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एक दीया शहीदों के नाम

स्थानीय दैनिक जागरण के धर्मेन्द्र भारद्वाज की पूरी टीम द्वारा ‘एक दीया शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का श्रीगणेश एक पखवारे पूर्व यहां के बुद्धिजीवियों द्वारा कराई गई | बाद में स्कूल-कॉलेज एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सर्वाधिक भावनाओं को समेटा गया |

यह भी जानिए कि दीपावली की शाम में स्थानीय भूपेन्द्र चौक स्थित प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र नारायण मंडल के प्रतिमा-मंडप पर “वृन्दावन नर्सिंग होम” के चिकित्सक दम्पति डॉ.वरुण कुमार एवं डॉ.रश्मि भारती की पूरी टीम द्वारा परंपरागत ढंग से मनाये चले आ रहे इस ज्योतिपर्व को उड़ी के उन 17 शहीदों एवं तमाम सैनिकों के नाम दीये जलाकर सर्वाधिक प्रकाशमान कर दिया गया |

Dr.Rashmi Bharti (D/o Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri ) paying tributes to Udi Martyrs on the eve of Depawali at Madhepura , Bhupendra Narayan Mandal Chowk.
Dr.Rashmi Bharti (D/o Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri ) paying tributes to Udi Martyrs on the eve of Deepawali at Madhepura , Bhupendra Narayan Mandal Chowk.

सर्जन डॉ.वरुण कुमार सहित डॉ.रश्मि भारती एवं कर्मचारी जंगबहादुर, दिलीप कुमार, शिव किशोर, गजेंद्र, ललन यादव व प्रो. डॉ.अर्जुन कुमार आदि सभी उपस्थित जनों ने उड़ी के 17 शहीदों एवं देश के लिए लड़ रहे जवानों के नाम एक-एक दीप जलाये और कहा कि ये दीप वैसे सभी जवानों के लिए है जो अपनी जिंदगी की परवाह किये बगैर देश के लिए अपनी जान गंवा देते हैं |

यह भी कि इस अवसर पर गरीब मरीजों की जिंदगी में रंग भरने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.रश्मि भारती ने कहा कि मुसीबत के समय हमारे सैनिक भाई अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान को बचाते हैं | वे देश की रक्षा एवं हर आम व खास की सुरक्षा करते हैं | डॉ.भारती ने कहा कि उन सैनिकों के नाम जलाया गया एक-एक दीया न केवल बाहर का अंधेरा दूर करता है बल्कि हमारे मन को भी उल्लास के उजाले से भर देता है |

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नये वर्ष में नहीं करेंगे खुले में शौच

डॉ.राम मनोहर लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत सदर प्रखंड के सुखासन पंचायत में डॉ.शांति यादव की अध्यक्षता में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें खुले में शौच से पंचायत को मुक्त करने हेतु शौचालय निर्माण कार्य का श्रीगणेश किया गया | प्रखंड समन्वयक राजेश कुमार द्वारा पंचायत में सर्वेक्षित घरों की कुल 2453 में 794 घरों में शौचालय बना हुआ है यानि 1659 घर शौचालय विहीन पाये गये |

यह भी बता दें कि कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने कहा कि इस योजना के तहत जिले का हर गांव हर टोला खुले में शौचालय से शीघ्र ही मुक्त होगा | डी.एम.  मो.सोहैल ने उपस्थित जनों से कहा कि जो शौचालय नहीं बना पाये हैं वे यही मानकर चलें कि वे अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाये ! उन्होंने कहा कि रुढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए अपने-अपने घरों में जगह के अनुसार शौचालय का निर्माण अनिवार्य रूप से कराने में सहयोग करें |

यह भी जानिए कि महिलाओं की सर्वाधिक उपस्थिति वाली कार्यशाला में डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, ई.ओ. संजय कुमार, सदर बी.डी.ओ. दिवाकर कुमार, जिला समन्वयक बी.के.सिंह, जीविका प्रभारी अरुण कुमार, मनरेगा पीओ प्रमोद प्रियदर्शी, डी.आर.डी.ए. डायरेक्टर मनोज कुमार पवन, पैक्स अध्यक्ष हेमंत सिंह, सरपंच अरुण कुमार मंडल, प्रधानाध्यापक अशोक कुमार, उपमुखिया विजय महतो आदि की उपस्थिति में डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि संपूर्ण देश को मिथिला और कोसी ने उत्कृष्ट संस्कृति दी है और बिहार ने देश को सर्वोत्कृष्ट नेतृत्व दिया है | बावजूद इसके हमारा दुर्भाग्य है कि अभी भी हम खुले में शौच कर अनेक प्रकार की बीमारियों को आमंत्रण देते चले आ रहे हैं |

जिलाधिकारी मो.सोहैल, अध्यक्षता कर रही डॉ.शांति यादव, स्वागताध्यक्ष मुखिया कमलेश्वरी सिंह एवं अन्य पदाधिकारी सहित उपस्थित गणमान्यों ने उद्गार व्यक्त करते हुए इन्हीं बातों पर फोकस किया कि 2019 तक हर पंचायत के हर घर में शौचालय, नल का शुद्ध जल और बिजली पहुंचाने का संकल्प पूरा तभी किया जा सकेगा जब हम सभी मिलकर इस लक्ष्य को पूरा करने में पसीना बहायेंगे |

अंत में सुखासन पंचायत के वार्ड संख्या-7 की वार्ड सदस्या सारिका देवी द्वारा डी.एम.  मो.सोहैल, अध्यक्षा डॉ.शांति यादव, स्वागताध्यक्ष मुखिया कमलेश्वरी सिंह व अन्य गण्यमान्यों की उपस्थिति में शौचालय निर्माण हेतु शिलान्यास कार्य का श्रीगणेश किया गया |

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मधेपुरा मॉडल पर ही संथालों के विकास की बनी योजनाएँ

और फिर एक बार नीतीश सरकार की नजर में डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल का ‘मधेपुरा जिला’ नंबर वन पर | आदिवासी समुदाय के लोग होंगे प्रशिक्षित और बनेंगे आत्मनिर्भर – इसे योजनाबद्ध तरीके से लागू करके संथालों के उत्थान की नजीर ‘मधेपुरा’ को बनाने हेतु जिलापदाधिकारी मो.सोहैल (भा.प्र.से) ने मुख्यमंत्री संथाल सुनिश्चित रोजगार योजना के लिए पहल की थी जिसके फलस्वरूप फिलहाल सिर्फ मधेपुरा जिले का चयन राज्य सरकार द्वारा इस योजना के निमित्त किया गया है | बहरहाल, मधेपुरा मॉडल पर ही राज्य भर में संथालों के उत्थान के लिए बन रही है योजनाएँ |

यह भी बता दें कि जिले के आदिवासी बाहुल्य मुरलीगंज प्रखंड के रजनी पंचायत में इस महत्वाकांक्षी स्वरोजगार योजना का शुभारंभ डी.एम.  मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार द्वारा सम्मिलित रूप से डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार सहित प्रशासनिक टीम की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया | आगे संथालों को महुआ शराब के कारोबार की जगह दूसरे स्वरोजगार योजना से जोड़ने के लिए इस जिले में मुख्यमंत्री संथाल सुनिश्चित स्वरोजगार योजना का शुभारंभ किया गया और अब बिहार के अन्य आदिवासी आबादी वाले जिलों में भी शुरू कर संथालों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा | हाँ! इस योजना के तहत आदिवासी नर-नारियों को उनकी अभिरुचि के अनुसार अलग-अलग व्यवसाय हेतु प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जायेगी | साथ ही आदिवासी समुदाय की महिलाओं को खासतौर पर जीविका समूह से जोड़कर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तथा बैंक से लोन लेने की सुविधा भी होगी | प्रशिक्षण के बाद व्यवसाय हेतु 90% तक का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा और मात्र 10% की लागत लाभुकों को देना होगा |

यह भी जानें कि प्रशिक्षण में उन आदिवासियों को गाय, बकरी, मछली, मधुमक्खी, मुर्गी पालन के साथ-साथ मोमबत्ती बनाने, डेयरी खोलने, ब्यूटी पार्लर खोलने या मशरूम की खेती, वर्मी कंपोस्ट व साईकिल मरम्मती आदि करने से भी जोड़ा जायेगा | एससी-एसटी कल्याण संघ एवं महादलित मिशन के तहत भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जायेगा | विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जायेगा जिसकी बैठक प्रतिमाह होगी | मुख्यमंत्री विकास योजना में उपलब्ध राशि से भी इस योजना में व्यय किया जा सकता है |

अंत में यह बता देना अनिवार्य है कि आदिवासियों को प्रशिक्षण देकर, बैंक से लोन एवं अनुदान दिलाकर उनके बच्चों के अच्छे भविष्य के निर्माण के लिए जो प्रस्ताव बनाकर मधेपुरा जिला के डाययेमिक डी.एम.  मो.सोहैल ने बिहार की नीतीश सरकार के पास भेजा जिसे मामूली संशोधन के साथ राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया | प्रारूप में बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजगार तक की गारंटी का विस्तार से वर्णन किया गया है |

चलते-चलते यह भी कि डी.एम.  की पूरी टीम पुनः हरिपुरकला पंचायत के तीनकोनमा गाँव पहुंचकर वहाँ भी इस योजना का उद्घाटन किया जहाँ के उत्साहित आदिवासियों ने परंपरागत संथाली नृत्य के अलावे चादर भेंट कर डी.एम.  मो.सोहैल, एस.पी. विकास कुमार एवं डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार आदि का हृदय से स्वागत किया | अन्य पदाधिकारियों में अमृत शेखर पाठक, विवेक कुमार, मनोज कुमार पोद्दार, पारस कुमार, सुशील प्रसाद, सुरेन्द्र कुमार आदि मौजूद थे |

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समाज का दर्पण नहीं, धड़कन है साहित्य !

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया | जहां उद्घाटनकर्ता अंबेडकर विश्वविद्यालय के श्री नंदकिशोर नंदन, मुख्यवक्ता दिल्ली दूरदर्शन के निदेशक रह चुके वरिष्ठ साहित्यकार – कथाकार डॉ.गंगाधर मधुकर, झारखंड रांची से आये चन्द्रिका ठाकुर, संपादक डॉ.शिवनारायण, दूरदर्शन के पूर्व निदेशक डॉ.रमेश, कवि व आलोचक डॉ.वरुण कुमार तिवारी, वरीय कथाकार चन्द्र किशोर जायसवाल, डॉ.सुनील कुमार, डॉ.रेणु सिंह आदि ने दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का उद्घाटन किया वहीं मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं विभागीय प्राध्यापक डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप को मंच संचालन व सहयोग करते देखे गये |

इस द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में लगभग डेढ़ सौ डेलीगेट्स एवं शहर के साहित्यानुरागियों, कवि-लेखकों की अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई | समारोह की सफलता तो तब मान ली गयी जब इतनी भीड़ के बावजूद चारों ओर मरघटी सन्नाटा विराजमान देखा गया और डॉ.मधेपुरी, डॉ.नरेश कुमार (सीनेटर) सरीखे विज्ञान के अनेक शिक्षकों को भी “हिन्दी कथा साहित्य के बदलते परिदृश्य” पर राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ कथाकारों- डॉ.मधुकर गंगाधर, चन्द्रकिशोर जायसवाल, डॉ.शिवनारायण आदि द्वारा वाणी से वर्षा कर रहे सुधारस में घंटों नहाते देखा गया |

भला क्यों नहीं, जहां उद्घाटनकर्ता डॉ.नंदन ने समाज के लोगों की सोयी चेतना को जगाने हेतु विस्तार से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव जीवन के यथार्थ का चित्रण फाईव स्टार होटल में बैठकर कदापि नहीं हो सकता, वहीं मुख्यवक्ता के रुप में वरिष्ठ कथाशिल्पी डॉ.मधुकर ने बेवाकी से साहित्य सेवियों पर सतरंगे प्रहार करते हुए कहा कि हिन्दी साहित्याकाश में बिहारी साहित्यकारों की पहचान इसलिए नहीं बन पा रही है क्योंकि यहां साहित्य में खेमेबाजी, राजनीति और पालकी ढोने की प्रवृत्ति हावी हो गयी है | उन्होंने शोधार्थियों व छात्रों से कहा कि साहित्य को श्रेष्ठता प्रदान करने के लिए उसमें समाज के सच को संवेदनाओं के साथ उकेरना होगा क्योंकि साहित्य समाज का दर्पण नहीं बल्कि धड़कन होता है |

यह भी बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अनूप लाल मंडल की चर्चा के साथ दु:ख व्यक्त करते हुए ख्याति प्राप्त साहित्यकार चन्द्र किशोर जायसवाल ने बदलते साहित्यिक परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए जहां यह कहा कि आज के साहित्य से किसान गायब हो गये हैं वहीं सम्पादक डॉ.शिवनारायण ने कहा कि साहित्य अंततः और तत्वत: भाषा की साधना है जबकि आज की पीढ़ी में भाषा की साधना कहीं दिखाई नहीं देती !

इस अवसर पर कथा साहित्य के सिद्ध-प्रसिद्ध व सशक्त हस्ताक्षर डॉ.वरुण कुमार तिवारी, डॉ.सुनील कुमार, डॉ.रमेश एवं डॉ.रेणु सिंह आदि ने कथा साहित्य के बदलते परिदृश्य पर अपने-अपने विचार-उद्गार व्यक्त किये | इस मौके पर विश्वविद्यालय प्रोक्टर डॉ.बी.एन.विवेका, सिंडीकेट सदस्य डॉ.जवाहर पासवान, प्राचार्य अशोक कुमार, पूर्व प्राचार्य आर.के.पी.रमण व डॉ.वीणा कुमारी, प्राचार्य अशोक कुमार आलोक व डॉ.नूतन आलोक, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.अरुण कुमार, महासचिव डॉ.अशोक कुमार, प्राचार्य डॉ.एच.एल.एस जौहरी और महासचिव मुस्टा डॉ.नरेश कुमार आदि प्रमुखरुप से उपस्थिति बनाये रखे | धन्यवाद ज्ञापन  डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने किया |

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द्विदिवसीय बिहार कला दिवस का समापन

मौर्यकालीन ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ की कलात्मक मूर्ति की प्राप्ति के सौवें वर्ष के आरंभ यानि 18 अक्टूबर 2016 को एक दिवसीय बिहार कला दिवस के रूप में बिहार के सभी जिलों में मनाये जाने हेतु नीतीश सरकार द्वारा दिये गये निर्णय के बावजूद मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में एक आयोजन समिति का गठन कर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के चाक्षुष एवं प्रदर्श कला के विभिन्न विधाओं की वैसी छिपी प्रतिभाओं को मंच देने के लिए दो दिवसीय आयोजन करने का निश्चय किया |

जिन विधाओं में निर्णायक मंडली के सदस्यगण प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, प्रो.रवि रंजन, प्रो.अविनाश सहित, प्रो.दिलीप, प्रो.कन्हैया यादव आदि के द्वारा प्रतिभागियों में एक-को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया वे हैं-

लोकनृत्य में स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय की छात्रा- रुचिका सिन्हा, शास्त्रीय संगीत में कुमारी पुष्पलता, लोकगीत में तनूजा, सुगम संगीत में रौशन कुमार, तबला वादन में सूर्यवंशी, गजल में सुमन कुमार, पेंटिंग में रीना कुमारी, मूर्तिकला में अक्षय कुमार और क्राफ्ट में गोपाल नंदी जिन्हें प्रमाण-पत्र एवं मोमेंटो देकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पुरस्कृत व सम्मानित किया जिला उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार, आयोजन समिति के सदस्य रेखा यादव, मो.शौकत अली, प्रो.प्रदीप कुमार झा, तुरबसु, प्रो.अविनाश, माया विद्या निकेतन, शहीद चुल्हाय मार्ग, मधेपुरा की निदेशिका चंद्रिका यादव, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव एवं दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ.मधेपुरी मार्ग, मधेपुरा के निदेशक सह प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोर कुमार आदि ने |

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं सदस्य सह उद्घोषक एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार द्वारा नाटक में नवाचार रंगमंडल के शहंशाह की टीम एवं सर्वधर्म समन्वय पर  रंगकर्मी विकास के निर्देशन में बेहतरीन प्रस्तुति देने के उपलक्ष्य में तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र को मोमेंटो व प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया गया | साथ ही दर्शकों की अपील पर 3 कलाकारों को विशेष रुप से पुरस्कृत किया गया- पेंटिंग में संतोष कुमार एवं आफरीन उद्दीन, चन्दा रानी (नृत्य) में | सबसे अधिक सराहना मिली- दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल के छात्रों- शिव कुमार एंड ग्रुप द्वारा तैयार किये गये मिसाइल को- जिसके लिए उस ग्रुप को स्काउट एंड गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव एवं सीनियर सिटीजन शिवराज यादव द्वारा प्रमाण-पत्र मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया |

अंत में इस दो दिवसीय कार्यक्रमों में अहर्निश सहयोग करते रहने वाले किशोर कुमार (निदेशक) के धन्यवाद ज्ञापन के बाद अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कार्यक्रम समापन की घोषणा की |

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मधेपुरा में द्वि दिवसीय बिहार कला दिवस का आयोजन

लगभग 3000 वर्ष पूर्व ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ की लाजवाब ओपदार चमकवाली मौर्यकालीन ‘चुनार पत्थर’ से बनी इस मूर्ति की खूबसूरती दुनिया में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है | कहा जाता है कि इसके सामने पिकासो की पेंटिंग भी फीकी है |

यहाँ यह भी बता दें कि जहाँ पटना संग्रहालय की इस उत्कृष्ट ऐतिहासिक ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ की मूर्ति को देखकर बिहार की नीतीश सरकार ने इस मूर्ति के पटना के दीदारगंज से 18 अक्टूबर 1917 को प्राप्त होने के सौवें वर्ष को राज्य के सभी जिलों में 18 अक्टूबर 2016 को एक दिवसीय ‘बिहार कला दिवस’ के रुप में मनाये जाने का निर्देश दिया है, वहीं मधेपुरा जिला में इसके लिए यहां के डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने द्विदिवसीय आयोजन की घोषणा की है और चाक्षुष एवं प्रदर्श कला की सफलता के लिए डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति भी गठित कर दी जिसमें डॉ.ए.के. मंडल, रेखा यादव, प्रदीप कुमार झा, मो.शौकत अली, तुरबसु एवं उद्घोषक अरुण कुमार सदस्य हैं |

DM Md.Sohail, S.P. Vikash Kumar, Dr.Madhepuri, DDC Mithilesh Kumar, Dr.Shanti Yadav, Kishore Kumar, A.K.Bachchan & J.K.Yadav inaugurating "Bihar Kala Diwash-2016".
DM Md.Sohail, S.P. Vikash Kumar, Dr.Bhupendra Madhepuri, DDC Mithilesh Kumar, Dr.Shanti Yadav, Kishore Kumar, A.K.Bachchan & J.K.Yadav inaugurating “Bihar Kala Diwash-2016”.

यह भी जानिये कि समिति द्वारा जिले के तेरहो प्रखंडों एवं दूर-दराज के गांवों की वैसी प्रतिभाओं की खोज की गई है जिन्हें कभी इतना बड़ा मंच नसीब नहीं हुआ था | दिनांक 14-15 अक्टूबर को सौ से ऊपर कलाकारों का विभिन्न विधाओं में निबंधन किया गया |

अक्टूबर 18 को 10:00 बजे पूर्वाहन में जिलाधिकारी मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी, डीडीसी मिथिलेश कुमार, एन.डी.सी. मुकेश कुमार,  डी.पी.ओ.राखी कुमारी, जयकृष्ण यादव, डॉ.शान्ति यादव, डॉ.ए.के.मंडल, ध्यानी यादव, प्रदीप कुमार झा, मो.शौकत अली, तुरबसु, श्यामल कुमार सुमित्र, अरुण कुमार उद्घोषक व अन्य द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर विधिवत “बिहार कला दिवस-2016” का उद्घाटन किया गया |

इस अवसर पर डीएम मो.सोहैल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देकर प्रोत्साहित करना ही इस समारोह का उद्देश्य है | संदेश के रूप में उन्होंने कहा कि कला-संस्कृति का संरक्षण कर हम सभी समाज को संकीर्णता से उबार सकते हैं | जहाँ अपने संबोधन में एसपी विकास कुमार ने कहा कि कला-संस्कृति से ही अन्यत्र हमारी पहचान बनती है वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीण क्षेत्र के कलाकारों के अलावा शहर के कलाकारों को भी पूरा मौका दिया जा रहा है | अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी द्वारा “बिहार कला दिवस-2016” के निमित्त तैयार किये गये “एक अत्यंत खूबसूरत लीफलेट” सभी दर्शकों एवं कलाकारों के बीच बांटा गया जिसमें ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ प्राप्त होने के रोचक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाया गया है तथा विकास का पर्याय बन चुके बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग एवं मधेपुरा जिला प्रशासन टीम को हृदय से साधुवाद दिया गया है | साथ ही डॉ.मधेपुरी ने डी.एम. मो.सोहैल द्वारा द्विदिवसीय आयोजन करने हेतु उनकी भावना व तत्परता की खूब सराहना की है |

बाद में बी.एन.मंडल स्टेडियम हॉल में आयोजित चाक्षुषकला का मुआयना डी.एम.  मो.सोहैल की पूरी टीम एवं अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी के सारे सहयोगियों ने किया | हॉल में लगभग 5 दर्जन चित्रकला, मूर्तिकला, मधुबनी पेंटिंग आदि के कलाकारों द्वारा तथा प्रो.अविनाश के “चित्रालय” के छात्र-छात्राओं द्वारा ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ सहित ढेर सारे मनमोहक कलाकारी का प्रदर्शन किया गया | नवाचार रंग मंडल के शहंशाह की पूरी टीम कलाकारी करते देखे गये | प्रायः कलाकार अपने चित्रों व पेंटिंग के साथ डी.एम. मो.सोहैल, डी.डी.सी.मिथिलेश कुमार एवं अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी के साथ फोटोग्राफ एवं ऑटोग्राफ लेने में मशगुल दिखे  |

All the artists engaged in taking photographs $ autographs of DM, DDC & Dr.Madhepuri in BN Mandal Stadium Hall on this occasion of Bihar Kala Diwas Samaroh.
All the artists engaged in taking photographs and autographs of DM, DDC & Dr.Madhepuri in BN Mandal Stadium Hall on this occasion of Bihar Kala Diwas Samaroh.

दूसरे दिन 19 अक्टूबर को समारोह समापन के समय प्रत्येक विधा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एक प्रतिभा पुत्र अथवा पुत्री को जिला पदाधिकारी द्वारा प्रशस्ति प्रमाण-पत्र एवं मोमेंटो दिया जायगा |

निर्णायक मंडल के सदस्य के रूप में प्रो. रीता कुमारी, प्रो. अरुण कुमार ‘बच्चन’, प्रो. रविरंजन के साथ-साथ संगीत साधिका हेमा कुमारी, वन्दना कुमारी, चंद्रिका यादव एवं  चिरामणि यादव, राम स्वरूप यादव आदि अन्त तक समारोह में अपनी उपस्थिति बनाये रखें |

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भारतरत्न डॉ. कलाम की जयंती पर मधेपुरा में मिठाईयां बंटीं

15 अक्टूबर 2016 को महान वैज्ञानिक भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 86वीं जयंती समारोह बिल्कुल सादगी के साथ डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी के निवास ‘वृंदावन’ में स्थानीय तुलसी पब्लिक स्कूल के छात्रों, शिक्षकों एवं स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र व प्राचार्य डॉ. हरिनंदन प्रसाद यादव एवं रंगकर्मी विकास-वरुण-विभीषण आदि की उपस्थिति में मनाई गई तथा बच्चे-बच्चियों, शिक्षकों एवं अखबारनवीसों के बीच मिठाईयां बांटी गईं। इस समारोह में रेणु-रोजी-शिवानी, प्रियंका-मनीषा-गजाला सहित अपर्णा-निगम-संध्या, स्वर्णा-कल्पना-अदिति परमार की उपस्थिति अंत तक बनी रही।

इस अवसर पर सभी गणमान्यों द्वारा डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि दी गई तथा पुष्पांजलि अर्पित की गई। डॉ. मधेपुरी ने अवरुद्ध कंठ से उन शब्दों को रखा जो अविस्मरणीय मुलाकात के क्षणों में महामहिम राष्ट्रपति के रूप में डॉ. कलाम ने अपने सहयोगी-शिष्य डॉ. अरुण कुमार तिवारी की उपस्थिति में कहा था – “ये आँखें दुनिया को दुबारा नहीं देख पाएंगीं, अस्तु तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को देकर जाना, बच्चों को देकर जाना..!”

हाल ही में शिष्य अरुण कुमार तिवारी द्वारा लिखी गई जीवनी ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – एक जीवन’ की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से डॉ. मधेपुरी ने कहा – “डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज भी जीवित हैं और आगे भी बच्चों की कल्पनाओं में, युवाओं एवं वयस्कों के विचारों में, वैज्ञानिकों के आविष्कारों में… महान राष्ट्र-निर्माण के सपनों में सदैव जीवित रहेंगे।”

अंत में डॉ. मधेपुरी ने कहा – “विश्व की प्रगति, समृद्धि और शान्ति का सपना देखने वाला विश्वगुरु डॉ. कलाम कभी भी विश्व-क्षितिज से विलीन नहीं होगा और आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक शाश्वत उपहार बना रहेगा।”

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गुरुवार को भी नहीं सुधरे हालात बिहारीगंज के

उन्मादी भीड़ न तो किसी की बात सुनती है और न ही किसी की बात मानने को तैयार होती है- चाहे वो मंत्री, सांसद, विधायक, कमिश्नर, कलक्टर, डी.आई.जी., एस.पी.,  एस.डी.एम., डी.एस.पी., दरोगा और कोई भी क्यों ना हो !

यह भी बता दें कि बिहारीगंज में हालात भले ही बिगड़ गये हों, लेकिन प्रशासन और पुलिस यदि संयम नहीं बरती होती तो वहां की स्थिति और भी बदतर हो गयी होती | मंगलवार और बुधवार को स्वयं डी.एम. मो.सोहैल अकेले मोर्चा संभालते नजर आये | जब दूसरे पक्ष के उन्मादी लोग उग्र होकर ललकारते हुए चले आ रहे थे तो डी.एम. के समझाने के बावजूद भी भीड़ नहीं रुकी और न मानी तो डीएम अचानक बीच सड़क पर ही लेट गये और जोर-जोर से कहने लगे कि अगर हंगामा ही करना है तो मेरी लाश पर से पहले गुजरना होगा |

फिर तो बिहारीगंज की स्थिति को संभालने तथा शांति बहाली की अपील करने निकल पड़े- आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंन्द्रशेखर, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, विधायक निरंजन मेहता, पूर्व मंत्री सह विधायक नरेंद्र नारायण यादव, किशोर कुमार मुन्ना आदि पर ही उपद्रवियों की उन्मादी भीड़ ने पथराव कर दिया | कुछ को चोटें भी लगीं | इस बीच एसपी विकास कुमार ने बिहारीगंज के थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया | भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई राउंड अश्रु-गैस के गोले दागे गये और लाठियां भी भांजी गईं | स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए डीएम मो.सोहैल और एस.पी. विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला | लगभग 40 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया | मंगलवार से ही डीएम और एसपी बिहारीगंज में दोनों पक्षों के उपद्रवियों से जूझ रहे हैं | ना रात में उन्हें नीन्द आती है और ना ही दिन में चैन से कभी बैठ पाते हैं | दोनों वहीं कैंप कर रहे हैं |

उपद्रवियों को फिर भी नजर नहीं आती कि बगल के चौसा में एक ही मैदान में दुर्गा माता की प्रतिमा और मुहर्रम का ताजिया शांति-सद्भाव और भाईचारे का नमूना पेश कर रहा है तो कटिहार के डहेरिया में दोनों पक्षों की एकजुटता का उदाहरण पेश करते लोग थकते नहीं | बगल के समस्तीपुर जिले में खुदनेश्वर शिव मंदिर में शिवलिंग के बगल में मुस्लिम महिला खुदनी के मजार पर साथ-साथ लोग पुष्पांजलि करते हैं, पूजा करते हैं | और तो और दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में “नोट” पर भगवान शिव के पुत्र गणेशजी की तस्वीर छपी होती है और वहां के लोग ‘राम-कथा’ का मंचन-प्रदर्शन संसार भर में भाईचारे को जिन्दा रखने के लिए करते हैं |

काश ! दोनों पक्ष के उपद्रवियों द्वारा अपने अन्दर के उन्मादी रावण को जलाया जाता और मुहर्रम में सच के लिए दी गई कुर्वानियों को याद किया जाता तो जनता के विकास के कार्यों को बाधित कर डी.एम. मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार एवं जन प्रतिनिधियों को इस कदर मुख्यालय छोड़कर बिहारीगंज में धरना नहीं देना पड़ता |

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संस्कृति रामायण तो धर्म इस्लाम !

जहां एक ओर इंडिया में बापू की तस्वीर नोटों पर छपती रही है और उनका भजन ‘ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम…… यानी गंगा-जमुनी संस्कृति सदा से चलती रही है, वहीं दूसरी ओर दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में धर्म इस्लाम का और संस्कृति रामायण की भली-भांति फलती-फूलती रही है तथा वहां के सभी लोग रामायण के दीवाने दिखते रहे हैं |

तभी तो इंडोनेशिया के ‘नोट’ के एक तरफ (रामायण के राम ने जिस देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना बारंबार की है, उन्हीं के पुत्र) ‘गणेश जी’ की तस्वीर छपती है तो दूसरे हिस्से पर वहां के बच्चों से भरी कक्षा की तस्वीर-इसीलिए छपी होती है कि इंडोनेशिया की बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा भगवान गणेश को कला, शास्त्र एवं बुद्धिजीवी का भगवान माना जाता है | और तो और, इंडोनेशिया की आजादी के जश्न के दिन प्रत्येक साल बड़ी तादाद में राजधानी जकार्ता की सड़कों पर हनुमान जी का वेश धारण कर वहां के युवावर्ग सरकारी परेड में शामिल होते रहे हैं |

Indonesian Currency bearing picture of Kalashastri Ganesh Bhagwan on one side and the class of kids running smoothly on the other side.
Indonesian Currency bearing picture of Kalashastri Lord Ganesha on one side and the class of kids running smoothly on the other side.

यहाँ यह भी जान लें कि इंडोनेशिया को रामायण के मंचन के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त है | काश ! धरती पर बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता के इस दौर में यदि इंडोनेशिया अपनी सांस्कृतिक विरासत “रामकथा” का मंचन-प्रदर्शन दुनिया के अन्य देशों में भी कर देता और भाईचारे का पाठ पढ़ा देता तो दुनिया अमन-शांति के लिए कभी नहीं तरसती और ना कभी दुर्गापूजा-मुहर्रम आदि के अवसर पर प्रत्येक थाने में शांतिदूतों व गण्यमान्यों की मीटिंग ही बुलानी पड़ती और ना ही कभी किसी सन्मार्गी कवि को यह लिखना पड़ता –

होली ईद मनाओ मिलकर, कभी रंग को भंग करो मत |
भारत की सुंदरतम छवि को, मधेपुरी बदरंग करो मत ||

यह भी जानिये कि जहां मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करनेवाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है- जो सच के लिए जान देने की जिंदा मिसाल है- वहीं दुर्गापूजा न्याय पाने के लिए बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत का प्रतीक पर्व माना जाता है | सत्य, न्याय, राष्ट्रीय एकता एवं भाईचारे के निमित्त ही सभी त्यौहार मनाये जाते हैं- जैसा कि कटिहार जिले के ‘डहेरिया’’ में मुस्लिम समुदाय के लोग दुर्गा माता के दरबार को सजाते हैं, पूजा-प्रबंधन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं | हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदाय अपनी अटूट एकता के लिए मिलकर सौहार्द के गीत गाते हैं | तभी तो मुस्लिम समुदाय से दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष बनाये जाते हैं कटिहार नगर निगम के उपमहापौर मो.मंजूर खां, तो सबकी पसंद से महासचिव बनते हैं- संजय महतो | दोनों मिलकर ईश्वर-अल्लाह एक है, सबका मालिक एक है- इस मंत्र को जन-जन तक पहुंचाने में लीन रहते हैं, तल्लीन रहते हैं |

यह भी बता दे कि समस्तीपुर जिले में एक मुस्लिम महिला खुदनी बीबी के नाम पर ब्रिटिश काल में ही खुदनेश्वर शिवमंदिर स्थापित हुआ था जिसका शिवलिंग खुदनी द्वारा गाय चराने के दरमियान खुदवाया गया था और खुदनी महान शिव-भक्त भी बन गई थी | उसकी मृत्यु के बाद शिवलिंग के एक गज दक्षिण तरफ उसे दफनाया भी गया जिसे सभी शिवभक्त आदर से पूजते हैं, सभी श्रद्धा से सिर झुकाते हैं | कालांतर में नरहन स्टेट द्वारा मंदिर निर्माण कराया गया और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में विकसित पर्यटक केंद्र बनाने के लिए बिहार धार्मिक न्यास परिषद् के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने 2008 में खुद्नेश्वर शिव मंदिर को बेहतर आर्थिक सहयोग भी किया था |

Shivlingam & Mazar of Khudni inside Khudneshwar Shiv Temple , 17Kms. South-West from Samastipur District Town.
Shivlingam & Mazar of Khudni inside Khudneshwar Shiv Temple , 17Kms. South-West from Samastipur District Town.

हाल ही में अमेरिका के मैसाचुएट्स प्रांत के फोस्टन शहर निवासी 17 वर्षीय मुस्लिम बालिका ‘हन्नान’ स्थानीय सहेली के साथ भागलपुर के मनोहरपुर गांव आकर दुर्गामाता के दर्शन करने जाती है | हन्नान “अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन” विषय पर शोध करती है और कई जगहों पर घूमने के बाद मीडिया से कहती है- यहां सभी समुदायों में बेहद अपनापन है | पारिवारिक मूल्यों को तवज्जो दी जाती है | भीड़ के बावजूद पूजा के दौरान अनुशासन है | महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, जैसा कहीं भी देखने को नहीं मिलता | और ‘हन्नान’ अब अपनी सहेली एशना सिन्हा के साथ ‘काली पूजा व छठ’ तक रहने का मन बना लेती है |

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मधेपुरा जिला फिर राज्य में नंबर-वन पर

सितम्बर माह के 29 तारीख की ही तो बात है- मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (आई.ए.एस.)  ने मधेपुरा को औद्योगिक हब बनाने के लिए फ्रांस की कंपनी आल्सटॉम और जर्मनी की कंपनी नार ब्रेस्म सहित दर्जनों ख्यातिप्राप्त कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर यहां के भू-स्वामियों से रू-ब-रू कराया, जिसका उद्घाटन करते हुए कोसी के आयुक्त माननीय कुंवर जंग बहादुर सिंह ने कहा था कि ऐसे आयोजन सूबे के अन्य जिलों में भी आयोजित किया जाना चाहिए |

और सप्ताह गुजरते ही ऑन लाइन रिपोर्टिंग में मधेपुरा जिला फिर राज्य में नंबर-वन पर आ गया | राज्य सरकार के पोर्टल पर इंदिरा आवास एवं मनरेगा योजना में मोबाइल आधारित फील्ड रिपोर्टिंग में इस जिले के काम की सराहना की गयी |

यह भी बता दें कि बिहार के टॉप 5 जिलों में मधेपुरा के नंबर-वन पर रहने का कारण यहां के डी.एम.  मो.सोहैल की टीम का बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम है | डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल एवं डीडीसी मिथिलेश कुमार खुद इन योजनाओं पर नजर रखते हैं | हालांकि इन योजनाद्वय का ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत होने के कारण डीडीसी की सतर्कता एवं निगरानी के साथ-साथ डी.एम. के व्हाट्सएप  से जुड़े रहने तथा औचक निरीक्षण से लेकर रिपोर्ट प्राप्ति के लिए नई-नई तकनीक का इस्तेमाल करते रहने का फल है- मधेपुरा का नंबर-वन पर जाना |

यह भी जान लें कि सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के वेबसाइट के अनुसार राज्य में पांचवें स्थान प्राप्त ‘सारन’ जिले द्वारा 2093 रिपोर्ट दर्ज कराया गया वहीं चौथा स्थान प्राप्त ‘गया’ जिला द्वारा 2839  रिपोर्ट | और जहां तीसरे पायदान पर पहुंचे कटिहार जिले का रिपोर्ट 3216  दर्ज किया गया वही दूसरा स्थान प्राप्त करने वाला ‘भोजपुर’ जिला 3413 पर ही ठहर गया |

बता दें कि मधेपुरा जिला मात्र दो-चार  की बढत लेकर नंबर-वन पर नहीं पहुंचा है, बल्कि प्रथम स्थान पाने वाला ‘मधेपुरा’ जिला 3 महीने में 6560 रिपोर्ट वेबसाइट पर भेजकर ही तो नंबर-वन पर गया है | तभी तो पूरे राज्य में प्रथम स्थान पाने वाले मधेपुरा के जिला प्रशासन को परियोजना प्रबंधक, बिहार श्री अनुपम सिंह ने संदेश भेजकर बधाई दी है | मधेपुरा आज पुनः गौरवान्वित हुआ है |.

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