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कोरोना की तीसरी लहर की ओर बढ़ता भारत

भारत में पहली, दूसरी और अब तीसरी लहर… कब तक चलेगा यह कोरोना का कहर ! सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी लहर पर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जब भारत कोरोना की दूसरी लहर नहीं संभाल पा रहा है तो तीसरी लहर कैसे संभालेगा ?

बता दें कि वैज्ञानिकों ने उद्घोषणा की है कि प्रथम लहर में 10 से 14 दिनों का समय मिलता था और इसमें प्राय: 45 से ऊपर के बुजुर्गों को ज्यादातर अपने गिरफ्त में लेता रहा करोना। दूसरी लहर में कोरोना ने 5 से 7 दिनों में प्रायः युवाओं को अपना शिकार बनाने लगा है।

अब कोरोना की तीसरी लहरा आने ही वाली है। वह लहर नहीं…. सुनामी होगी ! वैज्ञानिकों के अनुसार इस तीसरी लहर में कोरोना द्वारा प्राय: बच्चों को ही शिकार बनाया जाएगा। बकौल वैज्ञानिक इसमें कोरोना द्वारा 2 दिनों में ही बच्चों को गंभीर हालत में पहुंचा दिया जाएगा और डॉक्टरों को इलाज करने का समय तक नहीं मिलेगा। दो से तीन दिनों में मरीज को आईसीयू में पहुंचा देगी यह तीसरी लहर। कुछ-कुछ देश तो तीसरी लहर की तैयारी के तहत बच्चों के लिए वैक्सीन तैयार करने में भी जुट गए हैं।

समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विनम्र अनुरोध करते हुए देशवासियों से यही कहा कि कोरोना की दूसरी लहर तो जारी है और आगे तीसरी की बारी है। अभी भी देशवासी कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों को लेकर बिल्कुल लापरवाह है। सरकार और जिला प्रशासन को जैसा सहयोग मिलना चाहिए वैसा नहीं मिल पा रहा है। जानिए कि कोरोना वायरस अब तेजी से अपना व्यवहार बदलने लगा है। तीसरी लहर में अधिक वेरिएंट होगा और कौन वैरीएंट किसे कब दबोचेगा, उसकी जानकारी किसी को नहीं होगी।

चलते-चलते यह भी बता दे कि भारत के लोग अब तक गलती पर गलती करते जा रहे हैं और इन्हीं गलतियों के कारण हम तीसरी लहर को भी आमंत्रित करने जा रहे हैं। जिस-जिस देश के लोगों ने गलती नहीं की उन्हें कोरोना ने माफ भी कर दिया है।

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भारतरत्न डाॅ.कलाम के अभिन्न मित्र रक्षा वैज्ञानिक डॉ.मानस बिहारी वर्मा नहीं रहे

बिहार के रहने वाले पद्मश्री डॉ.मानस बिहारी वर्मा 35 वर्षों तक DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे। वे लंबे समय तक मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम किए। वे एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी थे । भारतीय वायु सेना में तेजस का योगदान अविस्मरणीय है और रहेगा।

उन्हें दर्जनों पुरस्कार से नवाजा गया। साइंटिस्ट ऑफ द ईयर, टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवार्ड…. आदि के संग-संग पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया। वे रिटायर्ड करने के बाद से बिहार के दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के छोटे से पैतृक गांव बाऊर में रह रहे थे। पिताश्री ए.के.एल दास व माताश्री यशोदा के घर 29 जुलाई 1943 को जन्मे ऋषि (बचपन का नाम) सहित तीन भाई व चार बहनें हैं। बिहार को अपनी कर्मभूमि बनाकर बच्चों के प्रायोगिक ज्ञान को विकसित करने हेतु कई संस्थाओं का निर्माण भी उन्होंने किया।

अंतिम दिनों में वे दरभंगा-लहेरिया सराय में अपनी बहन के घर में रहने लगे। वहीं 78 वर्ष की उम्र में उन्होंने 3 मई (सोमवार) की देर रात अंतिम सांस ली। समस्त भारत एवं विदेशों में उनके चाहने वालों के बीच उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई है। चारों तरफ लोग उनकी आत्मा की चिर शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।

यहां तक कि मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार एवं डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे भौतिकी के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उस ऋषि तुल्य वैज्ञानिक मानस बिहारी के प्रति शोक व्यक्त करते हुए कहा- “आज 2005 के दिसंबर महीने का अंतिम सप्ताह मेरी नजर के सामने से गुजरने लगा है। महामहिम राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के बिहार आगमन को लेकर उनके साथ दसकों तक एक लैब में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ.अरुण कुमार तिवारी का फोन आता है मुझे। डॉ.तिवारी साहब मुझसे कहते हैं…. मधेपुरी साहब आपको दरभंगा नजदीक है या पटना….. महामहिम को 30 दिसंबर को दरभंगा में उद्घाटन कार्यक्रम है, साथ ही उन्हें डॉ.मानस बिहारी वर्मा साहब से भी मिलना है…. चाहें तो आप वहीं आकर महामहिम से मिल लें या फिर पटना में राजभवन, एसके मेमोरियल हॉल, महावीर कैंसर संस्थान या वापस दिल्ली जाते समय रात में हवाई अड्डे पर भी मिल सकते हैं…. मिला तो रात के लगभग 9:00 बजे पटना हवाई अड्डे के विशाल प्रसाल में जहां महामहिम की गरिमामय उपस्थिति का आलोक पूरे परिवेश में फैला हुआ था। वहां मौजूद थे महामहिम के साथ उनके प्रिय शिष्य व सहयोगी डॉ.अरुण तिवारी, वरुण मित्रा और मैं। बस एक शख्स की कमी महसूस हुई मुझे…. और वे थे डॉ.मानस बिहारी वर्मा।

 

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मई दिवस को भी कोरोना वायरस ने संक्रमित कर दिया

यूं तो श्रम एवं श्रमिकों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का अंग है। जिसे आरंभ में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता था और बाद में 1 मई को मई दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। परंतु, कोरोना ने गांव से लेकर संपूर्ण प्रदेश एवं देश के साथ-साथ संसार के श्रमिकों की रीढ़ तोड़ दी है।

बता दें कि कोरोना काल से पहले पूरे प्रदेश एवं देश में ‘मई दिवस’ भव्यता के साथ मनाया जाता था। बेहतर काम करने वाले श्रमिकों को प्रखंड स्तर से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक सम्मानित भी किया जाता था। विद्यालय एवं महाविद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक में छुट्टियों के साथ-साथ कार्यक्रमों की धूम मची रहती थी।

इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर के कारण सीएम से लेकर पीएम तक मई दिवस के अवसर पर प्रदेश व देश के सभी श्रमिक भाई बहनों को शुभकामनाएं दी है। श्रमिकों को शहर छोड़कर अपने अपने गांव की ओर लंबी दूरियां तय कर आने-जाने में भीषण कष्ट उठाना पड़ता है।

चलते-चलते अंत में यह भी जानिए कि विकास, औद्योगिक विकास एवं उत्पादकता को बढ़ाने में श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष एवं ताकत की बड़ी भूमिका रही है। संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी कोरोना काल से पहले अपने आवासीय परिसर वृंदावन में बेहतर काम करने वाले श्रमिक को बुके व शाॅल देकर सम्मानित भी किया करते थे।

 

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1 मई से 18 पार वालों को टीका नहीं लगेगा बिहार में

बिहार में 1 मई से नहीं होगा 18 साल से अधिक वालों का टीकाकरण। ऐसा इसलिए कि कई राज्यों ने दिए ऑर्डर तो सिरम ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि एक साथ सबों को आपूर्ति करना संभव नहीं।

बता दें कि बिहार की नीतीश सरकार ने पुणे की सिरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया को एक करोड़ वैक्सीन सप्लाई करने का आर्डर दिया है। जबकि सूबे बिहार में 18 से 44 वर्ष की उम्र वालों की संख्या 5 करोड़ 47 लाख है।

जानिए कि राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने यह जानकारी दी है कि वैक्सीन की डोज निर्धारित होने और प्राप्त होने के बाद 18 से 44 आयु वालों के टीकाकरण की नई तिथि का ऐलान किया जाएगा। इस बीच 18 से 44 वर्ष की आयु वाले युवजनों का रजिस्ट्रेशन चलता रहेगा, परंतु उन्हें रजिस्ट्रेशन के वक़्त सेंटर और टीका लगने की संभावित तिथि की सूचना नहीं दी जाएगी…..  फिलहाल 1 मई से नहीं शुरू होगा 18 साल से अधिक उम्र वालों का टीकाकरण…..  बिहार में।

 

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कोरोना सरीखे राष्ट्रीय आपदा के समय मूकदर्शक बन नहीं बैठा सुप्रीम कोर्ट

भारत को कोरोना की दूसरी लहर के दरमियान खतरनाक दौर से गुजरते देख सुप्रीम कोर्ट चुप नहीं रह सका। शीर्ष अदालत ने कहा कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए राष्ट्रीय संकट की घड़ी में हम मूकदर्शक बन कर नहीं रह सकते। शीर्ष अदालत ने कहा-

“कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए राष्ट्रीय संकट की घड़ी में हम मूकदर्शक बन बैठे नहीं रह सकते। राष्ट्रीय मुद्दे पर हमारा दखल देना महत्वपूर्ण है।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी जानकारी देने की बात कही कि देश की जनता को दिए जाने वाली मेडिकल सुविधाएं, ऑक्सीजन सप्लाई और वैक्सीनेशन प्रोग्राम आदि की विस्तृत जानकारियां सार्वजनिक की जाए। कोविड टीकों की अलग-अलग कीमतों के तर्क के बारे में भी जानकारी मांगी। राज्यों से भी इस महामारी से निपटने हेतु बुनियादी व्यवस्था की रूपरेखा के बारे में अविलंब बताने को कहा। जानिए कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि इस कोरोना महामारी से निपटने के लिए आपकी राष्ट्रीय योजना क्या है ? सुनवाई की शुरुआत में ही न्यायालय ने कहा कि हमें लोगों की जिंदगी बचाने की जरूरत है। जब भी हमें जरूरत महसूस होगी, हम दखल देंगे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसआर भट्ट ने यह भी कहा कि सेना एवं रेलवे के डॉक्टर्स जो केंद्र के अंतर्गत आते हैं, को क्वारंटीन, वैक्सीनेशन व अन्य कार्यो में इस्तेमाल में लिया जा सकता है। इस पर कोई राष्ट्रीय योजना होने की जानकारी भी मांगी कोर्ट ने। अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।

अंत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र व राज्यों के लिए वैक्सीन की कीमतें अलग-अलग रखने पर सवाल उठाने एवं कोविड प्रबंधन मामले में मदद करने हेतु वरिष्ठ एडवोकेट जयदीप गुप्ता एवं मीनाक्षी अरोड़ा को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त करने पर मधेपुरा के अदालत में कार्यरत एडवोकेट सुधांशु शेखर एवं मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने देश के सुप्रीम अदालत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।

चलते-चलते यह भी घोषणा अदालत ने की कि कोरोना ने देश में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मार्च- 2021 तक समाप्त हो रहे “पीरियड ऑफ लिमिटेशन” को अगले आदेश तक बढ़ाया जाता है।

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देश के सभी जिला अस्पतालों में लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट

कोरोना की दूसरी लहर की लड़ाई में जीत दर्ज कराने के लिए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी ‘पीएम केयर्स फंड’ से 551 करोड़ और आॅक्सीजन प्लांट लगाने को मंजूरी, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए तत्काल सभी 534 ब्लॉक में एक-एक एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति का फैसला किया है।

यह भी जानिए कि जहां प्रधानमंत्री के पीएम केयर्स फंड से प्लांट लगाने की मंजूरी तो दे दी गई, परंतु ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए जमीन का आवंटन तो राज्य सरकारों को ही करना होता है।

वहीं कोरोना से फाइट करने के लिए सीएम नीतीश कुमार ने तकनीकी सेवा आयोग से आग्रह किया है कि पूर्व से घोषित जिन पदों की परीक्षा पूरी हो चुकी है और सिर्फ काउंसलिंग बाकी है उसे शीघ्र पूरा करें ताकि डॉक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की जा सके। कोरोना को परास्त करने हेतु विभाग द्वारा डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। डॉक्टरों के साथ-साथ 861 एएनएम की बहाली होगी।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

 

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बिहार विधान सभा सचिवालय में आज से कोरोना कंट्रोल रूम काम करने लगा

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के निर्देशानुसार सचिवालय में एक कोरोना कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कोरोना कंट्रोल रूम अहर्निश क्रियाशील रहेगा।

बता दें कि सचिवालय स्थित कोरोना कंट्रोल रूम विधानसभा के सदस्यों सहित सभी पूर्व सदस्यों, सचिवालय में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त सभी कर्मियों व परिजनों से जुड़े कोरोना से संबंधित प्राप्त काॅल के आधार पर बिहार के सभी जिलों के डीएम एवं वहां के कंट्रोल रूम तथा स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर उन्हें सुविधा मुहैया कराने की पहल करेगा।

चलते-चलते यह भी जानिए कि लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के परामर्शानुसार यह कंट्रोल रूम खोलने का निर्णय लिया गया है। विधानसभा के डिप्टी डायरेक्टर संजय सिंह ने कहा कि इस कंट्रोल रूम से विधानसभा चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ को भी जोड़ा जाएगा।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

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कोविड-19 के दरमियान कुछ लोगों की बुद्ध दृष्टि तो कुछ की गिद्ध दृष्टि

विश्व कोरोना से युद्धरत है और दूसरी ओर भारत में कोरोना की दवाइयों की कालाबाजारी और नकली दवाइयों का फ्रॉड आदि टॉप पर है। 3 लाख 52 हजार नए संक्रमितों की संख्या हो गई है। हजारों-हजार लोग कोरोना के कारण मौत को गले लगा रहे हैं। यह देखकर कुछ लोगों के अंदर का बुद्ध तो जाग उठता है वहीं इस अवस्था में भी कुछ गिद्ध दृष्टि गड़ाए कुछ कमाने में लगे रहते हैं। पूरे देश से यह शिकायत क्यों आ रही है कि टेस्ट नहीं हो रही है। टेस्टिंग के बाद भी बंगाल में कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़ती क्यों जा रही है?

हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और चुनावी राज्यों में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही है। ऐसा लगता है कि भारतीय निर्वाचन आयोग कभी-कभी दूसरे ग्रह पर चले जाते हैं। जहां से उन्हें कोरोना प्रोटोकॉल से संबंधित बहुत कुछ नहीं दिखता है। देश में सांसो पर सियासत क्यों हो रही है ?ऑक्सीजन की लूट आखिर कब तक चलेगी ?? आखिर कब तक हवा पर पुलिस पहरा करती रहेगी ??? नकली इंजेक्शन यानि दवा की जगह पानी देकर 30-30 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं जिसे देखने वाला कोई नहीं। ऑक्सीजन सिलेंडर भी आधी भरी फिर भी कीमत दोगुनी पर बेची जा रही है।

कोरोना की खतरनाक दौर तो अब रिश्तो को भी शर्मसार करने लगा है। लोग अपनों की मौत के बाद शव लेने से इनकार भी करने लगे हैं। यहां तक की बेटे भी मां का शव छोड़कर भागने लगे हैं। कोई-कोई तो शवों को दूसरे जिले की नदियों में फेंक कर अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आने लगे हैं।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

 

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अस्पताल से लेकर शमशान तक वेटिंग चल रहा है

कोविड-19 के दूसरे चरण में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के कारण अस्पतालों में बेड की कमी और ऑक्सीजन के ना होने की चर्चा सरेआम हो रही है। कितने अस्पतालों में तो बाहर बोर्ड लगा दिया गया है- यहाँ बेड खाली नहीं है। कहीं-कहीं ऑक्सीजन ना होने का भी बोर्ड दिख जाता है। चारों ओर अस्पतालों में वेटिंग चल रहा है। रिकवरी रेट भी घटकर 81% से भी नीचे जाने लगा है।

कोरोना के दूसरे चरण में हो रही मौतों के कारण भारत में ही नहीं विदेशों के श्मशान और कब्रिस्तान में भी वेटिंग दिखाया जा रहा है। इसे सरकारी लापरवाही कहेंगे या फिर कोविड की सुनामी। जिसे हम लोग हल्के में ले रहे हैं। हम सभी अपनी-अपनी जवाबदेही का शत-प्रतिशत निर्वहन करें। सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए विपक्ष और मीडिया संयुक्त रूप से अपने-अपने कर्तव्यों का पालन कर ही रहा है।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

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मधेपुरा, मुंगेर, बक्सर, छपरा, वैशाली, दरभंगा, सीतामढ़ी का मर्यादा पुरुषोत्तम राम से गहरा नाता

बिहार के महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक एवं महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने जहां राम नवमी के अवसर पर यह कहा कि भगवान राम के पराक्रम, दैवीय गुणों और ज्ञानमय समतावादी आचरणों के चलते बिहार का कण-कण राममय है और देखा जाए तो बिहार बिना रामकथा अधूरी है, वहीं विश्व के महान समाजवादी चिंतक डॉ.राम मनोहर लोहिया ने कभी संसद में कहा था कि राम और कृष्ण को भगवान मानकर पूजनीय की कोटि में रखने के बजाय यदि अनुकरणीय माना गया होता तो समाज का सर्वाधिक भला हुआ होता।

बकौल आचार्य किशोर कुणाल यह जानिए कि  चैत्र माह की नवमी तिथि को राम का जन्म श्रृंगी ऋषि द्वारा कराए गए पुत्रेष्टि यज्ञ का प्रतिफल था। उन्हीं के द्वारा स्थापित शिवलिंग मधेपुरा (सिंहेश्वर) में है और तपोभूमि मुंगेर यानि अंग प्रदेश रही है। बक्सर में ऋषियों को मुक्ति दिलाई राम ने। वहीं ताड़का वध हुआ। कभी राम-लक्ष्मण दोनों भाई गंगा-सरयू के संगम पर छपरा जिले के विशुनपूरा गांव में एक रात गुजारे तो वहीं नदी पार करने पर विशाला नगरी (वैशाली) के राजा ने राम का स्वागत किया। जनकपुर जाते समय दरभंगा के अहीरौली में अहिल्या को श्राप मुक्त कर पत्थर से नारी बनाया। विवाहोपरांत राम-परशुराम संवाद सीतामढ़ी के पंथपाकर स्थान पर हुआ… अंत में राम पुत्रेष्टि यज्ञ कराने वाले ऋषि के प्रति आभार व्यक्त करने मुंगेर और मधेपुरा (सिंहेश्वर) भी आए।

चलते-चलते यह भी कि समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को उसी सिंहेश्वर मंदिर न्यास का सदस्य मधेपुरा के डीएम गोपाल मीणा के कार्यकाल में बिहार धार्मिक न्यास के अध्यक्ष आचार्य कुणाल किशोर द्वारा मनोनीत किया गया था। डॉ.मधेपुरी ने अपने कार्यकाल में सिंहेश्वर टेंपल ट्रस्ट द्वारा एक ‘आई हॉस्पिटल’ और दूसरा ‘वृद्धाश्रम’ निर्माण हेतु प्रस्ताव लाते रहे, परंतु सदस्यों द्वारा प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने में गहरी अभिरुचि नहीं देखी गई।

 

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