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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु प्रधानमंत्री द्वारा भूमि पूजन

अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के बंद ताले को देश के युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही सर्वप्रथम खोला था। नरेंद्र मोदी तो नौवाँ प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने कानून के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से श्री राम मंदिर निर्माण हेतु आज 5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन कर क्रांतिकारी इतिहास रच दिया है। इस बीच में अटल बिहारी बाजपेयी जैसे सर्वमान्य, जनप्रिय व संकल्प के धनी प्रधानमंत्री के कार्यकाल में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के सोमनाथ से अयोध्या तक की राम-रथ-यात्रा संपूर्ण भारत को किस कदर आंदोलित किया था उसे बच्चा-बच्चा जानता है।

कोरोना के कहर से आज संपूर्ण संसार में कोहराम मचा हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिए सौभाग्य की बात कहते हुए यही कहा- “सदियों का इंतजार खत्म हुआ। पूरा देश रोमांचित है। आज पूरा भारत भावुक है। आज सियाराम की गूंज पूरेे विश्व में है। टेन्ट के नीचे रहे  सियाराम अब भव्य मंदिर में रहेंगे। राम भारत की मर्यादा है। राम सबके हैं, राम सब में है। यह मंदिर राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा। राम का काम करने पर चैन मिलता है।”

जहां राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा है- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सर्वोत्तम मानवीय गुणों का स्वरुप है। राम प्रेम है, वे कभी घृणा में प्रकट नहीं हो सकते। राम करूणा है, वे कभी क्रूरता में प्रकट नहीं हो सकते और राम न्याय है, वे कभी अन्याय में प्रकट नहीं हो सकते- वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि ये भूमि पूजन व राम मंदिर निर्माण आदि सांस्कृतिक समागम, राष्ट्रीय एकता एवं विश्व बंधुत्व का कार्यक्रम बनना चाहिए।

भाकपा माले ने आज के दिन को काला दिवस करार दिया परंतु देश के लोग जो अयोध्या नहीं पहुंचे वे क्या कहते हैं ?

उनका कहना है कि जिन भाजपा वालों ने पुरुषोत्तम भगवान राम को टेंट से भव्य मंदिर में लाने की बात कही, आजादी के संघर्ष से इसकी तुलना की और यह भी कि राम का काम करने पर ही चैन मिलता है। जिन कांग्रेसियों ने भगवान राम के प्रेम, करुणा और न्याय की बात की और जिन कम्युनिस्टों ने आज के दिन को काला दिवस कहा-  क्या वे यही न्याय करते रहेंगे कि 35 वर्षों तक सर्विस करने वालों को पेंशन नहीं और दो दिन भी सेवक या प्रधान सेवक  के रूप में विधायक-सांसद रहने पर उनके परिजन सदा पेंशन के हकदार बने रहेंगे। वे अपने से अपना वेतन (चाहे कम्युनिस्ट ही क्यों ना हो) जब चाहें जितना चाहें बढ़ाते रहेंगे और सर्विस करने वाले राष्ट्र निर्माता नियमित या नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन और समान सुविधाओं से वंचित रखेंगे। राजा राम की तरह खुद के लिए शासक कुछ ना सोचें जो कुछ करें वह देश की जनता के लिए  न्यायपूर्वक  करें।

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UPSC- 2019 के फाइनल का टॉपर है प्रदीप सिंह

भारत का सर्वाधिक प्रतिष्ठित जॉब माना जाता है आईएएस व आईपीएस आदि। इसे पाने के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन करके यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की प्रतियोगिता परीक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को चयनित किया जाता है।

बता दें कि इस बार UPSC-2019 सिविल सेवा का फाइनल रिजल्ट आज घोषित कर दिया गया है जिसमें कुल 829 प्रतियोगियों को चयनित किया गया है। इनमें जनरल केटेगरी के 304, ओबीसी के 251, एससी कोटा के 129, ST के 61 तथा EWS के 78 प्रतियोगी चयनित किए गए हैं। यह भी जानिए कि सिविल सर्विस UPSC-2019 की लिखित मुख्य परीक्षा सितंबर 2019 में हुई जिसमें कुल 2304 उम्मीदवार सफल हुए जिनके लिए फरवरी में एवं कोरोना के कारण शेष अगस्त (2020) में हुए इंटरव्यू के आधार पर 829 प्रतियोगियों को विभिन्न कोटियों से लिए गए।

इस UPSC-2019 परीक्षा के टाॅॅॅपर हरियाणा के प्रदीप सिंह सहित सफल टॉप 10 की सूची इस प्रकार है- (1.) प्रदीप सिंह (2.)जतिन किशोर (3.) प्रतिभा वर्मा (4.)हिमांशु जैन (5.)जयदेव सीएस (6.)विशाखा यादव (7.)गणेश कुमार भास्कर (8.)अभिषेक सर्राफ (9.) रवि जैन और (10.)संजीता महापात्रा ।

चलते-चलते यह भी बता दे कि रिजल्ट में किसी तरह की समस्या को लेकर प्रतियोगी अपना आवेदन 15 दिनों के अंदर ही दे सकते हैं। यदि इससे जुड़ा कोई प्रश्न पूछना हो तो वे UPSC कैंपस में जाकर किसी भी वर्किंग डेज को सुबह 10:00 से शाम 5:00 बजे तक जानकारी हासिल कर सकते हैं अन्यथा समयानुसार 011-2338 5271 नंबर पर फोन करके भी जानकारी हासिल की जा सकती है।

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दिल्ली-मुंबई आदि की अपेक्षा बिहार में कोरोना की स्थिति विस्फोटक

6वीं लॉकडाउन के दौरान भी बिहार में प्रतिदिन कोरोना के कहर के कारण हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं। मंत्री, विधायक, सांसद से लेकर जिले के आलाधिकारियों के साथ-साथ बड़े-बड़े डॉक्टरों को भी कोरोना अपनी चपेट में लेते जा रहा है।

बता दें कि बिहार के एक और दिग्गज राजनीतिज्ञ कामरेड सत्यनारायण, जो विधायक भी रहे और सीपीआई के स्टेट सेक्रेटरी भी, की पटना एम्स में कोरोना-इलाज के दौरान रविवार की देर रात मृत्यु हो गई। लोग बोलते हैं कि उनके निधन से कम्युनिस्ट आंदोलन का एक युग धराशाई हो गया।

यह भी जानिए कि बिहार ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारत में कोविड-19 का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना का आतंक इस कदर बढ़ रहा है कि लोगों को घर में बंद होकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जहां भारत में पिछले चौबीस घंटों में 55 हजार की संख्या पार किया कोरोना संक्रमितों ने वहीं बिहार की राजधानी पटना में ही ठीक उतने ही समय में कोरोना पॉजिटिवों की संख्या 500 के पार हो गई।

अब तक भारत में जहां कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 18 लाख और मरने वालों की कुल संख्या 38 हजार पार कर गई है वहीं बिहार में संक्रमितों का आंकड़ा 58 हजार के करीब हो गया है और मृतकों की संख्या 300 के पार। कोरोना के बाबत आज भारत के लिए लगातार पांचवां दिन है जब देश में संक्रमितों की संख्या प्रतिदिन 50 हजार से अधिक हो रही है।

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फ्रेंडशिप डे हर साल अगस्त के पहले रविवार को मनाता है भारत

दुनिया में जो कोई आपके अत्यंत करीबी हों जिसके लिए आप दिल की कलम में भरोसे की इंक डालकर उसकी समस्त यादों के बीते हुए लम्हों को बेहिचक बयां करने वाला “सब्जेक्ट” तैयार कर लेते हैं- लोग उसे ही दोस्त कहते हैं, यानि ‘दोस्त’ का मतलब ‘दो का अस्त हो जाना’। जब ऐसा हो जाए तो दुनिया उसे ही दोस्ती कहने लगती है।

बता दें कि हर किसी को माता-पिता के बाद यदि कोई अपना लगता है तो वह है दोस्त। वास्तव में दोस्ती दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है और है संसार का सबसे बेहतरीन तोहफा ‘दोस्त’- जो हमारे दुख-दर्द का साथी होता है तथा जिंदगी को खुशनुमा बनाए रखता है।

वैसी ही दोस्ती को यादगार बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष 30 जुलाई को दुनिया में इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। हालांकि दुनिया के कई देश तो U.N.O. द्वारा निर्धारित इस तारीख से पहले या फिर बाद में भी मनाते हैं।

बता दें कि भारत इसे “फ्रेंडशिप डे” कह कर प्रतिवर्ष अगस्त महीना के पहले रविवार को यानि आज (2 अगस्त) के दिन ही मनाता है जबकि ओहियो में यह फ्रेंडशिप डे 9 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन को दोस्तों के बीच उपहारों के आदान-प्रदान के साथ पर्यटन पर जाने की योजना के साथ मनाया जाता है। भारत में तो दोस्त एक-दूसरे को फूल देकर इस फ्रेंडशिप डे को मनाते हैं।

जानिए कि टीएनबी कॉलेज में पढ़ते हुए दो दोस्त डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी एवं डॉ.सर्वदानंद सिंह एसे ही दोस्त बने कि 66 वर्ष की उम्र में जब एक के हार्ट का बाईपास सर्जरी हुआ तो कुछ ही दिनों केे बाद दूसरे का भी बायपास सर्जरी हो गया। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ही आज दोनों ने फ्रेंडशिप डे मनाते हुए यह चर्चा की- हर किसी को उसकी औलाद पूछती है वसीयत, लोग पूछते हैं हैसियत और मित्र ही है जो बाजार में या फोन पर मिले तो सबसे पहले यही पूछता है- बताओ अपनी ख़ैरियत ! बीबी-बच्चों की ख़ैरियत !!

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बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50 हजार के पार

अगस्त का महीना क्रांति का महीना सदा से रहा है। आज 2020 के अगस्त महीने की 1 तारीख है और कोरोना का कहर ऐसा कि संक्रमितों का आंकड़ा 50 हजार के पार हो गया है। बिहार में अब कोरोना से हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं।

बता दें कि विगत 24 घंटे में 500 के पार कोरोना संक्रमित केवल पटना में मिले हैं। इसके साथ सूबे में संक्रमितों के मामले हो गए 3000 के पार जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर हो गई 300 के पार।

बकौल स्वास्थ्य विभाग पटना सहित इन जिलों (गया-126,  मधुबनी-122, मुजफ्फरपुर-125, नालंदा-146, रोहतास-156 तथा वैशाली-123) में 100 के पार कोरोना संक्रमित नए मरीज मिले हैं। कई जिले तो अर्धशतक बनाकर बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 51 हजार तक पहुंचा दी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पिछले 24 घंटे में 2000 कोरोना संक्रमित इलाज के बाद स्वस्थ हुए हैं। इस दरमियान कोरोना ग्रसित मरीजों के कुल 22 हजार के पार सैंपल की जांच की गई है जो एक रिकॉर्ड है। कोसी क्षेत्र के तीनों जिले भी और अर्धशतक और शतक बनाने में लगे हैं जहां मधेपुरा में 45, सहरसा में 54 और सुपौल में 80 नए  संक्रमितों की पहचान की गई है।

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कोरोना संकट मोचन के रूप में प्रत्यय अमृत (भाप्रसे) तीसरे स्वास्थ्य सचिव बने

भारत में कोरोना के कहर की परेशानियों से परेशान हैं लोग। कोरोना संक्रमण के मामले 15 लाख के पार जा चुके हैं। देश से लेकर प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण के मामलों में दिनों-दिन तेजी होती जा रही है।

आज बिहार को एक साथ बाढ़ और कोरोना से संघर्ष करना पड़ रहा है। दोनों के लिए तैयारी करने में जुट गए हैं सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। सिंचाई एवं आपदा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को भी चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है।

कोरोना के  दिशाहीन विस्फोट से निपटने के लिए नीतीश सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ऊर्जा विभाग को ऊंचाई प्रदान करने वाले प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को स्वास्थ्य विभाग में प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है और मौजूदा प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत को योजना पार्षद के परामर्शदातृ समिति में पदस्थापित किया गया है। कोरोना संकट के बीच प्रत्यय अमृत तीसरे सीनियर आईएएस अधिकारी होंगे जिन्हें यह जिम्मेदारी संभालने हेतु विश्वास के साथ लाया गया है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि बिहार मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पत्र लिखकर सुबह के सीएम को कहा था की कुछ प्रशासनिक पदाधिकारियों का व्यवहार कोरोना काल में डॉक्टरों के प्रति उदासीन है जिसके तहत स्वास्थ्य सचिव के साथ अन्य अधिकारियों का भी स्थान परिवर्तन किया गया।

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तुलसीदास की लोकप्रियता में कभी कमी नहीं आएगी- डॉ.मधेपुरी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन मधेपुरा के तत्वावधान में कोरोना काल में तुलसी जयंती ऑनलाइन के जरिए सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की अध्यक्षता में मनाई गई। वरिष्ठ साहित्यकार व इतिहासकार श्री शलभ ने कहा कि जब तक विश्व में कोरोना वायरस का कहर रहेगा तब तक सम्मेलन के सारे कार्यक्रम वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा ही संपन्न होंगे। गोस्वामी तुलसीदास को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी सगुण धारा राम भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि थे। आज विशेष रूप से यही एक ग्रंथ है जो सांप्रदायिकता की सीमाओं को लांघ कर सारे देश में व्यापक रूप से सभी मतों को मान्य है। अध्यक्ष श्री शलभ ने “मन पछतैहें अवसर बीते” एवं “अबलौं नशानी अब न नशैहों” गाकर कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया।

सम्मेलन के संरक्षक कवि-साहित्यकार व पूर्व सांसद डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने लाइव प्रसारण में उद्गार प्रकट करते हुए कहा कि रामचरितमानस समन्वय का अक्षय भंडार है और गोस्वामी तुलसीदास जी अपने युग के महान लोकनायक रहे हैं।

सम्मेलन के सचिव व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि तुलसीदास की लोकप्रियता में कभी कमी नहीं आएगी। भौतिकी के विद्वान प्रो.(डॉ.) मधेपुरी ने तुलसीदास की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए मानस द्वारा बखूबी दर्पण को परिभाषित कर भौतिकी को सहजता से समझाया।

जहां साहित्यकार प्रो.मणिभूषण वर्मा ने रामचरितमानस का सस्वर पाठ किया और तुलसी की कृतियों को सर्वोच्च बताया वहीं डॉ.शांति यादव, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ,अमोल राय, डाॅ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.आलोक कुमार, दशरथ प्रसाद सिंह, संतोष सिन्हा, उल्लास मुखर्जी, प्रो.श्यामल किशोर यादव,  प्रो.सचिंद्र महतो, डॉ.विश्वनाथ विवेका, सियाराम यादव मयंक, सहित अन्य साहित्यसेवियों व साहित्यानुरागियों द्वारा कार्यक्रम का इस कोरोना काल में घर बैठे लाइव प्रसारण के माध्यम से आनंद लिया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.अरविंद श्रीवास्तव ने किया।

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भारत रत्न डॉ.कलाम सदैव एक महान शिक्षक बने रहेंगे- डॉ.मधेपुरी

संपूर्ण भारतीय भारत रत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने विकसित भारत का सपना देखा था। डॉ.कलाम जब पृथ्वी को जीने योग्य बनाने के निमित्त 27 जुलाई 2015 को शिलांग में आईआईएम (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट) के छात्रों के बीच गंभीरता पूर्वक चर्चा कर रहे थे कि उसी दरमियान उनके हृदय की गति रुक गई और उन्होंने दुनिया को अलविदा कहते हुए अंतिम सांस ली। जब तक वे छात्रों से चर्चा करते रहे वे जवाबों के बजाय सवालों को ज्यादा पसंद करते थे तथा समाधानों के बजाय समस्याओं को ध्यान से सुना करते थे। वे एक ऐसे शिक्षक थे जो जीवन भर विद्यार्थी बने रहे। भले ही डॉ.कलाम हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनका आत्मिक शरीर सदा एक महान शिक्षक बने रहेंगे- ये बातें मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी उनकी 6वीं पुण्यतिथि के अवसर पर  युवाओं के बीच अपने वृंदावन निवास पर इस कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कहीं।  सबों ने पुष्पांजलि की।

मौके पर अध्यक्षता करते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा- “डॉ.कलाम को शिक्षक बने रहना और शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता के रूप में सम्मान देते रहना सर्वाधिक भाता था। तभी तो डॉक्टर कलाम एक बच्चे को हैदराबाद के राजभवन में फल देते हुए ‘ए फॉर एप्पल’ और ‘ओ फॉर ऑरेंज’ सिखाते हैं और मेरे जैसे साधारण शिक्षक को मुलाकात हेतु बुलाए जाने पर देखते ही विनम्रता पूर्वक खड़े हो जाते हैं जिसे वे राष्ट्र निर्माता शिक्षक को सम्मान देना बताते हैं।”

आज भी उस क्षण को याद कर डॉ.मधेपुरी रोमांचित हो उठते हैं। डॉ.मधेपुरी बार-बार यही कहते रहे कि कलाम युग-युग तक जीवित रहेंगे और सदैव एक महान शिक्षक बने रहेंगे। इस अवसर पर डॉ. रश्मि भारती, रेनू चौधरी, आदित्य, अक्षत उर्फ छोटे कलाम सहित सुरजन दर्पण के निदेशक व सहयोगी विकास कुमार, सुशील कुमार, रूपा-राखी-रितिका, मनीषा-अंजलि-पुष्पा सबों ने बारी-बारी से पुष्पांजलि की।

 

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बिहार को केंद्र से मिला 3 लाख रैपिड एंटीजन टेस्ट किट, अब कोरोना जांच में होगी तेजी

बिहार में कोरोना के कहर को देखकर केंद्र सरकार ने बिहार को तीन लाख और रैपिड एंटीजन टेस्ट किट भेजा है जिससे कोरोना जांच में तेजी आएगी। राज्य सरकार ने 280000 रैपिड एंटीजन टेस्ट किट उपलब्ध करा लिया है। से 20000 रैपिड एंटीजन टेस्ट किट भारत सरकार ने भिजवाया है जिन्हें प्रत्येक जिले में भेजा जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी इस जांच किड्स के जरिए जांच शुक्र शुरू कर दी गई है।

बता दें कि कोरोना के कोहराम की समीक्षा कराने के बाद भारत सरकार द्वारा बिहार को पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर की आपूर्ति की गई है। सर्वप्रथम 100 वेंटिलेटर और दूसरे खेप में 264 वेंटीलेटर भेजा है केंद्र सरकार ने। राज्य सरकार ने 30 वेंटिलेटर क्रय किया है तथा 8 अन्य स्रोतों से प्राप्त होने के बाद कुल 402 वेंटिलेटर अब तक प्राप्त हुए हैं। 1दो से तीन सप्ताह में केंद्र सरकार द्वारा 100 वेंटिलेटर और दिया जाएगा, तब स्वास्थ्य विभाग को 500 वेंटीलेटरों के जरिए इलाज में कुछ राहत मिलेगी। यूं पूर्व में भी केंद्र से 4500 “बी” टाइप और 3888 “डी” टाइप ऑक्सीजन गैस सिलेंडर बिहार सरकार को प्राप्त हुआ है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारत सरकार के सहयोग एवं बिहार सरकार की संवेदनशीलता से हर स्तर पर लोगों को कोरोना जांच कराना आसान हुआ है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अब जांच की व्यवस्था होने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की जांच शीघ्र और आसानी से होने लगी है।

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ज्ञान भवन के सभ्यता द्वार से प्रवेश कर बिहार मानसून सत्र के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे महामहिम फागू चौहान

बिहार कोरोना काल के वर्ष 2020 का मॉनसून सत्र इतिहास में पहली बार बिहार विधान मंडल परिसर से बाहर नीतीश सरकार के कार्यकाल में निर्मित ज्ञान भवन (गांधी मैदान से  उत्तर) में आयोजित होगा- 3 अगस्त से। इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी गई है।

बता दें कि बिहार के महामहिम राज्यपाल फागू चौहान से प्राप्त निर्देश के बाद ही बिहार विधान मंडल के मॉनसून सत्र का आयोजन ज्ञान भवन के प्रथम तल स्थित “अधिवेशन भवन” में आहूत किया गया है। इस अधिवेशन भवन में बिहार विधानसभा एवं बिहार विधान परिषद यानि विधानमंडल के दोनों सदनों की बैठक को संबोधित करेंगे महामहिम राज्यपाल।

चलते-चलते यह भी जान लें कि भारत के कुल 31 राज्यों में मात्र 6 राज्यों बिहार, यूपी, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में ही फिलहाल विधान परिषद है। केंद्र सरकार द्वारा इन तीन राज्यों- राजस्थान, असम और उड़ीसा को स्वयं का विधान परिषद बनाने की स्वीकृति दे दी गई है।

एक दिलचस्प वाकया तो यह भी है कि मुख्यमंत्री वाई एस जगनमोहन रेड्डी की अध्यक्षता वाली आंध्र प्रदेश कैबिनेट की 27 जनवरी को हुई बैठक के बाद आंध्र प्रदेश विधान परिषद को खत्म करने का फैसला भी ले लिया गया है।

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