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पूर्वे की जगह जगदानंद को बिहार राजद की कमान

राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे। सोमवार को उन्होंने राजद की बिहार इकाई के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके निर्वाचन की औपचारिक घोषणा 27 नवंबर को पटना के विद्यापति भवन में आयोजित पार्टी की राज्य परिषद की बैठक में होगी। वे मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और बिहार विधान परिषद के सदस्य रामचंद्र पूर्वे का स्थान लेंगे। पूर्वे लगातार 10 वर्षों से इस पद पर थे।
बता दें कि राजद के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केवल जगदानंद सिंह ने ही नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन के अवसर पर बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी, प्रदेश प्रधान महासचिव आलोक मेहता और राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव समेत पार्टी के अधिकांश विधायक मौजूद थे। उनके प्रस्तावकों में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं लालू के उत्तराधिकारी तेजस्वी प्रसाद यादव शामिल रहे।
पूर्वे की जगह जगदानंद की ताजपोशी के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इनमें से एक यह भी है कि लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव पूर्वे से नाराज चल रहे थे और पूर्वे की विदाई लालू के दोनों बेटों के बीच तनाव कम करने की कोशिश है। वैसे यह स्पष्ट है कि जगदानंद की ताजपोशी लालू प्रसाद यादव के कहने पर ही हुई है। जगदानंद पार्टी के पुराने वफादार रहे हैं। उनकी गिनती उन समाजवादी नेताओं में होती है जो विवादों से दूर रहे हैं और पार्टी के भीतर सभी गुटों द्वारा सम्मानित हैं। उनके माध्यम से लालू पार्टी में नई जान फूंकना चाहते हैं। साथ ही यह स्पष्ट तौर पर सवर्णों खासकर राजपूत मतदाताओं को साधने की कवायद भी है।
चलते-चलते बता दें कि जगदानंद सिंह रामगढ़ (कैमूर) से कई बार विधायक और राजद सरकार में जल संसाधन मंत्री रह चुके हैं। बक्सर से वे एक बार सांसद भी रहे हैं। लालू परिवार के करीबी होने के साथ ही उनकी छवि क्षेत्र में काम करने वाले नेता की रही है।

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बिहार बोर्ड ने जारी किया इंटर व मैट्रिक- 2020 परीक्षा का प्रोग्राम

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इंटर एवं मैट्रिक की परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है। 3 फरवरी से इंटर एवं 17 फरवरी से मैट्रिक की परीक्षा शुरू होगी।

बता दें कि ये परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जाएगी। बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि प्रथम पाली की परीक्षा- प्रातः 9:30 बजे से अपराहन 12:45 तक होगी, वहीं दूसरी पाली की परीक्षा- अपराहन 1:45 बजे से 5:00 बजे शाम तक चलेगी।

प्रायोगिक परीक्षा के बाबत अध्यक्ष ने बताया कि इंटर की प्रायोगिक परीक्षा 10 जनवरी से 21 जनवरी 2020 तक चलेगी और मैट्रिक की परीक्षा 17 फरवरी से 24 फरवरी 2020 तक चलेगी।

यह भी जानिए कि मैट्रिक परीक्षा के ऐच्छिक विषयों में गृह विज्ञान, संगीत, नृत्य एवं ललित कला की प्रायोगिक परीक्षा 20-21-22 जनवरी को आयोजित की जाएगी।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने दिव्यांग परीक्षार्थियों एवं दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों यानी दोनों प्रकार के परीक्षार्थियों के लिए यही कहा है कि-

1. दिव्यांग परीक्षार्थियों को आवश्यकतानुसार बोर्ड द्वारा लेखक प्रदान किए जाएंगे।

2. दृष्टि बाधित दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए पूर्व की भांति विज्ञान के स्थान पर संगीत एवं गणित के स्थान पर गृह विज्ञान की परीक्षा ली जाएगी।

3. दिव्यांगों की परीक्षाएं 17 एवं 18 फरवरी 2020 को ली जाएगी…। साथ ही यह भी कि-

4. दिव्यांगों की परीक्षा केवल प्रथम पाली में होगी तथा ग्राउंड फ्लोर पर समुचित सुविधाओं के साथ ली जाएगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सभी प्रकार के परीक्षार्थीगण इंटर एवं मैट्रिक परीक्षा- 2020 के परीक्षा कार्यक्रमों की जानकारी अपने स्कूल व केंद्रों से प्राप्त करते रहेंगे।

 

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बिहार की बेटी शिवांगी नौसेना में बनी देश की पहली महिला पायलट

बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी सब -लेफ्टिनेंट शिवांगी इस वर्ष के अंत तक नौसेना में देश की पहली महिला पायलट बनेगी। ग्रामीण परिवेश में एक स्कूल टीचर के घर जन्मी शिवांगी ने 2010 में मुजफ्फरपुर के डीएवी स्कूल से CBSE की परीक्षा पास की। साइंस स्ट्रीम में 12वीं करने के बाद शिवांगी सिक्किम-मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की। एमटेक में दाखिले के बाद SSB परीक्षा के जरिये नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित हुई।

बता दें कि फिलहाल शिवांगी कोच्चि में “Flying Fish” की ट्रेनिंग ले रही है। ट्रेनिंग पूरी होते ही एक समारोह आयोजित कर शिवांगी को बैज लगाया जाएगा। बैज लगाने के बाद शिवांगी नौसेना (NAVY) में देश की पहली महिला पायलट बनेगी।

यह भी बता दें कि किसी भी क्षेत्र में पीछे रहना बिहार की जिस बेटी शिवांगी को मंजूर नहीं था चंद दिनों के बाद उसी बेटी के सपनों को पंख लगने जा रहा है। वहां का बच्चा-बच्चा जानता है कि शिवांगी बचपन से ही हर बाधा को चुनौती के रूप में लेती थी।

चलते-चलते यह भी जान लें कि शिवांगी के पिता हरिभूषण सिंह फतेहाबाद गांव (प्रखंड- पारु) के निवासी हैं जो वर्तमान में यमुना बालिका उच्च विद्यालय में एचएम हैं। साथ ही यह भी कि पठन-पाठन के साथ-साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में दिलचस्पी रखने वाली शिवांगी मुजफ्फरपुर शहर में भगवानपुर इलाके के सर गणेश दत्त मोहल्ले की रहने वाली है जो ट्रेनिंग के दरमियान कॉकपिट के अंदर एक तेज सीखने वाली तथा उड़ान भरने में प्रवीण शिवांगी अपने इंस्ट्रक्टर लेफ्टिनेंट कमांडर राहुल यादव को अपने अव्वल हुनर से संतुष्ट कर देती है।

 

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बिहार में पिछले पांच साल में बने 1.13 करोड़ शौचालय

बिहार में पिछले पांच साल में 1.13 करोड़ शौचालय बने हैं। मंगलवार को विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित ‘बिहार स्वच्छता संकल्प-2019’ समारोह को सम्बोधित करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े अभियान के तहत 60 महीने में 60 करोड़ आबादी के लिए 11 करोड़ से अधिक शौचालय का निर्माण कर पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त किया गया है। स्वप्रेरणा से 1.13 करोड़ शौचालय का निर्माण कर बिहार ने भी इस अभियान को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि बिहार में 70 हजार से ज्यादा राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया और 52 हजार से ज्यादा स्वच्छताग्रहियों ने व्यवहार परिवर्तन के लिए मुहिम चलाया। पांच साल में असंभव प्रतीत होने वाला लक्ष्य हासिल कर गांधी की 150 वीं जयंती पर उनके सपनों को साकार किया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार हर घर में शौचालय निर्माण से देश में तीन लाख लोगों की डायरिया से होने वाली मौत व प्रत्येक परिवार की चिकित्सा पर होने वाले औसत 50 हजार रुपये का खर्च बचा है। उन्होंने कहा कि 02 अक्तूबर, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘हर घर शौचालय’ अभियान शुरू किया तो बिहार के मात्र 25.9 प्रतिशत ग्रामीण घरों में शौचालय थे। आज लगभग शत-प्रतिशत घरों में शौचालय का निर्माण कर सभी पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है।

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शौचालय निर्माण एक सतत प्रक्रिया है, जो इक्के-दुक्के छूट गये होंगे, बाढ़ या अन्य कारणों से क्षतिग्रस्त हो गए होंगे ‘कोई पीछे न छूट जाय’ अभियान के तहत सरकार उनका दुबारा निर्माण करायेगी। लगातार प्रयास करना होगा कि जिनके घरों में शौचालय बन गया है वे फिर से खुले में शौच के लिए बाहर न जाने लगे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता का एक चरण पूरा हुआ है, दूसरा चरण ठोस व तरल अपशिष्ठ प्रबंधन का है। 2020 में प्रदेश के 165 ग्राम पंचायतों में कचरा प्रबंधन का अभियान प्रारंभ किया जायेगा।

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सभी समुदाय सुप्रीम कोर्ट के फैसला को मानें… फासला न बढ़ावें

दशकों से चल रही “राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद” की न्यायिक प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई सहित जस्टिस डीवाई चन्द्रचूर, एसए बाबरे, अशोक भूषण एवं अब्दुल नजीर नेे लगातार 40 दिनों तक 5-6 घंटे प्रतिदिन दोनों समुदायों के सभी पक्षों के तथ्यों को सुनकर आज 9 नवंबर को ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें ना तो किसी पक्ष की हार हुई और ना किसी की जीत।

तभी तो मधेपुरा के डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में संपूर्ण भारतीय डॉ.कलाम के करीबी माने जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के नेतृत्व में दोनों समुदाय के लोग समस्त शांति व सद्भाव के साथ बेफिक्र होकर सफाई करने में लगे दिख रहे हैं। वै हैं- निर्मल तिवारी, राम पदारथ यादव, मो.इम्तियाज, मो.राशिद, मो.महताब, डॉ.अर्जुन यादव, मिस्टर मौलाना की पूरी टीम…..।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सांस्कृतिक, धार्मिक व सामाजिक न्याय को दृष्टिपथ में रखते हुए विधि संगत ऐतिहासिक न्याय दिया है। जहाँ राम जन्मभूमि के साक्ष्यों को आधार मानकर 2.77 एकड़ जमीन रामलला के मंदिर हेतु दिया गया वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय का सम्मान रखते हुए उन्हें लगभग दो गुनी यानी 5 एकड़ जमीन अयोध्या के अंदर ही देने का फैसला सुनाया। इस फैसले का सम्मान देशवासियों के लिए अग्नि परीक्षा है। जिसमें उन्हें उत्तीर्ण होने के लिए शांति, सद्भाव व सुरक्षा को बनाए रखने के साथ-साथ हिन्दू समुदाय को मस्जिद निर्माण में सहयोग देना होगा और मुस्लिम समुदाय को मंदिर निर्माण में। दोनों समुदाय अपने अहम एवं वहम का त्याग करे ! देश के सभी समुदायों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सम्मान किया है।

समाजसेवी डॉ.मधेपुरी से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सभी समुदाय फैसला को मानें….. फासला ना बढ़ावें। उन्होंने कहा कि भाईचारा व शांति कायम रखने वाले सभी प्रयासों की भरपूर सराहना की जानी चाहिए क्योंकि यह विवाद देश को दीमक की तरह खाये जा रहा था… और खोखला बनाए जा रहा था।

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संगठन चुनाव के बाद बिहार जदयू की पहली बड़ी बैठक

पटना स्थित बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में बुधवार 6 नवंबर 2019 को नवनियुक्त पार्टी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह ने की। इस बैठक में पार्टी के सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिलों के संगठन प्रभारी, सभी जिलाध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, प्रदेश प्रवक्ता व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में विभिन्न स्तरों पर संगठन को और अधिक मजबूत, धारदार व चुस्त-दुरुस्त बनाने के मद्देनज़र आरसीपी सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों को कई निर्देश दिए। संगठन चुनाव के बाद हुई इस पहली बड़ी बैठक में कई निर्णय लिए गए जिनमें सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव का मनोनयन तथा सभी विधानसभा क्षेत्रों में सम्मेलन का आयोजन किया जाना शामिल है।
पार्टी की इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, प्रो. रामवचन राय, ललन कुमार सर्राफ, डॉ. रणवीर नंदन, तनवीर अख्तर, डॉ. रंजू गीता, अभय कुशवाहा, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चंदन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष व क्षेत्रीय संगठन प्रभारी डॉ. अमरदीप, महिला जदयू अध्यक्ष श्वेता विश्वास, अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संतोष महतो आदि मौजूद रहे।
इस मौके पर अपने संबोधन में आरसीपी सिंह ने पार्टी के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हमलोग उस पार्टी के सिपाही हैं जिसका नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने संगठन को बूथ स्तर तक पूरी मजबूती से स्थापित करना है और बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर श्री नीतीश कुमार ने जितने कार्य किए हैं, उन्हें जन-जन तक पहुँचा देना है; बिहार की महान जनता का आशीर्वाद हमें जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कौन क्या कह रहा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें केवल अपने काम पर ध्यान देना है। 2020 में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी। श्री सिंह ने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का परिणाम इस बार के लोकसभा चुनाव से भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि हर सीट पर हमें विजय हासिल हो, सभी साथियों को इस संकल्प के साथ चुनाव में जाना है।
इस बैठक में आरसीपी सिंह ने संगठन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। 15 नवंबर 2019 से 05 दिसंबर 2019 के बीच उन्होंने सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव का चयन अनिवार्य रूप से कर लेने को कहा। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 15 दिसंबर 2019 से 05 जनवरी 2020 तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का सम्मेलन किया जाना है। आरसीपी सिंह ने कहा कि इसके पूर्व प्रखंड व जिला कमिटियों का गठन अवश्य कर लें।

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नीतीश सरकार द्वारा भूमि विवाद निबटाने हेतु पुलिसवालों को विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था

देशभर में भूमि विवाद से संबंधित मामले थाने से लेकर भिन्न-भिन्न स्तर के न्यायालयों में करोड़ों की संख्या में वर्षों से लंबित हैं | प्रतिदिन अखबार में जितनी भी हत्याओं के समाचार छपते हैं, उनमें आधे से अधिक भूमि विवाद से संबंधित हुआ करते हैं |

बता दें के सूबे बिहार में लंबित पड़े मुकदमों की संख्या करीब डेढ़ लाख है जिसमें 60% से अधिक मामले जमीन विवाद से जुड़े हैं | इन विवादों की संख्या को कम करने के लिए तथा सज्जन लोगों को सहज जीवन जीने के निमित्त नीतीश सरकार ने पुश्तैनी जमीन के लिए पारिवारिक बंटवारे हेतु रजिस्ट्री-फी लाख-करोड़ रुपये की जगह मात्र ₹100 कर दी | साथ ही यह भी नियम बना दिया कि बिना जमाबंदी अब जमीन की खरीद-बिक्री नहीं होगी, परन्तु हाईकोर्ट ने तत्काल इस नियम पर रोक लगा दी है |

यह भी बता दें कि भूमि विवादों को कम करने हेतु पुलिस मुख्यालय के स्तर से एक विशेष पहल की गई है | इसमें सहायक पुलिस निरीक्षक से लेकर पुलिस निरीक्षक स्तर के पदाधिकारियों को जमीन से जुड़े तमाम जरूरी कानून की ट्रेनिंग दी जाएगी | चरणबद्ध तरीके से दी जाने वाली ट्रेनिंग के लिए गृह विभाग ने 1 करोड़ 47 लाख 31 हज़ार रूपये की स्वीकृति भी दे दी है |

जानिए कि गृह विभाग के सभी उच्चाधिकारियों को हिदायत के साथ यह आदेश निर्गत किया है कि इन रुपये को एक महीने के अंतर्गत ट्रेनिंग पर खर्च करें, न कि रुपये की निकासी करके बैंक एकाउंट में रख दें | आदेश में इस बात की भी जानकारी दे दी गई है कि ट्रेनिंग स्थल ए.एन.सिन्हा शोध संस्थान प्रस्तावित है जहाँ पुलिस इंस्पेक्टर रैंक तक के सभी पदाधिकारियों को जमीन से जुड़े तमाम कानूनों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी | यहाँ तक की जमीन रिफॉर्म से जुड़े कानूनों की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी |

 

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सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ

शुचिता, स्वच्छता और समर्पण का महापर्व है छठ। घर-घर में महिलाएं अपने परिवार व बच्चों की कुशलता की कामना लेकर पूरी निष्ठा से करती हैं इस व्रत को। कुछ घरों में तो पुरुष भी रखते हैं यह व्रत। गौर करने की बात है कि छठ ही एकमात्र पर्व है जिसमें बिना किसी कर्मकांड या पंडितों की सहायता के ही श्रद्धालु व्रती चार दिनों तक चलने वाला व्रत करते हैं।
लोकआस्था का यह महापर्व छठ सामाजिक एकता का अद्वितीय प्रतीक है। तभी तो बिहार के कटिहार, नालंदा आदि जिलों के कुछ मुस्लिम परिवार भी वर्षों से इस व्रत को करते आ रहे हैं। भला क्यों नहीं, सूर्यदेव सबसे जुड़े जो हैं और साथ ही जोड़ते भी हैं सबको। बिना किसी भेद-भाव के विभिन्न घाटों पर सभी एक साथ मिलकर सूर्य देव को प्रणाम करते हैं। सभी जानते और मानते हैं कि सूर्य से ही जीवन है और सूर्य से ही प्रकृति और पर्यावरण का अस्तित्व संभव है। तभी तो इस महापर्व में डूबते सूर्य की भी पूजा समान श्रद्धा से होती है।
धार्मिक आस्था से जुड़े महापर्व छठ का आर्थिक पक्ष भी है। जी हाँ, हमें जानना चाहिए कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जीवित रखने में इस पर्व का बड़ा योगदान रहा है। यदि बाजार में इस पर्व में उपयोग में लाई जाने वाली चीजों पर नज़र डालें तो 90 से 95 प्रतिशत सामान गांवों के छोटे-छोटे किसानों के खेत से या फिर कास्तकारों के हाथों के हुनर से बनकर आते हैं। इस पर्व में इस्तेमाल होने वाली चीजों – हल्दी, अदरख, केला, अमरूद, अल्हुआ, सुथनी आदि – का करोड़ों का कारोबार हो जाता है। मधेपुरा की ही बात करें तो केवल इस जिले में ही हल्दी-अदरख का कारोबार तीन से चार करोड़ तक पहुँच जाता है। छठ पूजन की अन्य सामग्रियों को जोड़ दें तो जिले का कुल कारोबार 90 से 95 करोड़ तक पहुँच जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती मिलती है।
कुल मिलाकर कहना गलत न होगा कि समाज के हर वर्ग को एक समान लाभ और महत्व देने वाला यह पर्व समाजवाद की सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करता है। इस तरह से सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ।

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जीवनदायी सूर्यदेव के प्रति श्रद्धा का पर्व है छठ

पृथ्वी पर जीवन का आधार है सूर्य क्योंकि सूर्य, को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य के आलोक से पृथ्वी पर जीवन प्रकाशित हो उठता है। छठ व्रत इसी जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व है। ऐसा महापर्व जिसमें बिना किसी भेदभाव के समस्त समाज सामूहिक रूप से डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देता है।

बता दें कि छठ एक अति प्राचीन महोत्सव है जिसे दिवाली के बाद छठे दिन मनाया जाता है। बिहार झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश… सहित देश के विभिन्न महानगरों में श्रद्धालुओं द्वारा इस प्रकृति प्रेम के प्रतीक छठ पर्व को सर्वाधिक निष्ठा पूर्वक मनाया जाता है। छठ में सभी श्रद्धालु नर-नारी जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। जल तो प्रेम का प्रतीक है चाहे नदी का हो या तालाब का या घर का ही क्यों ना हो।

यह भी जानिए कि यह पर्व सूर्य को आभार व्यक्त करने की परंपरा है। इस पर्व का उद्देश्य सूर्यदेव से अपनेपन को महसूस करना है। सूर्य देव को दूध या जल का अर्घ्य अर्पित किया जाना इस तथ्य को दर्शाता है कि श्रद्धालुओं का मन और हृदय दोनों पवित्र और स्वच्छ बना रहे। फिलहाल पद्मश्री शारदा सिन्हा का छठ गीत वातावरण को सरस बनाने में लग गया है।

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बिहार प्रदेश जदयू की नई कार्यकारिणी का गठन

बिहार प्रदेश जदयू अध्यक्ष व सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन किया। कार्यकारिणी में 12 उपाध्यक्ष, 19 महासचिव, 11 सचिव, 01 कोषाध्यक्ष, 38 संगठन प्रभारी और 59 सदस्य शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों का भी मनोनयन किया।
प्रदेश जदयू के 12 उपाध्यक्ष हैं: नवल किशोर राय, विश्वनाथ सिंह, एनएन शाही, लखन ठाकुर, रंजीत सिन्हा, श्यामबिहारी राम, रुदय राय, राजन मिश्रा, अंजली सिन्हा, मौलाना उमर नूरानी, प्रो. महेन्द्र प्रसाद सिंह और नरेन्द्र सिंह। जिन 19 नेताओं को महासचिव का दायित्व सौंपा गया है, वे हैं: डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चन्दन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, मंजीत सिंह, अजय पासवान, प्रदीप सिंह, अरुण कुशवाहा, निहोरा प्रसाद यादव, अशोक कुमार बादल, अशोक कुमार सिंह, डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. आसमां परवीन, दुर्गेश राय, विभूति गोस्वामी, आसिफ कमाल, डॉ. विपिन कुमार यादव और रामगुलाम राम। विधानपार्षद ललन कुमार सर्राफ को एक बार फिर कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन करते हुए पार्टी के 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष का भी मनोनयन किया। अभय कुशवाहा को एक बार फिर युवा प्रकोष्ठ, तन्वीर अख्तर को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, प्रो. रामवचन राय को बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, डॉ. अमरदीप को मीडिया प्रकोष्ठ एवं सुनील कुमार को प्रशिक्षण प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर आधे से अधिक प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदले गए हैं। जिन प्रकोष्ठों में नए चेहरे सामने लाए गए हैं, उनमें महिला प्रकोष्ठ (श्वेता विश्वास), व्यावसायिक प्रकोष्ठ (मूलचन्द गोलछा), दलित प्रकोष्ठ (रामप्रवेश पासवान), महादलित प्रकोष्ठ (रुबेल रविदास) और शिक्षा प्रकोष्ठ (डॉ. कन्हैया सिंह) प्रमुख हैं।
चार जिलों में नए जिलाध्यक्ष भी मनोनीत किए गए हैं। सोनेलाल मेहता को खगड़िया, दामोदर रावत को जमुई, सलमान रागिब को नवादा और राकेश कुमार उर्फ पुतुल को आरा (नगर) की जिम्मेदारी दी गई है।

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