All posts by Admin

इस तरह कलक्टर आशीष सक्सेना बने उच्च कोटि के समाज सुधारक

वर्तमान में आशीष सक्सेना (IAS) बतौर अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन व विकास संचनालय, भोपाल (मध्य प्रदेश) में कार्यरत हैं | मध्यप्रदेश के झाबुआ में दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने वाले तत्कालीन कलक्टर आशीष सक्सेना कुशल प्रशासक ही नहीं सर्वाधिक संवेदनशील हृदय के व्यक्ति हैं |

बता दें कि झाबुआ क्षेत्र में ‘वधू मूल्य प्रथा’ का चलन जोरों पर था  | वधू मूल्य प्रथा में होता यही है कि वर पक्ष लड़की के पिता को अच्छी खासी राशि देता है और लड़की के पिता राशि के लालच में कम उम्र में ही बेटी की शादी तय कर देता है | वर्षों पुरानी इस कुरीति से झाबुआ का समाज ग्रसित होता चला आ रहा था |

कलेक्टर आशीष बताते हैं कि झाबुआ की एक 13 वर्षीय रेखा नाम की आदिवासी लड़की की पीड़ा ने उनके संवेदनशील हृदय को इस कदर परेशान कर दिया कि उन्होंने अपने 28 महीने (सितंबर 2016 से दिसंबर 2018) तक के कार्यकाल में इस दहेज दापा के कलंक से हजारों-हजार बालिकाओं को मुक्ति दिलाने का सराहनीय काम कर दिखाया |

जानिए कि यह सब हो कैसे गया ? वह 13 वर्षीय रेखा भूरिया जब तमिलनाडु में आयोजित “राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता” में पदक जीतकर लौटी और अपने प्रशिक्षक के साथ वह कलेक्टर आशीष सक्सेना से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंची तो सक्सेना ने रेखा से उसके भविष्य के बारे में कुछ बातें की और उसी दरमियान आशीष ने जब यह पूछा कि बड़ी होकर तुम क्या बनना चाहती हो ….. यह सुनते ही रेखा की आंखें डबडबा गईं |

खामोशी को तोड़ते हुए रेखा के प्रशिक्षक जितेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि इसकी शादी उसके पिताजी द्वारा तय कर दी गई है….. इसलिए वह दुखी है | कलक्टर आशीष रेखा के परिजनों से मिलकर उसकी शादी के शगुन के रूप में पिता ने जो राशि वर पक्ष से ली थी वह लौटाने के लिए उन्हें राजी कर लिया | रेखा को छात्रावास में भर्ती करवाया गया और उसने आगे की पढ़ाई शुरू कर दी | बस यहीं से कलेक्टर आशीष सक्सेना ने दहेज दफा के खिलाफ कमर कस ली |

सम्बंधित खबरें


बी.पी.मंडल के 101वीं राजकीय जयंती समारोह पर लगा ब्रेक, लोगों ने मनाई जयंती

मंडल कमीशन के अध्यक्ष बी.पी.मंडल की 101वीं जयंती के मौके पर उनके पैतृक गाँव मुरहो में कोसी के विद्वतजनों, राजनीतिक महकमों के कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने समारोहपूर्वक जयंती मनाई। भला क्यों न मनाते…… सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े समाज के मजबूत स्तंभ थे बीपी मंडल। गरीबों एवं दलितों के नेता थे बीपी मंडल।

बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके अरुण जेटली के निधन के फलस्वरूप दो दिवसीय राजकीय शोक (24-25 अगस्त) के कारण बी.पी.मंडल के 101 वीं राजकीय जयंती समारोह पर ब्रेक लग गया।

इस अवसर पर उनके पैतृक गाँव मुरहो स्थित उनकी समाधि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विस्तृत संबोधन में डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि 1 वर्ष 8 महीना 22 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहने वाले बीपी मंडल द्वारा समर्पित रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पीएम बीपी सिंह के द्वारा इस रिपोर्ट को लागू किया गया…..  पिछड़ों को 27% आरक्षण का लाभ दिया गया….. जिसके फलस्वरूप देश के सभी धर्मों के 3743 जातियों के उपेक्षित लोगों को मंडल आयोग का लाभ मिला।

मौके पर पूर्व विधायक मणीन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओमबाबू, प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण कुमार मंडल, डॉ.शान्ति यादव, आनंद मंडल, जदयू अध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव, प्रो.सुजीत मेहता, डॉ.आलोक कुमार, नरेश पासवान , अशोक चौधरी, प्रो.नारायण प्रसाद यादव, डॉ.नीलाकांत, डॉ.नीरज कुमार, महानंद ठाकुर, शौकत अली , छठू ऋषिदेव, उमेश ऋषिदेव, सरोजिनी देवी, मुर्तुजा अली, शशि कुमार, वीरेंद्र सिंह, भानु प्रताप मंडल आदि ने कहा कि मंडल के आदर्शों पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.श्यामल किशोर यादव ने की। अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि ग्रामीणों व अतिथियों की भारी संख्या में उपस्थिति इस बात का सबूत है कि अभी भी लोगों के दिलों में मंडल जी के लिए अगाध प्रेम है।

सम्बंधित खबरें


पीवी सिंधु की ऐतिहासिक उपलब्धि

ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने इतिहास रच दिया। रविवार को स्विट्जरलैंड में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में उन्होंने जापान की खिलाड़ी नोजोमी ओकुहारा को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत के लिए महिला और पुरुष दोनों वर्गों में से किसी ने गोल्ड मेडल नहीं जीता था।
पीवी सिंधु ने नोजोमी ओकुहारा को सीधे गेमों में 21-7, 21-7 से पराजित किया। 38 मिनट तक चले इस मुकाबले को जीतने के साथ ही सिंधु ने 2017 के फाइनल में ओकुहारा से मिली हार का हिसाब बराबर कर लिया। ओकुहारा के खिलाफ सिंधु का कैरियर रिकार्ड अब 9-7 का हो गया है।
बता दें कि भारत ने इस टूर्नामेंट में अब तक तीन रजत और छह कांस्य पदक जीते थे। सिंधु इससे पहले इस टूर्नामेंट में 2017 और 2018 में लगातार दो बार फाइनल में हारी थीं। लेकिन इस बार उन्होंने इस सिलसिले को तोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में 2013 से खेल रही सिंधु के नाम अब पांच पदक हो गए हैं। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल हैं। विश्व की किसी भी महिला खिलाज़ी ने अब तक इतने पदक नहीं जीते। यह भी जानें कि फाइनल जीतने के साथ ही इस टूर्नामेंट में सिंधु द्वारा अब तक जीते मैचों की संख्या 21 हो गई है। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से कोटिश: बधाई।

सम्बंधित खबरें


बिहार का अमिताभ अब चाँद पर उतारेगा चन्द्रयान

शिक्षक दिवस 5 सितंबर के दो दिन बाद यानी 7 सितंबर को जब चन्द्रयान-2 चाँद की सतह पर उतरेगा तो धरती से लेकर अंतरिक्ष तक बिहार की प्रतिभा का पूरी दुनिया में डंका बजेगा | भारत के अति महत्वपूर्ण मिशन में बिहार के वरीय वैज्ञानिक (चन्द्रयान -2 के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं ऑपरेशन डायरेक्टर) अमिताभ की प्रमुख भागीदारी से समस्तीपुर जिला से लेकर सारे शिक्षण संस्थान (एएन कॉलेज पटना व बीआईटी मेसरा) जहाँ उन्होंने शिक्षा ग्रहण किया वे सभी गौरवान्वित हो रहे हैं |

बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स में गहरी अभिरुचि होने के कारण अमिताभ बचपन में रेडियो के पुर्जे खोलकर जोड़ने का अभ्यास करते-करते 1989 में एएन कॉलेज से एमएससी इन इलेक्ट्रॉनिक्स तक की पढ़ाई पूरी कर ली और एमटेक की पढ़ाई बीआईटी मेसरा से पूरी की | फिर 2002 में इसरो से जुड़े और चन्द्रयान -1 और चंद्रयान-2 मिशन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें दी गई | वर्ष 2008 में सर्वप्रथम वे चन्द्रयान -1 मिशन में प्रोजेक्ट मैनेजर की भूमिका का निर्वहन सर्वाधिक सफलतापूर्वक करते रहे |

यह भी बता दें कि वैज्ञानिक अमिताभ द्वारा चंद्रमा की सतह पर चन्द्रयान -2 को लैंड कराने के लिए काफी रिसर्च किया गया | चंद्रमा के किस ओर की सतह पर चन्द्रयान -2 उतरेगा…… पहले इस काम के लिए रूस का सहयोग लिया जाना था, लेकिन रूस की अकारण उदासीनता से चंद्रयान-2 के लेंडर को विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी अमिताभ की टीम को ही दे दी गई है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बिहार के इस वैज्ञानिक अमिताभ को इंडियन सोसायटी आफ रिमोट सेंसिंग सेंटर देहरादून से यंग अंतरिक्ष अवार्ड दिया जा चुका है |

सम्बंधित खबरें


पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का निधन

देश के पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली का लंबी बीमारी के बाद आज दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। उन्हें कुछ दिन पहले ही सांस लेने में दिक्‍कत के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर व्याप्त है। उनका अंतिम संस्कार कल दोपहर बाद दिल्ली के निगम बोध घाट पर होगा।

28 दिसंबर 1952 को में दिल्ली में जन्मे अरुण जेटली की प्रारंभिक शिक्षा वहां के सेंट जेवियर स्कूल में हुई। दिल्ली के ही प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से उन्होंने ग्रैजुएट और लॉ फैकल्टी से कानून की पढ़ाई की। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से हुई और 1977 में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। इसी साल उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। आपातकाल के दौरान युवा जेटली जेपी के आंदोलन में शामिल हो गए। इस दौरान वे जेल भी गए और वहीं उनकी मुलाकात उस वक्त के वरिष्ठ नेताओं से हुई। जेल से निकलने के बाद भी उनका जनसंघ से संपर्क बना रहा और 1980 में उन्हें भाजपा के यूथ विंग का प्रभार सौंपा गया। इस समय भाजपा अटल-आडवाणी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही थी और पार्टी के बढ़ने के साथ ही जेटली का कद भी लगातार बढ़ता गया। इस दौरान पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर भी उन्होंने देश भर में प्रतिष्ठा और चर्चा हासिल की।

साल 1999 में अरुण जेटली वाजेपेयी सरकार में राज्यमंत्री बने। एक साल के भीतर ही उन्हें कैबिनेट में जगह दे दी गई। उन्हें कानून मंत्रालय के साथ ही विनिवेश मंत्रालय का भी जिम्मा सौंपा गया। 2009 में जेटली को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। नेता प्रतिपक्ष के रूप में जेटली बहुत तैयारी के साथ सरकार को घेरते थे। तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे जेटली ने 2014 में पहली बार अमृतसर से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों चुनाव हार गए। इस हार के बावजूद उनके कद पर कोई असर नहीं पड़ा और मोदी कैबिनेट में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। साथ ही राज्यसभा में सदन का नेता भी। 2019 में वे स्वास्थ्य कारणों से न तो चुनाव लड़े, न ही सरकार में शामिल हुए।

विलक्षण प्रतिभा के धनी अरुण जेटली प्रतिष्ठित राजनेता होने के साथ ही देश के बेहतरीन वकीलों में भी शुमार किए जाते हैं। 80 के दशक में ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वीपी सिंह की सरकार में उन्हें मात्र 37 वर्ष की उम्र में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल का पद मिला। बोफोर्स घोटाला, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी नाम था, उन्होंने 1989 में उस केस से संबंधित पेपरवर्क किया था। पेप्सीको बनाम कोका कोला केस में जेटली ने पेप्सी की तरफ से केस लड़ा था। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि..!

सम्बंधित खबरें


तमिलनाडु के वैज्ञानिक के.शिवम को मिला डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार

इसरो प्रमुख यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष सह अंतरिक्ष विभाग के सचिव वैज्ञानिक के.शिवम को विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मुख्यमंत्री के.पलानीस्वामी ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार के “डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम” पुरस्कार से सम्मानित किया |

बता दें कि कभी इसरो प्रमुख रह चुके डॉ.कलाम सूर्य की तरह दीप्तिमान और चंद्रमा की तरह शीतल रहकर भारत को मिसाइल देकर शक्तिशाली बनाया था और गांधीयन मिसाइल-मैन कहलाया था……. उसी महामहिम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के बाद तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने उनके नाम पर पुरस्कार की घोषणा की थी | वर्ष 2015 में डॉ.कलाम के निधन के बाद से यह पुरस्कार दिया जाने लगा है |

यह भी बता दें कि इसरो प्रमुख के.शिवम को वर्ष 2019 के पुरस्कार स्वरूप प्रशंसा-पत्र के अतिरिक्त 8 ग्राम का गोल्ड मेडल और 5 लाख की राशि 73वें स्वतंत्रता दिवस के दिन अपरिहार्य कारणवश नहीं प्राप्त किये जाने के कारण मुख्यमंत्री कार्यालय में कल ससम्मान हस्तगत कराया गया |

यह भी जानिए कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार दिया किसे जाता है….. डॉ.कलाम पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी, मानवता और छात्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं | साथ ही तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के द्वारा तमिलनाडु के ही वैज्ञानिक होने के कारण डॉ.कलाम के नामवाले पुरस्कार को पानेवालों में तमिलनाडु के ही वैज्ञानिक होने की शर्त लगा दी गई थी…. जबकि विज्ञान किसी व्यक्ति विशेष की धरोहर नहीं, उसके दरवाजे ऐसे हरेक व्यक्ति के लिए खुले रहने चाहिए जो मानवता की भलाई के लिए कार्यरत हैं |

 

सम्बंधित खबरें


पूर्व सांसद व शिक्षा मंत्री रह चुके डॉ.महावीर के नाम बॉटनिकल गार्डन बनाने की स्वीकृति दी सिंडिकेट ने

मधेपुरा के सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक व प्रखर राजनीतिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाने के साथ-साथ शैक्षिक जगत में परचम लहराने वाले डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस स्थित विज्ञान भवन के पीछे खाली पड़ी भूमि पर उनके पुत्र डॉ.अरुण कुमार (विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर जन्तु विभाग, बीएनएमयू) द्वारा दिये गये “डॉ.महावीर बॉटनिकल गार्डन व पार्क” बनाने के प्रस्ताव को सिंडिकेट द्वारा सर्वसम्मति से गत बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई ।

बता दें कि टी.पी.कॉलेज के विश्वकर्मा कहे जाने वाले प्राचार्य डॉ.महावीर प्रसाद यादव भिन्न-भिन्न रूपों में मधेपुरा की सेवा करते रहे। डॉ.यादव यहीं से विधायक बनकर राज्य शिक्षा मंत्री बने…… सांसद रहे और दो-दो विश्वविद्यालयों के प्रतिकुलपति और अंत में बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर सेवारत रहते हुए मधेपुरा को अलविदा कह दिये। ताजिंदगी प्राचार्य डॉ.महावीर बाबू छात्रों एवं उनके अभिभावकों से यही कहते रहे कि भोज-भगैत-भंडारा आदि से रिश्ता तोड़ो और शिक्षा से नाता जोड़ो।

ऐसे समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम पर बॉटनिकल गार्डन व पार्क निर्माण के बाबत सिंडिकेट द्वारा दी गई स्वीकृति पर उनके निकटतम सहकर्मी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने यही कहा कि ऐसे शिक्षाविद डॉ.महावीर बाबू की स्मृति को कायम रखने हेतु कुलपति डॉ.ए.के.राय व उनकी पूरी टीम सहित सिंडिकेट के सभी सदस्य साधुवाद के पात्र हैं।

सम्बंधित खबरें


कला संस्कृति युवा विभाग द्वारा जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ

मधेपुरा के मनभावन कीर्ति नारायण मंडल क्रीड़़ा मैदान, जिसे खेल को समर्पित संत कुमार और अरुण कुमार द्वारा दुल्हन की तरह सजाया गया, में त्रिदिवसीय जिला स्तरीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता (2019-20) का शानदार शुभारंभ किया गया। जिला स्तरीय इस खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन सदर एसडीएम वृंदालाल, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, उपाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा सच्चिदानंद झा, मंडल विश्वविद्यालय क्रीड़ा विभाग के सचिव डॉ.ए.फजल, उपसचिव डॉ.शिवशंकर मिश्र आदि ने संयुक्त रूप से मशाल जलाकर किया।

बता दें कि इस त्रिदिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता में जहाँ बालक-बालिका (अंडर-14 से लेकर अंडर-19 तक) द्वारा खो-खो, वाॅलीबाल, कुश्ती, रग्बी जैसे खेल में जोर आजमाए जाएंगे संतअवध कीर्ति मैदान में, वहीं कराटे, ताइक्वांडो एवं बुशु प्रतियोगिता में भाग लेने जायेंगे बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में। इसके अलावे संत कुमार व अरुण कुमार द्वारा उद्घोषित कार्यक्रम के अनुसार बैडमिंटन, फुटबॉल, हैंडबॉल, कबड्डी एवं क्रिकेट आदि का आयोजन किया जाएगा।

Athletes at Kirti Narayan Mandal Krida Maidan, Madhepura.
Athletes at Kirti Narayan Mandal Krida Maidan, Madhepura.

यह भी बता दें कि वन महोत्सव के तहत सभी आगत अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया एवं तत्पश्चात स्वागत गान, स्वागत भाषण एवं अंगवस्त्रम व मोमेंटो आदि प्रदान कर अतिथियों का भरपूर स्वागत किया गया…… उपस्थित खेल प्रेमियों डॉ.वंदना कुमारी, डॉ.किशोर कुमार, मानव कुमार सिंह, रूपेश कुमार, अनिल राज, कंचन कुमार कुंज, राजू-अमित-दिलीप आदि द्वारा।

इस अवसर पर जहाँ एसडीएम वृंदालाल ने खेल को प्रोत्साहन देने हेतु कीर्ति नारायण मंडल के नाम से स्टेडियम के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी यूपी मंडल ने खेल के साथ पढ़ाई को भी आवश्यक बताया। साथ ही अतिथिगण एसएन झा, डॉ.ए.फजल, डॉ.एसके मिश्र आदि ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों को खूब प्रोत्साहित किया।

अंत में मधेपुरा के अभिभावक माने जाने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कीर्ति क्रीड़ा मैदान में उपस्थित अतिथियों एवं खिलाड़ियों को शुभाशीष देते हुए यही कहा-

न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा,

न तो वृद्ध ये न वदन्ति धर्मम्।

यानि वह सभा नहीं है जहाँ वृद्ध पुरुष न हों और वे वृद्ध नहीं हैं जो धर्म की बात न बतावें……..। यहाँ उन्होंने यही कहा कि भारतीय रेल और भारतीय खेल विकास की गाड़ी के दो ऐसे पहिए हैं जो विकास को गति देने के साथ-साथ भारत की एकता एवं अखंडता को जहाँ बल प्रदान करता है, वहीं जातियों व संप्रदायों के बीच की दीवारों को कमजोर करने में सदा लगा रहता है। डॉ.मधेपुरी ने प्रतिभागियों से कहा कि खेल में कोई हारता नहीं है…… जीतता वही है जिसके अंतर्मन का संकल्प बलवान होता है।

चलते-चलते बता दें कि जहाँ एथलेटिक्स अंडर-14 बालक वर्ग के 600 मीटर में दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ.मधेपुरी मार्ग, वार्ड नं.-1, मधेपुरा के अवनीश कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं मध्य विद्यालय मिठाई के रितेश कुमार एवं मध्य विद्यालय महेशपुर के प्रशांत कुमार द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे……!

सम्बंधित खबरें


स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय में समारोह पूर्वक मनाई गई 10वीं वर्षगांठ

स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय में मधेपुरा के अभिभावक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, बीएनएमयू के डॉ.एचएलएस जौहरी, डॉ.एम आई रहमान, डॉ.फजल, डॉ.शंकर कुमार मिश्र, डॉ.अशोक कुमार व संगीत को ऊँचाई देने वाली प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, डॉ.रवि रंजन सहित निर्देशिका डॉ.हेमा कश्यप ने महाविद्यालय की दसवीं वर्षगांठ पर 18 अगस्त को आयोजित भव्य समारोह का श्रीगणेश संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके साथ ही स्वागत गान के अलावे अंगवस्त्रम, पुष्पगुच्छ  व मोमेंटो आदि से अतिथियों का भरपूर सत्कार किया गया।

Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at Swar Sobhita Sangeet Mahavidyalaya.
Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at Swar Sobhita Sangeet Mahavidyalaya.

बता दें कि इस स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय के कण-कण में कलात्मकता की खुशबू निकलने का एहसास अतिथियों द्वारा महसूस किया जाता रहा तभी तो डॉ.मधेपुरी ने संगीत व कला को ऊँचाई प्रदान करने वाली निर्देशिका डॉ.हेमा को आगे बढ़ते रहने का शुभ आशीष देते हुए विशाल प्रशाल में उपस्थित कला-प्रेमी बच्चों एवं उनके अभिभावकों व सुधी श्रोताओं से यही कहा-

साहित्य संगीत कला विहीन:, साक्षात पशु पुच्छ विश्रहीनः डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो कला उसकी धड़कन है। संगीत ऐसी कला है जो मन की चिंता, शोक, खेद व व्यथा को हरण कर लेती है। जितने भी बड़े-बड़े वैज्ञानिक हुए हैं वे भी संगीत से जुड़े रहे हैं….. यहाँ तक कि मिसाइल मैन भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम भी वाद्य वीणा बजाते थे और श्रीराम राग में गाते व गुनगुनाते थे।

Dr.Madhepuri & Principal Dr.Hema Kashyap amidst kids.
Dr.Madhepuri & Principal Dr.Hema Kashyap amidst kids.

यह भी बता दें कि डॉ.एचएलएस जौहरी की अध्यक्षता में आयोजित- चित्रकला, हस्तकला, भाषण, लेखन सहित नृत्य व मेहंदी आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से डॉ.रहमान, डॉ.फजल, डॉ.अशोक, डॉ.शंकर सहित अन्य अतिथियों ने विस्तार पूर्वक प्रोत्साहित करते हुए यही कहा कि प्रतियोगिता से बच्चों की प्रतिभा में निखार आती है….. अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ.जौहरी ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं बराबर आयोजित होती रहनी चाहिए।

अंत में निदेशिका डॉ.हेमा कश्यप ने आगामी 1 सितंबर 2019 को समापन समारोह में पुरस्कार वितरण करने की सूचना देते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालनकर्ता अरुण कुमार ने अध्यक्ष की सहमति से उद्घाटन कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

सम्बंधित खबरें


कुसहा त्रासदी के 11वें वर्ष पूरा होने पर 150 गाँवों में किया जाएगा संवाद

वर्ष 2008 के 18 अगस्त को कुसहा में कोसी का बांध टूटा। जन जीवन तबाह हो गया। कितने गाँव और घर सहित गृहपति जल समाधि ले लिए। 11 वर्ष गुजर गये। कुसहा त्रासदी के जख्म आज तक भरे नहीं, बल्कि आज भी हरे हैं।

बता दें कि न तो कुसहा के दोषियों को सजा मिली और ना कोसी की समस्याओं का निराकरण के कोई ठोस उपाय ढूंढें गये। तब के राहत से लेकर अब तक के पुनर्वास का लाभ सभी पीड़ितों को नहीं मिल पाया है। जिसके लिए आज तक कोसी नवनिर्माण मंच के संचालक महेन्द्र यादव एड़ी चोटी एक कर रहे हैं…… वे 50% पीड़ितों को ही पुनर्वास का लाभ दिलाने में सफल हुए हैं। आज भी कितनी टूटी हुई सड़कें और टूटे हुए पुल निर्माण कार्य की बाट जोह रहे हैं।

इस अवसर पर मयंक सभागार में मुख्य अतिथि के रूप में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने संबोधन में मधेपुरा-सहरसा-सुपौल तीनों जिले से आए मंच के कार्यकर्ताओं से कहा कि कुसहा त्रासदी से पूर्णरूपेण निपटने के लिए आज की तारीख में मजबूत जन संगठन निर्माण करने के साथ-साथ जन आंदोलन खड़ा करना भी मौजूदा समय की मुकम्मल जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि यह कैसे होगा जबकि यहाँ के लोग वृक्ष के हरे पत्ते भी खाकर गुजारा करना पसंद करते रहेंगे ?

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि सरकारी महकमे में एमएलए, एमपी-लोकसभा, राज्यसभा सबका पेंशन अलग-अलग भुगतान हो वह सही…… परंतु 35 वर्षों तक नौकरी करने वाले बिना पेंशन के ही रिटायर करें…… यह कैसा न्याय है ? उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन जैसे प्राकृतिक न्याय को सम्मान नहीं देना कितना बड़ा अन्याय है- पाप है। देश की जनता जिस मिठाई को बाजार में ₹10 में प्राप्त करे वही विधानसभा व लोकसभा के कैंटीन में आठ आने में रहनुमाओं को मिले……. यही हमारी न्याय व्यवस्था है। अंत में डॉ.मधेपुरी ने 2008 की आपबीती मर्मस्पर्शी घटनाएं सुनाते हुए विस्तार से वर्तमान सन्दर्भों को जोड़ा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखर वक्ता आकाश यदुवंशी, मुन्ना पासवान, माधव प्रसाद, दुनियादत्त सहित शंभू यादव, पिरबत पासवान, एसके सुमन, रमन कुमार, सतीश कुमार, संदीप कुमार आदि ने पुनर्वास की हकीकत बयां करते हुए पर्यावरण के सवालों और इस त्रासदी से जुड़े सवालों व बाढ़ के संभावित खतरों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए यही कहा कि महात्मा गांधी के जन्म के 150 वर्षों को यादगार बनाने हेतु कोसी क्षेत्र के 150 गाँव में इन सवालों पर अगले 2 अक्टूबर तक संवाद किया जाय। कार्यक्रम का संचालन राजू खान ने किया और धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कोसी नवनिर्माण मंच के संस्थापक महेंद्र यादव ने सूचना दी कि संध्या 6:00 बजे भूपेन्द्र चौक पर कुसहा त्रासदी में अकारण बह गये किसान-मजदूर व समस्त नर-नारियों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि देने हेतु आयोजन किया गया है। जिसमें सबने अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्रेरणा के गीत और कृति का पर्यावरण-प्रेम में सबों को कुरेदा।

सम्बंधित खबरें