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गोल्डन ब्वॉय नीरज ने ओलंपिक में भाला गाड़कर भारतीय राष्ट्रगान बजा दिया

हरियाणा पानीपत के गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक- 2020 में जैवलिन थ्रो में 87.58 मीटर जैवलिन फेंककर पहला गोल्ड जीतकर पोडियम में राष्ट्रगान बजवा दिया। राष्ट्रगान की धुन को सुनकर 137 करोड़ भारतीयों के अंदर खुशियों की लहर उठने लगी। नीरज देखते-देखते देश के नायक बन गए। नीरज पर भारत को गर्व इस कदर हुआ कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, खेल मंत्री, रक्षा मंत्री सहित सभी खेल प्रेमियों ने इस गोल्डन ब्वॉय को बधाइयां दी।

बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री ने इनाम में 6 करोड़ की राशि नीरज को देने का ऐलान किया है। श्री खट्टर ने कहा कि नीरज के गले में गोल्ड नहीं बल्कि आगे आने वाले युवा खिलाड़ियों का भविष्य है। देश भर में जश्न का माहौल है। नीरज की उपलब्धि को देश याद रखेगा। नीरज की कामयाबी पर देश को गर्व है।

जानिए कि 13 साल बाद भारत को गोल्ड मेडल मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने नीरज से फोन पर बातें की, बधाइयां दी और उनके माता-पिता को प्रणाम किया। पीएम ने कहा कि हिले हुए विश्वास को बल दिया है नीरज चोपड़ा ने। ग्यारह खिलाड़ियों को पछाड़कर नीरज ने गोल्ड जीता है। पीएम ने चानू व रवि को चांदी के लिए एवं सिन्धु, लवलीना, पूनिया और पुरुष हॉकी को कांस्य के लिए बधाइयां दी और कहा- “खेलो इंडिया, जीतो इंडिया”।

ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने नीरज को बधाई देते हुए कहा कि नीरज ने देश का सपना पूरा किया। नीरज ने इस बार वह कर दिखाया जो किसी ने नहीं किया। कृषक पिता सतीश कुमार ने कहा कि पानीपत का 23 वर्षीय बेटा नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में सब को पानी पिला दिया और तिरंगा को गौरवान्वित कर सिर पर उठा लिया। नीरज के कोच नसीम अहमद ने कहा कि नीरज ने युवाओं के लिए नई खिड़कियां खोल दी है।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि ओलंपिक में देश को गौरवान्वित करने वाले खिलाड़ियों को ऑनरेरी एसपी, डीएसपी… आदि अवश्य बनाया जाए ताकि आने वाली युवा पीढ़ी को खेल के प्रति रुझान पैदा हो तथा खिलाड़ी गोल्ड दिलाकर भारत को गौरवान्वित करता रहे… और भारतीय राष्ट्रगान ओलंपिक में बार-बार बजता रहे।

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शरीर का धर्म प्राण की रक्षा करना है- डॉ.मधेपुरी

वेदान्ता आर्थो केयर सेन्टर, जजहट-सबैला (मधेपुरा) के डायरेक्टर डॉ.बीएन भारती ने आज अपने सेंटर पर इंडिया ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के बैनर तले “बाॅन एंड ज्वाइंट दिवस” मनाने के क्रम में विषय रखा था- “Save Self, Save One”.

बता दें कि इस सेमिनार में स्थानीय सीनियर चिकित्सकों डॉ.डीके सिंह, डॉ.एसएन यादव, डॉ.आरपी गुप्ता, डॉ.आरके पप्पू , डॉ.अमित आनंद सहित आरआर ग्रीन फील्ड के निदेशक राजेश कुमार व छात्रगण उपस्थित थे। इसमें गांव व शहर के कुछ सोशल एक्टिविस्ट भी मौजूद थे.

जानिए कि इस सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे समाजसेवी-शिक्षाविद्  प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को आमंत्रित किया गया था। सेमिनार में सभी चिकित्सकों ने दुर्घटनाग्रस्त लोगों की सांसो की निरंतरता को बनाए रखने हेतु हार्ट को पंप करने की विविध क्रियाओं को विस्तार से समझाया।

अंत में मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में भारतरत्न डॉ.कलाम को संदर्भित करते हुए यही कहा-

“शरीर का धर्म प्राण की रक्षा करना है। समाज का धर्म लोगों की रक्षा करना है। राजा का धर्म देश की रक्षा करना है।”

डॉ.मधेपुरी ने डॉ.कलाम की सहजता के बाबत संस्मरण सुनाते हुए कहा कि हम सभी जीवन को सहज बना कर जिएं। हम कार में सफर करते वक्त सीट बेल्ट अवश्य लगाएं, मोटरसाइकिल पर चलते वक्त हेलमेट जरूर पहनें और कोरोना काल में ‘दो गज दूरी, मास्क है जरूरी’ का पालन करें। तभी हम खुद की सुरक्षा कर सकते हैं और दूसरों की रक्षा भी कर सकते हैं।

 

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भारतीय पुरुष हॉकी 40 वर्षों के बाद कमबैक कर इतिहास रचा

भारतीय हॉकी का जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद के जमाने में ओलंपिक में अनेक गोल्ड मेडल भारत को मिले। टोक्यो ओलंपिक- 2020 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराकर 40-41 वर्ष बाद ब्रॉन्ज मेडल जीत कर नया इतिहास रचा है।

बता दें कि रेसलिंग में रवि दहिया को 57 किलोग्राम फाइनल में पहुंचकर भी सिल्वर पदक पाकर ही संतोष करना पड़ा, वहीं 22 वर्षीय दीपक पूनिया पहले राउंड में आगे बढ़ते हुए अंतिम सेकंड में ब्रॉन्ज जीतने से चूक गए। विनेश फोगाट एवं अंशु मलिक ने भी निराश किया भारतीय खेल प्रेमियों को।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने तो पहली बार 130 करोड़ भारतीयों के अंदर उत्साह की लहर पैदा कर दी। इस बार ओलंपिक के रंगमंच पर महिला हॉकी टीम ने हार कर भी सभी भारतीयों के दिलों को जीत लिया।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भरपूर विश्वास जताते हुए यही कहा कि आगे पुरुष एवं महिला हॉकी टीम भारत को पूर्व की भांति गोल्ड जीतकर गौरवान्वित करेगी।

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सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की राजकीय जयंती कोविड प्रोटोकॉल के तहत मनेगी- डीडीसी

मधेपुरा के उप विकास आयुक्त विनोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की 103वीं जयंती समारोह राजकीय सम्मान के साथ आगामी 25 अगस्त को मनाए जाने हेतु झल्लू बाबू सभागार में 1 बजे अपराहन से एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में समाहरणालय, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य, विद्युत, भवन निर्माण आदि के पदाधिकारियों के अतिरिक्त शहर के गणमान्य सुधीजनों यथा चिकित्सक डॉ.एके मंडल, शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, डॉ.सुरेश भूषण, डॉ.आलोक कुमार, मोहम्मद शौकत अली, आनंद मंडल, प्रो.श्यामल किशोर यादव, स्काउट आयुक्त जयकृष्ण यादव आदि मौजूद देखे गए।

बता दें कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर के मद्देनजर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बीपी मंडल की राजकीय जयंती समारोह के अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी नहीं होगी और किसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी नहीं होगा। सादगी के साथ उनकी प्रतिमा एवं समाधि स्थल पर पुष्पांजलि एवं सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन होगा।

सर्वसम्मति से बीपी मंडल की जीवनी एक फोल्डर में प्रिंट कराने का निर्णय लिया गया। जीवनी लेखन हेतु समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को अधिकृत करते हुए अनुरोध किया गया कि इस कार्य को पूरा कर इसे प्रिंट कराने हेतु नजारत उप समाहर्ता को शीघ्र ही हस्तगत करा देंगे। यह भी निर्णय लिया गया कि समारोह में डॉ.मधेपुरी द्वारा बीपी मंडल की जीवनी का वाचन किया जाएगा और मधेपुरा एवं मुरहो में बीडीओ मधेपुरा द्वारा उसे वितरित भी किया जाएगा।

अंत में गणमान्यों द्वारा स्थानीय बीपी मंडल चौक स्थित प्रतिमा स्थल पर 103 दीये जलाने की बातें कही गई। साफ-सफाई, रंग-रोगन आदि विभिन्न प्रकार के उद्गार व्यक्त किए गए। डॉ.एके मंडल ने प्रो.श्यामल बाबू के आरंभिक योगदान व सम्मान की विस्तार से चर्चा की जिसका सबों ने करतल ध्वनि के साथ समर्थन किया।

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सिंधु ने की घोषणा… पेरिस ओलंपिक में आएगा सोना

आज  टोक्यो ओलंपिक (2020) के बैडमिंटन में विश्व के तीसरे नंबर की खिलाड़ी बनकर काँस्य पदक के साथ दोपहर बाद 3:00 बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी पीवी सिंधु का शानदार स्वागत किया गया। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए सिंधु ने यही कहा-  “मैं खुश हूं, स्वागत और समर्थन के लिए धन्यवाद !!

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक पर भी नजर रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि 8 अगस्त को टोक्यो से लौटने वाले 127 भारतीय ओलंपिक खिलाड़ियों को लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के जश्न मनाने के दिन यानि 15 अगस्त का न्योता दिया जाए। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त पर खास मेहमान होंगे ओलंपिक के खिलाड़ीगण। लाल किले पर ओलिंपिक खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी। शाम में प्रधानमंत्री आवास पर प्रत्येक खिलाड़ी से मिलेंगे पीएम और उनके कंधे पर हाथ रखकर यही कहेंगे-

“हार-जीत जीवन का हिस्सा है। देश अपने खिलाड़ियों पर गर्व करता है। ओलंपिक में सभी खिलाड़ी श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। हॉकी में भारत पुनः वापसी करेगा…।”

चलते-चलते यह भी जानिए की न्यूज़-24 के एंकर ऋषभ शर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सिंधु ने की घोषणा- पेरिस ओलंपिक में आएगा सोना, तब तक शादी के बारे में नहीं कुछ सोचना।

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने केंद्रीय खेल मंत्री से विनम्र अनुरोध किया है कि बिहार सहित अन्य 7 विश्वविद्यालय  वाले राज्यों के अतिरिक्त भारत के शेष बचे हुए सभी राज्यों को हर तरह की मदद देते हुए एक-एक खेल विश्वविद्यालय खोलने एवं सुविचारित ढंग से एक-एक राज्य को ओलंपिक के एक-एक खेल के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने हेतु आवश्यक संसाधन मुहैया कराएं । प्रत्येक वर्ष एक बार उसकी समीक्षा बैठक में सभी राज्यों के खेल मंत्रियों के साथ प्रत्येक खेल के विशेषज्ञों को भी बुलायें।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि ओलंपिक में भाग ले चुके खिलाड़ियों को खेल विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए।

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सिंधु ने टोक्यो- 2020 ओलंपिक में पुनः जीता पदक

टोक्यो ओलंपिक- 2020 में भारत की बेटियों ने कमाल कर दिखाया। ओलंपिक पदक तालिका में सर्वप्रथम वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने सिल्वर और फिर बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित कराया और भारतीय तिरंगा को भी गौरवान्वित किया। जहाँ चानू ने चांदी की चमक से भारत का नाम चमकाया, वहीं सिंधु ने कांस्य पदक जीतकर भी भारतीय खेल प्रेमियों को निराश ही किया।

बता दें कि टोक्यो- 2020 में पीवी सिंधु का डबल धमाका तो हुआ सही, क्योंकि इससे पहले वाले रियो ओलंपिक में सिंधु भारत को सिल्वर पदक दिलाने में सफल हुई थी और इस बार के टोक्यो- 2020 में उसने भारत को ओलंपिक में कांस्य पदक देकर ही गौरवान्वित किया।

जानिए कि पीवी सिंधु ने इतिहास तो सही में रचा, परंतु संपूर्ण भारत सिंधु से गोल्ड की आशा लगाए बैठा रहा था। सिंधु के पिताश्री की भी यही तमन्ना थी, तभी तो उन्होंने पूछे जाने पर बस इतना ही कहा- “आइसक्रीम से मुझे परेशानी नहीं….. परंतु, वजन तो कंट्रोल में रखे……!”

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने समस्त भारतीय खेल प्रेमियों से सकारात्मक सोच को बढ़ाते रहने का विनम्र अनुरोध करते हुए यही कहा कि पीवी सिंधु रियो ओलंपिक में सिल्वर और टोक्यो- 2020 में ब्रोंज मेडल जीती है….. अब अगले ओलंपिक के लिए तो बचा है केवल ‘गोल्ड’….. वह जीत कर भी भारतीय तिरंगा को ऊंचाई प्रदान करेगी बशर्ते हमारा विश्वास….. और आत्मविश्वास बना रहे।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने खेल प्रेमी बच्चे-बच्चियों से यह भी कहा कि पुसर्ला वेंकट सिंधु का जन्म पिता पी वी रमन एवं माता पी विजया के घर हैदराबाद (तेलंगाना) में 5 जुलाई 1995 को हुआ था। सिंधु के माता-पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। सिंधु ने मात्र 8 वर्ष की उम्र से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। सिंधु के गुरु आरंभ में महबूब अली और बाद में गोपीचंद रहे हैं। सिंधु के खेल के प्रति समर्पण इस बात से आँकी जा सकती है कि कोचिंग कैंप सिंधु के घर से 56 किलोमीटर दूर होने के बावजूद भी वे रोज समय पर आ जाती थी…।

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वृंदावन में मनी मुंशी प्रेमचंद की 142वीं जयंती

मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने निवास वृंदावन में हिन्दी एवं उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक मुंशी प्रेमचंद की 142वीं जयंती कथाकारों, कवियों व चन्द बच्चों के साथ मनाई।

डॉ.मधेपुरी ने इस अवसर पर मौजूद बच्चों को जानकारी देते हुए कहा कि 1880 के 31 जुलाई को (लमही) वाराणसी में पिता मुंशी अजायब राय और माता आनंदी देवी के घर जन्म लिया एक बालक जिसका नाम था धनपत राय, जो बाद में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के नाम से विश्व प्रसिद्ध हुए। उनके बचपन के 4 वर्ष गोरखपुर में बीते। बड़े होने पर उन्होंने महात्मा गांधी के प्रभावशाली भाषण को सुनकर 1921 में असहयोग आंदोलन का हिस्सा बनकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। आजादी मिलने से पूर्व ही 8 अक्टूबर 1936 को वाराणसी में उनका निधन हो गया।

अन्त में डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि तुलसीदास के बाद सबसे अधिक पढ़े जाने वाले साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद  हैं। कथा सम्राट प्रेमचंद की रचनाओं पर आधारित फिल्में- हीरा मोती, शतरंज के खिलाड़ी, मजदूर, गोदान आदि उनके यश को दूर-दूर तक संसार के कोने-कोने में फैलाती रहेगी।

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कोरोना वायरस वैक्सीन लगवाने हेतु कई देशों द्वारा रोलेक्स घड़ी, टेस्ला कार व ₹10 करोड़ के फ्लैट का ऑफर

जब  विश्व में कोविड-19 रोल आउट हुई, वैक्सीन लगवाने के लिए फ्लाइट का टिकट, आईफोन, वर्ल्ड टूर या मुफ्त में बीयर जैसी ऑफर रखे गए थे। फिलहाल तो दुनिया के कई देश अपने लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए करोड़ों का ऑफर दे रहे हैं।

बता दें कि अमेरिका, ब्रिटेन और रूस को पछाड़कर हांगकांग दुनिया में सर्वाधिक महँगे ऑफर देने वाला देश बन गया है। हांगकांग विश्व का ऐसा देश है जो कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के लिए रोलेक्स की घड़ी, टेस्ला इलेक्ट्रिक कार, सोने की ईंट और ₹10 करोड़ का अपार्टमेंट देने की घोषणा की है। विजेताओं का चुनाव लॉटरी के जरिए होगा। इस लाटरी की घोषणा से वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

 

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बिहार खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने वाला भारत का छठा राज्य बनेगा

विश्व का सबसे बड़ा खेल मेला “ओलंपिक” कहलाता है। ओलंपिक का आयोजन 4 वर्षों के बाद किया जाता है- ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, शीतकालीन ओलंपिक एवं पैरा ओलंपिक। फिलहाल टोक्यो ओलंपिक चल रहा है।

बता दें कि ग्रीस यानि यूनान की राजधानी एथेंस में 1896 में प्रथम ओलंपिक का आयोजन किया गया था। ओलंपिक पर्वत पर खेले जाने के कारण इसका नाम ओलंपिक पड़ा।

जानिए कि आरंभ में इस खेलों में दौड़, मुक्केबाजी, कुश्ती, रथों की दौड़, घुड़सवारी, तलवारबाजी आदि सैनिक प्रशिक्षण का हिस्सा हुआ करता था। अब तक भारत 28 ओलंपिक मेडल जीता है जिसमें 7 गोल्ड है। ओलंपिक पर विश्व के लगभग 200 देशों के खिलाड़ियों की नजरें ओलंपिक के 25 से अधिक खेलों पर होती है। ओलंपिक अब आंदोलन का रूप ले रहा है। यही कारण है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बिहार में खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने हेतु विधेयक पारित करा लिया है। यह खेल विश्वविद्यालय ऐतिहासिक स्थल राजगीर में स्थापित होगा। भारत के 28 राज्यों में बिहार छठा राज्य होगा जहां एक खेल विश्वविद्यालय स्थापित होने जा रहा है।

सभी खिलाड़ियों एवं खेल प्रेमियों ने सीएम नीतीश कुमार को कोटि-कोटि साधुवाद दिया है। अब बिहार की खिलाड़ी बेटियां भी मणिपुर की मीराबाई चानू की तरह बनना चाहती हैं जिसने विश्व में भारत को गौरवान्वित किया। बिहार की खिलाड़ी बेटियां भी सपना देखने लगी है कि उसे भी जीत कर घर लौटने पर एयरपोर्ट पर सीएम रिसीव करेंगे, रास्ते भर लोग खड़े होकर ग्रैंड वेलकम करेंगे। करोड़ों का गिफ्ट और प्रतिष्ठा का पद दिया जाएगा। मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि खेल को करियर के रूप में स्वीकार करने पर ही खिलाड़ी खुद को और भारत को ऊंचाई प्रदान कर सकते हैं।

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नीतीश सरकार अब विश्वविद्यालय की महिला शिक्षकों को 2 बच्चों की देखभाल के लिए 2 वर्षों की छुट्टी देगी

बता दें कि बिहार राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी अन्य महिला कर्मियों के समान 2 बच्चों की देखभाल के लिए सेवाकाल में 730 दिनों (2 वर्ष) का अवकाश दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बिहार विधानसभा के चालू सत्र में सदन को यह जानकारी दी कि वर्ष 2015 में सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में महिला कर्मियों को अवकाश देने का यह निर्णय लिया गया था। तब से सभी महिला कर्मियों को सेवा काल में दो बच्चों की देखभाल के लिए कुल 730 दिनों का अवकाश दिया जाता है यानि 2 वर्षों का सवैतनिक अवकाश।

जानिए कि शिक्षा मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को यूजीसी गाइडलाइंस के अनुसार चलना पड़ता है और यह भी कि यूजीसी एक स्वायत्त संस्था है फिर भी राज्य सरकार विश्वविद्यालय की महिला शिक्षकों को दो बच्चों की देखभाल के लिए 730 दिनों का अवकाश देने की अपने स्तर पर समीक्षा करके इसे लागू करायेगी तथा इस आशय का निर्देश विश्वविद्यालयों को भी देगी।

रही बात यूजीसी के प्रावधान लागू होने या नहीं होने की, तो इसका इस बात से कोई मतलब इसलिए नहीं कि यह बिहार की नीतीश सरकार का अपना फैसला है जिसे लागू करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया जाएगा।

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