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कभी नहीं मरेगी कोसी की उड़नपरी गीतांजलि

जन्म लेने के बाद जिसने चलना सीखा ही नहीं बल्कि हमेशा दौड़ती ही रही उसी उड़नपरी का नाम है – गीतांजलि | प्रतिदिन दस किलोमीटर दौड़ना, दो मंजिले घर की सीढियों पर ननस्टॉप सेंचुरी मारना और फिर आगे पटना के गोलघर की सीढ़ियों पर दौड़ते हुए चढ़ते-उतरते चौका-छक्का जिसके लिए आम बात हो वह भला क्यों नहीं जीतेगी – राज्यस्तरीय सौ गोल्ड मेडल और राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों गोल्ड एवं सिल्वर मेडल |

दुनिया को अल्पायु में ही अलविदा कहने वाली उस उड़नपरी, कोसी की बेटी, गीतांजलि को यहाँ के जजवाती धावक-धाविकाएँ मरने नहीं देंगे | सौ से ऊपर धावक एवं पचास से ऊपर धाविकाएँ क्रमशः दस किलोमीटर और तीन किलोमीटर की दौड़ पूरी कर गीतांजलि को श्रद्धांजलि दी और स्वयं वे गीतांजलि फाउंडेशन की ओर से पुरस्कृत भी हुए |

Madhepura DM. L.P.Chauhan paying homage to Geetanjali.
Madhepura DM. L.P.Chauhan paying homage to Geetanjali.

कार्यक्रम का आरम्भ गीतांजलि की तस्वीर पर जिला पदाधिकारी एल.पी.चौहान, जिला परिषद अद्यक्षा मंजू देवी, समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित अन्य गणमान्य द्वारा पुष्पांजलि अर्पण से किया गया | आगे धावकों को हरी झंडी दिखाकर “गीतांजलि रोड रेस” का श्री गणेश और गणमान्य लोगों द्वारा उद्गार व्यक्त किया गया |

सर्वप्रथम डॉ.मधेपुरी ने गीतांजलि का स्मरण करते हुए नोबेल पुरस्कार प्राप्त रवीन्द्रनाथ टैगोर की गीतांजलि की प्रथम पंक्ति से लोगों को रू-ब-रू कराते हुए यही कहा – हे देव ! बहा दो अहंकार, मेरे ही आँसू जल में !! यही संकल्प हम सभी आज के दिन लें | उन्होंने यह भी कहा कि गीतांजलि जिस मधेपुरा की धूल भरी सड़कों पर दौड़कर ऊंचाई पायी है वह मधेपुरा उसके नक़्शे कदम पर चलकर न जाने कितनी गीतांजलि पैदा करेंगी जो राष्ट्रीय स्तर की धाविकाएँ बनकर उसी की गीत सदा गाती रहेंगी |

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला, अंचलाधिकारी उदय कृष्ण यादव, हिन्दुस्तान ब्यूरो चीफ अमिताभ, जागरण ब्यूरो चीफ धर्मेन्द्र भारद्वाज, प्राचार्य अशोक कुमार, पूर्व कुलसचिव डॉ.गणेश कुमार एवं जिला परिषद की अद्यक्षा मंजू देवी, प्राचार्या चन्द्रिका यादव, डॉ. अरुण कुमार, परमेश्वरी प्र.यादव, आई.एम.ए.अद्यक्ष डॉ.मिथिलेश कुमार, डॉ.आर.के.पप्पू, डॉ.पी.के.मधुकर, डॉ.अमित कुमार, ललन कुमार अद्री सहित परिवार के लोग अरविन्द कुमार, सुशील कुमार, पृथ्वीराज यदुवंशी एवं खेल से जुड़े संतकुमार, अनिल कुमार राज आदि ने अपने संस्मरण व उद्गार व्यक्त किये तथा गीतांजलि के बहाने नारी सशक्तिकरण की दिशा में कुछ करने का संकल्प दुहराया |

कार्यक्रम के आखिरी दौर में समस्त पुरुष-महिला प्रतिभागियों को “रनिंग शूज़ एवं जर्सी” पुरस्कार स्वरुप दिए गये | मंच संचालन हर्षवर्धन सिंह राठौर एवं डॉ. अलोक कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संजीव ने किया |

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पी.जी. शिक्षक भी हड़ताल पर जाने को विवश  !

भू.ना.मंडल वि.वि. के पी.जी. शिक्षकों की कलम बन्द एक दिवसीय हड़ताल दिनांक 7-अगस्त (शुक्रवार) को होगी | मंडल वि.वि. के दर्ज़नों स्नातकोत्तर विभागों के तमाम शिक्षकों ने अखिल भारतीय वि.वि. एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित बैठक में ए.आई.फुक्टा के आह्वान पर सात अगस्त को कलम बन्द हड़ताल पर जाने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है |

यद्यपि शिक्षक को समाज का सृजनहार ही नहीं बल्कि रक्षक और रखवाला भी कहा जाता है, फिर भी शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने एवं उनकी समस्याओं के निदान पर नजर रखने की चेष्टा न तो केन्द्र सरकार कर रही है और न राज्यसरकार |

Dr. Naresh Kumar , Mahasachiv Vishwavidyalaya Sangh and Senate Member BNMU
Dr. Naresh Kumar , Mahasachiv Vishwavidyalaya Sangh and Senate Member BNMU

फिलहाल यह एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सातवें वेतन पुनरीक्षण आयोग के गठन एवं शिक्षकों की अन्य समस्याओं के प्रति केन्द्र सरकार के मानव संसाधन विभाग की उदासीन रवैये के खिलाफ मनोविज्ञान विभाग के डॉ.कैलाश प्रसाद यादव की अद्यक्षता में की गयी जिसमें सभी विषयों के पी.जी. शिक्षकों के वि.वि. संघ के महासचिव एवं सीनेट सदस्य डॉ. नरेश कुमार के पुरजोर समर्थन को सभी शिक्षक बन्धु महसूसते रहे |

बैठक में वि.वि. के सभी विभागों के शिक्षकों की उपस्थिति बनी रही जिसमें मुख्यरूप से मौजूद रहे- रसायन विभाग के डॉ.कौशलेन्द्र कुमार, वाणिज्य के डॉ.ओमप्रकाश चौधरी, वनस्पति के डॉ. बलराम सिंह, हिन्दी के डॉ.सिद्देश्वर काश्यप एवं दर्शनशास्त्र के डॉ.अनिल कुमार आदि |

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बी.एन.मंडल वि.वि. बी.सी.ए. फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा की तिथि में परिवर्तन

 भू.ना.मंडल वि.वि. के परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि 7 अगस्त को पी.जी.शिक्षकों के एक दिवसीय कलम बन्द हड़ताल पर जाने के निर्णय के अनुरूप बी.सी.ए. प्रथम सेमेस्टर की 7-अगस्त को होने वाली परीक्षा अब 14-अगस्त को होगी | याद रहे कि परीक्षा केन्द्र एवं परीक्षा आरम्भ का समय पूर्ववत ही रखा गया है |

ज्ञातव्य हो कि द्वितीय सेमेस्टर की बी.सी.ए. परीक्षा कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है | परीक्षा नियंत्रक डॉ.कुमार ने कहा कि द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा का कार्यक्रम पूर्ववत ही रहेगा |

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मधेपुरा जिले का बेशकीमती मीणा अदृश्य हो गया !

मधेपुरा के जिला पदाधिकारी गोपाल मीणा के स्थानान्तरण से जहाँ एक ओर आम लोगों की जुबान से अनायास यह आवाज निकली कि क्या हो पायेंगी अब मधेपुरा जिला में कदाचार मुक्त परीक्षाएँ एवं प्रतिभाओं का समुचित सम्मान ! वहीं दूसरी उनके स्थानान्तरण के समाचार को सुनते ही किसानों को जैसे सांप सूंघ गया | उनके जाने के बाद धान बिक्री आदि की राशि जो किसानों के बैंक खाते में सीधे जमा होती रही उसका क्या होगा ? क्या फिरसे बिचौलियों की चांदी कटने लगेगी ?

विदाई समारोह में उपस्थित भीड़ को संबोधित करते समय सभी वक्ताओं ने अपनी-अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में किसी तरह सफलता तो पा ली परन्तु डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार एवं विजय झा इतने भावुक हो गये कि मुंह से आवाज तक नहीं निकल पाई, लेकिन नयनों से अश्रुकण अवश्य टपक पड़े |

Farewell Party of DM Gopal Meena .
Farewell Party of DM Gopal Meena .

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला, एन.डी.सी. प्रदीप कुमार झा, अंचलाधिकारी उदय कृष्ण यादव तथा अल्फाजों के ज़ादुगर पंचायत पदाधिकारी मो.खुर्शीद आलम सहित अन्य पदाधिकारियों ने मीणा साहब के निर्देशन में किये गये कार्यों से प्राप्त अनुभवों का बखूबी इजहार किया | समाजसेवियों की ओर से डॉ.मधेपुरी ने कहा कि चन्द रोज कवल डॉ. कलाम दुनिया को छोड़कर चले गये और आज मधेपुरा को छोड़कर गोपाल जा रहा है | डॉ मधेपुरी ने अपनी पंक्तियाँ यूँ कही :- “ दुनिया रंगमंच है अपनी, सभी भूमिका निभा रहे हैं | कोई आकर हँसा गये जी, कोई जाकर रुला रहें हैं || ”

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि यदि हमारी चाहत में ताकत होगी तो सारा कायनात हमें मदद करने में इस तरह जुट जायेगा कि जल्द ही हमारे हर दिल अज़ीज़ मीणा साहब कोसी-कमिश्नर बनकर हमारे बीच आ जायेंगे और आपके साथ काम करेंगे, आपको नेतृत्व प्रदान करेंगे तथा कुशल मार्गदर्शन भी देंगे |

मौके पर उपस्थित आरक्षी अधीक्षक आशीष भारती द्वारा उनके स्थानान्तरण से जिन वर्गों में ख़ुशी हुई, उसे रेखांकित किया गया |

निवर्तमान जिला पदाधिकारी गोपाल मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि अच्छी तरह काम करने के लिए अच्छे फिटनेस की जरुरत होती है जो आप समय निकाल कर करते रहेंगे | साथ ही पारदर्शिता के साथ कार्यों के निष्पादन में, गरीबों एवं छात्रों की प्रतिभा को सम्मान देने में तथा औरों के लिए जीने में “आनंद” महसूसते रहेंगे |

अंत में सबों ने फूल मालाओं से उस बेशकीमती मीणा को इस कदर ढँक दिया मानो वे अदृश्य ही हो गये | उस लम्हे को शायर खुर्शीद साहब ने अल्फाजों के जरिये भावनाओं की बारिश से नहला दिया और अन्त में उन्होंने धन्यवाद देते हुए सभा की भी विदाई कर दी |

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बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल

चुनाव से पूर्व बिहार सरकार ने 48 आइएएस और 44 आइपीएस अधिकारियों को स्थानांतरित कर राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया है। लक्ष्मी प्रसाद चौहान मधेपुरा के नए डीएम होंगे। वे गोपाल मीणा की जगह लेंगे। मीणा को कम्फेड के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है। इन तबादलों के बाद बलिया के एसडीपीओ कुमार आशीष मधेपुरा के एसपी बनाए गए हैं।

स्थानांतरित आइएएस और आइपीएस अधिकारियों की पूरी सूची इस प्रकार है :

स्थानांतरित आइएएस अधिकारी

नाम – स्थानांतरण से पहले – स्थानांतरण के बाद

रामेश्वर सिंह – महानिदेशक, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस – विभागीय जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन

आनंद किशोर – कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति – प्रमंडल आयुक्त, पटना

कृष्ण मोहन – डीएम, गोपालगंज – संयुक्त सचिव, सहकारिता विभाग

कु. विनोद नारायण सिंह – डीएम, शिवहर – निदेशक, माध्यमिक शिक्षा

जीतेंद्र श्रीवास्तव – डीएम, पूर्वी चंपारण – कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति

लक्ष्मी प्रसाद चौहान – डीएम, सुपौल – डीएम, मधेपुरा

ललन जी – डीएम, नवादा – डीएम, कटिहार

प्रभाकर झा – डीएम, कैमूर – संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग

नवीन चंद्र झा – डीएम, औरंगाबाद – राज्य परिवहन आयुक्त, पटना

कुंवर जंग बहादुर – डीएम, अरवल – उत्पाद आयुक्त सह डीजी निबंधन

प्रकाश कुमार – डीएम, कटिहार – संयुक्त सचिव, खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण

शशिभूषण कुमार – डीएम, सहरसा – निदेशक, आइसीडीसीएस

राजेश कुमार – डीएम, पूर्णिया – सचिव, राजस्व पर्षद

प्रतिमा एसके वर्मा – डीएम, सीतामढ़ी – डीएम, पटना

पंकज कुमार पाल – डीएम, भोजपुर – डीएम, पूर्णिया

अनुपम कुमार – डीएम, मुजफ्फरपुर – डीएम, पूर्वी चंपारण

वीरेंद्र प्रसाद यादव – डीएम, भागलपुर – डीएम, भोजपुर

अभय कुमार सिंह – डीएम, पटना – अपर सचिव, सामान्य प्रशासन

आदेश तितरमारे – प्रबंध निदेशक, कम्फेड – डीएम, भागलपुर

धर्मेंद्र सिंह – कृषि निदेशक – डीएम, मुजफ्फरपुर

नरेंद्र कुमार सिंह – डीएम, अररिया – संयुक्त सचिव, नगर विकास एवं आवास

शशिकांत तिवारी – डीएम, जमुई – संयुक्त सचिव, पीएचइडी

विनोद सिंह गुंजियाल – डीएम, वैशाली – डीएम, सहरसा

मनोज कुमार – संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग – डीएम, नवादा

गोपाल मीणा – डीएम, मधेपुरा – एमडी, कम्फेड

संजय कुमार सिंह – डीएम, सिवान – परियोजना निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना

राजेश्वर प्रसाद सिंह – संयुक्त सचिव, ग्रामीण कार्य – डीएम, कैमूर

उदय कुमार सिंह – संयुक्त सचिव, पीएचइडी – डीएम, लखीसराय

बैदयनाथ यादव – निदेशक, सामाजिक सुरक्षा – डीएम, सुपौल

प्रणव कुमार – डीएम, शेखपुरा – डीएम, समस्तीपुर

बी कार्तिकेय धनजी – डीएम, नालंदा – कृषि निदेशक

मनोज कुमार सिंह – डीएम, लखीसराय – डीएम, जहानाबाद

साकेत कुमार – डीएम, बांका – डीएम, सीतामढ़ी

एम रामचंद्रुडु – डीएम, समस्तीपुर – निदेशक, प्रा. शिक्षा

रचना पाटिल – डीडीसी, नालंदा – डीएम, वैशाली

चंद्रशेखर सिंह – डीडीसी, भागलपुर – डीएम, शेखपुरा

राजकुमार – डीडीसी, मधुबनी – डीएम, शिवहर

कंवल तनुज – डीडीसी, मुजफ्फरपुर – डीएम, औरंगाबाद

कौशल किशोर – डीडीसी, बेगूसराय – डीएम, जमुई

आलोक रंजन घोष – संयुक्त सचिव, मत्स्य व पशु संसाधन – डीएम, अरवल

राहुल कुमार – परियोजना निदेशक, राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी – डीएम, गोपालगंज

महेंद्र कुमार – नगर आयुक्त, दरभंगा – डीएम, सिवान

हिमांशु वर्मा – नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर – डीएम, अररिया

त्यागराजन एसएम – नगर आयुक्त, बिहारशरीफ – डीएम, नालंदा

निलेश रामचंद्र – नगर आयुक्त, गया – डीएम, बांका।

स्थानांतरित आइपीएस अधिकारी
नाम – स्थानांतरण से पहले – स्थानांतरण के बाद

अजिताभ कुमार – आईजी, बीएमपी – आईजी, सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार
प्रदीप कुमार श्रीवास्तव – पदस्थापना की प्रतीक्षा में – डीआईजी, मुजफ्फरपुर
उपेंद्र कुमार सिन्हा – डीआईजी, बीएमपी – डीआईजी, भागलपुर
शालीन – डीआईजी, पटना – डीआईजी, बीएमपी का अतिरिक्त प्रभार
मो. मंसूर अहमद – समादेष्टा, बीएमपी-11 – आईजी (प्रशिक्षण) के सहायक
चंद्रिका प्रसाद – सहायक निदेशक, पुलिस अकादमी – आईजी, बीएमपी के सहायक
विनोद कुमार – रेल एसपी, मुजफ्फरपुर – एसपी, सहरसा
राजेश कुमार – एसपी, मधुबनी – समादेष्टा, बीएमपी-5
अनिल कुमार सिंह – एसपी, गोपालगंज – एसपी, खगड़िया
विनय कुमार – समादेष्टा, बीएमपी10 – एसपी, पश्चिम चंपारण
नीरज कुमार – एसपी, शेखपुरा – समादेष्टा, बीएमपी-9
अख्तर हुसैन – आईजी, कल्याण के सहायक – एसपी, मधुबनी
क्षत्रनील सिंह – एसपी, कटिहार – समादेष्टा, बीएमपी-10
आनंद कुमार सिंह – समादेष्टा, बीएमपी-16 – एसपी, बगहा
पंकज कुमार सिन्हा – एसपी, सहरसा – एसपी, नवगछिया
शेखर कुमार – एसपी, नवगछिया – समादेष्टा, होमगार्ड
सुनील कुमार – आईजी रेल के सहायक – एसपी, निगरानी ब्यूरो
विजय कुमार वर्मा – एसपी, अररिया – पुलिस महानिरीक्षक निरीक्षण के सहायक
सुनील कुमार नायक – एसपी, कैमूर – एसपी, एसटीएफ
कुमार एकले – एसपी, एसटीएफ – एसपी, सुपौल
शिवकुमार झा – एसपी, शिवहर – एसपी, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो
सिद्धार्थ मोहन जैन – एसपी, नालंदा – एसपी, कटिहार
पंकज राज – एसपी, सुपौल – समादेष्टा, बीएमपी-1
शिवदीप लांडे – एसपी, रोहतास – एसपी, एसटीएफ
राजेश त्रिपाठी – आईजी, बीएमपी के सहायक – आईजी, कल्याण के सहायक
मो. शफीउल हक – एसपी, बगहा – समादेष्टा, बीएमपी-11
किम – बीएमपी, होमगार्ड – पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई
विकास वर्मन – एसपी, सीवान – समादेष्टा, बीएमपी-3
नताशा गुड़िया – समादेष्टा, बीएमपी-5 – एसपी, गोपालगंज
एमएस ढिल्लों – एसपी, अरवल – एसपी, रोहतास
हरप्रीत कौर – एसपी, कमजोर वर्ग – एसपी, कैमूर
सौरभ कुमार साह – एसपी, बेतिया – एसपी, सिवान
सुधीर कुमार पोरिका – सिटी एसपी, पटना पूर्वी – एसपी, अररिया
धूरत सायली सबला राम – एसपी, खगड़िया – सिटी एसपी, पटना पूर्वी
राजेंद्र कुमार भील – सिटी एसपी, मुजफ्फरपुर – एसपी, शेखपुरा
आशीष भारती – एसपी, मधेपुरा – एसपी, निगरानी ब्यूरो
कुमार आशीष – एसडीपीओ, बलिया – एसपी, मधेपुरा
रविरंजन कुमार – एसडीपीओ, सदर खगड़िया – सिटी एसपी, गया
अवकाश कुमार – एसडीपीओ, महाराजगंज – सिटी एसपी, भागलपुर
आनंद कुमार – एसडीपीओ, समस्तीपुर – सिटी एसपी, मुजफ्फरपुर
दिलीप कुमार मिश्रा – एसपी, निगरानी ब्यूरो – एसपी, अरवल
अश्विनी कुमार – एसपी, निगरानी ब्यूरो – एसपी, शिवहर
विवेकानंद – एएसपी, नगर पटना – एसपी, नालंदा।

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बी.एन.एम.यू. में फणीश्वर नाथ रेणु शोध पीठ पर विचार गोष्ठी

बी.एन.एम.यू. के हिन्दी स्नातकोत्तर विभाग में रेणु शोध पीठ की स्थापना हेतु आयोजित विचार गोष्ठी का उद्घाटन प्रभारी कुलपति जे.पी.एन.झा, मुख्य अतिथि डॉ. मधेपुरी, परिसम्पदा पदाधिकारी डॉ.शैलेन्द्र कुमार, एवं कुलानुशासक डॉ.विश्वनाथ विवेका ने सम्मिलित रूप से दीप जलाकर किया | अद्यक्षता डॉ. विनय कुमार चौधरी ने किया |

यह कार्यक्रम एन.एस.यू.आई. के बैनर तले आयोजित किया गया था जिसके सफल आयोजन में छात्र नेता मनीष कुमार एवं प्रभात कुमार मिस्टर ने अपनी टीम के साथ बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया | इन्होंने रेणु जी को साहित्यिक धरोहर एवं क्रांतिकारी लेखक कहा |

उद्घाटनकर्ता डॉ. झा ने कहा कि रेणु की रचनाओं में सम्पूर्ण कोशी अंचल बिम्बित व प्रतिबिंवित होता रहा है | मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने रेणु पीठ की स्थापना की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए फारविसगंज कॉलेज को रेणु के नाम किये जाने के प्रयासों की चर्चा भी की | डॉ. मधेपुरी ने मुर्धन्य साहित्यकारों जैसे फणीश्वर नाथ रेणु , मायानंद मिश्र, लक्ष्मी नारायण सुधांशु , जनार्दन झा द्विज, अनुपलाल मंडल आदि के नाम के आगे “स्वर्गीय” लिखने-बोलने पर एतराज जताते हुए कहा कि हम स्व. लोहिया , स्व. नेहरु नहीं बोलते हैं |

Honourable Persons at Renu Peeth vimarsh Gosthi at BNMU.
Honourable Persons at Renu Peeth vimarsh Gosthi at BNMU.

इस अवसर पर साहित्य से सरोकार रखने वाले एवं विशिष्ट साहित्यकारों ने रेणु शोध पीठ की स्थापना मंडल वि.वि. में सरकार द्वारा स्थापित किये जाने हेतु चरणबद्ध प्रयासों की भी चर्चाएँ की जिनमें डॉ.विद्यानंद मिश्र, डॉ. नरेन्द्र ना. यादव, डॉ.आर.के.पी.रमण, डॉ. के.एस.ओझा, डॉ. नरेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ.अमोल राय, डॉ.ललितेश मिश्र, डॉ.शिव बालक प्रसाद आदि ने विस्तार से प्रकाश डाला |

छात्रनेताओं में सुदीप कुमार सुमन, मनीष कुमार, प्रभात कुमार, राहुल राज, आदि रेणु शोध पीठ की स्थापना कराने की दिशा में संकल्पित हैं | अद्यक्षता करते हुए डॉ.चौधरी एवं मंच संचालन करते हुए डॉ.सिद्देश्वर काश्यप ने इन छात्रों को प्रोत्साहित किया और इस पीठ की स्थापना कराकर ही दम लेने पर बल दिया | अन्त में मनीष कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया |

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भाजपा की बुद्धिजीवी विचार गोष्ठी मधेपुरा में संपन्न

भाजपा के प्रदेश प्रभारी भूपेन्द्र यादव ने स्थानीय डॉ.अमोल राय के निवास ओम भवन में बुद्धिजीवियों की विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि बिहार की जनता अब परिवर्तन चाहती है और पारदर्शी सरकार चाहती है | आप बुद्धिजीवी इस पर विचार करें और सही लगे तो परिवर्तन के बयार को बहने दें |

समयाभाव के कारण बुद्धिजीवियों को कुछ कहने का मौका नहीं मिला | केवल और केवल डॉ. मधेपुरी ने मौका निकालकर दो मिनट में यूँ कहा :- प्रधानमंत्री नेहरु ने देशवासियों से कहा आराम हराम है ; शास्त्री जी का जय जवान जय किसान और अटल जी ने जोड़ा जय विज्ञान | विजन वाले पी.एम. मोदी जी का स्लोगन है – सबका साथ, सबका विकास |

डॉ. मधेपुरी ने कहा कि यह नारा देशवासियों को खूब भाया | अच्छा यह भी लगा जब पी.एम. नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी सम्प्रदाय के लोगों से पुराना लोहा – खुरपी, कचिया, कुदाल आदि जमाकर भेजने का अनुरोध किया – जिसे गलाकर वे सरदार पटेल की अबतक की बनी सबसे ऊँची लौह प्रतिमा बनायेंगे |

Dr Madhepuri at BJP Buddhijeevi Vichar Gosthi .
Dr Madhepuri at BJP Buddhijeevi Vichar Gosthi .

आगे डॉ. मधेपुरी ने प्रदेश प्रभारी भूपेन्द्र यादव से बस इतना ही कहा – मेरी ये बातें पी.एम. मोदी जी तक अवश्य पहुंचा देंगे कि 125 करोड़ देशवासियों से प्रति व्यक्ति दस रुपए चन्दे की माँग करें और अरबों-खरबों रुपये से विश्व का सबसे बड़ा अस्पताल बाबरी मस्जिद – राम मंदिर के स्थान पर बनवाकर उसका नाम – “राम-रहीम अस्पताल” रखने की उद्घोषणा कर दें तो सारा देश उन्हें भी डॉ. कलाम के राह का राही स्वीकारने में संकोच नहीं करेगा |

गोष्ठी में स्वगाताद्यक्ष के रूप में डॉ.अमोल राय, मंच संचालक डॉ.विनय कुमार चौधरी अच्छी खासी बुद्धिजीवियों की उपस्थिति से गद्गद् होते दिखे | शहर के सभी वर्गों के बुद्धिजीवियों की उपस्थिति प्रभारी भूपेन्द्र यादव के साथ-साथ विधान पार्षद डॉ. दिलीप जायसवाल, प्रदेश महामंत्री सूरज नंदन मेहता, प्रदेश शिक्षा मंच अद्यक्ष प्रो.अनिल यादव, कला संस्कृति मंच के प्रदेश अद्यक्ष आनंद मिश्रा, प्रदेश उपाद्यक्ष डॉ.राम नरेश सिंह, विधायक डॉ.आलोक रंजन तथा ज़िलाद्यक्ष अनिल कुमार यादव सहित सभी उपस्थित कार्यकर्ताओं को उत्साहित करती रही |

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आप जानिये क्या हैं ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ?

डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम यानी अवुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम | और आगे जानिये- अवुल हुए परदादा, पकीर दादा जी एवं जैनुलाब्दीन वालिद (पिता) | इन सबों के अन्त में सबकुछ कलाम पर जाकर ठहर जाता है क्योंकि उसे ना बेटा है न बेटी…. और ना….. | फिर भी यह कारवाँ रुकने वाला नहीं है | भारत के समस्त बेटे-बेटियों द्वारा बड़े-बड़े सपने देखने और उन्हें अमलीजामा पहनाने हेतु हमारा कलाम हमेशा जिन्दा रहेगा | कलाम केवल भारत को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को अमन के लिए प्रेरित करता रहेगा | गीता-कुरान के तर्ज पर कर्मयोग का पाठ पढाता रहेगा तथा निरन्तर कबीरवाणी – काल करे सो आज कर…… एवं ढाई आख़र प्रेम का….. गुनगुनाता रहेगा | कलाम की इन्हीं भावनाओं को पंक्तिबद्ध कर आपका मधेपुरी हमेशा आपके साथ गुनगुनाता रहेगा – विशेष रूप से……

युवजनों के नाम  डॉ. कलाम का संदेश :-

हों कर्मठ तेरे हाथ

सृजन तब करूं मैं सुख से

तुम्हारे लिए !

एक बेहतर कल के लिए

मैं दौड़ने को  अब भी तैयार

तुम्हारे लिए !

इस महान पुण्य-भूमि में मैं

खोदा गया एक कुआँ हूँ

तुम्हारे लिए !

देखो सपना विकसित भारत का

उठो ! खाक हो जाऊंगा मैं

तुम्हारे लिए !

यही बस अन्दर में है आग

सुलगती दिल में बारम्बार

तुम्हारे लिए !तुम्हारे लिए !!

  डॉ. मधेपुरी की कलम से …..

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उच्चशिक्षा के प्रति संवेदनशील बालमुकुंद बाबू की प्रतिमा का अनावरण

रासबिहारी लाल मंडल,  शिवनन्दन प्रसाद मंडल एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल के सपने को साकार करने के लिए साहुगढ़ मधेपुरा में बी.एन.मंडल वाणिज्य महाविद्यालय को जमीन देकर कालेज स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी बालमुकुंद मंडल ने | उसी बालमुकुंद बाबू की प्रतिमा अनावरण समारोह का उद्घाटन करते हुए भू.ना.मंडल वि.वि. के प्रभारी कुलपति डॉ. जे.पी.एन.झा ने कहा कि कॉलेज पूरी तरह स्थापित हो गया है | अब इसके सर्वांगीन विकास हेतु छात्र-छात्राओं को बी.सी.ए. , एम.बी.ए. आदि रोजगारोन्मुखी शिक्षा देकर तरासने की जरुरत है |

समारोह की अद्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य डॉ.हीराकान्त मंडल ने कहा कि वे रात-दिन एक कर समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र बाबू एवं प्रखर समाजसेवी बालमुकुंद बाबू के सपनों को साकार करने में लगे हैं |

महाविद्यालय की स्थापना व निर्माणारम्भ की न्यू की ईट बने डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने सर्वप्रथम समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज जो यह कॉलेज विशाल वट वृक्ष सा दिखता है वह 2 अक्टूबर 1975 को नन्हा सा बीज मात्र था, जिसमें पानी डालने का काम यहाँ के अधिवक्ताओं, बुद्धिजीवियों, गुरुओं ने पूरे मनोयोग से किया | साथ ही दूर-दराज के गांवों के गरीब किसान-मजदूर भी अपना भगवान मानने वाले मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के नाम वाले कॉलेज बनाने में अपना अंतर्कोष लुटाते रहे – जिसका गवाह है – त्रिमूर्ति : सचिव बालमुकुंद मंडल, प्रो. श्यामल किशोर यादव और डॉ. मधेपुरी | यह त्रिमूर्ति महीनों पदयात्रा पर निकल, बापू के गावों में जा-जाकर शिक्षा के इस मंदिर के लिए मदन मोहन मालवीय की तरह रुपए-आठ आने जमा करते रहे और आज सब कुछ आपके सामने है |

Balmukund Babu Pratima Anawaran Samaroh BNMV .
Balmukund Babu Pratima Anawaran Samaroh BNMV .

डॉ. मधेपुरी ने भावुक होकर कहा कि यहाँ के संस्थापक प्रधानाचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.के.के.मंडल एवं डॉ.हीराकान्त मंडल आदि ने ग्रामीण इलाके के बच्चों को आगे बढ़ाने हेतु सर्वाधिक प्रोत्साहन दिया तथा दे भी रहे हैं |

तिलका मांझी वि.वि. के प्रतिकुलपति रहे डॉ.के.के.मंडल, टी.पी.कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो.सच्चिदानंद, शशिशेखर यादव, महासचिव डॉ.अशोक कुमार, सिंडिकेट सदस्य विद्यानंद यादव, डॉ.परमानन्द यादव, डॉ.शवीर सहित डॉ.जौहरी, डॉ.अशोक, डॉ. के.पी. आदि प्राचार्यों एवं शिक्षाविदों ने कॉलेज स्थापना में योगदान देने वाली हस्तियां – लोकअभियोजक शिवनेश्वरी प्रसाद, लक्ष्मी नारायण मंडल, नंदकिशोर मंडल, गोविन्द प्र. यादव, परमेश्वरी प्र. दिवाकर, शिवनन्दन राय, सुरेन्द्र प्र. यादव, गजेन्द्र ना. यादव, दीप ना. मंडल आदि को स्मरण करते हुए शेष बचे वेदानन्द यादव, महेंद्र प्र. यादव, प्रधान जी  सहित अन्य सबों की निष्ठा एवं लगन की विस्तृत चर्चा की जिनके कारण यह महाविद्यालय मूर्तरूप ले सका |

मौके पर डॉ.अलोक कुमार, पारो यादव, मनोज भटनागर सहित कॉलेज के शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं साहुगढ़ निवासी की उपस्थिति समारोह को भव्यता प्रदान करता रहा | अन्त में डॉ. नवीन कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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कलाम, कलाम थे… सिर्फ कलाम..!

आज भी एक दिन है बाकी दिनों की तरह… कमोबेश सबकी दिनचर्या भी आम दिनों की तरह ही होगी… हम, हमारा घर, पास-पड़ोस, गांव-शहर, राज्य, देश और दुनिया अपनी परिधि और परिवेश में अपने-अपने हिस्से की भूमिका निभा रहे होंगे। नंगी आंखों से देखें तो सब कुछ वही है जो कल था। हाँ, सब कुछ वही है… सिवाय एक परिवर्तन के। और वो परिवर्तन बस इतना है कि हमारे-आपके जैसा एक हाड़-मांस का व्यक्ति, दो हाथ, दो पैर, दो आँखों वाला व्यक्ति कल शाम तक खड़ा था और आज लेटा हुआ है। लेटता तो वो 84 साल से रहा था लेकिन इस बार उसे नींद जरा गहरी आ गई। “पृथ्वी को रहने लायक कैसे बनाया जाय” इस पर सोचते-सोचते उसने ये पृथ्वी ही छोड़ दी। क्या ये पृथ्वी उसके रहने लायक नहीं रह गई थी..? या फिर इसे रहने लायक कैसे बनाया जाय ये सोचने को एक आत्मा ने अपनी वर्तमान काया को छोड़ना ही मुनासिब समझा..? मित्रो, यही वो बिन्दु है जहाँ किसी के भी ना रहने और एपीजे अब्दुल कलाम के ना रहने का फर्क समझ में आता है। और इस फर्क को समझकर ही हम समझ पाएंगे कि कल और आज में क्या फर्क है..? कल क्या था जो आज हमने खो दिया..?

हाँ मित्रो, कलाम नहीं रहे। कौन थे कलाम..? महान वैज्ञानिक..? बेमिसाल शिक्षक..? मिसाईलमैन..? पोखरण के नायक..? भारतरत्न..? भारतीय गणतंत्र के भूतपूर्व राष्ट्रपति..? ईमानदारी से बतायें, क्या ये सारे जवाब मिलकर भी एक कलाम को पूरा परिभाषित कर पाएंगे..? नहीं… बिल्कुल नहीं। सच तो ये है कि इनमें से कोई एक विशेषण भी किसी को गौरवान्वित करने के लिए काफी है और जब ये सारे विशेषण मिलकर भी किसी एक व्यक्ति को परिभाषित ना कर पा रहे हों तो उसके कद और उसकी हद की कल्पना क्या की जा सकती है..?

बुद्ध, गांधी, मार्क्स, आईंस्टाईन और कलाम जैसे महामानव रोज-रोज नहीं आते। इन रत्नों को ईश्वर सहेज कर रखते हैं और बड़े मौके पर इन्हें धरती पर भेजते हैं। ऐसे लोग आते हैं और सदियों का अंधेरा दूर कर जाते हैं। बल्कि कहना तो ये चाहिए कि कलाम जैसे लोग रोशनी को भी रोशनी दिखा जाते हैं। आज जहाँ ‘मनुष्यता’ दिन-ब-दिन अपनी शर्मिन्दगी के बोझ तले दबती जा रही है वहाँ किसी ‘कलाम’ की ही बदौलत एक मनुष्य के रूप में हम सिर उठा पाते हैं।

कलाम अब सशरीर हमारे बीच नहीं होंगे लेकिन हमारी सोच, हमारे सपनों से उन्हें भला कौन दूर कर सकता है। हमारी आनेवाली पीढ़ियां जब अपना लक्ष्य तय करेंगी, तब कलाम ही टोक रहे होंगे कि “छोटा लक्ष्य एक अपराध है”… और जब-जब हम आँखे बन्द कर सपने देखेंगे, तब कलाम ही हमें बता रहे होंगे कि “सपने वो नहीं जो हम बंद आँखों से देखते हैं, सपने तो वो हैं जो हमें सोने नहीं देते”। फेल (FAIL) को फर्स्ट अटेम्प्ट इन लर्निंग, एंड (END) को एफर्ट नेवर डाइज और नो (NO) को नेक्स्ट अपॉर्चुनिटी कहने का जीवन-दर्शन हमें कलाम से ही मिल सकता है और सफलता की गूढ़ पहेली कलाम ही इतनी आसानी से सुलझा सकते हैं कि “सफलता का रहस्य सही निर्णय है, सही निर्णय अनुभव से आता है और अनुभव गलत निर्णय से मिलता है।”

आज की ‘फेसबुक पीढ़ी’ की रुचि और आदर्श पल-पल बदला करते हैं लेकिन कलाम इस पीढ़ी के लिए भी कितने बड़े आदर्श थे और वो भी कितनी रुचि के साथ इसे सोशल मीडिया में उनके लिए उद्गारों की बाढ़ से सहज समझा जा सकता है। ये जानने के लिए कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह ही जलना होगा, इस पीढ़ी के पास कलाम से बड़ा आदर्श कोई दूसरा था भी तो नहीं। यू.एन.ओ. ने कलाम के जन्मदिवस 15 अक्टूबर को ‘इंटरनेशनल स्टूडेन्ट्स डे’ घोषित कर एक भविष्य के ‘द्रष्टा’ और ‘निर्माता’ शिक्षक को बहुत सही श्रद्धांजलि दी है।

कलाम को किसी भी कोण से देख लें, देखने वाले का धन्य हो जाना तय है। गीता का कर्मयोग समझना हो तो कलाम के जीवन में एक बार झांक लेना काफी होगा। ‘स्थितप्रज्ञ’ होना क्या होता है इसे समझने के लिए कलाम से बेहतर उदाहरण हो नहीं सकता। सादगी और सहजता कितनी बड़ी पूंजी है गांधी के बाद किसी ने समझाया तो वो कलाम ही थे। जीवन का हर पल कैसे साधना का पर्याय हो सकता है इसकी गवाही तो उनके जीवन का आखिरी पल भी दे गया।

कलाम ‘महा’मानव थे, इसके अधिक मायने ये रखता है कि कलाम ‘पूर्ण’ मानव थे। और मानव जब पूर्णता को छूता है, देवत्व भी झुक जाता है। सच तो ये है कि कलाम हर ‘विशेषण’ से ‘विशेष’ थे। कलाम, कलाम थे… सिर्फ कलाम..!

– मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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