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बिहार में पंचायत चुनाव की घोषणा इसी महीने में हो सकती है

महामारी “कोरोना” को लेकर नीतीश सरकार पंचायत चुनाव की तिथि बढ़ाती जा रही है। दूसरी लहर तो कंट्रोल में आती दिख रही है। यदि स्थति यही रही तो इसी महीने पंचायत चुनाव की घोषणा हो सकती है।

बता है कि घोषणा के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सभी जिलों से प्राप्त चरणबार प्रखंडों की सूची के अनुसार कार्यक्रम तय किए जाएंगे। बिहार में 10 चरणों में चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है ।

पंचायत चुनाव  की खास बातें –

(1) पंचायत चुनाव ईवीएम और बैलेट बॉक्स दोनों से कराए जाएंगे जिसके लिए सभी जिलाघिकारियों को निर्देश दिया गया है।

(2) इस पंचायत चुनाव में एक बूथ पर अधिकतम 850 मतदाता ही मतदान करेंगे।

(3) प्रत्येक बूथ पर 15 से 20 मतदाता को ही लगाये गये पंक्ति में खड़े होने का मौका दिया जाएगा ……शेष मतदाता टेंट में बैठेंगे और अपनी पारी का इंतजार करेंगे।

(4) नगर निकाय में पंचायतों के क्षेत्र शामिल होने के बाद जिलाधिकारी नये सिरे से पंचायत, वार्ड एवं मतदान केन्द्रों का पुनर्गठन व नामकरण करेंगे।

(5) जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी हर हाल में कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन कराएंगे।

 

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विश्व जनसंख्या दिवस-2021, पर जागरूक करें लोगों को

पृथ्वी का क्षेत्रफल तो यथावत है,स्थिर है, बढ़ नहीं रहा है। परन्तु, पृथ्वी के सभी देशों में लोगों की जनसंख्या  बेतरह बढ़ती जा रही है। लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फलस्वरूप जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1989 के 11 जुलाई से विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत की गई , क्यांकि 1987 में दुनिया की जनसंख्य 5 अरब हो गई थी।

बता दें कि भारत मे जनसंख्या विस्फोट ने हमारे विकास को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। जितनी बड़ी जनसंख्या उतनी अधिक समस्याएँ । चाहे विश्व या भारत की जनसंख्या हो, तेजी से विकास करने के लिए जनसंख्या पर नियन्त्रण करना जरूरी है।

जानिए कि विश्व की जनसंख्या 1 अरब तक पहुंचने में हजारों वर्ष लगे, परन्तु बाद के दो सौ वर्षों में ही आबादी 7 अरब को भी पार कर गई । विश्व में इतनी आबादी के लिए संसाधन नहीं है, इसलिए जनसंख्या नियन्त्रण परम आवश्यक हो गया है। तभी तो ‘ हम दो-हमारे दो ‘ से लेकर गर्भ निरोधक दवाओं के इस्तेमाल और लैंगिक समानता जैसे सभी गम्भीर विषयों पर विमर्श होता रहा है। भला क्यों नहीं, कोविड-19 हमें बढ़ी हुई आबादी के दुष्परिणामों को अच्छी तरह समझा दिया, इसलिए जनसंख्या प्रबन्धन न सिर्फ देश बल्कि समस्त विश्व के लिए जरूरी हो गया है।

चलते-चलते यह भी कि समाजसेवी शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने विश्व जनसंख्या दिवस पर यही कहा  कि सभी राज्य यूपी के नक्शे कदम पर चलकर अपने संसाधनों के अनुरूप विकास करें और जनसंख्या पर नियंत्रण करने हेतु जागरूकता बढ़ाएं, कानून बनाएँ या केन्द्र को कानून बनाने हेतु अनुरोध करें।

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दुनिया में आबादी को लेकर क्या हो रहा है ?

जहां दुनिया के इन देशों – चीन, अमेरिका, जापान , इटली और रूस में घटती आबादी से निपटने के प्रयास हो रहे हैं,वहीं कई देशों में तो ये प्रयास बेअसर भी हो रहे हैं। कहीं –  कहीं तो बच्चे के जन्म होने पर उस परिवार को इंसेंटिव दिये जाते हैं।
बता दें कि चीन का ग्रोथ रेट फिलहाल न्यूनतम स्तर 0.53 पर आ गई है जबकि वहाँ “एक संतान नीति” को 2016 में ही खत्म कर दिया गया था। फिर दो संतान नीति भी बेअसर रहा। अब तो वहाँ तीन बच्चों को जन्म देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जानिए कि अमेरिका में 1920 के बाद आबादी की रफ्तार न्यूनतम स्तर पर रही जो 2020 में प्रयास करते रहने पर 35% पर ठहर गयी है। वहीं जापान में के सदी के अन्त तक 12 करोड़ से घटकर 5 करोड़ पर आबादी ठहर जाने वाली है।

यह भी कि यूरोप के इटली की आबादी 6 करोड़ से घटकर 2 करोड़ पर ठहरने वाली है जहाँ फर्टिलिटी रेट 1 .3 है। वहीं बच्चों के जन्म पर लगभग एक लाख का इंसेंटिव दिया जाता है। रूस में भी काफी समय से आबादी बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।

जानिए कि दुनिया के 23 देशों की कुल आबादी आज की तुलना में आधी हो जाने का अनुमान है। यहां तक कि दुनिया के सबसे सघन आबादी वाले हे हांगकांग के रिचलैंड गार्डन क्षेत्र की आबादी भी पहली बार घटी है।

बावजूद इसके भारत की आबादी 2048 तक शीर्ष पर होने की चर्चा है,क्योंकि भारत के 9 राज्यों में फर्टिलिटी रेट अभी भी 2 से अधिक है। बिहार में तो यह दर सबसे ज्यादा 3.23 है तथा यूपी में यह दर 2 .76 है। हाॅ ! भारत में एक दर्जन ऐसे भी राज्य हैं जहाँ जन्मदर 2 से कम है। ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या वाले राज्यों में भी प्रजनन दर कम है।

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टोक्यो ओलंपिक खेलों के लिए 26 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा

टोक्यो में 31 जुलाई से 9 अगस्त तक चलने वाली ओलंपिक में एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने 26 सदस्यीय पुरुष व महिला टीमों की घोषणा कर दी है।

बता दें कि भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अध्यक्ष एजे सुमारिवाला ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए यही कहा है कि भारत के लिए यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात है कि एक दर्जन एथलीटों के साथ-साथ हमारी 4X400 मीटर मिश्रित रिले टीम ने खुद ही ओलंपिक टिकट कन्फर्म करने हेतु विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित प्रवेश मानकों को हासिल कर लिया है।

यह भी जानिए कि दुति चंद (महिला 100मी, 200 मी.), एम पी जाबिर (पुरुष ५०० मी.बाधा दौड़), गुरप्रीत सिंह (पुरुष 50 कि.मी रेस वॉक ) तथा अन्नू रानी (महिला, भाला फेक) को उनकी रेकिंग के आधार पर ही ओलंपिक टिकट प्राप्त हुआ है।

चलते-चलते यह भी जान लीजिए कि क्रिकेट के भगवान और भारतरत्न सचिन  तेंदुलकर ने ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रहे भारतीय खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की है तथा टोक्यो ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं भी व्यक्त की है।

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केन्द्रीय कैबिनेट का विस्तार: मोदी ने किया महाफेरबदल

बहुप्रतीक्षित केन्द्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार आखिर हो ही गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबको चौंकाते हुए बुधवार को अपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया। विस्तार में जहां बिहार से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह और लोजपा संसदीय दल के नेता पशुपति पारस को जगह मिली, वहीं बिहार के ही रविशंकर प्रसाद समेत दर्जन भर मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई। इसके अलावा राज्यमंत्री रहे आरा के सांसद राजकुमार सिंह का कद बढ़ाते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

बुधवार रात को ही विभागों की भी घोषणा कर दी गई। आरसीपी सिंह को जहां इस्पात मंत्रालय मिला, वहीं पारस को खाद्य प्रसंस्करण की जिम्मेवारी दी गई। भाजपा के आरके सिंह अब ऊर्जा विभाग के कैबिनेट मंत्री होंगे, तो गिरिराज सिंह को दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज का जिम्मा दिया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग में राज्य मंत्री रहे भाजपा सांसद अश्विनी चौबे अब उपभोक्ता मामलों तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री होंगे।

ध्यातव्य है कि राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में कुल 43 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्यमंत्री शामिल हैं। सात राज्यमंत्री पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाए गए। मोदी सरकार में अब प्रधानमंत्री समेत कुल 78 मंत्री हैं। प्रधानमंत्री ने विस्तार में 19 राज्यों को प्रतिनिधित्व दिया और सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन के साथ चुनावी राज्यों का विशेष ध्यान रखा। खास बात यह भी कि मोदी सरकार में अब तक की सर्वाधिक 11 महिला मंत्री होंगी।

मोदी के महाफेरबदल में धर्मेन्द्र प्रधान को शिक्षा, मनसुख मांडविया को स्वास्थ्य, अश्विनी वैष्णव को रेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन और भूपेन्द्र यादव को श्रम एवं रोजगार की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं हरदीप सिंह पुरी को पेट्रोलियम, अनुराग ठाकुर को खेल व युवा मामलों के साथ सूचना एवं जनसंपर्क तथा किरण रिजिजू को विधि एवं न्याय मंत्रालय सौंपा गया है।

चलते-चलते बता दें कि मोदी की नई टीम में युवाओं को तरजीह दी गई है। मंत्रिमंडल की औसत आयु 58 साल है और इसमें भी 14 मंत्री 50 साल से भी कम उम्र के हैं। मंत्रियों में 13 वकील, 6 डॉक्टर, 5 इंजीनियर और 7 पूर्व नौकरशाह हैं। सहयोगी दलों की बात करें तो जदयू और लोजपा के साथ ही अपना दल को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस दल की अनुप्रिया पटेल वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की राज्य मंत्री होंगी।

 

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पंचायत चुनाव के समय ही नए पंचायतों का होगा नामकरण

सूबे बिहार में कोरोना की दूसरी लहर के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर नीतीश सरकार द्वारा रोक लगा दी गई थी। फिलहाल अक्टूबर में पंचायत चुनाव कराने की संभावना बन रही है।

बता दें कि बिहार में पंचायत चुनाव के क्रम में कई पंचायतों का नया नामकरण करना होगा । खासकर, वैसे पंचायत जिनके एक चौथाई हिस्से नगर निकाय में शामिल हो गये हैं तथा पंचायत मुख्यालय वाले गाँव भी नगर निकाय में शामिल कर लिए गये हैं- वैसे  पंचायतों का नया नामकरण करना अनिवार्य होगा।

यह भी जानिए कि बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंचायतों के पुनर्गठन के क्रम में सभी  जिलों के जिला पदाधिकारियों सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को वैसे पंचायतों के नये नाम तय करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका अधिकांश हिस्सा नगर निकाय में शामिल कर लिया गया है। पंचायत के नये वार्डों का गठन भी पंचायत के नामकरण के समय ही कर दिया जाएगा ।

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7 जुलाई से अनलॉक- 4 के दिशा-निर्देश जारी

सभी जान रहे हैं कि कोरोना संक्रमण के कारण अनलाॅक- 3 की समय सीमा 6 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। अतः अनलॉक- 4 के लिए 5 जुलाई को नीतीश सरकार द्वारा आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार-

1. पहली से दसवीं तक के स्कूल फिलहाल बंद रहेंगे, परंतु स्कूल में 50% शिक्षक व कर्मी आ सकेंगे।

2. दसवीं से ऊपर के सभी विद्यालय व शिक्षण संस्थान कुल छात्र संख्या की 50% उपस्थिति के साथ खुलेंगे।

3. 12 जुलाई से 11वीं व 12वीं कक्षा के विद्यालयों से लेकर सूबे के सभी विश्वविद्यालयों के सभी प्रकार के महाविद्यालयों एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों को खोलने का निर्णय लिया गया है, परंतु कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए।

4. विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों द्वारा किसी तरह की परीक्षाएं नहीं ली जाएंगी। वयस्क छात्र-छात्राओं का टीकाकरण सुनिश्चित करना होगा।

5. ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। इन निर्णयों के आलोक में विस्तृत दिशा-निर्देश सभी कुलपतियों, जिलाधिकारियों एवं जिला शिक्षा पदाधिकारियों को राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा भेज दिया गया है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि वर्गारंभ करने से पूर्व सभी संस्थानों को सैनिटाइजेशन अनिवार्य रूप से किया जाना है।

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सीएम नीतीश का जनता दरबार फिर शुरू होगा 12 जुलाई से

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनमानस को बताया कि आगे 12 जुलाई से “जनता दरबार” के अंदर कार्यक्रम फिर से शुरू होगा।

बता दें कि मुख्यमंत्री के पहले के दो कार्यकाल में यह “जनता के दरबार में मुख्यमंत्री” कार्यक्रम के नाम से आयोजित होता रहा था। जानिए कि वर्ष 2016 में लोक सेवा का अधिकार कानून लागू होने के बाद से इसे बंद कर दिया गया।

पुनः यह कि 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद सीएम नीतीश कुमार ने स्वयं घोषित किया कि फिर से “जनता के दरबार में मुख्यमंत्री” कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, लेकिन कोरोना वायरस से शुरू नहीं किया जा सका था।

जानिए कि अगले सोमवार (12 जुलाई) से पुनः इस कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। यह कार्यक्रम पूर्व की भांति प्रत्येक महीने में तीन सोमवार को आयोजित किया जाएगा।

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समाजवादी चिंतक किशन पटनायक की 92वीं जयंती पर बोले डॉ.मधेपुरी

किशन पटनायक 30 जून 1930 को उड़ीसा के भवानीपाटन में जन्म ग्रहण करने वाले समाजवादी चिंतक, लेखक, मासिक पत्रिका “समाजिक वार्ता” के संपादक रहे। किशन पटनायक तृतीय लोकसभा के सांसद बने। वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर संबलपुर चुनाव क्षेत्र से जेल में रहकर ही चुनाव जीत गए थे। तृतीय लोकसभा में किशन पटनायक सबसे कम उम्र के सांसद चुने गए थे। उनकी 92वीं जयंती 30 जून को देश के समाजवादियों ने एक सप्ताह तक मनाने का निर्णय लिया है तथा कई हस्तियों ने किशनजी पर लिखा भी है।

डॉ.राम मनोहर लोहिया, मधु लिमये, भूपेन्द्र नारायण मंडल, बीजू पटनायक, राज नारायण आदि जैसे समाजवादी सोच के धनी चिंतकों के सानिध्य में रहने वाले किशन पटनायक स्वंय भी एक अत्यंत विलक्षण समाजवादी चिंतक रहे हैं। उन्होंने समाजवादी जन परिषद नामक संगठन की स्थापना की तथा दो ऐसी पुस्तकें 1. किसान आंदोलन : दशा और दिशा, 2. भारतीय राजनीति पर एक दृष्टि, लिखी जिसने उन्हें समाज में सर्वाधिक समादृत किया।

वैसे चिंतक किशन पटनायक जी से मधेपुरा के समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी की मुलाकात 70 के दशक में दिल्ली के तीन मूर्ति भवन के सामने तत्कालीन राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र नारायण मंडल के आवास 98, साउथ एवेन्यू में तब हुई और होती रही जब डॉ.मधेपुरी की नियुक्ति सर्वप्रथम कमीशन से सहरसा कॉलेज सहरसा के भौतिकी के व्याख्याता के पद पर हुई थी।

डॉ.मधेपुरी बताते हैं कि दल के गठन के बाद इसके दूरगामी परिणामों पर किशन जी द्वारा लिखित एक विस्तृत लेख से मेरे जैसे ढेर सारे समाजवादी सोच के लोग प्रभावित हुए जिनमें बहुतों का परिचय भी किशन जी से नहीं था। डॉ.लोहिया के बाद समाजवादी आंदोलन के सिद्धांतों के अनुरूप कोई नेता रहा तो वह किशन पटनायक हैं जिन्होंने सत्ता के लिए किसी से समझौता नहीं किया। किशन जी अपने जीते जी देश में सैकड़ों समर्पित एवं संघर्षशील कार्यकर्ता छोड़कर 27 सितंबर 2004 को भुवनेश्वर में अंतिम सांस ली।

आज किशन पटनायक जी की स्मृति को डॉ.मधेपुरी ने नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया है।

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कोविड-19 टीका नहीं लेने वालों के बीच डेल्टा वेरिएंट संक्रमण में तेजी

विश्व स्वास्थ संगठन के निदेशक ने दुनिया के सभी देशों को आगाह करते हुए कहा है कि आने वाले हफ्तों में डेल्टा वेरिएंट समस्त संसार में सबसे हावी स्वरूप धारण कर लेगा। उन्होंने कहा कि डेल्टा स्वरूप के मामले 100 से अधिक देशों में प्रकट हो चुके हैं।

बता दें कि कोविड-19 एपिडेमियोलॉजिकल अपडेट में यही कहा गया कि वायरस के स्वरूप का पता लगाने के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग क्षमताएं सीमित हैं। दुनिया के अनेक देशों ने यह कहा है कि डेल्टा वेरिएंट के कारण वहां कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं तथा अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोरोना केे अब तक जितने भी स्वरूप की पहचान हुई है उनमें डेल्टा सबसे अधिक संक्रामक है, सबसे अधिक खतरनाक है। यह डेल्टा संक्रमण उन लोगों में तेजी से फैल रहा है जिन्हें कोविड रोधी टीका नहीं लगा है।

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने इस खतरनाक डेल्टा संक्रमण से बचने के लिए सबों से अनुरोध किया है कि वे कोविड-19 का टीका लेने में आनाकानी ना करें… अविलंब टीका ले लें और “दो गज दूरी, मास्क है जरूरी” को दिनचर्या का हिस्सा बना लें तथा दिन भर में दर्जनों बार हाथों को साबुन से साफ करते रहें। इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय भी करते रहें।

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