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लॉकडाउन: नीतीश कुमार ने की सहायता पैकेज की घोषणा

आज 1, अणे मार्ग स्थित संकल्प में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस से उत्पन्न संक्रमण की गंभीर स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा तथा मुख्य सचिव दीपक कुमार समेत वरीय अधिकारीगण मौजूद थे।
इस उच्चस्तरीय बैठक में लॉकडाउन के परिप्रेक्ष्य में लोगों को सहायता पैकेज देने के संबंध में पांच महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इस प्रकार हैं – पहला, सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक माह का राशन मुफ्त में दिया जाएगा। दूसरा, सभी प्रकार के पेंशनधारियों (मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन) को अगले तीन माह की पेंशन राशि अग्रिम तौर पर तत्काल दी जाएगी। यह राशि उनके खाते में सीधे अंतरित की जाएगी। तीसरा, लॉकडाउन क्षेत्र के सभी नगर निकाय क्षेत्रों एवं प्रखंड मुख्यालय की पंचायत में अवस्थित सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक हजार रुपए प्रति परिवार दिया जाएगा। यह राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित की जाएगी। चौथा, वर्ग 1 से 12 तक के सभी छात्र/छात्राओं को देय छात्रवृत्ति 31 मार्च 2020 तक उनके खाते में दे दी जाएगी तथा पांचवां, सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को एक माह के वेतन के समतुल्य प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि लॉकडाउन के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई सलाह का अनुपालन करें। आपके सहयोग से ही इस महामारी से निपटने में सहायता मिलेगी।

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कोरोना: बिहार में लॉकडाउन

कोरोना वायरस से आज पूरी मानव जाति संकट में है। हम सब इस महामारी का डटकर मुकाबला कर रहे हैं। आवश्यक सावधानियां भी बरती जा रही हैं, किन्तु इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति का सचेत रहना नितांत आवश्यक है और इसका सबसे अच्छा उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने आज तत्काल प्रभाव से 31 मार्च तक के लिए सभी जिला मुख्यालयों, अनुमंडल मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यालयों एवं नगर निकायों में लॉकडाउन का निर्णय लिया। राज्यवासियों के नाम जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने और आमलोगों की सुरक्षा के लिए इसे आवश्यक बताया।
ध्यातव्य है कि लॉकडाउन के दौरान निजी प्रतिष्ठान, निजी कार्यालय एवं सार्वजनिक परिवहन पूर्णत: बंद रहेंगे परंतु आवश्यक एवं अनिवार्य सेवाओं से संबंधित प्रतिष्ठान जैसे चिकित्सा सेवाओं, खाद्यान्न एवं किराने के प्रतिष्ठान, दवा की दुकानों, डेयरी एवं डेयरी से संबंधित प्रतिष्ठान, पेट्रोल पम्प एवं सीएनजी स्टेशन, बैंकिंग एवं एटीएम, पोस्ट ऑफिस तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि सेवाओं एवं इन सेवाओं के लिए उपयोग किए जा रहे वाहनों को इस आदेश की परिधि से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों से अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही इस मुहिम में अपना पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि जब भी संकट का समय आया है हमने सभी लोगों के सहयोग से उस पर विजय पाई है। संकट की इस घड़ी में सरकार सभी लोगों के साथ है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करने में सक्षम होंगे। मैं सब लोगों से अपील करूंगा कि आप सब अपने घर के अंदर रहें, इधर-उधर अनावश्यक आने-जाने की जरूरत नहीं है। कोरोना से संबंधित सारी चीजों की जानकारी दी जा रही है। हम सब मिलकर इस परिस्थिति का मुकाबला कर सकते हैं और इसमें हम कामयाब होंगे।

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निर्भया के मामले में उसकी माँ को क्यों मिला मुश्किल से न्याय

निर्भया कांड के चारों गुनहगारों को जोड़कर आजाद भारत में फांसी के फंदे पर लटकने वालों की कुल संख्या 724 हो गई। देश में पहली फांसी महात्मा गांधी के हत्यारों गोडसे एवं आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला सेंट्रल जेल में दी गई थी तथा अंतिम फांसी निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को 20 मार्च 2020 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में दी गई।

बता दें कि निर्भया के माता-पिता के अटूट संकल्प व संयम के चलते और कोर्ट के कानूनी दांव-पेंच के बीच लगे व जगे रहने के कारण ही… लगभग 7 वर्ष 3 महीने से अधिक समय तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार छह दुष्कर्मियों में से चार को ही फांसी पर लटकाया गया। एक तो जेल में ही खुदकुशी कर ली थी और दूसरे को नाबालिग का लाभ मिल गया।

यह भी बता दें कि जब 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली की सर्द रात में छह  दुष्कर्मियों ने निर्भया को अपना शिकार बनाया था तो ऐसा लगा कि सारा देश ठहर सा गया। निर्भया द्वारा अंतिम सांस लेने के बाद उसकी माँ “आशा” भारत की सारी माँओं की आशा बनकर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाती रही और न्याय पाने के लिए बिलबिलाती रही। इस दरमियान यदा-कदा थक जाने के चलते हलचल काफी कम हो जाया करती तथा घर में अकेले निर्भया की तस्वीर के सामने बैठना उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। मार्च 20 (शुक्रवार) को सवेरे 5:30 बजे फांसी की जानकारी के साथ निर्भया के माता-पिता को सुकून मिला और भारत की समस्त महिलाओं को खुशी मिली।

यह भी बता दें कि कई बार डेथ वारंट निकलने और फांसी की तिथि तय होने के बावजूद कोई ना कोई कानूनी पेच फंस ही जाता। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतिम तिथि 17 जनवरी को दया याचिका ठुकराई, फिर भी फांसी पर लटकने में दोषियों के वकील ने 70 दिन से अधिक समय जाया कर दिया।

चलते-चलते यह भी जानिए कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से जब निर्भया के मामले वाले दुष्कर्मियों को फांसी दिए जाने के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों एवं भारतीय सांसदों को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। केवल फांसी से ऐसे अपराध की पुनरावृति रुकने वाली नहीं है। परन्तु, हमारी कोशिश हो कि इस तरह के क्रूरतम अपराध फिर नहीं हो…. क्योंकि कोशिश का दुनिया में कोई विकल्प नहीं है…।

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डॉ.मनीष मंडल ने ब्रेन डेड घोषित रोहित के अंगों का दान ठिकाने लगाकर मिसाल पेश की

नौंवी कक्षा के 17 वर्षीय छात्र रोहित ने बचपन में ही अपने समाजसेवी पिताश्री रवीन्द्र कुमार से प्रेरित होकर मृत्योपरांत  अंगदान करने का फैसला खुद ही लिया था। परंतु, दुर्भाग्यवश 7 मार्च को ही मुजफ्फरपुर के कांटी में हुई स्कॉर्पियो और ट्रैक्टर की दुर्घटना में रोहित बुरी तरह घायल हो गया। भले ही रोहित की जान नहीं बच सकी, लेकिन रोहित के घर वालों ने उसके अंगदान करनेवाली इच्छा की पूर्ति करने के लिए आइजीआइएमएस के अधीक्षक डॉ.मनीष मंडल से सहयोग प्राप्त कर रोहित को अमरत्व प्रदान कर दिया।

बता दें कि मृत्यु के बाद रोहित के माता-पिता ने उसके किडनी, लीवर, हृदय तथा उसकी दोनों आंखों की काॅर्निया दान करने का निर्णय लिया… जिसके फलस्वरूप जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे छह लोगों को नया जीवन मिलने जा रहा है यानि दो आंखें, दो किडनियाँ, एक हार्ट और एक लीवर।

जानिए कि रोहित के ‘हृदय’ को ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट की देखरेख में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पूरी सुरक्षा के साथ कोलकाता भेज दिया गया जहां एक बच्चे में रोहित का हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया गया। दो किडनियों में एक को गत बुधवार को ट्रांसप्लांट कर दिया गया और दूसरी को एक दिन बाद वेटिंग लिस्ट के मरीज के लिए जीवन बचाने हेतु रखा गया है। दोनों आंखें भी आइजीआइएमएस के आई बैंक में सुरक्षित रख दिया गया है।

यह भी कि रोहित का लीवर एक 47 वर्षीय बिहारी मूल के व्यक्ति को आइजीआइएमएस में ही लगाया गया जो नीतीश सरकार के कार्यकाल का “पहला लिवर ट्रांसप्लांट” के रूप में सदा रोहित की याद बिहार वासियों को दिलाता रहेगा। रोहित के इस अंग दान एवं डॉ.मनीष के प्रयास से छह लोगों को नई जिंदगी मिलेगी…. और समाज के दूसरे लोगों को अंगदान करने की प्रेरणा…।

चलते-चलते यह भी कि आइजीआइएमएस के अधीक्षक डॉ.मनीष मंडल द्वारा पूर्व में भी कई बार पटना ट्रैफिक पुलिस से भरपूर सहयोग ले-लेकर ग्रीन कॉरिडोर बनाते हुए जीवन दायिनी मानव अंगों को कभी कोलकाता तो कभी दिल्ली भेजा जाता रहा है। मधेपुरा के लोकप्रिय शिशु चिकित्सक डॉ.अरुण कुमार मंडल के ऐसे सपूत डॉ.मनीष मंडल के प्रति मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि आगे आने वाले दिनों में डॉ.मनीष बिहार का नायक ही नहीं कहलायेगा, बल्कि स्वास्थ्य कल्याण के क्षेत्र में भारत का महानायक बनेगा।

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47वीं शहादत पर याद किए गए शहीद सदानंद

एक ओर तो संसार के सभी देश चीन से निकले कोरोना वायरस से आम आवाम को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहा है और दूसरी ओर 1974 के जेपी आंदोलन में शहीद हुए सदानंद की 47वीं शहादत पर आंदोलन में संघर्षरत रहने वाले विजय कुमार वर्मा, डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, इन्द्र नारायण प्रधान, जय किशोर यादव, रमन सिंह, परमेश्वरी प्रसाद निराला, उत्तम प्रसाद यादव, प्रसन्न कुमार, अनिल कुमार के साथ-साथ राजेंद्र यादव, डॉ.विजेंद्र, जयकांत, अमरेश आदि ने उस शहीद को सादगी के साथ याद किया।

बता दें कि सदर एसडीएम कार्यालय गेट के सामने 1974 के 19 मार्च को शहीद हुए सदानंद की स्मृति स्मारक पर सबों ने अपने साथ लाये पुष्पों का अर्पण किया। जेपी सेनानी विजय वर्मा ने मीडिया से कहा कि पीएम सेनानियों को ट्रेन में आने-जाने की सुविधा प्रदान करें वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम द्वारा दिए जा रहे सम्मान पर रोक लगाए जाने को पूर्व एमएलसी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

इस अवसर पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि आजादी से पूर्व जहां मधेपुरा में दो शहीद हुए- एक शहीद बाजा साह और दूसरा शहीद चुल्हाय यादव, वहीं आजादी के बाद जेपी आंदोलन में मधेपुरा से मात्र एक शहीद सदानंद हुए। डॉ.मधेपुरी ने बताया कि इन तीनों शहीदों को जिन्हें भारतीय सेना में हुए मधेपुरा के 3 शहीदों के साथ “शहीद पार्क” में स्थापित किया गया है… वे सदा जिले के संघर्षशील युवाओं को आत्मरक्षा, देश की सुरक्षा एवं अन्याय के खिलाफ लड़ने हेतु प्रेरित करते रहेंगे।

चलते-चलते यह भी कि करोना के कहर को याद रखते हुए तथा प्रशासन के निर्देशानुसार 50 से अधिक लोग एक साथ इकट्ठा ना हो….. को भी ध्यान में रखते हुए 25 से 30 लोग पुष्पांजलि अर्पित करते हुए आगे-पीछे आते-जाते रहे। संपूर्ण कार्यक्रम 20 से 25 मिनट में समाप्त हो गया।

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कोरोना को हराने के लिए कोरोना से लापरवाही करो ना- डॉ.मधेपुरी

आज वैश्विक समस्या बन गया है चीन का कोरोना वायरस ! मंदी और मौत का दरवाजा खोल दिया है कोरोना वायरस ! संसार के कई देशों में कर्फ्यू लगा दिया है कोरोना वायरस ! मंदिरों में ताला लगवा दिया है कोरोना वायरस…। ये बातें कोसी आईटीआई में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था सृजन दर्पण के अध्यक्ष व सचिव द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कही।

बता दें कि कोरोना पर आयोजित विचार गोष्ठी में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि दुनिया में अब तक 6705 लोगों की जान इस वायरस ने ले ली है। उन्होंने कहा कि विश्व के 195 देशों में 158 देश के 1 करोड़ 74 लाख लोग आज संक्रमित हैं।

सृजन दर्पण के अध्यक्ष डॉ.ओम प्रकाश व सचिव विकास कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस से देश व समाज को जागरूक होना चाहिए, भयभीत नहीं। “कोरोना को हराना है…. जिंदगी को बचाना है” के साथ-साथ योग क्रियाओं की चर्चा करते हुए डॉ.एनके निराला एवं संगीत-साहित्य व कविता के माध्यम से प्रो.योगेंद्र नारायण यादव, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं अन्य ने अपने विचार व्यक्त किए।

बीएन मुस्टा के महासचिव एवं सीनेटर डॉ.नरेश कुमार ने ‘सेल्फ क्वॉरेंटाइन’ पर चर्चा करते हुए कहा कि जागरूकता ही कोरोना को हटाने का महत्वपूर्ण हथियार है। इस अवसर पर शौकत अली, बैजनाथ यादव, डॉ.आलोक कुमार, प्रो.अभिनंदन, प्रो.अरुण कुमार ने विचार व्यक्त किया। मौके पर सृजन दर्पण कर्मी सुशील, पुष्पा, मनीषा, अंजलि, रूपा, रितिका, कृतिका ने मास्क लगाकर लोगों को जागरूक रहने की बातें बताई।

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एक महिला आईएएस ने पहली बार सरकारी अस्पताल में प्रसव करा कर इतिहास रचा

गोड्डा जिले के डीसी के रूप में कार्यरत महिला आईएएस श्रीमती किरण कुमारी पासी के पति श्री पुष्पेंद्र सरोज गोड्डा के पुंसिया स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में डीन के पद पर कार्यरत हैं। सरकारी अस्पताल में पहली बार किसी आईएएस ने प्रसव कराया है… यह संदेश समाज के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।

बता दें कि आज की तारीख में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री की बात तो छोड़िए… विधायक भी अपना इलाज या ऑपरेशन अपने क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में नहीं कराते हैं। यही कारण है कि वे इन अस्पतालों में जन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान नहीं देते। यदि मंत्री, विधायक या सांसद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने लगे और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने लगे तो धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। तब सरकारी स्कूलों एवं अस्पतालों को ठीक होने में कितना समय लगेगा ?

जानिए कि जनहित में विकास के प्रति समर्पित डीसी किरण कुमारी पासी को अपने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर इतना गहरा विश्वास था कि उन्होंने नि:संकोच होकर गोड्डा केे ही सदर अस्पताल में अपना दूसरा शल्य प्रसव कराया। प्रसव कराने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.प्रभारानी प्रसाद की टीम ने डीसी को थैंक्स करते हुए यही कहा कि क्षेत्र के लिए आपके द्वारा किए गए विकास कार्यों पर आपकी गहरी विश्वास के फलस्वरूप ही शल्य प्रसव बड़ी ही आसानी से कराया जा सका।

यह भी कि दूसरा शल्य प्रसव रहने से सचेत थी मेडिकल टीम। शल्य प्रसव के बाद 48 घंटे के परीक्षण में डीसी श्रीमती पासी के साथ बालक शिशु को डॉक्टरों की मेडिकल टीम की देखरेख में सदर अस्पताल में ही रखा गया। चिकित्सक डॉ.प्रभा के अनुसार जच्चा एवं बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।

 

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कोरोना वायरस पर बिहार सरकार की बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। बिहार विधानसभा में कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज पर होने वाले सारे खर्च का भुगतान मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से राज्य सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में किसी भी व्यक्ति की कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही कहा कि कोरोना वायरस से मौत होने की स्थिति में मृतक के निकटतम संबंधी को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि शिक्षकों और सरकारी कर्मियों को भी इस रोग के बचाव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से खतरे को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है और इसके संक्रमण को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और इसके इलाज के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है एवं सरकारी जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में पृथक वार्ड और जीवन रक्षक की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग को सौ अतिरिक्त वेंटीलेटर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है और उसपर काम शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सीमावर्ती देश नेपाल और राज्य उत्तर प्रदेश में इस रोग के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों से विदेशों में लोगों का आना-जाना लगा रहता है जिससे यहां भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पटना और गया हवाई अड्डे पर प्रभावित देशों से आने वालों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही बिहार और नेपाल की सीमा पर 49 स्थानों पर आने वाले यात्रियों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है एवं प्रभावित देशों से आने वालों को अलग से रखने की जाने की व्यवस्था की जा रही है और इसके लिए पटना स्थित होटल पाटलिपुत्र अशोक को इसके लिए चुना गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि संक्रमण को रोकने के उपायों के तहत शिक्षण संस्थाओं, सिनेमा हॉल और सार्वजनिक पार्को को 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है। माध्याह्न भोजन की राशि बच्चों के अभिभावकों के खाते में देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्रकार के सरकारी आयोजनों को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विभागों के समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ कर्मियों को एक दिन छोड़कर कार्यालय आने का निर्देश दिया गया है ताकि कार्यालय परिसरों में भीड़ से बचा जा सके।

बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के आखिरी दिन नीतीश कुमार ने कहा कि इस रोग को लेकर कहीं से सभी कोई सूचना मिलने पर हमारे कार्यालय में भी लोग फोन कर सकते हैं और उसकी हम व्यवस्था करेंगे। उल्लेखनीय है कि बजट सत्र 31 मार्च तक चलना था लेकिन कोरोना वायरस के चलते समय से पूर्व ही सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का फैसला किया गया। कोरोना वायरयस को लेकर बिहार के 4-5 जिलों में धारा 144 लगाए जाने के बारे में बिहार विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं कि इसकी आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि गलतफहमी के कारण ऐसा किया गया क्योंकि यह कोई कानून व्यवस्था का मामला तो है नहीं।

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कोरोना के कहर से कोने-कोने में कोहराम

जहां कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण की चिंता ने शेयर बाजार में कोहराम मचा दिया है वहीं कोरोना वायरस से बिहार को बचाने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, कोचिंग, आंगनबाड़ी केंद्र, सिनेमा हॉल से लेकर म्यूजियम तक को भी बंद करा दिया है। मिड-डे मील की जगह उसकी राशि छात्रों-अभिभावकों के खातों में भेज दी जाएगी।

इतना ही नहीं, बिहार दिवस समारोह से लेकर पंचायत उपचुनाव और वर्ग 1 से 8 तक की परीक्षाएं भी रोक दी गई हैं। वहीं वनडे क्रिकेट रद्द किया गया तो कहीं 15 अप्रैल तक आईपीएल टाल दिया गया।  कहीं स्विमिंग पूल बंद कर दिया गया तो कहीं पार्क और जू तत्काल 31 मार्च तक आपको बंद मिलेगा।

यह भी जानिए कि स्पोर्ट्स एवं कल्चरल इवेंट्स पर ही रोक नहीं लगी है बल्कि पटना के एस के मेमोरियल हॉल, ज्ञान भवन और बापू भवन सरीखे हॉल तक की बुकिंग भी 31 मार्च तक के लिए रद्द कर दी गई है। इतना ही नहीं, सरकारी कार्यालयों में भीड़-भाड़ कम करने तक पर विचार किया जाने लगा है कि कर्मियों की उपस्थिति के मामले में अल्टरनेट व्यवस्था की जाय यानी एक दिन कुछ कर्मी आए तो दूसरे दिन दूसरे कर्मी। किसी-किसी कार्यालय के प्रधान द्वारा तो कर्मियों को घर पर ही काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

यह भी कि विश्वस्तरीय निशानेबाजी और इंडियन ओपन गोल्फ जैसी खेल प्रतियोगिताएं भी स्थगित कर दी गई हैं जबकि ओपन बैडमिंटन सहित कुछ और टूर्नामेंट का आयोजन तो दर्शकों की गैरमौजूदगी में ही किया जाएगा। ऐसे-ऐसे निर्णय इसलिए लिए जा रहे हैं कि विगत बुधवार को डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस के संक्रमण को महामारी घोषित कर दिया है। डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। सरकार सतर्क है। लोग जागरूक रहें… सहयोग करें… डरने की जरूरत नहीं है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पीएम, सीएम से लेकर डीएम नवदीप शुक्ला की पूरी टीम भी कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर चौकन्ना है, चौकस है… तभी तो बिहार दिवस के आयोजन हेतु बुलाई गई बैठक से लेकर मधेपुरा के डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क  को भी डीएम के आदेश पर बंद कर दिया गया है।

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पत्नी को उठाकर दौड़ने वाले चैंपियनशिप में 150 पति दौड़े

यह एक विचित्र खेल है जिसमें प्रत्येक पति अपनी पत्नी को उठाकर बाधाओं के बीच दौड़ लगाने वाले चैंपियनशिप में भाग लेता है। शर्त यही कि पत्नी का वजन कम से कम 50 किलो होना ही चाहिए। इस दौड़ चैंपियनशिप में विशेष सुविधा भी प्रदान की जाती है कि यदि प्रतिभागी पति को पत्नी नहीं हो तो वह इस विचित्र खेल के नियमानुसार पत्नी उधार भी ले सकते हैं।

बता दें कि ऐसे प्रत्येक प्रतियोगिता के लिए नए नियमों एवं पुरस्कारों में परिवर्तन किए जा सकते हैं। इस विचित्र खेल में विजेता को पत्नी के वजन (किलोग्राम में) का 300 से 500 गुना तक नगद भुगतान देकर पुरस्कृत किया जाता है।

यह भी जानिए कि ब्रिटेन की 300 साल की इस पुरानी रेस में अकेले नहीं बल्कि पत्नी को पीठ पर बिठाकर दौड़ने वाला चैंपियनशिप आरंभ हुआ था। विगत रविवार को डार्किंग में 400 मीटर का यह रेस आयोजित किया गया था जिसमें लगभग डेढ़ सौ यानी 150 पति दौड़े। दिलचस्प बात यह है कि रेस जीतने के लिए महिलाएं 3 महीने पूर्व से ही अपना वजन कम करने में लगी थी ताकि वह 50 किलोग्राम के करीब आ जाए।

यह भी बता दें कि इस विचित्र खेल में विजेता को ट्रॉफी के अतिरिक्त ₹15000 का पुरस्कार दिया गया। 300 साल से चलने वाली यह प्रतियोगिता बीच में बंद कर दी गई थी जिसे 13 साल पहले दोबारा शुरू किया गया। इसे पुनः शुरू करने का मकसद यही है कि लोगों को एक जगह इकट्ठा कर खुशियां बांटी जाय।

चलते-चलते यह भी जान लीजिए कि यह विचित्र खेल (वाइफ कैरेइंग रेस) फिनलैंड, अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इंडिया, हांगकांग आदि के साथ-साथ अब विश्व के अन्य देशों में भी तेजी से फैलता जा रहा है।

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