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कोरोना वायरस का नया रूप दुनिया के 41 देशों में अपने पांव पसार दिया है

विगत वर्ष 2020 में सारा संसार कोविड-19 से परेशान होता रहा। कितने देशों की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई। परंतु, आशा की किरण तब जगी जब भारत सहित कई अन्य देशों में कोरोना वैक्सीन जांचोपरांत लोग लेना भी शुरू कर दिए। सबों को एहसास होने लगा कि 2021 में कोरोना से संसार को मुक्ति मिल जाएगी। फलस्वरूप 4 जनवरी से स्कूल, कॉलेज एवं कोचिंग भी कुछ विशेष गाइडलाइंस के तहत खोल तो दिए गए, परंतु कई स्कूलों में बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी कोरोना संक्रमण से ग्रसित होना पड़ा… अब सरकार के सामने विकट परिस्थिति उत्पन्न होने लगी है।

दूसरी ओर डब्ल्यूएचओ(WHO) ने बयान जारी कर यह दावा किया है कि ब्रिटेन में मिला कोरोना का नया स्वरूप दुनिया के 40 से अधिक देशों में दस्तक दे चुका है। यह भी बताया गया है कि भारत में कोरोना के इस नए स्वरूप से संक्रमित होने वालों की संख्या 70 हो गई है। इस बात की आधिकारिक घोषणा ब्रिटेन की सरकार द्वारा 14 दिसंबर को ही कर दी गई थी कि ब्रिटेन में एक नए कोरोनावायरस ने दस्तक दे दिया है, जो महज 4 सप्ताह में 41 देशों में अपना पांव पसार चुका है। इसलिए तो भारतीय गणतंत्र दिवस परेड पर कोई भी विदेशी मुख्य अतिथि नहीं होंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन आमंत्रित थे, लेकिन ब्रिटेन में फैले कोरोना स्ट्रेन की वजह से उन्होंने भारत का दौरा ही रद्द कर दिया है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि शुरुआती दौर में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य कई देशों में कोरोना वायरस के नए स्वरूप का पता चला था। कोरोना वायरस का वह नया स्वरूप अब भारत की ओर कदम बढ़ाने लगा है। जो भी हो, प्रत्येक व्यक्ति को मास्क लगाकर घर से निकलने, सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने एवं साबुन से हाथ धोकर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने में लापरवाही कभी नहीं बरतनी चाहिए।

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कोरोना वायरस के नये स्ट्रेन से ब्रिटेन की हालत बिगड़ी बोरिस ने भारत यात्रा रद्द की

ब्रिटेन में एक सप्ताह के अंदर बढ़ गए एक तिहाई कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन वाले मामले। ब्रिटेन के प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉनसन ने अपने देश में कोरोना वायरस की गंभीर स्थिति के मद्देनजर जनवरी में प्रस्तावित भारत-यात्रा रद्द कर दी है। जाहिर है कि बोरिस जॉनसन को भारत द्वारा आगामी गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया गया था।

ब्रिटेन में जब 29 दिसंबर को 80 हजार से ज्यादा लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी, तब ब्रिटेन के नाम अपने संबोधन में पीएम बोरिस जॉनसन ने देशवासियों से यह अनुरोध किया है-

“नये लॉकडाउन तत्काल फरवरी 2021 के मध्य तक प्रभावी रहने की संभावना है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना के नए स्ट्रेन 70 फ़ीसदी तक ज्यादा संक्रामक हैं यानि जनमानस को इससे संक्रमित होने तथा दूसरों को संक्रमित करने की आशंका बहुत-बहुत ज्यादा है। यहां तक कि संक्रमण से मरने वालों की संख्या में भी 20% की वृद्धि हो गई है।”

चलते-चलते यह भी कि कोरोना को लेकर 2020 से अधिक भारी 2021 लगने लगा है। जर्मनी में एक दिन में लगभग 1000 मौतें हो गई है। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल देश के 16 प्रांतों के लॉकडाउन को जनवरी के अंत तक बढ़ा सकती हैं जबकि लॉकडाउन 16 दिसंबर से ही लगाया गया है।

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कोरोना के टीकाकरण को लेकर बिहार सरकार पूरी तरह तैयार

केंद्र सरकार द्वारा तय गाइडलाइन के आधार पर सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना के टीकाकरण के लिए बिहार तैयार है। केंद्रीय गाइडलाइन के आधार पर बिहार सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। पांच छह महीने में टीकाकरण कर दिया जाएगा। ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया द्वारा पूछे जाने पर कहा।

बकौल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वास्थ्य कर्मियों एवं डॉक्टरों को पहले चरण में टीका लगाया जाएगा। उसके बाद प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों का टीकाकरण होगा। फिर 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले नर-नारियों को टीकाकरण में प्राथमिकता देनी है।

मुख्यमंत्री ने स्वयं टीकाकरण हेतु दवाओं को रखने की जगह से लेकर टीकाकरण हेतु दवाओं को किस तरह से ले जाया जाएगा आदि सारी चीजों की मानीटरिंग की है तथा एक-एक चीज का बेहतर ख्याल भी रखा है। जनहित में बेहतर निगरानी का राज यही है कि कोरोना का मामला थोड़ा कम होने पर वे जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम को पुनः आरंभ करेंगे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि 13 जनवरी के बाद हम किसी भी दिन टीकाकरण की शुरुआत करने की पूरी तरह से तैयारी कर ली है। टीकाकरण शुरू करने के लिए तारीख पर अंतिम फैसला सरकार लेगी, परंतु यह है कि स्वास्थ्य  सुरक्षा एवं सफाई कर्मियों को टीकाकरण हेतु सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। जहां 2 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पूरे देश में टीकाकरण का पूर्वाभ्यास किया जा चुका है वहीं 3 जनवरी को ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया द्वारा कोवैक्सीन और  कोविशील्ड के आपात इस्तेमाल की इजाजत भी दे दी गई है। भारत में 4 प्राथमिक वैक्सीन स्टोर कोलकाता, चेन्नई, मुंबई व करनाल में बनाए गए हैं।

 

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कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से देश में अब तक लगभग 50 लोग संक्रमित

कोरोना के नए स्ट्रेन से संसार के आधे दर्जन देशों को ग्रसित देख कर भारत को चिंतित होना स्वाभाविक है। सबसे अधिक ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन 70% तेजी से फैल रहा है। तभी तो भारत ने आपात बैठक कर हवाई जहाज की उड़ानों पर रोक लगा रखी है। फ्रांस एवं सऊदी अरब भी अपनी-अपनी सीमाएं सील कर ली है।

बता दें कि कोरोना वायरस से नए स्ट्रेन से अब तक भारत में लगभग 50 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से अधिकांश वे लोग हैं जो या तो ब्रिटेन से आए हैं या फिर वहां से आने वाले लोगों के संपर्क में आ चुके हैं। सर्वाधिक लोगों की संख्या 11 है जो नए कोरोना स्ट्रेन से संक्रमित हैं और जिसकी पुष्टि आईजीआई नई दिल्ली में हुई है। इसी तरह पुणे ने 5, हैदराबाद ने 3 और बेंगलुरु ने 10 की पुष्टि की है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि गत वर्ष 2020 के अंतिम एक महीने में ब्रिटेन से भारत आए लोगों की संख्या लगभग 30,000 से अधिक होगी। इन लोगों के माध्यम से कोरोना वायरस के नए लोग संक्रमित हो रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि हर कोई मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखें तथा हाथ साबुन से साफ कर सेनीटाइजर का इस्तेमाल करते रहे।

याद रखें ब्रिटेन की सरकार द्वारा अगले 16 फरवरी तक लॉकडाउन लगा दिया गया है। साथ ही भारतीय गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रुप में आने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपनी यात्रा भी स्थगित कर दी है।

 

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सूबे के नौ हजार हाई स्कूलों में लगभग दस महीने बाद आज से शुरू हुए क्लास

कोरोना महामारी के दरमियान राज्य के 9 हजार से अधिक माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूलों में आज से सैनिटाइज्ड क्लास रूम में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं शुरू होंगी। कक्षाओं में आधे छात्र एक दिन तो आधे दूसरे दिन आएंगे ताकि सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन हो सके। कहा गया है कि 6 फीट की दूरी और मास्क पहनना जरूरी। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार स्कूलों में असेंबली नहीं होगी, बल्कि बच्चे सीधे क्लास रूम में ही जाकर बैठेंगे।

बता दें कि जिले के हाॅली क्रास जैसे बड़े स्कूल, जिसे क्लास रूम की कमी नहीं है, वह एक साथ 11th एंड 12th क्लास के सभी छात्रों को प्रतिदिन नियमानुसार दूर-दूर बैठाकर आज से पढ़ाना शुरू कर दिया है। कुछ स्कूल और कॉलेज केवल अंतिम दो वर्गों के छात्र-छात्राओं को आज से पढ़ाना चालू किया है।

कोचिंग संस्थानों में भी कोरोना संक्रमण से बचने हेतु घोषित उपायों के साथ नियमानुसार पठन-पाठन आरंभ किया गया है। मिलाजुला कर आज से शैक्षणिक जगत में 10 महीने बाद रौनक लौट आई है। कैंपस से खामोशी का साम्राज्य समाप्त हो गया। आज से स्कूल-कॉलेज आदि में घंटियां बजने लगी है।

जानिए कि सूबे में कक्षा 9 से 12 के बीच कुल विद्यार्थियों की संख्या 36 लाख  से अधिक है। चुंकि एक दिन में 50% विद्यार्थी के ही क्लास में आने के लिए अनुमति दी गई है। अतः आज 18 लाख से अधिक विद्यार्थियों के स्कूल पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार की ओर से स्कूलों को जितने निर्देश दिए गए हैं, अभिभावकों को उतनी ही सलाहें दी गई है। खेल पीरियड एवं लंच के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किए गए हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व में ही 9वीं क्लास की पढ़ाई करने का उद्घाटन 3300 पंचायतों के उत्क्रमित मिडिल स्कूलों में कर दी थी जहां हाई स्कूल नहीं था। कोरोना के कारण प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन रुका हुआ था। यहाँ नामांकन हो चुका है, परंतु पढ़ाई एक भी दिन नहीं हुई है। इन स्कूलों में कक्षा आठ से प्रमोट किए गए नामांकित बच्चे पहली बार अपने शिक्षकों से रू-ब-रू होंगे। इतना ही नहीं, 10 महीने बाद आज से पटना के हाई कोर्ट में न्यायाधीश अपनी कुर्सी पर बैठेंगे और एडवोकेट से मुखातिब होकर बहस करेंगे।

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पंचायत चुनाव के इतिहास में इस बार कई चीजें होंगी पहली बार

नीतीश सरकार के प्रस्ताव पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कार्यक्रम पहली बार जिलेवार किया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आचार संहिता भी जिलेवार लगाने का कार्यक्रम पहली बार तैयार किया जा रहा है।

बता दें कि सरकार के प्रस्ताव पर राज्य चुनाव आयोग ने अधिकतम 27 दिनों के अंदर 1 जिले का चुनाव संपन्न कराने का इस बार खाका तैयार किया है।  उम्मीदवार के नामांकन से लेकर मतगणना की पूरी प्रक्रिया 27 दिनों में पूरी होगी।

जानिए कि इस पहल से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरे राज्य में एक साथ आचार संहिता प्रभावी नहीं होगी। चुनाव वाले जिले को छोड़कर शेष सभी जिलों में विकास योजनाएं चलती रहेंगी। पूरे प्रदेश की सरकारी मशीनरी भी एक साथ प्रभावित नहीं होगी।

दूसरी अहम बात यह है कि पहली बार चुनाव आयोग द्वारा पंचायत चुनाव बैलट की जगह ईवीएम से कराया जाएगा। ईवीएम खरीद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एक जिले में चुनाव संपन्न कराए जाने के बाद उन्हीं ईवीएम को दूसरे जिले में भेज दिया जाएगा। आयोग ने घोषणा की है कि इस बार 8100 पंचायतों में चुनाव संपन्न कराने के लिए सूबे में नौ चरणों में चुनाव होगा। प्रत्येक ईवीएम में 6 पदों का होगा प्रावधान। यह मल्टीपल पोस्ट ईवीएम विधानसभा व लोकसभा चुनाव से अलग होगी।

चलते-चलते यह भी जानिए कि ऐसा नहीं होगा कि किसी एक प्रमंडल के सभी जिलों में एक साथ चुनाव करा दिया जाए। इस बार के ईवीएम में 6 पदों- जिला परिषद सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच के पदों पर चुनाव का प्रावधान होगा। जून 2021 में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, इसलिए आयोग द्वारा मार्च से मई के बीच चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य तय किया गया है। देश में ईवीएम से चुनाव कराने वाले बिहार को पांचवा प्रदेश बनने पर समाजसेवी एवं जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश सरकार को साधुवाद दिया है।

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महावीर बाबू के कर्मों की खुशबू का असर कम नहीं होगा- डॉ.मधेपुरी

आज 2 जनवरी को बीएनएमयू के पाँँचवें कुलपति डॉ.महावीर प्रसाद यादव की 95वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम माल्यार्पण किया कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण, मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के अत्यंत करीबी एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर पदाधिकारी रहे प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी एवं विश्वविद्यालय की  प्रथम महिला प्रति कुलपति प्रो.(डॉ.)आभा सिंह। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व अन्य पदाधिकारीगण द्वारा भी माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया गया।

From Left to Right Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri, Pro-VC Dr.Aabha Singh, VC Dr.RKP Raman and others paying tribute on the occasion of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav's Punya Tithi at BNMU.
From Left to Right Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri, Pro-VC Dr.Aabha Singh, VC Dr.RKP Raman and others paying tribute on the occasion of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav’s 95th Birth Anniversary at BNMU.

विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सिंडिकेट की बैठक में कुलपति, प्रति कुलपति, कुलसचिव आदि को शिरकत करनी थी इसलिए महावीर बाबू के साथ साया की तरह रहने वाले डॉ.मधेपुरी ने चंद मिनटों में उद्गार प्रकट करते हुए कहा- आदमी दुनिया से चला जाता है, वह पंचतत्व में विलीन हो जाता है, परंतु उनके द्वारा किए गए काम यहीं पर बुद्ध की तरह ठहर जाते हैं। इसलिए तो लोग उन्हें टीपी कॉलेज का विश्वकर्मा कहते हैं। महावीर बाबू के कर्मों की खुशबू का असर कभी कम नहीं होगा।

Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at the Monument of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav at BNMU Campus.
Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at the Monument of Former VC Dr.Mahavir Prasad Yadav at BNMU Campus.

डॉ.मधेपुरी ने खासकर प्रति कुलपति महोदया को जानकारी के तौर पर महावीर बाबू के संबंध में इतना ही कहा- वे 1953 में मधेपुरा आये। टीपी कॉलेज में व्याख्याता बने। 1962 में वाइस प्रिंसिपल बने। संस्थापक प्राचार्य रतन चंद के साथ मिलकर इतना काम किए कि 1968 में भूपेन्द्र नारायण मंडल ने अपनी सोशलिस्ट पार्टी से उन्हें विधानसभा का टिकट देकर चुनाव में खड़ा किया। महावीर बाबू चुनाव जीते और बीपी मंडल सरकार में शिक्षा मंत्री बने। गुरु डॉ.के.के.दत्ता को पटना विश्वविद्यालय के वीसी पद पर एक वर्ष का विस्तारीकरण देकर गुरु भक्ति का उदाहरण पेश किया। सांंसद बने, दो विश्वविद्यालयों के प्रति कुलपति और 1995 से मृत्युपर्यंत कुलपति बनकर बीएनएमयू की सेवा की। अंत में डॉ मधेपुरी ने उनके पुत्र प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान (पीजी) एवं डीएसपी मनोज कुमार आदि द्वारा उनकी समाधि पर अंकित कराई गई पंक्तियों को दोहराते हुए कहा-

गुजरेंगे तेरे बाद भी कुछ लोग यहां से

पर तेरी खुशबू का असर कम नहीं होगा।

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उम्मीदों का नया साल बने 2021

इसरो अब चंद्रयान-2 के बाद 2021 में चंद्रयान-3 को लांच करने जा रहा है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते इसकी लांचिंग में देरी हो रही है।

यह कि कोरोना महामारी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था में हुई भारी गिरावट… अब नए साल 2021 के शुरुआती महीनों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में जिस तेजी से गिरावट दर्ज की गई, उससे अधिक तेजी के साथ रिकवरी देखने को मिलेगी 2021 में। परंतु, किसानों का यह हड़ताल तो पहले खत्म हो।

बकौल समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, 12 महीनों को गुजार कर पुराने वर्ष को विदाई देना और नए वर्ष के आगमन को पर्व मानकर बेहतर खुशियां मनाना बेहतरी नहीं, बल्कि बीते वर्ष के खट्टे-मीठे-तीखे व अन्य कई प्रकार के स्वादों के साथ सामान्य व्यक्ति अपने भविष्य को निर्धारित करने के लिए अधिक संवेदनशील बने….. वही श्रेयष्कर है। डॉ.मधेपुरी के अनुसार- नई संभावना, नई दृष्टि, नये-नये संघर्ष और नूतन लालित्य का प्रवेश ही नया वर्ष है।

गत वर्ष कोविड-19 ने देश को एक मायने में तो लाभ पहुंचाया कि देश रिचार्ज हुआ… लाॅक डाउन ने  प्रदूषण मुक्त वातावरण दिया, परन्तु, अब यह नया साल पर्यावरण को स्वच्छ रखने का साल बने तो सही……! जीत के मजबूत इरादों के साथ नए साल में हम सभी उतरे तो सही…….!!

चलते-चलते यह कि गत वर्ष समस्त संसार दुश्वारियों का सामना करता रहा और हम नए साल में अच्छे होने की उम्मीद में आगे बढ़ते रहें…. मजबूत इरादों के साथ, ताकि भारत शक्तिशाली बन कर विश्व गुरु बनने का सपना साकार कर सके। इस सपने को अमलीजामा पहनाने के लिए समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने युवाओं से यही कहा कि इस नये वर्ष को नए भारत के निर्माण की नींव बनाना होगा और हमें आत्मनिर्भर भारत बनाने का हरदम-हरकदम प्रयास करते रहना होगा।

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कोरोना काल में बेहतर काम के लिए सूबे बिहार की नीतीश सरकार को मिला डिजिटल इंडिया अवार्ड

भारत सरकार ने गुजरे वर्ष में कोरोना के खतरे के दौरान सूबे बिहार की नीतीश सरकार की ओर से डिजिटल तरीके से प्रदेशवासियों को सहायता पहुंचाने के काम की सराहना की। फलस्वरूप, महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नीतीश सरकार के बेहतरीन प्रयासों के लिए सूबे के 5 आलाधिकारियों को डिजिटल इंडिया अवार्ड- 2020 से सम्मानित किया।

बता दें कि 30 दिसंबर, बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की उपस्थिति में सीएम नीतीश के प्रधान सचिव चंचल कुमार, आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, अपर सचिव रामचंद्रडू, एनआईसी के शैलेश कुमार श्रीवास्तव और नीरज कुमार तिवारी को डिजिटल इंडिया अवार्ड- 2020 से सम्मानित किया गया।

जानिए कि लाॅक डाउन लागू होने के तुरंत बाद सीएम नीतीश कुमार के निर्देश पर दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के लोगों से बातें कर उनका फीडबैक लिया गया और इन सभी आलाधिकारियों द्वारा ससमय उन तक राहत पहुंचाई गई। बिहार कोरोना सहायता मोबाइल ऐप के जरिए अधिक से अधिक लोगों को वित्तीय सहायता पहुंचाई गई।

इतना ही नहीं 1 करोड़ 64 लाख राशन कार्ड रखने वाले परिवारों को 3 महीने पहले का अग्रिम राशन दिया गया। साथ ही 21 लाख लोगों को खाते में एक-एक हजार रूपये की सहायता राशि का भुगतान भी किया गया। सूबे के 15 लाख से अधिक श्रमिकों को 10 हजार से अधिक केंद्रों पर सारी सुविधाओं के साथ क्वारंटाइन किया गया। इस अवधि में सभी को भोजन, आवासन एवं चिकित्सीय जांच भी कराया कराई गई। यहां तक कि बाहर से लौटे श्रमिकों को अभियान चलाकर रोजगार भी मुहैया कराया गया एवं अन्य छोटी-बड़ी सहायता व सुविधाएं भी दी गई।

चलते-चलते यह भी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों के चलते कोरोना काल में लोगों के खाते में सीधे आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए महामहिम राष्ट्रपति कोविंद द्वारा दिए गए सम्मान (डिजिटल अवार्ड-2020) से अभिभूत होकर संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री रविशंकर एवं सीएम नीतीश सहित सूबे के तमाम श्रमिक भाइयों को भी नए वर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित की है।

 

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ब्रिटिश भारत में जन्मे रूडयार्ड किपलिंग साहित्य का प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता बने

आज ही के दिन यानि 30 दिसंबर 1865 को ब्रिटिश भारत के वर्तमान मुंबई (तब के बॉम्बे) शहर में मां एलिस किपलिंग की गोद में बालक रूडयार्ड किपलिंग का जन्म हुआ था। किपलिंग उच्च कोटि के पत्रकार, लघु कथा लेखक, उपन्यासकार और कवि के रूप में चर्चित रहे। वे बाल साहित्य, यात्रा साहित्य और विज्ञान कथाएं लिखने में प्रवीण थे।

बता दें कि मुंबई में जन्मे रूडयार्ड किपलिंग को मुख्य रूप से यह दुनिया उनकी पुस्तक “द जंगल बुक” के लिए जानती है जिसे उन्होंने 1894 में कहानियों के संग्रह के रूप में लिखकर प्रकाशित कराई थी। उनके द्वारा लिखी गई अन्य प्रमुख पुस्तकें “द मैन हु वुुड बी किंग” वर्ष 1888 में, “गंगा दीन” वर्ष 1890 में, साहसिक कहानियां “किम” वर्ष 1901 में और “इफ” वर्ष 1910 में उन्हें शोहरत के शिखर पर पहुंचा दिया।

जानिए कि मुंबई में जन्म लेने के कुछ वर्षों बाद उन्हें ब्रिटेन भेज दिया गया जहां उन्होंने स्कूली शिक्षा ग्रहण की। पढ़ाई समाप्त कर वे 20 सितंबर 1882 को भारत के लिए रवाना हुए और 18 अक्टूबर को मुंबई लौट आए। भारत आते ही उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार में नौकरी शुरू की तथा वे लघु कथाओं के साथ-साथ कविताएं भी लिखने लगे। सात वर्षों के बाद यानि 1889 में रूडयार्ड किपलिंग पुनः ब्रिटेन लौट गए।

यह भी जानिए कि वर्ष 1894 में उन्होंने सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक “जंगल बुक” लिखी जिसके लिए उन्हें 1907 में साहित्य के लिए पहला नोबेल पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। वे अंग्रेजी भाषा के पहले युवा लेखक हुए जिन्हें यह नोबेल पुरस्कार मिला।

चलते-चलते यह भी बता दें कि रूडयार्ड  झील में उनकी साहसी माताश्री एलिस किपलिंग एवं मूर्तिकार पिताश्री लाॅकवुुड किपलिंग  एक दूसरे से प्रेम-संबंध में बंधेे थे और झील की सुंदरता से मोहित होकर उन दोनों ने अपने पहले जन्मे बच्चे का नाम उस झील को यादगार बनाए रखने के आधार पर रूडयार्ड किपलिंग रखा था। तब के मुंबई स्थित सर जेजे स्कूल आफ आर्ट में रूडयार्ड किपलिंग के पिताश्री मूर्तिकला के प्रोफेसर थे और परिसर में जहां रहते थे उस घर का जीर्णोद्धार करके एक संग्रहालय में परिवर्तित किए जाने की घोषणा भी स्कूल प्रशासन द्वारा 2007 में की गई। कदाचित उसी जगह पर लकड़ी से बना एक नई कुटीर का निर्माण किया गया है जिसे भविष्य में रूडयार्ड संग्रहालय का रूप दिया जायेगा है।

 

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