जहाँ विश्व के 143 देशों में प्रजापिता ब्रह्माबाबा की 48वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं भक्ति सहित ‘ॐ शान्ति ॐ’ की अनुगूंज के साथ मनाई गई वही संसार के ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की 10,000 शाखाओं में से एक “शाखा मधेपुरा” में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करती हुई शक्ति, स्वरूपा ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी द्वारा समस्त श्रद्धानुरागी नर-नारियों के बीच विस्तार से विषय प्रवेश करते हुए- ‘दादा लेखराज’ से ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ तक के अलौकिक सफर की विस्तृत चर्चा की गई |
अध्यक्षा ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने प्रजापिता लेखराज के जीवन-सागर से ढेर सारे मोतियों को निकाल-निकालकर श्रद्धानुरागियों के समक्ष प्रज्ञापिता लेखराज के व्यक्तित्व एवं चरित्र को प्रभावशाली एवं शक्तिशाली साबित करते हुए एवं करीने से समझाते हुए कहा कि उज्जवल चरित्र एवं उदारचित्त वाले प्रजापिताब्रह्मा 18 से 20 घंटे तक जनहित में कार्यरत रहा करते थे |
यह भी बता दें कि प्रजापिता ब्रह्मा बाबा में अटूट आस्था रखनेवाले सिमराही (सुपौल) से पधारे मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमार रामनगीना भाई ने विस्तार से ‘ॐ शान्ति ॐ’ के माध्यम से खुद के जीवन में आये परिवर्तन की घटनाओं का जिक्र करते हुए अपने संबोधन में कहा कि आज की तारीख में संसार के लगभग 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिदिन ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करते हैं | वर्तमान में जीवन की भाग-दौड़ में थक चुके सर्वाधिक लोग शांति की तलाश में अब तेजी से ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं |

बता दें कि कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता के रूप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में उपस्थित जन समुदाय से यही कहा कि बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से अंतिम सांस लेने तक सदैव षट विकार (काम-क्रोध, लोभ-मोह, ईर्ष्या-द्वेष) के अधीन होता है | दसों इंद्रियों का राजकुमार ‘मन’ होता है और तन को रोग तभी पकड़ता है जब ‘मन’ विकृत होता है | अब मन की शांति और स्वच्छता के लिए ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर तेजी से लोग अपना कदम बढ़ाने लगे हैं जहां नारी शक्ति को ब्रह्माबाबा ने जागृत किया है, प्रतिष्ठापित कर आगे बढ़ाने का काम किया है | डॉ.मधेपुरी ने नारी को प्रतिष्ठापूर्ण जीवन जीने के लिए समाजसुधारक राजाराम मोहन राय एवं नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्र नाथ टैगोर की विस्तार से चर्चा की |
इस संस्था को गतिशील रखने वालों में पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा बाबू, प्रो.निरोध कुमार, दिनेश सर्राफ, प्रो.अजय कुमार, प्रो.नरेश कुमार, प्रो.त्रिवेणी प्रसाद यादव, ओम बाबू, बैजनाथ यादव, विजय यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्राचार्य सत्यजीत, डॉ.नीलाकान्त, प्रो.रवि कुमार, प्रो.अशोक पोद्दार एवं श्रीनाथ झा सहित ओम शांति परिवार के सदस्यों एवं माला बहन, दुर्गा बहन आदि सरीखे सभी माता एवं बहनें हैं | बाहर से आए रामनगीना बाबू सहित अन्य सभी को ब्रह्माकुमार किशोर जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |
संस्थाप्रधान ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी जब सभी अतिथियों को टीका लगातीं और चरणामृत देतीं उससे पूर्व उन्होंने डॉ.मधेपुरी, सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडे, दिनेश सर्राफ, प्राचार्य सत्यजीत यादव, प्रो.श्यामल किशोर यादव, ओम प्र.यादव, प्रो.निरोध कुमार निराला आदि के साथ सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रजापिता ब्रह्मा बाबा एवं 1 दिन पूर्व नेपाल में अपनी दैहिकलीला समाप्त कर स्वर्गारोहण पर निकली मातृशक्ति गंगा देवी की पुण्यतिथि को प्रकाशमय बनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की | अंत में सभी श्रद्धालुओं को इच्छापूर्ण सुस्वादु प्रसाद ग्रहण कराने के बाद ही श्रद्धांजलि सभा का समापन किया गया |


