पृष्ठ : मधेपुरा अबतक

जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.(प्रो.) भूपेंद्र प्रसाद की भव्य विदाई

सेवानिवृत्ति के बाद विदाई का हर पल, हर क्षण अत्यंत भावुक क्षण होता है। सेवानिवृत्ति एक ऐसा अवसर है जहां व्यक्ति को बोलने के लिए शब्दों की कमी पड़ जाती है। उस समय मन मे मिश्रित भावनाएं उमड़ती है। रिटायर होने वाले व्यक्ति को अपने सफ़र का हिस्सा बने व्यक्तियों, चाहे वो शिक्षक, छात्र व सहकर्मी या सफाई कर्मी ही क्यों ना हो, को धन्यवाद देना सुनिश्चित करना चाहिए। ये बातें विशिष्ट अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार एवं भौतिक के रिटायर्ड यूनिवर्सिटी प्रोफेसर रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने शिष्य प्राचार्य जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज डॉ.भूपेंद्र प्रसाद की विदाई पर कही।

11 मार्च 2018 से इन्होंने सेवा आरंभ की और 31 जनवरी 2024 को सेवानिवृत हुए। नेत्र विशेषज्ञ के रूप में सर्जन सासाराम, पीएमसीएच एवं कई स्थानों पर कार्यरत रहे। वर्ष 1997 से 2013 तक डीएमसीएच में तथा 2018 से 2021 तक बेतिया में प्रोफेसर रहे एवं आज तक प्रिंसिपल जीएनकेटी मेडिकल कॉलेज में रहकर सेवानिवृत हुए।

इस विदाई समारोह में शहर के लोकप्रिय शिशु रोग चिकित्सक डॉ.अरुण कुमार मंडल, जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष डॉ.दिनेश कुमार, डॉ.पीके मधुकर, डॉ.आलोक निरंजन, डॉ.चंचल, डॉ.पूनम कुमारी आदि सहित शहर के गणमान्यों एवं प्राचार्य भूपेंद्र के मित्रों उद्दालक घोष, विश्वनाथ गांगुली उर्फ गोदई, अनिल राज, विनोद कुमार यादव, हरेराम कामती आदि मौजूद रहे। सेवानिवृत प्राचार्य डॉ.भूपेंद्र प्रसाद के साथ बिताए क्षणों को साझा किया। साथ ही मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्रों ने भी अपने प्राचार्य की विदाई पर उद्गार व्यक्त करते हुए उनके स्वास्थ्य एवं दीर्घायु होने की कामना की।

डॉ.मधेपुरी ने अपने शिष्य की सेवा निवृत्ति पर उनके शैक्षिक प्रयासों से खुश होकर पाग, अंग वस्त्रम व पुस्तक से सम्मानित करते हुए यही कहा कि डॉ. प्रसाद के प्रयास के कारण ही तत्कालीन डीएम श्याम बिहारी मीणा से अनुरोध करके एक डेड बॉडी छात्रों की प्रायोगिक पढ़ाई हेतु उपलब्ध कराया था।

सम्बंधित खबरें


बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में कोसी खेल एवं सांस्कृतिक उत्सव ‘अभ्युदय’ का भव्य शुभारंभ

मधेपुरा बीपी मंडल कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के परिसर में कोसी कमिश्नरी के मधेपुरा, सहरसा एवं सुपौल कॉलेज आफ इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं के लिए खेल एवं सांस्कृतिक उत्सव -2023 “अभ्युदय” का शुभारंभ 17 दिसंबर को 10:00 बजे पूर्वाह्न से प्राचार्य प्रो.अरविंद कुमार अमर की अध्यक्षता में सहरसा एवं सुपौल जिले के अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर सी प्रसाद एवं डॉ. एन मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति व अन्य अतिथियों की मौजूदगी में समारोह के मुख्य अतिथि प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ.भूपेन्द्र  मधेपुरी ने अपने संबोधन में जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.(डॉ.)भूपेंद्र प्रसाद एवं अतिथि के रूप में तीनों जिले के नोडल ऑफिसर इंजीनियर मुरलीधर प्रसाद  इंजीनियर अजय प्रभाकर व इंजीनियर अचिंत रंजन, बीएन मंडल विश्वविद्यालय के सीनेटर प्रो.(डॉ.) नरेश कुमार एवं एसएनपीएम के पूर्व प्राचार्य डॉ.निरंजन कुमार सहित सभी छात्र-छात्राओं को तीनों जिले के इतिहास से रू-ब-रू कराते हुए यही कहा कि खेल में हार जाना खेल का अंत नहीं होता, खेल में हार मान लेना खेल का अंत होता है। जिद्दी बनिए और जीतने तक खेलते रहिए। देश की एकता-अखंडता के लिए खेल आवश्यक होता है। खेल हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। आजकल खेल स्कूल, कॉलेज एवं करियर में भी स्थान बनाने लगा है। अंत में डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि खेल सामाजिक सद्भाव, मानसिक विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण के लिए जरूरी होता है। खेल अनुशासन, ईमानदारी एवं धैर्य को बढ़ाता है। खेल हर खिलाड़ी के अंदर समूह के प्रति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना उत्पन्न करता है। जहां सहरसा के प्राचार्य डॉ. आर सी प्रसाद ने कहा कि बिना हार का स्वाद चखे, सफलता नहीं मिलती वहीं सुपौल के प्राचार्य डॉ.ए.एन मिश्रा ने खिलाड़ियों से यह कहा कि इतनी तैयारी करो कि कोसी की टीम बाहर खेलने जाए। जेएनकेटी के प्राचार्य डॉ.भूपेंद्र प्रसाद ने कहा कि खेल में अच्छा करने वाले को सभी जानने लगते हैं और उसकी इज्जत बढ़ जाती है।

अंत में प्राचार्य प्रो.अरविंद कुमार अमर द्वारा अपने मंच संचालकों एवं सहयोगी डॉ.एस डी सिंह सहित सभी अतिथियों का अंगवस्त्रम एवं पौध देकर स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। तत्पश्चात सुपौल क्रिकेट टीम टॉस जीतकर बोलिंग पसंद किया और सहरसा क्रिकेट टीम बैटिंग करने लगी। यह खेल उत्सव का कार्यक्रम 22 दिसंबर तक चलेगा जिसमें विभिन्न विधाओं के प्रतिभागीगण वॉलीबॉल, बैडमिंटन, हाई जंप, लॉन्ग जंप, 100 मीटर दौड़, टग ऑफ वॉर, शॉट पुट थ्रो, शतरंज, टेबल टेनिस, कैरम डिबेट, क्विज, पोस्टर मेकिंग, गीत गायन कंपटीशन सहित डांस व रंगोली प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। 22 दिसंबर को ही पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा।

 

सम्बंधित खबरें


पीएम श्री योजना के तहत नवोदय विद्यालय सुखासन में कार्यक्रम का श्री गणेश

अतीत को जाने बिना आप अपने भविष्य को गढ़ नहीं सकते- डॉ. मधेपुरी

जवाहर नवोदय विद्यालय, सुखासन, मधेपुरा में पीएम श्री योजना के तहत प्राचार्य श्रीकांत सिंह सहित शिक्षकों व कर्मियों द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए कैरियर परामर्श एवं मार्गदर्शन विषय पर सारगर्भित स्पीच देने के लिए ख्याति प्राप्त समाजसेवी-साहित्यकार -सह- फिजिक्स के सेवानिवृत सीनियर यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को 9 दिसंबर शनिवार को 3:00 बजे अपराह्न में आमंत्रित किया गया। डॉ.मधेपुरी ने अपने लगभग 2 घंटे के संबोधन में बच्चों को अपने अतीत को जानने की सलाह देते हुए कहा कि अपने अतीत को जाने बिना आप अपने भविष्य को गढ़ नहीं सकते और वर्तमान में आगे बढ़ नहीं सकते। उन्होंने छात्रों के बीच आर्यभट्ट से लेकर गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम की विस्तार से चर्चा की। राष्ट्रकवि दिनकर की एक कविता के माध्यम से स्पीड एंड वेलोसिटी के बीच का अंतर  ‘दौड़ना और भागना’ शब्दों का सहयोग लेकर ऐसा समझाया कि छात्रों सहित शिक्षकों के चेहरे पर मुस्कान लाकर भरपूर तालियां बटोरी। स्पीच के बाद सर्वाधिक छात्राएं डॉ.मधेपुरी से मिलकर पढ़ाई के बाबत अपनी समस्याओं के समाधान तलाशने में लगी देखी गई।

आरंभ में प्राचार्य श्रीकांत ने बुके एवं शब्दों से मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित बीएन मंडल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक -सह- कुलसचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी का स्वागत करते हुए कहा कि पीएम श्री योजना के तहत संपूर्ण भारत करीब  27 हजार करोड़ की पहली किस्त के अंतर्गत कौशल विकास हेतु  यह कार्यक्रम छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक अभय कुमार, हेमनाथ झा, हरेराम कुमार, विभूति विशाल, जितेंद्र बिष्ट, मुरलीधर झा, ममता सिंह, पूर्णिमा सिंह, सारिका अरोड़ा, शिवानी यादव, उर्मिला आदि एवं अन्य कर्मचारीगण मौजूद थे। संगीत शिक्षक विभूति विशाल के निर्देशन में शांभवी, कृतिका, अनुप्रिया, साक्षी प्रिया व आकाश ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। मंच संचालन पीजी टीचर हेमनाथ झा ने किया।

सम्बंधित खबरें


शहीदों के नाम सदैव जलते रहेंगे दीप- मधेपुरी

दिवाली की शाम स्थानीय शहीद पार्क जिसमें तत्कालीन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा लगाई गई शहीदी पट्टीका के समक्ष कामरेड कामेश्वर साह की टीम के कुछ बड़ों एवं छोटे बच्चों की मौजूदगी में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने जिले के शहीदों के नाम कुछ दीप जलाये। छोटे-बड़े सबों ने पुष्पांजलि भी की।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि वर्तमान मधेपुरा जिला में स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक सैनिक के रूप में भी जो शहीद हुए उनकी संख्या आठ हैं। वे हैं- बाजा साह (किशुनगंज), चुल्हाय यादव (मनहरा), जेपी आंदोलन में शहीद सदानंद (धुरगांव) सहित शेष सभी पांच जांबाज सैनिक- प्रमोद कुमार (फुलकाहा), प्रमोद कुमार (चामगढ़), शंकर प्रसाद रजक (मधेपुरा), कैप्टन आशुतोष (जागीर) और आशीष कुमार सिंह (सुखासन) के नाम दीप जलाकर उन्होंने कहा कि दिवाली में कुछ लोग छत पर दीप जलाते हैं तो कुछ खेतों में दीप जलाते हैं। परंतु, सैनिकों के श्रमदीप सर्वोत्तम होते हैं जो रात-दिन जगकर देश के लिए फूल खिलाते हैं। डॉ.मधेपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में यह भी कहा कि जब हम सब घर में मनाते हैं दिवाली और होली, तब वे सैनिक सरहद पर झेल रहे होते हैं गोली। कुछ तो घाटियों के पत्थर खाते हैं और कुछ सियाचिन की ऊंचाइयों पर प्राणवायु के लिए भी तरस जाते हैं। उन सैनिकों को समस्त देशवासियों का नमन, जिनका यह संकल्प कि या तो तिरंगा लहराते जाएंगे, आगे बढ़ते जाएंगे या लड़ते-लड़ते शहीद होकर इसी तिरंगे में लिपटकर वापस घर आएंगे। अंत में अश्रुपूरित नयनों के बीच अवरुद्ध कंठ से डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि आने वाले दिनों में भी ऐसे क्रांतिवीर शहीदों के नाम सदैव दीप जलते रहेंगे।

सम्बंधित खबरें


बाल वैज्ञानिकों का समर्पण एक दिन उसे सीवी रमन बना देगा- डॉ.मधेपुरी

भौतिकी के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च सम्मान ‘नोबेल पुरस्कार’ प्राप्त करने वाले भारत के पहले वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन, जिन्हें दुनिया सीवी रमन के नाम से जानती है, की 136वीं जन्म जयंती बीएन मंडल विश्वविद्यालय के भौतिकी के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने स्कूली बच्चों एवं शिक्षकों के बीच अपने निवास ‘वृंदावन’ में मनायी। सीवी रमन को प्रकाश और उसके व्यवहार का अध्ययन करना सर्वाधिक पसंद था। रमन ने यह पाया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है तो उसका कुछ भाग बिखर जाता है और रंग बदल जाता है- जिसे “रमन प्रभाव” के नाम से दुनिया जानती है।

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से कहा कि महान वैज्ञानिक सीवी रमन का जन्म तमिलनाडु राज्य में तब हुआ था जब उसका नाम मद्रास प्रोविंस था। लाइट स्कैटरिंग के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। डॉ.मधेपुरी ने वैज्ञानिक रमन के विचारों को संदर्भित करते हुए बच्चों से यही कहा कि तुम्हारा असली खजाना बुद्धि और शारीरिक शक्ति में निहित है। तुम्हारा समर्पण ही तुम्हें एक दिन तुम्हें सीवी रमन बना देगा। तुम्हें अपनी असली ताकत देखने के लिए दो प्रमुख बुधाएं “हीनता एवं झिझक” को दूर करना होगा । अंदर के आत्मविश्वास को बढ़ाना होगा, क्योंकि विश्वास हर किसी के जीवन में एक मार्गदर्शक सितारे की तरह होता है। आत्मविश्वास जीवन में कोई भी चमत्कार ला सकता है।

अंत में विज्ञान में अभिरुचि रखने वाले बच्चों- रश्मि कुमारी, आदित्य कुमार, बाबुल-आलोक, प्रियांशु, सूर्यवंशम, आयुष, अंकित, प्रणव भारती, नीतीश राज, शिवम कुमारी, ऋतुराज सहित  शिक्षकवृंद चिरामणि यादव, गणेश कुमार, नीरज कुमार एवं अन्य लोगों के बीच डॉ.मधेपुरी द्वारा कलम और मिठाइयां बांटी गई।

 

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा में महात्मा गांधी की जयंती मनी

आज सवेरे 9:00 बजे प्रातः समाहरणालय परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर डीडीसी नितिन कुमार सिंह, जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी, एडीएम अरुण कुमार सिंह, एसडीएम धीरज कुमार सिंह, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, जप उपाध्यक्ष रघुनंदन दास सहित अन्य पदाधिकारी व समाहरणालय कर्मियों ने माल्यार्पण व पुष्पांजलि की। इस अवसर पर सर्वधर्म प्रार्थना का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जय कृष्ण प्रसाद यादव द्वारा किया गया। गांधी जी के प्रिय भजनों के गायकों में मुख्य रूप से मौजूद प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, शशि प्रभा जायसवाल एवं मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्म के प्रार्थना के गायक भी मौजूद थे।

Samajsevi Dr.Madhepuri talking about to installation of statue of Former PM Lal Bahadur Shastri & Shahid Chulhay with DDC Madhepura.
Samajsevi Dr.Madhepuri talking about to installation of statue of Former PM Lal Bahadur Shastri & Shahid Chulhay with DDC Madhepura.

अंत में डीडीसी नितिन कुमार सिंह, एडीएम अरुण कुमार सिंह, जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी, उपाध्यक्ष रघुनंदन दास,  समाजसेवी डॉ. मधेपुरी आदि ने विभिन्न प्रखंडों के साफ-सफाई में उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला-पुरुष कर्मियों को पुरस्कार स्वरूप प्रमाण पत्र दिया।

तत्पश्चात जिला परिषद डाक बंगला स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर अध्यक्षा मंजू देवी, डीडीसी सह सचिव नितिन कुमार सिंह, उपाध्यक्ष रघुनंदन दास, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने माल्यार्पण व पुष्पांजलि की। अंत में डॉ.मधेपुरी ने अध्यक्ष एवं सचिव से गांधी परिसर में जय जवान जय किसान के उद्घोषक प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं शहीद चुल्हाय यादव की प्रतिमा लगाने की चर्चा की तो डीडीसी साहब ने कहा कि आवेदन दीजिए। सरकार से सहमति प्राप्त होने के बाद प्रतिमा लगाने की प्रक्रिया आरंभ होगी।

 

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा में पतंजलि के बैनर तले चला स्वच्छता अभियान

आज सवेरे 10:00 बजे मधेपुरा के शहीद पार्क के निकट बाबा रामदेव के पतंजलि के बैनर तले प्रधानमंत्री की अपील पर एक घंटे का स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अवसर पर शहर के प्रख्यात समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि यह कितनी शर्मनाक बात है कि हम पढ़े-लिखे लोग दिनभर सड़कों पर प्लास्टिक, पॉलीथिन व अन्य सामग्रियाँ फेंक-फेंककर उसे गंदा करते चलते हैं और सुबह-सवेरे कुछ अनपढ़ लोग उसे साफ करते रहते हैं। डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि जापान में प्रतिदिन पहली घंटी में सभी स्कूली बच्चे व शिक्षक अपने-अपने स्कूल परिसर सहित वर्ग की सफाई करते हैं। वहां के लोग सड़कों पर जहां-तहां कुछ नहीं फेंकते। तिनका भी डस्टबिन में ही डालते हैं। यहां तक कि कोई बच्चा यदि च्विंगम चबाकर सड़क पर फेंक देता है तो बड़ा आदमी उसे उठाकर डस्टबिन में डाल देता है। ये है वहां की राष्ट्रीयता जिसे भारतीय जीवन में अपनाने की है आवश्यकता और अनिवार्यता।

Swachhata Abhiyan at Shahid Park, Madhepura.
Swachhata Abhiyan at Shahid Park, Madhepura.

मौके पर समाजसेवी शौकत अली सहित पतंजलि योग समिति के अध्यक्ष प्रो.नंदकिशोर, भारत स्वाभिमान के संयोजक डॉ.एनके निराला, कार्यालय प्रभारी राकेश कुमार भारती, अध्यक्षा रूपम भारती, योग शिक्षिका रूबी कुमारी, व माया जायसवाल ने भी सफाई अभियान के अंत में स्वच्छ मधेपुरा बनाने का संकल्प लिया और यह भी कहा कि स्वच्छता को अपनाना है, गंदगी को दूर भगाना है।

अंत में  इस स्वच्छता अभियान में मौजूद किरण कुमारी, धन कुमारी, निक्कू कुमारी, प्रीति कुमारी, संजू देवी, अमेरिका देवी, सुंदरी देवी, सीता देवी, ललिता देवी, सोनी देवी आदि ने एक घंटे से अधिक देर तक पसीना बहाते हुए यही कहती रही कि स्वच्छता ही देश की सेवा है।

सम्बंधित खबरें


नीतीश कैबिनेट द्वारा आईजीआईएमएस में मुफ्त इलाज के फैसले पर मधेपुरा वासियों ने दी बधाई

इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस पटना में अब मरीजों के सभी प्रकार के इलाज निशुल्क होंगे। सभी प्रकार की जांच फ्री, दवा फ्री यहां तक कि सुपर स्पेशलिटी ऑपरेशन जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट ट्रांसप्लांट आदि आता है, वह भी फ्री। इतनी फ्री सुविधाओं के बावजूद मरीज को केवल रजिस्ट्रेशन चार्ज ही लगेगा और यदि मरीज सुपर डीलक्स वार्ड में रहना चाहेंगे तो उन्हें सिर्फ बेड चार्ज लगेगा। जनहित में दिए गए इन सुविधाओं के लिए नीतीश सरकार को सालाना 60 करोड़ रुपये वहन करने होंगे।

जनहित के ऐसे कार्य के लिए मधेपुरा के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, व्यापारियों आदि ने कोटि-कोटि साधुवाद अर्पित किया है। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी एवं सीए मनीष सर्राफ ने ऐसे पावन कृत्य के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उनके कैबिनेट सदस्यों सहित मधेपुरा की माटी के लाल आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट व उपनिदेशक डॉ.मनीष मंडल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।

सम्बंधित खबरें


भारतरत्न से सम्मानित हो हरित क्रांति के जनक डॉ.एमएस स्वामीनाथन- मधेपुरी

भारत के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एवं हरित क्रांति के जनक डॉ. एमएस स्वामीनाथन का 28 सितंबर गुरुवार को चेन्नई में निधन हो गया। भूख के खिलाफ जीवन भर लड़ने वाले इस योद्धा ने “विश्व खाद्य पुरस्कार” पाने वाला दुनिया का पहला व्यक्ति बनकर भारत को गौरवान्वित ही नहीं, बल्कि विश्व भर में महिमा मंडित भी किया।

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने शोक प्रकट करते हुए कहा कि डॉ.स्वामीनाथन के जाने से भारतीय कृषि एवं कृषक वर्ग को भारी क्षति हुई है। उन्होंने दुनिया भर के विश्वविद्यालयों द्वारा हरित क्रांति के जनक को डॉक्टरेट की 84 मानद डिग्री दिए जाने, भारत सरकार द्वारा राज्यसभा सदस्य बनाए जाने के साथ-साथ पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित किए जाने पर प्रसन्नता जाहिर की। साथ ही डॉ.मधेपुरी ने भारत सरकार से मांग की है कि भारतीय कृषि एवं कृषक के लिए डॉ.स्वामीनाथन की अभूतपूर्व देन एवं क्रांतिकारी योगदान को चिरस्मरणीय बनाए रखने हेतु उन्हें मरणोपरांत ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया जाए।

सम्बंधित खबरें


हंसकर शूली को चूमने वाला भगत सिंह शहीद-ए-आज़म कहलाया- डॉ.मधेपुरी

मधेपुरा में आज शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की 117वीं जयंती समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने ‘वृंदावन’ निवास पर बच्चों के बीच मनाई। डॉ.मधेपुरी ने ज्ञानदीप निकेतन के बच्चों से कहा कि ब्रिटिश भारत में पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बंगा गांव में वर्ष 1907 के 28 सितंबर के दिन पिता सरदार किशन सिंह के घर क्रांतिवीर बालक भगत सिंह का जन्म हुआ था। किशोरवय के भगत सिंह जलियांवाला बाग कांड में जनरल डायर की क्रूरता की जानकारी पाते ही देशवासियों के अपमान का बदला लेने को मचलने लगे। भगत सिंह ने “हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी” नामक क्रांतिकारी दल का गठन किया, जिससे चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु सरीखे अन्य बहुत से क्रांतिवीर जुड़ते चले गए।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय के सिर पर लाठी लगी। जिसके बाद 17 नवंबर, 1928 को उनका देहांत हो गया। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि ने लिया था इस हत्या का बदला अंग्रेज अफसर सांडर्स की हत्या करके। और मिली तीनों को फांसी की सजा तब जबकि ये तीनों क्रांतिकारी असेंबली में बम फेंक कर भागे नहीं, बल्कि खड़े रहे।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने बच्चों सहित उनके प्राचार्य चिरामणि यादव से यही कहा की शहादत से एक दिन पहले कैदी साथियों के नाम लिखे पत्र में भगत सिंह ने हंसते हुए यही लिखा था- ‘उनके मन में देश व मानवता के लिए जितना करने की लालसा थी, वे उसका हजारवाँ हिस्सा भी नहीं कर पाए हैं………..जिंदा रहते तो शायद यह हसरत पूरी कर पाते।’

प्राचार्य चिरामणि यादव ने संक्षेप में उद्गार व्यक्त करते हुए बच्चों से कहा कि भगत सिंह यही कहा करते कि देश की आजादी के लिए बलिदान देने वालों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि साम्राज्यवादी शक्तियों के लिए मिलकर भी इंकलाब को रोकना संभव नहीं होगा। अंत में प्राचार्य सहित सभी बच्चों ने बारी-बारी से शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के तैल चित्र पर पुष्पांजलि की।

सम्बंधित खबरें