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मदर्स डे: कुछ अनुभूतियां

मां से छोटा
और ताकतवर
शब्द कोई और हो… तो बताना..!

गम को छिपाकर
वो कहां रखती है
गर तुम्हें मालूम हो… तो दिखाना..!

मौत के रास्ते हैं बहुत
ये मैंने, तुमने, सबने जाना
पर बात जब सृजन की हो
मां की कोख में ही होता है आना..!

मां अनपढ़ हो तब भी
गणित में बड़ी दिलदार होती है
दो रोटी मांग कर देखो
वो हरदम चार देती है..!

साल में एक दिन
मदर्स डे आता है
सब कहते हैं आज
मां का दिन है
कोई तो बतलाए
दिन कौन-सा मां के बिन है..!

ईश्वर ने सृष्टि को रचकर
उसे करीने से सजाया
पर हर बच्चे को पालने में
स्वयं को सक्षम नहीं पाया
तब हारकर उसने मां को बनाया..!

मां वो है
जो बच्चों के पथ में फूल बिछा
स्वयं कांटों पर चल लेती है
मां वो है
जो बच्चों के आज की खातिर
अपना सारा कल देती है..!

सोचो किस कदर वही मां
खून के आंसू रोती होगी
जब घर के बंटवारे में
छाती के टुकड़े ढोती होगी..!

धरा-आसमां बंट जाए सब
मां कब-कहां बंटती है
गोद इतनी विशाल उसकी
पूरी कायनात उसमें अंटती है..!

[डॉ. मधेपुरी की कविता]

 

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बेटे की शादी पर मिले और खूब मिले लालू-नीतीश

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप और पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या की शादी ने यह बात एक बार फिर स्पष्ट कर दी कि सियासत अपनी जगह है और व्यक्तिगत संबंध और भारतीय संस्कार अपनी जगह। यह बात खासकर यहां लालू और नीतीश के संदर्भ में है। इस हाई प्रोफाईल शादी में जुटे तो देश भर के कई दिग्गज थे लेकिन सबकी निगाहें टिकी थीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर। महागठबंधन टूटने के बाद पहली बार उन्हें और लालू प्रसाद यादव को एक साथ किसी मंच पर होना था। इस बीच इनके संबंधों में जिस तरह की कड़वाहट देखने को मिली थी और खासकर महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी जिस तरह सोशल मीडिया पर हमलावर थे, उससे उत्सुकता और बढ़ गई थी। पर हुआ वही जो असल में होना चाहिए था।

नीतीश कुमार ना केवल तेजप्रताप की शादी में शामिल हुए, बल्कि पूरी आत्मीयता और सहजता के साथ वरमाला की पूरी रस्म के दौरान मंच पर ही मौजूद रहे। लालू ने भी गर्मजोशी दिखाने में कोई कसर ना छोड़ी। उन्होंने उठकर नीतीश का स्वागत किया और देर तक उनसे हाथ मिलाए रहे। यही नहीं, उनके सभी बच्चे बारी-बारी से चाचा नीतीश से मिले। जो नहीं मिले थे उन्हें राबड़ी ने बुला-बुला कर मिलाया। नीतीश और राबड़ी एक साथ एक सोफे पर बैठे थे, बिल्कुल देवर-भाभी की तरह। मीसा से लेकर तेजस्वी तक आए और मां और चाचा नीतीश के बीच बैठ कर तस्वीर खिंचवाई। बगल के सोफे पर लालू राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ बैठे थे। अद्भुत दृश्य था ये।

बहरहाल, तेजप्रताप की शादी में देश के कई दलों के दिग्गज शामिल हुए। इन नेताओं में फारूक अब्दुल्लाह, अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव, अजीत सिंह, शरद यादव, प्रफुल्ल पटेल, शत्रुघ्न सिन्हा, दिग्विजय सिंह, हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी एवं डी. राजा प्रमुख थे। इन नेताओं ने भले ही कोई सियासी बयान नहीं दिया, मगर समारोह में एकसाथ इनकी मौजूदगी बहुत कुछ कह गई।

इस बेहद खास शादी में बाबा रामदेव और रामजेठ मलानी ने भी उपस्थिति दर्ज की। बिहार के सभी प्रमुख नेता – रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा आदि – मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पोलैंड अपनी यात्रा के कारण समारोह में नहीं आ सके।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ आईं उनकी पत्नी डिंपल यादव ने इस मौके पर बड़ी अच्छी बात कही कि “दुख और सुख जीवन का हिस्सा हैं। आते-जाते रहेंगे। हम लालू परिवार की खुशियों में शामिल होने आए हैं।” देश भर के दिग्गजों और राज्य के कोने-कोने से आए बीस हजार से ज्यादा मेहमानों की मौजूदगी यही तो बता और जता रही थी।

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सचमुच लकी हैं लालू की बहू

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की होने वाली बहू उनके और उनके परिवार के लिए भाग्यशाली साबित हुई हैं। जी हाँ, तीन दिन के पैरोल पर बेटे तेजप्रताप की शादी में शामिल होने पटना आए आरजेडी सुप्रीमो को आज मेडिकल ग्राउंड पर झारखंड हाईकोर्ट से छह हफ्ते की जमानत भी मिल गई है। इससे उनके घर में होने जा रही शादी की खुशी में जैसे चार चांद लग गए हों। बता दें कि हाईकोर्ट ने यह जमानत उनके बेहतर इलाज के लिए दी है। अब वे जहां चाहें अपना इलाज करा सकेंगे। निश्चित तौर इससे ना केवल उनका परिवार बल्कि उनके तमाम चाहने वाले बेहद सुकून की सांस ले रहे होंगे।

बहरहाल, गौरतलब है कि शनिवार 12 मई को लालू के बड़े बेटे व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की शादी पूर्व मुख्यमंत्री स्व. दारोगा राय की पोती व पूर्व मंत्री श्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या से होने जा रही है। शादी समारोह में शामिल होने को लेकर इससे पहले पूरा लालू परिवार उन्हें मिले महज तीन दिन के पैरोल से ही संतोष कर रहा था, ऐसे में छह हफ्ते की जमानत से होने वाली खुशी का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वाभाविक तौर पर इसे बहू के पैर पड़ने से पहले ही उसके शुभ लक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।

वैसे बहू के पैर के लक्षण की बात करें तो इसे लोग घर के अन्य सदस्यों से जोड़ कर भी देख रहे हैं। ऐश्वर्या के आने से पहले घर के अन्य सदस्यों के मामले में खुशी ने दस्तक दी है। उदाहरण के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री व लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को ही लें। अपने पिता की तरह तेजस्वी को भी कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने तेजस्वी यादव सहित चार नेताओं को जारी सीबीआई कोर्ट के नोटिस को खारिज कर दिया है। यह नोटिस बेतुका बयान के लिए जारी किया गया था, जिसके बाद सीबीआई कोर्ट के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका डाली गई थी।

खुशियों का सिलसिला यहीं नहीं रुकता। यहां यह भी स्मरणीय है कि इससे पहले लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती और उनके पति को दिल्ली की सीबीआई कोर्ट से जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उन्हें बिना इजाजत के विदेश ना जाने की शर्त पर जमानत दी थी।

चलते-चलते बता दें कि योगगुरु बाबा रामदेव ने भी ऐश्वर्या को भाग्यशाली बताया है। उन्होंने तेजप्रताप की दुल्हन और उसके परिवारवालों से मुलाकात की थी और कहा था कि वो लालू परिवार के लिए लकी साबित होंगी।

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शरद यादव की राज्यसभा सीट पर शीघ्र होगा चुनाव !

जदयू के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चुनाव आयोग से मिलकर शरद यादव की राज्यसभा सीट पर जल्द चुनाव कराने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में जदयू नेता केसी त्यागी, आरसीपी सिंह, ललन सिंह और संजय झा शामिल थे। माना जा रहा है कि शरद यादव की राज्यसभा सीट पर चुनाव आयोग शीघ्र चुनाव कराने का निर्णय ले सकता है।

जदयू नेता केसी त्यागी ने इस संदर्भ में कहा कि संविधान के मुताबिक छह महीने के भीतर रिक्त सीट पर चुनाव कराना जरूरी है और राज्यसभा के सभापति के फैसले के मद्देनजर शरद यादव की सीट को छह जून तक भरना जरूरी है। जदयू का तर्क है कि कोर्ट ने राज्यसभा के सभापति के फैसले को कोई स्थगन आदेश जारी नहीं किया है बल्कि राज्यसभा सदस्य के रुप में उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं को बरकरार रखने की बात कही है।

वहीं, जदयू नेताओं की चुनाव आयोग से मुलाकात पर शरद यादव ने कहा कि कोर्ट-मुकदमों में हमारा दिमाग नहीं चलता है। यह कोर्ट को तय करना है कि राज्यसभा के सभापति का फैसला कितना जायज और नाजायज है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में मजा नहीं आता है। मैं पहले भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुका हूं और फिर चुनाव लडूंगा। देशभर में विपक्ष को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश भी जारी है।

बता दें कि पार्टी लाइन से अलग कार्य करने व पार्टी विरोधी बयान देने के मुद्दे पर जदयू ने राज्यसभा के सभापति से शरद यादव की सदस्यता खत्म करने की अपील की थी और बाद में दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद शरद यादव की सदस्यता खत्म कर दी गई थी। उनकी सदस्यता खत्म होने के अब छह महीने पूरे होने वाले हैं, लिहाजा खाली सीट शीघ्र चुनाव हो जाना चाहिए। वैसे बताते चलें कि शरद यादव की सदस्यता मामले में 23 मई को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होने वाली है।

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जदयू ने लॉन्च किया अपना आधिकारिक वेब पोर्टल

जदयू संसदीय दल के नेता व राष्ट्रीय महासचिव श्री आरसीपी सिंह ने आज पार्टी मुख्यालय में जदयू के आधिकारिक वेब पोर्टल (www.janatadalunited.online) और वेब पत्रिका ‘जदयू संदेश’ का लोकार्पण किया। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, मुख्य प्रवक्ता श्री संजय सिंह, विधानपार्षद श्री नीरज कुमार, विधानपार्षद श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद श्री रामेश्वर महतो, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारीद्वय डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार, प्रवक्ता डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. भारती मेहता, श्री निखिल मंडल, श्री अरविन्द निषाद, श्रीमति श्वेता विश्वास, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार, महादलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री हुलेस मांझी, राष्ट्रीय कार्यालय सचिव श्री मिथिलेश प्रसाद सहित मीडिया सेल की पूरी टीम मौजूद रही।

JDU Media Cell President Dr.Amardeep demonstrating ( www.janatadalunited.online ) on the occasion of Launching of JDU Web Portal.
JDU Media Cell President Dr.Amardeep demonstrating ( www.janatadalunited.online ) on the occasion of Launching of JDU Web Portal.

लोकार्पण के उपरान्त अपने संबोधन में श्री आरसीपी सिंह ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि नेता, नीति, विचार और कार्यक्रम हर मामले में हमारी पार्टी बेजोड़ है और अब हम तकनीक में भी सबसे आगे होंगे। उन्होंने कहा कि ये समय आधुनिक संचार माध्यमों का है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि पार्टी के मीडिया सेल की मेहनत और मुस्तैदी से अब मीडिया के हर फॉर्मेट पर जदयू की शानदार उपस्थिति रहेगी।
लोकार्पण से पूर्व जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने विस्तार से वेब पोर्टल और वेब पत्रिका की जानकारी दी और उपस्थित लोगों को इनकी खूबियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज से हमारी पार्टी एक नए युग में प्रवेश कर रही है। पार्टी के विचार और संस्कार को अब तकनीक की ताकत मिल गई है। मधेपुरा अबतक के पाठकों के लिए यहां ध्यातव्य है कि जदयू के लिए इस अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देने वाले डॉ. अमरदीप मधेपुरा से ताल्लुक रखते हैं।
बहरहाल, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय ने कहा कि डॉ. अमरदीप के नेतृत्व में जदयू मीडिया सेल ने पार्टी हित में तकनीक का बेहतरीन उपयोग किया है। ये बदलते समय की मांग थी, जिसे जदयू मीडिया सेल ने अपने गठन के कुछ दिनों के अन्दर पूरा किया है। मुख्य प्रवक्ता श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी ने जनहित के कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं लेकिन प्रचार में हमलोग पीछे रह जाते थे। ये कमी अब दूर हो जाएगी। विधानपार्षद व प्रवक्ता श्री नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी का वेब पोर्टल और वेब पत्रिका ये सिद्ध करने में सहायक होंगे कि हमलोग पॉलिटिक्स विद डिफरेंस करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में पार्टी के मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार ने श्री आरसीपी सिंह सिंह सहित सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मीडिया सेल की ओर से श्री राहुल सिन्हा, श्रीमति राधा रानी, श्री आशुतोष सिंह राठौड़, श्री रविन्द्र नाथ मिश्रा, श्री राजेश कुमार, श्री विकास कुमार सिंह, श्री जीतेन्द्र यादव, श्री सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।

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बहुत खास होगा दिल्ली का बिहार सदन

बुधवार, 2 मई को मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को दिल्ली के द्वारका सेक्टर-19 में नए बिहार राज्य अतिथि गृह ‘बिहार सदन‘ का शिलान्यास किया। शिलान्यास का कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भारतीय परम्परा के अनुसार नारियल फोडकर व शिलापट्ट का अनावरण कर हुआ। दो एकड़ में बनने जा रहा यह भव्य भवन दिल्ली में ‘बिहार भवन‘ एवं ‘बिहार निवास‘ के बाद बिहार राज्य का तीसरा गेस्ट हाउस होगा। शिलान्यास के उपरान्त मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सदन आधुनिक एवं प्रगतिशील बिहार की छवि प्रस्तुत करेगा। इस भवन के निर्माण से दिल्ली में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं बिहार के निवासियों को काफी सुविधा मिलेगी।

Shilayanash of Bihar Sadan by CM Nitish Kumar in Delhi.
Shilayanash of Bihar Sadan by CM Nitish Kumar in Delhi.

गौरतलब है कि बिहार सदन बेसमेंट एवं भूतल के अलावा 10 (दस) फ्लोर का होगा। इसमें कुल 118 कमरे होंगे। इसके अलावा 200 लोगों के लिए कान्फ्रेंस रूम, 180 लोगों की क्षमता वाला कैफेटेरिया तथा 200 लोगों के लिए एक्जीविशन क्षेत्र रहेगा। ऊर्जा संरक्षण के उद्देश्य से सौर पैनल का लगाए जाएंगे और यह भव्य भवन पूरी तरह से भूकंपरोधी होगा। बता दें कि बिहार सदन का कुर्सी क्षेत्रफल 14771.30 वर्गमीटर होगा तथा राज्य योजना मद से इसके निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में 10 करोड़ तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 में 68.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

बहरहाल, इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमारे सारे अधिकारी एवं अभियंता इस भवन के निर्माण कार्य में तत्परता के साथ लगे हुए है। भवन निर्माण विभाग का कहना है कि एक साल छह महीने के अंदर यह भवन बनकर तैयार हो जाएगा। इस लक्ष्य के अनुसार अगर 02 अक्टूबर 2019 को इस भवन का उदघाटन हो जाए तो यह महात्मा गाँधी की 150वीं जन्मशती के उपलक्ष्य में अत्यंत हर्ष का विषय होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में हाल के वर्षो में आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित भवनों का निर्माण किया गया है जिसकी चर्चा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। बिहार म्यूजियम का निर्माण जवाहरलाल नेहरू पथ, जिसे आमतौर पर बेली रोड़ कहा जाता है, में किया गया है। यह पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इसके अतिरिक्त सम्राट अशोक कन्वेंशन सेन्टर, ज्ञान भवन तथा बापू सभागार का निर्माण भी उत्कृष्ट कोटि का हुआ है। साथ ही उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर ‘साइंस सिटी’ का निर्माण किया जा रहा है। इन सभी भवनों का निर्माण नवीनतम तकनीक पर आधारित है।

चलते-चलते बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सबसे पहले साठ के दशक में ‘बिहार भवन’ का निर्माण कराया गया था। उसके बाद राज्य के निवासियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का दिल्ली में प्रवास बढ़ने पर अस्सी के दशक में ‘बिहार निवास’ का निर्माण कराया गया और अब ‘बिहार सदन’ अस्तित्व में आने जा रहा है। इसे बढ़ते बिहार की बड़ी बानगी कहें तो गलत ना होगा।

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बेटियों के जन्म पर राज्य सरकार करेगी ढाई हजार करोड़ की बारिश

सूबे की नीतीश सरकार ने बाल विवाह पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है | अब डेढ़ करोड़ बच्चियों पर प्रतिवर्ष लगभग ढाई हजार करोड़ रुपयों की बारिश करेगी राज्य सरकार | कैबिनेट की विशेष बैठक में “मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना” को मंजूरी दे दी गई है | बच्चियों के जन्म से लेकर इंटर और ग्रेजुएशन करने की शर्तों के साथ सारी नई योजनाएं इसी माह से लागू कर दी जायेंगी | हाँ ! सारे माता-पिता यह याद रखें इस योजना का लाभ परिवार के दो बच्चों तक ही सीमित रहेगा |

बता दें कि घर में बेटी के जन्म लेते ही राज्य सरकार की ओर से माता-पिता के बैंक खाते में 2000 रु जमा दिये जायेंगे | आगे 1 वर्ष की उम्र में उसका आधार लिंक होने के साथ-साथ टीकाकरण पूरा हो जाने पर (1000 + 2000) कुल 3000 रु जमा दिये जायेंगे यानी बेटी की उम्र 1 वर्ष होते ही माता-पिता के बैंक खातों में लगभग 5000रु मुख्य सचिव द्वारा जमा दिये जायेंगे |

यह भी जानिए कि लड़की के अविवाहित होने की शर्त के साथ ही इंटर पास करने पर राज्य सरकार उसे 10,000 रु देगी | इसके अलावे लड़की के ग्रेजुएशन करने पर 25,000 रु दिये जायेंगे जबकि ग्रेजुएशन में लड़की के विवाहित या अविवाहित होने की शर्त नहीं रखी गई है |

यह भी बता दें कि फिलहाल लड़कियों से जुड़ी योजनाओं पर 840 करोड रुपये सालाना खर्च होते हैं | नई योजनाओं के लागू होने पर यह रकम बढ़कर 2221 करोड़ यानी लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये हो जायेगी | यह भी जान लीजिए कि पूर्व में बच्चियों को सैनेटरी नैपकिन के लिए 150 रूपये दिये जाते थे जिसे अब 300रु कर दिये जायेंगे | इस तरह प्रत्येक बच्ची को जन्म से लेकर (ग्रेजुएशन करने तक राज्य सरकार द्वारा कुल 54,100 रुपए दिये जायेंगे |

फिलहाल शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं के लिए पोशाक योजना, साइकिल योजना, छात्रवृत्ति योजना और मेधावृत्ति योजना से कक्षाओं में लड़के एवं लड़कियों का अनुपात लगभग बराबर हो गया है और आगे मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना लागू होने पर महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक सशक्तिकरण और उनके समानता के अधिकार को सुदृढ़ होने का अवसर प्राप्त होता रहेगा…….|

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एम्स से छुट्टी पर भड़के लालू ने लिखा पत्र

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से छुट्टी मिल गई है। गौरतलब है कि लालू अपना इलाज कराने के लिए करीब एक महीना पहले एम्स में भर्ती हुए थे। एम्स प्रशासन ने अब उन्हें वापस जाने को कह दिया है, लेकिन एम्स द्वारा छुट्टी देना लालू को नागवार गुजरा। उन्होंने इस संबंध में बकायदा पत्र लिखकर एम्स प्रशासन से नाराजगी जाहिर की और कहा कि उन्हें अभी और इलाज की जरूरत है, लिहाजा उन्हें अभी एम्स में ही रहने दिया जाए।

एम्स से अपनी छुट्टी को ‘राजनीतिक दबाव’ बताने पर जोर दे रहे लालू प्रसाद यादव ने अपने पत्र में लिखा कि मुझे रांची मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली में अच्छे इलाज के लिए भेजा गया था। अभी भी मेरी तबीयत ठीक नहीं हुई है। मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मैं हृदय रोग, किडनी इन्फेक्शन, शुगर एवं कई बीमारियों से ग्रस्त हूं। कमर में दर्द है एवं बार-बार चक्कर आ रहा है। मैं कई बार बाथरूम में गिर भी गया हूं। इन सब बीमारियों का इलाज यहां चल रहा है। प्रत्येक नागरिक का यह मूलभूत संवैधानिक अधिकार है कि उसका समुचित इलाज उसकी संतु्ष्टि के अनुसार हो। पर ना जाने किस राजनीतिक दबाव की वजह से मुझे यहां हटाया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आरजेडी सुप्रीमो से मिलने एम्स पहुंचे। इस मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में लालू प्रसाद यादव हरे रंग के कुर्ते, उजले रंग के पायजामे और एक चप्पल में एक बड़े सोफासेट पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि राहुल गांधी उनके सामने बैठे हुए हैं। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि इस तस्वीर के सामने आने के बाद ही यह खबर आई कि एम्स प्रशासन ने उन्हें छुट्टी दे दी है।

बहरहाल, बता दें कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला से जुड़े अलग-अलग मामलों में जेल की सजा काट रहे हैं। जेल में तबीयत खराब होने के बाद उऩ्हें पहले रिम्स में भर्ती कराया गया था और फिर उन्हें दिल्ली के एम्स में लाया गया था, जहां उन्हें स्वास्थ्य लाभ के साथ ही ‘राजनीतिक लाभ’ भी मिल रहा था। स्वाभाविक है कि अब इसमें होने वाली संभावित कमी उन्हें परेशान करेगी।

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नीतीश की मोदी से मांग, ‘भारत रत्न’ मिले लोहिया को

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाजा जाए। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि 12 अक्टूबर को डॉ. लोहिया की पुण्यतिथि है, इसी दिन उन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अनुरोध किया है कि गोवा हवाई अड्डे का नामकरण भी डॉ. राम मनोहर लोहिया के नाम पर किया जाए क्योंकि पुर्तगालियों से गोवा को आजाद कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के जीवन से जुड़े कई किस्सों का भी अपने पत्र में जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि संसद में नेहरू की सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए लोहिया ने पूरे विपक्ष को गैर-कांग्रेसवाद की धुरी पर इकट्ठा किया और उनकी कोशिशों की वजह से देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बन सकी।

सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह की मुहिम में लगे प्रधानमंत्री को उन्होंने खास तौर पर याद दिलाया कि ‘लोहिया ने गांवों में महिलाओं के लिए दरवाजा बंद शौचालयों के निर्माण की मांग को लेकर लगातार मुहिम चलाई और तत्कालीन सरकार पर दबाव भी बनाते रहे।’ नीतीश ने लिखा, डॉ. लोहिया नेहरू विरोधी थे और उनका कहना था कि यदि नेहरू सभी गांवों में महिलाओं के लिए शौचालय बनवा दें तो मैं उनका विरोध करना बंद कर दूंगा। लोहिया ने स्वच्छता और स्त्री स्वास्थ्य के लिए हमेशा प्रयास किया।

महिलाओं के लिए बिहार में आरक्षण समेत कई ऐतिहासिक कदम उठाने वाले मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए ‘उज्जवला योजना’ लागू करने वाले प्रधानमंत्री को आगे लिखा कि किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों की औरतों के लिए धुआंमुक्त चूल्हों की तकनीक को प्रत्येक रसोई में पहुँचाने की खातिर भी लोहिया की मजबूत आवाज संसद में और सड़कों पर लगातार गूंजती रही। पिछली सदी के मध्य में भारत की तत्कालीन सरकार और समाज को इन बिन्दुओं पर जागृत करना उनकी दूरदृष्टि का परिचायक है। इसके अलावा नीतीश कुमार ने भारत की आजादी की लड़ाई में लोहिया के योगदान और अमेरिका की रंगभेद नीति के खिलाफ उनके विचारों की चर्चा भी अपने पत्र में की।

इस तरह प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. लोहिया के द्वारा किए कई महत्वपूर्ण कार्यों की याद दिलाते हुए उनके विज़न और अतीत के साथ-साथ वर्तमान में भी उनकी प्रांसगिकता को बड़ी मजबूती से रेखांकित किया। उनकी मांग पर केन्द्र की मोदी सरकार चाहे जब फैसला करे, लेकिन कहना गलत ना होगा कि इस बहाने देश भर में लोहिया पर एक सार्थक बहस और चर्चा तो छिड़ ही गई है। लोहिया जैसे युगपुरुष के विचार पार्टी ही नहीं, राज्य व देश की सीमाओं से भी परे हैं और समाजवाद के इस पुरोधा हेतु ‘भारत रत्न’ की मांग करने के लिए नीतीश कुमार नि:संदेह साधुवाद के पात्र हैं। यहां स्मरणीय है कि इससे पहले नीतीश कुमार बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री व देश के समाजवादी नेताओं में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर को भी ‘भारत रत्न’ देने की मांग का समर्थन कर चुके हैं।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार के अतुल प्रकाश को यूपीएससी में चौथा स्थान

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 2017 में सिविल सर्विसेज की लिखित परीक्षा और 2018 में इंटरव्यू के आधार पर अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। सफल उम्मीदवारों की सूची में हैदराबाद के अनुदीप दुरिशेट्टी को प्रथम स्थान मिला है। वहीं, दूसरे नंबर पर अनु कुमारी और तीसरे पर सचिन गुप्ता हैं। बिहार के अतुल प्रकाश ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया है। जबकि पांचवां स्थान पवन कौशिक को मिला है।

गौरतलब है कि प्रथम पांच में स्थान बनाने वाले अतुल प्रकाश आइआइटियन हैं और मूलत: बिहार के आरा के रहने वाले हैं। उनके पिता एके राय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में हाजीपुर जोन में मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

यूपीएससी के टॉपर दुरिशेट्टी अनुदीप गूगल में काम कर चुके हैं। वे साल 2011 में बिट्स पिलानी से ग्रैजुएट हैं। उन्होंने 2013 में भी यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की थी। उस साल उन्हें 790वां स्थान मिला था और वर्तमान में वे भारतीय राजस्व सेवा के अंतर्गत असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के रूप में पदस्थापित हैं।

बता दें कि इस साल कुल 990 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। इनमें सामान्य श्रेणी के 476, ओबीसी के 275, अनुसूचित जाति के 165 तथा अनुसूचित जनजाति के 74 अभ्यर्थी शामिल हैं। जबकि रिजर्व सूची में कुल 132 अभ्यर्थी हैं। चलते-चलते यह भी बता दें कि इस साल आइएएस के 180, आइएफएस के 42, आइपीएस के लिए 150, सेंट्रल सर्विस ग्रुप ‘ए’ के लिए 565 तथा ग्रुप ‘बी’ के लिए 121 पदों पर नियुक्ति होनी है।

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