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तो क्या यह पिता-पुत्र का ‘प्रायोजित’ ड्रामा था..?

मुलायम सिंह यादव का ‘समाजवादी’ कुनबा ढहते-ढहते बच गया। निष्कासन के महज चंद घंटों बाद अखिलेश-रामगोपाल की पार्टी में वापसी के साथ पिछले दो-तीन दिनों से चल रहे यूपी के हाई वोल्टेज सियासी ड्रामे का फिलहाल अंत होता दिख रहा है। इन दो-तीन दिनों के तेजी से बदलते घटनाक्रम में 200 से ज्यादा विधायकों को अपने साथ खड़ा कर अखिलेश यादव पहले से भी ज्यादा, अतिशयोक्ति नहीं होगी अगर कहा जाय कि अपने पिता से भी ज्यादा, मजबूत होकर उभरे हैं।

अखिलेश द्वारा शक्ति-परीक्षण में चाचा शिवपाल (और पिता मुलायम को भी) को भी पछाड़ने के बाद उनका खेमा अब अपनी मांगों पर अड़ गया है। इन मांगों में शिवपाल के पर कतरना और अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना शामिल है। ये तो खैर तय हो ही चुका है कि उम्मीदवारों की सूची अब नए सिरे से जारी होगी और उसमें मुलायम-अखिलेश के अलावा किसी की भूमिका नहीं होगी। अखिलेश खेमा नेताजी ‘मुलायम’ को आजीवन संरक्षक और राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका में देखना चाहता है लेकिन उनके इर्द-गिर्द रहने वाले ‘षड्यंत्रकारी’ उन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं हैं।

पहले विधायकों के साथ बैठक के दौरान यह कहकर कि “मैं अपने पिता से अलग नहीं हूँ” और “नेताजी को मैं यूपी की जीत का तोहफा देना चाहता हूँ”, फिर उनसे मिलने पहुँचकर अखिलेश ने अपने पारिवारिक और राजनीतिक ‘विवेक’ का परिचय दिया। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने और अपनी पार्टी के ‘निर्माता’ मुलायम के प्रति एक भी कटु शब्द का प्रयोग न कर उन्होंने एक साथ संवेदना और समझदारी दोनों का परिचय दिया। पिता के ‘सम्मान’ का ख्याल रख उन्होंने एक साथ दोनों खेमे की सहानुभूति पा ली। मुलायम ने भी बांहें फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिर उन्हें पता जो था कि उनकी हार में भी ‘जीत’ आखिर उन्हीं की है। वैसे इस पूरे प्रकरण की ऐसी व्याख्या करने वालों की भी कमी नहीं है कि यह ड्रामा पिता-पुत्र के द्वारा ही ‘प्रायोजित’ था ताकि यह दिखाया जा सके कि जन्मना और कर्मणा मुलायम के असली वारिस अखिलेश हैं, न कि शिवपाल या कोई और।

बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम में अखिलेश के अलावा जो शख्स पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा है, वह आजम खान हैं। पिता-पुत्र के ‘मिलन’ के सूत्रधार वही रहे। आजम खान और अमर सिंह के तल्ख रिश्तों की सच्चाई भी किसी से छिपी नहीं है। अखिलेश और रामगोपाल का निष्कासन वापस होने के बाद आजम खान ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह एक है। उन्होंने कहा कि पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने बनाया है और वह पार्टी के ‘बागबां’ हैं। आजम ने कहा कि पार्टी में जो कुछ भी चल रहा था उससे सबसे ज्यादा फिक्रमंद मुस्लिम थे क्योंकि सपा के कमजोर होने का फायदा बीजेपी को मिलता।

सूत्रों के मुताबिक रामगोपाल यादव द्वारा 1 जनवरी को बुलाया गया पार्टी का आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन अब चुनावी सभा में तब्दील होगा। इसमें खुद मुलायम भी शामिल होंगे। अधिवेशन को मुलायम के अलावा अखिलेश और आजम खान संबोधित कर सकते हैं। उम्मीद है कि कल के दिन कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हों जिनमें अखिलेश को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाना शामिल है।

चलते-चलते

यूपी के इस हाई वोल्टेज ड्रामे में अपने लालूजी ने भी ‘किरदार’ निभा ही दिया। और वो भी बड़ा ‘सार्थक’। लालू ने एक ओर मुलायम को फोन कर उन्हें अखिलेश से बात करने की सलाह दी तो दूसरी ओर अखिलेश से बात कर उन्हें मुलायम से मिलने जाने को कहा। यूपी से बाहर के एकमात्र वही रहे जिन्होंने इस पूरे मामले को लेकर न केवल अपना ‘कंसर्न’ दिखाया बल्कि सच्चे अर्थों में उस परिवार और पार्टी का ‘शुभचिंतक’ होने का परिचय भी दिया।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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तो क्या अलग हो जाएंगे अखिलेश!

देश की राजनीति की दिशा तय करने की ताकत रखने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी टूट की कगार पर खड़ी दिख रही है। अगर एक दम से कोई चमत्कार हो और मुलायम-अखिलेश ‘समझदारी’ दिखाते हुए किसी ‘सार्थक’ निष्कर्ष पर पहुँच जाएं तो बात अलग है, वरना समाजवादी कुनबे का बिखरना तय लग रहा है। जी हाँ, अपने वफादारों की टिकट कटने से नाराज अखिलेश ने 235 उम्मीदवारों की अपनी अलग सूची जारी कर दी है। सूत्रों के मुताबिक ये उम्मीदवार बतौर निर्दलीय अलग-अलग चुनाव-चिह्नों पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि अब देर हो चुकी है, फिर भी कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि अखिलेश अपनी अलग पार्टी बनाकर नया चुनाव-चिह्न लेने की कोशिश भी कर सकते हैं।

बहरहाल, बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 325 सीटों के लिए बुधवार को सपा उम्मीदवारों की सूची जारी हुई। सूची स्वयं सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने जारी की। और अब एक दिन बाद अखिलेश यादव ने ‘अपनी’ सूची जारी कर दी। अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब पार्टी दो-फाड़ होते-होते बची थी, लेकिन कुछ समय के ‘संघर्षविराम’ के बाद परिवार की लड़ाई फिर सतह पर आ गई है। एक ओर अखिलेश और उनके समर्थक नेता हैं तो दूसरी ओर उनके चाचा शिवपाल यादव। अखिलेश के साथ रामगोपाल यादव खड़े हैं तो शिवपाल के सिर पर पार्टी और परिवार के मुखिया मुलायम का हाथ है।

गौरतलब है कि 325 उम्मीदवारों की सूची जारी होने के एक दिन बाद अखिलेश ने पिता मुलायम से मुलाकात की और उम्मीदवारों के चयन पर अपनी नाराजगी जताई। अखिलेश की शिकायत थी कि उन्हें दरकिनार कर ये सूची जारी की गई है। अखिलेश को जिन नामों पर ऐतराज था उन्हें भी टिकट दिए गए। यहाँ तक कि उनके कई करीबियों के पत्ते भी साफ हो गए, जबकि दूसरी ओर शिवपाल की इस सूची में ‘जरूरत से ज्यादा’ चली।

गुरुवार सुबह से ही मुलायम, अखिलेश और शिवपाल के घरों के आगे नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। अखिलेश ने अपने वफादार मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात और मंत्रणा की। इस दौरान उनके विश्वासपात्रों ने शिवपाल यादव, अमर सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा आदि पर भड़ास निकाली और साथ ही उन्हें उनका ‘बल’ भी याद दिलाया। उन्होंने अखिलेश को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ हैं और वे चाहें तो बड़ा कदम उठा सकते हैं। उधर गठबंधन को लेकर मुलायम से जवाब पा चुकी कांग्रेस तो इस फिराक में है ही कि अखिलेश अलग चुनाव लड़ें और कांग्रेस उनके साथ चुनाव की ‘वैतरणी’ पार कर ले।

बहरहाल, अगले एक-दो दिन में समाजवादी पार्टी के ‘भाग्य’ का फैसला हो जाएगा। भले ही मुलायम के दीर्घ राजनीतिक जीवन में परीक्षा की ऐसी घड़ी कभी न आई हो, पर विपरीत परिस्थितियों को साधने के उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर वे कोई बीच का रास्ता निकाल लें और चुनाव में सपा की चुनौती बरकरार रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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2016 की दर्दनाक विदाई, कानपुर में फिर ट्रेन हादसा

अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस की 15 बोगियां आज सुबह 5.16 पर पटरी से उतर गई। हादसा कानपुर देहात के रूरा स्टेशन पर हुआ। हादसों के कारणों का अभी पता नहीं लग पाया है। गौरतलब है कि पिछले ही महीने इंदौर से रवाना हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस की 14 बोगियां कानपुर के पास ही पुखरायां में पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर आज ये सवाल वायरल हो रहा है कि आखिर कानपुर के पास ही हादसे क्यों हो रहे हैं? दूसरा सवाल जो जेहन में कौंधता है, वो ये कि क्या हमारे राजनेताओं को बुलेट ट्रेन की बात करने से पहले सैकड़ों निरीह यात्रियों की बलि लेने वाली इन पटरियों की मरम्मत नहीं करवानी चाहिए?
बहरहाल, बता दें कि कानपुर देहात का रूरा स्टेशन, जहाँ यह हादसा हुआ, कानपुर से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है और यह हादसा रूरा स्टेशन के होम स्टार्टर के नजदीक खंभा नंबर 1061/22 के पास हुआ। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक ट्रेन की 13 बोगियां पटरी से उतर गईं, जबकि दो बोगियां नहर में गिर गईं। स्लीपर कोच नंबर 98222 नहर में गिरी है, जबकि स्लीपर कोच नंबर 11246 नहर में लटकी हुई है। इन बोगियों को निकालने की कोशिश जारी है। हादसे के शिकार हुए ज्यादातर डब्बे स्लीपर बोगी के हैं। अभी तक 70 लोगों के घायल होने और 2 यात्रियों के मरने की पुष्टि हुई है। हालांकि सच यह है कि इस हादसे के बाद कुछ बोगियों के परखच्चे जिस तरह उड़े हैं उन्हें देखकर घायलों व मृतकों की वास्तविक संख्या का अभी अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
गौरतलब है कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे के समय ही रेलवे की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि इस रूट की रेल ट्रैक कई जगह अनफिट है। साथ ही इन जगहों पर अधिकतम स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की सलाह दी गई थी। नवंबर में हुए हादसे के बाद इस पूरे रूट की अच्छी तरह जांच की गई थी। इसके बावजूद महज एक महीने बाद यह हादसा किन कारणों से हुआ, इसका खुलासा तो जांच के बाद ही हो पाएगा। अगर जांच सही और निष्पक्ष हुई तो।
बहरहाल, पुलिस, प्रशासन, रेलवे के अधिकारी और स्थानीय लोग राहत और बचाव-कार्य में लगे हुए हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया है। कानपुर और टूंडला जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। कानपुर मेडिकल कॉलेज को हाई अलर्ट मोड में रखा गया है।
यह भी बता दें कि इस हादसे के बाद कानपुर के पास नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12033) कैंसल कर दी गई है। कई ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है। गोमती एक्सप्रेस को मुरादाबाद के रास्ते डायवर्ट किया गया है। कैफियत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12225) को भी मुरादाबाद के रास्ते डायवर्ट किया गया है।

चलते-चलते

आपकी सुविधा के लिए इस हादसे से जुड़ी कोई भी जानकारी पाने के लिए रेलवे द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं: कानपुर – 0512-2323015, 2323016, 2323018, इलाहाबाद – 0532-2408149, 2408128, 2407353, टूंडला – 05612-220337, 220338, 220339 और अलीगढ़ – 0571-2404056, 2404055.

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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लालू ने कहा, सजा के लिए मनपसंद चौराहा चुन लें प्रधानमंत्री

नोटबंदी को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोला। सोमवार को उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल किया कि उन्हें किस चौराहे पर सजा दी जाए? वे अपना मनपसंद चौराहा चुन लें, जहाँ जनता उन्हें सजा देगी। दरअसल, नोटबंदी के बाद 13 नवंबर को गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि 50 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो उन्हें चौराहे पर जो सजा दी जाएगी, वह उसे स्वीकार करेंगे। बता दें कि नोटबंदी के विरोध मे आरजेडी ने 28 दिसंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में महाधरना देने की घोषणा भी की है।
सोमवार को लालू राजधानी पटना के सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद आजतक हालात नहीं सुधरे हैं। काम छिन जाने के कारण लाखों मजदूर शहर छोड़कर गांव लौटने को विवश हो रहे हैं। हजारों कंपनियां वेतन देने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके पास पर्याप्त नकद नहीं है। उन्होंने नोटबंदी पर अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स के उस आकलन का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार ने एक अप्रत्याशित कदम उठाया जिससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था की क्षति हुई, बल्कि हाशिये पर खड़े करोड़ों गरीब लोगों को संकट में डाला गया।
इस दौरान लालू ने शिवसेना के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उसने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर वह मदमस्त हाथी नहीं बने। उत्तर प्रदेश का इतिहास रहा है कि जब-जब सत्ताधारी मस्ती में आए हैं, जनता ने तब-तब उन्हें सत्ता से उतार फेंका है। लालू ने कहा कि शिवसेना ठीक कह रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सपा फिर विजयी होगी और भाजपा प्रदेश में कहीं नहीं दिखेगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अटल बिहारी वाजपेयी : गरिमा और गौरव के 92 वर्ष

अटल बिहारी वाजपेयी, ये नाम न केवल भारतीय राजनीति के उन कुछ नामों में एक है जो जनमानस में गहरी पैठ रखता है, बल्कि यह भारत के सम्पूर्ण इतिहास के उन चंद नामों में शुमार है जिन्हें सहयोगियों के समान ही विरोधियों का भी विश्वास और आदर हासिल रहा है। यह उनका करिश्माई व्यक्तित्व ही था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के बावजूद उनकी धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी छवि अक्षुण्ण रही और भाजपा संघर्ष की पगडंडियों से प्रशस्त राजपथ तक पहुँची। 25 दिसंबर 1924 को गवालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी आज अपने जीवन के 92 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। गरिमा और गौरव से भरे 92 वर्ष, जिनका एक-एक पल किसी धरोहर से कम नहीं हमारे लिए।
वाजपेयी की जीवन-यात्रा एक ऐसे व्यक्तित्व का सफरनामा है, जिसने अपनी हर सांस के साथ भारतीय सभ्यता, संस्कृति, समाज और राजनीति को जिया और उसमें अपना निर्णायक योगदान दिया। उनकी लोकप्रियता दलगत सीमाओं से परे थी। यह उनके व्यक्तित्व का ही सम्मोहन था कि भाजपा के साथ उस समय नए सहयोगी दल जुड़ते गए, जब बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भाजपा अपने दक्षिणपंथी झुकाव के कारण राजनीतिक रूप से ‘अछूत’ मानी जाती थी।
वाजपेयी के लंबे राजनीतिक जीवन में एक अनोखी निरंतरता है, जो उन्हें जय-पराजय से कहीं ऊँचा उठा देती है। वह आलोचनाओं की ओर नहीं, अपने लक्ष्य की ओर देखते थे। वह जब चाहते, विपक्ष का इस्तेमाल कर लेते। विपक्षियों को भी उनके दरवाजे पर दस्तक देने में संकोच नहीं होता। वह स्वीकार्यता की सियासत करते थे, प्रतिरोध की नहीं। यह अकारण नहीं कि भारत को पहली बार छह-सात प्रतिशत की स्थिर जीडीपी ग्रोथ उन्हीं के वक्त में हासिल हुई।
कश्मीर आज की तरह तब भी बड़ी समस्या थी लेकिन वाजपेयी ने युक्तिपूर्वक कश्मीर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में बहुत हद तक कामयाबी हासिल कर ली थी। वे जानते थे कि ऐसा पाकिस्तान से दोस्ती के बिना संभव नहीं। साथ ही उन्हें यह भी मालूम था कि पड़ोसी सिर्फ मोहब्बत की भाषा नहीं समझता। इसीलिए 1998 में दोबारा सत्ता संभालने के दो महीने के भीतर पोखरण परमाणु परीक्षण कर उन्होंने संदेश दिया कि भारत दोस्ती का तलबगार है, पर आत्मसम्मान की कीमत पर नहीं। वह कभी झुकेगा नहीं। कंधार, कारगिल और संसद पर हमले के बावजूद उन्होंने सुलह की कोशिश नहीं छोड़ी। अगर आगरा शिखर-वार्ता सफल हो गई होती, तो यकीनन इस महाद्वीप की किस्मत बदल जाती। हालांकि यह वार्ता सिरे तक क्यों नहीं पहुँची, यह आज भी रहस्य है।
आज सड़क-यात्रा के शौकीन जब कश्मीर से कन्याकुमारी तक फर्राटा भरने की ख्वाहिश व्यक्त करते हैं, तो एक बार फिर वाजपेयी याद आते हैं। कश्मीर को कन्याकुमारी से और कामाख्या को द्वारिका से जोड़ने का काम उनकी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ ने किया और उनके द्वारा लागू की गई ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ देश के यातायात को सुगम बनाने और हमारे विकास को गति देने में कितनी बड़ी भूमिका अदा कर रही है, यह कोई कहने की बात नहीं।
बीमारी ने आज इस प्रखर कवि और ओजस्वी वक्ता की वाणी और स्मृति पर कब्जा जमा लिया है। आज भाजपा के मोदीयुग की बात की जा रही है, पर देश और दुनिया को जब भी समग्रता में देखने की बात आएगी, तब मोदी को वाजपेयी बनकर ही सोचना और देखना होगा। मोदी भाजपा को विस्तार चाहे जितना दे लें, आधार वाजपेयी ही हैं और वाजपेयी ही रहेंगे। भारत-रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनके जन्मदिवस पर ‘मधेपुरा अबतक’ की ढेरों मंगलकामनाएं।

चलते-चलते

हम ये न भूलें कि आज भारत-रत्न मदन मोहन मालवीय की जयंती भी है। उन्हें हमारा शत-शत नमन।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मिले ‘सुर’ मेरा तुम्हारा

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने साल 2013-14 के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कॉरपोरेट घरानों द्वारा करोड़ों की रिश्वत दिए जाने का आरोप लगाया था। राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए लालू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से फंस गए हैं, अब उन्हें राष्ट्र को सफाई देनी होगी। लालू ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
बता दें कि बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि आदित्य बिड़ला और सहारा समूह ने 40 करोड़ रुपये नरेन्द्र मोदी को दिए थे। लालू का कहना है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष प्रधानमंत्री के ऊपर इस तरह के आरोप बिना सबूत नहीं लगा सकते। इससे साबित होता है कि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार में शामिल थे। मैं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करता हूँ। लालू ने यह भी कहा कि अगर कोई प्रवक्ता अब प्रधानमंत्री के बचाव में बयान देगा तो यह गलत होगा।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कहा था कि इनकम टैक्स के रिकॉर्ड के मुताबिक अक्टूबर 2013 से फरवरी 2014 के बीच सहारा ग्रुप ने प्रधानमंत्री मोदी को 40 करोड़ रुपए दिए थे। ये पैसे 9 बार में दिए गए थे। बिड़ला ग्रुप को लेकर राहुल का आरोप है कि इस ग्रुप ने प्रधानमंत्री को 12 करोड़ रुपये दिए थे।
बहरहाल, राजनीति तो खेल ही आरोप-प्रत्यारोप का है। भाजपा राहुल के बयान को पहले ही ‘बचकाना’ और ‘बेबुनियाद’ बता चुकी है। यहाँ गौर करने की बात यह है कि आरोपों के इस खेल में लालू अचानक राहुल-राग क्यों अलापने लगे? कहीं इसका कारण भाजपा के संग नीतीश की बढ़ती नजदीकियों की ख़बरें तो नहीं? कहीं लालू कांग्रेस के संग कोई ‘संभावना’ तलाशने में तो नहीं जुटे हैं? जो भी हो, लालू राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं और मोदी पर लगाए गए आरोपों पर राहुल का समर्थन कर उन्होंने मौके पर चौका मारा है। आप गौर से देखें तो पाएंगे कि एक तीर से उन्होंने दो निशाना – नीतीश पर ‘दबाव’ और कांग्रेस पर ‘प्रभाव’ – साधा है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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और रामानुजन की माँ ने चुना ‘अल्पायु’ लेकिन ‘असाधारण’ बेटे का विकल्प

कल्पना कीजिए कि आज से 129 साल पहले ज्योतिष में विश्वास रखने वाली भारत की एक धर्मपरायण माँ जिसे उसके बेटे के बारे में कहा जाय कि उसकी जन्मपत्री में दो बाते हैं – पहली, वह एक दिन दुनिया भर में नाम कमाएगा लेकिन उसकी उम्र कम होगी या दूसरी, वह अपना पूरा जीवन जियेगा लेकिन एक साधारण व्यक्ति की तरह और वह माँ बिना किसी दुविधा के पहले विकल्प को चुने, वह कितनी असाधारण होगी! और जब माँ ऐसी हो तो आश्चर्य नहीं कि उसकी संतान रामानुजन हो। जी हाँ, मात्र 33 वर्ष की अल्पायु पाने वाले महान गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन, आज के कम्प्यूटर युग में भी जिनकी असाधारण प्रतिभा के आगे पूरी दुनिया सिर झुकाती है।
आपको आश्चर्य होगा कि तमिलनाडु के कोयंबटूर में 22 दिसंबर 1887 को जन्मे रामानुजन की गणित के प्रति ऐसी दीवानगी थी कि बाकी विषयों में वे फेल हो गए और उच्च शिक्षा से वंचित रह गए। इस तरह उन्होंने गणित खुद से सीखा और जीवन भर में गणित के 3384 प्रमेयों का संकलन किया, जिनमें से अधिकांश प्रमेय सही सिद्ध किए जा चुके हैं। रामानुजन बचपन से ही जिज्ञासु थे और उनकी जिज्ञासा आम बच्चों से बिल्कुल हटकर थी। संसार का पहला इनसान कौन था, आकाश और पृथ्वी के बीच की दूरी कितनी है, समुद्र कितना गहरा और बड़ा होता है जैसे प्रश्न बालक रामानुजन को परेशान करते और ऐसे प्रश्नों को पूछ-पूछ कर वे अपने शिक्षक की नाक में दम करते।
एक बार की बात है, इनके शिक्षक कक्षा में गणित पढ़ाने के क्रम में बता रहे थे कि अगर किसी संख्या को उसी संख्या से भाग दें तो उसका उत्तर 1 (एक) आएगा। ये सुनकर सभी छात्र संतुष्ट हो गए सिवाय रामानुजन के। उन्होंने तपाक से पूछा कि अगर शून्य को भी शून्य से भाग दें तो क्या उत्तर एक ही आएगा? ये सुनकर उनके शिक्षक का दिमाग चकरा गया। रामानुजन के इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं था। होता भी कैसे? घोर जिज्ञासु रामानुजन का ये सवाल उनकी उम्र से बहुत आगे का था।
26 अप्रैल 1920 को तपेदिक की बीमारी से इस विलक्षण प्रतिभाशाली गणितज्ञ का निधन हो गया। उनको गए सौ साल होने को आए लेकिन गणित के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कई कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। 33 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने गणित को जितना साध लिया था उतने के लिए सदियां भी कम हैं। उनके सम्मान में 2012 से हर वर्ष आज के दिन को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है। आर्यभट्ट की परंपरा को आगे बढ़ाकर भारत का गौरव बढ़ाने वाले इस गणितज्ञ को उनकी जयंती पर ‘मधेपुरा अबतक’ का नमन।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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दुनिया को बदलेंगे ये तीन किशोर

ब्रिटिश समाचार वेबसाइट ‘द गार्जियन’ ने दुनिया भर के 25 किशोरों की सूची तैयार की है। ये किशोर कलाकार, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और उद्यमी हैं जो अपने कौशल से दुनिया में बदलाव ला सकते हैं। इन किशोरों में कुछ ने कम उम्र में ही महत्वपूर्ण आविष्कार किए हैं। हम भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि इस विशिष्ट सूची में तीन भारतीय मूल के किशोर भी शामिल हैं। अमेरिका के पेंसिलवेनिया में रहने वाले मिहिर गारीमेला, कैलिफोर्निया में रह रहे शुभम बनर्जी और सुरे में रह रहे नित्यानंदम को उनके नायाब आविष्कारों के लिए सराहा गया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की छोटी बेटी साशा ओबामा की भी उनके सामाजिक कार्यों के लिए प्रशंसा की गई है।
मिहिर गारीमेला
10वीं में पढ़ने वाले 16 वर्षीय मिहिर ने एक रोबोट तैयार किया है। इस रोबोट में मधुमक्खियों की आवाज़ की तरह साउंड सिस्टम लगाया गया है। यह रोबोट मक्खियों की तरह ही हर बाधा को पार कर उड़ने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल बचाव कार्यों और आपदा प्रबंधन में किया जा सकता है। मिहिर को उनके आविष्कार के लिए साल 2014 का गूगल कम्प्यूटर साइंस अवार्ड मिल चुका है। मिहिर एक गणितीय रोबोटिक वायलिन पर भी काम कर रहे हैं जो दिमाग के इलाज के समय डॉक्टरों की मदद कर सकता है।
शुभम बनर्जी
15 वर्षीय शुभम ने स्कूल साइंस प्रोजेक्ट के तहत खेल में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के लीगो ब्रिक्स से दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल प्रिंटर तैयार किया है। उनकी इस खोज ने दृष्टिबाधित लाखों लोगों के लिए कम्प्यूटर का इस्तेमाल आसान कर दिया। ब्रेल प्रिंटर से इंटरनेट या कम्प्यूटर पर टाइप की हुई चीजें ब्रेल लिपि में प्रिंट हो सकती हैं।
नित्यानंदम
15 साल के नित्यानंदम ने अल्जाइमर बीमारी का पता लगाने के लिए एक नया एंटीबायोटिक तैयार किया है। इस एंटीबायोटिक की मदद से 10 साल पहले ही अल्जाइमर का पता लग सकता है। एंटीबायोटिक में मौजूद फ्लूरोसेंट के कण दिमाग की परत को स्कैन कर भविष्य में होने वाले अल्जाइमर का पता लगा लेते हैं। नित्यानंदम के मुताबिक उनकी खोज उन माता-पिता के लिए कारगर है जिनके बच्चे को अल्जाइमर का खतरा हो सकता है। वे पहले ही अपने बच्चे का इलाज शुरू कर सकते हैं और समय रहते इस बीमारी से रक्षा हो सकती है। नित्यानंदम को इस खोज के लिए 2015 का गूगल साइंस फेयर प्राइज भी मिल चुका है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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इंग्लैंड को फिर धूल चटाई भारत ने

विजय-रथ पर सवार भारत ने इंग्लैंड को चेन्नै टेस्ट में एक पारी और 75 रन से हराकर 5 मैचों की टेस्ट सीरीज पर 4-0 से कब्जा कर लिया। इस मैच में तिहरा शतक जड़ने वाले करुण नायर को ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया, वहीं सीरीज में 655 रन बनाने वाले कप्तान विराट कोहली ‘मैन ऑफ द सीरीज’ घोषित किए गए।
भारत ने मंगलवार को इंग्लैंड की दूसरी पारी को महज 207 रनों पर समेट दिया। भारत की ओर से इस पारी में रवीन्द्र जडेजा ने 7 विकेट लिए। चेन्नै टेस्ट में जडेजा के नाम कुल 10 विकेट रहे। इससे पहले इस मैच में भारत ने अपनी पहली पारी 7 विकेट पर 759 रन बनाकर घोषित की थी। इस पारी में करुण नायर ने नॉट आउट 303 रन बनाए, वहीं एक रन से दोहरा शतक चूक गए ओपनर केएल राहुल ने 199 रन बनाकर भारत की मजबूत बुनियाद रखी।
इस मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली टेस्ट मैचों में अजेय रहने के मामले में पूर्व कप्तान कपिल देव से आगे निकल गए हैं। कपिल की कप्तानी में टीम इंडिया सितंबर 1985 से मार्च 1987 के बीच 17 टेस्ट मैच तक अजेय बनी रही। जबकि विराट कोहली की यह टीम 18 मैचों से अजेय है। इसके साथ ही टीम इंडिया टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 के पायदान पर भी बुलंदी के साथ काबिज है।
भारत के लिए यह सीरीज हर लिहाज से शानदार रही। करुण नायर और जयंत यादव जैसे खिलाड़ी इसी सीरीज की खोज हैं। कोहली, नायर और राहुल की शानदार बल्लेबाजी, आर अश्विन के लाजवाब 28 विकेट और जडेजा एवं यादव के ऑलराउड खेल के लिए यह सीरीज लम्बे समय तक याद रखी जाएगी। वैसे इस सीरीज में टीम इंडिया का शायद ही कोई खिलाड़ी हो जिसने किसी-न-किसी पारी में यादगार योगदान न दिया हो।

“मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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कैशलेस-कैशलेस चिल्लाकर क्या ‘ऑक्सीजन’ मिलता है मोदी को – लालू

नोटबंदी पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का हमलावर रुख लगातार बना हुआ है। कल ही उन्होंने कहा था कि नोटबंदी का वही हश्र होगा जो कांग्रेस के नसबंदी अभियान का हुआ था और आज उन्होंने नोटबंदी पर व्यापक आंदोलन का ऐलान करते हुए कहा कि सभी गैर भाजपा और समाजवादी दलों को एकजुट किया जाएगा। सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट कर इसके खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। बता दें कि लालू ने नोटबंदी के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिए आज आरजेडी की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद के खोदे गड्ढ़े में गिर गए हैं। आज मजदूरों, किसानों, छात्रों समेत आमजनों की स्थिति बदतर हो गई है। भाजपा नेताओं के पास ही सारा कालाधन है और उनके पास से ही यह निकल रहा है।
केन्द्र के ‘कैशलेस अभियान’ पर लालू ने कहा कि मोदी कैशलेस-कैशलेस चिल्लाते रहते हैं, इस तरह की फालतू बातें बोलने से क्या उन्हें ‘ऑक्सीजन’ मिलता है? पे-टीएम के प्रचार पर उन्होंने सवाल उठाया कि गांव का गरीब कहां से पे-टीएम करेगा? उसके पास मोबाइल कहां है? प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार पर आरोपों की बौछार के बीच उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि केन्द्र सरकार ने दो हजार के नोट पर गांधीजी के चश्मे के पीछे भाजपा का स्वच्छता का स्लोगन लिख दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच हो और इसे तुरंत हटाया जाए।
नोटबंदी के मुद्दे पर नीतीश के साथ मतभेद को खारिज करते हुए लालू ने कहा कि जनता की समस्या पर हम और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक साथ हैं। महागठबंधन की सरकार में कोई टकराव नहीं है। गौरतलब है कि नीतीश पहले दिन से नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं, हालांकि इसे लागू करने के तरीके से उनकी असहमति जरूर थी।
बता दें कि इस मुद्दे को लेकर लालू के आवास पर सभी जिलों और प्रखंडों से कार्यकर्ता व नेता जुटे थे। इस कार्यक्रम में प्रख्यात अर्थशास्त्री मोहन गुरूमूर्ति को भी नोटबंदी से होने वाले ‘नुकसान’ और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके ‘कुप्रभावों’ को लेकर प्रस्तुतिकरण देने बुलाया गया था। गुरुमूर्ति ने आशंका जताई कि सरकार के इस कदम से देश की जीडीपी में 2.5 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है।
बहरहाल, कार्यक्रम में तय किया गया कि केन्द्र के इस ‘जनविरोधी’ कदम के खिलाफ पटना में जल्द ही विशाल रैली आयोजित की जाएगी। उससे पहले 20 से 26 दिसंबर के बीच पंचायत से प्रखंड स्तर तक जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में लालू-राबड़ी के साथ-साथ रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह, अब्दुल बारी सिद्दीकी, रामचन्द्र पूर्वे आदि पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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