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देश को फिर एक बार जरूरत है संपूर्ण भारतीय डॉ.कलाम की- डॉ.मधेपुरी

सोचिए तो सही जिसे पद की ऊंचाई छू ना सका हो, जिसके जीवन में एक बार झांक लेने मात्र से ही गीता का कर्मयोग समझ में आ जाता हो और जिसके जीवन का हर पल सहजता व साधना का पर्याय बनकर भारत से यही कहता रहा हो कि बच्चे नैतिकवान होंगे तो भारत मजबूत बनेगा- ऐसी सोच वाले संपूर्ण भारतीय भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की जरूरत देश एक बार फिर महसूसने लगा है। ये बातें भारतरत्न डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने आज अपने ‘वृंदावन’ निवास पर उनकी 90वीं जयंती के अवसर पर खेल गुरु संत कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार की टीम को संबोधित करते हुए कही।

इस बार कोरोना के चलते डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क की बंदी के कारण इस कार्यक्रम को डॉ.मधेपुरी ने अपने वृंदावन निवास पर आयोजित किया और जिले के बालक एवं बालिका कबड्डी के लाइफलाइन अरुण कुमार को पाग, शाॅल आदि से सम्मानित किया। डॉ.मधेपुरी ने अरुण कुमार को कबड्डी के क्षेत्र में राजकीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर जिले को गौरवान्वित करने में लगे रहने हेतु सम्मानित किया है। विगत वर्ष खेल गुरु संत कुमार को डॉ.कलाम पार्क में डॉ.मधेपुरी ने सम्मानित किया था। डॉ.मधेपुरी प्रतिवर्ष उन्हें सम्मानित किया करते हैं जो जिले को गौरवान्वित करने में लगे रहते हैं।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों के बीच लड्डू बांटने के पूर्व गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम के शून्य से शिखर तक की कथा संक्षेप में सुनाई और बैडमिंटन खिलाड़ी प्रियरंजन ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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बिहार होगा मोदीमय या तेजस्वी का आना तय

एक करोड़ नौजवानों को प्रतिवर्ष नौकरी देने और विदेशों में पड़े काले धन को भारत लाकर प्रत्येक भारतीय के बैंक खाते में 15-15 लाख रुपये देने जैसे ढेर सारे लुभावने वादों के बल पर सत्तासीन होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस बार बिहार को मोदीमय बनाने का सपना पूरा होगा या फिर सत्ता पर काबिज होकर लाखों-लाख बेरोजगार नौजवानों को रोजगार के नाम पर पकौड़ा बनाकर बेचने को रोजगार बताने एवं कोरोना काल में लाखों-लाख मजदूरों के हजारों-हजार मील भूखे-प्यासे, रोते-बिलखते, आंसू बहाते और पैदल चलते एवं पटरियों पर सोते हुए परिवार को बेसहारा छोड़कर दुनिया से गुजर जाने वालों की आह के कारण तेजस्वी का आना तय होगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी को कदाचित इस बात का अंदेशा तो नहीं लग गया वरना वे  8 हजार करोड़ का प्लेन अपने लिए अमेरिका से क्यों मंगाते जो आकाश में उड़ते-उड़ते तेल भर लेगा और किसी भी तरह के बम और मिसाइल से उसे सुरक्षित रखेगा जिसे प्रति घंटा आकाश में उड़ने का खर्च डेढ़ करोड़ रुपये के आस-पास होता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि विकास प्रिय नीतीश सरकार की रीढ़ माने जाने वाले अनुभवी व सफल विद्युत मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने तो हाल ही में छिनाल राजनीतिक  व्यवहारों से उबकर इतना तक कह दिया था कि जनहित में काम करने वाली जदयू को हिम्मत के साथ अकेले चुनाव में उतरना चाहिए। ऐसे संकट की घड़ी में समाजसेवी-साहित्यकार व जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने विचार व्यक्त किया कि जदयू के रहनुमाओं को लोहिया-भूपेन्द्र-कर्पूरी जैसों का स्मरण अवश्य करना चाहिए और तब निर्णय लेना चाहिए। अब तो आने वाला समय ही लिए गए निर्णय की सच्चाई से पर्दा उठाएगा।

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काम देखिए, विचार कीजिए और जो आपके लिए काम करे उसे ही काम करने का मौका दीजिए- नीतीश

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को ग्यारह विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं को वर्चुअल रैली के जरिए चुनाव प्रचार का शुभारंभ करते हुए यही कहा-

“पति-पत्नी के 15 साल में 95 हजार लोगों को नौकरियां मिली और हमने 6 लाख लोगों को नौकरियां दी। उन्होंने डीबिया-लालटेन जलवाया और मैं घर-घर बिजली पहुंचाया। मैंने कहा भी था कि जब तक हर घर में बिजली नहीं पहुंचाऊंगा तब तक वोट मांगने नहीं आऊंगा। आज चौबीसो घंटे आपको बिजली मिलती है और आगे हर खेत को बिजली देने की हमारी योजना है….. फिर भी अनुभवहीन विपक्ष सीधे यही कहता है कि हमने आपके लिए कुछ किया ही नहीं…… तो क्या मैंने 15 वर्षों उनकी ही तरह अपने परिवार के लिए ही सब कुछ किया……?”

नीतीश कुमार ने यह भी कहा- मतदातागण ! आप सभी विचार कीजिए और जो आपके लिए कुछ किया हो और आगे भी करे, सोचिए-विचारिए और उसे ही आगे काम करने का मौका दीजिए।

बता दें कि  कि सरकारी खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक बताते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना काल में दूसरे राज्यों में फंसे 21 लाख बिहारियों के खाते में एक-एक हजार रूपये भेजे गए। 20 लाख से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवारों के खाते में 6-6 हजार रुपये भेजे जा चुके हैं। फसल क्षति की भरपाई हेतु 970 करोड़ की स्वीकृति हो चुकी है।

सीएम नीतीश कुमार ने मतदाताओं से अंत में यही कहा कि मेरा काम देख लीजिए, जो भी आपके लिए किया हूं वह किसी से छिपा नहीं है….. पसंद आए तो आगे भी मौका दीजिए ! यह भी कहना चाहता हूं कि दुनिया के किसी भी मुल्क में सभी को सरकारी नौकरी ही मिले….. यह संभव नहीं है। हां ! यह ज्यादा जरूरी है कि युवाओं को स्वावलंबी बनाने का मौका अवश्य मिलना चाहिए। तभी तो राज्य में 10 लाख जीविका समूह के गठनोपरांत 1 करोड़ 20 लाख महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं।

नीतीश ने वर्चुअल रैली समाप्त करते हुए यही कहा कि एससी-एसटी वर्ग के लिए खास प्रावधान किया गया है कि यदि ऐसे परिवार में किसी की हत्या होती है तो उसके परिजन को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उद्यमी महिला को उद्यम लगाने हेतु 10 लाख  दिए जाएंगे जिसमें 5 लाख राज्य सरकार की ओर से अनुदान है। इंटर पास लड़कियों को 25 हजार एवं स्नातक को 50 हजार दिए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में चौक-चौराहों पर सोलर लाइट की व्यवस्था की जाएगी। महिलाओं को सरकारी नौकरियों में हमने 35% का आरक्षण दिया है। महिलाओं के कहने पर ही शराबबंदी की है जिसका लाभ हर परिवार को मिल रहा है।

 

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12-13 अक्टूबर को सीएम नीतीश कुमार शुरू करेंगे वर्चुअल चुनावी सभाएं और 14 से सरजमीनी रैलियाँ

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सूबे के विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान का शुभारंभ आज शाम से करेंगे। जानिए कि 12 अक्टूबर की शाम में वे वर्चुअल रैली का श्रीगणेश करेंगे और 6 जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से संपर्क करेंगे। लगे हाथ 13 की सुबह में 5 जिले के 11 सीटों और शाम में 4 जिले के 13 सीटों के मतदाताओं से संपर्क साधेंगे।

बता दें कि नीतीश कुमार 14 अक्टूबर से हेलीकॉप्टर द्वारा सूबे के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में उतरेंगे और रैलियों को संबोधित करेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार वे दो दिनों में लगभग तीन दर्जन विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को संबोधित करेंगे।

जानकार सूत्रों के मुताबिक जल्द ही एनडीए के लिए पीएम नरेंद्र मोदी एवं सीएम नीतीश कुमार की साझा रैलियां भी होंगी। तीन चरणों में पीएम एवं सीएम द्वारा कुल 12 चुनावी रैलियां साझा की जाएंगी इस बाबत तारीख एवं स्थान की घोषणा शीघ्रातिशीघ्र कर दी जाएगी।

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जानिये मधेपुरा में कहाँ-कहाँ ठहरते थे लोकनायक जयप्रकाश

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के विरुद्ध संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर मधेपुरा से प्रो.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी दो दर्जन युवाओं का नेतृत्व करते हुए 5 मार्च 1975 को दिल्ली पहुंचते हैं। वे अपने साथ प्रखर आंदोलनकारियों- विजय कुमार वर्मा, परमेश्वरी प्रसाद निराला, रामेश्वर प्रसाद यादव, दीनबंधु यादव, इंद्रनारायण प्रधान, उत्तम यादव, धीरेंद्र कुमार, जय किशोर, प्रसन्न, सियाराम, रामचंद्र, विजेंद्र, टेंगारी… .  आदि को लेकर तत्कालीन राजसभा सदस्य भूपेन्द्र नारायण मंडल के दिल्ली निवास 32 अशोक रोड पर ठहरते हैं। डॉ.मधेपुरी बताते हैं कि ऐसा लगता था जैसे सारा भारत ही जेपी के “दिल्ली चलो” आह्वान पर दिल्ली पहुंच गया हो।

डॉ.मधेपुरी ने जेपी को उनके जन्मदिन (11 अक्टूबर) पर याद करते हुए मौजूद बच्चों से यही कहा कि कभी  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने जेपी के लिए लिखा था-

जयप्रकाश नाम है देश की चढ़ती हुई जवानी का…..

आगे डॉ. मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा के विद्वान एवं वरिष्ठ वकील रहे कमलेश चरण भादुरी ने उन्हें बताया था कि जब 1953 में मधेपुरा-भागलपुर संसदीय क्षेत्र के बाय-इलेक्शन में जेबी कृपलानी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से उम्मीदवार बनाए गए थे तो भादुरी जी के घर में चुनाव प्रचार हेतु ठहरा करते थे- जयप्रकाश नारायण, डॉ.राम मनोहर लोहिया, अशोक मेहता, सुचेता कृपलानी, मधु लिमये…. आदि। कर्पूरी ठाकुर चुनाव प्रभारी एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल स्टार प्रचारक थे।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने बताया कि उन्होंने एसएनपीएम स्कूल के छात्र रहते हुए स्कूल के मैदान में जेपी और प्रभावती को चरखा चलाने के बाद लोगों से बातें करते हुए देखा और सुना। इतना ही नहीं, संपूर्ण क्रांति आंदोलन के दौरान जब जेपी का मधेपुरा आगमन हुआ था तो आंदोलनकारियों से बातें करने के बाद वे स्वतंत्रता सेनानी-वकील शशिनाथ राय के निवास पर ठहरते थे।

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कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सूबे में न दशहरे का आयोजन होगा और न लगेगा कहीं मेला

चारों तरफ कोरोना महामारी के कोहराम की वजह से इस बार ईद से लेकर रामनवमी और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों की रंगत फीकी पड़ गई है। और तो और कोरोना संक्रमण के साथ-साथ दुर्गा पूजा दशहरा के आयोजनों एवं मेले को विधानसभा चुनाव की गहमा-गहमी भी निकलने में लगी है।

बता दें कि बिहार सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर शुक्रवार को गाइडलाइन जारी कर दिया है- इस बार दशहरा का आयोजन नहीं होगा। कोरोना के कारण सूबे बिहार में कोई मेला नहीं लगेगा। इसके साथ-साथ लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दिया गया है। सामूहिक प्रसाद वितरण पर भी रोक रहेगी। पंडाल का निर्माण भी नहीं किया जा सकता है। गृह विभाग ने इस बाबत विस्तार से दिशा निर्देश जारी किया है।

दिशा निर्देश में विशेष निर्देश या भी दिया गया है कि रावण दहन का कार्यक्रम सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि कोरोना काल में कहीं भी भीड़ जमा नहीं किया जा सकता। जारी किए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आपदा-प्रबंधन अधिनियम की धारा 51-60 के प्रावधानों के अतिरिक्त भादवि की धारा 188 व अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चलते-चलते यह भी जानिए कि दुर्गा पूजा के आयोजनों पर रोक लगने के कारण राजधानी पटना के टेंट कारोबारियों को मायूस होना पड़ा। क्योंकि, इस बार भी पूजा पंडाल व्यवसायी फरवरी-मार्च में ही टेंट सजावट सामग्रियों की खरीदारी में पूंजी फंसा चुके थे और कोरोना के चलते उन पंडाल व्यवसायियों को अब अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।

 

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मुख्यमंत्री नीतीश ने केंद्रीय मंत्री रामविलास के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की

भारतीय राजनीति के बड़े हस्ताक्षर, प्रखर वक्ता, कुशल प्रशासक, लोकप्रिय राजनेता, मजबूत संगठनकर्ता एवं अत्यंत मिलनसार व्यक्तित्व के धनी केंद्रीय उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे लोकसभा सदस्य के लिए पहली बार हाजीपुर से 1977 में चुने गए थे और उनकी जीत इतने अधिक मतों से हुई थी कि वह जीत वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुई थी।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से अपनी आत्मीय संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि पासवान जी से हमारा बेहद पुराना रिश्ता था। केंद्रीय मंत्री एवं लोकप्रिय राजनेता रामविलास पासवान जी के निधन से मुझे व्यक्तिगत तौर पर काफी दुख पहुंचा है। उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

सूबे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री व लोकप्रिय राजनेता रामविलास पासवान की आत्मा को शांति तथा उनके परिजनों को दुख की घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने हेतु ईश्वर से प्रार्थना की है।

इसके अलावा पटना से लेकर दिल्ली तक की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के आलाधिकारियों एवं राष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री और महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भी शोक संवेदनाएं व्यक्त की गई। मधेपुरा में 70 के दशक में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ लीडर समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के मधेपुरा निवास पर उनके अत्यंत करीबी समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से पहली मुलाकात हुई थी तत्कालीन एस.एस.पी. विधायक रामविलास पासवान जी की, जिन्होंने मौसम वैज्ञानिक रामविलास जी के निधन को अपूरणीय क्षति कहा और शोकाकुल होकर उनकी आत्मा को शांति देने हेतु ईश्वर से प्रार्थना की।

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दिवंगत राजनेता रघुवंश प्रसाद सिंह के पुत्र सत्य प्रकाश सिंह जदयू में हुए शामिल

लोहिया-कर्पूरी की राह के राही एवं गरीबों के रहनुमा के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त राजनेता व केंद्रीय मंत्री रह चुके राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह जब दिल्ली में जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे, उसी बीच में रामा सिंह (पूर्व सांसद) के आरजेडी में शामिल किए जाने के विरोध में रघुवंश बाबू ने अंतिम समय में राजद से इस्तीफा दे दिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपने गृह जिला वैशाली के लिए पत्र लिखकर जनहित के लिए कुछ मांगे भी की।

बता दें कि जननायक कर्पूरी के जाने के बाद राजद का  एक स्तंभ बनकर पार्टी को आंधी-तूफान में भी किनारा लगाते रहे रघुवंश बाबू। दुनिया को अलविदा कहने के बाद रघुवंश बाबू के बेटे सत्य प्रकाश को तिरस्कृत कर रामा सिंह की पत्नी को राजद से विधानसभा का टिकट दिए जाने के बाद दिवंगत राज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के बेटे सत्य प्रकाश सिंह ने जेडीयू में शामिल होने का मन बनाया और जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने उन्हें सदस्यता दिलाई और पार्टी में शामिल करवाया। सत्य प्रकाश को महामहिम राज्यपाल के कोटे से एमएलसी बनाए जाने की भी चर्चा राजनीतिक गलियारे में सुनाई देने लगी है।

चलते-चलते यह भी कि कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि यह अत्यंत खुशी का पल है। जीवन के अंतिम क्षणों में भी रघुवंश बाबू ने आम लोगों की ही चिंता की और जनहित के कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा था।

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विश्व शिक्षक दिवस (5 अक्टूबर) से जुड़ी समस्याओं के निदान का लक्ष्य वर्ष 2030 तक

संसार में विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त है। शिक्षकों की समस्याओं में सुधार लाने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने का निर्णय 1966 में यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन दोनों मिला कर लिया था। परंतु, 1994 में यूनेस्को की सिफारिश पर लगभग 100 देशों के समर्थन के बाद से ही विश्व शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर से मनाए जाने की शुरुआत हो गई।

बता दें कि इस दिन छात्र अपने शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी विशेष योगदान के लिए सम्मानित करते हैं। प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर को यूनिसेफ, यूएनडीपी एवं अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन आदि द्वारा संयुक्त रूप से “विश्व शिक्षक दिवस” कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों को जानने एवं उससे जुड़ी समस्याओं को पहचानने हेतु वर्ष 2030 तक का लक्ष्य रखा है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि प्रतिवर्ष विश्व शिक्षक दिवस का एक ‘थीम’ होता है। इस वर्ष 2020 में विश्व शिक्षक दिवस का थीम है- “टीचर्सः लीडिंग इन क्राइसिस रीइमेजिंग द फ्यूचर।” यह भी कि समाज को बेहतर बनाने में शिक्षक वह जरिया होता है जो शिष्य को उसकी मंजिल तक पहुंचाता है, परंतु आज गुरु-शिष्य के रिश्ते में दूरी आ गई है। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भी अपनी कविता में इस तरह का भाव व्यक्त किया है-

शिक्षक समाज का सृजनहार, रे रक्षक रहवर रखवाला

कल तक था विद्यादानी वह, धन लूट न घर भरने वाला

आज क्या हुआ गुरु को, क्यों व्यसनों का दास हो गया

गुरु-शिष्यों के बीच फासला, धरती से आकाश हो गया

 

 

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बिहार की राजधानी पटना में 207 कोरोना संक्रमित जबकि सूबे में कोरोना के 983 नए मरीज मिले

कई महीने बीत गए अब जाकर बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या में गिरावट आई है। लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या 1000 के पार ही रहती रही और अब 4 अंक से नीचे उतरकर 3 अंकों में सर्वप्रथम देखने को मिला है।

बता दें कि बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से ताजा अपडेट जारी की गई है, जिसके अनुसार विगत 24 घंटे में कोरोना के 1000 से कम मामले यानि 983 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके साथ ही सूबे बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1 लाख 86 हजार 690 हो गई है

बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी शीर्ष पर है और सूबे की राजधानी पटना में कोरोना का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक बार फिर से राजधानी पटना में कोरोना संक्रमितों की संख्या सर्वाधिक हो गई है यानि दो सौ के पार चली गई है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि सूबे के सभी जिलों में पूर्णिया के अलावे किसी जिले में अर्धशतक भी नहीं पार किया है। जहां पटना डबल सेंचुरी पार कर 207 संक्रमितों को ले आया है, वहीं पूर्णिया 51 और कोसी प्रमंडल के तीनों जिले- मधेपुरा 34, सहरसा 24 एवं सुपौल 38 पर ही सिमट गया है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा दी गई चेतावनी के बाद भी लोग मास्क लगाने की अनिवार्यता को समझ नहीं पा रहे हैं।

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