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सूबे के नौ हजार हाई स्कूलों में लगभग दस महीने बाद आज से शुरू हुए क्लास

कोरोना महामारी के दरमियान राज्य के 9 हजार से अधिक माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूलों में आज से सैनिटाइज्ड क्लास रूम में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं शुरू होंगी। कक्षाओं में आधे छात्र एक दिन तो आधे दूसरे दिन आएंगे ताकि सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन हो सके। कहा गया है कि 6 फीट की दूरी और मास्क पहनना जरूरी। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार स्कूलों में असेंबली नहीं होगी, बल्कि बच्चे सीधे क्लास रूम में ही जाकर बैठेंगे।

बता दें कि जिले के हाॅली क्रास जैसे बड़े स्कूल, जिसे क्लास रूम की कमी नहीं है, वह एक साथ 11th एंड 12th क्लास के सभी छात्रों को प्रतिदिन नियमानुसार दूर-दूर बैठाकर आज से पढ़ाना शुरू कर दिया है। कुछ स्कूल और कॉलेज केवल अंतिम दो वर्गों के छात्र-छात्राओं को आज से पढ़ाना चालू किया है।

कोचिंग संस्थानों में भी कोरोना संक्रमण से बचने हेतु घोषित उपायों के साथ नियमानुसार पठन-पाठन आरंभ किया गया है। मिलाजुला कर आज से शैक्षणिक जगत में 10 महीने बाद रौनक लौट आई है। कैंपस से खामोशी का साम्राज्य समाप्त हो गया। आज से स्कूल-कॉलेज आदि में घंटियां बजने लगी है।

जानिए कि सूबे में कक्षा 9 से 12 के बीच कुल विद्यार्थियों की संख्या 36 लाख  से अधिक है। चुंकि एक दिन में 50% विद्यार्थी के ही क्लास में आने के लिए अनुमति दी गई है। अतः आज 18 लाख से अधिक विद्यार्थियों के स्कूल पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार की ओर से स्कूलों को जितने निर्देश दिए गए हैं, अभिभावकों को उतनी ही सलाहें दी गई है। खेल पीरियड एवं लंच के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किए गए हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व में ही 9वीं क्लास की पढ़ाई करने का उद्घाटन 3300 पंचायतों के उत्क्रमित मिडिल स्कूलों में कर दी थी जहां हाई स्कूल नहीं था। कोरोना के कारण प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन रुका हुआ था। यहाँ नामांकन हो चुका है, परंतु पढ़ाई एक भी दिन नहीं हुई है। इन स्कूलों में कक्षा आठ से प्रमोट किए गए नामांकित बच्चे पहली बार अपने शिक्षकों से रू-ब-रू होंगे। इतना ही नहीं, 10 महीने बाद आज से पटना के हाई कोर्ट में न्यायाधीश अपनी कुर्सी पर बैठेंगे और एडवोकेट से मुखातिब होकर बहस करेंगे।

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पंचायत चुनाव के इतिहास में इस बार कई चीजें होंगी पहली बार

नीतीश सरकार के प्रस्ताव पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कार्यक्रम पहली बार जिलेवार किया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आचार संहिता भी जिलेवार लगाने का कार्यक्रम पहली बार तैयार किया जा रहा है।

बता दें कि सरकार के प्रस्ताव पर राज्य चुनाव आयोग ने अधिकतम 27 दिनों के अंदर 1 जिले का चुनाव संपन्न कराने का इस बार खाका तैयार किया है।  उम्मीदवार के नामांकन से लेकर मतगणना की पूरी प्रक्रिया 27 दिनों में पूरी होगी।

जानिए कि इस पहल से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरे राज्य में एक साथ आचार संहिता प्रभावी नहीं होगी। चुनाव वाले जिले को छोड़कर शेष सभी जिलों में विकास योजनाएं चलती रहेंगी। पूरे प्रदेश की सरकारी मशीनरी भी एक साथ प्रभावित नहीं होगी।

दूसरी अहम बात यह है कि पहली बार चुनाव आयोग द्वारा पंचायत चुनाव बैलट की जगह ईवीएम से कराया जाएगा। ईवीएम खरीद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एक जिले में चुनाव संपन्न कराए जाने के बाद उन्हीं ईवीएम को दूसरे जिले में भेज दिया जाएगा। आयोग ने घोषणा की है कि इस बार 8100 पंचायतों में चुनाव संपन्न कराने के लिए सूबे में नौ चरणों में चुनाव होगा। प्रत्येक ईवीएम में 6 पदों का होगा प्रावधान। यह मल्टीपल पोस्ट ईवीएम विधानसभा व लोकसभा चुनाव से अलग होगी।

चलते-चलते यह भी जानिए कि ऐसा नहीं होगा कि किसी एक प्रमंडल के सभी जिलों में एक साथ चुनाव करा दिया जाए। इस बार के ईवीएम में 6 पदों- जिला परिषद सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच के पदों पर चुनाव का प्रावधान होगा। जून 2021 में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, इसलिए आयोग द्वारा मार्च से मई के बीच चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य तय किया गया है। देश में ईवीएम से चुनाव कराने वाले बिहार को पांचवा प्रदेश बनने पर समाजसेवी एवं जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश सरकार को साधुवाद दिया है।

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महावीर बाबू के कर्मों की खुशबू का असर कम नहीं होगा- डॉ.मधेपुरी

आज 2 जनवरी को बीएनएमयू के पाँँचवें कुलपति डॉ.महावीर प्रसाद यादव की 95वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम माल्यार्पण किया कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण, मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के अत्यंत करीबी एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर पदाधिकारी रहे प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी एवं विश्वविद्यालय की  प्रथम महिला प्रति कुलपति प्रो.(डॉ.)आभा सिंह। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व अन्य पदाधिकारीगण द्वारा भी माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया गया।

From Left to Right Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri, Pro-VC Dr.Aabha Singh, VC Dr.RKP Raman and others paying tribute on the occasion of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav's Punya Tithi at BNMU.
From Left to Right Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri, Pro-VC Dr.Aabha Singh, VC Dr.RKP Raman and others paying tribute on the occasion of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav’s 95th Birth Anniversary at BNMU.

विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सिंडिकेट की बैठक में कुलपति, प्रति कुलपति, कुलसचिव आदि को शिरकत करनी थी इसलिए महावीर बाबू के साथ साया की तरह रहने वाले डॉ.मधेपुरी ने चंद मिनटों में उद्गार प्रकट करते हुए कहा- आदमी दुनिया से चला जाता है, वह पंचतत्व में विलीन हो जाता है, परंतु उनके द्वारा किए गए काम यहीं पर बुद्ध की तरह ठहर जाते हैं। इसलिए तो लोग उन्हें टीपी कॉलेज का विश्वकर्मा कहते हैं। महावीर बाबू के कर्मों की खुशबू का असर कभी कम नहीं होगा।

Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at the Monument of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav at BNMU Campus.
Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at the Monument of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav at BNMU Campus.

डॉ.मधेपुरी ने खासकर प्रति कुलपति महोदया को जानकारी के तौर पर महावीर बाबू के संबंध में इतना ही कहा- वे 1953 में मधेपुरा आये। टीपी कॉलेज में व्याख्याता बने। 1962 में वाइस प्रिंसिपल बने। संस्थापक प्राचार्य रतन चंद के साथ मिलकर इतना काम किए कि 1968 में भूपेन्द्र नारायण मंडल ने अपनी सोशलिस्ट पार्टी से उन्हें विधानसभा का टिकट देकर चुनाव में खड़ा किया। महावीर बाबू चुनाव जीते और बीपी मंडल सरकार में शिक्षा मंत्री बने। गुरु डॉ.के.के.दत्ता को पटना विश्वविद्यालय के वीसी पद पर एक वर्ष का विस्तारीकरण देकर गुरु भक्ति का उदाहरण पेश किया। सांंसद बने, दो विश्वविद्यालयों के प्रति कुलपति और 1995 से मृत्युपर्यंत कुलपति बनकर बीएनएमयू की सेवा की। अंत में डॉ मधेपुरी ने उनके पुत्र प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान (पीजी) एवं डीएसपी मनोज कुमार आदि द्वारा उनकी समाधि पर अंकित कराई गई पंक्तियों को दोहराते हुए कहा-

गुजरेंगे तेरे बाद भी कुछ लोग यहां से

पर तेरी खुशबू का असर कम नहीं होगा।

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उम्मीदों का नया साल बने 2021

इसरो अब चंद्रयान-2 के बाद 2021 में चंद्रयान-3 को लांच करने जा रहा है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते इसकी लांचिंग में देरी हो रही है।

यह कि कोरोना महामारी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था में हुई भारी गिरावट… अब नए साल 2021 के शुरुआती महीनों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में जिस तेजी से गिरावट दर्ज की गई, उससे अधिक तेजी के साथ रिकवरी देखने को मिलेगी 2021 में। परंतु, किसानों का यह हड़ताल तो पहले खत्म हो।

बकौल समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, 12 महीनों को गुजार कर पुराने वर्ष को विदाई देना और नए वर्ष के आगमन को पर्व मानकर बेहतर खुशियां मनाना बेहतरी नहीं, बल्कि बीते वर्ष के खट्टे-मीठे-तीखे व अन्य कई प्रकार के स्वादों के साथ सामान्य व्यक्ति अपने भविष्य को निर्धारित करने के लिए अधिक संवेदनशील बने….. वही श्रेयष्कर है। डॉ.मधेपुरी के अनुसार- नई संभावना, नई दृष्टि, नये-नये संघर्ष और नूतन लालित्य का प्रवेश ही नया वर्ष है।

गत वर्ष कोविड-19 ने देश को एक मायने में तो लाभ पहुंचाया कि देश रिचार्ज हुआ… लाॅक डाउन ने  प्रदूषण मुक्त वातावरण दिया, परन्तु, अब यह नया साल पर्यावरण को स्वच्छ रखने का साल बने तो सही……! जीत के मजबूत इरादों के साथ नए साल में हम सभी उतरे तो सही…….!!

चलते-चलते यह कि गत वर्ष समस्त संसार दुश्वारियों का सामना करता रहा और हम नए साल में अच्छे होने की उम्मीद में आगे बढ़ते रहें…. मजबूत इरादों के साथ, ताकि भारत शक्तिशाली बन कर विश्व गुरु बनने का सपना साकार कर सके। इस सपने को अमलीजामा पहनाने के लिए समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने युवाओं से यही कहा कि इस नये वर्ष को नए भारत के निर्माण की नींव बनाना होगा और हमें आत्मनिर्भर भारत बनाने का हरदम-हरकदम प्रयास करते रहना होगा।

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कोरोना काल में बेहतर काम के लिए सूबे बिहार की नीतीश सरकार को मिला डिजिटल इंडिया अवार्ड

भारत सरकार ने गुजरे वर्ष में कोरोना के खतरे के दौरान सूबे बिहार की नीतीश सरकार की ओर से डिजिटल तरीके से प्रदेशवासियों को सहायता पहुंचाने के काम की सराहना की। फलस्वरूप, महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नीतीश सरकार के बेहतरीन प्रयासों के लिए सूबे के 5 आलाधिकारियों को डिजिटल इंडिया अवार्ड- 2020 से सम्मानित किया।

बता दें कि 30 दिसंबर, बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की उपस्थिति में सीएम नीतीश के प्रधान सचिव चंचल कुमार, आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, अपर सचिव रामचंद्रडू, एनआईसी के शैलेश कुमार श्रीवास्तव और नीरज कुमार तिवारी को डिजिटल इंडिया अवार्ड- 2020 से सम्मानित किया गया।

जानिए कि लाॅक डाउन लागू होने के तुरंत बाद सीएम नीतीश कुमार के निर्देश पर दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के लोगों से बातें कर उनका फीडबैक लिया गया और इन सभी आलाधिकारियों द्वारा ससमय उन तक राहत पहुंचाई गई। बिहार कोरोना सहायता मोबाइल ऐप के जरिए अधिक से अधिक लोगों को वित्तीय सहायता पहुंचाई गई।

इतना ही नहीं 1 करोड़ 64 लाख राशन कार्ड रखने वाले परिवारों को 3 महीने पहले का अग्रिम राशन दिया गया। साथ ही 21 लाख लोगों को खाते में एक-एक हजार रूपये की सहायता राशि का भुगतान भी किया गया। सूबे के 15 लाख से अधिक श्रमिकों को 10 हजार से अधिक केंद्रों पर सारी सुविधाओं के साथ क्वारंटाइन किया गया। इस अवधि में सभी को भोजन, आवासन एवं चिकित्सीय जांच भी कराया कराई गई। यहां तक कि बाहर से लौटे श्रमिकों को अभियान चलाकर रोजगार भी मुहैया कराया गया एवं अन्य छोटी-बड़ी सहायता व सुविधाएं भी दी गई।

चलते-चलते यह भी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों के चलते कोरोना काल में लोगों के खाते में सीधे आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए महामहिम राष्ट्रपति कोविंद द्वारा दिए गए सम्मान (डिजिटल अवार्ड-2020) से अभिभूत होकर संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री रविशंकर एवं सीएम नीतीश सहित सूबे के तमाम श्रमिक भाइयों को भी नए वर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित की है।

 

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ब्रिटिश भारत में जन्मे रूडयार्ड किपलिंग साहित्य का प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता बने

आज ही के दिन यानि 30 दिसंबर 1865 को ब्रिटिश भारत के वर्तमान मुंबई (तब के बॉम्बे) शहर में मां एलिस किपलिंग की गोद में बालक रूडयार्ड किपलिंग का जन्म हुआ था। किपलिंग उच्च कोटि के पत्रकार, लघु कथा लेखक, उपन्यासकार और कवि के रूप में चर्चित रहे। वे बाल साहित्य, यात्रा साहित्य और विज्ञान कथाएं लिखने में प्रवीण थे।

बता दें कि मुंबई में जन्मे रूडयार्ड किपलिंग को मुख्य रूप से यह दुनिया उनकी पुस्तक “द जंगल बुक” के लिए जानती है जिसे उन्होंने 1894 में कहानियों के संग्रह के रूप में लिखकर प्रकाशित कराई थी। उनके द्वारा लिखी गई अन्य प्रमुख पुस्तकें “द मैन हु वुुड बी किंग” वर्ष 1888 में, “गंगा दीन” वर्ष 1890 में, साहसिक कहानियां “किम” वर्ष 1901 में और “इफ” वर्ष 1910 में उन्हें शोहरत के शिखर पर पहुंचा दिया।

जानिए कि मुंबई में जन्म लेने के कुछ वर्षों बाद उन्हें ब्रिटेन भेज दिया गया जहां उन्होंने स्कूली शिक्षा ग्रहण की। पढ़ाई समाप्त कर वे 20 सितंबर 1882 को भारत के लिए रवाना हुए और 18 अक्टूबर को मुंबई लौट आए। भारत आते ही उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार में नौकरी शुरू की तथा वे लघु कथाओं के साथ-साथ कविताएं भी लिखने लगे। सात वर्षों के बाद यानि 1889 में रूडयार्ड किपलिंग पुनः ब्रिटेन लौट गए।

यह भी जानिए कि वर्ष 1894 में उन्होंने सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक “जंगल बुक” लिखी जिसके लिए उन्हें 1907 में साहित्य के लिए पहला नोबेल पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। वे अंग्रेजी भाषा के पहले युवा लेखक हुए जिन्हें यह नोबेल पुरस्कार मिला।

चलते-चलते यह भी बता दें कि रूडयार्ड  झील में उनकी साहसी माताश्री एलिस किपलिंग एवं मूर्तिकार पिताश्री लाॅकवुुड किपलिंग  एक दूसरे से प्रेम-संबंध में बंधेे थे और झील की सुंदरता से मोहित होकर उन दोनों ने अपने पहले जन्मे बच्चे का नाम उस झील को यादगार बनाए रखने के आधार पर रूडयार्ड किपलिंग रखा था। तब के मुंबई स्थित सर जेजे स्कूल आफ आर्ट में रूडयार्ड किपलिंग के पिताश्री मूर्तिकला के प्रोफेसर थे और परिसर में जहां रहते थे उस घर का जीर्णोद्धार करके एक संग्रहालय में परिवर्तित किए जाने की घोषणा भी स्कूल प्रशासन द्वारा 2007 में की गई। कदाचित उसी जगह पर लकड़ी से बना एक नई कुटीर का निर्माण किया गया है जिसे भविष्य में रूडयार्ड संग्रहालय का रूप दिया जायेगा है।

 

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आज ही के दिन जन्मे राजेश खन्ना…. अभिनय के दम पर बॉलीवुड का सुपरस्टार बने

भारतीय फिल्मी दुनिया का चमकता हुआ सितारा राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर, 1942 यानि आज के ही दिन अमृतसर में हुआ था। भारत के समस्त कलाप्रेमी आज उस अद्भुत कलाकार को याद करता है जिसका असली नाम जतिन खन्ना था। जतिन यानि राजेश खन्ना की पहली फिल्म “आखिरी खत” 1966 में रिलीज हुई थी।

बता दें कि राजेश खन्ना भारतीय बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, निर्देशक व निर्माता थे। उन्होंने 1969-70 व71 के बीच 15 सुपरहिट फिल्में दी और सुपरस्टार बन गए। वर्ष 1970 से 1980 तक बॉलीवुड के बेशकीमती हीरा बने रहे राजेश खन्ना यानि सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाले अभिनेता बने रहे वे।

जानिए कि राजीव गांधी के कहने पर राजेश खन्ना ने राजनीति में प्रवेश किया और वे नई दिल्ली लोकसभा सीट से 5 वर्षों (1991-96) के लिए कांग्रेस पार्टी के सांसद बने। बाद में उन्होंने राजनीति से ही सन्यास ले लिया।

यह भी जानिए कि सुपर स्टार राजेश खन्ना का नाम 14 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया, जिनमें उन्हें तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला और चार बार बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट अवार्ड दिया गया। इसके अलावा दर्जनों भिन्न-भिन्न अवॉर्डों से विभूषित किया गया। मरणोपरांत इस सुपरस्टार को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। कैंसर के कारण 18 जुलाई 2012 को मुंबई में उनकी मृत्यु हो गई।

चलते-चलते यह भी कि राजेश खन्ना के पारिवारिक जीवन में बसंत कम और पतझड़ अधिक दिखते रहे। वर्ष 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी हुई और 1984 में दोनों अलग हो गए। फिर 1990 में दोनों करीब आते दिखे। वर्ष 2012 आते-आते दोनों एक साथ त्यौहार मनाने लगे। उनकी ही बड़ी बेटी ट्विंकल फिल्म अभिनेत्री है जिसकी शादी अभिनेता अक्षय कुमार से हुई है। अक्षय कुमार भी फिल्मी दुनिया की एक बड़ी हस्ती है और किसी से कम नहीं…।

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अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा सिंहेश्वर स्थान

एक ओर जहां राज्य सरकार द्वारा सिंहेश्वर को नगर पंचायत घोषित किये जाने एवं उसमें सिंहेश्वर और गौरीपुर पंचायत को शामिल किए जाने से लोगों में खुशी व्याप्त है वहीं पंचायत की राजनीति करने वाले चंद लोग मायूस नजर आ रहे हैं। सिंहेश्वर के गणमान्यों ने खुशियां जाहिर करते हुए इसे नीतीश सरकार का बड़ा फैसला कहा है।

सिंहेश्वर मंदिर न्यास परिषद के सदस्य रह चुके समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, व्यापार संघ के महासचिव अशोक भगत, मारवाड़ी युवा मंच के दिलीप खंडेलवाल एवं वयोवृद्ध प्रतिष्ठित व्यापारी हरि टेकरीवाल आदि ने कहा कि अब सिंहेश्वर न केवल पर्यटन के रूप में विकसित होगा बल्कि सिंहेश्वर का चहुमुखी विकास संभव हो पाएगा।

डॉ.मधेपुरी ने केंद्रीय रेल मंत्री से मांग की है कि पूर्व में रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र के कार्यकाल में दौरम मधेपुरा से बीरपुर भाया सिंहेश्वर रेल लाइन का सर्वे भी कराया गया था, उसे अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इस इलाके से होकर रेल मार्ग गुजरने पर बेहतर विकास संभव होगा तथा लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

यह भी जानिए कि जहां पंकज भगत ने पूर्व डीएम मो.सोहैल का हवाला देते हुए कहा कि सिंहेश्वर को नगर पंचायत बनाए जाने का प्रस्ताव उन्हीं के द्वारा भेजा गया था, वहीं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने कहा कि डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने आम लोगों एवं श्रद्धालुओं की परेशानियों को दूर करने के लिए नारियल बोर्ड से लेकर दुर्गा चौक तक फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। लगता है नगर पंचायत बनने पर ये सारी योजनाएं जनहित में अवश्य पूरी की जाएंगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि वर्तमान में बिहार में 142 शहरी निकाय थे और अब निकायों की संख्या हो जाएगी 253, जिसमें कुछ नगर पंचायतों को नगर परिषद तथा कुछ नगर परिषद को उत्क्रमित कर नगर निगम बनाया गया है। सूबे की 300 पंचायतें शहरों का हिस्सा बनेंगी। जानिए कि नगर निकाय गठन का मुख्य मानक है- 1. नगर पंचायत के लिए आबादी 12 हजार से 40 हजार, 2. नगर परिषद के लिए 40 हजार से 2 लाख और 3. नगर निगम के लिए 2 लाख से अधिक।

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नए वर्ष में नीतीश ने जदयू को दिया नया तोहफा

जदयू का एक शख्सियत जो ज्यादा सुर्खियों में रहना पसंद नहीं करता, परंतु पार्टी के रणनीतिकार के रूप में पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति को सफलतापूर्वक अमलीजामा पहनाने में कुशल हैै- वही तो है नीतीश कुमार के अच्छे दोस्त, सियासी सलाहकार और भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी व पार्टी के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह, जिन्हें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में स्वयं नीतीश कुमार ने रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रदेश मुख्यालय स्थित कर्पूरी ठाकुर सभागार में रविवार को सर्वप्रथम नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की और तत्पश्चात आरसीपी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव भी दिया। बैठक में तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड…. आदि से आए प्रतिनिधि भी शिरकत कर रहे थे।

आज जदयू राष्ट्रीय परिषद की मुहर लगने के बाद नए वर्ष के तोहफे के रुप में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर आरसीपी सिंह के नाम की विधिवत घोषणा भी कर दी गई है।

जानकारों का मानना है कि अरुणाचल प्रदेश में जदयू के 6 विधायकों को भाजपा में शामिल कराए जाने के व्यवहार और बिहार में जदयू को 43 तो भाजपा को 74 सीटें मिलने के कारण एक पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जरूरत महसूस की गई और उसी के फलस्वरूप आरसीपी को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।

Dr.Bhupendra Madhepuri along with Newly appointed President (JDU) RCP Singh and Lalan Sarraf at Lalan Sarraf's House.
JDU Senior Leader Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri along with Newly appointed President (JDU) RCP Singh and MLC Lalan Sarraf at Lalan Sarraf’s House. (File Photo)

जानिए कि नीतीश के इस निर्णय को जदयू के सभी कार्यकर्ताओं ने सिर आंखों पर रख लिया है और जुनून के साथ पार्टी को मजबूती प्रदान करने हेतु संकल्प भी ले लिया। बकौल पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, एमएलसी  ललन सर्राफ के निवास पर कई बार आरसीपी से उनकी मुलाकातें हुई, देर तक बातें हुई। डॉ.मधेपुरी ने आज भरोसे के साथ कहा कि आरसीपी सरीखे राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) की काबिलियत को देखकर पार्टी ने जो निर्णय लिया है वह आने वाले दिनों में पार्टी को तीसरे नंबर से पहले नंबर पर लाने में अवश्य ही कारगर सिद्ध होगा।

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मधेपुरा में प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिन पर उत्सवी माहौल रहा

मिशन अस्पताल में क्रिसमस के अवसर पर प्रभु यीशु मसीह का जन्मदिन उत्सवी माहौल के साथ मनाया गया। कई स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिन पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया, जहां ईसा मसीह के जन्म की खुशी सबके चेहरे पर छलक रही थी। चारो ओर क्रिसमस त्योहार को लेकर शुक्रवार के सवेरे से ही ईसाई धर्मावलंबियों में खासा उत्साह दिख रहा था।

बता दें कि प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए चर्च के फादर विजय टुडू ने अपने संबोधन में यही कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा के लिए ही प्रभु यीशु इस धरती पर अवतरित हुए थे। अन्याय एवं पाखंड के प्रतिकार में उन्होंने अपना प्राण न्योछावर कर दिया था। उनका सारा जीवन ही लोक कल्याण में बीता था। आज पूरे विश्व में अधिकांश लोग उनके बताए मार्ग पर चल रहे हैं।

यह भी जानिए कि स्कूली बच्चों द्वारा ईसा मसीह के जीवन पर आधारित नाटक की रोचक प्रस्तुति की गई। आदिवासी समाज के लोगों द्वारा ढोल-मंजीरे के धुनों पर पारंपरिक लोकनृत्य की प्रस्तुति की गई। इस धर्म को मानने वाले सीमावर्ती गांव के लोग भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते चर्च में सार्वजनिक आयोजन नहीं किया गया। कार्यक्रमों में ज्यादा लोग एक साथ शामिल नहीं हो इसका पूरा ख्याल रखा गया। इस बार कार्यक्रमों में प्रवेश पर रोक लगी रही। अंत में पास्टर रघु मुर्मू “प्रेम” शब्द को जीवन में उतारने की जरूरत बताते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही। श्री मुर्मू ने कहा कि प्रभु यीशु ने लोगों को आपस में प्रेम और सद्भावना बनाए रखने का संदेश दिया है।

 

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