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बजट 2018: देश के विकास को गति देने वाला बजट

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को नरेन्द्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया। आमतौर पर चुनावी वर्ष में सरकारें लोकलुभावन (पर वास्तविक तौर पर अव्यावहारिक) बजट पेश करती रही हैं, लेकिन इसके उलट वर्तमान एनडीए सरकार ने देश की मजबूती को प्राथमिकता देते हुए बजट देने का नैतिक साहस दिखाया है। खास कर कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्टर आदि क्षेत्रों में कई बड़े कदम उठाए गए हैं, जो आने वाले दिनों में देश के विकास को निश्चित तौर पर गति देंगे। चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि क्या हैं बजट 2018 की बड़ी बातें।

सबसे पहले बात करते हैं कृषि की। इस बजट में किसानों को उनकी फसल के लागत मूल्य का डेढ़ गुना देने, सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, 2000 करोड़ की लागत से बनने वाले कृषि बाजार और नए ग्रामीण बाजार ‘ई-नैम’ का ऐलान किया गया है। इसके अलावे ‘ऑपरेशन ग्रीन’ के लिए 500 करोड़ रुपये, 42 मेगा फूड पार्क और जानवरों को पालने वालों को भी किसान क्रेडिट कार्ड देने की घोषणा की गई है। यही नहीं, जरूरतमंद किसानों के कर्ज के लिए 11000 करोड़ रुपये के फंड का प्रावधान भी किया गया है। निश्चित तौर पर ये योजनाएं देश में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में मोदी सरकार ने देश के 10 करोड़ परिवारों के लिए हर साल 5 लाख रुपए तक के मेडिक्लेम का ऐलान किया है। दुनिया की इस सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना से 50 करोड़ लोगों को लाभ पहुँचेगा। इसके अलावा देश भर में 5 लाख स्वास्थ्य सेंटर और हर तीन संसदीय क्षेत्र पर एक मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही गई है। साथ ही अगले वित्त वर्ष में दो करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जो देश की आम जनता के स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है, कहने की जरूरत नहीं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी वित्तमंत्री ने कई बड़े ऐलान किए। सबसे अहम यह कि उन्होंने प्री नर्सरी से लेकर 12वीं क्लास तक को समग्र रूप से देखने की बात कही, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी तौर पर विकास हो सके। आदिवासियों के लिए नवोदय विद्यालय की तर्ज पर एकलव्य स्कूलों की स्थापना की जाएगी। सरकार प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो स्कीम शुरू करेगी जिसमें 1000 बीटेक छात्र चुने जाएंगे और उन्हें आईआईटी से पीएचडी करने का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा प्लानिंग और आर्किटेक्चर स्कूल शुरू किए जाएंगे, साथ ही 18 नई आईआईटी और एनआईआईटी की स्थापना की जाएगी। मेडिकल कॉलेजों की बात हम ऊपर कह ही आए हैं।

आधारभूत संरचना की बात करें तो इस क्षेत्र में यह बजट अत्यन्त कारगर होगा। इसमें 16 नए इंटरनेशनल लेवल के एयरपोर्ट तैयार करने की बात कही गई है, जिसके बाद देश में एयरपोर्टों की संख्या 124 हो जाएगी। इसके अलावा 600 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई गई है और गांवों में 1 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि 2022 तक हर गरीब के पास अपना घर हो।

अब बात युवाओं की। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कहा करते हैं, इस देश की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। इन युवाओं को सरकार ने स्वाभाविक तौर पर अपनी प्राथमिकताओं में जगह दी है। नए वित्तीय वर्ष में 70 लाख नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 50 लाख युवाओं को नौकरी के लिए ट्रेनिंग भी सरकार ही देगी। साथ ही व्यापार शुरू करने के लिए भी केन्द्र सरकार ने मुद्रा योजना के तहत 3 लाख करोड़ रुपये ऋण देने का लक्ष्य तय किया है। यही नहीं, हर जिले में स्किल सेंटर खोले जाएंगे और 2.5 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड को बढ़ावा दिया जाएगा। ये सभी योजनाएं देश के युवाओं के लिए सीधे रोजगार का माध्यम बनेंगी।

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बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’: राष्ट्रपति कोविंद

गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एकदिवसीय यात्रा पर बिहार के राजगीर में थे। मौका था अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय व इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय धर्म धम्म सम्मेलन के उद्घाटन का और उनके साथ मौजूद थे बिहार के राज्यपाल सत्य पाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना सहित कई गणमान्य।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 21वीं सदी में भी भगवान बुद्ध के विचार हमें प्रेरित कर रहे हैं। सही मायने में बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’ है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में दुनिया की आधी से अधिक आबादी ऐसी जगहों पर रह रही है जो भगवान बुद्ध के ज्ञान से प्रभावित है और उस ज्ञान से लगातार प्रेरित हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि धर्म धम्म परंपरा यह कहती है कि किस तरह निरंतरता से खुद को बेहतर करना है। इसकी क्या जरूरत और महत्ता है। किस तरह से हमें उच्च स्तर का ज्ञान हासिल करना है। यह ज्ञान ही है जिससे राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बु्द्ध बने और महान योद्धा अशोक बन गए धम्म अशोका। बुद्ध के विचार हमें जीने के सिद्धांत की ओर प्रेरित करते हैं। ईमानदारी और पारदर्शिता की ओर हमें ले जाकर सह अस्तित्व की भावना को विकसित करते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सपना था। यह विश्वविद्यालय उनके सपनों का मूर्त रूप है। यह महावीर, बुद्ध तथा गुरुनानक की धरती है, जिन्होंने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया। उन्होंने वैश्विक समस्याओं के निवारण के लिए अंतररराष्ट्रीय रिजोल्यूशन सेंटर खोलने पर भी बल दिया।

चलते-चलते यह कहना बेहद जरूरी प्रतीत होता है कि हाल के दिनों में बिहार की बौद्धिक-सांस्कृतिक सक्रियता जिस तरह बढ़ी है, वह नीतीश कुमार जैसे विचारशील और संस्कारयुक्त अगुआ के बिना मुमकिन ना थी। ऐसी तमाम गतिविधियों के लिए वे और उनकी सरकार साधुवाद के पात्र हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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यह केवल नीतीश का नहीं, 11 करोड़ बिहारियों का सम्मान

सोमवार को जम्मू के जोरावर सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को प्रथम ‘मुफ्ती अवार्ड फॉर प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली जेएंडके पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी) की ओर से पार्टी के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद की स्मृति में दिया गया। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एएन वोहरा के हाथों मिले इस पुरस्कार को नीतीश कुमार ने वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, भारतीय मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री व नेता लॉर्ड मेघनाद देसाई, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं जेडीयू नेता संजय झा समेत कई गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में ग्रहण किया।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस पुरस्कार की बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि “मैं पूरी ईमानदारी से यह बात कह रही हूं कि राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की शुचिता के मामले में देश में आपसे बेहतर कोई नहीं जिसे इस सम्मान से नवाजा जाए।” उनकी यह टिप्पणी ना केवल नीतीश कुमार के लिए बल्कि 11 करोड़ बिहारियों के लिए सम्मान की बात है। इस टिप्पणी का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब ठीक इसी समय राज्य के एक बड़े नेता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा मिली हो और एक दलविशेष द्वारा उस सजा को ‘शहादत’ की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही हो।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में नीतीश कुमार के जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की भी याद दिलाई। उन्होंने लिखा, मुझे याद है कि आपने रेल मंत्री के रूप में घाटी के लिए पहल की थी और बारामूला तथा अनंतनाग के लिए रेल लाइन का शिलान्यास किया था। ध्यान दिला दें कि केन्द्र में वीपी सिंह सरकार के दौरान मुफ्ती मोहम्मद सईद और नीतीश कुमार ने साथ काम किया था।

बहरहाल, बिहार में न्याय के साथ विकास के अपने संकल्प को शतप्रतिशत समर्पण और तन्मयता से जमीन पर उतारने में जुटे नीतीश कुमार ने गुड गवर्नेंस का एक नया मानक स्थापित किया है। इसके साथ ही बिहार में चलाए जा रहे शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी और कन्या-सुरक्षा जैसे समाज-सुधार अभियानों ने उनके व्यक्तित्व को ‘राजनीतिक संत’ जैसा आयाम दे दिया है। आज वो निर्विवाद रूप से राजनीतिक शुचिता के शिखर और उसके पर्याय हैं। इस सम्मान के लिए उनके चयन ने बिहार की छवि को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।

नीतीश कुमार को यह सम्मान मिलना साबित करता है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिहार में आज संभावना देखी जा रही है। गठबंधन सरकार की जटिल परिस्थितियों और विपक्ष के तौर पर ठीक ‘कंट्रास्ट’ से जूझते हुए भी नीतीश कुमार का राज्य के लिए एक के बाद उपलब्धियां हासिल करना और उसे संभावना के साथ ही सराहना के योग्य बनाना उनके कद को और बढ़ा देता है। कभी जातिवाद, अपराध और भ्रष्टाचार के अंधेरे में सफर करने वाला बिहार आज भोर की किरण देख रहा है। हाल के दिनों में शराबबंदी की सफलता ने राज्यवासियों में यह आत्मविश्वास भर दिया है कि नीतीश कुमार जैसा नेतृत्वकर्ता हो तो असंभव दिखना वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। अब जरूरत बात की है कि इस माहौल को गतिमान रखा जाए और ‘पॉजिटिव एप्रोच’ के साथ सरकार, समाज और मीडिया एक साथ कदम बढ़ाए।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’… मानो खुद के लिए गा गए रफी

ओ दुनिया के रखवाले (‘बैजू बावरा’), बहारों फूल बरसाओ (‘सूरज’), खोया खोया चांद (‘काला बाजार’), मैं जिन्दगी का साथ (‘हम दोनों’), लिखे जो खत तुझे (‘कन्यादान’), ये रेशमी जुल्फें (‘दो रास्ते’), क्या हुआ तेरा वादा (‘हम किसी से कम नहीं’), ऐसे सैकड़ों गीत हैं जिन्हें आप एक बार सुन लें तो ताउम्र नहीं भूल सकते। इन गीतों को अपनी जादुई आवाज से अमर कर देने वाले मोहम्मद रफी आज अगर जीवित होते तो 93 साल के होते। जी हां, आवाज की दुनिया के इस बेताज बादशाह का आज 93वां जन्मदिन है।

मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को बंटवारे से पहले के भारत में अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। छह भाईयों में सबसे छोटे रफी को गाने की प्रेरणा एक फकीर से मिली। दरअसल उनके मोहल्ले से एक फकीर गाना गाते हुए गुजरता था। गाना था, ‘पागाह वालियों नाम जपो, मौला नाम जपो’। तब फकीर की आवाज सुन रफी उनके पीछे-पीछे चलने लगते थे। कौन जानता था कि आगे चलकर उसी रफी की आवाज के पीछे पीढ़ियां-दर-पीढ़ियां चलेंगी। खैर, समय बीता। कुछ दिनों बाद रफी पिता के साथ लाहौर चले आए, जहां उनके पिता ने नाई की दुकान खोल ली। पर जगह बदलने पर भी गाने के प्रति रफी का समर्पण कम नहीं हुआ। होता भी कैसे, अभी तो उन्हें सिनेमाई गीतों का नया इतिहास लिखने बंबई (अब मुंबई) जाना था। बहरहाल, लाहौर में उन्होंने संगीत की शिक्षा उस्ताद अब्दुल वाहिद खान से ली और साथ ही गुलाम अली खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत भी सीखा।

मोहम्मद रफी को बंबई तक पहुंचाने में उनके बड़े भाई के दोस्त अब्दुल हमीद का बड़ा हाथ बताया जाता है। उन्होंने ही रफी की काबिलियत को पहचाना और उनके परिवार को समझाया कि उन्हें बंबई जाने दे। फिल्मों के लिए रफी का पहला गाना ‘सोनिये नी हिरीये नी’ था, जो उन्होंने श्याम सुंदर के संगीत निर्देशन में पार्श्वगायिका जीनत बेगम के साथ एक पंजाबी फिल्म के लिए गाया था। हिन्दी में उनका पहला गाना था ‘हिन्दुस्तान के हम हैं’। साल था 1944, फिल्म थी ‘पहले आप’ और संगीतकार थे नौशाद। आगे नौशाद के ही संगीत निर्देशन में आई फिल्म ‘दुलारी’ (1949) में गाए अपने गीत ‘सुहानी रात ढल चुकी’ से वे सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंच गए और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अपने तीन दशक के करियर में मोहम्मद रफी ने अनगिनत हिट गाने दिए। कम लोग जानते हैं कि लगभग 700 फिल्मों में 26,000 से ज्यादा गीत गाने वाले रफी ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाना गाने के अलावा अंग्रेजी और अन्य यूरोपीय भाषाओं में भी गाने गाए थे। रोमांटिक और इमोशनल गानों के साथ ही कव्वाली, सूफी और भक्ति गीतों में भी उनकी कोई सानी नहीं थी। रफी जिस स्केल पर आराम से गाते थे, उस पर आज के कई गायकों को चीखना पड़ेगा। अपनी लाजवाब गायकी के लिए उन्होंने छह बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीता और 1965 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा। सच तो यह है कि गीतों की ही नहीं, आवाज की परिभाषा भी रफी के बिना पूरी नहीं होगी। 31 जुलाई 1980 को हमें छोड़कर चले जाने वाले रफी ने 1970 में आई फिल्म ‘पगला कहीं का’ में ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ गीत जैसे खुद के लिए गाया था। उन्हें भुलाना सचमुच नामुमकिन है। उन्हें हमारा नमन।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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बिहार में ट्विटर वार

बिहार में ट्विटर वार छिड़ा है। एक ओर हैं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तो दूसरी ओर हैं आमतौर पर सोशल मीडिया से दूर रहने वाले जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। हां, इन दोनों योद्धाओं में मर्यादा का फर्क स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है। नीतीश ने जहां अपने ट्वीट में बड़ी संजीदगी से लालू पर निशाना साधा था, वहीं लालू ने अपने ट्वीट में बिना नाम लिए नीतीश को ‘मेंडेट रेपिस्ट’ और ‘जनादेश का हत्यारा’ तक कह डाला।

बुधवार को अपने पहले ट्वीट में लालू ने लिखा, क्या आप दिन-दहाड़े जनादेश का निर्मम बलात्कार करने वाले मैंडेट रेपिस्ट का मानसिक उपचार करने वाले किसी देशभक्त मनोचिकित्सक को जानते हैं? इसके बाद लालू ने फिर ट्वीट किया और लिखा, ‘क्या आप ‘पेट के दांत’ ठीक करने वाले किसी डेंटिस्ट को जानते हैं? बिहार में जनादेश का एक मर्डरर है, जिसके पेट में दांत है। उसने सभी नेताओं और पार्टियों को ही नहीं बल्कि करोड़ों गरीब-गुरबों को भी अपने विषदंत से काटा है।’

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में लगातार जेडीयू और आरजेडी की तरफ से एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। बता दें कि इससे पहले बुधवार को ही नीतीश कुमार ने भी ट्वीट के जरिए लालू प्रसाद यादव को उनकी बेनामी संपत्ति मामले में घेरने की कोशिश की थी। नीतीश ने बिना किसी का नाम लिए ट्वीट में लिखा था, ‘जान की चिंता, माल की चिंता सबसे बड़ी देशभक्ति है!’

इससे पहले मंगलवार को भी नीतीश ने लालू की सुरक्षा में कटौती को लेकर उपजे विवाद पर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, ‘राज्य सरकार द्वारा ‘Z’ Plus और SSG की मिली हुई सुरक्षा के बावजूद केंद्र सरकार से NSG और CRPF के सैकड़ों सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता के जरिए लोगों पर रौब गांठने की मानसिकता, साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है!’

स्वयं मुख्यमंत्री व केन्द्रीय मंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ट्वीट का जवाब देने का पूरा हक था, उन्हें तंज ही कसना था तो भी कोई बात ना थी, लेकिन मर्यादा की सीमा का जिस तरह उन्होंने अतिक्रमण किया, वो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं। सोचने की बात तो यह कि स्वयं ऐसी भाषा का प्रयोग करने वाला पिता आखिर अपने उस बेटे को क्या और कैसे समझा पाता होगा जो स्वास्थ्य मंत्री जैसे पद पर रहे होने के बावजूद अपने राज्य के उपमुख्यमंत्री को घर में घुसकर मारने और अपने देश के प्रधानमंत्री को खाल उघाड़ लेने की धमकी देता चलता है?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए दीप

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सभी लोकसभा और विधानसभा में संगठन को करें मजबूत: नीतीश

रविवार को जेडीयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास, 1 अणे मार्ग, पटना में प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय महासचिव सह राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह समेत पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, जिलाध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्य सम्मिलित हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने संगठन की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि हमें सभी 40 लोकसभा और 243 विधानसभा में अपने संगठन को मजबूत बनाना है। इसमें कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए। हम मजबूत रहेंगे तभी अपने साथी दल का भी सहयोग कर सकते हैं। नीतीश ने सक्रिय रहने के लिए निरंतर बैठक व संवाद को जरूरी बताया और जोर देकर कहा कि जमीनी हकीकत को जाने बिना कुछ नहीं किया जा सकता। पार्टी के स्वाभाव व संरचना को समझकर ही अपनी कारगर भूमिका निभाई जा सकती है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी, दहेजबंदी, 18 वर्ष से कम के दिव्यांगो को पेंशन जैसे कार्य के विचार उनके मन में लोगों के बीच लगातार रहते हुए ही आए।

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा रास्ता औरों से अलग है, वो समाज-सुधार का रास्ता है, इसलिए कठिन है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के विरुद्ध मानव-श्रृंखला में जो हमारे साथ खड़े थे, आज वो भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन चाहे जिस भी गठबंधन में क्यों ना रहे हों, हमने अपने विचारों से अब तक ना समझौता किया है, ना आगे करेंगे। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में पार्टी चुनाव चिह्न को लेकर हुए विवाद को अनावश्यक बताते हुए कहा कि पार्टी मूल रूप से एकजुट है।

सात निश्चय कार्यक्रम की चर्चा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसे केन्द्र ने भी एडॉप्ट किया है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि ऐसी कितनी ही चीजें हैं जो आगे भी एडॉप्ट की जाएंगी। नीतीश ने दहेजप्रथा एवं बालविवाह के विरोध में आगामी 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव-श्रृंखला की सफलता के लिए सबका आह्वान भी किया।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में सरकारी स्तर पर शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाह का विरोध जैसे जो कार्यक्रम किए जा रहे हैं, पार्टी ने ना केवल उसका पूर्ण अनुसरण किया है, बल्कि हर स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं व आमलोगों तक विचारों के इस अमृत को पहुंचाने का काम भी किया है। हाल में सम्पन्न हुए जिला सम्मेलन में महिलाओं की अच्छी उपस्थिति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की पहल रंग ला रही है। महिलाएं, जो कल तक खिड़कियों से झांका करती थीं, हमारे नेता ने उनके लिए दरवाजा खोलने का काम किया है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्षी दलों की भूमिका पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे वैचारिक दिवालियापन के शिकार हैं। जल्द ही वो समय आएगा जब जेडीयू द्वारा उठाए गए मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में होंगे।

दल के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह ने आगामी कार्यक्रमों के लिए पार्टी का रोडमैप और कैलेंडर प्रस्तुत किया और संगठन द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षात्मक चर्चा की। उन्होंने जानकारी दी कि पार्टी ने दो लाख सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें डेढ़ लाख सक्रिय सदस्य बनाए जा चुके हैं। राज्य, जिला, प्रखंड एवं बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के सशक्तिकरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी, लोहिया, जेपी जैसे हमारे नायकों ने जो सपना देखा था उसे हमारे नेता नीतीश कुमार पूरा कर रहे हैं। लोकशाही को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। चाहे जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम हो, चाहे राइट टू पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल एक्ट हो, चाहे सात निश्चय कार्यक्रम, उन्होंने कई प्रतिमान स्थापित किए हैं, जिनसे हमारे हर स्तर के कार्यकर्ताओं को ना केवल वाकिफ होना चाहिए बल्कि आमलोगों को भी इससे अवगत कराना चाहिए।

बैठक में 1 दिसंबर से पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी घोषणा की गई जिसके तहत दस हजार मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जिनका कार्य पार्टी को ग्रासरूट स्तर के कार्यकर्ताओं को जागरुक कर सशक्त करना होगा। राज्य कार्यकारिणी की इस बैठक में विभिन्न जिलों व  प्रकोष्ठों के अध्यक्ष व कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने भी अपनी बातें रखीं और नेतृत्व ने उनके सुझावों को अत्यंत गंभीरता से सुना।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मिस वर्ल्ड का जवाब उससे भी सुन्दर !

1966 में रीता फारिया… भारत ही नहीं, सम्पूर्ण एशिया से बनने वाली पहली मिस वर्ल्ड… फिर 28 साल के इंतजार के बाद 1994 में ऐश्वर्या राय… इसके बाद अगले छह सालों में तीन मिस वर्ल्ड – 1997 में डायना हेडन, 1999 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा… फिर 17 साल का इंतजार और अब मानुषी छिल्लर… मिस वर्ल्ड 2017… 118 देशों की सुन्दरियों में सर्वश्रेष्ठ..! भारत की बेटी ने एक बार फिर पूरी दुनिया में अपनी सुन्दरता – सिर्फ चेहरे की नहीं, सम्पूर्ण व्यक्तित्व की सुन्दरता – का लोहा मनवा लिया। चीन के सनाया में आयोजित की गई मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली मिस इंडिया मानुषी छिल्लर को मिस वर्ल्ड 2017 घोषित किया गया। इस प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर मिस मेक्सिको रहीं जबकि तीसरे नंबर पर मिस इंग्लैंड।

20 वर्षीया मानुषी की जीत की सबसे अहम बात यह रही कि वो ‘हेड टू हेड चैलेंज’ और ‘ब्यूटी विद पर्पस सेगमेंट’ दोनों में अव्वल रहीं। खास तौर पर अंतिम सवाल के जवाब से तो उन्होंने न केवल ज्यूरी बल्कि पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। मानुषी से पूछा गया अंतिम सवाल था कि दुनिया में किस पेशे की सेलरी सबसे ज़्यादा होनी चाहिए और क्यों? मानुषी ने इसका बेहद खूबसूरत जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। इसलिए मैं कह सकती हूं कि मां होने की जॉब सबसे बेहतरीन है। बात केवल पैसे की नहीं है, बल्कि प्यार और सम्मान के लिहाज से, कोई भी मां सबसे ज्यादा वेतन की हकदार होती है।”

67वीं मिस वर्ल्ड मानुषी के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं। वो मेडिकल की स्टूडेंट हैं और कार्डिएक सर्जन बनना चाहती है। उन्हें पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स पसंद हैं। इसके अलावा मानुषी ट्रेंड इंडियन क्लासिकल डांसर हैं और स्केचिंग और पेंटिंग भी बनाती हैं। यही नहीं, मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जाने से पहले मानुषी समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने महिलाओं के पीरियड के दौरान हाइजीन से संबंधित एक कैंपेन में करीब 5000 महिलाओं को जागरूक किया है।

मिस वर्ल्ड बनना मानुषी के बचपन का सपना था। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया। अब भारत की इस बेटी को अपने सपनों को विस्तार देना है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से उन्होंने जैसी उम्मीद बंधाई है, उसे देख कोई भी लक्ष्य उनके लिए असंभव नहीं लगता। उज्जवल भविष्य के निमित्त उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ढेर सारी शुभकामनाएं!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश की दो टूक, राजद पार्टी नहीं, लालू की निजी संपत्ति

सोमवार को पटना में लोकसंवाद कार्यक्रम में भाग लेने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के लगातार दसवीं बार राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष चुने जाने पर कहा कि राजद पार्टी नहीं, बल्कि उनकी (लालू की) निजी संपत्ति है।  उन्होंने आगे कहा, “राजद में पिछले साल ही चुनाव हुआ था और इस बार भी हो रहा है। वहां किस तरह का संविधान है, ये उनका अंदरूनी मामला है। उन्हें मालूम है कि किस तरह मीडिया में जगह बनाई जाती है। वे आजकल मीडिया के ‘पोस्टर ब्वाय’ बने हुए हैं।”

लालू व उनकी पार्टी के संबंध में पूछे जाने पर नीतीश ने बड़ी बेबाकी से कहा, “उनको विकास से कोई लेना-देना नहीं है। हमलोगों का स्वाभाव नहीं है कि आरोप-प्रत्यारोप में शामिल हों। अगर विकास के मुद्दे पर ‘डिबेट’ करेंगे तो उसमें हम भाग लेंगे।” पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के संबंध में उन्होंने कहा, “वे तो अभी बच्चे हैं, उनका क्या जवाब दें।”

आरक्षण के मुद्दे पर नीतीश ने बड़े स्पष्ट तौर पर कहा कि इस संबंध में उनका नजरिया स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि वे पाटीदार के ही नहीं, जाट और मराठा आरक्षण के भी पक्षधर हैं। साथ ही उन्होंने कहा कहा कि आज आरक्षण के लिए ऐसे समुदायों को भी क्यों मांग करनी पड़ रही है, यह भी देखना चाहिए।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भी भारत का अंग बताते हुए नीतीश ने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। वहीं, गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को गुजरात में कोई खतरा नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि क्या देश में एक साथ सभी प्रकार के चुनाव होने चाहिए, उन्होंने कहा, “मैं इससे सहमत हूं। वर्ष 1967 तक तो चुनाव एक साथ ही हो रहे थे। 1967 के बाद ‘मिडटर्म पोल’ से यह स्थिति बदली है। पांच वर्ष के लिए एक साथ चुनाव हो, तो यह बहुत अच्छा रहेगा। इससे पूरे समय काम करने का मौका मिलेगा।” उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इसके लिए संविधान में कुछ बदलाव करने होंगे और इस मुद्दे पर विमर्श की भी आवश्यकता है। यह तुरंत संभव नहीं है, इसमें वक्त लगेगा।

नीतीश ने एक बार फिर बाल विवाह और दहेज प्रथा विरोध की चर्चा करते हुए कहा कि इसके साथ ही शराबबंदी के लिए भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में माहौल बदला है। उन्होंने लोगों से समाजहित में कार्य करने की अपील भी की।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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‘बिहार से होगी अगली हरित क्रांति’: राष्ट्रपति

गुरुवार को बिहार में तीसरे कृषि रोडमैप 2017-2022 का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रोडमैप का शुभारंभ किया। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि चंपारण शताब्दी वर्ष में कृषि रोडमैप का लोकार्पण बेहतर कदम है। इससे किसानों को फायदा होगा। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि आज से नए युग की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देश की हर थाली में एक बिहारी व्यंजन पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।

कृषि रोडमैप का शुभारंभ करने पटना पहुंचे राष्ट्रपति कोविंद का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं महामहिम और राष्ट्रपति बनने के बाद वे पहली बार बिहार आए हैं। इसलिए विशेष तौर पर आपका स्वागत है। बिहार का राज्यपाल रहते राष्ट्रपति बनना हमारे लिए गौरव की बात है।

उधर बिहार आकर राष्ट्रपति कोविंद खासे भावुक दिखे। उन्होंने कहा, मैं जन्म से तो नहीं लेकिन कर्म से बिहारी हूं। बिहारीपन ही मेरी पहचान है, जिस पर मुझे गर्व है। बिहार का राज्यपाल रहते हुए मुझे जो प्यार और स्नेह मिला वह जीवन भर के लिए यादगार क्षण बनकर दिल में रहेगा। राजभवन से लेकर राष्ट्रपति भवन का सफर मेरे जीवन के यादगार वर्ष रहेंगे।

कृषि के क्षेत्र में बिहार की संभावनाओं पर बात करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि बिहार के किसान मेहनती हैं और बिहार में कृषि की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन प्रणाली बेहतर तरीके से लागू हो जाए तो अगली हरित क्रांति बिहार से हो सकती है। कृषि रोड मैप में शामिल जैविक कॉरिडोर से बड़ा बदलाव आ सकता है। कृषि रोड मैप से बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बिहार की छवि को और बेहतर करने में सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीसरे कृषि रोड मैप के संबंध में बताया कि इसके तहत पांच वर्ष में 12 विभागों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं पर 1.54 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस रोड मैप का लक्ष्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना है। इसके लिए हर क्षेत्र में काम किया गया है। सिंचाई को बेहतर बनाने के लिए सिंचाई विभाग को अंदरुनी तौर पर दो हिस्सो में बांटा गया है। एक हिस्सा बाढ़ नियंत्रण का काम देखेगा और दूसरा हिस्सा सिंचाई परियोजनाओं को देखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सहकारी समिति बनायी जाएगी, जिसमें किसानों के आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा। कार्यक्रम को राज्यपाल सत्यपाल मलिक, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री प्रेम कुमार आदि ने भी संबोधित किया।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब तांत्रिक के भरोसे आरजेडी !

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आए दिन चौंकाने वाले काम करते रहते हैं और कभी-कभी कुछ ज्यादा ही चौंका देते हैं। जिन दिनों वे सत्ता के शिखर पर थे, उन्होंने लालू-चालीसा रचने वाले को उच्च सदन भेज कर ‘दरबारी’ राजनीति का नया संस्करण शुरू किया था और आज जब बिहार की सबसे बड़ी पार्टी (विधायकों की संख्या के लिहाज से) के मुखिया होकर भी वे परेशान हैं, उन्होंने ‘तंत्र’ राजनीति शुरू करने की ठान ली है। जी हां, लालू ने लगातार पीछा कर रहीं पारिवारिक व राजनीतिक परेशानियों से लड़ने के लिए एक तांत्रिक बाबा को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये बाबा कौन हैं और इनमें ऐसी क्या खूबी है कि लालू ने इन्हें प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाज दिया है? तो बता दें कि शंकर चरण त्रिपाठी नाम के ये बाबा लखनऊ के रहने वाले हैं, पेशे से सेल्स टैक्स अधिकारी रहे हैं और तंत्र का भी ज्ञान रखते हैं। बताया जाता है कि पिछले काफी दिनों से लालू इनसे काफी प्रभावित रहे हैं और इन्हीं के कहने पर लालू ने रंगीन कुर्ता पहनना शुरू किया था। रंगीन कुर्ता पहनना शुरू करने के बाद लालू के दिन सचमुच फिरे और बिहार विधान सभा में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

पंडित शंकर चरण त्रिपाठी लोगों की कुंडली देखते हैं उनकी समस्याओं का समाधान मिनट भर में बता देते हैं। समाधान में छोटे-मोटे टोटके होते हैं। मसलन, किसे-कब जल अर्पित करें? किस रंग से प्यार करें और किस रंग से दूर रहें? कब-किस पशु-पक्षी को भोजन करा दें? कैसे वास्तु दोष दूर कर लें? उदाहरण के तौर पर हाल ही में लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपने सरकारी बंगले का दरवाजा पीछे की ओर कराया है।

बहरहाल, लालू के इस कदम पर जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरजेडी सुप्रीमो राजनीति में भी अपने लिए   आरोपी साथी ढूंढ रहे हैं। जिस तरह उन्होंने आरोपों का लबादा ओढ़ कर अपनी राजनीति की उसी तरह अपनी पार्टी के लिए भी आरोपी और दोषी पदाधिकारी ढूंढ कर ला रहे हैं।  उन्होंने कहा कि लालू ने जिन शंकर चरण त्रिपाठी को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है, उन पर बलात्कार का  आरोप है। यह आरोप किसी ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी बहू ने लगाया है। लालू प्रसाद प्रवक्ता बनाने से पहले अपने इस तांत्रिक साथी के बारे में विस्तार से जानकारी तो ले लेते।

बकौल सिंह इन बाबा के बड़े-बड़े कारनामे हैं। लखनऊ में इनकी बड़ी बहू ने इन पर बलात्कार का आरोप लगाया है। यही नहीं, इनके लड़के पर भी उनकी बहू ने प्रताडऩा का केस किया हुआ है। अब लालू प्रसाद ऐसे लोगों को अपनी पार्टी का सिरमौर बना रहे हैं जिनसे बहु-बेटियां डरेंगी। लालू प्रसाद अपने कुनबे में एक से बढ़ कर एक नवरत्न रखे हुए हैं। इन नवरत्नों में शहाबुद्दीन, राजबल्लभ यादव और न जाने कितने माफिया शामिल हैं। अब उस फेहरिस्त में शंकर चरण त्रिपाठी चार चांद लगाएंगे। वहीं, बिहार भजपा के नेता व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का कहना है कि लालू तंत्र-मंत्र के सहारे सत्ता वापसी चाह रहे हैं लेकिन अब यह नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि लालू त्रिपाठी को प्रवक्ता क्यों बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बना देते तो सही रहता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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