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भारत के लोकतंत्रीय इतिहास में इस बार सर्वाधिक महिला सांसद

मोदी की महाविजय में इस बार कई रिकॉर्ड बने तो कई टूटे, पर जो सबसे दिलचस्प और स्वागतयोग्य रिकॉर्ड बना, वो है सत्रहवीं लोकसभा में 76 महिला सांसदों का पहुँचना। जी हाँ, इस बार 723 महिला उम्‍मीदवार चुनावी मैदान में थीं, जिनमें से 76 संसद के लिए चुनी गईं। आजाद भारत के लोकतंत्रीय इतिहास में भागीदारी के लिहाज से और अब तक आम चुनावों में महिलाओं को मिली जीत के लिहाज से यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। गौरतलब है कि 2014 में कुल 663 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से 66 महिलाएं संसद पहुंची थीं। इन 66 महिला सांसदों में 28 इस बार भी चुनाव जीतने में सफल रहीं। वैसे आगे बढ़ने से पहले यह भी जानें कि हमारी पहली लोकसभा में कुल 22 महिला सांसद चुनकर आई थीं और 1977 में उनकी संख्या सबसे कम (19) थी।

बहरहाल, विस्तार में जाकर देखें तो इस आम चुनाव में कुल 7,928 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी थीं। कांग्रेस ने सर्वाधिक 54, जबकि भाजपा ने 53 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। अन्य राष्ट्रीय पार्टियों में बसपा ने 24 महिला उम्मीदवारों को, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने 23, माकपा ने 10, भाकपा ने चार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। 222 महिलाओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

राज्यवार बात करें तो बंगाल ने इस बार गजब का उदाहरण पेश किया। यहां के 42 सीटों में से इस बार 14 पर महिलाएं जीती हैं जो 80 सीटों वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा है, जहाँ से इस बार 10 महिलाएं चुनाव जीतने में सफल हुई हैं। अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र से 8, गुजरात और उड़ीसा से 5-5, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश से 4-4, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार से 3-3 तथा पंजाब और झारखंड से 2-2 महिला सांसद चुनी गई हैं। संघशासित प्रदेशों में नई दिल्ली और चंडीगढ़ सीटों से महिला उम्मीदवारों ने बाजी मारी है। पार्टियों की बात करें तो इस बार तृणमूल कांग्रेस (पश्चिम बंगाल) ने सर्वाधिक 41% महिलाओं को टिकट दिया था। दूसरे नंबर पर बीजद (उड़ीसा) थी, जिसने 33% महिलाओं को मौका दिया था।

चलने से पहले इस बार के चुनावों में महिलाओं को लेकर एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा यह भी कि देश के 13 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा है। ये 13 राज्य हैं: बिहार, उत्तराखंड, मणिपुर, मेघालय, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुड्डूचेरी, दमन दीव, और लक्षद्वीप।

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सातवें चरण के साथ खत्म हुआ दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव

आज सातवें चरण की 59 सीटों पर मतदान के साथ भारतीय लोकतंत्र का यज्ञ पूरा हो गया। इस चरण में बिहार की आठ सीटों – नालंदा, काराकाट, जहानाबाद, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, बक्सर, आरा और सासाराम – के अलावा उत्तर प्रदेश की 13, पंजाब की 13, पश्चिम बंगाल की 9, मध्यप्रदेश की 8, हिमाचल प्रदेश की 4, झारखंड की 3 और चंडीगढ़ की 1 शामिल थी। इस चरण में प्रत्याशियों की कुल संख्या थी 918, जबकि मतदाताओं की संख्या थी 10.1 करोड़ और मतदान केन्द्रों की संख्या 1.02 लाख। अब सबकी निगाहें 23 मई की मतगणना पर जा टिकी है। हालांकि अपने-अपने एग्जिट पोल के साथ सारे टीवी चैनल शाम से ही आ डटे हैं।

बहरहाल, देश का निर्णय तो हम 23 मई को जान ही लेंगे। फिलहाल जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के 17वें लोकसभा चुनाव के संबंध में कुछ दिलचस्प बातें। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह चुनाव दुनिया का अब तक का सबसे खर्चीला चुनाव था। जी हाँ, नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) के अनुसार सात चरणों में कराए गए इस चुनाव का कुल खर्च 50 हजार करोड़ रुपये (सात अरब डॉलर) है, जबकि 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का खर्च इससे कम करीब 6.5 अरब डॉलर था।

आपको बता दें कि सीएमएस के अनुमान के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव का खर्च करीब 5 अरब डॉलर था। पांच साल बाद 2019 में हो रहे 17वें लोकसभा चुनाव में इस खर्च में 40 फीसद इजाफा हो चुका है। जरा सोच कर देखिए कि जिस देश की साठ प्रतिशत आबादी महज तीन डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करती है, उसमें प्रति मतदाता औसतन आठ डॉलर का खर्च क्या लोकतंत्र को मुंह नहीं चिढ़ाता।

अगर आपको उत्सुकता हो रही हो कि सबसे अधिक खर्च किस मद में होता है तो बता दें कि सर्वाधिक खर्च सोशल मीडिया, यात्राएं और विज्ञापन के मद में किया जाता है। इस बार यह खर्च कितना बेहिसाब बढ़ा उसका अनुमान इसी से हो जाएगा कि 2014 में सोशल मीडिया पर जहां महज 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं इस बार यह खर्च बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये जा पहुंचा।

आज की तारीख में शायद आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन बकौल चुनाव आयोग, देश के पहले तीन लोकसभा चुनावों का खर्च 10 करोड़ रुपये से कम या उसके बराबर था। इसके बाद 1984-85 में हुए आठवें लोकसभा चुनाव तक कुल खर्च सौ करोड़ रुपये से कम था। 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में पहली बार खर्च ने पांच सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। 2004 में 15वें लोकसभा चुनाव तक यह खर्च एक हजार करोड़ रुपये को पार कर गया। 2014 में खर्च 3870 करोड़ रुपये 2009 के खर्च से करीब तीन गुना अधिक था।

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सत्तर वर्षों में मात्र 3 महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंच पाई

अब तक लोकसभा चुनाव में हजार से अधिक महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़ी है। परन्तु, केवल तीन महिलाएं 4 बार निर्दलीय चुनाव जीत पाई हैं…. जिसमें मेनका गांधी ही 2 बार निर्दलीय जीत कर लोकसभा पहुंची है।

बता दें कि मेनका गांधी ‘पीलीभीत’ संसदीय क्षेत्र से लगातार दो बार (यानि वर्ष 1998 एवं 1999 में) निर्दलीय महिला उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंची। पहली बार वर्ष 1998 में मेनका ने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अनीश खान को 2 लाख मतों से पराजित कर निर्दलीय के रूप में अपनी जीत दर्ज कराई और लोकसभा में प्रवेश की….. और दूसरी बार 1999 में ही अपने विरोधी को पुनः निर्दलीय लड़कर ही 2 लाख 39 हज़ार वोटों पराजित कर लोकसभा सदस्य बनी। फिलहाल 2004 से वह  भाजपा से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंच रही है। और हाँ ! यह भी जान लीजिए कि 2004 से अबतक कुल 528 महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है परन्तु एक भी जीत नहीं पाई। जबकि विगत 3 चुनावों में (2004, 2009 & 2014) में अलग-अलग दलों से महिला सांसदों की संख्या कुल 165 रही है।

यह भी बता दें कि देश के पहले लोकसभा चुनाव में यानि 1952 में दो महिलाएं निर्दलीय जीत कर लोकसभा सदस्य बनी जिसमें एक थी… टिहरी राजपरिवार की राजमाता कमलेन्दुमती शाह,  जिन्होंने कांग्रेस के कृष्ण सिंह को 13982 वोटों से पराजित किया था।

और दूसरी महिला थी…. कुमारी एनी मस्कारीन जो देश के पहले चुनाव में त्रावणकोर- कोचीन राज्य के ‘त्रिवेंद्रम’ लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय खड़ी होकर सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी सह मुख्यमंत्री टी.के.नारायण पिल्ले को 68117 वोटों से हराकर 1952 में ही लोकसभा सदस्य के रूप में चुनी गई थी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि विगत 20 वर्षों से कोई भी महिला निर्दलीय चुनाव लड़ कर लोकसभा में प्रवेश नहीं कर पाई है जबकि 2014 में 204 महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़़ी परन्तु कोई भी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई।

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मसूद अजहर: अब आगे क्या ?

पुलवामा हमले के 75 दिन बाद भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जैश-ए-मुहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया। पिछले एक दशक से अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की तरफ से प्रतिबंध घोषित करवाने मे जुटे भारत की कूटनीतिक कोशिशों को बुधवार को सफलता तब मिली जब चीन ने अपना वीटो हटाकर इसका समर्थन कर दिया। इस फैसले से पाकिस्तान पूरी दुनिया से अलग-थलग हो गया। निश्चित रूप से यह भारतीय कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की बड़ी जीत और दक्षिण एशिया में शांति के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र के इस फैसले के बाद अब आतंकी मसूद अजहर पर चौतरफा शिकंजा कसना शुरू हो जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद आतंकी मसूद अजहर की संपत्ति जिस किसी देश में होगी उसे संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश तत्काल प्रभाव से जब्त करने के लिए बाध्य होंगे। अब पाकिस्तान को भी मसूद अजहर के वित्तीय संसाधनों को सीज करना होगा। यही नहीं, अब मसूद अजहर की व्यक्तिगत और उसके द्वारा संचालित संस्था की हर संपत्ति को सीज किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उसे किसी तरह की वित्तीय मदद न मिल सके।

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित होने वाले व्यक्ति और उससे जुड़े हर तरह के संगठन की कड़ी निगरानी की जाती है और उनके बारे में संयुक्त राष्ट्र के तमाम देशों के साथ सूचनाएं भी साझा करनी पड़ती हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बाद मसूद अजहर के लिए किसी देश की यात्रा भी मुमकिन नहीं क्योंकि कोई देश किसी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी को अपनी सीमा में दाखिल होने की अनुमति नहीं देता। यह भी जानें कि अब आतंकी मसूद अजहर हथियार भी नहीं खरीद पाएगा। अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित होने वाले शख्स को कोई भी देश हथियार मुहैया नहीं कराता।

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सावधान! बिहार में भी रहेगा ‘फानी’ का असर!!

बिहार में तूफान की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दो मई से अगले तीन दिनों तक चक्रवाती तूफान ‘फानी’ का असर बिहार में भी रहेगा। बताया गया है कि बंगाल की खाड़ी से उठा यह तूफान गंगा के तटीय क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश करेगा और इसका असर दो से चार मई तक पूर्वी बिहार और गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहेगा। वैसे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ‘फानी’ का सबसे अधिक असर ओडिशा में होगा।

गौरतलब है कि ‘फानी’ के कारण कुछ जगहों पर तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इसके कारण पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया, फारबिसगंज, किशनगंज, अररिया और छपरा में तापमान में आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी आएगी। अनुमान है कि इसका असर तूफान के बाद भी रहेगा और छह मई तक अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच सकता है। इस दौरान बिहार में बादल छाए रहने के कारण गर्मी से राहत मिलेगी। मई के प्रथम सप्ताह के बाद मौसम सामान्य हो जाने की संभावना है।

चलते-चलते बता दें कि चक्रवाती तूफान ‘फानी’ को लेकर पूरा देश पहले से ही अलर्ट है। किसी बड़े संकट से बचने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने ओडिशा में ‘यलो वार्निंग’ जारी की है। पुरी प्रशासन ने पर्यटकों को दो मई तक पुरी छोड़ने का निर्देश दिया है। वहां सरकारी डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। तूफान से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने भी अपनी कमर कस ली है।

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इस बार भाजपा को मुस्लिमों का भारी समर्थन मिलेगा: राजनाथ सिंह

भाजपा के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री राजनाथ सिंह की मानें तो पिछले चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा को मुस्लिमों का भारी समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने डर का माहौल पैदा करने की असफल कोशिश की है, जबकि हम ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर चलते आए हैं।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नेतृत्व किया है, उससे स्पष्ट है कि भाजपा दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में लौटेगी। लोग चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का बेहतरीन शासन बना रहे।

भारत के गृहमंत्री ने नक्सलवाद के संदर्भ में कहा कि पहले जहां देश के 126 जिलों में नक्सली सक्रिय थे, वहीं अब वे सिमट कर छह से सात जिलों में रह गए हैं। देश में नक्सली हिंसा में भी कमी आई है। आने वाले दिनों में नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि गृहमंत्री के तौर पर मैंने बहुत कुछ किया है। साल 1971 के बाद से हम इस समय बेहतर स्थिति में हैं। पूर्वोत्तर में उग्रवाद लगभग खत्म हो गया है।

गौरतलब है कि राजनाथ सिंह समाचार एजेंसी पीटीआई से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जम्म-कश्मीर की समस्या का दीर्घकालिक समाधान तलाशने की कोशिश की, लेकिन इच्छित परिणाम नहीं मिल पाया। अब समय आ गया है कि अनुच्छेद 370 और 35ए की समीक्षा हो। यह समझा जाए कि इन विशेष प्रावधानों से राज्य को क्या फायदा-नुकसान हुआ।

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अभिनंदन के लिए ‘वीर चक्र’ की सिफारिश

बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्‍तानी विमानों की घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब देने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हाल ही में देश और दुनिया का ध्यान खींचने वाले और वीरता का पर्याय बन चुके अभिनंदन के लिए भारतीय वायुसेना ने ‘वीर चक्र’ की सिफारिश की है। इसके साथ ही खबर है कि भारतीय वायुसेना ने सुरक्षा कारणों के चलते उनका कश्‍मीर से तबादला भी कर दिया है। अभी वह श्रीनगर स्थित एयरबेस पर तैनात थे। बताया जाता है कि उन्‍हें पश्चिमी सेक्‍टर के किसी महत्‍वपूर्ण बेस पर ही तैनात किया जाएगा।

गौरतलब है कि बीते 26 फरवरी को बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने 27 फरवरी की सुबह भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश की थी। पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ते हुए विंग कमांडर अभिनंदन ने एक एफ-16 विमान को मार गिराया था। इसी क्रम में उनके मिग बाइसन विमान में भी आग लग गई थी और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना के बाद विंग कमांडर अभिनंदन विमान से इजेक्ट कर पैराशूट के सहारे सुरक्षित उतरने में कामयाब रहे, लेकिन वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में उतरे जहां स्थानीय लोगों और पाकिस्तान की सेना ने उन्हें कब्जे में ले लिया।

पाकिस्तानियों के चंगुल में फंसने और बंदी बनाए जाने के बावजूद जांबाज अभिनंदन ने भारतीय वायुसेना के बारे में दुश्‍मनों को कुछ नहीं बताया था। आखिरकार, चौतरफा अंतरराष्‍ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्‍तान को भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान को वापस सौंपना पड़ा, जिसके बाद पूरे देश ने खुशियां मनाई थीं। आज एक बार फिर पूरा देश गौरवान्वित है अपने वीर पुत्र के सम्मान पर। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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बेटियाँ बोझ नहीं, जिन्दगी का दूसरा नाम होती है

भारतीय समाज में बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता सर्वाधिक क्रूर हो चुकी है। धारणा यहाँ तक बन गयी है कि बेटियाँ परिवार के लिए बोझ होती है। बेटियाँ सिर्फ लेने के लिए होती है, देने के लिए नहीं। तभी तो अधिकांश परिवारों में बेटियों को बासी और बेटों को ताजा भोजन परोसा जाता है। बेटा को अच्छे पोशाक के साथ अच्छे स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाता है।

बता दें कि समाज में बेटी के महत्व को लेकर लोगों को जागरुक करने तथा लिंगानुपात के अंतर को पाटने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सामाजिक योजना की शुरुआत 2015 के 22 जनवरी को की। इस योजना के लागू होते ही नन्ही-मुन्नी बेटियाँ क्या कहने लगी है अपने पापा से-

चलते-चलते थक गई….. कंधे पे बिठा लो ना पापा !

अंधेरे से डर लगता है….. सीने से लगा लो ना पापा !

अब स्कूल पूरा हो गया….. कॉलेज में पढ़ने दो ना पापा !

धरती पर बोझ नहीं होती बेटियाँ…. दुनिया को समझा दो ना पापा !

ये समझाने की नहीं, बल्कि गहराई में उतर कर महसूसने की बातें हैं। हाल ही में कोलकाता की 19 वर्षीय राखी दत्ता नाम की बेटी अपने पिता के लीवर की गंभीर बीमारी का इलाज कराते-कराते थक चुकी थी। जब कोलकाता के डॉक्टरों द्वारा इलाज करने की पूरी कोशिश नाकामयाब हो गई तो वह बेटी राखी अपने पिता को लेकर हैदराबाद के एआईजी (Asian Institute of Gastroenterology) अस्पताल चली गई।

यह भी जान लीजिए कि जांचोपरांत वहाँ के सभी डॉक्टरों ने एक स्वर से यही कहा कि इस मरीज की लंबी आयु के लिए केवल और केवल लीवर ट्रांसप्लांट ही करना होगा। यह सुनते ही बेटी राखी ने तुरंत हाँ कर दी। सारी औपचारिकताओं को पूरी करने के बाद राखी दत्ता ने अपने पिता को 65% लीवर डोनेट कर उन्हें दूसरी नई जिंदगी दे दी……। तब से जितने लोगों ने यह कहानी सुनी….. सबों ने एक स्वर से यही कहा- “बेटियाँ बोझ नहीं….. जिंदगी का दूसरा नाम होती है।”

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वाराणसी में मोदी बनाम प्रियंका की संभावना !

राजनीति के गलियारे में इन दिनों एक चर्चा काफी जोर पकड़ रही है कि कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव प्रियंका गांधी वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। जी हाँ, कांग्रेस के सूत्र कह रहे हैं कि इसे लेकर पार्टी में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन प्रियंका चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो चुकी हैं।

बात जहां तक कांग्रेस पार्टी की है तो वह भले ही इस मुद्दे पर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ कहने को तैयार नहीं हो लेकिन इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं। पार्टी में ऐसा मानने वालों की कमी नहीं कि प्रियंका अगर वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो मोदी को वहां घेरा जा सकता है। इसके पीछे दो तर्क दिए जा रहे हैं – पहला यह कि इस बार मोदी लहर जैसी कोई बात नहीं है और दूसरा यह कि पिछले चुनाव में करीब चार लाख वोट मोदी के खिलाफ लड़ रहे प्रत्याशियों में बंटे थे। अब अगर कांग्रेस को सपा और बसपा का सहयोग मिलता है तो मोदी को कड़ी चुनौती दी जा सकती है।

गौरतलब है कि पिछले चुनाव में वाराणसी से चुनाव जीते भाजपा उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को 5,81,022 वोट मिले थे जबकि आप के अरविन्द केजरीवाल को 2,09,238 मत। वहीं कांग्रेस को यहां 75,614, बसपा को 60,579 और सपा को 45,291 मत हासिल हुए थे। कांग्रेस की सोच यह है कि अगर भाजपाविरोधी इन सारे मतों को एक जगह कर दिया जाए तो मोदी को न केवल कड़ी टक्कर दी जा सकती है बल्कि प्रियंका गांधी के व्यक्तित्व और नेहरू-गांधी परिवार का आकर्षण भी साथ में जोर दिया जाए तो चौंकाने वाला परिणाम भी मिल सकता है।

बहरहाल, ये सारे समीकरण अपनी जगह हैं। कांग्रेस और खासकर प्रियंका गांधी सीधे मोदी को चुनौती देने का मन बना पाते हैं या नहीं, यह देखने की बात होगी।

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तो अब मुलायम स्टार प्रचारक भी नहीं ?

लोकसभा चुनाव के लिए बसपा के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी स्टार चुनाव प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कुल 40 स्टार प्रचारक हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस सूची में सपा संरक्षक और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव का नाम नदारद है। 90 के दशक में सपा की नींव रखने से लेकर उसे सत्ता के शिखर तक पहुँचाने वाले मुलायम के हाथ से पार्टी की कमान तो पहले ही निकल चुकी थी और अब 40 प्रचारकों की सूची में भी उनकी अनुपस्थिति है। इस बात को लेकर सियासी गलियारे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
गौरतलब है कि सपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के हस्ताक्षर वाली स्टार प्रचारकों की सूची में अखिलेश यादव के अलावा उनकी पत्नी डिंपल यादव भी हैं। इसके अलावा स्वयं रामगोपाल यादव, वरिष्ठ नेता आजम खान और जया बच्चन के भी नाम सूची में शामिल हैं। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री अहमद हसन, जावेद अली खान, तेज प्रताप यादव और प्रदेश अध्यक्ष नरेश पटेल को भी इस सूची में जगह मिली है।
बहरहाल, इस बीच समाजवादी पार्टी ने दो अन्य सीटों से अपने कैंडिडेट घोषित किए हैं। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव आजमगढ़ से और आजम खान रामपुर सीट से चुनाव लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही एसपी ने अपने कोटे की 37 में से 19 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।

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