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डॉ.रवि के साहित्यिक एवं राजनीतिक अवदानों का मूल्यांकन आने वाला समय करेगा- डॉ.मधेपुरी

डॉ.रवि ने पाक रमजान महीने के ईद के दिन 14 मई को पटना में अंतिम सांस ली। डॉ.रवि के द्वितीय पुत्र डॉ.कुमार चंद्रदीप ने मुखाग्नि दी। वे साहित्य और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रहे।

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक डॉ.रवि द्वारा रचित ओज की अद्भुत कृति “जब सब कुछ नंगा हो रहा हो” को संदर्भित करते हुए कौशिकी के सचिव एवं डॉ.रवि के समधी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अवरुद्ध कंठ से कहा कि कोसी अंचल का एक सशक्त राजनेता व साहित्य का रवि सदा के लिए अस्ताचलगामी हो गया। कोसी अंचल ने एक बेशकीमती साहित्यिक वक्ता खो दिया। उनका साहित्यिक एवं राजनीतिक अवदान कितना बड़ा रहा है इसका मूल्यांकन आने वाला समय करेगा।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि व्यक्तिगत जीवन में उनके जैसा आला दर्जे का इंसान मैंने खुद के जीवन में गिने-चुने ही देखा है, जिन्होंने अपने गरीब रिश्तेदारों को भी सार्वजनिक रूप से सम्मान देने में कभी संकोच नहीं किया, बल्कि स्वंय से भी अधिक उनका ही ख्याल रखा। यह अद्भुत गुण डॉ.रवि को सदा जीवित रखेगा।

भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे डॉ.मधेपुरी की पुत्री आयुष्मति रूपम भारती की शादी जब डॉ.रवि के पुत्र आयुष्मान डॉ.अमरदीप से हुई तो उन दिनों उनकी राजनीतिक हैसियत उस ऊंचाई पर थी कि वर-वधू को टेलीग्राम एवं पत्र के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री रह चुके विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेई, इंद्र कुमार गुजराल सहित केंद्रीय रक्षा मंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव, रेलमंत्री नीतीश कुमार, यशवंत सिन्हा अजीत सिंह, दिग्विजय सिंह, रविशंकर प्रसाद, तस्लीमुद्दीन…….. आदि ने नव दंपति को लंबी उम्र एवं स्वस्थ व सुखमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं प्रेषित की। सूबे के शेरे बिहार राम लखन सिंह यादव, सुशील कुमार मोदी, अंबिका सिंह दादा सहित ढेर सारे मंत्रियों ने होटल मौर्या में पधार कर आयोजित वैवाहिक कार्यक्रमों में वर-वधू को शुभाशीष और घंटों रहकर डॉ.रवि को सम्मान दिया था।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि डॉ.रवि ने  पुस्तक “आपातकाल क्यों?” लिख तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलकर उन्हें हस्तगत भी कराया और उनके अत्यंत करीबी भी बन गए। डॉ.रवि के संपूर्ण साहित्यिक एवं देश व प्रदेश को समर्पित राजनीतिक अवदानों का मूल्यांकन आने वाला समय करेगा। उन्होंने कहा कि डॉ.रवि साहित्य व राजनीति के भीष्म पितामह थे।

ईद के बाद से अब तक निरंतर सभी अखबारों में डॉ.रवि के प्रति शोक संवेदनाएं सहित शोकोद्गार प्रकाशित होते रहे, जिसकी पुनरावृति कदापि संभव नहीं। संक्षेप में यही कि जहां मधेपुरा के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने कहा कि डॉ.रवि के निधन से शिक्षा व राजनीतिक जगत में अपूरणीय क्षति हुई है और डॉ.रवि शिक्षा दानी के रुप में सदा याद किए जाएंगे, वहीं मधेपुरा के विधायक प्रो.चंद्रशेखर ने कहा कि डॉ.रवि के निधन से एक युग का अंत हो गया, परंतु उनकी लेखनी उन्हें सदा जीवित रखेगी।

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कोरोना से होने वाली मौतों की वजह हाइपरटेंशन भी

कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों की हर रोज हो रही कोरोना से मौत में वृद्धि के कारणों में ऑक्सीजन की किल्लत और अनिवार्य व आवश्यक दवाइयों की कालाबाजारी ने संक्रमितों की टेंशन बढ़ा दी है। मानसिक तनाव की वजह से कोरोना संक्रमितों का बीपी ब्लड प्रेशर भी बढ़ता जा रहा है जिस कारण कोरोना मरीज नई-नई बीमारियों की भी चपेट में आने लगे हैं।

बता दें कोरोना के इलाज करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के एक तिहाई मरीजों में ब्लड प्रेशर की समस्या देखी जा रही है। कोरोना संक्रमित मरीजों में बहुत ऐसे हैं जिन्हें संक्रमित होने से पहले ब्लड प्रेशर (बीपी) की समस्या नहीं थी। इनमें बीपी बढ़ने का कारण अनियंत्रित शुगर और दवाओं के प्रयोग से अधिक कोरोना होने का तनाव माना जा रहा है।

करोना संक्रमित होते ही लोग होम आइसोलेशन में रहते हुए डिप्रेशन में जाने लगते हैं। लोगों में नौकरी जाने की, आमदनी घटने की और रोजगार चौपट होने जैसी विभिन्न आर्थिक समस्याओं के चिंता-फिकर के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। यही कारण है कि अब चिकित्सकों को हर चौथा मरीज हाइपरटेंशन का शिकार मिल रहा है।

एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार करीब 35% लोग हाई ब्लड प्रेशर में प्रति पीड़ित हैं। जिसमें 25% शहरी क्षेत्र के तो 10% ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं। तनावपूर्ण जीवनशैली हाइपरटेंशन का प्रमुख कारण है। इसके अलावा शराब व धूम्रपान का सेवन, चिंता-अवसाद, अनिद्रा आदि भी ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद करता है।

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कोसी कमिश्नरी में मास्क के प्रयोग में मधेपुरा जिला पहले स्थान पर- एसडीएम नीरज कुमार

कोरोना की दूसरी लहर ने भारत में कहर मचा दिया है। क्यों नहीं, कोरोना ने तो अब शहर से गांव की ओर कदम बढ़ा दिया है। इस कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मास्क के प्रयोग को लेकर सख्त निर्देश जिला प्रशासन ने जारी किया है। जिला पदाधिकारी श्याम बिहारी मीणा ने कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का पालन कराने हेतु विशेष रूप से एक मास्क जांच टीम का गठन किया है।

सदर एसडीएम नीरज कुमार ने कहा कि सख्ती का ही नतीजा है कि अब यहां 95% से अधिक व्यक्ति मास्क का प्रयोग करने लगे हैं। यही कारण है कि मधेपुरा जिला को मास्क उपयोग में पहला स्थान मिला है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन का विधिवत समयानुसार पालन करने का ही फल है कि जिले में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के रफ्तार में कमी नजर आने लगी है।

एसडीएम नीरज कुमार ने यह भी कहा कि लंबे समय के बाद जिले में नए कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 100 से नीचे आया है। विगत 24 घंटे के अंदर जिले में कुल संक्रमितों की संख्या 6226 हो गई है जिसमें सक्रिय मरीजों की संख्या 1791 है, होम आइसोलेशन में 1516 और भर्ती मरीजों की संख्या 88 है।

चलते-चलते यह भी कि अति संवेदनशील समाजसेवी शिक्षाविद प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने सभी छात्रों और शिक्षकों से विनम्र अनुरोध किया है कि आप इस कोरोना महासंग्राम में मास्क  को अनिवार्य वस्त्र बनाएं और “दो गज दूरी, हाथ धोना है जरूरी” को इस युद्ध को जीतने का शस्त्र बनाएं। सावधानी ही सुरक्षा है। याद कर लें- सौ दवा से एक परहेज अच्छा….. और इलाज से बेहतर रोकथाम है।

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किशनगंज के डॉ.दिलीप जायसवाल मात्र एमएलसी ही नहीं, मानवता के पुजारी भी- डॉ.मधेपुरी

वैश्विक महामारी कोरोना ने लोगों के बीच की दूरियां बढ़ा दी है। लोग अपनों के लिए दौड़-दौड़ कर अस्पतालों में बेड तलाशने में लगे हैं तो कोई ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर चक्कर लगा रहे हैं। कितनों ने तो ऑक्सीजन की अनुपलब्धता के कारण अपने माता-पिता को गवाँ बैठे हैं। सुना भी होगा कि ऑक्सीजन के आने में चंद मिनटों की देर होने पर अस्पताल में 22 लोगों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया।

बता दें कि पूर्णिया के ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी हो जाने से वहां के मैक्स एवं फातिमा सरीखे अस्पतालों के साथ-साथ अन्य दर्जनों अस्पतालों में लगभग 200 से ज्यादा कोरोना एवं कुछ अन्य रोगियों की जिंदगी खतरे में पड़ गई थी। उस घड़ी उनके परिजनों की दशा कैसी रही होगी इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा। खासकर तब जब भागलपुर कमिश्नरी मुख्यालय स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से संपर्क साधा गया, परंतु वहां से भी ऑक्सीजन उपलब्ध होने की गुंजाइश फेल हो गई यानि वहां पर भी ऑक्सीजन नहीं मिला।

सोचिए तो सही ऐसी विकट परिस्थिति में जब एक के बाद एक फोन पूर्णिया जिला प्रशासन के साथ-साथ मैक्स आदि अन्य अस्पतालों से एमएलसी डॉ.दिलीप जायसवाल को आने लगा तो डॉ.जायसवाल, जो किशनगंज के एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के निदेशक भी हैं, ने बिना देर किए किशनगंज मेडिकल कॉलेज से 50 जंबो साइज का ऑक्सीजन सिलेंडर पूर्णिया भेजकर सभी अस्पतालों के कोरोना मरीजों के परिजनों के चेहरों पर मुस्कान ला दिया और तब भर्ती सैकड़ों मरीजों की जिंदगी बच गई।

चलते-चलते यह भी जानिए कि इस बात की जानकारी मिलते ही मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, जो एमएलसी डॉ.दिलीप जायसवाल के अत्यंत करीबी मित्र हैं, ने डॉ.जायसवाल को फोन लगाकर कहा- “आप मानवता के पुजारी हैं… आप महान हैं। आप एमएलसी ही नहीं, आप कोरोना वारियर्स हैं…। आपके जज्बे को सारा देश सलाम करता रहेगा।”

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बोले डॉ.मधेपुरी- कोसी क्षेत्र के राजनेता एवं साहित्य के ‘रवि’ का देहावसान हो गया

डॉ.रवि के ईद के दिन पटना के पालिका हॉस्पिटल में हुए निधन पर बोले डॉ.मधेपुरी- लगभग 50 वर्षों तक अपनी साहित्यिक, सामाजिक एवं राजनीतिक साधना से कोसी, मिथिलांचल एवं सीमांचल को समृद्ध व गौरवान्वित करने वाले हर दिल अजीज प्रो.(डॉ.) रमेन्द्र कुमार यादव रवि के निधन से विभिन्न क्षेत्रों में एक शून्यता सी आ गई है। विधायक के रुप में प्रदेश की एवं लोकसभा व राज्यसभा सांसद के रूप में देश की सेवा करते हुए डॉ.रवि ने कितने भूलुंठित पत्थरों को तराश कर राजनीतिक पहचान दिलाई। वे राजद पार्लियामेंट्री बोर्ड के चेयरमैन भी रहे थे और जदयू के राष्ट्रीय महासचिव भी।

शिक्षा जगत में डॉ.रवि की पहचान भी सर्वश्रेष्ठ रही है। वे हिन्दी के मूर्धन्य विद्वान और बेजोड़ वक्ता थे। उन्होंने दर्जनों पुस्तकों की रचनाएं की- परिवाद, आपातकाल क्यों ?, बढ़ने दो देश को, बातें तेरी कलम मेरी, जब सब कुछ नंगा हो रहा हो आदि उनकी समादृत  रचनाएं रही हैं। डॉ.रवि टीपी कॉलेज में हिन्दी के प्राध्यापक और लंबे अर्से तक वहीं कमिशंड प्राचार्य भी रहे। भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति भी रहे डॉ.रवि। प्राचार्य एवं कुलपति रहते हुए उन्होंने बहुतों के घरों में उजाला ला दिया। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के भी वे पसंदीदा रहे।

आज उस महामना डॉ.रवि को कोरोना रूपी काल ने अपने गाल में लिया तो सही, परंतु 13 मई को वे और उनकी धर्मपत्नी  प्रो.(डॉ.)मीरा दोनों कोरोना नेगेटिव होकर निकल गए। मधेपुरा के डीएम श्याम बिहारी मीणा ने बेहतर इलाज हेतु समुचित सुविधाओं के साथ पटना भेजने में भरपूर मदद की। कर्पूरी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती होने से पूर्व डॉ.रवि का इलाज चिकित्सक व सर्जन डॉ.बरुण कुमार और उनके छोटे पुत्र प्रदेश जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष डॉ.अमरदीप स्थानीय सांसद डॉ.रवि मार्ग स्थित उनके निवास पर करते रहे थे। पटना के पालिका हॉस्पिटल में 14 अप्रैल (ईद के पवित्र दिन) को फोन पर कुछ इष्ट मित्रों से मिल बातें की डॉ.रवि ने, परंतु उसी दिन 1:15 बजे अंतिम सांस ले ली। समाचार सुनकर लोग आंसू बहाते रहे।

लॉकडाउन के चलते विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय बंद हैं, फिरभी छात्र, शिक्षक, अधिकारी-पदाधिकारी एवं प्राचार्य व कुलपति सहित आम लोग भी उनके निधन का समाचार सुनकर शोकाकुल व मर्माहत हो गये। सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से लेकर विधायक प्रोफेसर चंद्रशेखर एवं सांसद दिनेश चंद्र यादव आदि उनकी आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थनाएं करने लगे। पूर्व एमएलसी विजय कुमार वर्मा, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, उनके शिष्य रहे कुलपति डॉ.आरकेपी रमण और उनके पीए शंभू नारायण यादव की आंखें नम ही नहीं बल्कि समाचार सुनकर आंसू बंद होने का नाम ही नहीं लेता।

डॉ.रवि  कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक थे। इनके बड़े भाई तुल्य साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ अध्यक्ष थे जो चंद रोज कबल कोरोना के शिकार हुए। कौशिकी के सचिव एवं डॉ.रवि के समधी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने शोक प्रकट करते हुए कहा कि डॉ.रवि एवं शलभ जी के चले जाने से ऐसा लगता है कि  कौशिकी का प्रांगण सूना होने लगा है और साहित्यिक कुसुम मुरझाने लगे हैं। साहित्यकार कवि व समीक्षक डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.शांति यादव, डॉ.काश्यप, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.विश्वनाथ विवेका, डॉ.अमोल राय, प्रो. मणिभूषण वर्मा, प्रो.सचिंद्र, डॉ.अरुण कुमार,  प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.आलोक कुमार, सियाराम यादव मयंक, द्विजराज, संतोष सिन्हा,  किशोर, श्यामल कुमार सुमित्र आदि ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्यकार  ही नहीं बल्कि राजनीतिक क्षेत्र के रवि सदा के लिए हमसे दूर चले गए। सबों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थनाएं की।

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ईद की खुशियों के रंग को इस वर्ष भी भंग कर दिया कोरोना ने

गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी महामारी कोरोना ने शिवरात्रि और रामनवमी की तरह ईद की खुशियों के रंग को भी भंग कर दिया। रमजान जैसे पाक महीने भर लोग मस्जिद में नमाज अदा नहीं कर पाए। छोटे-बड़े अनेकानेक शहरों में कोरोना के कारण कहीं नाईट कर्फ्यू तो कहीं लाॅकडाउन लगा रहा।

बता दें कि ईद मनाने की तारीख चांद को देखकर ही निश्चित की जाती है। कल ईद का चांद नजर आ चुका है, अतः इस साल 14 मई 2021 यानि आज जुम्मा के दिन ईद मनाई जा रही है। जानिए कि ईद-उल-फितर पर खासतौर पर सेवई बनती है, क्योंकि यह इस्लाम का पावन त्यौहार है। इसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है।

सदियों से इस पर्व के दिन लोग एक दूसरे से गले मिलकर ईद मुबारकबाद देते आ रहे थे, परंतु कोरोना के कहर में सरकारी निर्देशानुसार प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी है। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत “दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी” का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।

यह भी कि ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह नए कपड़े पहन कर ईदगाह में नमाज अदा करते हुए अल्लाह ताला से सुख-चैन की दुआ मांगा करते हैं, परंतु इस बार कोरोना काल में सर्वाधिक लोग अपने-अपने घरों में ही कोरोना महामारी से छुटकारा पाने की दुआ अल्लाह से मांगते हुए देखे गए।

चलते-चलते यह भी कि मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डाॅ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी कोरोना काल से पूर्व ईद के दिन अपने इष्ट मित्रों एवं तत्कालीन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल से गले मिलकर ईद मुबारक करने हेतु ईदगाह तक पहुंचते थे, परंतु इस बार बिहार में लाॅकडाउन 30 मई तक बढ़ा दिए जाने के कारण घर में ही रहकर डॉ.मधेपुरी ने अपने अत्यंत करीबी भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के तैल चित्र से गले मिलकर संदेश के रूप में यही कहा-

“घबराने की नहीं है बात, सरकार खड़ी है आपके साथ। जाग जाइए, गांव को बचाइए। गांव बचेगा तभी हिंदुस्तान बचेगा। कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कीजिए और जिला प्रशासन को भरपूर सहयोग दीजिए।”

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संपूर्ण हिंदुस्तान में कहर बरपाता कोरोना

देश में कोरोना मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। लोग अपनों की जान बचाने के लिए अस्पतालों में सीट के लिए, ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए और वेंटिलेटर के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। कोरोना काल में चारो ओर गिद्धों का बोलबाला है। यह गिद्ध अपने मंसूबों को पूरा करने में लगे रहते हैं।

बता दें कि ऑक्सीमीटर, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडेसीविर जैसे प्राणरक्षक दवाइयों एवं उपकरणों को ये गिद्ध मनमाने दामों पर कालाबाजारी करते हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर विदेशों से लाकर कई गुने दामों पर बेचते हैं।

दिल्ली में गिद्ध सेना और उनके सेनापतियों को दिल्ली पुलिस पकड़ने में लगी है। सांसों के बदले पैसे वसूलने वालों पर दिल्ली में पुलिसिया कहर बरपा रही है दिल्ली सरकार। परंतु, कुछ कोरोना योद्धा हैं कि हर स्तर पर कोरोना मरीजों को मदद कर रहे हैं। पुलिस के कुछ जाँवाज तो देवदूत बनकर मरीजों को मदद करने में लगे हैं जहाँँ अस्पतालों में डॉक्टरों एवं नर्सों की कमी है…… ऑक्सीजन एवं जीवन रक्षक  दवाओं की कमी। फिर भी दूसरी लहर में मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है।

जोखिम उठाकर श्मशान घाट पर कुछ देवदूत जैसे लोग फर्ज मानकर साफ सफाई करते हैं। कोविड से हुई मौतों वाले  मृतकों का दाह संस्कार करते हैं। वे प्राय: 12:00 बजे रात में सोते हैं। धधकती चिता की लपटों के कारण पीपीई किट भी नहीं लगा सकते हैं।

चलते-चलते यह भी कि जहां कफन बेचने वाली दुकान में दिन में एक लाश आती थी वहीं अब प्रतिदिन 40-50 मृतकों के लिए समान बिकने लगे हैं। जबकि सरकारें ऑक्सीजन नर्सेज, ऑक्सीजन डॉक्टर्स एवं ऑक्सीजन पुलिस तैनात करने लगी हैं।

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मधेपुरा के कर्पूरी मेडिकल कॉलेज में लग रहा एक और ऑक्सीजन प्लांट

कोरोना महामारी से परेशान भारत सांस के लिए ऑक्सीजन की किल्लत से अब तक निपटने में ही लगा है। विदेशों से वायुयान द्वारा भी ऑक्सीजन भारत आ रहा है। कई अस्पतालों में ऑक्सीजन के बिना लोगों की मौतें हो रही है।

मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पूर्व से ऑक्सीजन का एक छोटा प्लांट था जिससे लगभग 20 सिलेंडर की आपूर्ति हो जाती थी। शेष के लिए मुजफ्फरपुर से ऑक्सीजन मंगवाने हेतु जिलाधिकारी श्याम बिहारी मीणा को बड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। इस कठिनाई से उबरने के लिए यहां एक और ऑक्सीजन प्लांट बनने जा रहा है जिससे लगभग 50 सिलेंडर ऑक्सीजन की आपूर्ति होती रहेगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि ऑक्सीजन संकट दूर करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा प्लांट निर्माण हेतु काम शुरू कर दिया गया है। डीएम मीणा ने इस काम के लिए डीडीसी विनोद कुमार सिंह को वहां तैनात कर दिया है जिनके द्वारा अस्पताल परिसर में दिन-रात चल रहे प्लांट निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग की जा रही है। प्लांट के लगते ही कोसी-सीमांचल के लोगों को कोरोना से लड़ने के लिए तत्काल ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।

 

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ऑक्सीजन ‘त्रिदेव’

जबकि सारा भारत कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है तब भी कुछ लोग मुनाफाखोरों की भूमिका में कोरोना पीड़ितों की सांसे बंद करने में लगे हैं।

त्रिदेव के रूप में थल, जल और नभ के रास्ते से ऑक्सीजन टैंकरों की ढुलाई और विदेशों से भारत के लिए जांच उपकरण आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वायु एवं जल मार्ग से बड़े-बड़े जहाजों में  आवश्यक सारे सामान बंदरगाहों एवं हवाई अड्डों पर उतारे जा रहे हैं और उन्हें थल सेना की मदद से ट्रेन व ट्रक द्वारा कोविड अस्पतालों को उपलब्ध कराये जा रहे हैं तथा मरीजों तक पहुंचाए जा रहे हैं।

जानिए कि देश कोरोना की तीसरी लहर से भयाक्रांत है फिर भी ऐसे लोगों की कमी नहीं जहां विवाह के अवसर पर भी कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लापरवाही की तो इंतेहा हो रही है। बारात में इतनी भीड़ कि तिल रखने की जगह तक नहीं। ऊपर से भोजपुरी गानों का तुर्रा। शादी भी तो विधायक बाबू की लाडली बेटी की है ना,जो स्वयं प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने के लिए मशहूर हैं।

लेकिन, ऐसे कुछ कोरोना वारियर्स तो अभी भी धरती पर हैं जिन्होंने प्राण की बाजी लगाकर मानवता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। ऐसे कोरोना वरियर्स का संकल्प है-

घर-घर पहुंचेगी ऑक्सीजन

जीतेंगे हम सांसों की जंग।

 

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कोरोना पीड़ितों के लिए 7 करोड़ जुटाने में लगे हैं विराट और अनुष्का

कोरोना काल में मानवता की रक्षा के लिए सभी देशों ने भारत की मदद करनी शुरू की तो भारतीय खिलाड़ी, फिल्म सितारे और उद्योगपति भी मदद को सामने आने लगे। जब तेंदुलकर ने एक करोड़ की घोषणा की तो लगे हाथ विराट और अनुष्का ने दो करोड़ रुपए दान किए और 7 दिनों में 7 करोड रुपए जुटाने की योजना भी बना डाली है। कैंपेन की शुरुआत करते ही 2.5 करोड़ से अधिक राशि जमा हो गई।

बता दें कि 2 सप्ताह पहले भारत में ऑक्सीजन से लेकर वैक्सीन तक की डिमांड जीरो थी और आज 55 गुना बढ़ गई है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय अपने परिजनों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजने में लगे हैं। भारत में ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत के कारण एनआरआई विदेशों से अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इंतजाम कर रहे हैं। कईयों के माता-पिता भारत में अकेले हैं और वे चाहकर भी उन तक नहीं पहुंच सकते हैं।

जानिए कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत सरकार ने फिलहाल मेडिकल इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, लेकिन एक घर के लिए सिर्फ दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को आयात करने की इजाजत दी है।

चलते-चलते यह भी कि भारत की राजनीतिक विपक्षी पार्टियों ने कोरोना की तीसरी लहर को रोकने हेतु जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दे रही है। साथ ही यह भी कि कोरोना के सभी म्यूटेशन पर जल्द से जल्द सभी उपलब्ध वैक्सीन का टेस्ट अविलंब करने की प्रक्रिया आरंभ की जाए।

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