All posts by Admin

सिंहेश्वर प्रमुख चन्द्रकला देवी जिले के गुड सॅमैरिटन के रूप में हुई सम्मानित

दुनिया के देशों में सबसे अधिक भारत में लगभग 15 लोग रोड एक्सीडेंट में प्रति घंटे मरते हैं तथा प्रतिदिन 60 से अधिक लोग घायल होते हैं | परंतु घायलों को मदद करने या हॉस्पिटल तक पहुंचाने में प्रायः नेक आदमी कतराते रहे…… क्योंकि होम करते हाथ जलने का भय हमेशा उन्हें बना रहता | यहाँ तक कि घायलों के खून लग जाने पर सॅमैरिटन (नेक व्यक्ति) को कभी-कभी 302 दफा के तहत जेल जाना पड़ता था |
बता दें कि मार्च 2016 में भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा समैरिटन को सुरक्षा देने के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने वाले कानून को सबल बनाए जाने के फलस्वरूप लोग अब घायलों की मदद करने में मुस्तैदी से लग जाते हैं |
यह भी बता दें कि उक्त आशय का पत्र परिवहन सचिव द्वारा भी जारी किया गया है | तब से जिले के विभिन्न थानों के सहयोग से सात गुड सॅमैरिटन की सूची बनाई गई है जिसमें छह मुरलीगंज थाने से हैं और एक अकेली महिला सिंहेश्वर थाना से- सिंहेश्वर प्रमुख चंद्रकला देवी | सबों को परिवहन विभाग द्वारा 4 सितंबर को सम्मानित किया गया |
जिला परिवहन पदाधिकारी रजनीश लाल ने बताया कि सम्मानित होने वाले सात सॅमैरिटन है- (1) चंद्रकला देवी (2) शिवनंदन यादव (3) मिथिलेश कुमार (4) टुनटुन यादव (5) विनोद पासवान (6) मनोज कुमार यादव और (7) अंकेश कुमार …… जिन्हें 4 सितंबर को शाल, प्रमाणपत्र एवं एक-एक हज़ार रूपये देकर सम्मानित किया गया जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला द्वारा |

सम्बंधित खबरें


सचमुच बेमिसाल थे राम जेठमलानी

भारतीय कानून जगत के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले दिग्गज वकील, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और मौजूदा समय में बिहार से राजद के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। जेठमलानी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और इलाजरत थे। उनके परिवार में उनके बेटे महेश जेठमलानी हैं, जो स्वयं जाने-माने वकील हैं, और एक बेटी हैं जो अमेरिका में रहती हैं।
अपने बेबाक बयानों और दिलचस्प शख्सियत के कारण जेठमलानी कोर्ट में ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में भी खासे लोकप्रिय रहे। वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 14 सितंबर 1923 को जन्मे जेठमलानी ने महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री ली और पाकिस्तान में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। बॉम्बे वे एक शरणार्थी के तौर पर पहुँचे और फिर वहां नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी शुरू की। यहां पहली बार वे नानावटी केस से चर्चा में आए और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
विलक्षण प्रतिभा के धनी और बेहद परिश्रमी राम जेठमलानी हमेशा जीतने के लिए लड़ते थे और उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि लोग क्या कहेंगे। उनकी ऊर्जा युवा वकीलों को भी शर्माने के लिए मजबूर कर दिया करती। उनमें यह अद्भुत साहस था कि वे बहुत अलोकप्रिय केस को भी हाथ में लिया करते। उन्होंने इन्दिरा गांधी और आगे चलकर राजीव गांधी के हत्यारे का केस लड़ा और संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु का बचाव किया जबकि आम जन की भावना इसके खिलाफ थी। इसी तरह उन्होंने जेसिका लाल मर्डर केस में मनु शर्मा का बचाव किया, स्टॉक मार्केट केस में हर्षद मेहता और केतन पारेख का बचाव किया और अपनी आलोचनाओं से बिल्कुल बेपरवाह रहे। उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान, जयललिता, लालू प्रसाद यादव, अमित शाह, अरविन्द केजरीवाल, जगनमोहन रेड्डी, बीएस येदियुरप्पा, कनिमोई, संजय दत्त, बाबा रामदेव और आसाराम बापू के केस भी लड़े।
जेठमलानी के नाम देश में सबसे कम और सबसे अधिक उम्र के वकील होने का नायाब रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 19 साल की उम्र में वकालत शुरू की और लगातार 77 साल तक इस पेशे में रहे। ज़िन्दगी उन्होंने अपनी शर्तों पर जी और अपने बनाए उसूलों पर चले। 2017 में अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि 76 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ, पर कोई आदर्श नहीं मिला। वे दूसरों का मूल्यांकन भी उसी आधार पर किया करते जिन मूल्यों में वे खुद यकीन रखते। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने जनता की भलाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम किए।
बता दें कि साल 2010 में राम जेठमलानी को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। छठी और सातवीं लोकसभा में उन्होंने भाजपा के टिकट पर मुंबई से चुनाव जीता था। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे कानून मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहे और साल 2004 में वाजपेयी के ही खिलाफ उन्होंने लखनऊ सीट से चुनाव भी लड़ा था।
कुल मिलाकर, इस बेमिसाल शख्सियत को किसी एक लेख से या महज कुछ पन्नों में जान लेना और जानकर समझ लेना मुमकिन नहीं। उन्हें समझने के लिए कई-कई बार और कई-कई तरीके से देखना होगा। फिलहाल इतना ही। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

सम्बंधित खबरें


लैंडर विक्रम से संपर्क टूटा है, हमारी उम्मीदें नहीं

चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर या कहें दो कदम दूर लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया, लेकिन सवा सौ करोड़ भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। मून मिशन में भले ही शत प्रतिशत सफलता नहीं मिल पाई हो, लेकिन जितनी मिली है, इतिहास रच देने के लिए वो भी कम नहीं। इस अभियान के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

बहरहाल, इसरो ने कई प्रयास के बाद मध्य रात्रि करीब दो बजे बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। इसके बाद वैज्ञानिक लैंडर से दोबारा संपर्क नहीं साध पाए। इसरो का कहना है कि लैंडिंग के अंतिम क्षणों में जो डाटा मिला है, उसके अध्ययन के बाद ही संपर्क टूटने का कारण पता चल सकेगा।

इस मौके पर इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय में दम साधकर इस अभियान को लाइव देख रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भावुक कर देने वाले उन क्षणों में वैज्ञानिकों की भरपूर हौसला आफजाई की और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है। वे देश की सेवा कर रहे हैं। आगे भी हमारी यात्रा जारी रहेगी। मैं पूरी तरह वैज्ञानिकों के साथ हूँ। हिम्मत बनाए रखें, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।”

गौरतलब है कि इसरो प्रमुख के. सिवन ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान की लांचिंग के मौके पर कहा था कि हमारे लिए आखिरी के 15 मिनट आतंक के पल होंगे। उनकी चिंता सही साबित हुई। मंजिल बस दो कदम दूर थी, लेकिन आखिरी मौके पर जीत हाथ से फिसल गई। वैसे बता दें कि लैंडर-रोवर से संपर्क भले ही टूट गया है, लेकिन ऑर्बिटर से उम्मीदें अभी भी कायम हैं। लैंडर-रोवर को दो सितंबर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग किया गया था। ऑर्बिटर अब भी चांद से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर कक्षा में सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है। इसरो को उससे संकेत और जरूरी डाटा प्राप्त हो रहे हैं।

चलते-चलते बस इतना कि मून मिशन में कामयाबी जल्द ही भारत के कदम चूमेगी। इस विश्वास के पीछे पहली वजह यह कि इसरो के साथ यह ख्याति जुड़ी है कि उसके लिए हर चुनौती एक अवसर होती है और दूसरी यह कि करोड़ों हाथ इस मिशन के लिए एक साथ उठकर दिन-रात दुआ कर रहे हैं।

सम्बंधित खबरें


शिक्षक दिवस पर सम्मानित हुए बिहार के 20 शिक्षक

गुरुवार, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में मुख्य राजकीय समारोह का आयोजन हुआ। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिमोट के माध्यम से बिहार उन्नयन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर को और यादगार बनाते हुए मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले बिहार के विभिन्न जिलों के 20 शिक्षकों तथा वर्ष 2018 में शिक्षक कल्याण कोष में अधिकतम राशि जमा करने वाले नालंदा, पश्चिम चंपारण एवं पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आरके महाजन समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।

CM Nitish Kumar in Shikshak Diwas Samaroh_012
CM Nitish Kumar in Shikshak Diwas Samaroh.

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज शिक्षकों के सम्मान का दिन है। शिक्षकों को पूरा देश सम्मान की दृष्टि से देखता है, यह बात शिक्षकों को भी याद रखनी चाहिए। बिहार के नियोजित शिक्षकों द्वारा मांगों के समर्थन में शिक्षक दिवस नहीं मनाने तथा पटना में प्रदर्शन करने को लेकर उन्होंने कहा कि वे मांग जरूर करें, लेकिन अपने मूल दायित्व को भी नहीं भूलें। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहण करेंगे, पढ़ाते रहेंगे तो उनकी मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे ही उनकी मांगों को पूरा करेंगे।
अब चलिए एक नज़र उन शिक्षकों पर डालें जिन्हें शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया गया। उनके नाम इस प्रकार हैं: डॉ. नम्रता आनंद (पटना), शालिनी सिन्हा (पटना), कुमारी खुशबू कुशवाहा (मधुबनी), सुनैना कुमारी (नालंदा), सबीहा फैज (भागलपुर), डॉ. अभय कुमार रमण (पूर्वी चंपारण), डॉ. गणेश शंकर पांडेय (नालंदा), संत कुमार सहनी (बेगूसराय), मनोज कुमार यादव (सीतामढ़ी), अवधेश पासवान (भागलपुर), डॉ. देवेन्द्र सिंह (गया), जितेन्द्र सिंह (पश्चिम चंपारण), ललिता कुमारी (पूर्णिया), सत्यनारायण राय (सीतामढ़ी), संगीता कुमारी (सीतामढ़ी), अमरनाथ त्रिवेदी (मुजफ्फरपुर), मो. सनाउल्लाह शाह (पश्चिमी चंपारण), बबीता कुमारी (सुपौल), सुमन सिंह (बांका) एवं कविता प्रवीण (नालंदा)। सभी सम्मानित शिक्षकों को ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं।

सम्बंधित खबरें


शिक्षक ही बनेंगे बदलाव के सारथी- डॉ.मधेपुरी

शिक्षक दिवस डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मोत्सव के रूप में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को समस्त भारत में मनाया जाता है। आज के दिन, भौतिकी के प्रोफेसर (डॉ.) भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से शुभाशीष प्राप्त करने आए छात्रों से उन्होंने यही कहा कि आज नहीं तो कल शिक्षक ही बनेंगे बदलाव के सारथी…. भले ही अब शिक्षक दिवस के दिन विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डॉ.राधाकृष्णन की जीवनी पर शिक्षकों द्वारा विस्तार से चर्चा नहीं की जाती, बल्कि प्रायः शिक्षण संस्थानों में शिक्षक दिवस के मंच को महोत्सव के मंच की तरह सजा कर केवल ‘कोरम’ पूरा कर लिया जाता है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि असली शिक्षक वे हैं जो आंखें खराब होने पर भी हार नहीं मानते, बल्कि तब भी पेड़ के नीचे बैठकर बांट रहे होते हैं- शिक्षा। वही आदर्श शिक्षक गिने जाते हैं जो शिष्यों को अपनी चारित्रिक ऊर्जा से सकारात्मक होना सिखाते हैं… जो शिष्य की प्रतिभा को अपने अनुभवों से तराशते व निखारते हैं। वैसे ही अनुभवी व ज्ञानी शिक्षक आजकल के छात्रों व अभिभावकों के बीच जागरूकता फैलाकर एक दिन शिक्षा के स्तर में सुधार अवश्य लाएंगे। मधेपुरा के वैसे ही शिक्षकों में प्रातः स्मरणीय कुछ नाम हैं- लक्ष्मी प्रसाद सिंह, रतन चन्द, डॉ.महावीर प्रसाद यादव, युगल शास्त्री प्रेम, सत्य नारायण पोद्दार ‘सत्य’, लाला सुरेंद्र प्रसाद, जलधर झा जलदेव, रंजीत कुमार सरकार, लक्ष्मी नारायण मंडल, नंदकिशोर मंडल, परमानंद झा, सीपी सिंह, शिव कुमार प्रसाद यादव….. आदि।

Dr.Bhupendra Madhepuri (Professor of Physics) having deep discussion with Bharat Ratna DR.APJ Abdul Kalam.
Dr.Bhupendra Madhepuri (Professor of Physics) having deep discussion with Bharat Ratna DR.APJ Abdul Kalam.

चलते-चलते यह भी बता दें कि वर्तमान में भौतिकी के लोकप्रिय शिक्षक डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी हर विधा के छात्रों की मदद कर उसे मंजिल हासिल करने में सहयोग  दे-देकर अपनी पहचान एक संवेदनशील शिक्षक के रूप में बना ली है। डॉ.मधेपुरी ने साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। शिक्षक के पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भी वे छात्रों को मदद करने में पीछे नहीं रहे हैं। भारतरत्न डॉ.कलाम पर डॉ.मधेपुरी द्वारा लिखी गई पुस्तक झारखंड सरकार के छठे वर्ग के पाठ्यक्रम में शामिल कर ली गई है। डॉ.कलाम हमेशा मधेपुरी से यही कहा करते- “मैं दिल से शिक्षकों का सम्मान करता हूँ,  क्योंकि शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होता है।”

सम्बंधित खबरें


चन्दा मामा को छूने चला भारतीय चन्द्रयान- 2 का लैंडर “विक्रम”

आज 3 सितंबर  है और  दिन मंगलवार। आज से पहले यही हुआ कि चन्द्रयान-2 ने चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग की दिशा में एक और मील का पत्थर पार करने का रिकॉर्ड बना लिया है। सितंबर 2 को दोपहर दिन में आधे घंटे के दरमियान ‘विक्रम’ आर्बिटर से सही सलामत अलग हो गया और फिलहाल दोनों पांचवी कक्षा में घूम रहे हैं- चंद्रमा से जिसकी न्यूनतम दूरी 119 किलोमीटर तथा अधिकतम 127 किलोमीटर है।

बता दें कि आज यानी 3 सितंबर के बाद अगले दो दिन विक्रम अपनी कक्षा को छोटी करता जाएगा… 4 सितंबर को इसकी कक्षा में अंतिम बार बदलाव होगा…  5-6 सितंबर को लैंडर में लगे उपकरणों को मिशन डायरेक्टर बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ की टीम द्वारा (इसरो के अध्यक्ष के.शिवन के निर्देशन में) जांच की जाएगी।

भारत ही नहीं सारा संसार 7 सितंबर को सिर ऊपर करके बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ के कारनामे को देखता रह जाएगा जब लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा…. जबकि ऑर्बिटर अगले 1 वर्ष तक चंद्रमा की कक्षा में ही चक्कर लगाता रहेगा….. और चाँद की मैपिंग के साथ-साथ उसके बाहरी वातावरण का भी अध्ययन करता रहेगा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने सॉफ्ट लैंडिंग सरीखे जटिल कार्य को रूस द्वारा नकारे जाने के बाद खुद करने की ठान ली जो 6-7 सितंबर की दरमियानी भारत के लिए बेहद अहम रात होगी… लगभग 1:40 पर लैंडर विक्रम चंद्रमा पर उतरेगा तथा 5:00 बजे तड़के रोवर चाँद की सतह पर मॉर्निंग वॉक करना शुरू कर देगा और इसी के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा भारत !!!

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा को आगे बढ़ाने में बहुतों का योगदान

आंखें छोटी भले हो लेकिन इसमें ताकत आसमान देखने की होती है। मधेपुरा आरंभ में छोटा सा सबडिवीजन था भागलपुर जिले के अंदर, सदर कचहरी भागलपुर ही हुआ करता। तब बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के सिमुलिया गांव से आकर आशुतोष मुखर्जी (बी.ए.) मधेपुरा के तत्कालीन सीरीज इंस्टिट्यूट (वर्तमान एसएनपीएम+2 स्कूल) में सकेंड टीचर बन शिक्षा दान करना आरंभ किए थे। उनके पौत्र पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रह चुके सुरेश चन्द्र मुखर्जी की प्रथम वार्षिकी (1 सितंबर 2019) को झारखंड हाई कोर्ट से न्यायमूर्ति आर.मुखोपाध्याय (भातीज), लंदन से उनके बड़े पुत्र डॉ.कौशिक मुखोपाध्याय एवं छोटे पुत्र ई.अर्निवान मुखोपाध्याय सहित मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डॉ अरुण कुमार मंडल, डॉ.दिवाकर सिंह, प्राचार्य डॉ.शिव नारायण यादव व डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, उद्दालक घोष, इंद्रनील घोष आदि गणमान्यों द्वारा निष्ठापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम आशुतोष मुखर्जी पथ वाले लालकोठी निवास एवं स्थानीय जीवन सदन में आयोजित किया गया था।

Samajsevi Dr.Madhepuri discussing with Honourable Justice Rongon Mukhopadhyay of Jharkhand High Court regarding the history of Kosi Region & the history of Singheshwar Sthan along with Director Uddalak Ghosh at Lal Kothi Campus, Ashutosh Mukherjee Path, Madhepura.
Samajsevi Dr.Madhepuri discussing with Honourable Justice Rongon Mukhopadhyay of Jharkhand High Court regarding the history of Kosi Region & the history of Singheshwar Sthan along with Director Uddalak Ghosh at Lal Kothi Campus, Ashutosh Mukherjee Path, Madhepura.

इस अवसर पर खोजी प्रवृत्ति के न्यायमूर्ति आर.मुखोपाध्याय देर तक डॉ.मधेपुरी से मधेपुरा के भूले-बिसरे अतीत को जानने में लगे रहे। ऋष्यश्रृंग के सिंहेश्वर स्थान के इतिहास के प्रति न्यायमूर्ति मुखोपाध्याय की अभिरुचि को देख कर ही तो डॉ.मधेपुरी ने स्वरचित दो पुस्तकें- रास बिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच एवं इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल तथा एक पुस्तक हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ रचित शैव अवधारणा और सिंहेश्वर स्थान…. ये तीनों पुस्तकें ससम्मान भेंट की।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पुण्यतिथि पर आयोजित प्रथम वार्षिकी के धार्मिक अनुष्ठानों में संपूर्ण समर्पण के साथ सपरिवार संलग्न देखे गए मिसेज डॉ.नंदिता मुखर्जी, डॉ.कौशिक, डॉ.नीलांजना, आकाश, अभिलाष सहित ई.अर्निवान, रूमिला, आयुष, तनीषा एवं अन्य शुभेच्छुगण।

 

सम्बंधित खबरें


बिहार के 40 में सिर्फ 4 हैं…. सौ फ़ीसदी उपस्थिति वाले सांसद

भारतीय संसद में लोकसभा के सांसदों की संख्या 545 है। इसमें दो मनोनीत होते हैं। कुल 543 सांसद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के माध्यम से जनता द्वारा चुनकर संसद में प्रवेश करते हैं। संसद की बैठकों में वे कितने दिनों तक हाजिर अथवा गैर हाजिर रहते हैं…. संसद की इन गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठन का नाम है- पीआरएस  लेजिसलेटिव रिसर्च। यह संगठन पारदर्शिता के साथ संसदीय गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाता है।

बता दें कि पीआरएस के अनुसार 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में जितने भी सांसद सदन की बैठकों में रोज हाजिर रहे…. इस श्रेणी के लोकसभा सदस्यों की संख्या 79 है…. जिसमें बिहार के 40 सांसदों में सिर्फ 4 हैं। चार में एक भाजपा के पुराने सांसद हैं, एक जदयू के पुराने सांसद तथा दो जदयू के नवनिर्वाचित सांसद हैं।

यह भी जानिए कि इन चारों में हैं कौन-कौन ? पहला तो महाराजगंज से भाजपा टिकट पर दूसरी बार जीते सांसद हैं जनार्दन सिंह सिग्रीवाल जो नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वही नालंदा के पुराने जदयू सांसद हैं कौशलेंद्र कुमार।

यह भी बता दें कि शेष दो नए सांसदों एक हैं झंझारपुर से जदयू टिकट पर पहली बार सांसद बने रामप्रीत मंडल जो सांसद बनने से पहले पंचायत समिति सदस्य एवं प्रखंड प्रमुख भी रहे हैं वही नवनिर्वाचित दूसरे सांसद हैं- आलोक कुमार सुमन, जो गोपालगंज से पहली बार जदयू टिकट पर जीते हैं… इससे पहले राजनीति के क्षेत्र में उनके नाम की चर्चा भी नहीं थी।

अंत में यही कि 100 फ़ीसदी हाजिरी वालों में कुल 79 सांसद हुए संपूर्ण देश में. जिसमें बिहार के 4 सांसद हैं। इन चार में दो नवनिर्वाचित हैं और दो पुराने हैं। एक भाजपा के हैं और तीन जदयू के हैं वहीं जदयू जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

 

सम्बंधित खबरें


गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा वेदों में- पीएम नरेन्द्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की जनता से यही कहा कि हमारे पास हजारों वर्ष पुराना वेदों का भंडार है जिसमें एक-से-एक गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा है। लोग उधर ध्यान नहीं दिए हैं।

बता दें कि पीएम मोदी के अनुसार हम अपने प्राचीन अनुसंधानों को आधुनिकता से जोड़ने में बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाए बल्कि आधुनिकता की चकाचौंध में उन्हें भूलते चले गए। नमो ने देशवासियों से कहा कि इसी स्थिति को बीते 5 वर्षों में हमने लगातार बदलते रहने का भरसक प्रयास किया है।

यह भी बता दें कि ये सारी बातें पीएम मोदी ने दिल्ली में आयोजित “योग पुरस्कार समारोह” को संबोधित करते हुए उपस्थित लोगों के बीच कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आयुष मंत्रालय के जरिए बीते 5 वर्षों से इस स्थिति को बदलने का काम अनवरत जारी है।

इस अवसर पर नमो द्वारा उद्घोषणा की गई कि प्राचीन शोधों को प्रयोगशालाओं में मान्यता दी जा रही है। साथ ही उन मान्यताओं को इस तरह पेश किया जा रहा है जिससे चिकित्सा विज्ञान भी उन्हें समझ सके। मोदी ने स्वीकार किया कि वेदों के पुराने ज्ञान को सफलतापूर्वक आधुनिकता के साथ जोड़ने में बहुत कम सफलता मिली है, फिर भी देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास पर तेजी से काम चल रहा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि केवल आधुनिक चिकित्सा ही नहीं, आयुष की शिक्षा में भी अधिक व बेहतर पेशेवर आएं, इसके लिए भी आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। जब हम देश में और डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोलने जा रहे हैं तो भला आयुष को कैसे भूलेंगे।

सम्बंधित खबरें


हॉकी सम्राट ध्यानचंद की जयंती पर क्रिकेट एवं अन्य खिलाड़ियों को किया गया पुरस्कृत

आज बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के 115वीं जन्म जयंती पर मधेपुरा नेहरू युवा केन्द्र द्वारा खेलकूद से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन जिला खेल पदाधिकारी सच्चिदानंद, एनवाइसी समन्वयक अजय कुमार गुप्ता एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। सर्वप्रथम प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छ भारत के बाद ‘स्वस्थ भारत अभियान’ के तहत राष्ट्रीय खेल दिवस पर देश के खिलाड़ियों एवं नर-नारियों के लिए दिये गये प्रसारण “फिट होगा इंडिया तो हिट होगा इंडिया” को सबों ने सुना।

Dr.Madhepuri addressing players at BP Mandal Indoor Stadium.
Dr.Madhepuri addressing players at BP Mandal Indoor Stadium.

बता दें कि खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद की जयंती पर सम्मानित करते हुए मुख्य अतिथि के रुप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि जब देश गुलाम था तब हाॅकी के इस जादूगर ध्यानचंद ने 4 वर्षों पर होने वाले ओलंपिक खेल में वर्ष 1928, 1932 एवं 1936 में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को हॉकी विश्व गुरु का सम्मान दिलाया था। डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिसने भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया, भारत के उस रत्न को आज तक भारतरत्न सरीखे सम्मान से वंचित रखा जा रहा है…… क्या यही समुचित न्याय है ?

इस अवसर पर भौतिकी के विद्वान डॉ.मधेपुरी ने भौतिकी के प्रोफेसर व वैज्ञानिक डॉ.होमी जहांगीर भाभा को संदर्भित करते हुए अवरुद्ध कंठ से कहा कि जिस भाभा ने एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थापित कर भारत को “परमाणु युग” के शीर्ष तक ले गया….. तथा फादर ऑफ न्यूक्लियर पावर कहलाने वाला वह वैज्ञानिक डॉ.भाभा “Atom for Peace” के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु जेनेवा जाने के क्रम में 24 जनवरी 1966 को कालकलवित हो गया…… आजतक भारत के वैसे रत्न को भी भारतरत्न हम सबों का भारत नहीं दे सका, जिसके लिए उन्होंने सर्वस्व निछावर कर दिया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि आज ध्यानचंद जयंती पर बीपी मंडल स्टेडियम में मधेपुरा एवं खगड़िया जिला क्रिकेट टीमों के बीच एकदिवसीय मैच का शुभारंभ अध्यक्ष मुन्ना बाबू, जिला खेलकूद पदाधिकारी ध्यानी यादव, संतोष कुमार झा, अरुण कुमार आदि द्वारा किया गया जिसमें जीत मधेपुरा टीम की हुई। डॉ.मधेपुरी ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से यही कहा-

न हारना और….. न जीतना जरूरी है।

जीवन खुद खेल है, खेलना जरूरी है।।

सम्बंधित खबरें