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आज ही के दिन जन्मे राजेश खन्ना…. अभिनय के दम पर बॉलीवुड का सुपरस्टार बने

भारतीय फिल्मी दुनिया का चमकता हुआ सितारा राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर, 1942 यानि आज के ही दिन अमृतसर में हुआ था। भारत के समस्त कलाप्रेमी आज उस अद्भुत कलाकार को याद करता है जिसका असली नाम जतिन खन्ना था। जतिन यानि राजेश खन्ना की पहली फिल्म “आखिरी खत” 1966 में रिलीज हुई थी।

बता दें कि राजेश खन्ना भारतीय बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, निर्देशक व निर्माता थे। उन्होंने 1969-70 व71 के बीच 15 सुपरहिट फिल्में दी और सुपरस्टार बन गए। वर्ष 1970 से 1980 तक बॉलीवुड के बेशकीमती हीरा बने रहे राजेश खन्ना यानि सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाले अभिनेता बने रहे वे।

जानिए कि राजीव गांधी के कहने पर राजेश खन्ना ने राजनीति में प्रवेश किया और वे नई दिल्ली लोकसभा सीट से 5 वर्षों (1991-96) के लिए कांग्रेस पार्टी के सांसद बने। बाद में उन्होंने राजनीति से ही सन्यास ले लिया।

यह भी जानिए कि सुपर स्टार राजेश खन्ना का नाम 14 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया, जिनमें उन्हें तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला और चार बार बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट अवार्ड दिया गया। इसके अलावा दर्जनों भिन्न-भिन्न अवॉर्डों से विभूषित किया गया। मरणोपरांत इस सुपरस्टार को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। कैंसर के कारण 18 जुलाई 2012 को मुंबई में उनकी मृत्यु हो गई।

चलते-चलते यह भी कि राजेश खन्ना के पारिवारिक जीवन में बसंत कम और पतझड़ अधिक दिखते रहे। वर्ष 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी हुई और 1984 में दोनों अलग हो गए। फिर 1990 में दोनों करीब आते दिखे। वर्ष 2012 आते-आते दोनों एक साथ त्यौहार मनाने लगे। उनकी ही बड़ी बेटी ट्विंकल फिल्म अभिनेत्री है जिसकी शादी अभिनेता अक्षय कुमार से हुई है। अक्षय कुमार भी फिल्मी दुनिया की एक बड़ी हस्ती है और किसी से कम नहीं…।

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नए वर्ष में नीतीश ने जदयू को दिया नया तोहफा

जदयू का एक शख्सियत जो ज्यादा सुर्खियों में रहना पसंद नहीं करता, परंतु पार्टी के रणनीतिकार के रूप में पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति को सफलतापूर्वक अमलीजामा पहनाने में कुशल हैै- वही तो है नीतीश कुमार के अच्छे दोस्त, सियासी सलाहकार और भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी व पार्टी के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह, जिन्हें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में स्वयं नीतीश कुमार ने रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रदेश मुख्यालय स्थित कर्पूरी ठाकुर सभागार में रविवार को सर्वप्रथम नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की और तत्पश्चात आरसीपी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव भी दिया। बैठक में तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड…. आदि से आए प्रतिनिधि भी शिरकत कर रहे थे।

आज जदयू राष्ट्रीय परिषद की मुहर लगने के बाद नए वर्ष के तोहफे के रुप में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर आरसीपी सिंह के नाम की विधिवत घोषणा भी कर दी गई है।

जानकारों का मानना है कि अरुणाचल प्रदेश में जदयू के 6 विधायकों को भाजपा में शामिल कराए जाने के व्यवहार और बिहार में जदयू को 43 तो भाजपा को 74 सीटें मिलने के कारण एक पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जरूरत महसूस की गई और उसी के फलस्वरूप आरसीपी को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।

Dr.Bhupendra Madhepuri along with Newly appointed President (JDU) RCP Singh and Lalan Sarraf at Lalan Sarraf's House.
JDU Senior Leader Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri along with Newly appointed President (JDU) RCP Singh and MLC Lalan Sarraf at Lalan Sarraf’s House. (File Photo)

जानिए कि नीतीश के इस निर्णय को जदयू के सभी कार्यकर्ताओं ने सिर आंखों पर रख लिया है और जुनून के साथ पार्टी को मजबूती प्रदान करने हेतु संकल्प भी ले लिया। बकौल पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, एमएलसी  ललन सर्राफ के निवास पर कई बार आरसीपी से उनकी मुलाकातें हुई, देर तक बातें हुई। डॉ.मधेपुरी ने आज भरोसे के साथ कहा कि आरसीपी सरीखे राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) की काबिलियत को देखकर पार्टी ने जो निर्णय लिया है वह आने वाले दिनों में पार्टी को तीसरे नंबर से पहले नंबर पर लाने में अवश्य ही कारगर सिद्ध होगा।

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चौधरी चरण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता व ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया- डॉ.मधेपुरी

पचासी वर्षों तक जीवन के बसंत और पतझड़ के बीच जीवन को सहजता के साथ जीते हुए भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह भारतीय किसानों के रक्षक, रहवर और रखवाला माने जाते रहे। पांच बार यूपी विधानसभा के लिए छपरौली सीट से विधायक बनकर पंडित गोविंद बल्लभ पंत, डॉ.संपूर्णानंद, श्री सीपी गुप्ता एवं श्रीमती सुचेता कृपलानी सरकार में विभिन्न विभागों के मंत्री पदों को बखूबी संभालते रहे वे। उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार का पूरा श्रेय उन्हें ही जाता है। चौधरी साहब ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता एवं ग्रामीण परिवेश की मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने में लगा दिया। ये बातें, उनकी 119वीं जयंती ऑनलाइन मनाते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कही।

डॉ.मधेपुरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संबोधन में स्कूली बच्चों से कहा कि देश में गिने-चुने ही राजनेता ऐसे हुए जिन्होंने लोगों के बीच सहजता एवं सरलता से कार्य करते हुए इतनी लोकप्रियता हासिल की। सामाजिक न्याय में दृढ़ विश्वास रखने वाली चौधरी चरण सिंह को भारतीय किसानों ने अपना रहवर मान लिया था, क्योंकि चौधरी साहब का मानना था कि देश की उन्नति का रास्ता किसानों के खेत व खलियान होकर गुजरता है। देश तभी मजबूत होगा जब किसान खुशहाल होंगे।

अंत में बच्चों से उन्होंने यही कहा कि प्रतिभा संपन्न हुआ व्यवहारवादी सीएम रहे श्री चरण सिंह के पहल पर ही उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के वेतन एवं उन्हें मिलने वाले अन्य लाभों को काफी कम कर दिया गया था। डॉ.मधेपुरी ने उनके अवदानों की विस्तार से चर्चा करते हुए उनके द्वारा लिखी पुस्तकों- जमींदारी उन्मूलन, भारत की गरीबी और उसका समाधान, किसानों के लिए भूमि आदि पर भी प्रकाश डाला।

चलते-चलते यह भी कि लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह दल के प्रत्याशी के प्रचार में जब मधेपुरा आए थे तो उनके संग लोक दल के तत्कालीन वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, जिलाध्यक्ष विजय कुमार वर्मा आदि हुआ करते थे। उनकी योग्यता और अनुभव की छाप हमें आज भी सत्य की राह पर चलने को प्रेरित करती है।

 

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कोरोना के नए रूप से दुनिया में हड़कंप

दुनिया के 5 देशों में कोरोना के नए रूप को देखकर भारत का चिंतित होना स्वाभाविक है। ब्रिटेन में तो वायरस का नया स्ट्रेन 70% तेजी से फैल रहा है। फलस्वरूप भारत ने ब्रिटेन से आने वाली उड़ाने 31 दिसंबर तक रोक दी है।

बता दें कि भारत ने आपात बैठक कर आज से 31 दिसंबर तक ब्रिटेन-भारत के बीच की सारी हवाई उड़ानों पर रोक लगा रखी है। जहाँ ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का कहना है कि कोरोना के नए प्रकार पहले के वायरस के मुकाबले 70% अधिक तेजी से फैल रहा है, जो बेकाबू है वहीं भारत के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन कहते हैं कि सरकार जागरुक है, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। फिलहाल इस नए कोरोना के अधिक घातक होने के साक्ष्य नहीं प्राप्त हए हैं।

यह भी जानें कि जर्मनी, इटली, डेनमार्क, कनाडा आदि कई देशों ने जहां विमानों की आवाजाही पर रोक लगा दी है वहीं फ्रांस और सऊदी अरब ने अपनी सीमाएं सील कर ली है। वैज्ञानिकों द्वारा कयास लगाया जा रहा है कि कोरोना का नया प्रकार या तो ब्रिटेन में किसी मरीज में उत्पन्न हुआ होगा या फिर किसी ऐसे देश से आया होगा जहां कोरोना वायरस के म्यूटेशन पर निगरानी रखने की क्षमता कम है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि किसी भी वायरस में लगातार म्यूटेशन होता रहता है यानि इसके गुण बदलते रहते हैं। कई बार यह पहले से कई गुना खतरनाक होकर सामने आते हैं। यह प्रक्रिया इतनी तेजी से परिवर्तित होती है कि वायरस के एक रूप को समझने से पहले ही नया रूप सामने आ जाता है। वायरस का नया रूप आगे कमजोर होगा या घातक, अभी कोई अध्ययन नहीं हुआ है।

अंत में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने दुनिया में हुई 17 लाख लोगों की कोरोना से हुई मौत पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि जहां दुनिया में प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा मौतें हो रही हैं वहीं भारत में औसतन प्रतिदिन 350 जानें जा रही हैं। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है…. जानलेवा बीमारी है यह। संयम ही इस संक्रमण से बचाव के उपाय है। जब तक दवाई नहीं…. तब तक ढिलाई नहीं। बाहर जाने पर मास्क लगाएं….  दूरी बनाएं…… घर आने पर  हाथ धोएं और सैनिटाइजर लगाएं।

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भारतीय क्रिकेट के लिए 19 दिसंबर काला शनिवार साबित हुआ

14 जून 1924 को दक्षिण अफ्रीका की टीम इंग्लैंड के खिलाफ पोर्ट एलिजाबेथ में टेस्ट मैच खेलते हुए एक पारी में मात्र 30 रन पर सिमट गई थी, जिसमें कोई भी खिलाड़ी दो अंकों में रन नहीं बना पाए थे। आज 96 वर्षों के बाद विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम एडिलेड में खेले जा रहे डे एंड नाइट टेस्ट मैच के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पहली बार 36 रन पर ऑल आउट हो गई, जिसमें सबसे अधिक स्कोर मयंक अग्रवाल का रहा, जिन्होंने कुल 9 रन बनाए। कप्तान विराट कोहली सहित कोई भी भारतीय बल्लेबाज 2 अंकों में रन नहीं बना पाए। नौ धुरंधर सिर्फ 27 रन बनाकर ढेर हुए। तीन खिलाड़ी तो खाता भी नहीं खोल पाए, वे खाली हाथ पवेलियन लौट गए।

बता दें कि भारतीय क्रिकेट के लिए शनिवार का दिन भले ही शर्मसार करने वाला काला दिन रहा, परंतु अमिताभ बच्चन के कौन बनेगा करोड़पति के लिए लाख-करोड़ वाला प्रश्न बनकर दुनिया के सामने जरूर आएगा। ऐसी हार की जिम्मेदारी लेते हुए कप्तान विराट बोले……  दर्द बयां करने को शब्द नहीं !

गुलाबी गेंद से ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज हेजलवुड ने 5 एवं कमिंस ने 4 विकेट चटकाकर भारतीय बल्लेबाजी की धज्जियां उड़ा दी। टेस्ट इतिहास में भारतीय क्रिकेट टीम का यह सबसे न्यूनतम स्कोर है। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने गेंदबाजी का शानदार नमूना दिखाते हुए मेहमानों को तबाह कर दिया। भारतीय स्कोर बोर्ड में 4,2,0,9,0,4,4,0,8,4 और 1 निजी स्कोर किसी भी भारतीय प्रशंसक को निराश और हताश करने के लिए काफी है।

चलते-चलते यह भी कि कप्तान कोहली विशेष काम से भारत लौट रहे हैं। उप-कप्तान रहाणे अब भारतीय टीम के कप्तान होंगे। मोहम्मद शमी की कलाई में चोट है। वे स्कैन के लिए अस्पताल गए हैं। देखिए  अनिश्चितताओं के इस खेल में आगे क्या होता है ?

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4 जनवरी से खुलेंगे सूबे के स्कूल, कॉलेज व कोचिंग संस्थान

कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के चलते 13 मार्च 2020 से ही बंद राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज व कोचिंग संस्थान 4 जनवरी 2021 से खुलेंगे। आरंभ में स्कूलों में 8 से 12वीं तक की कक्षाएं और कॉलेजों में अंतिम वर्ष की कक्षाएं शुरू होंगी।

बता दें कि रोटेशन में चलेंगी कक्षाएं यानि आधे बच्चे एक दिन और शेष आधे दूसरे दिन बुलाए जाएंगे। एक दिन इवन क्रमांक तो दूसरे दिन आॅड क्रमांक वाले छात्र स्कूल आएंगे। ऐसा करने से सोशल-डिस्टेंसिंग मेंटेन किया जा सकेगा। सरकार द्वारा शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में प्रत्येक छात्र व शिक्षक को दो-दो मास्क मुफ्त दिए जाएंगे।प्रत्येक छात्र व शिक्षक को मास्क पहनना अनिवार्य होगा।

जानिए कि सूबे के सारे कोचिंग संस्थानों को वहां के डीएम से लेनी होगी अनुमति। ऐसा इसलिए कि प्रायः कोचिंग संस्थानों के साथ हॉस्टल जुड़े होते हैं अतः कोविड-19 के नियमों के आलोक में संस्थान शुरू करने से पहले कोरोना से बचाव के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देकर कार्य योजना को मंजूर कराना होगा। जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही कोचिंग संस्थान और उनके हॉस्टल शुरू होंगे। स्वीकृत कार्य योजना एवं दिए गए गाइडलाइन का पालन करना सभी कोचिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा।

चलते-चलते यह भी कि किसी भी रुप में नियमों का उल्लंघन हुआ तो संस्था-प्रधान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बकौल मुख्य सचिव सरकारी तंत्र सतर्क रहेगी और प्रत्येक सप्ताह स्कूल, कॉलेज व कोचिंग के संचालन की समीक्षा की जाएगी। समीक्षोपरांत यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 18 जनवरी से स्कूलों में 1 से 8 तक की कक्षाएं तथा कालेज की सभी कक्षाएं खोल दी जाएगी। याद रखें कि राज्य सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में विशेष शर्तों के साथ शिक्षण संस्थानों को खोलने का फैसला लिया गया है।

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नीतीश ने गांव और टोलों तक सड़क निर्माण के लिए राज्यव्यापी सर्वे एवं निर्माण हेतु लिया फैसला

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जगमग नगरों से दूर बापू के गांव की ओर तेजी से नजर दौड़ाया है और गांव-टोलों में बनी सड़कों के राज्यव्यापी भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि अगर कहीं भी सड़कें नहीं बनी है तो उसे तेजी से पूरा किया जाए तथा बनी हुई सड़कों का निरंतर मरम्मत विभाग द्वारा ही किए जाएं।

बता दें कि ग्रामीण लोगों को सुलभ संपर्कता प्रदान करने के लिए नीतीश सरकार इस बार चौकन्ना दिख रही है। ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना के तहत सभी टोलों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है। साथ ही यह भी कोशिश की जा रही है कि सड़कें हमेशा अच्छी हालत में रहे।

जानिए कि निरंतर अबाधित बिजली की तरह ही सुंदर सड़कों से ग्रामीण संपर्कता बनाए रखने हेतु मुख्यमंत्री ने ग्रामीण कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ-साथ मुख्य सचिव दीपक कुमार, वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस सिद्धार्थ, सीएम के सचिव मनीष कुमार वर्मा, खाद्य एवं उपभोक्ता विभाग के सचिव विजय कुमार एवं मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार भी उपस्थित थे।

समीक्षा बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि टोलों-बसावटों को जाकर देखें और जो सड़क से नहीं जुड़े हैं उन्हें बिना देर किए जोड़ें। अतिरिक्त संपर्कता के लिए कार्य योजना बनाएं और उस पर तेजी से काम हो। सीएम ने विभागीय वरीय इंजीनियरों को इस कार्य को गंभीरता से लेने और गति प्रदान करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि एक भी टोला और बसावट संपर्क पथ से छूटने नहीं पाए। इस तरह सीएम नीतीश कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी है।

चलते-चलते यह भी कि सीएम नीतीश के द्वारा गांवों एवं ग्रामीणों की ओर दिए जा रहे ध्यान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपनी चंद पंक्तियों में बस इतना ही कहा-

नवभारत का तीर्थराज है

मंडल-ग्राम, सितावदियारा।

लेकिन सुख सुविधा से वंचित

टोला और ये गांव हमारा।।

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डॉ.मधेपुरी 30 वर्षों से याद दिलाते आ रहे हैं कि सदन में पिंजरे बनवाए जाएं

आये दिन देश के लगभग सभी राज्यों की विधान सभाओं, परिषदों तथा संसद के दोनों सदनों में भी सत्ता और विपक्षी दलों के सदस्यों के बीच जूते-चप्पल फेंकने से लेकर माइक तोड़ोउवल, कुर्सी फेंकउअल….. और महिला विधायिका की साड़ी सदन के अंदर खींचना भी लाखों लोगों के जनप्रतिनिधि के लिए अब शर्मनाक बातों के घेरे में नहीं आते देखने के बाद प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने 30 वर्ष पूर्व से ही प्रत्येक सदन में सदस्यों की सीट के चारों ओर पिंजरे बनवाए जाने की मांग तब शुरू की थी जब तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता सुश्री जयललिता की साड़ी एक मंत्री जी द्वारा खींचे जाने के बाद भारतीय संस्कृति को शर्मसार करने वाली ये बातें उन्होंने कही थी- “…आगे वह विधानसभा में तभी प्रवेश करेगी जब उनका शील अक्षुण्ण रहने की पूर्ण गारंटी सरकार देगी।”

जानिए कि दो दिन कबल यानि मंगलवार को कर्नाटक विधान परिषद में सत्ता और विपक्ष के सदस्यों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई…. अराजकता की ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि सदन में ही उप-सभापति एसएल गौड़ा को कुर्सी से खींच कर फर्श पर पटक दिया, जिन्हें मार्शल द्वारा उठाते हुए टीवी पर दुनिया के लोगों ने देखा। भला क्यों नहीं, जिन सदनों में आधे से अधिक सदस्य वैसे होते हैं जिन पर लूट, अपहरण….. मर्डर तक के केस चल रहे हैं…. जो बाहुबली कहे जाने पर गर्व महसूस करते हैं, वैसों ही के कारण पार्लियामेंट महीनों चल नहीं पाते और देशवासियों के टैक्स के करोड़ों-करोड़ रूपए बेमतलब बर्बाद होते रहते हैं। सारी परंपराएं तेजी से टूटती जा रही हैं। एक साथ होने वाला लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव का क्रम टूटा और करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार जनता पर पड़ा। क्या यही रहेगी हमारी संसदीय परंपरा?

बकौल समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी,  संसदीय परंपरा के निर्वहन के लिए, महिला सदस्यों सहित अन्य सदस्यों की हिफाजत तथा विकास को गति देने के लिए प्रत्येक सदन में सदस्यों की सीट पर कुर्सी के चारों तरफ लोहे के पिंजरे बनें। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सदस्यों को उसमें बंद हो जाना पड़े। पिंजरे में ऑटोमेटिक लॉक हो जिसका रिमोट स्पीकर के पास दिया जाए। सदस्य पिंजरे के अंदर से ही विचार व्यक्त करें……।

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जानिए दिल्ली में किसान आंदोलन के 19वें दिन क्या हुआ ?

केंद्र सरकार द्वारा नई कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर कड़कड़ाती ठंड और घने कोहरे के बीच दिल्ली की तमाम सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान 18 दिनों से डटे हुए हैं। राजस्थान से भी बड़ी संख्या में दिल्ली आ रहे किसानों को हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस ने रोक तो दिया है, परंतु किसान नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक हमारा प्रदर्शन हर हाल में जारी रहेगा। हमने कदम बढ़ा दिया है तो फिर लौटने वाले नहीं है।

बता दें कि सभी किसान यूनियनों के प्रमुख आज सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक भूख हड़ताल पर रहेंगे। इस बीच किसानों के समर्थन में विरोधी पार्टी के नेताओं द्वारा बयान पर बयान दिये जा रहा है। अनेक सेलिब्रिटीज ने सम्मान वापस करने वाले बयान भी दिए हैं। किसानों के समर्थन में पंजाब के डीआईजी (कारा) एलएस जाखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

एक  ओर जहां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसानों के समर्थन में आज दिनभर उपवास रखने की घोषणा कर दी है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री के घर केंद्रीय कृषि मंत्री सहित पंजाब के भाजपा नेताओं के साथ बैठक की दौड़ चल रही है। यह भी कहा जा रहा है कि किसानों के लिए होगा  शॉपिंग मॉल एवं स्मार्ट मंडियां जहां किसानों को एक ही छत के नीचे  रियायती दर पर  सभी सुविधाएं मिल जाएंगी।

जानिए कि इन गतिविधियों के बीच भारतीय किसानों के शीर्ष नेतृत्वों ने क्या कहा- “तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही हमारी एकमात्र मांग है….. कुछ कॉस्मेटिक संशोधनों से यह कानून किसान हितेषी नहीं बनेंगे।”

 

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सदा याद रहेगा 13 दिसंबर जिस दिन आतंकियों ने सेशन में रहते हुए पार्लियामेंट को किया था घायल

तारीख 13 दिसंबर 2001 और समय दिन के 11:28 हो रहे थे। स्थल था भारत का संसद भवन परिसर। पार्लियामेंट सेशन में था। पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामे को लेकर दोनों सदनों की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित की जा चुकी थी। इसी दरमियान कायराना हमले के तहत पाकिस्तानी पांच आतंकियों द्वारा संसद भवन के मुख्य द्वार पर गोलियों की तड़तड़ाहट ने सिर्फ संसद के अंदर फंसे सांसदों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को ही झकझोर कर रख दिया था। लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर पर आतंकियों ने अचानक आत्मघाती हमला कर दिया था।

19 साल पहले 45 मिनट तक चले इस हमले में आठ सुरक्षाकर्मियों एवं एक माली की जान चली गई थी। परंतु, भारत माता के इन वीर जवानों ने अपनी जान को मुट्ठी में लेकर पहले सदन के सभी दरवाजों को बंद कर देश के रहनुमाओं की जान बचाई और फिर सभी अंतिम सांस तक लड़ते हुए एक-एक कर सभी पांच आतंकियों को मार गिराया था।

बता दें कि जिन शहीद सुरक्षाकर्मियों ने हमारी संसद की रक्षा करते हुए अपनी जान गवांई उनके बलिदान एवं बहादुरी को याद करते हुए देश के महामहिम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री….. आदि कहते हैं कि यह देश उन वीर सपूतों का हमेशा  कर्जदार रहेगा तथा हम हमेशा उनके आभारी रहेंगे।

चलते-चलते यह भी जानिए कि मधेपुरा के संवेदनशील साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा भारत के महामहिम राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से यह अनुरोध किया जा रहा है कि जिस तरह से बिहार की राजधानी पटना में विधानसभा भवन के सामने 7 शहीदों की स्मृति में सप्तमूर्ति बनाई गई है, वैसी ही मूर्तियां संसद भवन के सामने इन शहीदों की भी बनाई जाए ताकि समस्त देश उनके बलिदान एवं बहादुरी से सदैव प्रेरित होता रहे। बच्चे और बड़े सभी उन मूर्तियों के साथ फोटो लेकर गौरवान्वित होता रहे।

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