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अमर शहीद चुल्हाय की 99वीं जयन्ती उत्साहपूर्वक मनी

15 जनवरी 2019 (मंगलवार) को अमर शहीद चुल्हाय यादव की 99वीं जयंती समारोह पूर्वक प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में मनाई गई। समारोह के उद्घाटनकर्ता बिहार सरकार के पूर्व आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर एवं मुख्यवक्ता के रूप में बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अतिरिक्त सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियों के रूप में बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार यादव, राजकिशोर यादव….. सहित शहीद चुल्हाय स्मारक समिति मनहरा-बराही-सुखासन के पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, सचिव डॉ.नरेश कुमार, अध्यक्ष प्रो.जयकृष्ण यादव व अन्य क्रांतिकारी युवाओं की उपस्थिति देखी गई।

Dr.Madhepuri and others paying their tributes to Shahid Chulhai.
Dr.Madhepuri and others paying their tributes to Shahid Chulhai.

बता दें कि मनहरा चौक पर गत वर्ष स्थापित शहीद चुल्हाय की प्रतिमा पर मंगलवार को माल्यार्पण व पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। शहीद चुल्हाय के स्मारक के निकट अवस्थित प्राथमिक विद्यालय मनहरा के परिसर में शहीद चुल्हाय के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया- उद्घाटनकर्ता पूर्व मंत्री एवं मधेपुरा विधान सभा के वर्तमान विधायक प्रो.चंद्रशेखर ने। अपने संबोधन में उन्होंने आसपास के ग्रामीणों, बच्चों एवं युवाओं से यही कहा कि शहीद चुल्हाय ने अपनी शहादत देकर हमें आजादी दिलाई परन्तु सरकारी हाथों से शहीदों के सपनों को चकनाचूर किया जा रहा है और अब भी लोग चुप हैं….. उन्हें गुस्सा क्यों नहीं आता है ?

मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में लोहिया, जयप्रकाश, रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, राम बहादुर सिंह (पंचगछिया), परमेश्वर कुंवर, कार्तिक प्रसाद सिंह, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल (सुखासन), मो.कुदरतउल्लाह सहित सभी क्रांतिकारियों की विस्तार से चर्चा करते हुए 26 जनवरी 1943 को आजादी के दीवाने चुल्हाय द्वारा मधेपुरा के ट्रेजरी बिल्डिंग पर तिरंगा फहराने से लेकर गोरों द्वारा पकड़े जाने व पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने तक की संवेदनायुक्त चर्चा की। कोसी के साहित्य में हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, डॉ.मधेपुरी एवं क्रांति गाथा के कवि डाॅ.जीपी शर्मा द्वारा शहीद चुल्हाय की विस्तृत चर्चा की गई है। डॉ.मधेपुरी ने क्रांतिगाथाा की इन पंक्तियों को सुना कर सबको भावुक कर दिया-

प्रखर ग्राम मनहरा-सुखासन फूलचन्द थे एक किसान।

जिनका पुत्र चुल्हाई यादव ने रखा धरती का मान।।

मधेपुरा में बीच सड़क पर सत्याग्रही युवक को मार।

गोरों ने सूरपुर पहुंचाया गई है अहिंसा सचमुच हार।।

कंठ-कंठ में आज चुल्हाई की उज्जवल गौरव गाथा।

इस शहीद ने किया कौशिकी अंचल का ऊंचा माथा।।

अंत में अपने संबोधन में डॉ.मधेपुरी ने मनहरा-सुखासन की त्रिमूर्ति बाबू कीर्ति नारायण मंडल को कोसी के मदन मोहन मालवीय, शहीद चुल्हाय को भगत सिंह एवं सुखासन के कमलेश्वरी प्रसाद मंडल को कबीर कह कर सम्मानित किया। साथ ही मधेपुरा में जो डॉ.मधेपुरी ने शहीद चुल्हाय के नाम-  शहीद चुल्हाय मार्ग, शहीद चुल्हाय उद्यान एवं शहीद पार्क बनवाया है उसकी जानकारी उपस्थित दर्शकों को दी और दो जगहों पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने की भी चर्चाएं की। इन घोषणाओं पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई।

समारोह को शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव एवं बाहर से आए अतिथि बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार यादव, राजकिशोर यादव, जनार्दन प्रसाद यादव, जगदीश प्रसाद यादव आदि ने भी संबोधित किया। नीतेश कुमार, अमित कुमार…….. व सारे युवाओं की टीम अंत तक लगे रहे। अध्यक्षीय संबोधन में बी एन मंडल वाणिज्य महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव ने समिति के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि आगामी वर्ष शहीद चुल्हाय की शताब्दी जन्मशती जयंती को यादगार जयंती के रूप में मनाने की तैयारी के लिए तैयार रहें। इसी के साथ धन्यवाद ज्ञापित करते हुए समापन की घोषणा कर दी गई।

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मुकेश अंबानी ग्लोबल थिंकर्स 2019 की सूची में शामिल

उद्योगपति मुकेश अंबानी के नाम एक गौरवपूर्ण उपलब्धि। उन्हें प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन पॉलिसी’ ने थिंकर्स 2019 की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया है। इस सूची में अलीबाबा के संस्थापक जैक मा, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस और आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टिन लेगार्ड जैसे नाम मौजूद हैं। गौरतलब है कि पत्रिका ने अपनी वेबसाइट पर 2019 की सूची के 100 नामों में से कुछ का ऐलान किया है। पूरी सूची 22 जनवरी को जारी की जाएगी।
बता दें कि सबसे धनी भारतीय मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक हैं और रिलायंस जिओ उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ही अनुषंगी है। ‘फॉरेन पॉलिसी’ ने उनके लिए कहा, “44.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ मुकेश अंबानी 2018 में जैक मा को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए। तेल, गैस और खुदरा क्षेत्र में वर्चस्व से उन्होंने यह संपत्ति अर्जित की है लेकिन उम्मीद है कि दूरसंचार क्षेत्र की कंपनी जिओ के जरिए वह भारत पर सबसे अधिक प्रभाव डालेंगे।”
पत्रिका ने आगे कहा, “जिओ की शुरुआत के बाद छह महीने तक सेल्यूलर डाटा और वॉयस सेवा की पेशकश कर उन्होंने 10 करोड़ से अधिक ग्राहक जोड़े और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में स्मार्टफोन इंटरनेट के जरिए क्रांति कर दी।” पत्रिका में कहा गया है कि अंबानी की योजना अगले चरण में अपने डिजिटल स्पेस का इस्तेमाल करते हुए सामग्री और जीवन-शैली से जुड़ी चीजें बेचना है और अंतत: गूगल और फेसबुक को टक्कर देनी है।
चलते-चलते बता दें कि 2019 में ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका के ग्लोबल थिंकर्स की सूची को 10 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए उसने सूची को 10 अलग-अलग श्रेणियों में बांटने का निश्चय किया है। मुकेश अंबानी को प्रौद्योगिकी से जुड़ी 10 शीर्ष शख्सियतों में स्थान दिया गया है।

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तो इस बात पर रामविलास का घेराव करेंगे तेजप्रताप ?

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम लिये बगैर उन्हें कथित रूप से अंगूठाछाप करार देने संबंधी केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बयान पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने उन्हें आड़े हाथों लिया और इस मामले में उनका घेराव करने की बात कही।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी सरकार के सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने के निर्णय को आरजेडी ने गलत करार दिया था, जिसके बाद पासवान ने शुक्रवार को राबड़ी देवी का नाम लिए बिना कथित रूप से कहा था कि बिहार में कोई भी अनपढ़ (अंगूठाछाप) मुख्यमंत्री बन जाता है। इस पर तेजप्रताप ने कहा, “रामविलासजी को इस तरह का अपशब्द एक महिला को लेकर बोलना शोभा नहीं देता।”
तेजप्रताप ने नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट के जरिए भी रामविलास पर प्रहार किया और कहा, ‘‘नारी जन्म देती है, ममता देती है और माफ भी कर देती है लेकिन इतिहास साक्षी है कि नारी का अपमान करने वाले बड़े-बड़े रावण और दुर्योधन भी नहीं बचे तो इन मौकापरस्त नेताओं की क्या औकात है।’’
बहरहाल, एक पुत्र के रूप में तेजप्रताप की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन क्या राबड़ी देवी अनपढ़ नहीं थीं? और क्या उनका मुख्यमंत्री बनना लोकतंत्र के साथ मजाक नहीं था? उसी लोकतंत्र के साथ जिसकी आरजोडी वाले इन दिनों दुहाई दे रहे हैं?

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चूड़ा-दही भोज के बहाने मीठी और मजबूत राजनीति

बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज के बहाने एनडीए ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया। गौरतलब है कि इस दिन एनडीए के तीनों घटक दलों के द्वारा चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह पिछले 21 वर्षों से मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही भोज देते आ रहे हैं और धीरे-धीरे यह पूरी पार्टी का आयोजन हो गया है। अब तो आलम यह है कि इस दिन भोज में दस हजार से भी ज्यादा लोग जुटते हैं। वहीं, लोजपा की ओर से उसके प्रदेश कार्यालय में चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है तो भाजपा की ओर से विधानपार्षद रजनीश कुमार भोज देते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन तीनों आयोजनों में शामिल होते हैं और स्वाभाविक तौर पर शुरुआत जदयू के भोज से करते हैं।

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोपहर लगभग एक बजे बशिष्ठ नारायण सिंह के हार्डिंग रोड स्थित आवास पहुँचे जहां बिहार के हर कोने से आए हजारों कार्यकर्ता और नेता उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके आगमन पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने सर्वप्रथम बुके से उनका स्वागत किया। नीतीश कुमार ने इस मौके पर केवल तिलकुट का स्वाद लिया। जदयू के इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह, विधानसभा अध्य़क्ष विजय चौधरी, विधान परिषद के उपाध्यक्ष हारून रशीद, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नित्यानंद राय, सांसद रामनाथ ठाकुर, कहकशां परवीन, कौशलेन्द्र कुमार, चिराग पासवान, राष्ट्रीय महासचिव व विधायक श्याम रजक, विधानपार्षद व पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, विधानपार्षद संजय गांधी, नीरज कुमार, रणवीर नंदन, विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी, मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार सिंह, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य व अनिल कुमार, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

लोजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित दही चूड़ा के भोज में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं एनडीए के अन्य नेताओं के साथ ही राज्यपाल लालजी टंडन भी शामिल हुए। लोजपा प्रमुख व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने वहां मुख्यमंत्री को गले लगाकर मकर संक्रांति की बधाई दी। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री पशुपति कुमार पारस एवं सांसद व लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान समेत पार्टी के तमाम नेता मौजूद रहे। उधर भाजपा के विधानपार्षद रजनीश कुमार के जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर भी चूड़ा-दही भोज का आयोजन हुआ जिसमें मुख्यमंत्री समेत कई नेता सम्मिलित हुए। मेजबान रजनीश कुमार ने बुके भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनन्दन किया। नीतीश कुमार तीनों आयोजनों में एक समान गर्मजोशी से शामिल हुए और बिहार व देश के सभी लोगों के लिए अपनी मंगलकामना व्यक्त की।

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भारत में हिन्दी के बाद उर्दू सबसे अधिक बोली जाती है

मधेपुरा के भूपेन्द्र स्मृति कला भवन में “फरोग-ए- उर्दू सेमिनार” का एक दिवसीय समारोह आयोजित किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन एनर्जेटिक डीएम नवदीप शुक्ला (IAS), आरक्षी अधीक्षक संजय कुमार, डीडीसी मुकेश कुमार, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिव कुमार शैव, डीईओ  उग्रेश प्रसाद मंडल, एनडीसी रजनीश कुमार, शौकत अली, मुर्तुजा अली के द्वारा सामूहिक रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यह सेमिनार उर्दू निदेशालय एवं जिला प्रशासन के बैनर तले रविवार को जिले के कोने-कोने से आए छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की भारी भीड़ की उपस्थिति में दिन भर चला।

डीएम नवदीप शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू हमारी तहजीब है। हम दिन-प्रतिदिन अपनी संस्कृति व मूल्यों को भूलते जा रहे हैं जबकि हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर लगे रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू हमारी साझी संस्कृति का हिस्सा है और उसे धर्म के आईने से कभी ना देखें। अंत में डीएम शुक्ला ने यही कहा कि हिन्दी व उर्दू भाषा के विकास से ही देश तरक्की करेगा।

इस अवसर पर जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी वरीय उप समाहर्ता अल्लामा मुख्तार ने कार्यक्रम संचालन के दौरान प्रथम वक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी  को आवाज दी। डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि भारत में उर्दू, हिन्दी के बाद, सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है जो किसी वर्ग विशेष की भाषा नहीं…… बल्कि आम आदमी की भाषा रही है। गंगा-यमुनी संस्कृति की तरह हिन्दी-उर्दू दोनों सगी बहने हैं। दोनों हिंदुस्तानी भाषा से भारत में ही जन्म ग्रहण की है। इन दोनों भाषाओं को एक साथ देखने पर ही हिंदुस्तान की परिकल्पना पूरी हो सकती है। जैसे कथाकार प्रेमचंद आरंभ में उर्दू में लिखते थे और अमीर खुसरो हिन्दी के लिए बहुत कुछ करते रहे….. रहीम और रसखान को हिन्दी जगत कभी नहीं भूलेगा।

यह भी बता दें कि जहाँ अपर समाहर्ता शिव कुमार शैव ने कहा कि हिन्दी पहले उर्दू के नाम से जानी जाती थी और उर्दू हिन्दी के नाम से…… वहीं डॉ.शांति यादव ने गजल की चंद पंक्तियां सुनाकर अपने संबोधन में यही कहा कि उर्दू रुमानियत व नजाकत वाली भाषा है। प्रो.गुलहसन, मो.शौकत अली, मुर्तुजा अली सहित सारे वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी-उर्दू गंगा-यमुनी संस्कृति की भाषा है जिसे धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सभी लोग उर्दू से नाता जोड़ें और इसे अपनाएं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिले के सभी प्रखंडों से आए छात्र-छात्राएं भाषण प्रतियोगिता में भाग लिए और बेहतर प्रदर्शन करने पर उन्हें आयोजक मंडल की ओर से पुरस्कार स्वरूप नकद राशि प्रदान किया गया। मोमेंटो व प्रमाण पत्र भी जिला प्रशासन की ओर से दिया गया। जिले के कोने-कोने से आए प्रतिभागियों की इतनी भीड़ थी कि कला भवन का हाल छोटा पड़ गया और कुछ छात्रों को उर्दू भाषा के विकास पर बोलने का अवसर चाहकर भी नहीं मिल पाया।

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बिहार में दो विश्व धरोहर हैं- नालंदा विश्वविद्यालय और बोधगया मंदिर

यूँ तो बिहार में विरासतों की भरमार है…. आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया द्वारा सूचीबद्ध 110 साइटें हैं बिहार में…. जिनमें से दो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है… वे दोनों हैं- बोधगया का महाबोधि मंदिर और नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावशेष। इन दोनों के अतिरिक्त बिहार में दर्जनों ऐसी साइटें हैं जिन्हें विश्व विरासत स्थलों में शामिल किया जा सकता है।

बता दें कि महाबोधि मंदिर 27 जून 2002 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में सूचीबद्ध किया गया था। जानिए कि विश्व धरोहर के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद से बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है…… क्योंकि महाबोधि मंदिर का प्राचीन स्वरूप अशोक कालीन माना जाता है जिसके जीर्णोद्धार के समय गर्भगृह में अशोक कालीन ईंटे मिली थी। कहा जाता है कि वर्तमान मंदिर चीनी यात्री ह्वेनसांग के भारत आगमन से पूर्व ही बन चुका था।

यह भी जानिए कि बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। विश्व धरोहर में शामिल होने वाला यह बिहार का दूसरा और भारत का 33वां धरोहर है। बता दें कि इसके विकास,सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेवारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार की है।

पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आसपास हुई…. जिसकी स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी। पाल शासकों ने इसे संरक्षण दिया था। 476 ई. में बिहार में ही जन्मे विश्व विख्यात खगोलविद् एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। इतना ही नहीं, जब संसार अज्ञानता के समंदर में भटक रहा था तब आर्यभट्ट का गणितीय विमल ज्ञान प्रकाश सात समंदर पार रोशनी बिखेरता हुआ पहुुँच गया था। आर्यभट्ट भी हमारा विश्व धरोहर ही है जिनके बाबत आइंस्टाइन ने टिप्पणी की है- “दुनिया आर्यभट्ट का आभारी है जिन्होंने संसार को गणितीय ज्ञान दिया जिसके बगैर कोई भी वैज्ञानिक खोज नामुमकिन होता।”

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मधेपुरा के कला भवन में सर्वोत्कृष्ट कलाकारों का चयन शुरू

मधेपुरा के भूपेन्द्र स्मृति कला भवन में बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग व जिला प्रशासन मधेपुरा के बैनर तले विभिन्न कलाओं….. यथा लोकगीत, लोकनृत्य व नाटक के साथ-साथ शास्त्रीय गीत एवं शास्त्रीय नृत्य आदि में केवल प्रथम स्थान प्राप्त कलाकारों की सूची 15 जनवरी तक विभाग को उपलब्ध कराने हेतु दो दिवसीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में भाग लेनेवाले प्रतियोगियों पर उम्र सीमा के बाबत कोई प्रतिबंध नहीं है।

बता दें कि जिला स्तर पर सर्वोत्कृष्ट कलाकारों को चिन्हित करने हेतु दो दिवसीय प्रतियोगिता का उद्घाटन बिहार सरकार के एससी-एसटी कैबिनेट मंत्री प्रो.(डॉ.) रमेश ऋषिदेव, समाज सेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिव कुमार शैव, डीडीसी मुकेश कुमार, एनडीसी रजनीश कुमार, डॉ.शांति यादव आदि द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उद्घोषक जयकृष्ण प्रसाद यादव, अरुण कुमार, ध्यानी यादव का सहयोग सराहनीय रहा।

जिला स्तरीय युवा उत्सव के उद्घाटन के बाद अपने सारगर्भित संबोधन में मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव ने कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए बिहार सरकार की उपलब्धियों एवं युवाओं के हितार्थ किए गए कार्यों की बुनियादी जानकारियां दी और खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर अपर समाहर्ता शिव कुमार शैव ने संगीत एवं संगीत के घरानों की विलक्षण व बारीक चर्चाओं केे माध्यम से श्रोताओं का दिल जीत लिया वहीं डॉ.मधेपुरी द्वारा भारतरत्न शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ के संगीत के प्रति समर्पण की चर्चा पर हाॅल तालियों से गूंज उठा। डॉ.शांति यादव के संबोधन के बाद जिला प्रशासन की ओर से डीडीसी मुकेश कुमार ने उद्घाटन सत्र के समापन पर संचालन, पर्यवेक्षण एवं निर्णायक मंडल के सदस्यों के साथ-साथ प्रतिभागियों को भी इस आयोजन को सफल बनाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

अगले सत्र में निर्णायक मंडल के सदस्यगण- वरीय उप समाहर्ता अल्लामा मुख्तार, अरुण कुमार बच्चन, रवि रंजन, रेखा यादव, गांधी कुमार मिस्त्री एवं शशिप्रभा जायसवाल द्वारा अपर समाहर्ता शिव कुमार शैव, डॉ.मधेपुरी एवं डॉ.शांति यादव के अनुसार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का चयन शुरू कर दिया गया।

जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम दिन लोक संगीत, लोक नृत्य में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। जहाँ शिवाली की प्रस्तुति पर दर्शक झूमने पर मजबूर दिखे वहीं सृजन दर्पण के कलाकारों की प्रस्तुति एवं विकास कुमार के निर्देशन की “बधैया समूह लोक नृत्य” में जमकर सराहना होती देखी गई। एक से बढ़कर उत्कृष्ट प्रदर्शन से गदगद हुए  संगीत एवं कला प्रेमी दर्शक। आगे दूसरे दिन शास्त्रीय गीत एवं शास्त्रीय नृत्य के साथ चयनित सभी विधाओं के सर्वोत्कृष्ट कलाकारों को सम्मानित करते हुए राज्यस्तर पर होने वाले आयोजन के लिए निर्णायक मंडली के सभी सदस्यों की स्वीकृति व सहमति के साथ सूची प्रेषित कर दी जाएगी।

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झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज की लालू की जमानत याचिका

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लगभग दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान लालू के वकील कपिल सिब्बल ने उनकी बीमारियों और उम्र का हवाला देते हुए जमानत की अपील की थी जिसका सीबीआई के वकील ने विरोध किया था।
लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि देवघर, चाईबासा एवं दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में उन्हें इससे पहले भी जमानत दी जा चुकी है, इसलिए उन्हें फिर से जमानत की सुविधा प्रदान की जाए। कपिल सिब्बल ने लालू प्रसाद यादव की बीमारियों से संबंधित सर्टिफिकेट भी पेश किए और कोर्ट को बताया कि लालू प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी और डिप्रेशन समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए आरजेडी सुप्रीमो की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी केस में 23 दिसंबर 2017 को दोषी करार देने के बाद से जेल में हैं। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें पहले रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया। कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए छह सप्ताह की जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें 30 अगस्त को सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
बहरहाल, लालू प्रसाद यादव को जमानत नहीं मिलने से आरजेडी खेमे में निराशा का माहौल है। उनके बाहर आने से न केवल पार्टी को मजबूती मिलती बल्कि महागठबंधन के प्रयासों को भी बल मिलता। उनकी अनुपस्थिति में तेजस्वी पार्टी की नैया कैसे पार लगाते हैं, यह देखने की बात होगी।

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पासवान को हवाई अड्डे पर नहीं मिला वीआईपी प्रोटोकॉल !

हवाई अड्डे पर वीआईपी प्रोटोकॉल खत्म होने को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और फिल्म अभिनेता व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की चर्चा अभी थमी भी न थी कि अब लोजपा प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान को मिलने वाली वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा समाप्त कर दिए जाने की खबर सामने आई है। दरअसल पासवान सोमवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन जयनारायण निषाद के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और उसी दिन शाम की फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। दिल्ली के लिए रवाना होने के दौरान उन्हें आम यात्री वाले गेट से हवाई अड्डे के भीतर दाखिल होते देखा गया।
गौरतलब है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा जिन वीआईपी लोगों को प्राप्त होती है, उनके हवाई अड्डे से निकलने का रास्ता आम यात्रियों से अलग होता है और उनके लिए वीआईपी लॉन्ज होता है जहां वे ठहरते हैं और विश्राम करते हैं। उन जगहों पर आम यात्री नहीं जा सकते हैं।
इस बाबत पूछे जाने पर पटना के जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डे के निदेशक का कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा उपलब्ध कराने और उसे समाप्त करने में पटना हवाई अड्डे की कोई भूमिका नहीं है। इस सबंध में ब्यूरो ऑफ सिविल एवियेशन सिक्यूरिटी सुझाव भेजता है। उन्होंने कहा कि पासवान के वीआईपी प्रोटोकॉल के नवीकरण को लेकर हमें कोई नया आदेश नहीं मिला है। उधर लोजपा प्रमुख का कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल समाप्त नहीं हुआ है और ये जल्द ही बहाल हो जाएगा।

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200 वर्ष पूर्व बनी पटना की पेंटिंग लंदन संग्रहालय की जान

विश्व का सबसे बड़ा म्यूजियम (संग्रहालय) लंदन में है जिसका नाम है- ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान पटना के कई कलाकारों की पेंटिंग्स भी लगाई गई है उस म्यूजियम में।

बता दें कि पटना में मुहर्रम के दृश्य पर पटना के ही हिन्दू चित्रकार सेवक राम द्वारा बनाई गई पेंटिंग आज भी उस लंदन संग्रहालय की जान है। दो सौ ग्यारह साल पहले बनी मुहर्रम पर निकाले गये ताजिया जुलूस की पेंटिंग इतनी खूबसूरत है कि वह आज लंदन स्थित विश्व के सबसे बड़े डेकोरेटिव आर्ट्स एंड डिजाइन संग्रहालय ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’ की जान बनी हुई है। मौके पर संसार के समस्त मुस्लिम देशों में बिहार की राजधानी पटना के उस हिन्दू कलाकार सेवकराम के मुहर्रम पर बनी पेंटिंग की जमकर चर्चाएं होती रहती हैं।

यह भी जानिए कि पटना में पटना सिटी स्थित दीवान मुहल्ला, लोदी कटरा और मच्छरहट्टा मुहल्ले में इस विद्या के माहिर कलाकार 18वीं शताब्दी के आरंभिक काल में हुआ करते थे। इसका विस्तार पटना, दानापुर व आरा तक था। शिवा लाल शिवा लाल की पेंटिंग्स भी ताजिए को लेकर चर्चित रही है।

आज के दिनों में जिस तरह ताजिये बनते हैं वही अंदाज 1807 में भी था। तब के इस पेंटिंग में बच्चों की मौजूदगी एवं सफेद कपड़े पहने बड़े लोगों की संख्या भी सर्वाधिक देखी जाती रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 17वीं शताब्दी में स्थापित लंदन स्थित विक्टोरिया म्यूजियम में तीस लाख से भी अधिक प्रदर्श हैं जो मुख्य रूप से डेकोरेटिव आर्ट्स व डिजाइन से संबंधित हैं। पहले ताजिये के जुलूस में हिन्दुओं की सहभागिता सर्वाधिक हुआ करती जिसमें कमी होती दिखने लगी है। तब के दिनों में राजा की सहभागिता भी हाथी पर चढ़कर ताजिए के पहलाम वाले जुलूस में देखी जाती थी….।

 

 

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