रजिस्ट्री ऑफिस में हर होज लाखों रुपये निबन्धन शुल्क के रूप में जमा होते हैं। सालाना करोड़ों रुपये का टारगेट सरकार निर्धारित करती है लेकिन खरीद की गई जमीन का दाखिल-खारिज मालगुजारी रसीद के अभाव में पिछले छह महीने से ठप्प है। राजस्व रसीद नहीं कटने से किसानों को कई तरह के कष्ट और नुकसान से गुजरना पड़ रहा है। रसीद के अभाव में किसानों को आपदा नुकसान व खाद-बीज सब्सिडी एवं फसल-बीमा आदि से वंचित रहने की मजबूरी बनी रहती है। किसान क्रेडिट कार्ड तो सपना बनता जा रहा है। स्पेशल मेसेन्जर भी सरकारी तंत्र के पास से खाली हाथ लौट आते हैं तो ऐसी स्थिति में मालगुजारी रसीद के अभाव में क्या अब यहाँ के किसान भी आत्महत्या करेंगे..!
अंचलाधिकारी श्री उदयकृष्ण यादव ने कहा कि कई माह से राजस्व रसीद उपलब्ध नहीं होने पर जिला कार्यालय में पड़े सड़े-गले रसीद से ही फिलहाल काम चलाए जाने का आदेश दिया गया है।


