुमार (352वां स्थान), सोनम कुमार (626वां स्थान), कुमार गौरव (831वां स्थान) तथा पहली बार चुनी गई महिला अभ्यर्थी रजनी झा (591वां स्थान) शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के अमित कुमार आनंद ने भी मैथिली को विषय बनाया था। उन्हें 763वां स्थान मिला है।

इस बार के परिणाम से कोसी के होनहारों ने अपनी मिट्टी का मान बढ़ाने के साथ-साथ मैथिली के लिए भी उम्मीद जगा दी। ऋषभ, संतोष और आदित्य ने कोसी के साथ-साथ मैथिली का झंडा भी बुलंद किया। मैथिली से 18 अभ्यर्थियों का सफल होना इस विषय के सुखद भविष्य का संकेत है।

चलते-चलते ये भी बता दें कि यूपीएससी की परीक्षा में इस साल बिहार से 77 अभ्यर्थी सफल हुए हैं जबकि पिछले साल यहाँ से 88 अभ्यर्थी सफल हुए थे। पर बिहार के लिए अच्छी ख़बर ये रही कि टॉप टेन में इस बार यहाँ के दो अभ्यर्थी हैं। पिछली बार केवल एक अभ्यर्थी ने टॉप टेन में जगह बनाई थी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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ये क्या, उपमुख्यमंत्री के सरकारी विज्ञापन से मुख्यमंत्री ही गायब..!

केन्द्र के किसी भी विभाग का विज्ञापन हो और उसमें विभागीय मंत्री के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर ना हो। या फिर किसी भी राज्य का विभागीय विज्ञापन हो और उसमें मुख्यमंत्री मौजूद ना हों ऐसा अमूमन नहीं होता। परम्परा के साथ-साथ शिष्टाचार का तकाजा भी यही है कि ऐसे विज्ञापनों में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की मौजूदगी हो। सच यही है कि काम चाहे किसी भी विभाग का क्यों ना हो उस विभाग के मंत्री प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर वो काम कर रहे होते हैं। ऐसे में ये मर्यादा से कहीं आगे लगभग बाध्यता है या होनी चाहिए कि उस विभाग के विज्ञापन या प्रचार-प्रसार में सरकार के मुखिया की तस्वीर हो। पर बिहार में ऐसा नहीं हो रहा।

जी हाँ, बिहार में एक सड़क परियोजना के लोकार्पण से संबंधित सरकारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर ही गायब है। सरैया-मोतीपुर सड़क परियोजना के लोकार्पण से संबंधित पूरे पेज वाले इस विज्ञापन में तेजस्वी की बड़ी तस्वीर छपी है जबकि नीतीश इससे नदारद है। बता दें कि इस विभाग के मंत्री लालू के सुपुत्र और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव हैं।

बहरहाल, तेजस्वी के इस विज्ञापन ने विपक्ष को महागठबंधन सरकार पर तंज कसने का एक बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व में इसी विभाग के मंत्री रहे नंद किशोर यादव बिना देर किए पूछ बैठे कि क्या सरकार ने नई विज्ञापन नीति अपना ली है?  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति स्पष्ट करना चाहिए।

बहरहाल, राजनीति से अलग हटकर बात करें तो भी जो हुआ उसे हजम करना मुश्किल है। ये ऐसी भूल है जो किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए थी। बात विभागीय या सरकारी मर्यादा की हो, पद और अनुभव की वरिष्ठता की हो या फिर गठबंधन धर्म की तेजस्वी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। और चाहे जिस भी कारण से ऐसा हुआ हो अनुभवी लालू को स्वयं पहल कर तेजस्वी से भूल-सुधार करने को कहना चाहिए। देखा जाय तो लालू ना केवल तेजस्वी बल्कि वर्तमान सरकार के भी ‘अभिवावक’ हैं। उन्हें ये समझना और समझाना ही होगा कि बिहार और सरकार की स्थिरता के लिए ‘महत्वाकांक्षा’ के असमय, अभद्र और अस्वस्थ प्रदर्शन पर रोक लगाना जरूरी है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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