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बिहार में दो उपमुख्यमंत्री पहली बार और नीतीश ने सीएम की शपथ ली सातवीं बार

नीतीश बनने जा रहे हैं बिहार के दूसरे ‘केसरी’ पर कमी खलेगी सुमो की। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार तो मुख्यमंत्री बन गए सातवीं बार, परंतु सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीतीश तो वहीं रह गए और भाजपा ने पूरे घर को ही बदल दिया। राजनीति के गलियारों में फिलहाल यही आवाज गूंजती हुई सुनी जा सकती है कि क्या नीतीश-सुमो जैसा तालमेल नए उप मुख्यमंत्री द्वय (तार किशोर व रेणु देवी) बना पाएंगे या फिर बारंबार सुशील मोदी की कमी महसूसते रहेंगे नीतीश कुमार।

बता दें कि बिहार केसरी के नाम से विख्यात प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह के बाद सबसे लंबी अवधि तक बिहार के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड सातवीं बार सीएम की शपथ लेने वाले नीतीश के नाम होता दिख रहा है… और वर्तमान कार्यकाल में यदि सब कुछ ठीक रहा तो श्री बाबू को भी पीछे छोड़ देंगे नीतीश कुमार।

जानिए कि वर्तमान नीतीश सरकार में सीएम सहित कुल 15 मंत्रियों को महामहिम राज्यपाल फागू चौहान ने कल शपथ दिलाई है, जिसमें 14 में से 9 चेहरे नये हैं। जदयू ने तीन पुराने तो भाजपा ने दो पुराने चेहरों को दिया मौका। जदयू के 1990 से ही बिहार को रोशन करने वाले ऊर्जा मंत्री रहे विजेंद्र प्रसाद यादव, विधानसभा अध्यक्ष रह चुके विजय कुमार चौधरी जो पूर्व में कृषि मंत्री भी रहे हैं तथा तीसरे पुराने चेहरे हैं अशोक चौधरी जो पिछली एनडीए सरकार में भवन निर्माण मंत्री भी थे वहीं भाजपा ने पिछली सरकार में मंत्री रहे मंगल पांडे को मंत्री तथा एनडीए सरकार में कला संस्कृति एवं युवा मामले के मंत्री रह चुकी रेणु देवी को उप मुख्यमंत्री का पद दिया है।

यह भी कि सातवीं बार बिहार की बागडोर संभालने वाले नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मिथिलांचल का दबदबा है। जानिए कि 14 मंत्रियों में केवल मिथिलांचल के ही 5 मंत्री हैं। साथ ही नीतीश मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 5 विधान पार्षद होंगे जिसमें मंगल पांडे और संतोष सुमन दोनों मंत्री पूर्व से विधान पार्षद हैं और दो मंत्री अशोक चौधरी और मुकेश सहनी तो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। इन दोनों को भी कदाचित विधान परिषद के सदस्य मनोनीत कर लिए जाएंगे।

चलते-चलते यह जान लीजिए कि नीतीश सरकार जनता की सरकार है और 5 वर्षों तक जनहित के कार्यों में जुटी रहेगी, क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दोनों एकजुटता का संदेश देने के लिए ही तो आए थे।

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सातवीं बार बिहार के सीएम बने नीतीश कुमार

नीतीश की सातवीं शपथ के लिए सारा बिहार कर रहा था 4:00 बजे का इंतजार। बिहार के राजभवन में संध्या 4:30 बजे सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार। उन्हें मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई महामहिम राज्यपाल फागू चौहान ने।

बता दें कि राजभवन में एक  ओर मंचासीन दिखे शपथ दिलाने वाले महामहिम राज्यपाल और  सातवीं बार सीएम के पद की शपथ लेनेे वाले नीतीश कुमार। दूसरी ओर सामनेे की प्रथम पंक्ति में मौजूद दिखे- गृृृह मंत्री  अमित शाह, जेपी नड्डा, भूपेन्द्र यादव, वशिष्ठ नारायण सिंह, सुशील कुमार मोदी, आरसीपी सिंह, नरेंद्र नारायण यादव, डॉ.अमरदीप यादव….  आदि विशिष्ट जनों के साथ-साथ शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रीगण।

यह भी बता दें कि कार्यक्रम आरंभ होने से पूर्व राष्ट्रगान की धुन के साथ सभी अपने-अपने स्थान पर खड़े हो गए। धुन समाप्ति के साथ ही नीतीश कुमार को सीएम के पद एवं गोपनीयता की शपथ राज्यपाल फागू चौहान ने दिलाई। दो उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद एवं रेणु देवी ने शपथ ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार की बाईं ओर मंचासीन हुए और बाद में शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्रियों सहित पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रह चुके विजय कुमार चौधरी एवं अपने अनुभव से बिहार को रोशन करने वाले बिजली मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को उठकर सम्मान देते देखे गए सीएम एवं डिप्टी सीएम द्वय।

जानिए कि मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सहित कुल 15 मंत्रियों ने शपथ ली। सात बीजेपी कोटे से तथा पांच जदयू कोटे से मंत्री बने। उसी में एक हम पार्टी से और एक वीआईपी से मंत्री बनाए गए। आज जिन 15 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, वे हैं- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, अशोक चौधरी, मेवालाल चौधरी, शीला कुमारी, संतोष सुमन, मुकेश सहनी, मंगल पांडे, अमरेंद्र प्रताप सिंह, रामप्रीत पासवान, जीवेश मिश्रा और रामसूरत राय। अंत में शपथ ग्रहण समारोह की समाप्ति की घोषणा के साथ राष्ट्रगान की धुन पर सभी ससम्मान खड़े हुए दिखे।

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नया बिहार बनाने के लिए कल सीएम पद की शपथ लेंगे- सातवीं बार, नीतीश कुमार !!

बिहार में विधानसभा- 2020 का चुनाव संपन्न हुआ। एनडीए को 125, महागठबंधन को 110 एवं अन्य के खाते में 8 सीटें गई। एनडीए के चारों घटक दलों- जेडीयू, भाजपा, वीआईपी और हम के प्रतिनिधिगण महामहिम राज्यपाल फागू चौहान से आज मिले। एनडीए विधान मंडल द्वारा चयनित नेता नीतीश कुमार ने 125 विधायकों की सहमति पत्र के साथ राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया। कल ‘भैया दूज’ के दिन शाम 4:00 बजे बाद नीतीश कुमार….. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे…. सातवीं बार !!

बता दें कि आज संध्या 4:00 से पहले नीतीश कुमार के आवास पर भाजपा के दिग्गज नेता भूपेन्द्र यादव एवं  देवेंद्र फडणवीस व अन्य दो-दो बार मिले। इस मिलन में चर्चाएं हुई कि कैबिनेट कितना बड़ा होगा… मंत्री कौन-कौन बनेंगे तथा डिप्टी सीएम का पद सुशील मोदी की जगह किन्हीं और को दी जाएगी या वही रहेंगे।

यह भी बता दें कि पूर्व में कभी भी केंद्र से कोई पर्यवेक्षक सरकार गठन के समय नहीं आते थे। पहली बार केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भाजपा नेतृत्व द्वारा बिहार भेजा गया। एनडीए पर्यवेक्षक के रूप में राजनाथ सिंह ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की ताजपोशी का ऐलान तो कर दिया, परंतु डिप्टी सीएम पर चुप्पी साध ली। पूछे जाने पर नीतीश कुमार और सुशील मोदी भी चुप रहे जबकि दोनों के अंदर से यही आवाज निकलती रही———-  ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे।

जानिए कि एनडीए की बैठक में नीतीश कुमार ने खुद मुख्यमंत्री नहीं बनने की बात कही और भाजपा को ही मुख्यमंत्री चुनने को कहा, परंतु राजनाथ सिंह, भूपेन्द्र यादव आदि के कहने पर सीएम बनना स्वीकार किया। पुनः ऐसा लगने लगा है कि सुशील मोदी की जगह दो डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। एक होंगे- भाजपा विधानमंडल के नेता तार किशोर प्रसाद एवं दूसरी होंगी उपनेता श्रीमती रेणु देवी। एक महिला को डिप्टी सीएम बनाने के बाबत यह चर्चा होने लगी है कि इस चुनाव में एनडीए को आधी आबादी का सर्वाधिक मत मिला है, इसलिए प्रथम महिला डिप्टी सीएम के रूप में रेणु देवी को चुने जाने की जोरदार चर्चा हो रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस चर्चा को सुनकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए यही कहा कि एनडीए सरकार के होम करते हाथों को जलने से बचानेवाली आधी आबादी को डिप्टी सीएम का पद दिया जाना सर्वाधिक उचित कदम है….. इसके लिए नमो-नीतीश की जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री चाचा नेहरू की ऐसी उपेक्षा क्यों ?- डॉ.मधेपुरी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान 23 वर्षों तक ब्रिटिश शासन में कारागृह की यातनाएं सहने वाले एवं भारत की बेहतरी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन (14 नवंबर) पर ऐसी उपेक्षा क्यों ? भारत को आजादी दिलाने में सर्वाधिक कुर्बानियां देने वाले चाचा नेहरू को सम्मान देने में भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इतना मुश्किल क्यों हो रहा है ?

बता दें कि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री के जन्म दिवस सह बाल दिवस यानि 14 नवम्बर के दिन स्थानीय प्रतिष्ठित अखबारों में ना तो नेहरु जी का बच्चों के साथ एक भी चित्र कहीं देखने को मिला और ना उनके सम्मान में लिखी एक भी पंक्ति कहीं दिखी। डॉ.मधेपुरी ने पुनः क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि यदि स्थिति इस तरह बिगड़ती चली गई तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा ? क्या बच्चे ऐसी ही दीवाली मनाएंगे या लोकतंत्र के चारों चौखटों पर उम्मीद के दीये जलाएंगे…. ??

चलते-चलते यह भी बता दें कि बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू के अलावे मानवीय सेवाओं को ऊंचाई तक ले जाने वाले भारत रत्न मदर टेरेसा, जगदीश चंद्र बसु, होमी जहांगीर भाभा, सी वी रमण……. आदि को चौथे स्तंभ द्वारा जो सम्मान दिया जाना चाहिए उसमें निरंतर कमी ही नजर आ रही है। बकौल डॉ.मधेपुरी यह कि बच्चे जब तक अपने अतीत को नहीं जानेंगे तब तक वे ना तो अपने भविष्य को गढ़ पायेंगे और ना ही वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ पायेंगे।

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शहीद कैप्टन आशुतोष की देशभक्ति को मधेपुरा सदा याद रखेगा- डॉ.मधेपुरी

आज जिला मुख्यालय स्थित शहीद पार्क में शहीद कैप्टन आशुतोष का नाम शहीदी पट्ट पर जिले के सातवें शहीद के रूप में दर्ज कराया है समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। शहीद पार्क के शहीदी मंच के सामने डॉ.मधेपुरी की अध्यक्षता में एक श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया गया। उपस्थित जनों ने शहीद आशुतोष के चित्र पर बारी-बारी से पुष्पांजलि की और अपने-अपने संवेदनायुक्त उद्गार व्यक्त किए।

इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने तब के डीएम मो.सोहैल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि यदि इस शहीद पार्क का निर्माण नहीं हुआ होता तो देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीद कैप्टन आशुतोष को हम लोग किस तरह सम्मान दे पाते। डॉ.मधेपुरी ने वर्तमान डीएम नवदीप शुक्ला की संवेदनाओं को संदर्भित करते हुए कहा कि आपके (रविंद्र भारती जी के) इकलौते पुत्र की पूर्ति तो नहीं की जा सकती, परंतु कोई परेशानी होने पर मधेपुरावासी हर हाल में खड़े उतरेंगे।

अंत में  अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के इन सातों शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों की विस्तार से चर्चा की। जिनमें आजादी से पूर्व के दो…. शहीद बाजा साह एवं शहीद चुल्हाय यादव के साथ-साथ सभी स्वतंत्रता सेनानियों- यथा रासबिहारी लाल मंडल, यदुनाथ झा यदुवर, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कुदरतउल्लाह, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, कार्तिक प्रसाद सिंह, महताप लाल यादव, राम बहादुर सिंह आदि को याद किया। इस अवसर पर सुनील आर्ट द्वारा शहीद आशुतोष का नाम अंकित करने हेतु डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मौके पर अक्षय दीप, आदित्य कुमार, आद्या दीप, संजय कुमार, पप्पू कुमार, ललन यादव, सुनील कुमार गुप्ता, शिवनंदन कुमार साह, जगदीश राम आदि सहित ढेर सारे छोटे-छोटे नन्हे-मुन्ने मौजूद थे।

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जागीर गांव के शहीद कैप्टन आशुतोष को सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई- डीएम

मद्रास रेजीमेंट के शहीद कैप्टन आशुतोष के पार्थिव शरीर को लेकर दानापुर कैंट से सेना के जवान जब बुधवार को सुबह में पैतृक गांव जागीर पहुंचे तो पिता रविंद्र भारती द्वारा दी जा रही मुखाग्नि एवं तिरंगे में लिपटे शहीद को देखने हेतु नर-नारियों की भीड़ उमड़ पड़ी। अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी एवं सेना के जवानों के साथ अंतिम यात्रा निकली। सबों ने भारत माता की जय एवं शहीद आशुतोष के सर्वोच्च बलिदान के जयकारे लगाए।

बता दें कि एसपी योगेंद्र प्रसाद, एमएलए प्रो.चंद्रशेखर, एमपी दिनेश चंद्र यादव आदि की उपस्थिति में संवेदनशील जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला (IAS) ने राज्य सरकार की ओर से 11 लाख रूपये का चेक तथा सेना की ओर से 15 लाख  रुपये का चेक शहीद कैप्टन आशुतोष के परिजन को हस्तगत कराया।

यह भी कि शहीद कैप्टन आशुतोष को अंतिम विदाई देने आर्मी के कर्नल सहित जवान भी उनके जागीर गांव पहुंचे थे। कर्नल के नेतृत्व में सेना के जवान द्वारा शहीद कैप्टन के सम्मान में 39 चक्र गोलियों की सलामी दी गई। पहले  बीएमपी बटालियन के जवानों द्वारा और बाद में सेना के जवानों ने एक साथ गोलियों का तीन चक्र चलाकर सलामी दी।

यह भी जानिए कि शहीद को मुखाग्नि दिए जाने के बाद काफी देर तक डीएम व एसपी दाह संस्कार स्थल पर मौजूद रहे। फिर शहीद के पिता रविंद्र भारती को भरोसा दिलाते हुए संवेदनशील डीएम शुक्ला ने कहा- “आपका इकलौता पुत्र देश के लिए शहीद हुआ है लेकिन दूसरा पुत्र मैं भी हूँ। आशुतोष की पूर्ति तो नहीं की जा सकती, परंतु आपको कोई परेशानी नहीं आने दिया जाएगा……।”

मौके पर सेना के कर्नल व मेजर सहित जिले के डीडीसी विनोद कुमार सिंह, एडीएम उपेंद्र कुमार, एसडीएम नीरज कुमार, एसडीपीओ अजय नारायण यादव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। वे तरह-तरह से शहीद कैप्टन आशुतोष की मां गीता देवी एवं बहन प्रीति-अंशु सहित अन्य परिजनों को ढाढ़स बंधाते देखे गए।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिला मुख्यालय में शहीद पार्क का निर्माण कराकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने जिले के सभी शहीदों के नाम को पट्टिका पर दर्ज कराकर सम्मान देने का काम किया है। जिसमें शहीद के नाम के साथ-साथ उनके गांव का नाम एवं शहादत की तिथि अंकित है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उसी शहीदी पट्टिका पर शहीद कैप्टन आशुतोष का नाम….. अंकित करा कर उन्हें सदैव सम्मान दिया जाएगा।

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इस बार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे सातवीं बार

बिहार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर इस बार सातवीं बार शपथ लेंगे नीतीश कुमार। वे बिहार के  37वें  मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचने जा रहे हैं। कोरोना के दरमियान हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए द्वारा 243 में से 125 सीटों पर जीत दर्ज की गई और विपक्ष 110 सीट जीते। आगे मतगणना के समय इस कदर शुरू हुआ रुझान कि पहले छाई मायूसी…. फिर लौटी मुस्कान।

यह भी बता दें कि पहली बार नीतीश कुमार 2005 में मुख्यमंत्री बने और 2014 तक मुख्यमंत्री बने रहे उन्होंने 2005 से पूर्व भारत सरकार में कभी भूतल परिवहन मंत्री, कभी कृषि मंत्री तो कभी रेल मंत्री बनकर देश की सेवा की।

जानिए कि नीतीश कुमार ने भारतीय आम चुनाव, 2014 में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दलित वर्ग के जीतन राम मांझी को सीएम बनाने की पेशकश की। श्री माँझी लगभग 8 महीने मुख्यमंत्री रहे भी। आगे राजनीतिक संकट गहराने के चलते फरवरी 2015 में पुनः नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और नवंबर 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव जीतकर पुनः मुख्यमंत्री बने।

वर्तमान में  2020 के विधान सभा चुनाव में भी एनडीए ने नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया। एनडीए जीत का परचम तो लहराया सही लेकिन बहुमत के आंकड़े (122) से 3 सीट ही अधिक ला पाया।

यह  भी  जानिए कि एनडीए के एक सहयोगी की महत्वाकांक्षा के चलते नीतीश के जदयू में विधायकों की संख्या में अच्छी-खासी कमी आने के कारण वे द्वंद में फंसे थे। बावजूद इसके सुशील कुमार मोदी, नित्यानंद राय, भूपेन्द्र यादव, संजय जायसवाल आदि वरिष्ठ एनडीए नेतागण द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश के आवास पर जाकर उनके अंदर चल रहे द्वंद को दूर किया गया और गृह मंत्री एवं प्रधानमंत्री द्वारा चलभाष पर शुभकामनाओं के साथ-साथ आगे भी मुख्यमंत्री बने रहने की सहमति जताई गई। भला क्यों नहीं, बीजेपी नीतीश कुमार को ही पुनः मुख्यमंत्री पद देने के अपने फैसले पर पूरी तरह कायम है। महामहिम राज्यपाल फागू चौहान के निर्देशानुसार विधिवत तैयारियां की जा रही हैं। दीपावली और छठ के बीच बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार… सातवीं बार ।।

चलते-चलते, बकौल जदयू के नेता एवं  समाजसेवी शिक्षक प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी….  इस बार उन्होंने गुरुवत् शुभाशीष देते हुए अपने छात्र आलमनगर के विधायक व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव को सातवीं बार विधायक बनने एवं मधेपुरा में एमएलसी ललन सर्राफ के घर ठहरे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के क्रम में सातवीं बार मुख्यमंत्री बनने की शुभकामना व्यक्त की थी। एक शिक्षक के शुभाशीष एवं उनकी शुभकामना को ईश्वर ने सुन ली….. इससे बड़ी और क्या बात होगी !

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अंततः आधी आबादी ने नीतीश सरकार के होम करते हाथों को जलने से बचा ही लिया

आज मतगणना के दिन सवेरे से देर शाम तक एनडीए एवं महागठबंधन के बीच 5-15 सीटों के फासले के साथ आंकड़े में उछल-कूद इस कदर जारी रही की मतगणना के दरमियान, टी-20 क्रिकेट से भी अधिक रोमांचक रहा परिणाम। सर्वाधिक लोग खाना-नहाना छोड़कर दिनभर टीवी से चिपके रहे। अंतत: बिहार की आधी आबादी ने नीतीश सरकार के होम करते हाथों को जलने से बचा ही लिया। एनडीए- 125, महागठबंधन- 110 एवं अन्य 8 सीटों पर सिमट गए। कितने समर्थक तो पॉकेट में झंडा एवं बैग में माला व मिठाई लिए मैच ओवर होने के बाद घर लौट गए।

बता दें कि जदयू वरिष्ठ नेता व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने मौके पर कहा कि जब घर की सारी समस्याओं का निदान अंत तक घर मालिक भी नहीं कर पाता है तो किसी भी सरकार द्वारा इतनी बड़ी आबादी (जिसे उसका मुखिया परिवार मानता है) की सारी समस्याओं का निदान कर पाना क्या संभव है ! हर किसी को सरकार की नीति और नियत पर नजर रखनी चाहिए। यही कि जहां सीएम नीतीश ने लड़कियों के लिए साइकिल-पोशाक योजना चलाई, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने माताओं-बहनों की परेशानियों को देखते हुए एलपीजी गैस देने की योजना बनाई…. आदि आदि।

जानिए कि मधेपुरा जिले में बराबरी पर रहा एनडीए और महागठबंधन। जहां जदयू के लोकप्रिय मंत्री नरेंद्र नारायण यादव ने आलमनगर से सातवीं पारी की शुरुआत की तथा राजद के पूर्व मंत्री प्रो.चंद्रशेखर ने मधेपुरा से हैट्रिक लगाई वहीं जदयू के निरंजन मेहता ने बिहारीगंज से दूसरी पारी तो राजद के  चंद्रहास  चौपाल  ने सिंहेश्वर  से पहली पारी का श्रीगणेश किया है। फिर भी बिहार विधानसभा चुनाव के इस काँटे की लड़ाई में एनडीए का पलड़ा…. अंततः रहा भारी। दिनभर होता रहा उतार-चढ़ाव। प्रातः 9:00 बजे से शुरू हुआ रुझान और पहले छाई मायूसी फिर लौटी मुस्कान। रात के 10:00 बजे तक बदलते रहे आंकड़े, टीवी के सामने बैठे-बैठे बढ़ती रही शरीर की अकड़न और प्रबल समर्थकों के दिलों की धड़कन….।

 

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देश के लिए शहीद हुए मधेपुरा के सपूत कैप्टन आशुतोष

कौन जानता था कि मधेपुरा जिले के  घैलाढ़ प्रखंड के  भतरंधा-परमानपुर, वार्ड नंबर- 17 (जागीर गांव) के रविंद्र यादव (अनुसेवक, घैलाढ़ पशु चिकित्सालय) का पुत्र कैप्टन आशुतोष शनिवार (8 नवंबर) की शाम 7:00 बजे अपने घर पापा-मम्मी से बात कर यही कहेगा कि दीपावली-छठ की छुट्टी पर घर आऊंगा और ठीक चंद घंटों बाद यानि आधी रात के बाद जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तानी आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के दौरान हुई गोलीबारियों में जिले का वह सपूत कैप्टन आशुतोष शहीद हो जाएगा और तिरंगे में लिपटकर दिपावाली से पहले ही अपने माता-पिता सहित परिजनों के बीच आ जाएगा !

जानिए कि इस मुठभेड़ के दौरान भारत का बेशकीमती लाल 24 वर्षीय कैप्टन आशुतोष कुमार ने तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। आशुतोष के शहीद होने की सूचना आधिकारिक तौर पर रविवार को शाम 6:30 बजे उनके पिता को दी गई। जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। गांव की सारी महिलाएं कैप्टन आशुतोष के माता-पिता और दो बहनों खुशबू व अंशु को ढाढ़स देने चल पड़ी और पास-पड़ोस की कुछ महिलाएं तो शहीद के परिजनों को संभालने हेतु दौड़ पड़ी, क्योंकि कैप्टन आशुतोष अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र जो था। अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी।

बता दें कि शहीद कैप्टन आशुतोष ने सैनिक स्कूल भुवनेश्वर (उड़ीसा) से पढ़ाई पूरी की और उसके बाद एनडीए परीक्षा उत्तीर्ण होकर इंडियन मिलिट्री एकेडमी से 2018 में लेफ्टिनेंट बटालियन-18 मद्रास में भर्ती हुए थे। 3 वर्षो के अंदर ही इन तीन आतंकवादियों को ढेर कर शहीद कैप्टन आशुतोष ने तो अपनी मां के दूध की लाज और भारत माता की इज्जत को सिर आंखों पर रखा ही, साथ ही तिरंगे की शान को भी शानदार व जानदार बनाए रखा।

चलते-चलते यह भी कि जिले के निवर्तमान डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा 2018 में उद्घाटित ‘शहीद पार्क’ में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने जिले के सभी शहीदों को सदा के लिए सम्मानित किया है, जिसमें घैलाढ़ प्रखंड के ही फुलकाहा निवासी शहीद  प्रमोद कुमार का भी नाम अंकित है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बच्चों को सदैव प्रेरित करते रहने के लिए कैप्टन शहीद आशुतोष कुमार का नाम भी “शहीदी पट्टीका” में अंकित कराया जाएगा।

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मधेपुरा जिले के चारो विधानसभा सीटों के रिजल्ट चौंकाने वाले होंगे

मधेपुरा जिले के बहुत से लोग दूर-दराज रहते हैं तथा वे बाहर काम कर रहे हैं। सेना में या अन्यत्र कहीं विदेशों में भी काम कर रहे हैं। उनमें से अनेक मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट से भी मतदान किया है। परंतु, उनके मन में ये बातें तो कभी ना कभी जरूर गूंज उठती होगी कि जिले के चारो विधानसभा क्षेत्रों में कौन-कौन पूर्व विधायक प्रत्याशी हैं और कौन किस अंदरूनी खटास के कारण चुनावी माहौल में पीछे हो रहे हैं या आगे बढ़त बना लिए हैं। सेना में कार्यरत सैनिकों को लग रहा होगा कि हमारे जिले के यूथ की भूमिका इस चुनाव में क्या रही है… बदलाव की बयार का लाभ किसे मिल रहा है… आदि-आदि।

बता दें कि इस जिले में मधेपुरा, सिंहेश्वर, बिहारीगंज और आलमनगर 4 विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां औसत मतदान 55.56%  हुआ है और सभी क्षेत्र मिलाकर कुल मतदाता 12 लाख 94 हजार 647 है। मधेपुरा में जदयू से पार्टी प्रवक्ता, पूर्व विधायक-पुत्र व मुख्यमंत्री-पौत्र निखिल मंडल है। राजद से प्रो.चंद्रशेखर जो दो बार से लगातार विधायक व मंत्री रहे हैं और बदलाव की बयार के सशक्त दावेदार भी हैं। इनकी दावेदारी में जाप सुप्रीमो पप्पू यादव एवं लोजपा उम्मीदवार साकार यादव अवरोधक बने बताए जाते हैं। मतगणना ही जदयू या राजद कार्यकर्ताओं को दिवाली में दीप जलाकर उत्सव मनाने की घोषणा करेगा। रही बात सिंहेश्वर विधानसभा क्षेत्र की जहां जदयू से डॉ. रमेश ऋषिदेव मंत्री को टक्कर दे रहे हैं राजद के चंद्रहास चौपाल।

यह भी जानिए कि जहां बिहारीगंज से जदयू विधायक निरंजन मेहता को कड़ी टक्कर दे रही हैं कांग्रेस प्रत्याशी सुभाषिनी बुंदेला। श्रीमती बुंदेला के बदलाव की दावेदारी में लोजपा के विजय कुशवाहा और जाप से इंजीनियर प्रभाष चंद्र अवरोध बने बताए जाते हैं, वहीं आलमनगर से लगातार विधायक व विभिन्न विभागों के मंत्री रहे एवं क्षेत्र के अजातशत्रु कहे जाने वाले नरेंद्र नारायण यादव को आरजेडी उम्मीदवार नवीन निषाद से टक्कर है। जाप से खड़े सर्वेश्वर सिंह के चलते जीत का माला किस गले की शोभा बढ़ाएगा यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा, परंतु जिले के सभी वर्गों के बड़े-बुजुर्ग मंत्री जी की जनसेवा की चर्चा करते नहीं अघाते हैं। कुल  मिलाकर जिले के चारो सीटों का रिजल्ट चौकाने वाला होगा, थोड़ा इंतजार और …..!!

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