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बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ फाल्के पुरस्कार पाने वाले महानायक अमिताभ हो गये बीमार

66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के वितरण हेतु आयोजित समारोह में देश के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के हाथों फिल्मी दुनिया के महानायक अमिताभ बच्चन को फिल्म उद्योग में उनके उत्कृष्ट अभिनय एवं एक से बढ़कर एक हिन्दी सिनेमा में दिए गए योगदानों के लिए सिनेमा क्षेत्र के सर्वोच्च 50वें सम्मान के रूप में “दादा साहब फाल्के पुरस्कार” दिया जाना था परंतु बीमार हो जाने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें जाने से मना कर दिया। महानायक अचानक तेज ज्वर से पीड़ित हो गए थे।

बता दें कि इस समारोह में देश की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने वाले भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाली कई फिल्मी हस्तियों को उपराष्ट्रपति ने नेशनल अवार्ड देकर सम्मानित किया। विजेताओं को देश के युवाओं से जोड़ देते हैं यह नेशनल अवार्ड।

जानिए कि नेशनल अवार्ड पाने वाली हस्तियों में फिल्म ‘बधाई हो’ के लीड एक्टर रहे आयुष्मान खुराना एक ऐसे कलाकार हैं जिन्हें विगत 7 सालों में उनकी चार फिल्मों को नेशनल अवार्ड मिल चुका है। इस बार उन्हें यह अवार्ड फिल्म ‘अंधाधुन’ के लिए दिया गया है। बता दें कि हर पिता की तरह आयुष्मान के पिता भी बेटे को नेशनल अवार्ड मिलने की खबर सुनकर काफी इमोशनल हो गए थे। भला क्यों नहीं, नाम के साथ-साथ अवॉर्ड्स मिलना भी तो जरूरी है। नेशनल अवार्ड तो बड़ा होता ही है। रहा सवाल ऑस्कर पाने का तो वहां तक पहुंचने की भी कोशिश अमिताभ की तरह आयुष्मान करता ही रहेगा। जोश और जुनून से भरा इंसान रुकता कहीं नहीं है वह डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह हमेशा आगे बढ़ता ही रहता है।

चलते-चलते बता दें कि पुरस्कार वितरण के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे गुजराती फिल्म ‘हेलारो’ हिन्दी फिल्म ‘पैडमैन’ ‘उरी सर्जिकल स्ट्राइक’ आदि को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ। फाल्के पुरस्कार में 10 लाख नगद, एक स्वर्ण पदक एवम अंगवस्त्रम दिया जाएगा 29 दिसंबर को…।

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जहाँ चाह…. वहाँ राह को साबित कर दिखाया भारतीय मूल की ब्रिटिश डॉक्टर भाषा मुखर्जी

कोलकाता में पिता दुर्गादास मुखर्जी एवं माता मधुमिता मुखर्जी के घर 1996 ई. में एक बच्ची ने जन्म ग्रहण किया जिसका नाम माता-पिता ने रखा भाषा मुखर्जी। यह मुखर्जी परिवार बेटी भाषा मुखर्जी और बेटा आर्य मुखर्जी के साथ 2004 में कोलकाता से इंग्लैंड के स्विंडन चले गए। वहां जाकर भारतीय मूल की भाषा मुखर्जी पेशे से डॉक्टर बन गई और बन गई पांच भाषाओं की ज्ञाता भी।

बता दें कि फिलहाल लंदन के डरबी में रह रही 23 वर्षीय डॉ.भाषा मुखर्जी 2019 में मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता जीतकर मिस वर्ल्ड 2019 में ही टॉप 40 में स्थान बना डाली। कई प्रकार की चिकित्सीय डिग्री प्राप्त डॉ.भाषा मुखर्जी का IQ लेवल 146 है।

लगभग 8 वर्षीय भाषा जब कोलकाता की स्कूल में पढ़ती थी तो कुछ बच्चे उन्हें ‘अगली बेबी’ यानी बदसूरत बच्ची कह कर पुकारा करते, तब भाषा अपनी ग्रूमिंग, मेकअप और डाइट पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थी।

मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता जीतने के बाद डॉ.भाषा मुखर्जी लड़कियों को खासकर यह संदेश देती है-

प्रायः लोग यह सोचते हैं कि सौंदर्य प्रतियोगिताएं जीतने वाली लड़कियाँ बुद्धू होती हैं लेकिन हम सबको ईश्वर ने किसी-ना-किसी अच्छे मकसद से यहाँ भेजा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि खुद को फिल्मी कीड़ा मानने वाली तथा अपनी पढ़ाई व ब्यूटी कॉन्टेस्ट के बीच संतुलन बनाकर रखने वाली भाषा मुखर्जी ने मिस वर्ल्ड के किताब में स्थान पाने के बाद ही लिंकनशायर, बोस्टन के पिलग्रिम हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टर के रूप में ज्वाइन कर लिया। भाषा ने युवाओं को बुजुर्गों की सेवा में कुछ समय देने के निमित्त “जेनरेशन ब्रिज प्रोजेक्ट 2017” का श्रीगणेश भी किया है। भाषा ने जहाँ चाह-वहाँ राह को साबित कर दिखाया है।

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गोवा से गुजरात तक के 15 भारतीय बने ब्रिटेन के संसद सदस्य

ब्रिटेन के संसदीय चुनाव में भारतीय मूल के 15 भारतवंशियों में से आधे-आधे वहाँ की दोनों पार्टियों (कंजरवेटिव और लेबर) से जीत दर्ज कर हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे। इनमें से कुछ के माता-पिता संसार के अन्य देशों से होते हुए ब्रिटेन पहुंचे और कुछ सीधे भारत से आकर ब्रिटेन में रहने लगे और वहीं के ही नागरिक बन गए।

बता दें कि इन 15 भारतीय मूल के ब्रिटिश पार्लियामेंट के लिए जीते हुए सदस्यों में अधिकांश बैंकर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील हैं। चर्चानुसार यह माना जा रहा है कि नई ब्रिटिश सरकार में तीन भारतवंशी सांसद मंत्री भी बन सकते हैं।

यह भी बता दें कि इन तीनों में एक प्रमुख नाम है प्रीति पटेल, जो विगत सरकार में ब्रिटेन की गृह मंत्री रह चुकी हैं। थेरेसा सरकार में गृह मंत्री रही प्रीति पटेल युगांडा-भारतीय परिवार में जन्मी जबकि प्रति पटेल की दादी-दादा गुजरात के तारापुर में रहते थे…… पिता युगांडा पहुंचे और फिर वहां से ब्रिटेन आ गए। शेष दो मंत्री बनने वाले हैं- अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री रह चुके आलोक शर्मा एवं रेवेन्यू डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी रहे पंजाब मूल के ऋषि सुनाक।

चलते-चलते यह भी जान लें कि इन 15 भारतीयों में चार पहली बार हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे हैं। और शेष हैं- क्लेयर कुटिन्हो (गोवा), सुएला ब्रेवरमैन (गोवा), वैलेरी वाज (गोवा), शैलेश वारा (गुजरात), आलोक शर्मा (आगरा) और नवेंदु मिश्रा (कानपुर) सहित…… भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों पर जन्मे इन ब्रिटिश सांसदों के नाम हैं- गगन मोहिंद्रा, मुनीरा विल्सन, वीरेंद्र शर्मा, तमनजीत सिंह, सीमा मल्होत्रा, प्रीति कौर गिल एवं लीजा नंदी।

 

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आठ वर्षीय भारत की बेटी लिसिप्रिया ने जलवायु शिखर सम्मेलन में की धरती को बचाने की अपील

भारतीय स्टेट मणिपुर की 8 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में सीओपी 25 जलवायु शिखर सम्मेलन में पधारे वैश्विक नेताओं से अपनी धरती तथा उन जैसे मासूमों के भविष्य को बचाने हेतु तुरंत कदम उठाने की गुहार लगाई। महज 8 वर्ष की उम्र में भारत की इस बेटी ने अपनी चिंताओं से दुनिया को झकझोर दिया।

बता दें कि नन्ही पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया ने जलवायु शिखर सम्मेलन में आए पर्यावरणविदों से यही कहा- “मैं (लिसिप्रिया कंगुजम) यहाँ उपस्थित वैश्विक नेताओं से यही कहने आई हूँ कि यह एक संकल्पी कदम उठाने का वक्त है क्योंकि यह वास्तविक क्लाइमेट इमरजेंसी है।”

इतनी छोटी उम्र में इतने अहम मसले पर बात रखने के कारण लिसिप्रिया स्पेन के सारे अखबारों की सुर्खियों में बनी रहीं। लिसिप्रिया के पिताश्री के.के.सिंह ने कहा कि मेरी बेटी की बातों को सुनकर कोई यह अनुमान नहीं लगा पाया कि वह महज 8 साल की है। आगे उन्होंने कहा कि महज 6 साल की उम्र में मेरी बेटी को मंगोलिया में आयोजित 2018 की आपदा मसले पर हुए मंत्री स्तरीय शिखर सम्मेलन में बोलने का अवसर मिला तो लिसिप्रिया ने अंत में यही कहा कि जब बच्चों को अपने माता-पिता से बिछुड़ते देखती हूँ तो मैं रो पड़ती हूँ।

चलते-चलते यह भी बता दें कि मंगोलिया से लौटने के बाद लिसिप्रिया ने अपने पिता के सहयोग से “The Child Movement” नामक संगठन कायम किया तथा जलवायु परिवर्तन मसले पर अपने जुनून के चलते उसने गत फरवरी महीने से स्कूल जाना भी छोड़ दी। लिसिप्रिया अभी तक जलवायु परिवर्तन मसले को लेकर 21 देशों का दौरा कर चुकी है। दुनिया की सबसे कम उम्र वाली भारतीय पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम को भिन्न-भिन्न देशों के सम्मेलन में भाग लेने हेतु वहाँ की सरकार द्वारा यात्रा का खर्च वहन किया जाता है।

यह भी कि वर्ल्ड चिल्ड्रन पीस प्राइज एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम चिल्ड्रन अवार्ड प्राप्त लिसिप्रिया कंगुजम जैसी नन्हीं बेटी को भारत का नाम रोशन करते रहने के लिए डॉ.कलाम के करीबी समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कोटि-कोटि शुभकामनाएं व्यक्त की है।

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भारतीय संविधान ही भारत की आत्मा है

26 नवंबर को समस्त भारत की स्कूल-कॉलेज से लेकर गाँव-शहर के सभी संस्थानों में चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी….. संस्था के प्रधानों द्वारा छात्र-छात्राओं से लेकर सभी कर्मियों को संविधान की शपथ दिलाई गई। संविधान दिवस को पंचायत, अनुमंडल, जिला और प्रदेश तथा देश स्तर के रहनुमाओं द्वारा सर्वाधिक धूमधाम से मनाया गया। सबों ने देश की एकता एवं अखंडता की शपथ खाई और दूसरों को शपथ दिलाई भी। बच्चे, नौजवान एवं सभी नर-नारियों ने यही शपथ ली-

“हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण, प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधान सभा में 26 नवंबर एतत् द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मप्रित करते हैं।”

शपथ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मधेपुरा के युवा व ऊर्जावान जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला एवं जांबाज एसपी संजय कुमार ने कहा कि भारत के संविधान को विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है जिसे तैयार करने में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे थे। इसे बनाने में इस जिले के संविधान सभा सदस्य कमलेश्वरी प्रसाद यादव (चतरा) से लेकर… सर सच्चिदानंद सिन्हा….. डॉ.राजेंद्र प्रसाद… डॉ.भीमराव अंबेडकर…. आदि का योगदान सदा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हमें अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य का भी बोध कराता है। हमारे संविधान में समस्याओं का निदान भी सन्निहित है। इस 70वें संविधान दिवस पर हमें मूल कर्तव्यों का पालन सख्ती के साथ करना चाहिए….. तभी भारत विकसित राष्ट्र बनेगा।

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उद्धव सरकार में एनसीपी का उपमुख्यमंत्री, विस अध्यक्ष कांग्रेस का

महाराष्ट्र में बुधवार को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच सरकार बनाने को लेकर अहम बैठक हुई। ‘महा विकास अघाड़ी’ की इस बैठक में महामंथन के बाद तीनों दलों ने साझा रूप से फैसला किया कि महाराष्ट्र में एक ही उपमुख्यमंत्री होगा जो कि एनसीपी का होगा, जबकि कांग्रेस को विधानसभा अध्यक्ष का पद दिया जाएगा। कांग्रेस की ओर से इस बैठक में अहमद पटेल और मल्लिकार्जुन खड़गे जबकि शिवसेना से पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी की ओर से पार्टी अध्‍यक्ष और नई सरकार के सूत्रधार शरद पवार मौजूद रहे।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी खबरें आ रही थीं कि महाराष्ट्र में दो उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद उन अटकलों पर विराम लग गया। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में मंत्री पद का फार्मूला भी तय कर लिया गया। इस फार्मूले के अनुसार उद्धव मंत्रिमंडल में 15 मंत्री शिवसेना के, उपमुख्यमंत्री समेत 15 मंत्री एनसीपी के और 13 मंत्री कांग्रेस के हो सकते हैं। वैसे गुरुवार शाम शिवाजी पार्क में होने वाले शपथग्रहण समारोह में कितने मंत्री शपथ लेंगे यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। बहुत संभव है कि तीनों दलों से एक या दो मंत्री शपथ लें।

उधर शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए नेताओं को निमंत्रण भेजने का सिलसिला जारी है। उद्धव ठाकरे के पुत्र और नवनिर्वाचित विधायक आदित्य ठाकरे ने दिल्ली आकर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण दिया। आदित्य ने सोनिया गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात कर उन्हें महाराष्ट्र के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया। शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए और जिन प्रमुख नेताओं को आमंत्रण पत्र भेजा गया है उनमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और द्रमुक नेता एमके स्टालिन प्रमुख हैं।

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बिहार की बेटी शिवांगी नौसेना में बनी देश की पहली महिला पायलट

बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी सब -लेफ्टिनेंट शिवांगी इस वर्ष के अंत तक नौसेना में देश की पहली महिला पायलट बनेगी। ग्रामीण परिवेश में एक स्कूल टीचर के घर जन्मी शिवांगी ने 2010 में मुजफ्फरपुर के डीएवी स्कूल से CBSE की परीक्षा पास की। साइंस स्ट्रीम में 12वीं करने के बाद शिवांगी सिक्किम-मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की। एमटेक में दाखिले के बाद SSB परीक्षा के जरिये नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित हुई।

बता दें कि फिलहाल शिवांगी कोच्चि में “Flying Fish” की ट्रेनिंग ले रही है। ट्रेनिंग पूरी होते ही एक समारोह आयोजित कर शिवांगी को बैज लगाया जाएगा। बैज लगाने के बाद शिवांगी नौसेना (NAVY) में देश की पहली महिला पायलट बनेगी।

यह भी बता दें कि किसी भी क्षेत्र में पीछे रहना बिहार की जिस बेटी शिवांगी को मंजूर नहीं था चंद दिनों के बाद उसी बेटी के सपनों को पंख लगने जा रहा है। वहां का बच्चा-बच्चा जानता है कि शिवांगी बचपन से ही हर बाधा को चुनौती के रूप में लेती थी।

चलते-चलते यह भी जान लें कि शिवांगी के पिता हरिभूषण सिंह फतेहाबाद गांव (प्रखंड- पारु) के निवासी हैं जो वर्तमान में यमुना बालिका उच्च विद्यालय में एचएम हैं। साथ ही यह भी कि पठन-पाठन के साथ-साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में दिलचस्पी रखने वाली शिवांगी मुजफ्फरपुर शहर में भगवानपुर इलाके के सर गणेश दत्त मोहल्ले की रहने वाली है जो ट्रेनिंग के दरमियान कॉकपिट के अंदर एक तेज सीखने वाली तथा उड़ान भरने में प्रवीण शिवांगी अपने इंस्ट्रक्टर लेफ्टिनेंट कमांडर राहुल यादव को अपने अव्वल हुनर से संतुष्ट कर देती है।

 

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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

भारतीय चुनावी व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता लाने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार, 10 नवंबर 2019 को रात के करीब 9.30 बजे चेन्नई स्थित अपने घर में निधन हो गया। 86 वर्षीय शेषन पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने 1990 से 1996 के बीच चुनाव आयोग की कमान संभाली थी और अपनी निर्भीक कार्यशैली और अहम फैसलों से भारतीय चुनावी राजनीति की दिशा को निर्णायक मोड़ दिया था।
टीएन शेषन, जिनका पूरा नाम तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन था, तमिलनाडु कैडर के 1955 बैच के आईएएस ऑफिसर थे। उन्होंने 10वें चुनाव आयुक्त के तौर पर देश को अपनी सेवाएं दी थीं। उन्हीं के कार्यकाल में चुनावों में मतदाता पहचान पत्र के इस्तेमाल की शुरुआत हुई, लोगों ने आचार संहिता का मतलब समझा, पर्यवेक्षकों को काम की आजादी और वोटरों को सुरक्षा मिली, हौसला बढ़ा तो लोकतंत्र में भरोसा भी बढ़ा और चुनाव आयोग की शक्ति और सार्थकता से पूरा देश वाकिफ हुआ। उन्हें रेमन मैग्सेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।
एक वक्त ऐसा था जब देश भर के नेता टीएन शेषन से खौफ खाते थे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश-बिहार में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करवा कर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करवाए थे। 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए तो उन्होंने चुनाव की तारीखों को चार बार आगे बढ़ा दिया था। शेषन थोड़ी-सी गड़बड़ होने पर भी चुनाव रद्द कर दिया करते थे। चुनाव-प्रचार को लेकर भी वे जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते। बड़े-से-बड़े नेता को भी चुनाव-प्रचार की सीमा खत्म होने पर वे सभा नहीं करने दिया करते। अधिकारियों के प्रति भी वे काफी सख्त थे। कर्तव्य-पालन में कोई चूक उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ करती।
बता दें कि टीएन शेषन का जन्म 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले के थिरुनेल्लई में हुआ था। पलक्कड़ से स्कूल की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स में ग्रैजुएशन किया। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में उन्होंने तीन साल डेमॉन्स्ट्रेटर के तौर पर भी काम किया और साथ ही साथ आईएस की तैयारी भी करते रहे। आईएएस की परीक्षा पास करने के उपरांत वे एक फेलोशिप पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पढ़ाई करने चले गए, जहां उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की। 1989 में वे देश के 18वें कैबिनेट सचिव बने। मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व उन्हें प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के कार्यकाल में मिला था।
देशसेवा, कर्तव्यपरायणता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बेमिसाल प्रतीक टीएन शेषन को ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि..!

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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 में चौंकाने वाले खुलासे

टाटा ट्रस्ट के द्वारा जारी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक आम नागरिकों को न्याय मुहैया कराने के मामले में महाराष्ट्र राज्यों की सूची में शीर्ष पर है। वहीं, केरल दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, पंजाब चौथे और हरियाणा पांचवें स्थान पर है। ये तो हुई बड़े राज्यों की बात। छोटे राज्यों की बात करें तो एक करोड़ से कम जनसंख्या वाले राज्यों में गोवा पहले, सिक्किम दूसरे और हिमाचल प्रदेश तीसरे स्थान पर है।

बता दें कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 विभिन्न सरकारी संस्थाओं जैसे पुलिस, न्यायपालिका, कारागार और कानूनी सहायता पर आधारित है। टाटा ट्रस्ट ने इस रिपोर्ट को सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन काउज, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव समेत कई संस्थानों की मदद से तैयार किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 18,200 जज हैं और करीब 23% सीटें खाली हैं। रिपोर्ट से यह तथ्य भी सामने आया कि जेलों में क्षमता से अधिक 114% कैदी हैं जबकि इनमें से 68% कैदी अंडरट्रायल हैं।

टाटा ट्रस्ट की यह रिपोर्ट हमें बताती है कि विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निम्न स्तर पर रहा है। देशभर में न्याय और कानून व्यवस्था में महिलाओं की संख्या काफी कम है। जेल कर्मचारियों में 10% महिलाएं हैं। हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट के सभी जजों में महिला जज 26.5% हैं।

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एमबी लोकुर ने कहा कि रिपोर्ट में हमारी न्यायिक व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गई हैं। न्यायिक व्यवस्था के समक्ष मुख्यधारा के मुद्दों पर न्याय देने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ये मुद्दे हमारी सोसाइटी, सरकार और अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त

दीपावली पर फोड़े गए पटाखों और पंजाब-हरियाणा में लगातार जलाई जा रही पराली के कारण राजधानी दिल्ली और इससे सटे गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद जैसे दर्जन भर शहरों में वायु गुणवत्ता स्तर (Air Quality Index) 800 से 1000 के आसपास बना हुआ है।
गौरतलब है कि वायु गुणवत्ता मापने के लिए शहर में लगाई गई मशीनें 500 तक AQI माप सकती हैं, जबकि रविवार सुबह दिल्ली और आसपास के शहरों में AQI 1200 के पार चले जाने के कारण मशीनें तक जवाब दे गईं। ऐसे में स्थिति भयावह हो चली है। आँखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतें आम हो गई हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इससे ज्यादा प्रभावित हैं। एहतियातन दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 5 नवंबर तक सारे स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खराब मौसम और स्मॉग के कारण वायु सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
उधर केन्द्र सरकार लगातार प्रदूषण से बने हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तमाम कारकों मसलन निर्माण कार्यों, कूड़ा जलाने और पराली जलाने पर सख्ती की तैयारी की जा रही है। प्रदूषण से निपटने के लिए 300 टीमें लगातार काम कर रही हैं। राज्य सरकारों को प्रदूषण में कमी लाने के लिए सारे संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकारी स्तर पर जो भी प्रयास हो रहे हैं, वे अपनी जगह हैं; जरूरत इस बात की है कि इस विकट स्थिति के लिए हम सबको आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी और कुछ संकल्प लेने होंगे ताकि हम अपनी प्रकृति और परिवेश की रक्षा कर सकें। बिहार सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किया गया जल-जीवन-हरियाली अभियान वास्तव में इन्हीं भयावह स्थितियों से निपटने और हमारी भावी संततियों को सुरक्षित रखने की कोशिश है। देखा जाए तो ऐसे अभियान की जरूरत पूरे देश में है।

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