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कोसी की बेटी कोमल चली…… कलाम की राह

कुछ करने का संकल्प और अंतर्मन में आत्मविश्वास- ये दोनों जीवन में अद्भुत चमत्कार ला सकता है | जैसा कि भारती-मंडन की ज्ञान भूमि महिषी की बेटी कोमल ने एक बार फिर खुद को प्रमाणित कर दिखा दिया | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में बतौर वैज्ञानिक बनकर कोमल ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के ‘समृद्ध विचार’ को पंख लगाने में अद्भुत सफलता पाई है-

भारत के कई कोटि युवजनों को कभी छोटा या

असहाय महसूस नहीं करना चाहिए | हम सब अपने

भीतर दैवीय शक्ति लेकर जन्मे हैं | हम सबके

भीतर ईश्वर का तेज छिपा है | हमारी कोशिश

हो इस तेजपुंज को पंख देते रहने की, जिससे यह

चारों ओर अच्छाइयों का प्रकाश फैला सके…!

बता दें कि मंडन-भारती की ज्ञानभूमि महिषी से लेकर सुबे बिहार के गौरव में चार चांद लगाने वाली कोमल इसरो केंद्रीयकृत भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित वैज्ञानिक CS अभियंता की वार्षिक परीक्षा में हाल ही में शामिल हुई | सम्मिलित होने वाले लगभग 50 हजार परीक्षार्थियों को कठिन जांच परीक्षण की दौर से गुजरना पड़ा | 13वें नंबर पर अंतिम रुप से मुहर लगवा ली |

यह भी जानिये कि बतौर वैज्ञानिक इसरो में कोमल को इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन सेक्शन मिला है जहाँ बनने वाले सेटेलाइट एंड रॉकेट के निर्माण में कोमल भी कलाम की तरह ही अपना योगदान देती रहेगी | कोमल निरंतर एक से बढ़कर एक परिणाम लाती रहेगी और माताश्री पूनम को पूनम की चाँद बनकर तथा पिताश्री मनोरंजन को नई-नई उपलब्धियों के साथ भरपूर मनोरंजन करती रहेगी | तभी तो दिल्ली आईआईटी से एमटेक कर रही कोमल कहती है कि ISRO राष्ट्रसेवा करने का बहुत बड़ा जरिया है | इससे जुड़ना ही अपने आप में गौरव की बात है |

जहाँ एक ओर देवघर में सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कोमल के माता-पिता अपनी बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे बाबा वैद्नाथ बासुकीनाथ का आशीर्वाद एवं कोमल के गहरे अध्ययन व लगन का फल मानते हैं वहीं सहरसा आर.झा महिला कॉलेज की डॉ.रेणु सिंह, आर.एम.कॉलेज के समाजशास्त्री डॉ.विनय कुमार चौधरी, सुपौल के बुद्धिजीवी विश्वकर्मा जी एवं मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जानेवाले डॉ.मधेपुरी ने कोमल की इस कामयाबी को राष्ट्रीय स्तर पर कोसी कमिश्नरी को पहचान दिलाने की संज्ञा दी है |

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लंदन में क्यों खरीदना चाहती हैं ममता टैगोर का घर ?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन के उस घर को खरीदना चाहती हैं जहां विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कुछ समय के लिए समय बिताया था। वह इसे भारतीय साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने वाले टैगोर के संग्रहालय-सह-स्मारक का रूप देना चाहती हैं। टैगोर 1912 में कुछ महीनों के लिए उत्तरी लंदन के हैम्पस्टेड हीथ स्थित हीथ विलाज में रहे थे, जहां उन्होंने अपने कविता संग्रह ‘गीतांजलि’ का अनुवाद किया था। इस घर पर अभी भी नीले रंग की एक पट्टिका लगी हुई है, जिस पर लिखा है कि यहां भारतीय कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर रहे थे।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी इन दिनों ब्रिटेन के दौरे पर हैं। इस दौरान शनिवार को उन्होंने लंदन में कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक से एक घंटे तक मुलाकात की और टैगोर से जुड़ी इस धरोहर को अपनी सरकार की ओर से खरीदने की इच्छा जताई। ममता चाहती हैं कि ऐतिहासिक महत्व वाले इस घर को टैगोर के संग्रहालय-सह-स्मारक में तब्दील कर उन्हें एक यादगार श्रद्धांजलि दी जाए। इस घर की कीमत कुछ साल पहले 2.7 मिलियन पाउंड यानि लगभग 23 करोड़ रुपए थी। बता दें कि 2015 में ममता जब लंदन गई थीं तब भी उन्होंने इस पर चर्चा की थी। अब एक बार फिर ममता ने नई उम्मीद के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

बता दें कि टैगोर 1912 में ब्रिटेन पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लंदन में अपनी कई कविताओं का अनुवाद किया था। उस दौर में उनके साथियों में कई ब्रिटिश कलाकार और कवि शामिल थे। इनमें डब्ल्यू बी येट्स भी शामिल थे जिन्होंने ‘गीतांजलि’ का परिचय लिखा था। यह 103 अनुवादों का संग्रह था जिसने टैगोर को 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिलाया था। टैगोर की स्मृति को सुरक्षित और संरक्षित रखने के निमित्त अपने इस प्रयास के लिए ममता बनर्जी नि:संदेह बधाई की पात्र हैं।

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मधेपुरा आदिकला गूंज उठी सात समन्दर पार

फ्रांस की राजधानी पेरिस में सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आदिकला पेंटिंग संगोष्ठी का आयोजन होने जा रहा है | UNESCO से सम्बद्ध वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ जेरभास आर्ट क्लब द्वारा पेरिस में आयोजित दुनिया के 70 देशों के गिने-चुने कलाकार एवं कला विशेषज्ञों का जमघट होगा- 3 दिसम्बर से 9 दिसम्बर 2017 तक |

बता दें कि आदि कला जगत के इस अंतर्राष्ट्रीय महाकुंभ में यूनेस्को अचैआ क्लब के प्रेसिडेंट पी.मिल्ट ने संसार के 70 देशों के लगभग 500 कलामर्मज्ञों को शिरकत करने के लिए आमंत्रित किया है | पेरिस में आयोजित होनेवाले इस इंटरनेशनल पेंटिंग सिंपोजियम में शामिल होने के लिए मधेपुरा आदिकला के संस्थापक एवं इस मिट्टी के लाल संजय कुमार को भी आमंत्रित किया गया है | यह मधेपुरा जिले वासियों के लिए सर्वाधिक गर्व की बात है |

Exhibition of Bhitti Chitrakala at B.N. Mandal Kala Bhawan, Madhepura.
Exhibition of Bhitti Chitrakala at B.N. Mandal Kala Bhawan, Madhepura.

यह भी बता दें कि यह वही संजय कुमार है जो रेखा टूडू, सुनीता मरांडी, सुचिता हंसदा, सुनीता बास्की, सुखयमुनि  सोरेन, अनीता मुर्मू एवं सुनिता हंसदा जैसे ढेर कलाकारों की चेतना को जगाने में वर्षो से आदि भित्ति चित्रकला को समर्पित दिखता रहा है | तभी तो संजय के गुरु रह चुके समाजसेवी शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कभी आशीर्वचन देते हुए यही कहा था- आज मेरा शिष्य संजय जिस तरह सूरज जैसे जल रहा है वही कल निश्चय ही सूरज की तरह चमकेगा………! और इतने ही दिनों में गुरु का आशीर्वचन रंग दिखाने लगा |

इन दिनों भले ही राष्ट्रीय कला मंचों पर मधेपुरा आदिकला को समुचित सम्मान नहीं मिला हो लेकिन विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाने में मधेपुरा जिला को बड़ी कामयाबी तो मिली है | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रण मिलने से यह साफ जाहिर हो जाता है कि सात समंदर पार मधेपुरा आदिकला की धमक पहुंच चुकी है | आदिकला केन्द्र के संस्थापक संजय कुमार ने जहाँ एक ओर इसे आदिकला, इससे जुड़े कलाकारों एवं सोशल साइट्स की भूमिका सहित डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) की टीम के सहयोग का सम्मान बताया है, वहीं दूसरी और आदिवासी समाज द्वारा सदियों से प्रचलित भित्ति चित्रकला को सहेजने की मुहिम का नतीजा माना है |

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2020 में तेजस्वी होंगे आरजेडी के सीएम उम्मीदवार

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 2020 में पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर लगाए जा रहे तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने अभी ही घोषणा कर दी कि 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके छोटे बेटे और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ही पार्टी की तरफ से सीएम पद के उम्मीदवार होंगे।

शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में लालू ने कहा, ‘2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। तेजस्वी पार्टी के सीएम उम्मीदवार होंगे।’ इस दौरान लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव के काम की जमकर सराहना की।

गौरतलब है कि लालू का यह बयान तब सामने आया है जब पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी और पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने हाल ही में कहा था कि अगले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से अभी कोई भी सीएम उम्मीदवार तय नहीं है।

दरअसल बीते बुधवार आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने सीएम उम्मीदवार के तौर पर तेजस्वी के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिस पर सिद्दीकी और रघुवंश ने स्पष्ट कुछ बोलने से बचते हुए इस प्रस्ताव पर लगभग ‘असहमति’ जताई थी। गौरतलब है कि तेजस्वी फिलहाल बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।

बहरहाल, देखा जाय तो लालू द्वारा पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी की उम्मीदवारी की घोषणा में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है। हां, टाइमिंग जरूर चौंकाने वाला है।

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मधेपुरा में दो दिवसीय युवा उत्सव बना संकल्प दिवस

बिहार सरकार के कला, संस्कृति व युवा विभाग और जिला प्रशासन मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय बी.एन.मंडल स्टेडियम में दो दिवसीय (7-8 नवंबर) युवा-उत्सव का उद्घाटन जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, निवर्तमान डीडीसी मिथिलेश कुमार, ADM अब्दुल रज्जाक, निवर्तमान एनडीसी मुकेश कुमार, डॉ.शान्ति यादव, जयकृष्ण यादव आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |

बता दें कि जिले के समस्त युवा खिलाड़ियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं पदाधिकारियों सहित उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल ने कहा कि इसे आप सरकारी महोत्सव नहीं  बल्कि इसे आप अपना उत्सव मानें और इस युवा उत्सव को युवा संकल्प उत्सव के रूप में मनायें, क्योंकि मधेपुरा जिले की 48% आबादी युवा हैं | उन्होंने स्कूली छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप युवाओं की बदौलत ही मधेपुरा जिला को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है |

Dr.Bhupendra Madhepuri conferring medals to the winning students at B.N. Mandal Stadium, Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri conferring medals to the winning students at B.N. Mandal Stadium, Madhepura.

इस अवसर पर बाल विवाह एवं दहेज से तौबा करने की अपील करते हुए डीएम ने युवाओं से जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने हेतु सहयोग करने के लिए बार-बार ध्यान आकृष्ट किया | उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर आज तीन संकल्प लें तो स्थिति बदल जायेगी- यही कि बाल विवाह नहीं करेंगे, दहेज नहीं लेंगे और ग्रेजुएशन व नौकरी के बाद ही शादी करेंगे | जिलाधिकारी ने खेल को मानवीय जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए यह भी कहा कि महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होना है | यहां के खिलाडी प्रतिभा संपन्न हैं जो जिले सहित प्रदेश और देश का नाम रोशन करने में लगे हैं |

कार्यक्रम के आरंभ में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि जिले के खिलाड़ियों, रंगकर्मियों, संगीत एवं कला को समर्पित छात्र-कलाकारों में उत्साह है, उमंग है, क्षमता है और लगन है जिसकी बदौलत उनकी श्रेष्ठता पर गर्व कर यह मधेपुरा जिला दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ता जा रहा है…….. विगत वर्ष नवाचार रंगमंडल का प्रदर्शन बिहार के 38 जिलों में दूसरे नंबर पर रहा | उन्होंने जहाँ डायनेमिक DM Md.Sohail  की टीम द्वारा कई अवसर पर जिले को राज्य में प्रथम आने की सराहना की वहीं इस युवा उत्सव के दौरान डीडीसी एवं एनडीसी के ट्रांसफर को इस आयोजन में हल्की उदासी का कारण भी बताया |

इस अवसर पर जहाँ निवर्तमान डीडीसी मिथिलेश कुमार ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया वहीं प्रभारी एडीएम अब्दुल रज्जाक ने चीन के खिलाडियों का उदाहरण देते हुए युवाओं को प्रेरित भी किया | जिला के एसपी विकास कुमार सहित उपनिर्वाचन पदाधिकारी महेश पासवान, डॉ.शांति यादव, जिला जद(यू) अध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव, शौकत अली, जय कृष्ण यादव, ध्यानी यादव आदि अंत तक उपस्थित रहे | जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार ने मंच संचालन किया |

कार्यक्रम के अंत में विजयी खिलाड़ियों को डॉ.मधेपुरी एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी सह प्रभारी एनडीसी रजनीश कुमार राय ने मेडल पहनाकर उत्साहवर्धन किया |

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नियोजित शिक्षक समान वेतन के हकदार : हाई कोर्ट

बिहार के लगभग 4 लाख नियोजित शिक्षकों को 14 वर्षों के कठिन संघर्षों के दौरान न्याय दिलाने में लगे रहे- कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सह विधान पार्षद श्री केदारनाथ पांडे एवं महासचिव श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह आदि……. जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट श्री अभय कुमार जी से ‘समान काम समान वेतन’ को लेकर नियोजित, वित्तरहित व अन्य कोटि के शिक्षकों के बारे में कई राउंड विचार-विमर्श करते रहे……. आते-जाते रहे….. तथा देखे जाते रहे |

बता दें कि एमएलसी डॉ.संजीव ने तो प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए यही कहा कि अंततः जायज मांगों की न्यायिक जीत हुई | उन्होंने कहा कि माननीय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति जस्टिस आर.मेनन एवं जस्टिस डॉ.ए.के.उपाध्याय के खंडपीठ का फैसला- “समान कार्य के लिए समान वेतन के हकदार हैं ये नियोजित शिक्षक, ऐसा नहीं करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है |”

इस प्रकार के ऐतिहासिक फैसला को सुनते ही गोपालगंज से किशनगंज तक और सासाराम से सुपौल तक के सभी जिलों के नियोजित शिक्षकों के बीच खुशी की ऐसी लहर दौड़ने लगी कि सभी एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाने लगे, मिठाइयाँ खिलाने लगे और पटाखे फोड़ने लगे | सूबे के सभी शिक्षक संगठनों द्वारा ‘न्याय की जीत हुई’ का उद्घोष करते हुए मुक्तकंठ से माननीय उच्च न्यायालय के प्रति बार-बार आभार प्रकट किया जाता रहा |

MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh , Chairman of Bihar Madhyamik Shikshak Sangh cum Member of Bihar Vidhan Parishad , Shri Kedarnath Pandey & Mahasachiv Shri Shatrughan Prasad Singh with senior advocate Shri Abhay Kumar .
MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh , Chairman of Bihar Madhyamik Shikshak Sangh cum Member of Bihar Vidhan Parishad , Shri Kedarnath Pandey & Mahasachiv Shri Shatrughan Prasad Singh with senior advocate Shri Abhay Kumar .

एम.एल.सी. डॉ.संजीव ने इस ऐतिहासिक फैसले को नियोजित शिक्षकों एवं इनके संघ-संगठनों के सतत संघर्ष का फल बताते हुए समस्त नियोजित शिक्षकों को हृदय से बधाई दिया है तथा सरकार के समक्ष अपनी भावनाओं का इजहार इस प्रकार किया है-

“यह न्यायादेश सिर्फ शिक्षकों के संदर्भ में ही नहीं बल्कि सरकार को इसे व्यापक शैक्षणिक संदर्भ में लेने की जरूरत है | सरकार द्वारा सहजतापूर्वक तत्काल इस फैसले को लागू किये जाने से नियोजित एवं स्थायी शिक्षकों का भेदभाव मिटेगा और वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य बदलने के साथ-साथ सार्थक एवं सकारात्मक परिणाम नजर आयेगा”

पुनः MLC डॉ.संजीव ने कहा कि संबंधित फैसले का समुचित अध्ययन किये बिना माननीय शिक्षा मंत्री का यह वक्तव्य कि इस न्यायादेश के खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे, कहीं से भी राज्य के शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं होगा बल्कि यह शिक्षकों के नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध ही होगा……. साथ ही यह न्यायालय की अवमानना का भी मामला बन सकता है |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri.
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri.

इस बाबत जब समाजसेवी शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ही तो माननीय हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया है |सूबे की सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय हाई कोर्ट के फैसले को तत्काल लागू करना चाहिए | डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए यहाँ तक कह डाला कि नियोजित शिक्षकों को चार-पांच माह से वेतन नहीं मिलना बल्कि होली-दशहरा-दिवाली, छठ-ईद-मुहर्रम जैसे पर्वों पर भी इस तरह की सरकारी चुप्पी को क्या कहेंगे आप…….? सरकार डाल-डाल चलेगी तो शिक्षक संगठनों को पात-पात चलने को मजबूर होना होगा……..|

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बाबा विशुराउत मेले को राजकीय दर्जा मिलने पर जश्न का माहौल

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने सर्वाधिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मधेपुरा अबतक को बताया कि जिले के चौसा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित बाबा विशुराउत मंदिर में प्रतिवर्ष 13 अप्रैल से लगनेवाले तीन दिवसीय मेला को राज्य सरकार द्वारा राजकीय दर्जा दिया जाने वाला पत्र प्राप्त हो गया है | उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि नीतीश सरकार के माननीय मंत्री राम नारायण मंडल, राजस्व व भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव प्रवीण कुमार झा द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना ज्ञापांक- 898(8)-01 नवंबर, 2017 के तहत इस मेले को राजकीय मेला अधिसूचित करते हुए बिहार राज्य मेला प्राधिकार के प्रबंधन में दे दिया गया है |

बता दें कि मधेपुरा जिला अंतर्गत चौसा प्रखंड के पचरासी बथान में गोपालक लोक देवता के रूप में बाबा विशुराउत की पूजा-अर्चना नियम व निष्ठा के साथ शुरू दुग्धाभिषेक द्वारा की जाती रही है | पचरासी बथान स्थित उनकी समाधि पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को विशेष श्रृंगार पूजा होती है | साथ ही बाबा विशुराउत की समाधि पर इतनी मात्रा में श्रद्धालुओं द्वारा दूध चढ़ाया जाता है कि आस-पास में दूध की नदी बहने लगती है | यूँ तो विशु बाबा की महिमा अपरंपार है और विशेषता यह है कि चाहे जितनी भी दूरी से श्रद्धालुगण कच्चा दूध लेकर आते हैं- वह दूध ना तो फटता है और ना खराब होता है |

Devotees offering Raw Milk at Baba Vishuraut Temple.
Devotees offering Raw Milk at Baba Vishuraut Temple.

यह भी जानिए कि बाबा विशु के नाम से चौसा में एक महाविद्यालय की स्थापना स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा की गई है तथा कोसी नदी पर विशाल सेतु भी बना है | आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के श्रमशील जनता एवं वर्तमान विधायक सह राजस्व भूमि सुधार सहित कई विभागों के मंत्री रह चुके नरेन्द्र नारायण यादव के आसपास आज जश्न का माहौल है क्योंकि यहाँ के लोग वर्षो से बाबा विशुराउत मेला को राजकीय दर्जा देने की मांग कर रहे थे | आज बिहार सरकार द्वारा एक ओर जहाँ विशुराउत मेला को और वहीं दूसरी ओर आस्था का महापर्व छठ पूजा के दौरान आयोजित होने वाले ‘देव मेला’ को भी राजकीय दर्जा दिये जाने पर संपूर्ण बिहार में ही हर्ष व्याप्त है |

Md.Sohail (IAS), Madhepura
Md.Sohail (IAS), Madhepura .

चलते-चलते यह भी बता दें कि बाबा विशुराउत की समाधि पर बिहार के अनेक विधायक, मंत्री, सांसद एवं कई मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय स्तर के नेतागण का आना-जाना लगा ही रहता है जिन्हें आज बेहद खुशी होती होगी | साथ ही आकाश से निरखते हुए शुभाशीष अर्पित कर रहे होंगे यहाँ के प्रथम विधायक तनुक लाल मंडल, विद्याकर कवि एवं वीरेंद्र प्रसाद सिंह आदि भी………| इलाके के पशुपालकों में उत्साह व उमंग को देखकर स्थानीय बुद्धिजीवियों- सूर्यकुमार पटवे, डॉ.अंबिका प्रसाद गुप्ता, रघुनंदन यादव, मुर्शीद आलम, बैजनाथ साह, निवास चन्द, मुन्ना यादव, जीवन शर्मा, सुबोध सिंह……… आदि ने इस मेला को राजकीय मेला घोषित किये जाने पर ईश्वर से यही कहा कि अब मेला के साथ इस इलाके में भी विकास का नया आयाम खुलेगा |

मधेपुरा अबतक द्वारा जब सिंहेश्वर टेंपल ट्रस्ट के सदस्य सुप्रसिद्ध समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बिहार में सोनपुर के बाद एक महीने तक चलने वाला सिंहेश्वर मेला को जल्द ही राजकीय दर्जा मिलेगा क्योंकि इसे नीतीश सरकार द्वारा “महोत्सव” की स्वीकृति तो दे ही दी गई है…… अब डीएम मो.सोहैल द्वारा राजकीय दर्जा देने हेतु लिखे गए पत्रादि के प्रयास को शीघ्रातिशीघ्र सफलता मिलेगी ही मिलेगी……. तब सिंहेश्वर के श्रद्धालु जमकर जश्न मनायेंगे |

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सामा-चकेवा भाई-बहन के अतिरिक्त पक्षियों से भी जुड़ा त्योहार है

छठ पर्व संपन्न होने के साथ ही मिथिला-कोसी का यह लोकपर्व सामा-चकेवा शुरू हो जाता है | मिथिलांचल में यह पर्व उत्सव के रूप में मनाया जाता है | 8 दिनों का यह त्योहार भाई-बहन के बीच के अटूट प्रेम को दर्शाता है जिसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है | सामा-चकेवा से जुड़ी लोकगीत- “चुगला करे चुगली बिलैया करे म्याऊं……….. गाम के अधिकारी हमर बड़का भैया हो……. कई दिनों तक घर-आंगन में गूंजते रहते हैं | ज्ञातव्य हो कि मिथिलांचल में मवेशियों का त्योहार तो मनाया ही जाता है, पक्षियों के लिए भी त्योहार है जिसे ‘सामा-चकेवा’ के नाम से जाना जाता है |

बता दें कि लोक कथाओं के अनुसार ‘सामा’ कृष्ण की पुत्री थी | कुछ चुगलों द्वारा आरोप लगाने के कारण मथुरा के राजा भगवान कृष्ण ने क्रोधित होकर उसे मनुष्य से पक्षी बन जाने की सजा सुना दी | परंतु अपने भाई सांभ की भक्ति के कारण, ‘चकेवा’ के त्याग के साथ-साथ अटूट एवं निश्छल प्रेम होने के कारण ‘सामा’ पुनः पक्षी से मनुष्य के रूप में आ जाती है | तब से सामा-चकेवा पर्व मनाने वाली लड़कियां कार्तिक पूर्णिमा की रात में चुगला के मुंह में आग लगाकर जलाती है और विसर्जित करती है | ग्रामीण इलाके में आज भी यह पर्व उत्साह पूर्वक मनाया जाता है | महापर्व छठ की समाप्ति के साथ ही बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए कार्तिक पूर्णिमा तक प्रत्येक दिन इस खेल का आयोजन करती हैं |

Sama Chakeva celebration in Mithila.
Sama Chakeva celebration in Mithila.

यह भी बता दें कि भाई-बहन के बीच का प्रेम व त्याग लोकगीतों के माध्यम से भैयादूज से शुरु होकर कार्तिक पूर्णिमा की देर रात तक में संपन्न होता है | पूर्णिमा की रात को महिलाएं सहेलियों की टोली बनाकर सामा से सजे डाले को कंधे या सिर पर ले-लेकर गीत गाते हुए सामा खेलती है | चकेवा व चुगला सहित मिट्टी की बनाई गई विभिन्न पक्षियों की मूर्तियों को डाले में सजाकर निकट के तालाब में या जोते हुए खेतों में विसर्जित कर आती हैं |

जानकारों के अनुसार सामा-चकेवा के बाद कोसी-मिथिलांचल में आते हैं प्रवासी पक्षीगण- जिन्हें यहाँ के लोग अधंगा….. लालसर…… सुर्खाब…… नकटा….. हसुआ आदि नामों से जानते हैं | मिथिलांचल में मेहमानों की तरह इन पंक्षियों का स्वागत होना चाहिए, परंतु ऐसा होता नहीं………| लोगों द्वारा लगातार इनके शिकार होने के चलते इन पक्षियों की तादाद में सर्वाधिक कमी आती जा रही है |

चलते-चलते बता दें कि जहाँ पहले महिलाएं अपने हाथों से मिट्टी के सामा-चकेवा एवं विभिन्न पक्षियों की मूर्तियां बनाती थी और विभिन्न रंगों से सजाती थी वहीं अब बाजार में बिक रहे रंग-बिरंगे मिट्टी से बनी हुई रेडीमेड ‘सामा-चकेवा’ आदि खरीद लाती हैं | संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार की मानसिकता में सर्वाधिक वृद्धि होने के कारण आये दिनों लोग इस पर्व से दूर होते जा रहे हैं |

फिर भी मिथिलांचल की कुछ बेटियाँ आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन सामा खेलने अपने ससुरालों से मायके अवश्य आयेंगी और नम आँखों से भावपूर्ण समदाउन गीतों के बीच अपने-अपने भाइयों को खुद से ठेकुआ, मुढ़ी, भुसवा……  खिलायेंगी……. परंपरा जीवित रहेगी, तभी ‘प्रेम’ अमर रहेगा !

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जिन्ना की बेटी दीना का निधन

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का मानना था कि पाकिस्तान बनने के बाद सारे मुसलमान भारत छोड़ देंगे। पर उनका यह विश्वास उस वक्त खोखला साबित हुआ जब स्वयं उनकी बेटी ने भारत छोड़ने से इनकार कर दिया। हम यहां बात कर रहे हैं जिन्ना की इकलौती संतान दीना वाडिया की, जिनका गुरुवार को न्यूयॉर्क में निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं। दीना के परिवार में बेटे नुस्ली वाडिया, डायना वाडिया और पोते नेस और जहांगीर वाडिया हैं। मुंबई में वाडिया ग्रुप के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में दीना वाडिया के देहांत की पुष्टि की गई है।

चेहरे से हू-ब-हू अपने पिता की तरह दिखने वाली दीना का जन्म अविभाजित भारत में 14-15 अगस्त की रात को 1919 में हुआ था। इतिहासकार स्टैनेली वॉल्पर्ट के मुताबिक, ‘दुनिया में उनका आगमन नाटकीय ढंग से हुआ था। जिन्ना और उनकी मां रति जिन्ना जब लंदन में एक थियेटर में फिल्म देख रहे थे, तब उनका जन्म हुआ था।’
गौरतलब है कि दीना वाडिया ने पारसी कारोबारी नेस वाडिया से शादी की थी और भारत विभाजन के पश्चात भारत में ही रहने का फैसला लिया था। जिन्ना इस बात से सख्त नाराज थे। जिन्ना के सहायक रहे मोहम्मद अली करीम छागला की एक किताब के मुताबिक जिन्ना ने जब अपनी बेटी से पूछा था कि भारत में हजारों मुसलमान हैं लेकिन तुम्हें एक नहीं मिला। इस पर दीना ने जवाब दिया था कि इस देश में हजारों मुस्लिम लड़कियां थीं लेकिन आपको शादी करने के लिए मेरी मां ही मिली। गौरतलब है कि दीना की मां रति भी पारसी समुदाय से आती थीं।

बहरहाल, बाद के दिनों में दीना अमेरिका में ही बस गई थीं। जहां तक पाकिस्तान से उनके ताल्लुक का प्रश्न है, अपने पिता की मौत के बाद वह पाकिस्तान गई थीं। इसके बाद 2004 में मुशर्रफ के दौर में उन्होंने पाक का दौरा किया था।

 

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मधेपुरा में महाकवि विद्यापति की जयन्ती मनी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार-इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की अध्यक्षता में मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की भावभीनी जयन्ती मनाई गई, जिसमें टी.पी.कॉलेज के मैथिली विभागाध्यक्ष एवं हिन्दी-मैथिली में “लोक जीवन में संस्कार गीतक महत्व” के रचनाकार डॉ.अमोल राय द्वारा- भक्ति, सौंदर्य एवं प्रेम के महान गायक विद्यापति पर मनभावन आलेख का पाठ किया गया |

इस अवसर पर जहाँ तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल ने डॉ.अमोल राय के आलेख की भरपूर प्रशंसा की तथा आशीर्वचन देते हुए कहा कि उनकी इस रचना पर BHU में शोधकार्य की भूमिका तैयार हो रही है….. वहीं सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने बीएनएमयू के सी.सी.डी.सी. रह चुके डॉ.अमोल राय को अंगवस्त्रम-पाग-बुके आदि से सम्मानित करते हुए महाकवि विद्यापति की शिवभक्ति पर कई मार्मिक प्रसंगों की चर्चाएं की | चर्चा को बढ़ाते हुए विदुषी डॉ.शांति यादव ने डॉ.राय के आलेख पाठ की विस्तृत चर्चा एवं सराहना करते हुए कहा कि महाकवि विद्यापति का यश अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार कर चुका है | इनके गीत बिहार, बंगाल, उड़ीसा………. आदि में ही नहीं बल्कि नेपाल, फीजी, मॉरिशस……. आदि देशों में रहनेवाले भारतीय मूल के लोग नित्यप्रति गाया करते हैं | इसी कड़ी में डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.शचीन्द्र महतो, प्रो.मणिभूषण, त्रिवेणीगंज से आये सुरेन्द्र भारती आदि ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये |

Kaushiki Kshetra Hindi Sahitya Sammelan Sachiv Dr.Madhepuri felicitating Dr.Amol Rai with Angbastram-Bouquet-Paag at Ambika Sahitya Sabhagar, Madhepura.
Kaushiki Kshetra Hindi Sahitya Sammelan Sachiv Dr.Madhepuri felicitating Dr.Amol Rai with Angbastram-Bouquet-Paag at Ambika Sahitya Sabhagar, Madhepura.

अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यकार शलभ ने कहा कि विद्यापति आदिकाल और वीरगाथा काल के प्रतिनिधि कवि थे | उन्होंने संस्कृत, अबहट और हिंदी साहित्य के आदिकाल पर वृहद प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यापति ने जहाँ आदिकाल के लिए ‘कीर्तिलता’, ‘कीर्तिपताका’ की रचना की वहीं भक्तिकाल के लिए ‘पदावली’ के अनेक भक्ति गीतों की, जहाँ उन्होंने रीतिकाल के लिए राधाकृष्ण के प्रेम-श्रृंगार के पद रचे वहीं आधुनिक काल के लिए उनकी सारी रचनाएं समीचीन हैं | कवि शलभ ने यहाँ तक कह डाला कि विद्यापति में संपूर्ण मिथिला की सांस्कृतिक विरासत सन्निहित है, जीवित है…….|

आयोजन के दूसरे सत्र में सुकवि तारानन्दन तरुण एवं गजलकार वसंत की स्मृति में कविगोष्ठी का सफल संचालन किया डॉ.विनय कुमार चौधरी ने और अपनी एक-एक प्रतिनिधि कविता का पाठ किया- डॉ.शांति यादव, सुरेन्द्र भारती (त्रिवेणीगंज), सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी, अभिनंदन मंडल, आशीष मिश्रा, राकेश कुमार ‘द्विजराज’, संतोष सिन्हा, राजू भैया, मणिभूषण वर्मा, डॉ.आलोक कुमार, दशरथ प्रसाद सिंह ‘कुलिश’, डॉ.अरुण कुमार, सियाराम यादव ‘मयंक’, उल्लास मुखर्जी…….. आदि | सुधि श्रोता के रूप में भोला प्रसाद सिन्हा, बलभद्र यादव, प्राण मोहन, शिवजी साह, पारोजी, रघुनाथ प्रसाद यादव, तारा शरण……… आदि अंत तक रहे |

कार्यक्रम की सफलता के लिए तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक एवं सम्मेलन के उपसचिव श्यामल कुमार ‘सुमित्र’ सहित उपस्थित विद्वान एवं साहित्यनुरागियों को सचिव डॉ.मधेपुरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर अध्यक्ष के निदेशानुसार समारोह की समाप्ति की घोषणा की गई |

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