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सलाम साइना

बैडमिंटन में भारत को नई ऊँचाईयां देने वाली साइना नेहवाल ने एक बार फिर पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। बीते रविवार को शानदार खेल दिखाते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज अपने नाम कर लिया। सिडनी में खेले गए फाइनल मैच में साइना ने चीन की सुन यू को 11-21, 21-14, 21-19 से हराया। बता दें कि साइना ने इस खिताब पर दूसरी बार कब्जा किया है और ऐसा करने वाली वो पहली खिलाड़ी हैं। रियो ओलंपिक से पहले हासिल की गई ये जीत उनके लिए निश्चित रूप से मोरल बूस्टर का काम करेगी।

7.5 लाख डॉलर की इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला अत्यंत रोमांचक रहा। तमाम भारतीय दर्शक उस वक्त बेहद निराश हुए जब साइना ने अपना पहला सेट गंवा दिया था। लेकिन जबरदस्त वापसी करते हुए उन्होंने दूसरा सेट अपने नाम कर लिया। हालांकि, तीसरे सेट में सुन यू ने उन्हें कड़ी टक्कर दी लेकिन साइना ने अंतत: खिताब अपने नाम कर लिया। सुन यू के खिलाफ साइना का पलड़ा वैसे भी भारी रहा है। इससे पहले खेले गए छह मुकाबलों में साइना को पाँच बार जीत मिली थी। पिछली बार साइना ने चाइना ओपन में सुन यू के खिलाफ जीत हासिल की थी।

साइना की ये जीत महज एक खिलाड़ी की जीत नहीं है। उनकी ये जीत हरियाणा के उस समाज को चुनौती है जो महिलाओं को पुरुषों से कम समझता है। ये हरियाणा ही है जहाँ सबसे ज्यादा कन्या भ्रूण हत्यायें होती हैं। यहीं के एक जाट परिवार में जब साइना का जन्म हुआ था तो उनकी दादी ने अपनी पोती का चेहरा देखने से इंकार कर दिया था। कई महीनों तक उन्होंने साइना से खुद को दूर रखा। लेकिन, साइना के माता-पिता ने उन्हें हमेशा अपनी शक्ति समझा। बैडमिंटन खिलाड़ी माता-पिता ने शुरू से ही साइना को बैडमिंटन खेलने के लिए प्रेरित किया। साइना के साथ उन्होंने भी जी-तोड़ मेहनत की और एक दिन वो आया जब साइना विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में शीर्ष स्थान तक पहुँचीं।

ये साइना ही थीं जिन्होंने बैडमिंटन में चीनी खिलाड़ियों के वर्चस्व को खत्म कर भारतीय चुनौती को जिंदा किया। ओलंपिक खेलों में महिला एकल क्वार्टर फाइनल तक पहुंच कर कांस्य पदक जीतने वाली वो देश की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। अपनी बेजोड़ उपलब्धियों के कारण 26 वर्षीया साइना ‘पद्मभूषण’ और ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित हो चुकी हैं।

साइना ने जितनी मेहनत अपने इस मुकाम को हासिल करने के लिए की है, उससे ज्यादा त्याग उनके माता-पिता ने उन्हें इस मंजिल तक पहुंचाने में किया है। उन्होंने जाट समुदाय की बेटियों के कमतर होने की बात को गलत साबित करके दिखाया है। आज साइना की दादी को भी उन पर गर्व है। देश का गुरूर बन चुकी इस बेटी को दिल से सलाम।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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राष्ट्रपति पद के लिए खुलकर हिलेरी के समर्थन में आए ओबामा

हिलेरी क्लिंटन की अमेरिका की महिला राष्ट्रपति बनने की सम्भावना को उस वक्त पर लग गए जब मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा खुलकर उनके पक्ष में आ गए। अमेरिका में राष्ट्पति पद के लिए होने जा रहे चुनाव में ये बड़ा मोड़ बीते गुरुवार को आया। ओबामा ने ट्विटर पर शेयर किए गए एक विडियो संदेश में कहा कि “मैं उनके साथ हूँ और मैं उत्साहित हूँ। मैं उनके साथ अभियान में जुड़ना चाहता हूँ।” बता दें कि ओबामा ने अपने समर्थन का ऐलान हिलेरी क्लिंटन के डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनने के लिए जरूरी जादुई आँकड़े को पार करने के ठीक बाद किया है। अपने संदेश में उन्होंने हिलेरी को राष्ट्रपति की भूमिका के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताया है। सबसे बड़ी बात यह कि हिलेरी के लिए ओबामा का दिया गया संदेश कहीं से भी ‘राजनीति’ से प्रेरित नहीं लगता, इसमें हिलेरी के प्रति उनकी खुशी साफ तौर पर देखी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी हासिल करने के लिए महीनों चले प्राइमरी चुनावों के दौरान ओबामा ने चुप्पी साधे रखी थी। सम्भवत: इसकी एक वजह डेमोक्रेटिक पार्टी से ही उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल बर्नी सैंडर्स थे। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि ओबामा ने हिलेरी को समर्थन की आधिकारिक घोषणा सैंडर्स से मुलाकात के बाद की। ओबामा से मुलाकात के बाद सैंडर्स ने भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को हराने के लिए वे अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी के साथ मिलकर काम करेंगे। हिलेरी के ‘व्हाइट हाउस’ पहुँचने की संभावनाओं के लिहाज से ये एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है।

उधर रिपब्लिकन पार्टी के सम्भावित उम्मीदवार और अपने बड़बोले और भड़काऊ बयानों व भाषणों से चर्चा में आए धनकुबेर डोनाल्ड ट्रंप ओबामा के इस कदम को पचा नहीं पाए। उन्होंने हिलेरी के लिए अमर्यादित शब्द ‘Crooked’  (कुटिल) का प्रयोग करते हुए तुरंत ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी कि “Obama just endorsed Crooked Hillary. He wants four more years of Obama – but nobody else does!” (ओबामा ने अभी-अभी कुटिल हिलेरी का समर्थन किया है। उन्हें अपने लिए चार साल और चाहिए, लेकिन कोई और ऐसा नहीं चाहता)। एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा – “Crooked Hillary Clinton will be a disaster on jobs, the economy, military, guns and just about all else. Obama plus!” (कुटिल हिलेरी क्लिंटन नौकरियों, अर्थव्यवस्था, व्यापार, स्वास्थ्य, सैन्य, बंदूकों और अन्य सभी चीजों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होंगी और साथ होंगे ओबामा)।

इसमे कोई दो राय नहीं कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘खास’ अंदाज और ‘आक्रामक’ बयानों से कम ही समय में अपने लिए अच्छा-खासा समर्थन जुटाया है लेकिन हिलेरी की उम्मीदवारी ‘स्पष्ट’ हो जाने के बाद ट्रंप का ‘ग्राफ’ गिरना शुरू हो गया है। उनके उपरोक्त ट्वीट में इससे उपजी उनकी ‘झुंझलाहट’ स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। उधर ओबामा और सैंडर्स के साथ खड़े हो जाने के बाद हिलेरी ‘इतिहास’ रचने के बहुत करीब दिख रही हैं। बहरहाल, भविष्य के गर्भ में क्या है, ये तो हम नवंबर में ही जान पाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सिब्बल, वैंकेया, अमर, ऑस्कर और एमजे अकबर राज्य सभा पहुँचे

आज सात राज्यों में राज्य सभा की 27 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा के 11, सपा के 7, कांग्रेस के 6, बसपा के 2 और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की। यूपी में तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जीत हासिल की। उनकी जीत की राह बसपा के समर्थन से आसान हुई। सिब्बल के अलावे आज संसद के उच्च सदन पहुँचने वाले अन्य प्रमुख उम्मीदवार हैं – राजस्थान से केन्द्रीय मंत्री वैंकेया नायडू, यूपी से सपा के अमर सिंह और बेनी प्रसाद वर्मा तथा बसपा के सतीश चंद्र मिश्र, मध्य प्रदेश से भाजपा के एमजे अकबर, झारखंड से केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, हरियाणा से केन्द्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह, कर्नाटक से केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण तथा कांग्रेस उम्मीदवार ऑस्कर फर्नांडीस और जयराम रमेश एवं उत्तराखंड से कांग्रेस के प्रदीप टम्टा।

कांग्रेस की निगाह यूपी पर टिकी हुई थी। भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा के मैदान में आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिंब्बल की लड़ाई मुश्किल हो गई थी। पर मायावती के समर्थन से सिब्बल ने ये मुश्किल लड़ाई जीत ली। प्रीति महापात्रा की हार से भाजपा को यहाँ झटका लगा। बता दें कि कांग्रेस के सिब्बल के अतिरिक्त यूपी से सत्तारूढ़ सपा के सभी सात उम्मीदवार तथा बसपा के दो और भाजपा के एक उम्मीदवार ने जीत हासिल की।

प्रीति महापात्रा को लेकर भाजपा को यूपी में जहाँ मुँह की खानी पड़ी, वहीं हरियाणा और झारखंड में वो उलटफेर करने में कामयाब रही। हरियाणा में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी व जी टीवी के संस्थापक सुभाष चन्द्रा ने जीत हासिल की। इन्होंने प्रसिद्ध अधिवक्ता तथा कांग्रेस और आईएनएलडी समर्थित उम्मीदवार आरके आनंद को हराया। उधर झारखंड में भाजपा ने दोनों सीटें जीत लीं। यहाँ भाजपा के पहले उम्मीदवार मुख्तार अब्बास नकवी तो आसानी से जीते ही, इसके दूसरे उम्मीदवार महेश पोद्दार ने भी जेएमएम के बसंत सोरेन को हरा दिया। जबकि बसंत सोरेन को कांग्रेस का समर्थन भी हासिल था।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद की सुरक्षा में जुटा है पाक..!

पाकिस्तान की कथनी-करनी में फर्क एक बार फिर सामने आया है। अपने कूटनीतिक बयानों में वो चाहे लाख आतंक के खिलाफ होने की बात करे लेकिन वास्तव में वो आतंकियों को ना केवल पनाह देता है बल्कि उनकी ‘सुविधा’ और ‘सुरक्षा’ का ख्याल ऐसे रखता है जैसे कोई देश अपने विशिष्टतम नागरिक का रखा करता है। जी हाँ, अनैतिकता की सारी हदें पार करते हुए पाकिस्तान ने लश्कर ए तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद पर नकेल कसने की बजाय उसकी सुरक्षा बढ़ा दी है।

भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले हाफिज सईद को पाकिस्तान में सुरक्षा पहले भी हासिल थी लेकिन अब उसके सुरक्षा गार्डों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और उसके घर से 300 मीटर दूर चार बैरीकेड लगाए गए हैं। लाहौर के जौहर टाउन के ई ब्लॉक स्थित उसके घर में अब 48 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं जो 16-16 की संख्या में तीन पालियों में काम करते हैं। सरकारी सुरक्षा के अतिरिक्त जमात उद दावा के हथियारबंद सदस्य भी सईद की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सईद से उसकी गतिविधियों को भी सीमित करने को कहा गया है। यही नहीं, सईद के साले अब्दुल रहमान मक्की की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

बता दें कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड सईद ने हाल ही में भारत पर एटमी हमले की धमकी दी थी। स्वाभाविक तौर पर इसके बाद भारत में तीव्र प्रतिक्रिया होनी थी। पर ऐसी नापाक हरकत के बाद जिस कुख्यात आतंकी को रौंद देना चाहिए था उसे पाक ने अब पलकों पर बिठा लिया है। हथेली पर तो वो पहले से था ही।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और भारत समेत कई देशों के प्रतिबंध के बावजूद पाकिस्तान सईद पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2008 में जमात को आतंकी संगठन और सईद को मोस्ट वांटेड आतंकी घोषित किया था, अमेरिका ने उसके सिर पर दस लाख डॉलर का इनाम रखा है और भारत तो सईद को सौंपने की मांग करता ही रहा है। इसके बावजूद सईद ना केवल पाकिस्तान में खुलेआम सभाएं करता है बल्कि भारत और अमेरिका को धमकियां देने से भी बाज नहीं आता। काश, बारूद की ढेर पर बैठे पाक को कोई समझा पाए कि वह लगातार ‘आग’ से खेल रहा है, जबकि उसकी ‘विनाशलीला’ के लिए बस एक ‘चिंगारी’ ही काफी है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव का इस्तीफा, अब जाएंगे जेल..?

बिहार बोर्ड पर रिजल्ट घोटाले की कालिख लगने के बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शिक्षा मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार ने लालकेश्वर प्रसाद को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था। यही नहीं, अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है। उधर बोर्ड के सचिव हरिहर नाथ झा ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर बिहार बोर्ड के नए अध्यक्ष और अनूप सिन्हा नए सचिव हो सकते हैं।

बता दें कि पटना के एसएसपी मनु महाराज की अगुआई में एसआईटी की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लालकेश्वर प्रसाद के निजी सचिव सहित सात लोगों को हिरासत में लिया और अब सबसे पूछताछ कर रही है। हिरासत में लिए गए लोगों में हाजीपुर के जीए इंटर कॉलेज की केन्द्राधीक्षक शैल कुमारी, कॉलेज के हेडक्लर्क, चपरासी और पटना के राजेन्द्र नगर ब्वायज हाईस्कूल के प्राचार्य शामिल हैं। बता दें कि जीए इंटर कॉलेज में ही विशुनराय कॉलेज के छात्रों की परीक्षा ली गई थी और कॉपियों का मूल्यांकन राजेन्द्र नगर ब्वायज हाईस्कूल में किया गया था।

चर्चा का केन्द्र बन चुके टॉपर्स घोटाले में एक नया मोड़ उस वक्त आया जब राजेन्द्र नगर ब्वायज हाईस्कूल के प्राचार्य सह मूल्यांकन केन्द्र के निदेशक विशेश्वर यादव ने यह खुलासा किया कि विशुनराय कॉलेज की कॉपियों का बंडल टूटे सील में मिला था, जबकि अन्य जिलों की कॉपियां सुरक्षित मिली थीं। प्रारम्भिक जाँच में इस बात के स्पष्ट सबूत मिले हैं कि अयोग्य छात्रों की कॉपियां बदलकर उन्हें टॉपर बना दिया गया।

बहरहाल, पुलिस ने लालकेश्वर प्रसाद के घर पर छापेमारी भी की। इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन के सख्त रवैये को देखते हुए उनकी या किसी भी आरोपी के बचने की सम्भावना नगण्य है। अध्यक्ष और सचिव के साथ ही बोर्ड के दूसरे अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय है। जिस तरह बिहार को शर्मसार करने वाले इस घोटाले में बोर्ड अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ रही है, उसे देखते हुए इस बात की प्रबल सम्भावना है कि बोर्ड की पूरी टीम ही बदल दी जाय।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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अहम पदों पर ओबीसी आरक्षण हटाने की जल्दी में क्यों केन्द्र सरकार?

केन्द्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ओबीसी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नौकरी के लिए मिलने वाले आरक्षण के लाभ को समाप्त कर दिया है। अब इन पदों के लिए नौकरी पाने की इच्छा रखने वालों को सामान्य वर्ग के साथ कदमताल करना पड़ेगा। केन्द्र सरकार ने अचानक लिए इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है।

बता दें कि इस फैसले से पहले प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित था लेकिन यूजीसी द्वारा देश के सभी 40 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में भेजे गए नोटिस के मुताबिक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर इस वर्ग को मिलने वाला आरक्षण तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। अब इस वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ केवल असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए मिलेगा। जबकि एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) को पूर्व की भँति इन तीनों पदों पर आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा।

ओबीसी को इन पदों पर आरक्षण मिलना चाहिए या नहीं या फिर आरक्षण सही है या गलत, यहाँ ये मुद्दा नहीं। मुद्दा ये है कि आखिर केन्द्र सरकार ने किस ‘मजबूरी’ या ‘दबाव’ में ये फैसला लिया? और लिया भी तो इतना अहम फैसला इस कदर ‘अचानक’ और ‘आनन-फानन’ में क्यों? बिना किसी चर्चा या रायशुमारी के लिए गए इस फैसले से ना केवल ओबीसी वर्ग में गलत संदेश जाएगा बल्कि इस फैसले के बाद केन्द्र सरकार पर ‘आरक्षणविरोधी’ होने के आरोप भी स्वाभाविक रूप से लगेंगे। और कुछ ना सही, केन्द्र सरकार को कम-से-कम इतने बड़े फैसले के पीछे रहा कोई एक बड़ा कारण तो बताना ही चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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मोदी को मिला अफगानिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अमीर अमानुल्ला खान अवार्ड’ से नवाजा गया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आज उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया। इससे पहले दोनों देशों के नेताओं ने संयुक्त रूप से ‘अफगान-भारत मैत्री बांध’ का उद्घाटन किया। हेरात प्रांत में स्थित यह बांध पूर्व में ‘सलमा बांध’ के नाम से जाना जाता था। बता दें कि इस बांध को भारत की सहायता से बनाया गया है। चिश्त ए शरीफ नदी के ऊपर बने इस बांध से 75 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकेगा और साथ ही 42 मैगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा।

पूर्वी, मध्य और दक्षिण एशिया के प्राचीन कारोबारी मार्ग पर पड़ने और यहाँ से ईरान, तुर्कमेनिस्तान तथा अफगानिस्तान के अन्य हिस्सों की सड़कें होने के कारण हेरात प्रांत का विशेष रणनीतिक महत्व है। पिछले महीने भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने ईरान के चाबहार में एक कारोबार एवं परिवहन गलियारा स्थापित करने के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

ज्ञातव्य है कि अफगानिस्तान पाँच राष्ट्रों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी का पहला पड़ाव है। अफगानिस्तान के बाद मोदी कतर, स्विटजरलैंड, अमेरिका और मैक्सिको जाएंगे। स्मरणीय है कि मोदी पिछले साल दिसंबर में भी अफगानिस्तान की यात्रा पर आए थे और इस दौरान उन्होंने नौ करोड़ डॉलर की कीमत से भारत द्वारा निर्मित संसद भवन परिसर का उद्घाटन किया था।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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निर्विरोध चुने गए शरद, मीसा, राम जेठमलानी, आरसीपी और गोपाल

आज नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के साथ बिहार से राज्य सभा के पाँचों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। जेडीयू से शरद यादव और रामचंद्र प्रसाद सिंह, आरजेडी से मीसा भारती और राम जेठमलानी और बीजेपी से गोपाल नारायण सिंह संसद के उच्च सदन में पहुँचे। बता दें कि महाठबंधन के चारों उम्मीदवारों ने 30 मई और बीजेपी के उम्मीदवार ने 31 मई को नामांकन दाखिल किया था।

उधर बिहार विधान परिषद के सात उम्मीदवार भी निर्विरोध चुने गए। इनमें महागठबंधन के तीन और बीजेपी के दो उम्मीदवार थे। जेडीयू ने गुलाम रसूल बलियावी और सीपी सिन्हा, आरजेडी ने कमर आलम और रणविजय सिंह, कांग्रेस ने तनवीर अख्तर और बीजेपी ने अर्जुन सहनी और विनोद नारायण झा को उम्मीदवार बनाया था।

राज्य सभा के लिए निर्वाचित होने वाले अन्य राज्यों के प्रमुख उम्मीदवारों में रेल मंत्री सुरेश प्रभु और कांग्रेस नेता अंबिका सोनी शामिल हैं। बीजेपी ने प्रभु को आंध्र प्रदेश से तो कांग्रेस ने अंबिका को पंजाब से उम्मीदवार बनाया था। निर्विरोध चुनाव जीतने वाले अन्य प्रमुख उम्मीदवार हैं – पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, केन्द्र के वर्तमान और तेजतर्रार मंत्री पीयूष गोयल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल तथा शिवसेना के संजय राउत। ये सभी महाराष्ट्र से उम्मीदवार थे।

बता दें कि बिहार के साथ ही महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब के सभी उम्मीदवार निर्विरोध संसद के उच्च सदन पहुँच रहे हैं। बस उत्तर प्रदेश में आखिरी क्षणों में निर्दलीय प्रीति महापात्र के 12वां उम्मीदवार बनने के कारण वहाँ की 11 सीटों का चुनाव जरूर दिलचस्प हो गया है। यहाँ अब अगले हफ्ते 11 जून को चुनाव होना तय है। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी होगी क्योंकि यूपी में कांग्रेस के केवल 29 विधायक हैं और राज्य सभा पहुँचने के लिए जरूरत 34 वोटों की है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार में एक लाख की आबादी पर सत्ताइस की जगह हैं सात कॉलेज..!

बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा के टॉपर्स रूबी राय (आर्ट्स) और सौरभ श्रेष्ठ (साइंस) की ख़बर अखबार, टीवी चैनल और तमाम सोशल साइट्स पर चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई उनके ‘खोखले’ रिजल्ट की आलोचना कर रहा है और बिहार की शिक्षा-व्यवस्था कठघरे में है। ऐसी किसी घटना पर तत्काल अपनी राय देना और भड़ास निकाल लेना हमारी आदत बन चुकी है। होता ये है कि इधर भड़ास निकली नहीं कि उधर हम पूरे वाकये को भूल जाते हैं क्योंकि तब तक भड़ास निकालने को और कई ख़बरें हमारे सामने आ चुकी होती हैं। बहरहाल, यहाँ ये सब कहने का तात्पर्य ये है कि जब इन छात्रों को लेकर बहस छिड़ी ही है तो उसे सही अंजाम तक पहुँचाया जाय। और अंजाम तक हम तब पहुँचेंगे जब समस्या को जड़ से समझेंगे।

सच तो यह है कि जिस ‘रूबी’ और ‘सौरभ’ पर हम अपनी भड़ास निकाल रहे हैं वे स्वयं हमारी ‘अव्यव्स्था’ और हमारे नीति-निर्देशकों की ‘अदूरदर्शिता’ के शिकार हैं। चलिए हम कुछ आँकड़ों की मदद से इसे समझने की कोशिश करें। आपको ये जानकर हैरत होगी कि बिहार में एक लाख की आबादी पर मात्र सात कॉलेज हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 27 कॉलेज का है। यही नहीं, बिहार में प्रति कॉलेज 2098 विद्यार्थियों का नामांकन होता है, जबकि राष्ट्रीय औसत 764 है। ऐसे में आप कैसी शिक्षा और कैसे परिणाम की उम्मीद कर सकते हैं भला..?

खैर, ये तो बात हुई पढ़ने वालों की। अब जरा पढ़ाने वालों की बात करें। यहाँ तो स्थिति और भी भयावह है। क्या आप यकीन करेंगे कि बिहार में कई ऐसे कॉलेज हैं जिनमें कई-कई विषयों में एक भी प्राध्यापक नहीं हैं लेकिन ना केवल ‘जादुई’ तरीके से परीक्षा फॉर्म भरने के लिए जरूरी छात्रों की 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी हो जाती है बल्कि वे छात्र ‘रूबी’ और ‘सौरभ’ की तरह जादुई अंक भी पा लेते हैं।

मजे की बात तो यह कि ये सब कुछ सरकार की नाक के नीचे हो रहा होता है और सरकार कभी गांव-गांव में शराब के ठेके खुलवाने में व्यस्त होती है तो कभी बंद कराने में। माना कि शराब जहर है और उसे बन्द करना चाहिए लेकिन इन छात्रों के जीवन में जो ‘विष’ घुल रहा है उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा..? महज खानापूरी करने वाले उपायों के बदले ठोस पहल कब होगी..? क्यों नहीं इस बात की कोशिश करें कि राज्य में छात्रों की संख्या और आज की जरूरत के मुताबिक कॉलेज हों, उनमें पढ़ाने वाले शिक्षक हों और सबसे अहम बात ये कि आधारभूत ढाँचा भी हो। अगर अब भी हम नहीं चेते तो बिहार से हर साल होने वाले लाखों छात्रों का पलायन रुकने की बजाय बढ़ता ही चला जाएगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है..?

क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है..? अगर आप नहीं जानते तो  जानना जरूरी है आपके लिए क्योंकि ये जाने बिना आप बिहार में इंटर की परीक्षा में टॉप नहीं कर सकते। जी हाँ, चौंकिए नहीं। मैं पूरे होशो-हवास में ये लिख रहा हूँ और लिखने का कारण भी है। अरे जनाब, अगर बिहार के इंटर आर्ट्स की टॉपर कह रही हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है तो जरूर होती होगी। इस एक जवाब को गलत कहकर हम अपने ‘इंजीनियर’ मुख्यमंत्री, ‘नौंवी पास’ उपमुख्यमंत्री और नाम के पहले ‘डॉ.’ लगाने वाले शिक्षा मंत्री समेत अपनी पूरी शिक्षा-व्यवस्था को कठघरे में क्यों खड़ा कर दें भला..?

मैं कतई मजाक के मूड में नहीं। बहुत तकलीफ हो रही है आज तमाम सोशल साइट्स पर बिहार की किरकिरी होते देख। आज पूरी दुनिया हमारी शिक्षा-व्यवस्था का मजाक उड़ा रही है। बिहार में प्रतिभा के धनी छात्रों की कमी हो ऐसा हरगिज नहीं। लेकिन आज बिहार के इंटर बोर्ड की परीक्षा में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स के टॉपर्स पर जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं वो शर्मसार करने वाला है।

बिहार के शिक्षामंत्री डॉ. अशोक चौधरी के निष्पक्ष और कदाचारमुक्त परीक्षा के दावों की पोल उस वक्त खुल गई जब एक स्टिंग ऑपरेशन का विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस विडियो के अनुसार इंटर आर्ट्स की टॉपर (रूबी राय) को यह पता है कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है और साइंस टॉपर (सौरभ श्रेष्ठ) इस बात से अनभिज्ञ हैं कि इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन में क्या अन्तर होता है..?

मजे की बात तो यह कि तीनों संकाय के टॉपर एक ही कॉलेज के हैं। यह कॉलेज है वैशाली जिले के पास भगवानपुर का विशुनराय कॉलेज। बता दें कि इस कॉलेज का विवादों से पुराना नाता रहा है। पिछले साल भी यह कॉलेज रिजल्ट में गड़बड़ियों के कारण चर्चा में रहा था और शिक्षा मंत्री ने इस कॉलेज का रिजल्ट रोक दिया था। अब जब कि इस साल इस कॉलेज ने अनियमितता की सारी सीमा पार कर दी है, यह स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा विभाग ने इस पर ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई थी। आज नतीजा सामने है।

बहरहाल, बिहार के शिक्षा मंत्री ने यह विडियो देखने के बाद कहा कि विडियो देखकर उन्हें भी धक्का लगा है। यह भी बता दें कि बिहार बोर्ड ने आर्ट्स और साइंस के पहले पाँच टॉपर्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया है। यही नहीं, इनकी लिखित परीक्षा भी होगी और जरूरत पड़ने पर कॉपियों का मिलान भी किया जाएगा। बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने कहा कि इंटरव्यू में फेल होने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई होगी और उनका रिजल्ट रद्द भी किया जा सकता है।

यहाँ बोर्ड के अध्यक्ष, उनके शिक्षा मंत्री, सरकार के उपमुख्यमंत्री और सर्वेसर्वा मुख्यमंत्री से एक सीधा सवाल है कि क्या केवल उन छात्रों पर कार्रवाई से ही ये समस्या हल हो जाएगी, जबकि हम जानते हैं कि ये छात्र उस पेड़ की छोटी-छोटी टहनियां भर हैं जिसकी विशाल जड़ में ‘घुन’ बहुत पहले लग चुका था और हमने कुछ करने की जहमत नहीं उठाई..?

चलते-चलते…

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि कोई कदाचार या भ्रष्टाचार केवल सरकार या प्रशासन के चाहने से दूर नहीं हो सकता। ऐसा तभी सम्भव है जब हमारे प्रथम तीन शिक्षक माता-पिता और गुरु ह्रदय से ऐसा चाहें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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