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पद्मश्री फूलबासन बाई यादव ने केबीसी कर्मवीर में जीती 50 लाख

पढ़ा-लिखा या कम पढ़ा-लिखा या फिर अनपढ़ व्यक्ति ही क्यों ना हो, यदि वह कुछ करने की ठान लेता है तो उसे किसी भी ऊंचाई तक जाने में पहाड़ भी नहीं रोक सकता। पांचवी पास महिला फूलबासन बाई यादव की यह कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है।

बता दें कि कभी छत्तीसगढ़ के अपने गांव में भूखे-प्यासे बकरी चराने वाली फूलबासन अपनी लगन, मेहनत और  संकल्प के बल पर “मां बमलेश्वरी स्व सहायता समूह” संस्थान का अध्यक्ष बन 10 महिलाओं से 2001 में कार्य आरंभ करती है और आज उसी महिला समूह में 2 लाख से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। वह नारी सशक्तिकरण का एक अच्छा मिसाल पेश कर रही है। दो मुट्ठी चावल से शुरू किया गया यह महिला समूह आज करोड़ों में कमाई कर रही है।

जानिए कि उसी फूलबासन यादव को भारत सरकार ने 2012 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया, छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘जनाना सुरक्षा योजना’ का ब्रांड एंबेस्डर बनाया और 2014 में श्रीमती यादव को ‘महावीर फाउंडेशन पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया। फिलहाल फूलबासन बाई यादव ‘पहरेदारी’, ‘नशा मुक्ति’ व ‘खुले में शौच बन्दी’ के ऊपर तूफानी अभियान चला रही है।

ऐसी संकल्पयुक्त फूलबासन को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने केबीसी कर्मवीर में एक्ट्रेस रेणुका शहाणे को सहयोगी बनाकर मौका दिया और दोनों ने अपनी बुद्धिमत्ता से वो कर दिखाया कि फूलबासन यादव 50 लाख जीतने वाली इस सीजन की पहली कंटेस्टेंट बनी। छत्तीसगढ़ के जिला राजनंदगांव के छोटे कस्बे सुकुलदैहान की अद्भुत संकल्पी फूलबासन ने केबीसी के महानायक से कहा कि 13 साल की उम्र में वह ससुराल आ गई और कई दिनों तक ससुराल में भी भूखे सोना पड़ा। गरीबी के बीच होते हुए भी कुछ करने की इच्छा मन में जागी और महिला समूह की शुरुआत की। सबसे पहला काम यही किया फुलबासन ने कि सभी महिलाओं के अंदर से भय के भूत को भगाया और काम करने की लगन पैदा की। उसी मेहनत और लगन के चलते फूलबासन अपने स्व सहायता समूह द्वारा आज डेयरी, बकरी पालन, मछली पालन एवं खाद् कंपनी आदि चला रही है और लाखों महिलाओं को रोजगार दे रही है।

चलते-चलते, फूलबासन बारंबार यह कहती रही कि गुलाबी साड़ी वाली इन महिलाओं की जिंदगी आरंभ में गुलाब की ही तरह कांटो के बीच पल रही थी। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के ‘केबीसी कर्मवीर’ को अनिवार्य रूप से देखने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने फूलबासन बाई की बातों को सुनकर उनकी सराहना की और उनके फैन हो गए। मधेपुरा के महानायक डॉ.मधेपुरी, जो जिले के कर्मवीरों को सदा सम्मानित करते रहे हैं, द्वारा लगे हाथ 107 वर्षीया वृक्ष माता पद्मश्री एस.थिमक्का की चर्चाएं भी बच्चों के बीच विस्तार से की गई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की थिमक्का संतानहीन होने के कारण वृक्षों के साथ मां-बेटे की तरह अटूट रिश्ता कायम करने में आज भी लगी है।

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भारत के हिमाचल प्रदेश में बनी ‘अटल सुरंग’ संसार की सबसे लंबी सुरंग

बिहार के गहलौत में पहाड़ काटकर रास्ता बनाने वाले दशरथ मांझी के संकल्प की तरह 10 हजार फीट की ऊंचाई पर 9 किलोमीटर लंबी ‘अटल सुरंग’ बनाकर भारत ने यह साबित कर दिया कि संकल्प यदि सबल हो तो पहाड़ भी रास्ता छोड़ देता है। भले ही इस सुरंग को तैयार होने में 10 वर्ष ही क्यों न लगे हों, परंतु इस अटल सुरंग के बनने से हिमाचल प्रदेश के मनाली से लद्दाख के लेह के बीच के सफर की 46 किलोमीटर घट गई और यात्रियों को 4 घंटे की बचत भी हो गई।

बता दें कि इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर कर्नल परीक्षित मेहरा ने कहा कि इस सुरंग को बनने हेतु 6 वर्ष के समय निर्धारित किए गए थे, परंतु समय-समय पर मौसम की गड़बड़ी से उत्पन्न बाधाओं के कारण लगभग 4 वर्ष अधिक यानि कुल 10 वर्ष का समय लग गया।ज्ञातव्य हो कि 1 साल में सिर्फ 5 महीने ही काम हो पाता था।

श्री मेहरा ने कहा कि मनाली और लेह को जोड़ने के लिए जो सपना देखा था वह पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि यह कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में पहला कदम था जिसे भारत सरकार ने भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे संकल्पी प्रधानमंत्री के नाम पर ‘अटल सुरंग’ रखा है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि इस अटल सुरंग को बनाने में 2 हजार 9 सौ 58 करोड़ रुपये  खर्च हुए। इस सुरंग की विशेषता यह है कि इसमें प्रत्येक 500 मीटर की दूरी पर इमरजेंसी एग्जिट बनाया गया है। प्रत्येक 150 सौ मीटर की दूरी पर 4-जी की सुविधा भी है। प्रत्येक 60 मीटर की दूरी पर सीसीटीवी लगाए गए हैं।

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केरल देश का पहला राज्य बना, जहाँ के सभी सरकारी स्कूल बने डिजिटल

केरल भारत का प्रथम राज्य बन गया है शिक्षा के आधुनिकीकरण के क्षेत्र में। भारत में पढ़ाई में सर्वाधिक शिक्षित राज्य केरल सदा नंबर वन पर रहा। आज की तारीख में केरल अब शिक्षा का पूरा पैटर्न बदल रहा है। केरल नया प्रयोग किया है-

यह कि केरल में सभी सरकारी प्राइमरी स्कूल तथा सेकेंडरी स्कूल पूरी तरह से डिजिटल हो गए हैं। केरल सरकार ने सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बना-बनाकर डिजिटल उपकरण भी दिए और पढ़ाई भी आरंभ कर दी है। जानिए कि केरल में 16 हजार सेकेंडरी और प्राइमरी स्कूलों में हाईटेक क्लासरूम और लाभ होगा। इन स्कूलों को पूरी तरह से डिजिटल करने पर केरल सरकार ने 595 करोड रुपए खर्च भी किए हैं।

चलते-चलते यह भी जान लें कि स्मार्ट क्लास अब वक्त की जरूरत बन रही है। स्लेट-पेंसिल की तो बात पीछे छूट चुकी है, अब तो ब्लैकबोर्ड का वक्त भी खत्म होता जा रहा है। अब बच्चे को ऑडियो-वीडियो माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। फिलहाल लैपटॉप, प्रिंटर, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और वेबकैम के जरिए पढ़ाई होने लगी है। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शैक्षणिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। केरल सरकार का यह कदम देश के कई अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन सकता है।

 

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मधेपुरा में बने शक्तिशाली रेल इंजन के चलते भारत बन गया विश्व का छठा देश

मधेपुरा रेल फैक्ट्री में देश का सबसे शक्तिशाली 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता वाली हाई स्पीड इंजन अधिकतम 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। अब कम से कम समय में मालगाड़ी से सामग्रियों और वस्तुओं को पहुंचाना संभव हो पाएगा। भारत इस तरह का शक्तिशाली इंजन निर्माण करने वाला संसार का छठा देश बन गया है।

बता दें कि आरडीएसओ लखनऊ एवं भारतीय रेलवे बोर्ड ने मधेपुरा रेल फैक्ट्री में बने इस शक्तिशाली इंजन को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की स्वीकृति दे दी है। हालांकि डिप्टी चीफ इंजीनियर (इलेक्ट्रिक) प्रभात कुमार ने कहा कि जिस रेलखंड के लिए 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन परिचालन की अनुमति होगी वहीं पर यह इंजन 120 किलोमीटर की स्पीड से चलेगी तथा जिस रेलखंड पर स्वीकृति 100 या 80 की होगी वहाँ उसी मुताबिक इस इंजन की स्पीड रहेगी।

बकौल मधेपुरा रेल कारखाने के डिप्टी चीफ इंजीनियर अनुराग कुमार- यह भी जानिए कि शुरू में कारखाने से प्रति माह 4 इंजन निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, परंतु अब हर माह 8 इंजन भारतीय रेल की पटरी पर चलाने के लिए निकाला जाने लगा है। मई माह से अब तक कुल 39 इंजन निकल चुका है। हाल ही में विगत 10 अक्टूबर 2020 को 4 एसी विद्युत इंजन निकाला गया था।

इस तरह की जानकारियां मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मधेपुरा के समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने इस रेल फैक्ट्री के निर्माण काल के तत्कालीन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल को याद किया जिनके सद्प्रयासों के चलते यह फैक्ट्री निर्धारित समय से पूर्व ही बनकर तैयार हो गई थी।

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देश को फिर एक बार जरूरत है संपूर्ण भारतीय डॉ.कलाम की- डॉ.मधेपुरी

सोचिए तो सही जिसे पद की ऊंचाई छू ना सका हो, जिसके जीवन में एक बार झांक लेने मात्र से ही गीता का कर्मयोग समझ में आ जाता हो और जिसके जीवन का हर पल सहजता व साधना का पर्याय बनकर भारत से यही कहता रहा हो कि बच्चे नैतिकवान होंगे तो भारत मजबूत बनेगा- ऐसी सोच वाले संपूर्ण भारतीय भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की जरूरत देश एक बार फिर महसूसने लगा है। ये बातें भारतरत्न डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने आज अपने ‘वृंदावन’ निवास पर उनकी 90वीं जयंती के अवसर पर खेल गुरु संत कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार की टीम को संबोधित करते हुए कही।

इस बार कोरोना के चलते डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क की बंदी के कारण इस कार्यक्रम को डॉ.मधेपुरी ने अपने वृंदावन निवास पर आयोजित किया और जिले के बालक एवं बालिका कबड्डी के लाइफलाइन अरुण कुमार को पाग, शाॅल आदि से सम्मानित किया। डॉ.मधेपुरी ने अरुण कुमार को कबड्डी के क्षेत्र में राजकीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर जिले को गौरवान्वित करने में लगे रहने हेतु सम्मानित किया है। विगत वर्ष खेल गुरु संत कुमार को डॉ.कलाम पार्क में डॉ.मधेपुरी ने सम्मानित किया था। डॉ.मधेपुरी प्रतिवर्ष उन्हें सम्मानित किया करते हैं जो जिले को गौरवान्वित करने में लगे रहते हैं।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों के बीच लड्डू बांटने के पूर्व गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम के शून्य से शिखर तक की कथा संक्षेप में सुनाई और बैडमिंटन खिलाड़ी प्रियरंजन ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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जानिये मधेपुरा में कहाँ-कहाँ ठहरते थे लोकनायक जयप्रकाश

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के विरुद्ध संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर मधेपुरा से प्रो.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी दो दर्जन युवाओं का नेतृत्व करते हुए 5 मार्च 1975 को दिल्ली पहुंचते हैं। वे अपने साथ प्रखर आंदोलनकारियों- विजय कुमार वर्मा, परमेश्वरी प्रसाद निराला, रामेश्वर प्रसाद यादव, दीनबंधु यादव, इंद्रनारायण प्रधान, उत्तम यादव, धीरेंद्र कुमार, जय किशोर, प्रसन्न, सियाराम, रामचंद्र, विजेंद्र, टेंगारी… .  आदि को लेकर तत्कालीन राजसभा सदस्य भूपेन्द्र नारायण मंडल के दिल्ली निवास 32 अशोक रोड पर ठहरते हैं। डॉ.मधेपुरी बताते हैं कि ऐसा लगता था जैसे सारा भारत ही जेपी के “दिल्ली चलो” आह्वान पर दिल्ली पहुंच गया हो।

डॉ.मधेपुरी ने जेपी को उनके जन्मदिन (11 अक्टूबर) पर याद करते हुए मौजूद बच्चों से यही कहा कि कभी  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने जेपी के लिए लिखा था-

जयप्रकाश नाम है देश की चढ़ती हुई जवानी का…..

आगे डॉ. मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा के विद्वान एवं वरिष्ठ वकील रहे कमलेश चरण भादुरी ने उन्हें बताया था कि जब 1953 में मधेपुरा-भागलपुर संसदीय क्षेत्र के बाय-इलेक्शन में जेबी कृपलानी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से उम्मीदवार बनाए गए थे तो भादुरी जी के घर में चुनाव प्रचार हेतु ठहरा करते थे- जयप्रकाश नारायण, डॉ.राम मनोहर लोहिया, अशोक मेहता, सुचेता कृपलानी, मधु लिमये…. आदि। कर्पूरी ठाकुर चुनाव प्रभारी एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल स्टार प्रचारक थे।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने बताया कि उन्होंने एसएनपीएम स्कूल के छात्र रहते हुए स्कूल के मैदान में जेपी और प्रभावती को चरखा चलाने के बाद लोगों से बातें करते हुए देखा और सुना। इतना ही नहीं, संपूर्ण क्रांति आंदोलन के दौरान जब जेपी का मधेपुरा आगमन हुआ था तो आंदोलनकारियों से बातें करने के बाद वे स्वतंत्रता सेनानी-वकील शशिनाथ राय के निवास पर ठहरते थे।

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कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सूबे में न दशहरे का आयोजन होगा और न लगेगा कहीं मेला

चारों तरफ कोरोना महामारी के कोहराम की वजह से इस बार ईद से लेकर रामनवमी और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों की रंगत फीकी पड़ गई है। और तो और कोरोना संक्रमण के साथ-साथ दुर्गा पूजा दशहरा के आयोजनों एवं मेले को विधानसभा चुनाव की गहमा-गहमी भी निकलने में लगी है।

बता दें कि बिहार सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर शुक्रवार को गाइडलाइन जारी कर दिया है- इस बार दशहरा का आयोजन नहीं होगा। कोरोना के कारण सूबे बिहार में कोई मेला नहीं लगेगा। इसके साथ-साथ लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दिया गया है। सामूहिक प्रसाद वितरण पर भी रोक रहेगी। पंडाल का निर्माण भी नहीं किया जा सकता है। गृह विभाग ने इस बाबत विस्तार से दिशा निर्देश जारी किया है।

दिशा निर्देश में विशेष निर्देश या भी दिया गया है कि रावण दहन का कार्यक्रम सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि कोरोना काल में कहीं भी भीड़ जमा नहीं किया जा सकता। जारी किए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आपदा-प्रबंधन अधिनियम की धारा 51-60 के प्रावधानों के अतिरिक्त भादवि की धारा 188 व अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चलते-चलते यह भी जानिए कि दुर्गा पूजा के आयोजनों पर रोक लगने के कारण राजधानी पटना के टेंट कारोबारियों को मायूस होना पड़ा। क्योंकि, इस बार भी पूजा पंडाल व्यवसायी फरवरी-मार्च में ही टेंट सजावट सामग्रियों की खरीदारी में पूंजी फंसा चुके थे और कोरोना के चलते उन पंडाल व्यवसायियों को अब अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।

 

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मुख्यमंत्री नीतीश ने केंद्रीय मंत्री रामविलास के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की

भारतीय राजनीति के बड़े हस्ताक्षर, प्रखर वक्ता, कुशल प्रशासक, लोकप्रिय राजनेता, मजबूत संगठनकर्ता एवं अत्यंत मिलनसार व्यक्तित्व के धनी केंद्रीय उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे लोकसभा सदस्य के लिए पहली बार हाजीपुर से 1977 में चुने गए थे और उनकी जीत इतने अधिक मतों से हुई थी कि वह जीत वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुई थी।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से अपनी आत्मीय संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि पासवान जी से हमारा बेहद पुराना रिश्ता था। केंद्रीय मंत्री एवं लोकप्रिय राजनेता रामविलास पासवान जी के निधन से मुझे व्यक्तिगत तौर पर काफी दुख पहुंचा है। उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

सूबे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री व लोकप्रिय राजनेता रामविलास पासवान की आत्मा को शांति तथा उनके परिजनों को दुख की घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने हेतु ईश्वर से प्रार्थना की है।

इसके अलावा पटना से लेकर दिल्ली तक की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के आलाधिकारियों एवं राष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री और महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भी शोक संवेदनाएं व्यक्त की गई। मधेपुरा में 70 के दशक में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ लीडर समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के मधेपुरा निवास पर उनके अत्यंत करीबी समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से पहली मुलाकात हुई थी तत्कालीन एस.एस.पी. विधायक रामविलास पासवान जी की, जिन्होंने मौसम वैज्ञानिक रामविलास जी के निधन को अपूरणीय क्षति कहा और शोकाकुल होकर उनकी आत्मा को शांति देने हेतु ईश्वर से प्रार्थना की।

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विश्व शिक्षक दिवस (5 अक्टूबर) से जुड़ी समस्याओं के निदान का लक्ष्य वर्ष 2030 तक

संसार में विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त है। शिक्षकों की समस्याओं में सुधार लाने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने का निर्णय 1966 में यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन दोनों मिला कर लिया था। परंतु, 1994 में यूनेस्को की सिफारिश पर लगभग 100 देशों के समर्थन के बाद से ही विश्व शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर से मनाए जाने की शुरुआत हो गई।

बता दें कि इस दिन छात्र अपने शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी विशेष योगदान के लिए सम्मानित करते हैं। प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर को यूनिसेफ, यूएनडीपी एवं अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन आदि द्वारा संयुक्त रूप से “विश्व शिक्षक दिवस” कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों को जानने एवं उससे जुड़ी समस्याओं को पहचानने हेतु वर्ष 2030 तक का लक्ष्य रखा है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि प्रतिवर्ष विश्व शिक्षक दिवस का एक ‘थीम’ होता है। इस वर्ष 2020 में विश्व शिक्षक दिवस का थीम है- “टीचर्सः लीडिंग इन क्राइसिस रीइमेजिंग द फ्यूचर।” यह भी कि समाज को बेहतर बनाने में शिक्षक वह जरिया होता है जो शिष्य को उसकी मंजिल तक पहुंचाता है, परंतु आज गुरु-शिष्य के रिश्ते में दूरी आ गई है। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भी अपनी कविता में इस तरह का भाव व्यक्त किया है-

शिक्षक समाज का सृजनहार, रे रक्षक रहवर रखवाला

कल तक था विद्यादानी वह, धन लूट न घर भरने वाला

आज क्या हुआ गुरु को, क्यों व्यसनों का दास हो गया

गुरु-शिष्यों के बीच फासला, धरती से आकाश हो गया

 

 

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देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1 लाख के पार

भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख पार कर गई है। सरकारी आंकड़े के अनुसार अब तक 1 लाख 305 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना कन्फर्म केस की संख्या 64 लाख 38 हजार से पार  हो चुकी है।

बता दें कि भारत में वर्तमान में 9 लाख 40 हजार से अधिक एक्टिव केस हैं। हाँ ! राहत की बात यह है कि भारत में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सबसे ज्यादा  राहत की बात यह है कि ठीक होने वालों की संख्या अब तक 53 लाख 95 हजार हो गई है।

जानिए कि विश्व में सर्वाधिक तबाही कोरोना ने अमेरिका में मचाई है। अब अमेरिका के प्रथम पुरुष एवं प्रथम महिला यानि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं उनकी पत्नी मिलेनिया ट्रंप   कोरोना ग्रस्त होकर आइसोलेशन में है। दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका कोरोना के सामने पस्त होता नजर आने लगा है। अमेरिका में अब तक 2 लाख 08 हजार 68 लोगों की मौतें कोरोना के कारण हो चुकी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि विश्व में कोरोना-तबाही को लेकर अमेरिका एक नंबर भारत, दो नंबर पर और ब्राजील तीसरे नंबर पर है। अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रंप, भारत का गृह मंत्री अमित शाह, ब्राजील का राष्ट्रपति बोल सोनारो, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स, रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुतीन, बोलीविया के राष्ट्रपति….. आदि बड़े-बड़े दिग्गज नेतागण भी कोरोना की चपेट में आने से खुद को नहीं बचा पाए।

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