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छठ व्रतियों ने कोरोना संक्रमण दूर करने की मांगी दुआएं

कोरोना संक्रमण के बावजूद सैकड़ों छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ ! कोरोना के खौफ पर भारी पड़ी छठी मैया के प्रति आस्था ! जिले भर में आस्था के साथ उमंग भरे माहौल में महापर्व छठ का समापन तो हो गया, परंतु जिले के 13 प्रखंडों में शनिवार को सवेरे उत्सव भरे माहौल में सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पण करते समय व्रतियों ने छठी मैया से कोरोना संक्रमण दूर भगाने की दुआएं मांगी।

बता दें कि सैकड़ों छठ घाटों पर  गूंजते रहे छठी मैया के गीत। घाटों के अलावे पूरा क्षेत्र ही छठ-गीतों से गूंजता रहा। किसी का मुंह मास्क से ढका नजर नहीं आया, लेकिन हर किसी के जुबान पर छठी मैया के गीत मौजूद…। घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण कोरोना को लेकर सरकारी आदेश बेअसर और पुलिस प्रशासन बेबस। कहां मास्क और कहां सैनिटाइजर ? जबकि चतुर्दिक कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका गहराती जा रही है।

जानिए कि भारत में 17 सितंबर को 98 हजार नए मामले आए थे और घटते हुए 17 नवंबर को 30 हजार कोरोना संक्रमित पाए गए जबकि 21 नवंबर (शनिवार) को बीते 24 घंटे में लगभग 50 हज़ार नए मामले सामने आ गए…. जिसे देखते हुए कई राज्यों में लाॅकडाउन जैसी पाबंदियां लौटने लगी हैं। जहां गुजरात के अहमदाबाद में कोरोना के कारण हालात बिगड़ते देख 20 नवंबर (शुक्रवार) की रात 9:00 बजे से 23 नवंबर (सोमवार) के सुबह 6:00 बजे तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है, वहीं सूरत, राजकोट व वड़ोदरा शहर में केवल रात का कर्फ्यू लगाया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी 5 जिलों में रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया है। भला क्यों नहीं, सिविल सेवा के तीन दर्जन ट्रेनिंग ले रहे अफसर भी तो कोरोना के गिरफ्त में आ गए हैं।

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छठ महापर्व देता है- ‘स्वच्छता परमोधर्म:’ की सीख- डॉ.मधेपुरी

छठ सूर्योपासना का महापर्व है। इस पर्व की खासियत यह है कि इसमें डूबते सूरज की भी अर्चना की जाती है। शुक्रवार को संध्या 4:30 बजे शाम से ढलते सूर्य को और शनिवार को 6:09 बजे सुबह से उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया…..  श्रद्धालु छठ व्रतियों द्वारा।

इस अवसर पर समाजसेवी- मार्गदर्शक डॉ.भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी बताते हैं कि सूर्य स्वच्छता का प्रतीक है। इसकी किरणें हवा और पानी को तो साफ करती ही हैं साथ ही शरीर को भी निरोगी बनाती हैं। सूर्योपासना के पर्व छठ में संपूर्ण बिहार ही सात्विकता की चमक से खिल उठता है। राजधानी की गली-गली को भी सभी वर्गों के लोग मिलकर साफ कर लेते हैं। घर से लेकर घाट तक सब कुछ सात्विक नजर आता है। यहां तक कि इस अवधि में अपराध भी घट जाते हैं।

जानिए कि 4 दिनों का यह महापर्व छठ हमें यही सीख देता है कि स्वच्छता सबसे बड़ी सेवा है। देश के युवा वर्ग यदि संकल्प ले लें कि वे 4 दिनों की इस स्वच्छता को जीवन का आंदोलन बना लेंगे तो निश्चय ही छठ जैसी सफाई संपूर्ण देश के गांवों से शहरों तक पूरे वर्ष होती रहेगी और देशवासीगण अनेक रोगों से मुक्त भी रहेंगे।

चलते-चलते यही बता दें कि जापान में सूर्य दर्शन के बाद से नए काम शुरू होते हैं। यहां तक कि राजा भी सूर्य को ही साक्षी मानकर फैसले लेते हैं। ऐसा इसलिए कि भगवान सूर्य आदिदेव हैं और छठ उनकी अनादि काल से हो रही पूजा का एक रूप है। उगते और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने का महापर्व सूर्य के इन्हीं आदर्शों को समर्पित है।

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वे आए भी नहीं कि लौटाए भी गए

शिक्षा विभाग में प्रवेश करते ही शिक्षा सचिव द्वारा स्वागत में शिक्षा मंत्री को दिए गए पुष्पगुच्छ के पुष्प अभी मुरझाए भी नहीं थे कि विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव द्वारा ये बातें जोर से उछाली गई कि शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं और अनेक संगीन मामले भी चल रहे हैं।

इस तरह से मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर विरोध जताए जाने पर जीरो टॉलरेंस वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूछताछ करने के बाद तुरंत इस्तीफा देने को कहा। परंतु  शिक्षा मंत्री मेवा लाल ने सीएम नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

जानिए कि 16 नवंबर को जिस महामहिम राज्यपाल फागू चौहान ने राजभवन में मेवालाल चौधरी को शपथ ग्रहण कराया था उसी राजभवन में 19 नवंबर को मेवा की सेवा समापन हेतु अनुरोध करते हुए इस्तीफा भी भेज दिया नीतीश कुमार ने।

यह भी जानिए कि जहां मेवालाल के इस्तीफे पर राजद विधायक व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप ने विरोधी दल के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की तारीफ करते हुए अपने ट्वीट में लिखा है- “जियो मेरे खिलाड़ी, पहले बाॅल में ही मजबूत विकेट को पवेलियन भेज दिया।”

वहीं समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से इस संदर्भ में पूछे जाने पर साहित्यिक लहजे में बस इतना ही कहा-

मेवा की महफिल भी गई, उनके कदरदां भी गए।

वे आए भी नहीं कि लौटाए भी गए।।

 

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छठ महापर्व सांप्रदायिकता के बंधन को तोड़ता है- डॉ.मधेपुरी

भारत के कुछ पर्व-त्यौहार ऐसे हैं जिनमें सांप्रदायिकता के बंधन टूटते नजर आते हैं। ईद और छठ जैसे महापर्व की भी यही खासियत है। क्या हिंदू क्या मुस्लिम, सबकी आस्था ईद के चांद की तरह छठ के भगवान सूर्य की ओर झुक जाती है। गणेश चतुर्थी यानि चौर-चंदा में हिंदुओं द्वारा चांद देखने और पूजा करने की ओर का झुकाव भी तो इस बंधन को तोड़ता हुआ दिखता है। बापू के गांव में दुर्गा पूजा हो या मुहर्रम, सभी मिलकर मनाते हैं। एकता की खुशबू से सराबोर है बापू का गांव। गांव में नहीं दिखती धर्म की दीवार ! हिंदू-मुस्लिम मिलकर मनाते यह छठ का महात्योहार। इस व्रत के प्रति मुसलमानों की भी अगाध श्रद्धा देखी जाती है। कई गांव में तो  सौ  वर्षों से छठ व्रत करते आ रहे हैं वे।

बता दें कि यदि ऐसा नहीं होता तो पटना सिटी में हिंदू परिवारों के इस महापर्व छठ को इस कोरोना काल में अच्छी तरह संपन्न कराने में मुस्लिम महिलाओं द्वारा घाट की सफाई नहीं की जाती। जानिए कि यहां के आदर्श घाट पर मुस्लिम समुदाय की महिलाओं का झुंड लगातार कई सालों से छठ जैसे महापर्व के मौके पर सफाई करती आ रही है ताकि छठ व्रती महिलाओं को इस बाबत कोई परेशानी नहीं हो।

यह भी जानिए कि छठ हो या ईद, मुहर्रम हो या दुर्गा पूजा….. इन  पर्वों में हिंदू-मुस्लिम नहीं होता है साहब, वो तो सिर्फ नेताओं के चुनावों में ही होता है…. वरना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपने भजन में यह कभी नहीं बोलते- ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सम्मति दे भगवान…… या फिर संपूर्ण भारतीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम अपने पिता के साथ  मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद रामेश्वरम के शिव मंदिर की परिक्रमा हर रोज नहीं किया करते….. या फिर भारत रत्न डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे एवं छठ महापर्व को सांप्रदायिकता का बंधन तोड़ने वाला बताते रहने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी का दृष्टिकोण इस प्रकार के पवित्र सोच की चर्चा कभी नहीं करता-

होली-ईद मनाओ मिलकर,

कभी रंग को भंग करो मत ।

भारत की सुंदरतम छवि को,

मधेपुरी बदरंग करो मत ।।

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सूबे बिहार को और आगे ले जाने का प्रयास सतत् रहेगा जारी- नीतीश कुमार

सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करने के बाद यही कहा कि हम लोग अपने कर्तव्य को पूरी गंभीरता से निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ताओं से मिलना भी हमारा काम है। किसी को निराश नहीं होना चाहिए।

बता दें कि नई सरकार में नौ को पहली बार और दो को दूसरी बार मंत्री पद मिला है जिसमें उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद बिहार सरकार में पहली बार ही वित्त मंत्री बने हैं तथा प्रथम महिला उपमुख्यमंत्री रेणु देवी दूसरी बार सरकार में शामिल हुई हैं।

जानिए कि जहाँ नीतीश सरकार में शामिल 14 मंत्रियों में से 11 नए चेहरे को दी गई 26 विभागों की जिम्मेदारी, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को इस 17वीं विधानसभा के पहले सत्र के लिए प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। सभी नवनिर्वाचित विधायकों को 23 एवं 24 नवंबर को प्रोटेम स्पीकर श्री माँझी द्वारा शपथ दिलाई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष के विधिवत चुनाव होने तक श्री माँझी प्रोटेम स्पीकर के रूप में सदन का संचालन करते रहेंगे।

यह भी जान लेना जरूरी है कि जदयू के मंत्रियों का कुल विभागीय बजट 107348 करोड़ रुपये है जो भाजपा के मंत्रियों के विभागीय बजट से 43830 करोड़ रुपये से ज्यादे हैं और उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री तार किशोर ने सूबे के लोगों को सरकार के विकास की प्राथमिकता बताते हुए यही कहा कि सात निश्चय योजना पार्ट- 2 को सरजमीं पर उतारकर बिहार के साथ-साथ भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उपायों को धरातल पर उतारा जाएगा।

चलते-चलते यह भी कि जदयू के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश कुमार द्वारा कैबिनेट मंत्रियों के विभागों के बंटवारे पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि बिहार को रोशन करने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को पुनः ऊर्जा मंत्रालय देने, कुलपति रहे मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने, विधानसभा अध्यक्ष रहे विजय कुमार चौधरी को बापू के गांव के विकास का मंत्री बनाए जाने के साथ-साथ जदयू कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी को पुनः भवन निर्माण दिए जाने के साथ अपने पास गृह और डिप्टी सीएम को खजाने का जिम्मा देने पर कोटि-कोटि साधुवाद दिया है।

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बिहार में दो उपमुख्यमंत्री पहली बार और नीतीश ने सीएम की शपथ ली सातवीं बार

नीतीश बनने जा रहे हैं बिहार के दूसरे ‘केसरी’ पर कमी खलेगी सुमो की। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार तो मुख्यमंत्री बन गए सातवीं बार, परंतु सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीतीश तो वहीं रह गए और भाजपा ने पूरे घर को ही बदल दिया। राजनीति के गलियारों में फिलहाल यही आवाज गूंजती हुई सुनी जा सकती है कि क्या नीतीश-सुमो जैसा तालमेल नए उप मुख्यमंत्री द्वय (तार किशोर व रेणु देवी) बना पाएंगे या फिर बारंबार सुशील मोदी की कमी महसूसते रहेंगे नीतीश कुमार।

बता दें कि बिहार केसरी के नाम से विख्यात प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह के बाद सबसे लंबी अवधि तक बिहार के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड सातवीं बार सीएम की शपथ लेने वाले नीतीश के नाम होता दिख रहा है… और वर्तमान कार्यकाल में यदि सब कुछ ठीक रहा तो श्री बाबू को भी पीछे छोड़ देंगे नीतीश कुमार।

जानिए कि वर्तमान नीतीश सरकार में सीएम सहित कुल 15 मंत्रियों को महामहिम राज्यपाल फागू चौहान ने कल शपथ दिलाई है, जिसमें 14 में से 9 चेहरे नये हैं। जदयू ने तीन पुराने तो भाजपा ने दो पुराने चेहरों को दिया मौका। जदयू के 1990 से ही बिहार को रोशन करने वाले ऊर्जा मंत्री रहे विजेंद्र प्रसाद यादव, विधानसभा अध्यक्ष रह चुके विजय कुमार चौधरी जो पूर्व में कृषि मंत्री भी रहे हैं तथा तीसरे पुराने चेहरे हैं अशोक चौधरी जो पिछली एनडीए सरकार में भवन निर्माण मंत्री भी थे वहीं भाजपा ने पिछली सरकार में मंत्री रहे मंगल पांडे को मंत्री तथा एनडीए सरकार में कला संस्कृति एवं युवा मामले के मंत्री रह चुकी रेणु देवी को उप मुख्यमंत्री का पद दिया है।

यह भी कि सातवीं बार बिहार की बागडोर संभालने वाले नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मिथिलांचल का दबदबा है। जानिए कि 14 मंत्रियों में केवल मिथिलांचल के ही 5 मंत्री हैं। साथ ही नीतीश मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 5 विधान पार्षद होंगे जिसमें मंगल पांडे और संतोष सुमन दोनों मंत्री पूर्व से विधान पार्षद हैं और दो मंत्री अशोक चौधरी और मुकेश सहनी तो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। इन दोनों को भी कदाचित विधान परिषद के सदस्य मनोनीत कर लिए जाएंगे।

चलते-चलते यह जान लीजिए कि नीतीश सरकार जनता की सरकार है और 5 वर्षों तक जनहित के कार्यों में जुटी रहेगी, क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दोनों एकजुटता का संदेश देने के लिए ही तो आए थे।

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सातवीं बार बिहार के सीएम बने नीतीश कुमार

नीतीश की सातवीं शपथ के लिए सारा बिहार कर रहा था 4:00 बजे का इंतजार। बिहार के राजभवन में संध्या 4:30 बजे सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार। उन्हें मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई महामहिम राज्यपाल फागू चौहान ने।

बता दें कि राजभवन में एक  ओर मंचासीन दिखे शपथ दिलाने वाले महामहिम राज्यपाल और  सातवीं बार सीएम के पद की शपथ लेनेे वाले नीतीश कुमार। दूसरी ओर सामनेे की प्रथम पंक्ति में मौजूद दिखे- गृृृह मंत्री  अमित शाह, जेपी नड्डा, भूपेन्द्र यादव, वशिष्ठ नारायण सिंह, सुशील कुमार मोदी, आरसीपी सिंह, नरेंद्र नारायण यादव, डॉ.अमरदीप यादव….  आदि विशिष्ट जनों के साथ-साथ शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रीगण।

यह भी बता दें कि कार्यक्रम आरंभ होने से पूर्व राष्ट्रगान की धुन के साथ सभी अपने-अपने स्थान पर खड़े हो गए। धुन समाप्ति के साथ ही नीतीश कुमार को सीएम के पद एवं गोपनीयता की शपथ राज्यपाल फागू चौहान ने दिलाई। दो उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद एवं रेणु देवी ने शपथ ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार की बाईं ओर मंचासीन हुए और बाद में शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्रियों सहित पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रह चुके विजय कुमार चौधरी एवं अपने अनुभव से बिहार को रोशन करने वाले बिजली मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को उठकर सम्मान देते देखे गए सीएम एवं डिप्टी सीएम द्वय।

जानिए कि मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सहित कुल 15 मंत्रियों ने शपथ ली। सात बीजेपी कोटे से तथा पांच जदयू कोटे से मंत्री बने। उसी में एक हम पार्टी से और एक वीआईपी से मंत्री बनाए गए। आज जिन 15 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, वे हैं- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, अशोक चौधरी, मेवालाल चौधरी, शीला कुमारी, संतोष सुमन, मुकेश सहनी, मंगल पांडे, अमरेंद्र प्रताप सिंह, रामप्रीत पासवान, जीवेश मिश्रा और रामसूरत राय। अंत में शपथ ग्रहण समारोह की समाप्ति की घोषणा के साथ राष्ट्रगान की धुन पर सभी ससम्मान खड़े हुए दिखे।

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नया बिहार बनाने के लिए कल सीएम पद की शपथ लेंगे- सातवीं बार, नीतीश कुमार !!

बिहार में विधानसभा- 2020 का चुनाव संपन्न हुआ। एनडीए को 125, महागठबंधन को 110 एवं अन्य के खाते में 8 सीटें गई। एनडीए के चारों घटक दलों- जेडीयू, भाजपा, वीआईपी और हम के प्रतिनिधिगण महामहिम राज्यपाल फागू चौहान से आज मिले। एनडीए विधान मंडल द्वारा चयनित नेता नीतीश कुमार ने 125 विधायकों की सहमति पत्र के साथ राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया। कल ‘भैया दूज’ के दिन शाम 4:00 बजे बाद नीतीश कुमार….. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे…. सातवीं बार !!

बता दें कि आज संध्या 4:00 से पहले नीतीश कुमार के आवास पर भाजपा के दिग्गज नेता भूपेन्द्र यादव एवं  देवेंद्र फडणवीस व अन्य दो-दो बार मिले। इस मिलन में चर्चाएं हुई कि कैबिनेट कितना बड़ा होगा… मंत्री कौन-कौन बनेंगे तथा डिप्टी सीएम का पद सुशील मोदी की जगह किन्हीं और को दी जाएगी या वही रहेंगे।

यह भी बता दें कि पूर्व में कभी भी केंद्र से कोई पर्यवेक्षक सरकार गठन के समय नहीं आते थे। पहली बार केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भाजपा नेतृत्व द्वारा बिहार भेजा गया। एनडीए पर्यवेक्षक के रूप में राजनाथ सिंह ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की ताजपोशी का ऐलान तो कर दिया, परंतु डिप्टी सीएम पर चुप्पी साध ली। पूछे जाने पर नीतीश कुमार और सुशील मोदी भी चुप रहे जबकि दोनों के अंदर से यही आवाज निकलती रही———-  ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे।

जानिए कि एनडीए की बैठक में नीतीश कुमार ने खुद मुख्यमंत्री नहीं बनने की बात कही और भाजपा को ही मुख्यमंत्री चुनने को कहा, परंतु राजनाथ सिंह, भूपेन्द्र यादव आदि के कहने पर सीएम बनना स्वीकार किया। पुनः ऐसा लगने लगा है कि सुशील मोदी की जगह दो डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। एक होंगे- भाजपा विधानमंडल के नेता तार किशोर प्रसाद एवं दूसरी होंगी उपनेता श्रीमती रेणु देवी। एक महिला को डिप्टी सीएम बनाने के बाबत यह चर्चा होने लगी है कि इस चुनाव में एनडीए को आधी आबादी का सर्वाधिक मत मिला है, इसलिए प्रथम महिला डिप्टी सीएम के रूप में रेणु देवी को चुने जाने की जोरदार चर्चा हो रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस चर्चा को सुनकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए यही कहा कि एनडीए सरकार के होम करते हाथों को जलने से बचानेवाली आधी आबादी को डिप्टी सीएम का पद दिया जाना सर्वाधिक उचित कदम है….. इसके लिए नमो-नीतीश की जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री चाचा नेहरू की ऐसी उपेक्षा क्यों ?- डॉ.मधेपुरी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान 23 वर्षों तक ब्रिटिश शासन में कारागृह की यातनाएं सहने वाले एवं भारत की बेहतरी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन (14 नवंबर) पर ऐसी उपेक्षा क्यों ? भारत को आजादी दिलाने में सर्वाधिक कुर्बानियां देने वाले चाचा नेहरू को सम्मान देने में भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इतना मुश्किल क्यों हो रहा है ?

बता दें कि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री के जन्म दिवस सह बाल दिवस यानि 14 नवम्बर के दिन स्थानीय प्रतिष्ठित अखबारों में ना तो नेहरु जी का बच्चों के साथ एक भी चित्र कहीं देखने को मिला और ना उनके सम्मान में लिखी एक भी पंक्ति कहीं दिखी। डॉ.मधेपुरी ने पुनः क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि यदि स्थिति इस तरह बिगड़ती चली गई तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा ? क्या बच्चे ऐसी ही दीवाली मनाएंगे या लोकतंत्र के चारों चौखटों पर उम्मीद के दीये जलाएंगे…. ??

चलते-चलते यह भी बता दें कि बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू के अलावे मानवीय सेवाओं को ऊंचाई तक ले जाने वाले भारत रत्न मदर टेरेसा, जगदीश चंद्र बसु, होमी जहांगीर भाभा, सी वी रमण……. आदि को चौथे स्तंभ द्वारा जो सम्मान दिया जाना चाहिए उसमें निरंतर कमी ही नजर आ रही है। बकौल डॉ.मधेपुरी यह कि बच्चे जब तक अपने अतीत को नहीं जानेंगे तब तक वे ना तो अपने भविष्य को गढ़ पायेंगे और ना ही वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ पायेंगे।

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शहीद कैप्टन आशुतोष की देशभक्ति को मधेपुरा सदा याद रखेगा- डॉ.मधेपुरी

आज जिला मुख्यालय स्थित शहीद पार्क में शहीद कैप्टन आशुतोष का नाम शहीदी पट्ट पर जिले के सातवें शहीद के रूप में दर्ज कराया है समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। शहीद पार्क के शहीदी मंच के सामने डॉ.मधेपुरी की अध्यक्षता में एक श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया गया। उपस्थित जनों ने शहीद आशुतोष के चित्र पर बारी-बारी से पुष्पांजलि की और अपने-अपने संवेदनायुक्त उद्गार व्यक्त किए।

इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने तब के डीएम मो.सोहैल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि यदि इस शहीद पार्क का निर्माण नहीं हुआ होता तो देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीद कैप्टन आशुतोष को हम लोग किस तरह सम्मान दे पाते। डॉ.मधेपुरी ने वर्तमान डीएम नवदीप शुक्ला की संवेदनाओं को संदर्भित करते हुए कहा कि आपके (रविंद्र भारती जी के) इकलौते पुत्र की पूर्ति तो नहीं की जा सकती, परंतु कोई परेशानी होने पर मधेपुरावासी हर हाल में खड़े उतरेंगे।

अंत में  अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के इन सातों शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों की विस्तार से चर्चा की। जिनमें आजादी से पूर्व के दो…. शहीद बाजा साह एवं शहीद चुल्हाय यादव के साथ-साथ सभी स्वतंत्रता सेनानियों- यथा रासबिहारी लाल मंडल, यदुनाथ झा यदुवर, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कुदरतउल्लाह, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, कार्तिक प्रसाद सिंह, महताप लाल यादव, राम बहादुर सिंह आदि को याद किया। इस अवसर पर सुनील आर्ट द्वारा शहीद आशुतोष का नाम अंकित करने हेतु डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मौके पर अक्षय दीप, आदित्य कुमार, आद्या दीप, संजय कुमार, पप्पू कुमार, ललन यादव, सुनील कुमार गुप्ता, शिवनंदन कुमार साह, जगदीश राम आदि सहित ढेर सारे छोटे-छोटे नन्हे-मुन्ने मौजूद थे।

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