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बीमार जेटली का हाल जानने दिल्ली पहुँचे नीतीश

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली गंभीर रूप से बीमार हैं और 9 अगस्त से दिल्ली स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा है। खबरों के मुताबिक उनकी स्थिति लगातार चिन्ताजनक बनी हुई है। शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें देखने दिल्ली पहुँचे और उनका हालचाल लेकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
नीतीश कुमार काफी देर तक एम्स में रुके। उन्होंने वहां डॉक्टरों से भी बात की। बताया जाता है कि शनिवार को जेटली जी को डॉक्टरों ने वेंटिलेटर से हटाकर ईसीएमओ (एक्सट्रा कॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजिनेशन) पर शिफ्ट कर दिया है। ईसीएमओ पर मरीज को तभी रखा जाता है जब दिल और फेफड़े ठीक से काम नहीं करते और वेंटीलेटर का भी फायदा नहीं होता। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाई जाती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अरुण जेटली से बेहद आत्मीय संबंध रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद अरुण जेटली भाजपा के उन गिनेचुने नेताओं में रहे हैं जिनसे नीतीश कुमार की काफी निकटता रही है।
चलते-चलते बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक भोजपुर और बिहटा जाने वाले थे जहाँ उन्हें कई योजनाओं का शिलान्यास करना था। लेकिन अरुण जेटली की नाजुक हालत देख उन्होंने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए और दिल्ली जाने का फैसला ले लिया।

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स्वतंत्रता दिवस के दिन 11 पौधे लगाकर पर्यावरण सुरक्षा का दिया संदेश डॉ.मधेपुरी ने

दैनिक भास्कर की पहल यानि “एक पेड़ एक जिंदगी” वाले अभियान से जुड़कर ‘श्रृंगी ऋषि सेवा मिशन’ के कार्यकर्ताओं ने अगले 1 महीने में जिले के विभिन्न भागों में 500 पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

बता दें कि 15 अगस्त की शाम को सबैला के डीएल पब्लिक स्कूल में इस सर्वाधिक प्रशंसनीय कार्यक्रम का उद्घाटन बीएन मंडल विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक व कुलसचिव रह चुके डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने किया और उन्होंने 11 पौधे लगाकर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया तथा पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी सभी शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों को दिलाया। इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यह कार्यक्रम समाज में रह रहे पर्यावरण प्रेमियों के लिए अपनी जिम्मेदारी का अहसास करने जैसा है।

डॉ.मधेपुरी ने एक पेड़ की उपयोगिता गिनाते हुए बच्चों से कहा कि एक सामान्य पेड़ जहाँ प्रतिवर्ष 20 टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखता है वहीं वह पेड़ लगभग 20 किलो धूल को भी सोख लेता है। इसके अलावा वही पेड़ 80 किलो ग्राम पारा, लिथियम, लेड आदि जैसी जहरीली धातुओं के मिश्रण को सोखने की क्षमता रखता है। यहाँ तक कि वह शोर/ध्वनि को भी सोख लेता है। डॉ.मधेपुरी ने अभिभावकों से कहा कि घर के पास 10 पेड़ हो तो मानसिक तनाव व अवसाद तो घटती ही है….. बल्कि आसपास रहने वालों का जीवन लगभग 7 साल तक बढ़ जाता है।

डीएलपी स्कूल के डायरेक्टर एलएन यादव ने जहाँ पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जिम्मेदारी के अभिन्न अंग बनाने की नसीहत दी वहीं श्रृंगी ऋषि सेवा मिशन के संस्थापक भास्कर कुमार निखिल ने अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण और प्रकृति को पूजनीय माना गया है। श्री भास्कर ने उपस्थित जनों से कहा कि आइए अपने-अपने जन्मदिन या परिवार-समाज के अन्य किसी भी शुभ अवसर पर पौधरोपण जरूर करें और देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाएं।

मौके पर उप-प्राचार्य अखिलेश कुमार, व्यवस्थापक अनुज सिंह, शिक्षकगण रमण कुमार , अभिषेक कुमार, मालिक झा, रंजीत कुमार सहित सत्यम, शिवम, विदुर, दीनबंधु , तेजस्वी, आयुष, मुन्ना आदि उपस्थित थे।

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स्वतंत्र भारत में चौथी बार 15 अगस्त को ध्वजोत्तोलन और रक्षाबंधन एक साथ

वर्ष 1947 के 15 अगस्त यानी आजादी के बाद यह चौथी दफा है जब आजादी के जश्न के साथ-साथ संपूर्ण देश के युवाओं द्वारा रक्षाबंधन का त्योहार सर्वाधिक उमंग व उत्साह से मनाया गया है। दोनों त्योहार एक साथ मिलकर अभूतपूर्व एवं अद्वितीय रहा।

यह भी जानिए कि प्रत्येक 19 वर्षों के बाद ही यह सुखद संयोग आता है। आजाद भारत में अब तक 4 बार यह अवसर आया है।

यह भी बता दें कि वर्ष 1905 में बंगाल के पृथक्करण के खिलाफ रवीन्द्र नाथ टैगोर से लेकर…. रास बिहारी लाल मंडल आदि ने “राखी महोत्सव” शुरू किया था। उन दिनों रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं रह गया था बल्कि एकीकरण के लिए हिन्दू और मुस्लिम एक दूसरे को राखी बांध रहे थे… तब यह रक्षाबंधन का पर्व केवल एक दिन का नहीं बल्कि दोनों समुदायों के बीच महीना भर चलता रहा था…. तभी तो 1911 में विवश होकर अंग्रेजों को बंगाल का विलय करना पड़ा।

और इस बार गुरुवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ-साथ रक्षाबंधन और जश्न-ए-आजादी का पर्व एक साथ हो गया- जहाँ एक देश, एक झंडा, एक विधान, एक संविधान… चारो तरफ एकीकरण ही एकीकरण…  चतुर्दिक शांति और सद्भाव का वातावरण ! कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक इस बार का 73वां स्वतंत्रता दिवस नए किस्म से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मनाया जा रहा है- पहाड़ से लेकर पोखर तक… सरहद से लेकर समंदर तक…. जहाँ भी देखिए… जिधर भी देखिए… चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा।

यह भी कि एक ओर सियाचिन की बर्फीली ऊँचाई से भी ऊपर आसमान के सीने पर लहराता हुआ दिखता है तिरंगा….  वहीं दूसरी ओर देश की शान बनकर फहरता है तिरंगा। कहीं देशवासियों का अरमान बना रहा तिरंगा…. और कहीं 360 फीट के पोल पर फहरता रहा तिरंगा…… तो कहीं लहराता रहा 60 फीट चौड़ा और 90 फीट लंबा रेशमी तिरंगा…. । दिल्ली के लाल किले से लेकर कश्मीर के लाल चौक तक पी वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया वही तिरंगा इस बार शान से लहराया।

चलते-चलते यह भी कि इस बार के 73वें स्वतंत्रता दिवस समारोह पर मधेपुरा जिले के युवाओं ने खूब लहराया तिरंगा। एक ओर जहाँ बीएन मंडल स्टेडियम में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला ने और बीएन मंडल विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ अवध किशोर राय ने तिरंगे को सलामी दी वहीं दूसरी ओर बीएन मंडल चौक पर एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में राष्ट्रीय ध्वज को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने सलामी दी तथा याद किया उन वीर सपूतों को जिनकी शहादत के कारण आज हम आजाद हैं। संपूर्ण राष्ट्र बापू सहित उनके सेनानियों को नमन करता रहा…. उनके ‘अमर रहे’ के नारे लगाता रहा….. और ‘भारत माता की जय’ करता रहा….. !!

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15 अगस्त को सूबे की सरकार ने लिया संकल्प : दो लाख कुओं के होंगे कायाकल्प

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्य में 2 लाख कुओं के जीर्णोद्धार कार्य को राज्य सरकार ने अपने कार्य सूची में शामिल किया है। मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि सूबे में ढ़ाई लाख कुओं की पहचान की गई है जिसमें लगभग 2 लाख सार्वजनिक उपयोग में आने वाले कुएं  हैं, शेष करीब 50 हजार कुएं निजी उपयोग वाले हैं।

बता दें कि इन 2 लाख कुओं के कायाकल्प को लेकर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया है। राज्य सरकार को प्राप्त सूची पीएचईडी को दे दी गई है। सार्वजनिक उपयोग वाले कुओं को चिन्हित कर उनका कायाकल्प पीएचईडी करेगा जिसकी शुरुआत भी पीएचईडी द्वारा कर दी गई है। कुओं को जाली से ढका भी जा रहा है।

सूबे में हरित आवरण करने हेतु मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17% का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत प्रमुख कार्यों में सबसे प्रमुख है- पौधे तैयार करने की क्षमता बढ़ाना। इस हेतु कुछ नई पौधशालाएं खोली जाएंगी। वन विभाग की खाली जमीन पर भी पौध तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा। फिलवक्त सभी सरकारी नर्सरीयों की क्षमता प्रतिवर्ष 1 करोड़ 60 लाख पौधे तैयार करने की है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिस रफ्तार से आबादी का विस्तार हो रहा है, उसके अनुपात में हरियाली कम है। सूबे की सरकार ने इस अनुपात को छूने के लिए हर साल 4 करोड़ पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। तत्काल बिहार में 180 सरकारी पौधशालाएं हैं। फिलहाल 1 करोड़ 60 लाख की क्षमता है जिसे 4 करोड़ करने की तैयारी की जानी है।

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सेनानियों एवं शहीदों को जीवंत रखने में लगे हैं डॉ.मधेपुरी

सेनानियों एवं शहीदों को जीवंत रखने में वर्षों से लगे हैं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी। प्रखर स्वतंत्रता सेनानी भूपेन्द्र नारायण मंडल को जीवित करने के लिए उन्होंने 1975 ई. में भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना की और वर्तमान भूपेन्द्र चौक (कॉलेज चौक) पर जन सहयोग से उनकी प्रतिमा लगाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री के हाथों प्रतिमा का अनावरण कराया। दिनांक 4 फरवरी 1991 को प्रतिमा अनावरण के बाद भूपेन्द्र नारायण मंडल के नाम विश्वविद्यालय की घोषणा को लेकर संयोजक डॉ.मधेपुरी की मांग को उसी दिन एक महती जनसभा में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने स्वीकृति दे दी।

भूपेन्द्र बाबू से पूर्व के स्वतंत्रता सेनानी  बाबू रास बिहारी लाल मंडल एवं क्रांतिवीर शिवनंदन प्रसाद मंडल को जीवंत बनाए रखने हेतु डॉ.मधेपुरी ने अपने छात्र जीवन में ही मन बना लिया था कि आगे आने वाले दिनों में उनकी प्रतिमाएं उनके नाम वाले विद्यालय में अवश्य लगेेंगी क्योंकि डॉ.मधेपुरी दोनों स्कूल के छात्र रहे हैं। अक्षर का क्षय नहीं होता इसलिए डॉ.मधेपुरी ने इन तीनों मनीषियों की जीवनी भी लिखी, जो भटक रहे समाज को राह दिखाने का काम करेगी। इन तीनों स्वतंत्रता सेनानियों पर लिखी गई पुस्तकें हैं- 1. रास बिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच 2. इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल 3. बूंद बूंद सचः एक सागर का (भूपेद्र बाबू की जीवनी)

जहाँ तक शहीदों को जीवंत रखने की बात आती है उसे बड़ी सहजता से पूरा किया है डॉ.मधेपुरी ने… वर्ष 1943 में मात्र 23 वर्ष की उम्र में शहीद हुए चुल्हाय यादव के नाम पर डाक बंगला रोड का नाम जिला परिषद व नगर परिषद के सहयोग से डॉ.मधेपुरी ने “शहीद चुल्हाय मार्ग” नामित कराया और हाल में उसी रोड के पश्चिमी बाईपास चौक को ‘शहीद चुल्हाय चौक’ नाम दिया है।

इसी जिले के किशुनगंज अनुमंडल के शहीद बाजा साह एवं जिले के अन्य शहीदों- शहीद चुल्हाय यादव, शहीद सदानंद, शहीद प्रमोद कुमार (फुलकाहा), शहीद प्रमोद कुमार (चामगढ़), शहीद शंकर रजक आदि को जीवंत रखने के लिए डॉ.मधेपुरी ने स्थानीय गांधी चिल्ड्रन पार्क के अंदर तत्कालीन डीएम मो.सोहैल (IAS) के कार्यकाल में उनके ही द्वारा शहीद पार्क का उद्घाटन कराया तथा एक अनाम पार्क को भी डॉ.मधेपुरी ने जिला प्रशासन व नगर परिषद के सहयोग से ‘डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क’ नाम घोषित कराया।

हाल-फिलहाल डॉ.मधेपुरी ने सहरसा में 29 अगस्त 1942 को शहीद हुए 6 शहीदों में एक भोला ठाकुर की सौ वर्षीया धर्मपत्नी श्रीमती बेचनी देवी से मिलने प्राचार्य डॉ.विनय कुमार चौधरी के साथ चैनपुर गाँव गए। डॉ.मधेपुरी ने अपनी ‘आजादी’ शीर्षक वाली पूरी कविता का पाठ कर सबों की आँखें नम कर दी। कुछ देर बाद आशीष प्राप्त किया और जितना बन पड़ा उनकी परेशानियों को बाँटे और आज तक उस शहीद माता की सेवा में प्रति माह एक सम्मानजनक राशि भेज रहे हैं डॉ.मधेपुरी……

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बिहार कैबिनेट ने लगाई 19 एजेंडों पर मुहर

नीतीश सरकार ने नई बालू खनन नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति के प्रभावी होने पर किसी एक व्यक्ति को अधिकतम दो घाट या फिर 200 हेक्टेयर तक बालू निकासी का ठेका दिया जा सकेगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले के साथ ही कुल 19 एजेंडे मंजूर किए गए। इनमें सिपाही बहाली में खिलाड़ी के लिए एक प्रतिशत पद आरक्षित करने का फैसला भी शामिल है।

गौरतलब है कि नदियों में सही प्रकार से बालू खनन हो इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कुछ दिशा निर्देश दिए थे। जिन्हें प्रभावी बनाने के लिए बिहार सरकार ने बालू खनन नीति 2019 को मंजूरी दी है। पूर्व से चली आ रही व्यवस्था में एक व्यक्ति को कई घाट की बंदोबस्ती दे दी जाती थी। इन घाटों से संबंधित व्यक्ति कितने बालू की निकासी करेगा इसके कोई नियम नहीं थे। नई नीति के प्रभावी होने पर एक बंदोबस्तधारी को अधिकतम दो घाट या फिर दो सौ हेक्टेयर तक बालू निकासी का ठेका दिया जा सकेगा। यही नहीं, पूर्व में प्रावधान था कि जिला को एक इकाई मानकर नदी घाटों की बंदोबस्ती होती थी। नई नीति में प्रत्येक नदी को एक इकाई मान कर उनकी बंदोबस्ती होगी।

कैबिनेट के एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के तहत सिपाही बहाली में खिलाडिय़ों के लिए एक प्रतिशत पद आरक्षित कर दिए गए हैं। अब राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को उनकी खेल प्रतिभा के आधार पर सिपाही की बहाली में मौका दिया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में करीब दस हजार सिपाहियों की बहाली होनी है। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में खिलाडिय़ों को सिपाही बनने का मौका प्राप्त होगा। मंत्रिमंडल ने बिहार पुलिस चालक संवर्ग नियमावली 2019 के प्रारूप को भी मंजूरी दी है।

अन्य फैसलों की बात करें तो मंत्रिमंडल ने खान एवं भू-तत्व विभाग के एक प्रस्ताव पर विभाग में अलग-अलग श्रेणी के कुल 179 पद सृजन की मंजूरी दी है। नए सृजित पदों में अपर निदेशक का एक, उपनिदेशक के तीन, सहायक निदेशक के चार, खनिज विकास पदाधिकारी के 21, निरीक्षक के 66, सर्वेक्षक के तीन, प्रारूपक के दो, उच्च वर्गीय लिपिक के 23 और निम्नवर्गीय लिपिक के 56 पद शामिल हैं। एक अन्य फैसले के तहत मनेर के आर्सेनिक प्रभावित गांवों को पाइप से जलापूर्ति योजना के लिए 108 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। पूर्व में इसके लिए 75.54 करोड़ रुपये की योजना मंजूर किए गए थे, जिसमें अब संशोधन कर दिया गया है।

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तुलसी का रामराज्य गांधी के लोकतंत्र का ही परिमार्जित रूप है- डॉ.रवि

मधेपुरा के कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में गोस्वामी तुलसीदास की भव्य जयंती सम्मेलन के संरक्षक डॉ.रामेन्द्र कुमार यादव रवि, अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, उप सचिव श्यामल कुमार सुमित्र सहित शहर के जाने-माने साहित्यानुरागियों की उपस्थिति में श्रद्धापूर्वक मनाई गई | इस अवसर पर स्थानीय उच्च विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के बीच “रामचरितमानस में धार्मिक सद्भाव” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का एवं “रामचरितमानस में राम राज्य और गांधी दर्शन” पर व्याख्यान का आयोजन भी किया गया |

आशीर्वचन देते हुए पूर्व सांसद व संस्थापक कुलपति डॉ.आर.के.यादव रवि ने कहा कि वर्तमान समय में रामराज्य का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट शासन के प्रतीक के रूप में किया जाता है | उन्होंने कहा कि रामराज्य लोकतंत्र का परिमार्जित रूप है तथा मेरी चाहत भी है कि भारतीय लोकतंत्र तुलसी के रामराज्य का अनुगामी बना रहे | वहीं अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर रामराज्य की स्थापना महात्मा गांधी की चाह थी….. गांधी ने जहाँ आजादी के बाद ग्राम स्वराज के रूप में रामराज्य की कल्पना की वहीं तुलसी ने मानस में रामराज्य पर पर्याप्त प्रकाश डाला है |

Sanrakshak Dr.Ravi, Adhyaksh Shalabh Jee, Sachiv Dr.Madhepuri and others with winner participants.
Sanrakshak Dr.Ravi, Adhyaksh Shalabh Jee, Sachiv Dr.Madhepuri and others with winner participants.

सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बच्चों से यही कहा कि तुलसी के रामराज में ना तो कोई दरिद्र होगा और ना ही दीन-दुखी | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि संपूर्ण विश्व में इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मानव-संघर्ष तीव्र से तीव्रतर होता जा रहा है | उन्होंने यह भी कहा कि तुलसी का रामचरितमानस भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) के सिद्धांतों को समाहित कर समाज की सेवा में लगा है |

आरंभ में मुख्यवक्ता के रूप में विद्वान प्राध्यापक डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप ने तुलसी के रामराज्य और गाँधी दर्शन पर विस्तार से अपनी बातों को रखते हुए यही कहा कि जिस समय भारत की भूमि आक्रमणकारियों एवं विदेशी शासकों के दमन से त्रस्त थी उस समय तुलसीदास ने भारतीय संस्कृति की रक्षा करते हुए साहित्य को राजनीति के आगे जलनेवाली मशाल कहा |

अंत में पूर्व प्रति कुलपति डॉ.के.के.मंडल ने कहा कि इन दिनों भारतवर्ष में भावनात्मक एकता की कमी महसूस की जा रही है जिसके कारण तुलसी की रामचरितमानस में गाँधी के रामराज्य की प्रासंगिकता बनी हुई है |

चलते-चलते यह भी कि स्थानीय उच्च विद्यालयों के छात्रों के बीच “रामचरितमानस में धार्मिक सद्भाव” पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार टी.पी. कॉलेजिएट के रितिक कुमार रोशन, दूसरा केशव कन्या की सरस्वती कुमारी, तीसरा रासबिहारी उच्च विद्यालय के गौतम कुमार एवं सांत्वना पुरस्कार तुलसी पब्लिक स्कूल की आस्था प्रिया को दिया गया | मौके पर प्राचार्य डॉ.सुरेश कुमार भूषण, डॉ.विभा कुमारी, उर्वशी कुमारी, दशरथ प्रसाद सिंह, रघुनाथ यादव, शिवजी साह, डॉ.आलोक कुमार, उल्लास मुखर्जी, डॉ.अर्जुन कुमार, राकेश कुमार द्विजराज, गोपाल मुखिया, तुलसी पब्लिक के प्राचार्य डॉ.हरिनंदन यादव एवं निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र आदि मौजूद थे |

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जल-जीवन-हरियाली अभियान को गति देगा जदयू

इस बार 15 अगस्त से बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) एक विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। इस दिन झंडोत्तोलन के बाद जदयू के सभी सक्रिय व सामान्य सदस्य एवं पार्टी में आस्था रखनेवाले सभी व्यक्ति एक-एक पेड़ लगाएंगे तथा अपनी जमीन पर कम-से-कम पांच पेड़ लगाने एवं पर्यावरण व जल संरक्षण का संकल्प लेंगे।
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने 9 अगस्त को पृथ्वी दिवस के अवसर पर पटना के ज्ञान भवन में जल-जीवन-हरियाली अभियान के जागरुकता कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की है। प्रारंभ से ही पर्यावरण को लेकर जदयू की प्रतिबद्धता रही है। जदयू देश की पहली पार्टी है जिसने पूर्व में भी वृक्षारोपण को पार्टी के सदस्यता अभियान से जोड़ा है और जदयू का सदस्य बनने के लिए इसे अनिवार्य किया है।
इसी आलोक में बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह के निर्देशानुसार 15 अगस्त को जदयू के बूथ, पंचायत, प्रखंड, जिला एवं प्रदेश स्तर के सभी नेता व कार्यकर्ता झंडोत्तोलन के उपरांत एक-एक पेड़ लगाएंगे। इस दिन जदयू के सभी सदस्य संकल्प पत्र भी पढ़ेंगे जिसके तहत हर सदस्य अपनी जमीन पर कम-से-कम पांच पेड़ लगाने तथा जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेंगे।
सामाजिक सरोकार को लेकर जदयू और इसके नेता नीतीश कुमार की अलग पहचान रही है। पर्यावरण को लेकर नीतीश कुमार सदैव अत्यंत संवेदनशील रहे हैं। वैसे भी देखा जाय तो जल व पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जिसे हमने नहीं समझा तो हमारी आने वाली पीढ़ी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आज जरूरत इस बात की है कि हम सभी पर्यावरण के सजग प्रहरी के तौर पर काम करें। बहरहाल, जदयू को उसकी सार्थक पहल के लिए बधाई और साधुवाद।

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66वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’ और ‘उरी’ की धूम

66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को कर दी गई। इसमें फीचर फिल्म की श्रेणी में 31 और नॉन फीचर फिल्म की श्रेणी में 23 पुरस्कार दिए गए। इस बार के पुरस्कार समारोह में हिन्दी फिल्मों ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’, ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘पद्मावत’ और ‘पैडमैन’ की धूम रही। आयुष्मान खुराना और तब्बू की फिल्म ‘अंधाधुन’ को इस साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। आयुष्मान की ही ‘बधाई हो’ ने सर्वश्रेष्ठ चर्चित फिल्म का पुरस्कार जीता। उधर ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विक्की कौशल), सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (आदित्य धर), सर्वश्रेष्ठ साउंड डिजाइन और बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का पुरस्कार अपने नाम किया। वहीं दर्शकों द्वारा खूब सराही गई अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘पैडमैन’ ने अपेक्षा के अनुरूप सामाजिक विषयों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता।
आयुष्मान खुराना के लिए इस बार के पुरस्कारों में दोहरी खुशी छिपी थी। उनकी फिल्म ‘अंधाधुन’ ने केवल सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म का ही पुरस्कार नहीं जीता बल्कि इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिला। उन्हें यह पुरस्कार ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के विक्की कौशल के साथ संयुक्त रूप से मिला। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दक्षिण भारतीय अभिनेत्री कीर्ति सुरेश को तेलुगु फिल्म ‘महानती’ के लिए दिया गया। सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मराठी फिल्म ‘चुम्बक’ के लिए स्वानंद किरकिरे को, जबकि सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार फिल्म हिन्दी फिल्म ‘बधाई हो’ के लिए सुरेखा सीकरी को मिला।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक संजय लीला भंसाली को 66वें फिल्म पुरस्कार से विशेष उपलब्धि हासिल हुई। इस बार उन्होंने अपनी फिल्म ‘पद्मावत’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता। वहीं फिल्म के गाने ‘घूमर’ के लिए कृति महेश और ज्योति तोमर को सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर चुना गया। बेस्ट प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार भी ‘पद्मावत’ के नाम रहा। अरिजीत सिंह ने इस फिल्म के गाने ‘बिन्ते दिल’ के लिए यह पुरस्कार जीता।
अन्य पुरस्कारों में बेस्ट एक्शन डायरेक्टर का पुरस्कार कन्नड़ फिल्म ‘केजीएफ’ के लिए प्रशांत नील ने हासिल किया। उधर बेस्ट फिल्म क्रिटिक का पुरस्कार ब्लेस जॉनी और अनंत विजय को मिला। क्षेत्रीय फिल्मों की बात करें तो ‘बारम’ को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म, ‘महानती’ को सर्वश्रेष्ठ तेलुगु फिल्म, ‘एक जे छीलो राजा’ को सर्वश्रेष्ठ बंगला फिल्म, ‘हरजीता’ को सर्वश्रेष्ठ पंजाबी फिल्म, ‘हामिद’ को सर्वश्रेष्ठ उर्दू फिल्म, ‘रेवा’ को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म, ‘भोंगा’ को सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म और ‘टर्टल’ को सर्वश्रेष्ठ राजस्थानी फिल्म का पुरस्कार मिला। उत्तराखंड ने मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का पुरस्कार जीता।
चलते-चलते बता दें कि इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल अप्रैल में होती है, लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव की वजह से पुरस्कार की घोषणा देर से हुई।

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रतन चन्द द्वार का उद्घाटन और कीर्ति नारायण मंडल प्रतिमा का अनावरण किया कुलपति ने

सम्पूर्ण कोसी क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने में कीर्ति नारायण मंडल का अहम योगदान है जिसे आनेवाला समय सदा याद करेगा | विश्व इतिहास में कीर्ति बाबू जैसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता | उनका योगदान पंडित मदन मोहन मालवीय से भी बड़ा है | कीर्ति बाबू बिहार के नेल्सन मंडेला थे……. ये बातें 7 अगस्त (बुधवार) को टीपी कॉलेज के विशाल प्रशाल में उनके 103वें जन्मोत्सव समारोह के अवसर पर उद्घाटनकर्ता के रूप में बीएन मंडल विश्वविद्यालय के विद्वान कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने कही |

बता दें कि इससे पहले कुलपति ने सर्वप्रथम संस्थापक प्राचार्य के नाम वाले ‘रतन चन्द द्वार’ का उद्घाटन व अनावरण किया। स्मार्ट क्लास व आईक्यूए कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कीर्ति विज्ञान परिसर में ‘कीर्ति बाबू की प्रतिमा’ का अनावरण किया। इस दरमियान सजावट और स्वागत की भरपूर व्यवस्था….. दोनों तरफ एनसीसी छात्र-छात्राओं की कतारें…… तथा पुष्प पंखुड़ियों की फुहारें…. और उत्साह-उमंग में डूबे प्राचार्य डॉ.के.पी.यादव, सिंडीकेट सदस्य डॉ.पी.एन.यादव और समाजसेवी डॉ.बीएन यादव मधेपुरी सहित प्रति कुलपति डॉ.फारुख अली एवं उनकी पूरी टीम जिसे देख कर ही तो कुलपति ने जहाँ अपने संबोधन में यहाँ तक कह दिया कि टीपी कॉलेज NAAC द्वारा ग्रेड ‘A’ प्राप्त करने की सारी शर्तों को पूरा करता है, वहीं डॉ.मधेपुरी द्वारा अपने संबोधन में प्रधानाचार्य  डॉ.केपी यादव से यही कहते हुए सुने जाते रहे कि मातृपक्ष (पार्वती साइंस कॉलेज) को तो आपने अपने कार्यकाल में NAAC दिला दिया अब पितृपक्ष (ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय) को देखिए….. आगे कुलपति डॉ.राय की इस उद्घोषणा पर सभा भवन देर तक तालियों की अनुगूँज से गूंजता रहा।

टीपी कॉलेज के सभा भवन में उद्घाटनकर्ता डॉ.ए.के.राय सहित अतिथियों- प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली, टीएमबी के पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल, श्रेष्ठतम प्राचार्य डॉ.केएन ठाकुर, कुलसचिव डॉ.कपिल देव प्रसाद, सिंडीकेट सदस्य डॉ.परमानंद यादव व डॉ.जवाहर पासवान, डीएसडब्ल्यू शिवमुनि यादव, डीन मेडिसिन डॉ.अशोक कुमार यादव एवं अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य डॉ.केपी यादव आदि का प्रो.नेहा की टीम द्वारा स्वागत गान तथा मंचसंचालक डॉ.उदय कृष्ण की उद्घोषणा के साथ बुके व अंगवस्त्रम आदि से भरपूर स्वागत किया गया।

जहाँ प्रति कुलपति डॉ.फारूक अली ने अपने संबोधन में कहा कि कीर्ति बाबू का सोच बहुत बड़ा था इसीलिए हम सभी उनकी जिंदगी के बाद भी उनका गुण गा रहे हैं वहीं सारे अतिथियों एवं वरिष्ठ प्राध्यापकों व प्राचार्यों प्रो.सच्चीदानंद यादव, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.अशोक कुमार, डॉ.सुधांशु शेखर आदि ने एक स्वर से यही कहा कि शिक्षा जगत के विश्वकर्मा कीर्ति नारायण मंडल का योगदान अविस्मरणीय है…… उनकी गाथा अमर है….. और मधेपुरा ही नहीं कोसी वासी भी उनके ऋणी हैं।

इस अवसर पर जहाँ चिकित्सा संकायाध्यक्ष डॉ.अशोक कुमार यादव (कीर्ति बाबू के भतीजे) ने कहा कि मधेपुरा संस्कार व संस्कृति की धरती है। वहीं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा….. कुलपति महोदय ! आपने जिस रतन चन्द द्वार का चंद मिनट पूर्व उद्घाटन किया है उस रतन बाबू से मिलने इसी गेट से पैदल चल कर आते थे- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, गोपाल सिंह नेपाली, कलक्टर सिंह केशरी, जानकी बल्लभ शास्त्री, जनार्दन झा द्विज…… आदि-आदि कवि….. लेखक….. विद्वान। और आगे डॉ.मधेपुरी ने यहीी कह  कि एक पंक्ति में कीर्ति बाबू को जानने का अर्थ होता है- बुद्ध, नानक और कबीर को जानना यानि व्यक्तिगत कुछ नहीं रखना…… सब कुछ जनहित में समर्पित कर देना।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया डॉ.के.के.मंडल ने। अध्यक्षीय वक्तव्य के साथ प्रधानाचार्य डॉ.केपी यादव ने कहा कि कीर्ति बाबू की राह पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनका योगदान सदा अविस्मरणीय रहेगा। उनके गाँव से आये लोगों के साथ-साथ कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, सीनेटर रंजन यादव, काउंसिल मेंबर सोनू यादव, डॉ.सुभाष प्रसाद सिंह आदि सबों धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की प्रधानाचार्य ने।

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