इस बार 15 अगस्त से बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) एक विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। इस दिन झंडोत्तोलन के बाद जदयू के सभी सक्रिय व सामान्य सदस्य एवं पार्टी में आस्था रखनेवाले सभी व्यक्ति एक-एक पेड़ लगाएंगे तथा अपनी जमीन पर कम-से-कम पांच पेड़ लगाने एवं पर्यावरण व जल संरक्षण का संकल्प लेंगे।
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने 9 अगस्त को पृथ्वी दिवस के अवसर पर पटना के ज्ञान भवन में जल-जीवन-हरियाली अभियान के जागरुकता कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की है। प्रारंभ से ही पर्यावरण को लेकर जदयू की प्रतिबद्धता रही है। जदयू देश की पहली पार्टी है जिसने पूर्व में भी वृक्षारोपण को पार्टी के सदस्यता अभियान से जोड़ा है और जदयू का सदस्य बनने के लिए इसे अनिवार्य किया है।
इसी आलोक में बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह के निर्देशानुसार 15 अगस्त को जदयू के बूथ, पंचायत, प्रखंड, जिला एवं प्रदेश स्तर के सभी नेता व कार्यकर्ता झंडोत्तोलन के उपरांत एक-एक पेड़ लगाएंगे। इस दिन जदयू के सभी सदस्य संकल्प पत्र भी पढ़ेंगे जिसके तहत हर सदस्य अपनी जमीन पर कम-से-कम पांच पेड़ लगाने तथा जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेंगे।
सामाजिक सरोकार को लेकर जदयू और इसके नेता नीतीश कुमार की अलग पहचान रही है। पर्यावरण को लेकर नीतीश कुमार सदैव अत्यंत संवेदनशील रहे हैं। वैसे भी देखा जाय तो जल व पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जिसे हमने नहीं समझा तो हमारी आने वाली पीढ़ी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आज जरूरत इस बात की है कि हम सभी पर्यावरण के सजग प्रहरी के तौर पर काम करें। बहरहाल, जदयू को उसकी सार्थक पहल के लिए बधाई और साधुवाद।
पृष्ठ : बिहार अबतक
सरकार चौकस, बालू के बिजनेस पर अब किसी का एकाधिकार नहीं
बिहार में बालू के बिजनेस पर अब किसी का एकाधिकार नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को नई बालू नीति – 2019 की समीक्षा की और खान एवं भूतत्व विभाग के आला अधिकारियों को खनन से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि बालू और पत्थर सहित अन्य खनिजों के अवैध खनन को रोकने के लिए ड्रोन और सेटेलाइट का प्रयोग किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने बन रही नई बालू नीति की समीक्षा के दौरान यह भी कहा कि बिहार में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के पहाड़ों को सुरक्षित रखना है। इसका विशेष रूप से ख्याल रखें। पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ बिल्कुल ही नहीं हो, यह भी सुनिश्चित करें। जिन कुछ पहाड़ों को खुदाई के लिए चिह्नित किया गया है, उनकी जांच विशेषज्ञों से करवा लें।
खान एवं भूतत्व विभाग की प्रधान सचिव हरजोत कौर ने मुख्यमंत्री को प्रेजेंटेशन के माध्यम से यह जानकारी दी कि नई बालू नीति-2019 का उद्देश्य अवैध खनन पर रोक लगाना है। नदियों की गुणवत्ता, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना तथा स्वामित्व एवं अन्य करों की वसूली सुविधाजनक तरीके से हो – ये नई नीति के मुख्य तत्व हैं।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, खान एवं भूतत्व मंत्री बृजकिशोर बिंद, मुख्य सचिव दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा, अनुपम कुमार तथा अपर सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय चंद्रशेखर सिंह मौजूद रहे।
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राज्यसभा से भी पास हुआ तीन तलाक बिल
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक को अपराध बनाने वाला बिल – मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक – पास हो गया। कई दलों के वॉकआउट करने या अनुपस्थित रहने की वजह से राज्यसभा में बिल का रास्ता आसान हो गया था। दरअसल जेडीयू, एआईएडीएमके, बीएसपी और टीआरएस जैसे बड़े दलों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। एआईएडीएमके और जेडीयू जैसे दलों के वॉकआउट और बीजेडी के समर्थन से बिल पास कराने में सत्ताधारी दल को बड़ी मदद मिली। तीन साल की सजा और जुर्माने के प्रावधान वाले इस बिल को लोकसभा से 26 जुलाई को ही मंजूरी मिल चुकी है।
कहने की जरूरत नहीं कि केन्द्र की मोदी सरकार के लिए यह बिल प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था। इसे पास कराने के लिए भाजपा कोई कसर नहीं रखना चाहती थी। आज भी उसने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया था। दरअसल 242 सदस्यों वाली राज्यसभा में भाजपा के 78 और कांग्रेस के 48 सांसद हैं। बिल को पास कराने के लिए एनडीए को 121 सदस्यों का समर्थन चाहिए था। ऐसी स्थिति में अन्य दलों के सांसदों की अनुपस्थिति से ही सरकार की राह आसान हो सकती थी। ऐसे में एआईएडीएमके के 11, जेडीयू के 6, टीआरएस के 6, बीएसपी के 4 और पीडीपी के 2 सांसद की अनुस्थिति से भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई। सपा के भी कुछ सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए।
बहरहाल, राज्यसभा में इस बिल पर लगभग साढ़े चार घंटे बहस चली। इस दौरान विपक्ष ने बिल को सिलेक्ट कमिटी को भेजने का प्रस्ताव रखा। लेकिन यह प्रस्ताव 100/84 से गिर गया। इसके बाद विधेयक के लिए वोटिंग कराई गई जिसमें इसके पक्ष में 99, जबकि विपक्ष में 84 वोट पड़े। इस तरह राज्यसभा में आसानी से यह बिल पास हो गया।
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समस्त भारत को नई ऊर्जा से भर दिया है चन्द्रयान- 2
इसरो द्वारा 22 जुलाई (सोमवार 2:43 बजे दोपहर) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से चन्द्रयान-2 की सफल लाँचिंग के गवाह बने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा दोनों सदनों के सदस्यगण सहित समस्त भारतवासी। आज 130 करोड़ भारतीय नर-नारियों की उम्मीदों को चाँद के ऐतिहासिक सफर पर निकले चन्द्रयान-2 ने पंख लगा दिया है।
इस चंद्रयान-2 मिशन में 5 हज़ार महिला वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसरो के इतिहास में पहली बार चंद्रयान-2 मिशन में परियोजना निदेशक एवं मिशन डायरेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दो महिलाओं बी.मुथैया एवं रितु करिधाल को सौंपी गई है। सही मायने में भारत को नारी शक्ति ने ही बना दिया है अंतरिक्ष विज्ञान की हस्ती। जहाँ नासा में अबतक 15% महिलाओं ने ही ग्रहीय अभियानों में योगदान दिया है वहीं इसरो के अभियानों में लगभग 30% महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बता दें कि भारतरत्न डॉ.कलाम के करीबी रह चुके भौतिकी के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अनुसार कभी इसरो-प्रमुख रह चुके गाँधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने 2008 में चंद्रयान-1 की लांचिंग से चन्द घंटे पहले यही कहा था-
“चन्द्रयान के जरिये चंद्रमा पर की गई खोज समस्त भारत के युवा, वैज्ञानिकों एवं बच्चों को नई ऊर्जा से भर देगी….. बाहरी दुनिया की खोज में यह चन्द्रयान-1 शुरुआत भर है”
आज इसी इसरो के वर्तमान प्रमुख एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव के.सिवन की टीम द्वारा 2020 की पहली छमाही के अंतर्गत चाँद के बाद सूरज मिशन की तैयारी आदित्य एल-1 के जरिये शुरू की जाएगी। जानिए की आदित्य एल-1 द्वारा सूरज के कोरोना यानि बाहरी परत का अध्ययन किया जाएगा जो कई हजार किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि इसरो प्रमुख के.सिवन ने पिछले महीने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मधेपुरा अबतक से यही कहा था-
“सूरज का कोरोना पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है…. जिसके बाहरी परत का अध्ययन करना इसलिए जरूरी है कि जलवायु परिवर्तन पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। आदित्य एल-1 के जरिए कोरोना के अलावे सूर्य के बाह्यमंडल एवं वर्णमंडल के भिन्न-भिन्न प्रकार के विश्लेषणों का भी पता लगाया जा सकता है।”
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बिहार के 40वें महामहिम राज्यपाल बने फागू चौहान
चार नये गवर्नर के पदस्थापन और दो के स्थानांतरण की विज्ञप्ति जारी हुई राष्ट्रपति भवन से। जिन चारों राज्यों में नये राज्यपालों की नियुक्तियाँ की गई, वे हैं – बिहार, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और नागालैंड।
बता दें कि जहाँ बिहार के 40वें राज्यपाल बनेंगे पिछड़ों के शीर्ष नेताओं में गिने जाने वाले 71 वर्षीय फागू चौहान, वहीं पश्चिम बंगाल के गवर्नर नियुक्त किये गये हैं हरियाणा के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील 68 वर्षीय जगदीप धनकड़।
यह भी बता दें कि जहाँ त्रिपुरा के राज्यपाल बनाये गये पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, वहीं नागालैंड का गवर्नर बनाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार आर.एन.रवि।
यह भी जानिए कि बिहार में बतौर 331 दिन गवर्नर रहकर जिनने कई बड़ी लकीरें खींची उसी लालजी टंडन का स्थानांतरण मध्य प्रदेश किया गया हैं….. जहाँ की राज्यपाल 77 वर्षीय आनंदी बेन पटेल को उत्तर प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है।
नई पहल जो लालजी टंडन ने अपने सालभर से भी कम कार्यकाल में की , वे हैं- (1) राजभवन में संविधान दिवस का आयोजन (2) शंकराचार्य व मंडन मिश्र की तर्ज पर शास्त्रार्थ का आयोजन (3) राजभवन में उद्यान प्रदर्शनी का आयोजन (4) विश्वविद्यालयों को गाँवों को गोद लेने के लिए प्रेरित करना (5) संगीतज्ञों को सम्मान दिलाने की पहल और (6) चांसलर्स अवार्ड की शुरुआत की पहल….. जो प्रक्रियाधीन है।
अब देखना यह है कि यूपी के मऊ जनपद की घोसी विधान सभा सीट पर विभिन्न पार्टियों से 6 बार विधायक रह चुके तथा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन रह चुके फागू चौहान बिहार जैसे पिछड़े परंतु विकासोन्नमुखी राज्य के व्यापक सुधार हेतु क्या-क्या करते हैं……..?
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नहीं रहे रामचंद्र पासवान
लोजपा के वरिष्ठ नेता, समस्तीपुर के सांसद व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के सबसे छोटे भाई रामचन्द्र पासवान नहीं रहे। रविवार को दोपहर 1.24 पर उन्होंने नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। अभी कुछ दिन पहले हार्ट अटैक के बाद उन्हें हॉस्पिटल लाया गया था, लेकिन तब शायद कोई नहीं जानता था कि वे अब यहां से कभी नहीं लौटेंगे। अपने पीछे वे पत्नी सुनैयना कुमारी के साथ दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं।
मात्र 57 वर्षीय रामचंद्र पासवान के असामयिक निधन से जैसे शोक की लहर दौड़ गई हो। ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं, जिसने उनके लिए शोक न जताया हो। स्वभाव से बड़े हंसमुख और मिलनसार रामचंद्र पासवान राजनीति के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी समान रूप से सक्रिय थे। बड़े भाई रामविलास पासवान द्वारा स्थापित दलित सेना के प्रमुख के रूप में उन्होंने दशकों तक अहम भूमिका निभाई और अपने अग्रज के बेहद मजबूत कांधा के तौर पर रहे। बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान, पशुपति कुमार पारस और रामचंद्र पासवान की जैसी तिकड़ी रही और अपनी एकजुटता से इस तिकड़ी ने जैसी सफलता हासिल की, वैसा उदाहरण कोई दूसरा नहीं।
रामचंद्र पसवान मूल रूप से खगड़िया जिला के अलौली प्रखंड अंतर्गत शहरबन्नी गांव के रहने वाले थे। जामुन दास एवं सिया देवी के पुत्र रामचंद्र पासवान ने मैट्रिक तक की शिक्षा ग्रहण की थी। 1999 में रोसड़ा से वे पहली बार संसद के लिए चुने गए थे। इस बार समस्तीपुर से ढाई लाख मतों से अधिक के अंतर से जीतकर वे चौथी बार संसद पहुँचे थे।
रामचंद्र पासवान देश के उन चुनिंदा सांसदों में से रहे हैं, जिनकी औसत उपस्थिति संसद में अस्सी प्रतिशत से अधिक रही है। वे संसद की विभिन्न कमेटियों के सदस्य रहे। लोकसभा सदस्य के रुप में मिलने वाले सांसद निधि का वे शत-प्रतिशत खर्च करते थे। उनके लगभग सभी कार्यकाल में उनके सांसद निधि का खर्च शत-प्रतिशत रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे क्षेत्र के विकास के प्रति कितने तत्पर थे।
बताया जाता है कि इस बार एनडीए के नेताओं के द्वारा रामचंद्र पासवान को अपना क्षेत्र बदलने के लिए दबाव बनाया गया था, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। उनका कहना था कि जीत और हार तो लगी रहती है। यदि हमने काम किया है तो लोग हमें जरूर वोट देंगे। काम नहीं किया गया होगा तो वोट नहीं करेंगे, लेकिन लड़ूंगा समस्तीपुर से ही। इसके बाद वे समस्तीपुर से चुनाव लड़े और भारी अंतर से जीते भी। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
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मैं भी पिछले जन्म में बिहारी था- ऋतिक रोशन
एक ओर जहाँ सुपर-30 के आनंद कुमार को इस सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने KBC के स्पेशल एपिसोड में बुलाकर 25 लाख जीतने का अवसर प्रदान किया वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड के महान नायक ऋतिक रोशन ने गणितज्ञ आनंद कुमार पर सुपर-30 फिल्म बनाकर आनंद के जीवन के एक-एक पल को बखूबी जिया और किरदार भी निभाया। यह सुपर-30 फिल्म ऐसी बनी कि एक साथ दर्जनों जगहों पर चली और पहले ही दिन लगभग 11 करोड़ की कमाई की।
बता दें कि जितने भी लोग फिल्म देखने के बाद आनंद से मिले सबों ने यही कहा कि आनंद सर में और ऋतिक रोशन में कोई अंतर नहीं पाया…. वहीं ऋतिक जब आनंद सर से मिले तो पहले उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया और पुनः ऋतिक ने आनंद सर के भाई प्रणव से यही कहा-
अभी तक मैने वो काम किया है जो आनंद सर करते आ रहे हैं….. अब आनंद सर वो काम करें जो मैं करता आ रहा हूँ- इसी वार्तालाप के साथ दोनों ने “एक पल का जीना” गाने का सिग्नेचर स्टेप डांस शुरू कर दिया।
यह भी कि जहाँ बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ऋतिक रोशन से मुलाकात के क्रम में फिल्म में जीवंत किरदार निभाने के लिए साधुवाद दिया वहीं ऋतिक ने इस फिल्म को Tax Free घोषित कर छात्रों में फिल्म देखने की ललक बढ़ाने हेतु सीएम नीतीश कुमार को हृदय से बधाई दी।

चलते-चलते बता दें कि गुरु पूर्णिमा के दिन ऋतिक ने आनंद सर के गुरुओं का जमकर सम्मान किया इसलिए कि आनंद ने शिक्षा के क्षेत्र में सपरिवार अपना बहुमूल्य योगदान देकर बिहार को गौरवान्वित किया है। चंद महीने कबल बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के ऑडिटोरियम में आनंद कुमार ने छात्रों की भारी भीड़ को संबोधित किया था। उस अवसर पर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पर लिखी अपनी पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” भेंट की थी तथा कुलपति डॉ.एके राय, डीएम नवदीप शुक्ला (आईएएस) एवं डॉ.मधेपुरी आदि द्वारा “बाबा सिंहेश्वर धाम” का प्रतीक चिन्ह सम्मिलित रूप से ससम्मान हस्तगत कराया गया था।
अंत में यह भी कि किसी व्यक्ति के जीवन काल में ही उसके कृतित्व पर फिल्म बने, लोग देखे और सराहे…. ऐसा बिरले होता है…..। जब ऋतिक ने सुपर-30 के बच्चों में सादगी और इंटेलिजेंस के साथ-साथ पैशन व टैलेंट देखा तो सर्वाधिक भावुक होकर बोले….. मैं भी पिछले जन्म में बिहारी था।
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अपने कार्यों से बड़ी लकीर खींच रहा जदयू मीडिया सेल: बशिष्ठ
सोमवार, 15 जुलाई 2019 को बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में जदयू मीडिया सेल द्वारा सदस्यता महाभियान सह प्रदेश कार्यकारिणी बैठक एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बशिष्ठ नारायण सिंह ने किया। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विधानपार्षद व प्रदेश जदयू के कोषाध्यक्ष ललन सर्राफ, राष्ट्रीय सचिव व सदस्यता अभियान के प्रभारी रविन्द्र सिंह, प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, जदयू के प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारीद्वय डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार की विशिष्ट उपस्थिति रही। मीडिया सेल के संगठन प्रभारी प्रभात रंजन झा ने बैठक के उद्देश्य से उपस्थित लोगों को अवगत कराया, जबकि संचालन मीडिया सेल के मुख्यालय प्रभारी धनंजय शर्मा ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि बदलते समय की नब्ज को पहचानना हो तो हमें आधुनिक संचार माध्यमों को समझना और अपनाना होगा। जदयू मीडिया सेल ने पार्टी को मजबूती और विस्तार देने के लिए इस दायित्व को बखूबी निभाया है। मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया सेल अपने कार्यों से बड़ी लकीर खींच रहा है। यह लकीर और बड़ी हो और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके, मीडिया सेल को इस पर काम करना है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को दल से जोड़ने में ऑनलाइन सदस्यता अभियान की जरूरत थी, जिसे मीडिया सेल के साथी हर बूथ तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
विधानपार्षद ललन सर्राफ ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने में जदयू मीडिया सेल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं, प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुद्दों को समझने और उस पर जनमानस तैयार करने में मीडिया सेल ने सचमुच प्रशंसनीय कार्य किया है।
राष्ट्रीय सचिव व सदस्यता अभियान के प्रभारी रविन्द्र सिंह ने सदस्यता अभियान को लेकर विस्तार से अपनी बातें रखीं और कहा कि शहरों, कस्बों, गांवों से लेकर गली-मुहलों तक में कैंप लगाकर लोगों को ऑनलाइन सदस्यता दिलाने के लिए मीडिया सेल के साथियों को काम करना है। प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य ने कहा कि सदस्यता अभियान को लेकर किसी भी तरह की कठिनाई होने पर पार्टी मुख्यालय पूरी तत्परता से सहयोग करेगा।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने बैठक के दौरान सर्वप्रथम मीडिया सेल की अद्यतन रिपोर्ट पेश की। इसके उपरान्त ऑनलाइन सदस्यता अभियान को लेकर मीडिया सेल की तैयारियों की चर्चा करते हुए शीर्ष नेतृत्व को विश्वास दिलाया कि सदस्यता अभियान की ऐतिहासिक सफलता के लिए मीडिया सेल कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
बैठक में मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों, सभी प्रभारियों तथा जिला मीडिया संयोजकों को सम्मानित भी किया गया। विगत एक वर्ष के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रोशन अग्रवाल (कटिहार), रवि कुमार (नवगछिया) एवं ललन कुमार दास को सर्वश्रेष्ठ संयोजक चुना गया। बैठक में कार्यक्रम प्रभारी राजीव रंजन पटेल, जनसंपर्क प्रभारी यादव उमेश कुमार, संवाद प्रभारी डॉ. धीरज सिन्हा, विधि प्रभारी प्रवीण तिवारी, सूचना प्रभारी विनीता स्टेफी पासवान, सोशल नेटवर्क प्रभारी संतोष अशर, पिंकी भारती, समन्वय प्रभारी डॉ. सुभाष चन्द्रशेखर, प्रभात कुमार आर्य, प्रमंडल प्रभारी सैयद नजम, अभय विश्वास भट्ट, अनितेश कुमार, अनुपम कुमार, नबीस कुमार नवेन्दु, मिथिलेश निराला समेत मीडिया सेल के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
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नेपाल में मानसून की सक्रियता के चलते बिहार में बाढ़ का कहर
बिहार राज्य की सीमा नेपाल से सटे होने के कारण बिहार का बाढ़ प्रभावित होना स्वाभाविक है | नेपाल में 24 घंटे में 311 मि.मी. बारिश हुई है तभी तो कोसी हुई विकराल….. सीमांचल के ढेर सारे गाँव हुए जलमग्न और पलायन शुरू |
बता दें कि बिहार के 9 जिले…..(शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर ) के लगभग 20 लाख लोग बाढ़ की चपेट में है | उत्तर बिहार की नदियों में जबरदस्त उफान आ गया है | कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है |
यह भी बता दें कि दरभंगा में कमला बलान तथा शिवहर में बागमती नदी का तटबंध कई स्थानों पर टूट गया है | लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी भारी तबाही हो रही है | कोसी के जलस्तर में सर्वाधिक वृद्धि होने से अररिया के पांच प्रखंडों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है | अबतक बिहार में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं |
यह भी जानिए कि इस भयावह स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कदाचित पहली बार छप्पनों (56) फाटक (शनिवार रात 10:30 बजे से रविवार सुबह 6:00 बजे तक) खोल दिये गये | इसके बाद धीरे-धीरे 26 फाटकों को बन्द कर दिया गया….. बैरेज के 30 फाटक अभी भी खुले हैं |
सूबे बिहार के अति संवेदनशील सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ के मसलों पर एक हाई लेवल मीटिंग की और तुरंत हेलीकॉप्टर से दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी व मोतिहारी में बाढ़ से संघर्ष कर रहे लोगों की स्थिति का जायजा लेने हेतु हवाई सर्वेक्षण किया | बाढ़ की विभीषिका को देखकर मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य तेज करने, राहत कैंप लगाने तथा कम्युनिटी किचेन की व्यवस्था करने को कहा |
चलते-चलते यह भी बता दें कि सीएम ने उच्चाधिकारियों से आदमी व पशुओं की दवा से लेकर पर्याप्त मात्रा में चारा का भी इंतजाम करने को कहा | साथ ही कम्युनिटी कैंप के भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी ध्यान दिये जाने की बात कही | सीएम ने राहत व बचाव हेतु एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम तैनात रखने को कहा जो अपनी ड्यूटी के प्रति हमेशा चौकन्ना रहे |
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नीतीश सरकार द्वारा किसानों को दी जाएगी मौसम के अनुरूप खेती की ट्रेनिंग
सूबे बिहार के 10 हज़ार किसानों को प्रथम चरण में किया जाएगा प्रशिक्षित | बतौर पायलट प्रोजेक्ट अभी फिलहाल राज्य के आठ जिलों के 100 गाँवों से चयनित कर 10 हज़ार किसानों को मौसम के अनुरूप खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी |
बता दें कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर के लिए जहाँ राज्य के किसान भी अब तैयार हो रहे हैं वहीं कृषि मंत्री डॉ.प्रेम कुमार के अनुसार अब जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ही किसानों को खेती करना आवश्यक हो गया है | कृषि मंत्री बिहार डॉ.कुमार ने कहा कि बाढ़-सुखाड़, तूफान-ओलावृष्टि पर सम्यक विचार करते हुए चार एजेंसियाँ इस योजना को मूल रूप देगी |
यह भी जानिए कि इन चयनित गाँवों को “क्लाइमेट स्मार्ट गाँव” नाम दिया गया है | इन क्लाइमेट स्मार्ट गाँवों के 10 हज़ार किसानों को मौसम अनुरूप खेती की ट्रेनिंग दिये जाने वाली योजना पर फिलहाल 23 करोड़ से अधिक रुपये खर्च करने का मन बना लिया है बिहार सरकार ने | यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो आगे इस योजना को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा |
यह भी बता दें कि इस योजना के कार्यान्वयन के लिए हाईवे नाम देकर पूरे बिहार में चार कॉरिडोर बनाया गया है | ये हाईवे कोरिडोर हैं – (1) पटना-नालंदा हाईवे (2) भागलपुर-मुंगेर हाईवे (3) पूर्णिया-कटिहार हाईवे और (4) दरभंगा-समस्तीपुर हाईवे |
प्रथम चरण में उपर्युक्त इन चारों कोरिडोर के आठों जिलों से 100 गाँवों का चयन किया गया है | साथ ही प्रत्येक गाँवों से सौ-सौ किसानों यानि 10 हज़ार किसानों को प्रथम चरण में प्रशिक्षित किया जाएगा | प्रथम किस्त में इन किसानों को मौसम के अनुरूप धान, गेहूं, मक्का, अरहर, मसूर आदि की खेती कैसे की जाएगी….. उसकी ट्रेनिंग दी जाएगी | फिलहाल ये भी याद कर लें कि यह योजना तत्काल 3 साल के लिए चलेगी |




























