शोधकर्ता श्री सुभाशीष को कोसी नदी में मिला 120 डॉल्फिन !

कल तक सोंस के रूप में प्रचलित कोसी के इलाके का यह जलीय जीव स्वतंत्र शोधकर्ता श्री सुभाशीष डे को कोसी नदी में 120 डॉल्फिन का मिल जाना कोई आम बात नहीं; बल्कि एक खास बात मानी जा रही है | इलाके के लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि इस जलीय जंतु की सुरक्षा एवं संवर्धन की नितांत आवश्यकता है | लगभग 2 वर्ष के अथक प्रयास के बाद कोसी नदी बेसिन गांगेय डॉल्फिन के रूप अब स्थापित होने जा रहा है |

बता दें कि 41 प्रजातियों वाली डॉल्फिन की केवल 5 प्रजातियां साफ पानी में और शेष सभी समुद्री पानी में पायी जाती है | डॉल्फिन का मनुष्य के साथ बरसो से अधिक मित्रतापूर्ण रिश्ता रहा है तथा व्यवहारों एवं भावनाओं में समानता भी |

यह भी जानिए कि प्रो.सुनील कुमार चौधरी, विभागाध्यक्ष- वनस्पति विभाग (टीएम विश्वविद्यालय भागलपुर) के निर्देशन में एक 6 सदस्यीय टीम गठित की गई | अत्याधुनिक कैमरों एवं अन्य आधुनिक यंत्रों के साथ टीम द्वारा सर्वेक्षण का कार्य संपन्न किया गया है |

यह भी बता दें कि दो चरणों में किये गये सर्वे में जहां नदी के बहाव के विपरीत दिशा में 12 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सर्वे का काम किया गया वहीं नदी के बहाव की दिशा में 21 अप्रैल से 23 अप्रैल तक पूर्व में किये गये सर्वे का क्रॉस चेकिंग भी किया गया |

वर्ष 2018 में अबतक जहाँ सहरसा-सुपौल क्षेत्र की कोसी नदी में 168 किलोमीटर सर्वे के दरमियान 120 डॉल्फिन मिली वहीं उसके विकास के साथ-साथ अन्य वन्य जीवों के विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार ने सहरसा एवं सुपौल दोनों 1 प्रमंडलों को अलग-अलग क्रमशः 11 लाख 62 हज़ार एवं 7 लाख 74 हज़ार की राशि आवंटित की है | साथ ही वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सभी धाराओं को सख्ती से लागू करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है |

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