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क्या कहते हैं बिहार में उपचुनाव के परिणाम ?

बिहार में हुए उपचुनाव में एनडीए की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आए। उसे उम्मीद थी कि इस बार भी लोकसभा चुनाव जैसे परिणाम ही मिलेंगे, लेकिन स्पष्ट तौर पर इन चुनावों में बड़े नेता और बड़े नारों की जगह स्थानीय मुद्दे और समीकरण अधिक हावी रहे। विधानसभा की पांच सीटों में से जदयू ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सफलता केवल नाथनगर में मिली। आरजेडी ने भी चार सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए थे, जिनमें बेलहर और सिमरी बख्तियारपुर के रूप में दो सीटें जीतने में वह सफल रही। वहीं, एक-एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह और हैदराबाद के सांसद ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने जीत हासिल की। उधर समस्तीपुर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में लोजपा उम्मीदवार प्रिंस राज ने कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार को 1,02,090 वोटों से मात दी।
नाथनगर विधानसभा क्षेत्र में जदयू के लक्ष्मीकांत मंडल ने आरजेडी की राबिया खातून को 5131 वोट से हराया। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर सीट से आरजेडी के जफर आलम ने जदयू के डॉ. अरुण कुमार को 15505 वोट से और बेलहर में आरजेडी के रामदेव यादव ने जदयू के लालधारी यादव को 19231 वोट से हराया। उधर दरौंदा में भाजपा के बागी उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने जदयू के अजय कुमार सिंह को 27279 वोट से शिकस्त दी, जबकि किशनगंज में एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने भाजपा की स्वीटी सिंह को 10204 वोट से मात दी। ओवैसी की पार्टी का बिहार में सीट हासिल करना बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।
बहरहाल, इन चुनावों में आए परिणाम भले ही एनडीए के अनुकूल न रहे हों, लेकिन बिहार में एनडीए के सर्वमान्य और सबसे बड़े चेहरे नीतीश कुमार के मनोबल पर कोई असर पड़ता नहीं दिखता। इन नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि “जनता मालिक होती है। मैं पहले भी कह चुका हूँ। जब भी उपचुनाव में हम कम सीटों पर जीतते हैं तो चुनाव में ज्यादा सीटें जीतते हैं। यह पहले से होता रहा है। अगले चुनाव में हमारी बड़ी जीत होगी।”
नीतीश कुमार के आत्मविश्वास की दाद देनी होगी। लेकिन 2020 के लिए उन्हें अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा और बाकी दल भी उपचुनाव के नतीजों के आधार पर जोड़-तोड़ में लग चुके होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

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महाराष्ट्र की पहली नेत्रहीन महिला प्रांजल पाटिल बनी आईएएस

जब 2016 में प्रांजल ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 773वीं रैंक हासिल की तो उन्हें भारतीय रेल सर्विस में नौकरी करने का प्रस्ताव मिला, परंतु दृष्टि बाधित होने पर उन्हें नौकरी नहीं मिला भारतीय रेल में |

बता दें कि प्रांजल रेल विभाग के इस निर्णय से बेहद निराश हुई, परंतु वह हार मानने की जगह दोबारा संघर्षपूर्ण प्रयास करने लगी | प्रांजल पुनः UPSC की परीक्षा की तैयारी में जुट गई | अपने लक्ष्य के साथ वह प्रांजल खड़ी रही और अड़़ी रही | इस बार वह 124वीं रैंक लेकर प्रशिक्षणोंपरांत एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त हुई |

केरल कैडर की प्रांजल पाटिल उपजिलाधिकारी के पदभार संभालते हुए घोषणा की कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना चाहती है जिसमें हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के अवसर मिले | महाराष्ट्र के उल्लास नगर  में जन्मी 28 वर्षीया प्रांजल ने एक वाक्य में अपना संदेश दुनिया को यूँ दिया-

बिना किसी विराम के और बिना किसी थकान के मैं चलती रही…..मैंने कभी हार नहीं मानी …. बल्कि यही महसूसती रही कि जो गहराई में उतरता है…. वही मोती पाता है |

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हुई आईएएस प्रांजल पाटिल ने यही कहा कि मुझे हरदम माता-पिता से प्रेरणाएं मिलती रही | उन्हीं की प्रेरणा से वह जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय से एमए करने के बाद एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की | यद्यपि प्रांजल मात्र 6 साल की उम्र में नेत्रहीन हो गई जब खेल-खेल में ही प्रांजल की एक आंख में पेंसिल लग गई | यह हादसा इतना गंभीर रूप ले लिया कि कुछ ही दिनों बाद प्रांजल की दोनों आंखों की रोशनी चली गई | अचानक उजाले से अंधेरे में चली गई इस दुनिया से जूझना…… अब प्रांजल के लिए नेत्रहीन पर्वतारोही कंचन गाबा की तरह सबसे बड़ी चुनौती बन गई है |

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शिवानंद तिवारी: राजनीति से या आरजेडी से ‘छुट्टी’

भीतरी-बाहरी परेशानियों से एक साथ जूझ रही आरजेडी को मंगलवार को एक और झटका लगा। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने मंगलवार को राजनीति से ‘छुट्टी’ पर जाने की घोषणा कर दी। शिवानंद ने खुद को थका हुआ बताते हुए कहा कि अब थकान अनुभव कर रहा हूं और साथ ही स्पष्ट किया कि शरीर से ज्यादा मन की थकान है। उन्होंने संस्मरण लिखने की भी इच्छा जताई है।

बहरहाल, शिवानंद ने मंगलवार को अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘अब थकान अनुभव कर रहा हूं। शरीर से ज्यादा मन की थकान है। संस्मरण लिखना चाहता था, वह भी नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए जो कर रहा हूं, उससे छुट्टी पाना चाहता हूं। संस्मरण लिखने का प्रयास करूंगा, लिख ही दूंगा, ऐसा भरोसा भी नहीं है लेकिन प्रयास करूंगा। इसलिए आरजेडी की ओर से जिस भूमिका का निर्वहन अब तक मैं कर रहा था, उससे छुट्टी ले रहा हूं।’

हालांकि, शिवानंद तिवारी ने आरजेडी छोड़ने से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वे पार्टी नहीं छोड़ रहे, केवल राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि शिवानंद तिवारी इन दिनों आरजेडी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। पार्टी के कई फैसलों को लेकर उनसे पूछा तक नहीं गया और कई मौकों पर उनकी सलाह को नेतृत्व द्वारा नजरअंदाज किया गया, जिससे वे नाराज चल रहे हैं। बहरहाल, वे अपने निर्णय पर कायम रहेंगे या उनकी राजनीति कोई नया मोड़ लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

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बिहार में उपचुनाव के लिए प्रचार थमा, 21 अक्टूबर को होगा मतदान

बिहार में विधानसभा की पांच सीटों – सिमरी बख्तियारपुर, नाथनगर, बेलहर, दरौंदा और किशनगंज – तथा एक लोकसभा सीट समस्तीपुर के लिए उपचुनाव के प्रचार का शोर शनिवार शाम को थम गया। इसके बाद रविवार को उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांगेंगे। इन सभी सीटों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा बलों का पुख्ता इंतजाम किया गया है। बता दें कि विधानसभा की इन पांच और लोकसभा की एक सीट के लिए कुल 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और इन सभी सीटों के लिए कुल 3258 बूथों पर वोट डाले जाएंगे।

बिहार के इस उपचुनाव में एनडीए ने जहां इसी साल संपन्न हुए लोकसभा चुनावों की तरह एक बार फिर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है और पूरे उत्साह में दिख रहा है, वहीं महागठबंधन पिछले चुनावी सदमे से अभी तक पूरी तरह उबरा नहीं दिख रहा। 24 अक्टूबर को आने वाले परिणामों में 2020 के संकेत छिपे होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

बहरहाल, इन उपचुनावों में नाथनगर से जदयू के प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मंडल हैं। उनका मुकाबला राजद की राबिया खातून और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम के अजय कुमार राय से है। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर से जदयू के डॉ. अरुण कुमार उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला राजद के जफर आलम और महागठबंधन में रहे मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी के उम्मीदवार से है। बेलहर से जदयू के उम्मीदवार लालधारी यादव हैं। उनका मुकाबला राजद के रामदेव यादव से है। दरौंदा से जदयू के उम्मीदवार अजय सिंह हैं। उनका मुकाबला राजद के उमेश सिंह से है। वहीं, किशनगंज सीट पर भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह का मुकाबला कांग्रेस की शाइदा बानो से है। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर एनडीए की ओर से लोजपा के प्रिंसराज चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार से है।

चलते-चलते बता दें कि समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि एक विधानसभा कुशेश्वरस्थान में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय तय किया गया है। वहीं, विधानसभा उपचुनाव वाले क्षेत्रों में किशनगंज, दरौंदा, नाथनगर में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि, सिमरी बख्तियारपुर और बेलहर में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय चुनाव आयोग तय किया है।

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डिप्टी कलेक्टरी छोड़कर बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं राकेश

डिप्टी कलेक्टर राकेश कुमार बक्सर जिले में पदस्थापित हैं। डिप्टी कलेक्टर की नौकरी में चयन होने से पहले राकेश कुमार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय क्षेत्र अंतर्गत मुरारका कॉलेज सुल्तानगंज में भूगोल के शिक्षक रहे हैं। चंद वर्षों की पढ़ाई में ही उनके कई छात्र सुल्तानगंज से निकलकर जेएनयू दिल्ली विश्वविद्यालय एवं बीएचयू सरीखे शीर्षस्थ संस्थानों में जा चुके हैं। भला क्यों नहीं, राकेश कुमार भी तो जेएनयू के प्रतिभा संपन्न छात्रों में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने जेएनयू से ही भूगोल में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है।

राकेश ने यह बताया कि प्रशासनिक सेवा में आकर्षण तथा पारिवारिक दबाव के कारण ही उन्होंने कालेज शिक्षक की नौकरी छोड़कर डिप्टी कलेक्टरी में अपना योगदान दिया था। वर्तमान सरकारी सेवा में जाने से पूर्व राकेश ने टीएमबीयू के कुलसचिव को लियन पर बिना वेतन की छुट्टी हेतु आवेदन दिया था। उनकी छुट्टी विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत हुई या नहीं इसकी विधिवत जानकारी लिए बिना वे चले गए….. उन्होंने अपनी सेवा से इस्तीफा नहीं दिया था।

बकौल राकेश अब उन्हें प्रशासनिक सेवा की नौकरी में मन नहीं लग रहा है। वे पुनः छात्रों को पढ़ाना चाहते हैं, बच्चों के बीच ज्ञान की रोशनी फैलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 2008 तक कॉलेज में सेवा देने के बाद वे बक्सर चले गए थे। फिलहाल बक्सर जिले में उनका प्रशिक्षण चल रहा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा बीएनएमयू के स्थायी कुलपति तथा भागलपुर टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने कहा कि राकेश कुमार द्वारा दिए गए आवेदन पर विचार किया जाएगा। सिंडिकेट से पारित कराकर यथोचित कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत कुलपति डॉ.राय ने कहा कि राकेश कुमार को प्रशासनिक सेवा की नौकरी से इस्तीफा देनी पड़ेगी।

 

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जदयू अध्यक्ष पद पर दोबारा निर्विरोध निर्वाचित हुए नीतीश

जदयू के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार 6 अक्टूबर 2019 को लगातार दूसरी बार निर्विरोध जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए। जदयू के राष्ट्रीय चुनाव पदाधिकारी अनिल हेगड़े ने 7, जंतर मंतर स्थित जदयू के केन्द्रीय कार्यालय में उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की और उनके अध्यक्ष निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया, जिसे उनके प्रतिनिधि व बिहार विधान परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक संजय गांधी ने प्राप्त किया।

इस मौके पर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा, राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद, राष्ट्रीय सचिव राज सिंह मान, दिल्ली जदयू के अध्यक्ष दयानंद राय, युवा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार, बिहार के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह समेत दर्जनों नेता व पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

गौरतलब है कि 4 अक्टूबर 2019 को नीतीश कुमार की ओर से उनके प्रतिनिधि संजय गांधी ने नामांकन दाखिल किया था। किसी और ने इस पद के लिए नामांकन नहीं किया। 6 अक्टूबर को 3 बजे तक नाम वापसी का समय निर्धारित था। समय सीमा समाप्त होते ही अनिल हेगड़े ने नीतीश कुमार के निर्विरोध चुने जाने की घोषणा कर दी। उन्होंने उनके दूसरे कार्यकाल में जदयू के और मजबूत होने और इसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने की उम्मीद जताई।

बता दें कि शरद यादव का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 2016 में पहली बार नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। इस पद पर उनके पुन: निर्वाचित होने की विधिवत घोषणा 30 अक्टूबर 2019 को दिल्ली के रफी मार्ग स्थित मावलंकर हॉल में राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी। उनका दूसरा कार्यकाल 2022 तक का होगा।

इस बीच नीतीश कुमार के लिए बधाईयों की झड़ी लग गई है। बिहार समेत देश भर से उनके लिए बधाईयां आ रही हैं, जिनमें बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का शुभकामना-संदेश विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मोदी ने उन्हें शुभकामना देते हुए लिखा है कि “उन्होंने (नीतीश कुमार ने) बिहार में न्याय के साथ विकास की राजनीति को नई ऊँचाई दी और आपदा की चुनौतियों को भी जनता की सेवा के अवसर में बदलने का हुनर साबित किया। नीतीश जी के दोबारा पार्टी के शीर्ष पद पर निर्विरोध चुने जाने से एनडीए मजबूत होगा।” कहने की जरूरत नहीं कि जदयू और भाजपा के रिश्तों में आजकल अक्सर दिख जाने वाली ‘तनातनी’ के बीच ये संदेश खासा मायने रखता है।

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जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने किया नामांकन

जनता दल (यूनाइटेड) के सांगठनिक चुनाव के अंतिम चरण में शुक्रवार, 4 अक्टूबर को नई दिल्ली के 7, जंतर मंतर स्थित जदयू के केन्द्रीय कार्यालय में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल किया गया। नीतीश कुमार की ओर से उनके प्रतिनिधि विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी ने जदयू के राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी अनिल हेगड़े के समक्ष कुल चार सेटों में नामांकन दाखिल किया।
इस मौके पर राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद खान, दिल्ली प्रदेश जदयू के अध्यक्ष दयानंद सिंह, युवा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार एवं बिहार के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह समेत दर्जनों नेता व पदाधिकारी मौजूद रहे।
ध्यातव्य है कि 4 अक्टूबर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का आखिरी दिन था। शनिवार 5 अक्टूबर का दिन स्क्रूटनी के लिए निर्धारित है, जबकि रविवार 6 अक्टूबर का दिन नाम वापसी के लिए तय है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की विधिवत घोषणा राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय परिषद की बैठक 19 एवं 20 अक्टूबर को राजगीर में होनी थी जिसे बिहार में हो रहे विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर स्थगित कर दिया गया है। अब राष्ट्रीय परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को दिल्ली में होने की संभावना है।

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गांधी विचार समागम और जल-जीवन-हरियाली अभियान का शुभारंभ

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को पटना के ज्ञान भवन में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘गांधी विचार समागम’ का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया और जल-जीवन-हरियाली अभियान का रिमोट के माध्यम से शुभारंभ किया। गौरतलब है कि ‘गांधी विचार समागम’ में विभिन्न विषयों पर गांधी जी के विचारों पर विभिन्न विद्वान वक्ताओं द्वारा 11 सत्रों में 2 से 3 अक्टूबर तक चर्चा होगी।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि 10 से 15 प्रतिशत नई पीढ़ी के लोगों में गांधी जी के विचारों के प्रति आकर्षण पैदा हो जाए तो समाज और देश बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने पर्यावरण के प्रति अपने विचार में कहा था कि पृथ्वी सबकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, लालच को नहीं। हमलोगों ने हर घर तक बिजली पहुंचाई है लेकिन लोग उसका सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं। हर घर नल का जल वर्ष 2020 तक सभी जगह पहुंच जाएगा। आधी जगहों पर यह योजना पूर्ण हो चुकी है। पेयजल के दुरुपयोग से बचना होगा ताकि जल संरक्षण हो सके।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी सूखे की स्थिति, कभी अधिक वर्षापात की स्थिति बन रही है। हाल ही में 3-4 दिनों तक तेज वर्षा हुई जिसके कारण कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति बनी। हमलोगों ने आज ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान की शुरुआत की है। जल-जीवन-हरियाली का मतलब है जल है, हरियाली है तभी जीवन है, चाहे जीवन मनुष्य का हो या पशु-पक्षी का। 26 अक्टूबर से प्रत्येक पंचायत से इस अभियान के अंतर्गत कोई न कोई कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। यह अभियान अगले 3 वर्षों तक चलेगा और राज्य सरकार इस पर अपने बजट से 24 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बापू ने सात सामाजिक पापों की चर्चा की है। सभी सरकारी भवनों में सात सामाजिक पापों को इस तरह से अंकित कराना चाहिए कि वे नष्ट न हों। अगर इन बातों का प्रभाव 5 से 10 प्रतिशत लोगों के मन पर भी पड़ेगा तो देश और दुनिया बदल जाएगी। गांधी जी के विचारों के प्रति हमलोग समर्पित हैं और पूर्ण दृढ़ता के साथ इसके लिए काम कर रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनके संदेशों को अपनाते हुए जल-जीवन-हरियाली अभियान की आज शुरुआत की गयी है। उन्होंने कहा कि गांधी विचार समागम का जो आयोजन किया गया है और उसमें चर्चा के बाद नई बातें सामने आएंगी उससे समाज को लाभ होगा। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने गांधी जी के जीवन-वृत्त पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी, आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलाधिपति श्री रमाशंकर सिंह एवं मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री अंजनी कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चैधरी, शिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, जल संसाधन मंत्री श्री संजय झा, मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव शिक्षा श्री आरके महाजन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, पर्यावरणविद् डॉ. वंदना शिवा, आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर श्री जयंत सिंह तोमर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए गांधीवादी विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता, वरीय पदाधिकारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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चिराग 28 नवंबर को संभालेंगे लोजपा की कमान

रामविलास पासवान लोक जनशक्ति पार्टी की कमान अपने बेटे चिराग पासवान को सौंपने जा रहे हैं। यह तो खैर पहले से तयप्राय था कि चिराग ही उनके उत्तराधिकारी होंगे, लेकिन अपने सक्रिय रहते ही रामविलास पार्टी की जिम्मेवारी विधिवत चिराग को सौंप देंगे, यह तय नहीं था। पर लोजपा सुप्रीमो ने सबको चौंकाते हुए बाकायदा इसके लिए दिन भी घोषित कर दिया है। जी हाँ, आगामी 28 नवंबर को लोजपा के स्थापना दिवस पर रामविलास पासवान बेटे चिराग पासवान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंप देंगे। फिलहाल उन्‍हें बिहार लोजपा के प्रभारी अध्‍यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।

बता दें कि चिराग को प्रदेश का प्रभारी अध्यक्ष बनाने से पूर्व तेजी से चले घटनाक्रम में बिहार लोजपा के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पारस ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर हाल ही में पार्टी की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था और तय यह हुआ था कि दशहरा के बाद पार्टी की नई कमेटी का गठन किया जाएगा और बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान भी आरंभ होगा। ध्यातव्य है कि पारस लोजपा के स्थापना काल से ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे और संगठन का जिम्मा संभालते रहे थे। अब उन्हें दलित सेना का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। रामचंद्र पासवान के निधन के बाद से यह पद खाली था।

बहरहाल, लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने चिराग को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि इसके पीछे यह उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी को जितनी जल्दी हो सके पार्टी चलाने का जिम्मा सौंप दिया जाए। गौरतलब है कि चिराग ही लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं।

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पटना में होगा देश का पहला और एकमात्र डॉल्फिन रिसर्च सेंटर

देश का पहला और एकमात्र डॉल्फिन रिसर्च सेंटर पटना में बनने जा रहा है। 71 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर के भवन निर्माण का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 अक्टूबर 2019 को विश्व डॉल्फिन दिवस पर करेंगे।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार की तरफ से रिसर्च सेंटर के निर्माण के लिए वर्ष 2013 में ही 29 करोड़ रुपये आ गए थे लेकिन भूमि संबंधी विवाद के कारण भवन का शिलान्यास नहीं हो पा रहा था। यह विवाद अब समाप्त हो गया है। इस रिसर्च सेंटर के लिए पटना विश्वविद्यालय की ओर से पटना लॉ कॉलेज के पास गंगा तट पर दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिस पर निर्माण कार्य शुरू होगा। कहने की जरूरत नहीं कि रिसर्च सेंटर बन जाने से यहां देश-विदेश के विशेषज्ञ शोध करने के लिए आएंगे। पटना विश्वविद्यालय के छात्रों को भी डॉल्फिन पर शोध करने का मौका मिलेगा।

ध्यातव्य है कि 5 अक्टूबर 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गांगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। डॉल्फिन को जलीय जीव घोषित कराने का श्रेय पटना विवि के प्रोफेसर डॉ. आरके सिन्हा को जाता है। इसके लिए राजेंद्र सहनी नामक मछुआरे और उनकी टोली को भी श्रेय जाता है, जिन्होंने डॉल्फिन के रहन-सहन और खान-पान के विषय में काफी बातें उजागर की थीं। यह भी जानें कि डॉल्फिन पर देश में पहली पीएचडी डॉ. गोपाल शर्मा के नाम है। डॉ. शर्मा फिलहाल भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के बिहार प्रभारी एवं वरीय वैज्ञानिक हैं।

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