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शेर बनो कभी कुत्ता मत बनना- वासवानी

मधेपुरा में साधु थांवरदास लीलाराम वासवानी जैसे देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी की 140 वीं जयंती उनके परम श्रद्धालु शिष्य निर्मल-किरण की पूरी टीम द्वारा सर्वाधिक उत्साह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने सर्वप्रथम साधु टीएल वासवानी एवं उनके शिष्य दादा जेपी वासवानी की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ.मधेपुरी ने कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन डीपीएस के निदेशक सुमित्र व निर्मल-किरण टीम के सदस्यों के साथ दीप प्रज्वलित कर किया।

बता दें कि आजादी से पूर्व हैदराबाद सिंध के रहने वाले और बाद में पुणे में ‘वासवानी मिशन’ स्थापित कर आध्यात्मिक गुरु साधु वासवानी एवं शिष्य जशन वासवानी द्वारा विश्व शांति के साथ-साथ शाकाहार एवं अबोल जानवरों के अधिकारों को लेकर दुनिया को जागरूक किया जाता रहा। सभी लोगों को अपने से नीचे वालों पर उपकार करने की बातें कही जाती रही।

उद्घाटनकर्ता के रूप में भौतिकी के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर व मुख्य वक्ता डॉ मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों एवं बुजुर्गों से यही कहा कि जब साधु वासवानी ने अपने शिष्य दादा जेपी वासवानी के भौतिकी प्रयोगशाला में एक्स-रे मशीन के उद्घाटन के बाद टेलीस्कोप दिखाते हुए सांस से लेंस को धुंधला कर दिया और एक बार फिर अपने शिष्य भौतिकी के गोल्ड मेडलिस्ट प्रोफेसर जे पी वासवानी को उसमें देखने को कहा तो इस बार शिष्य जेपी को कुछ दिखाई नहीं दिया इस पर साधु वासवानी ने यही कहा-

“जैसे नमी की झीनी सी परत सारे सितारों को छिपा सकती है, इसी प्रकार अहंकार, घमंड व स्वार्थ के बादल हमें उस सर्वव्यापी ईश्वर को नहीं देखने देते…….. अपने आंतरिक नेत्रों के लेंसों को साफ करने पर तुम भी प्रभु से प्रत्यक्ष रूप में वार्तालाप करने लगोगे।”

यह भी जानिए कि कार्यक्रम में उपस्थित सारे बच्चों व बुजुर्गों द्वारा मधेपुरा के मुख्य मार्गों पर “शाकाहार दिवस” के नारों के साथ-साथ तख्तियों पर स्लोगन तथा टोपियों पर “सबों को जीने का अधिकार चाहिए”- वाली शांति यात्रा को डॉ.मधेपुरी ने हरी झंडी दिखा कर विदा किया।

नगर भ्रमण से लौटकर आए शांति यात्रियों से संदेश स्वरूप डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि शाकाहारी जीवन जीने वाले जेपी वासवानी सिंध के ऐसे पहले व्यक्ति रहे हैं जिन्होंने 19 वर्ष की अल्पायु में ही बम्बई यूनिवर्सिटी से भौतिकी में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्णता प्राप्त की……. और जिन्होंने शोध के साथ अपनी मास्टर्स की डिग्री ही पूरी न की बल्कि विश्व विख्यात वैज्ञानिक डॉ.सीवी रमन ने जब इनके शोध को जांचा तो उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा भी की। डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा- साधु वासवानी अपने शिष्यों से सदा यही कहा करते…. शेर बनो कभी कुत्ता मत बनना। कुत्ता हमेशा फेंके गए बाॅल की ओर दौड़ता है परंतु शेर फेंकने वाले को देखता है…. तुम भी सुख-दुख देने वाले ईश्वर की ओर देखो….. उन्हीं का चिंतन करो….. सुख-दुख की चिंता कभी मत करो।

अंत में निर्मल-किरण वासवानी की पूरी टीम द्वारा सबों को शाकाहार दिवस पर शाकाहारी भोजन कराया गया और प्रमोद कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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जदयू महिला समागम के तीन दिवसीय सम्मेलन का भव्य आगाज

अतिपिछड़ा, दलित-महादलित एवं अल्पसंख्यक सम्मेलनों के बाद शनिवार को जदयू महिला समागम के जिला सम्मेलनों का भव्य आगाज हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन समस्तीपुर, मधेपुरा, पश्चिमी चम्पारण, सीतामढ़ी एवं शिवहर (संयुक्त), रोहतास, पूर्णिया, जहानाबाद एवं अरवल (संयुक्त), गोपालगंज, वैशाली एवं नवादा में सम्मेलन का आयोजन हुआ।

मधेपुरा में महिला समागम का सम्मेलन स्थानीय जीवन सदन में हुआ जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। पूर्व मंत्री सह विधायक लेसी सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया, वहीं पूर्व मंत्री सह विधायक नरेन्द्र नारायण यादव मुख्य अतिथि थे। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, विधायक निरंजन मेहता, प्रदेश प्रवक्ता निखिल मंडल तथा मधेपुरा जिला जदयू के प्रभारी भगवान चौधरी विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। लेसी सिंह के साथ जो नेत्रियां कार्यक्रम में शामिल हुईं, उनमें प्रमुख हैं मंजू देवी उर्फ गुड्डी जी, शगुफ्ता अजीम, ललिता देवी, स्मिता सिन्हा, ललिता जायसवाल, रेणु झा एवं मुन्नी देवी। कार्यक्रम की अध्यक्षता जदयू जिलाध्यक्ष बिजेन्द्र नारायण यादव ने किया, जबकि संचालन महिला जदयू की जिलाध्यक्ष मीना देवी ने किया।

उधर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव एवं संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह नवादा में विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं महिला समागम के लिए गठित 12 टीमों की शेष नेत्रियों में कहकशां परवीन, सांसद समस्तीपुर में, डॉ. रंजू गीता, स.वि.स. पश्चिमी चम्पारण में, कविता सिंह, स.वि.स. सीतामढ़ी एवं शिवहर (संयुक्त) में, रेणु देवी, पूर्व स.वि.स. रोहतास में, प्रो. हरपाल कौर, पूर्व अध्यक्ष, महिला जदयू पूर्णिया में, अंजली सिन्हा, राज्य कार्यकारिणी सदस्य जहानाबाद एवं अरवल (संयुक्त) में, डॉ. भारती मेहता, प्रदेश प्रवक्ता गोपालगंज में, अंजुम आरा, प्रदेश प्रवक्ता वैशाली में एवं श्वेता विश्वास, प्रदेश प्रवक्ता नवादा में मौजूद रहीं।

नवादा में महिला समागम को संबोधित करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आधी आबादी को वो स्थान और सम्मान दिया है जिसकी वो हकदार थी लेकिन उसे इससे वंचित रखा जाता था। स्वतंत्र भारत में किसी मुख्यमंत्री ने महिलाओं एवं बालिकाओं के उत्थान के लिए इतने कार्य नहीं किए जो बिहार में उनके शासनकाल के 13 वर्षों में देखने को मिले हैं।

गौरतलब है कि जिला महिला समागम में नेत्रियों ने जिन विषयों पर संवाद किया, वे हैं: सुशासन के कार्यक्रम, पूर्ण शराबबंदी, दहेजप्रथा-बालविवाह-भ्रूण-हत्या उन्मूलन, सात निश्चय, महिलाओं को रोजगार एवं शिक्षा और स्वास्थ्य। सभी नेत्रियों ने जहां एक ओर सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा की, वहीं सामाजिक सरोकार से जुड़े अभियानों के लिए महिलाओं को प्रेरित किया। चलते-चलते बता दें कि नीतीश कुमार के विकास कार्यों एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े अभियानों में आस्था रखने वाली सभी महिलाएं समागम के सम्मेलन में भाग ले रही हैं एवं पंचायत, प्रखंड, जिला व प्रदेश स्तर पर पार्टी की सभी इकाइयां इसके लिए सक्रिय सहयोग कर रही हैं।

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बिहार के प्रत्येक कॉलेज में गठित होंगे रोड सेफ्टी दूत

वाहन ड्राइविंग करते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल युवा वर्ग इस तरह करता है कि हादसे का खतरा 4 गुणा तक बढ़ जाता है। ये बातें मधेपुरा अबतक नहीं बल्कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट में कही गई है।
बता दें कि यदि युवाओं द्वारा दो पहिए से लेकर 4 या अधिक पहिए वाली गाड़ियों के ड्राइविंग के वक्त फोन ना उठाए जाएं तो हर साल बच सकती है लगभग ढाई हजार जानें। भारत उन देशों में शामिल है जहाँ सेल्फी से प्रतिवर्ष सबसे ज्यादा जाानें जाती हैं। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार संसार में 2014 से 2018 फरवरी तक कुल 213 सेल्फी डेथ रिकॉर्ड की गई जिसमें 128 सेल्फी डेथ केवल भारत में हुई।
यह भी जानिए कि 2016 के अगस्त में भारत सरकार ने राज्यों को एडवाइजरी जारी कर यही सूचित किया कि प्रत्येक राज्य सेल्फी डेंजर जोन आईडेंटिफाई कर वैसी जगहों पर चेतावनी के बोर्ड लगाएँ। सड़क सुरक्षा की जानकारी दें।
और हाँ ! चलती गाड़ियों में ड्राइवर द्वारा फोन उठाने पर जहां आंध्र प्रदेश में 2014 में 20 बच्चे मारे गये वहीं उधमपुर में फोन उठाते ही बस खाई में गिरी और 14 बच्चे मारे गए और मोबाइल उठाने की वजह से ऐसे बड़े-बड़े हादसे आये दिन बराबर होते ही रहते हैं।
यही कारण है कि अब राज्य के प्रत्येक कॉलेज में रोड सेफ्टी दूत बनाए जाएंगे जिसके माध्यम से छात्रों के बीच सड़क सुरक्षा का अलख जगाये जाएगा। चयन हेतु प्रत्येक कॉलेज में प्राचार्य की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। इसके लिए परिवहन विभाग रोड सेफ्टी दूत के चयन के लिए प्रारूप तैयार कर रहा है जिसे सभी कालेजों में भेजा जाएगा।
सभी जानते हैं कि सड़क दुर्घटना में अधिकतर मौतें युवाओं की हो रही है जिसे सचेत करने के लिए प्रत्येक कॉलेज में स्वयंसेवक तैयार किये जा रहे हैं। साथ ही रोड सेफ्टी पर वीडियो भी दिखाया जाएगा। प्रशिक्षण के साथ-साथ सेफ्टी के बाबत स्लोगन प्रतियोगिता भी होगी और सड़क सुरक्षा को हाई स्कूल के सिलेबस में अगले शैक्षणिक सत्र में शामिल कर लिया जाएगा।

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कोसी ने बताया कि बरकरार है नीतीश का आकर्षण

बुधवार, 21 नवंबर को सहरसा के पटेल मैदान में आयोजित जदयू के प्रमंडलीय अतिपिछड़ा सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुनने की खातिर उमड़े जनसैलाब ने बहुत कुछ कह दिया। इस सम्मेलन ने स्पष्ट कर दिया कि ना केवल नीतीश कुमार का आकर्षण अब भी बरकरार है, बल्कि लोग उनके द्वारा किए गए कार्यों के प्रति सम्मान और भविष्य के लिए उनमें आस्था भी रखते हैं।

CM Nitish Kumar (on dias), Ministers Bijendra Prasad Yadav, Dinesh chandra Yadav, Ramesh Rishidev, Ex-MP & Founder VC Dr. RKY Ravi, EX-MP SN Yadav, Ex-Min & MLA NN Yadav, JDU Leader Sanjay Jha and others during Sammelan.
CM Nitish Kumar (on dias), Ministers Bijendra Prasad Yadav, Dinesh chandra Yadav, Ramesh Rishidev, Ex-MP & Founder VC Dr. RKY Ravi, EX-MP SN Yadav, Ex-Min & MLA NN Yadav, JDU Leader Sanjay Jha and others during Sammelan.

जदयू के इस बड़े आयोजन के आकर्षण का केन्द्र स्वाभाविक तौर पर नीतीश कुमार थे। उनके साथ ही कोसी की जदयू की सभी बड़ी हस्तियां भी मंचस्थ थीं। मुख्यमंत्री के साथ मौजूद प्रमुख लोगों में ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेशचन्द्र यादव, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व सांसद एवं बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, पूर्व सांसद सूर्यनारायण यादव, पूर्व मंत्री एवं विधायक नरेन्द्र नारायण यादव, विधानपार्षद ललन सर्राफ एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप शामिल हैं। मंचासीन अन्य लोगों में विधायक निरंजन मेहता, विधायक रत्नेश सदा, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, विधायक बीना भारती एवं प्रदेश प्रवक्ता निखिल मंडल उल्लेखनीय हैं। सम्मेलन की अध्यक्षता जहाँ सहरसा जिला जदयू अध्यक्ष चन्द्रदेव मुखिया ने की, वहीं मधेपुरा के जिला अध्यक्ष बिजेन्द्र प्रसाद यादव, सुपौल के जिलाध्यक्ष रामविलास कामत एवं तीनों जिला के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी मंच पर विराजमान रहे।

 

JDU Media Cell President Dr. Amardeep having discussion with CM Nitish Kumar during Sammelan, Energy Minister Bijendra Prasad Yadav also in picture
JDU Media Cell President Dr. Amardeep having discussion with CM Nitish Kumar during Sammelan, Energy Minister Bijendra Prasad Yadav also in picture.

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज राज्य में कोई ऐसा विभाग नहीं, जहां उत्थान की योजनाएं नहीं चल रहीं और कोई ऐसा वर्ग नहीं, जो सरकार की योजनाओं से अछूता है। सबके लिए समान रूप से काम हो रहा है। सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घर-घर बिजली पहुँचाने का लक्ष्य तीन माह पूर्व पूरा हो चुका है। एक साल के अंदर सभी जिलों एवं पंचायतों में कृषि के लिए अलग बिजली फीडर होगा। साथ ही राज्य के सभी जर्जर बिजली के तारों को बदल दिया जाएगा। कृषि के संबंध में उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भी बिहार ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। वर्ष 2005 में राज्य की उत्पादकता सबसे कम थी। लेकिन, आज हम सौ फीसदी के साथ राष्ट्रीय औसत को पछाड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि बिना उद्योग-धंधे वाले इस राज्य में निचले स्तर से विकास कार्यों को करते हुए बिहार का विकास दर आज दो अंकों से दस फीसदी पर पहुँच चुका है।

इससे पूर्व लोकसभा व राज्यसभा के पूर्व सदस्य एवं बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने अपने काव्यमय संबोधन से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिहार की तकदीर बदलने वाले नीतीश कुमार प्रशासक और समाज-सुधारक दोनों हैं। उनमें सरदार पटेल और राजा राममोहन राय की छवि एक साथ देखी जा सकती है। वहीं, बिहार सरकार के तीनों मंत्रियों – बिजेन्द्र प्रसाद यादव, दिनेशचन्द्र यादव एवं रमेश ऋषिदेव – ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रहे कार्यों एवं कल्याणकारी योजनाओं से जनसमूह को अवगत कराया और आह्वान किया कि 2019 और 2020 के चुनाव में अपार समर्थन देकर अपने नेता का मनोबल और बढ़ते बिहार की रफ्तार को बढ़ाएं।

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मो.अज़ीज़ की आवाज के साथ हुआ राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव का समापन

भारतीय संस्कृति का सांस्कृतिक वैभव तो यही है कि हम चार पैरों वाले बेजुबान पशु को आस्था और अराधना का केंद्र बनाकर ना जाने कबसे गोपाष्टमी मनाते चले आ रहे हैं | संवेदना और संस्कार की ऐसी समृद्ध गरिमा को 4 दिनों से इस चार दिवसीय प्रथम राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव में लगातार गौरवान्वित करती आ रही है- अपनी सुरीली आवाज से एंकरिंग करती हुई गरिमा यादव……. और गरिमामयी एंकरिंग के चलते ही सजी हुई इस महफिल में चारों ओर सुनाई देती रही हैं तालियों की गड़गड़ाहट |

BN Mandal University Registrar Colonel Neeraj Kumar , Former Controller of Exams Dr.Madhepuri , SDM Vrindalal , SDPO Md.Wasi Ahmad , Dr.Rajneesh Rai and thousands of viewers enjoying Gopastmi Mahotsav at Madhepura.
BN Mandal University Registrar Colonel Neeraj Kumar , Former Controller of Exams Dr.Madhepuri , SDM Vrindalal , SDPO Md.Wasi Ahmad , Dr.Rajneesh Rai and thousands of viewers enjoying Gopastmi Mahotsav at Madhepura.

बता दें कि बिहार सरकार के कला संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन मधेपुरा द्वारा आयोजित चार दिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव (17-20 नवंबर) का उद्घाटन मंत्री रमेश ऋषिदेव और डीएम नवदीप शुक्ला (आईएएस) की टीम द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया | प्रथम दिन यानी उद्घाटन के दिन प्रिया राज, अमर आनंद, स्वीटी व सिमरन की प्रस्तुति पर दर्शक थिरकते रहे | दूसरे व तीसरे दिन जहाँ राइजिंग स्टार व सारेगामापा के कलाकारों सहित भागलपुर-वाराणसी-प्रयागराज के शास्त्रीय गायन के कलाकारों की सुरीली आवाज से लेकर भिन्न-भिन्न प्रकार के नृत्यों पर सारे-के-सारे दर्शक सर्द भरी रातों में भी झूमते रहे, गाते रहे और गुनगुनाते रहे…… वहीं समापन को यादगार बनाने में लगे रहे कोलकाता से आई अर्पिता और बॉलीवुड में हजारों गीत के गायक हर दिल अजीज जनाब मो.अजीज | अजीज-अर्पिता की जोड़ी ने अपने सधे हुए सुरों से बनाया महोत्सव को गुलजार |

Bollywood Famous Singer Md.Aziz and Samajsevi Sahityakar Prof.(Dr.) Bhupendra Narayan Madhepuri dicussing National and Cultural activities of Guru Rabindranath Tagore , Mahatma Gandhi and Gandhian Missileman Dr.APJ Abdul Kalam at District Guest House , Madhepura.
Bollywood Famous Singer Md.Aziz and Samajsevi Sahityakar Prof.(Dr.) Bhupendra Narayan Madhepuri discussing National and Cultural activities of Guru Rabindranath Tagore , Mahatma Gandhi and Gandhian Missileman Dr.APJ Abdul Kalam at District Guest House , Madhepura.

यह भी जानिए कि समापन कार्यक्रम से पूर्व ही जिला अतिथिशाला में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पर लिखी गई पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है ” भेंट करते हुए प्रसिद्ध बॉलीवुड गायक मो.अजीज से यही कहा-

मधेपुरा की यह धरती समाजवादियों के साथ-साथ साहित्यकारों कलाकारों एवं संगीतकारों, को भी सम्मान देने का काम करती रही है जिसे आप कार्यक्रम के दरमियान महसूसेंगे।

इन दोनों दिग्गजों डॉ.मधेपुरी एवं मो.अजीज के बीच राष्ट्रीय गान के रचनाकार रविन्द्रनाथ टैगोर, सत्य अहिंसा के पालक महात्मा गांधी एवं संपूर्ण भारतीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के बाबत देर तक चर्चाएं होती रहीं…..। बाद में मीडिया से रू-ब-रू होते हुए मो.अजीज ने कहा-

पहले के गीतकारों एवं संगीतकारों को हिन्दी व शायरी की अच्छी समझ होती थी | उस समय के गीत रूह को जगा देती थी……. अब हिन्दी कम होने लगी है…….. और हिंगलिश गानों का फैशन आकाश छूने लगा है | खेद प्रकट करते हुए यह भी कहा कि बॉलीवुड में भी राजनीति प्रवेश कर गया है | तभी तो इंग्लिश मीडियम के लोग हिन्दी गाना गा रहे हैं | युवा कलाकारों के लिए कहा कि संगीत में कामयाब होने के लिए अपनी बुनियाद को मजबूत करनी होती है |

समापन में स्थानीय गायक संजीव कुमार, रेखा यादव, सृजन दर्पण के विकास कुमार की टीम आदि ने खूब तालियां बटोरी | जब मंच पर उतरे मो.अजीज और उनकी अर्पिता तो गरिमा यादव की एंकरिंग ने मंच की गरिमा और बढ़ा दी……| दर्शक दीर्घा में बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार, पूर्व परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक व कुलसचिव रह चुके प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव…..एसडीएम वृंदा लाल , एसडीपीओ मो.वशी अहमद तथा महोत्सव  को सफलतापूर्वक समापन तक ले जाने में लगे रहने वाले एनडीसी डॉ.रजनीश राय…..आदि ने अन्त तक रहकर  सभी कलाकारों को सम्मानित किया।

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मधेपुरा के किसानों की चुनौतियाँ ही उनके लिए अवसर पैदा करेंगी

कोसी नवनिर्माण मंच के संस्थापक महेन्द्र यादव 2008 के राष्ट्रीय आपदा कुसहा-त्रासदी से लगातार कोसी के किसानों को जगाते रहे हैं और उनकी समस्याओं से अहर्निश जूझते रहे हैं। हाँ ! किसानों की चुनौतियों से जूझने में इन्हें समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सरीखे अनेक बुद्धिजीवियों एवं आद्यानंद यादव व शंभू शरण भारतीय जैसे किसानों के हित के लिए सकारात्मक सोच रखने वालों से निरंतर सहयोग मिलता रहा है।

बता दें कि भले ही राजनीतिक रूप से मधेपुरा जिला देश व प्रदेश में चर्चा में रहता हो परंतु इस जिले के किसानों को दोहरी चुनौतियों से जूझना पड़ता है। उनके जीवन से जुड़े सवाल राजनीतिक फलक पर नहीं आ पाते हैं। इसलिए यहाँ के किसानों को अपने अस्तित्व के लिए जीवन संघर्ष के साथ-साथ नवनिर्माण की नई इबादत अपने बल पर लिखनी होगी वरना किसानों का पलायन रुकने का नाम नहीं लेगा।

यह भी जानिए कि यहाँ के तकरीबन साढ़े चार सौ गाँवों में बसनेवाले किसान अपनी लगभग दो लाख एकड़ उपजाऊ जमीन पर खुद ही मेहनत के बल पर गेहूँ, धान, मक्का , मूंग , आलू , पटुआ आदि फसलें भारी पैमाने पर तो उगा ही लेते हैं परंतु छोटी खेती वाले लोग यूपी, पंजाब और हरियाणा में जाकर मौसमी मजदूरी करने लगते हैं। क्योंकि सीट के आधार पर न्यूनतम लाभकारी मूल्यों की बात तो दूर……. वर्तमान निर्धारित समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाता है किसानों को। तभी तो महंगी होती जा रही है खेती की लागत के बीच इस वर्ष के निर्धारित मक्के के बाजार मूल्य ₹9 प्रति किलो पर बेचने को किसान मजबूर होते रहे हैं।

जानिए कि ऐसी ही चुनौतियों के बीच अवसर पैदा करने की जरूरत है। किसान भाइयों ! संगठित होकर खेती आधारित उद्योगों को खड़ा करें और बाजार से मुकाबला करने का अवसर ढूंढ निकाले। सोचिए, किसानों के घर से छोटे व्यापारी धान लेजाकर बड़े व्यापारी को देते हैं जो चावल बनाकर पुनः बाजार में भेजते हैं। इस प्रक्रिया में कई जगह लोग मुनाफा कमाते हैं। यदि किसान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारिता के माध्यम से ऐसा ही करें तो आधे दर्जन से अधिक जगहों पर तैयार फसल पर मुनाफा कमाने वाले व्यापारियों का मुनाफा रुक जाएगा। ऐसी ही छोटी-छोटी कोशिशें बड़ी-बड़ी संभावनाओं को जन्म दे सकती हैं।

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बिहार का सम्मान बनेगा वाल्मीकिनगर: नीतीश कुमार

रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो दिवसीय दौरे पर अपनी पसंदीदा जगह वाल्मीकिनगर पहुंचे और यहां के प्राकृतिक और दर्शनीय स्थलों का दीदार किया। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि यहां पर्यटन को लेकर ऐसी स्थिति बने कि पूरा बिहार वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व को अपने सम्मान के साथ जोड़े। बिहार का एक-एक निवासी यहां की सुंदरता के बारे में जाने और देश-दुनिया के पर्यटक यहां आकर इसकी प्राकृतिक छटा से रू-ब-रू हो सके।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वाल्मीकिनगर में इको टूरिज्म के तहत हुए कार्यों को देखकर खुशी जाहिर की। उन्होंने यहां हरी झंडी दिखाकर साइकिल सफारी का शुभारंभ भी किया। इस मौके पर वाल्मीकि विहार होटल परिसर में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि बिहार से जब झारखंड अलग हुआ था, तब बिहार में सिर्फ 9% हरित क्षेत्र बचा था। हमने हरियाली मिशन की शुरुआत की और 24 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा। आज पूरे बिहार में 22 करोड़ से अधिक पौधे लग चुके हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट आने वाली है, संभावना है कि अब हरित क्षेत्र 15% होगा। लेकिन इसे 17% करने का लक्ष्य रखा गया है।

वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पर्यटकों के आने की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वाल्मीकिनगर क्षेत्र बिहार में पर्यटन की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है। केवल जरूरत है कि इसे प्रचारित किया जाये। उन्होंने वाल्मीकिनगर का महत्व बताते हुए कहा कि पुराने जमाने में इसका नाम भैंसा लोटन था। यहां वाल्मीकि आश्रम होने के कारण इसका नाम बदल दिया गया। अब सब लोग इसे वाल्मीकिनगर के नाम से जानते हैं। हरियाली से युक्त इस जगह की प्राकृतिक विशेषता है कि इसके एक ओर जहां पहाड़ है, वहीं दूसरी ओर यह जंगल से आच्छादित है और तीसरी ओर यह क्षेत्र नदी से भी गिरा है। इतना रमणीक स्थल पूरे देश में शायद ही कहीं हो।

वाल्मीकिनगर में मुख्यमंत्री की इस खास यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, जलसंसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, सांसद सतीश चंद्र दुबे, विधायक भागीरथी देवी, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, वन विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारि शरण, आयुक्त नर्मदेश्वर लाल, आईजी सुनील कुमार, डीआईजी ललन मोहन प्रसाद सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

चलते-चलते बता दें कि इस दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के आग्रह को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने वाल्मीकिनगर में कैबिनेट की बैठक आयोजित करने की घोषणा भी की। साथ ही कहा कि यहां बोधगया और राजगीर की तरह कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण कराया जायेगा। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पटना से वाल्मीकिनगर तक सप्ताह में एक दिन टूरिस्ट बस चलाने और यहां नौकायन के लिए 12 सीटर दो बोट उपलब्ध कराने की घोषणा की।

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भारतीय रेल की पैंट्रीकार में अब परोसा जाएगा गरमागरम ताजा भोजन !

भारतीय रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री अश्विनी लोहानी की मंजूरी के बाद से सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए गये हैं कि आई आर सी टी सी के लिए चलती ट्रेन में पैसेंजरों को गर्म, ताजा और स्वच्छ भोजन परोसने बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को सभी स्वीकार करें और तेजी से काम करें।
बता दें कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सभी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की पैंट्रीकार को नया स्वरूप देने हेतु मरम्मत व रखरखाव का काम आईआरसीटीसी (Indian Railway Catering and Tourism Corporation Ltd.) को सौंपने का निर्णय लिया है। जबकि पूर्व में भारतीय रेल के पैंट्रीकार में यांत्रिकी, तकनीकी व विद्युतीय आदी प्रकार की कोई खराबी होने पर उसकी मरम्मत व ठीक करने का काम भारतीय रेल द्वारा किये जाने वाले नियम के तहत ठीक होने में काफी वक्त लग जाया करता क्योंकि रेलवे में अलग-अलग दर्जनों विभाग होने से कौन करे……. कौन ना करे….. इसमें विलंब होना स्वाभाविक हो जाता।
अब भारतीय रेल की पैंट्रीकार में बर्तन धोने, रखने और खाना पकाने की नहीं होगी समस्या, क्योंकि पेंट्रीकार को नया स्वरूप देने वाले फैसले के अनुरूप कार्य प्रगति पर है। और हाँ ! यदि पैसेंजरों द्वारा रेल को सहयोग किया जाए तो और गुणवत्तापूर्ण भोजन उन्हें सदैव मिलता रहेगा।
रेल यात्रियों को यह जानना और मानना होगा कि जिस वेज खाने का आप ₹120 बिना बिल लिए भुगतान करते हैं वह वास्तव में ₹50 का होता है और नॉनवेज मात्र ₹55 का जिसके लिए आप ₹140 बिना रसीद लिए देते हैं। भारतीय रेल द्वारा आरंभ से ही मेनूकार्ड और रेट जारी किया गया है…… जानकारी के अभाव में पैसेंजर मांगते नहीं और यदि मांगने पर वह बहाना बनाता तो यह कह कर छोड़ देते कि अरे  चलो साल में दो-तीन बार ही तो रेल यात्रा करता हूं…… थोड़ा ले ही लिया तो क्या हुआ ?
बता दें कि भारत में रोजाना लगभग 7000 पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं ….. यदि दो हज़ार में ही पैंट्रीकार हो तो आप हैरत में पड़ जाएंगे की गणना अनुसार भारतीय रेल में प्रतिदिन 20 से 30 करोड़ का काला धन जनरेट होता है…… 1 महीने में अरबों…… वर्ष की गिनती संभव नहीं ….। ये सारे पैसे बिना टैक्स दिये ठेकेदारों की जेब में चले जाते हैं।
यदि हम और आप छोटी सी कोशिश करें तो बदलाव ला सकते हैं ….. रेलवे से रशीद लेना न भूलें तो ….. आने वाली पीढ़ी को काले धन की बुराइयों से बचा सकते हैं। हम अपने बच्चों को गरमा-गरम, ताजा और शुद्ध भोजन उचित दाम पर खिला सकते हैं….. चाय-कॉफ़ी के बाबत लिए जा रहे डबल चार्ज को आधा करा सकते हैं….।

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डायनेमिक डीएम मो.सोहैल बने पाँच क्षेत्रीय भाषाओं के बिहारी शब्दकोश निर्माण उपसमिति के सदस्य !

बिहार की पाँच क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों से तैयार किये जाने वाले ‘बिहारी शब्दकोश’ (जिसमें अंगिका, बज्जिका, भोजपुरी, मगही व मैथिली के शब्द होंगे शामिल) के निर्माण हेतु 5 करोड़ कि योजना को स्वीकृति मिल गई है | साथ ही बिहारी शब्दकोश व प्राकृत संकलन की योजना को अधिष्ठात्री परिषद व उपसमिति ने हरी झंडी दे दी है |

बता दें कि इस  उपसमिति में सदस्य के रूप में शामिल किये गये हैं- मुजफ्फरपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री नर्मदेश्वर लाल, बी.आर.अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अमरेंद्र नारायण यादव, सदर जिलाधिकारी मो.सोहैल, बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर व डीन प्रो.के.के.जैन, प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान के निदेशक ऋषभ चंद्र जैन एवं डीडीसी उज्जवल कुमार | इस उपसमिति ने सरैया के वासोकुंड स्थित प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान को सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाने हेतु मंजूरी दे दी है |

जानिए कि इस उपसमिति ने दो प्रस्तावों पर अपनी सहमति देते हुए मुहर लगा दी है | प्रथम प्रस्ताव के तहत क्षेत्रीय 5 भाषाओं (अंगिका, बच्चिका, भोजपुरी, मगही व मैथिली) के शब्दकोश के लिए पाँच अलग-अलग भाषाविद विद्वानों की मदद ली जायेगी जिसमें प्रत्येक भाषा के विद्वान को एक-एक लाख रु. मासिक दिये जाएंगे | इस कार्य के निष्पादन के लिए 5 साल का समय निर्धारित किया गया है | और हाँ ! बिहारी शब्दकोष के लिए जो बजट तैयार किया गया है उसमें दो डाटा एन्ट्री आपरेटरों की नियुक्ति के साथ-साथ पुस्तकों की खरीद आदि भी शामिल किये गये हैं |

यह भी कि उपसमिति द्वारा दूसरे प्रस्ताव में शौरसेनी प्राकृत भाषा के आगम ग्रंथों का मूल प्राकृत पाठ व हिन्दी अनुवाद के साथ प्रकाशित करने की भी स्वीकृति दी गई है, जिसके लिए अतिरिक्त दो करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि उपसमिति द्वारा पारित सारे प्रस्तावों का द्रुतगति से कार्यान्वयन किये जाने हेतु डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा उसे राजभवन भेजा जाएगा ताकि निर्धारित 5 वर्ष की अवधि के अंदर ही लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा , क्योंकि मधेपुरा में डीएम रह चुके मो.सोहैल द्वारा इलेक्ट्रिक रेल इंजन एवं अन्य कई योजनाओं को निर्धारित समयावधि से पहले पूरा कर लिए जाने पर उन्हें समाजसेवी डॉ.मधेपुरी सहित अनेक शिक्षाविद आज भी याद करते हैं |

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अभूतपूर्व होगा जदयू का अतिपिछड़ा, अल्पसंख्यक और महिला सम्मेलन

21 जनवरी को जदयू के प्रमंडलीय अतिपिछड़ा सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहरसा आगमन को लेकर कोसी प्रमंडल में पार्टी की तीनों इकाई – मधेपुरा-सहरसा-सुपौल – जोरशोर से तैयारी में जुटी है। इस सम्मेलन के अतिरिक्त भी मधेपुरा में जदयू के दो बड़े कार्यक्रम एक सप्ताह के भीतर होने हैं। गौरतलब है कि 18 नवंबर को जहां मधेपुरा के नगर भवन में जहां अल्पसंख्यक जिला सम्मेलन होगा, वहीं 24 नवंबर को स्थानीय जीवन सदन में जदयू महिला समागम का सम्मेलन होना तय है।
कहने की जरूरत नहीं कि 2019 का लोकसभा चुनाव निकट है और 2020 का विधानसभा चुनाव भी अधिक दूर नहीं। इन वजहों से मधेपुरा जदयू की इकाई इन सभी कार्यक्रमों, विशेषकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में होने वाले कार्यक्रम, को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इस परिप्रेक्ष्य में 15 नवंबर को स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल विधि महाविद्यालय के सभागार में मधेपुरा जिला जदयू की तैयारी बैठक हुई, जिसमें आलमनगर के विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, मधेपुरा के पूर्व विधायक मणीन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओम बाबू, जिला प्रभारी अमर चौधरी उर्फ भगवान बाबू, प्रदेश प्रवक्ता निखिल मंडल, पूर्व प्रदेश महासचिव बीबी प्रभाकर, प्रदेश सलाहकार समिति के सदस्य सत्यजीत यादव, सुजीत कुमार मेहता, डॉ. नीलाकांत, राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य गुड्डी देवी एवं वरीय नेता गोवर्द्धन मेहता मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रो. बिजेन्द्र नारायण यादव ने की।
इस बैठक के संबंध में ‘मधेपुरा अबतक’ से बात करते हुए जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि न केवल बिहार बल्कि देश की राजनीति में मधेपुरा ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। समाजवाद को आकार देने की बात हो तो भूपेन्द्र नारायण मंडल, पिछड़ों को आवाज देने की बात हो तो मंडल कमीशन के जनक बीपी मंडल, भारतीय संविधान की रचना करने की बात हो तो संविधान सभा के सदस्य के रूप में चतरा के कमलेश्वरी प्रसाद यादव और राज्य की विधि व्यवस्था को सांचे में ढालना हो तो मधेपुरा के ही शिवनंदन प्रसाद मंडल याद किए गए। आज जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार अपने विकास और वैभव की नई इबारत लिख रहा है, तब भी बिहार के अगुआ के साथ कदमताल करने में मधेपुरा ही सबसे आगे होगा। डॉ. अमरदीप ने कहा कि मधेपुरा के लोग अगर जग जाएं तो सहरसा का पटेल मैदान (जहां मुख्यमंत्री का कार्यक्रम हो रहा है) क्या, पटना का गांधी मैदान भी छोटा पड़ जाएगा। अल्पसंख्यक एवं महिला सम्मेलन भी अभूतपूर्व होगा।
तैयारी बैठक में सभी वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि चाहे महिलाओं की आधी आबादी हो, चाहे अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन सबके उत्थान में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह हम सभी का नैतिक दायित्व है कि इन सभी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कर अपने नेता का हौसला बढ़ाएं। बैठक में अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रदीप साह, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मो. आजाद, महिला जदयू की जिलाध्यक्ष मीना देवी, व्यवसायिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी, दलित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नरेश पासवान, युवा जदयू के जिलाध्यक्ष रूपेश कुमार गुलटेन, छात्र जदयू के जिलाध्यक्ष अमित आनंद मौजूद रहे। इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करने वालों में जदयू मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य यादव उमेश कुमार, जिला मीडिया संयोजक प्रो. मनोज भटनागर एवं युवा जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष युगल पटेल प्रमुख हैं।

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