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केन्द्रीय कैबिनेट का विस्तार: मोदी ने किया महाफेरबदल

बहुप्रतीक्षित केन्द्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार आखिर हो ही गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबको चौंकाते हुए बुधवार को अपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया। विस्तार में जहां बिहार से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह और लोजपा संसदीय दल के नेता पशुपति पारस को जगह मिली, वहीं बिहार के ही रविशंकर प्रसाद समेत दर्जन भर मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई। इसके अलावा राज्यमंत्री रहे आरा के सांसद राजकुमार सिंह का कद बढ़ाते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

बुधवार रात को ही विभागों की भी घोषणा कर दी गई। आरसीपी सिंह को जहां इस्पात मंत्रालय मिला, वहीं पारस को खाद्य प्रसंस्करण की जिम्मेवारी दी गई। भाजपा के आरके सिंह अब ऊर्जा विभाग के कैबिनेट मंत्री होंगे, तो गिरिराज सिंह को दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज का जिम्मा दिया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग में राज्य मंत्री रहे भाजपा सांसद अश्विनी चौबे अब उपभोक्ता मामलों तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री होंगे।

ध्यातव्य है कि राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में कुल 43 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्यमंत्री शामिल हैं। सात राज्यमंत्री पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाए गए। मोदी सरकार में अब प्रधानमंत्री समेत कुल 78 मंत्री हैं। प्रधानमंत्री ने विस्तार में 19 राज्यों को प्रतिनिधित्व दिया और सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन के साथ चुनावी राज्यों का विशेष ध्यान रखा। खास बात यह भी कि मोदी सरकार में अब तक की सर्वाधिक 11 महिला मंत्री होंगी।

मोदी के महाफेरबदल में धर्मेन्द्र प्रधान को शिक्षा, मनसुख मांडविया को स्वास्थ्य, अश्विनी वैष्णव को रेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन और भूपेन्द्र यादव को श्रम एवं रोजगार की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं हरदीप सिंह पुरी को पेट्रोलियम, अनुराग ठाकुर को खेल व युवा मामलों के साथ सूचना एवं जनसंपर्क तथा किरण रिजिजू को विधि एवं न्याय मंत्रालय सौंपा गया है।

चलते-चलते बता दें कि मोदी की नई टीम में युवाओं को तरजीह दी गई है। मंत्रिमंडल की औसत आयु 58 साल है और इसमें भी 14 मंत्री 50 साल से भी कम उम्र के हैं। मंत्रियों में 13 वकील, 6 डॉक्टर, 5 इंजीनियर और 7 पूर्व नौकरशाह हैं। सहयोगी दलों की बात करें तो जदयू और लोजपा के साथ ही अपना दल को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस दल की अनुप्रिया पटेल वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की राज्य मंत्री होंगी।

 

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पंचायत चुनाव के समय ही नए पंचायतों का होगा नामकरण

सूबे बिहार में कोरोना की दूसरी लहर के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर नीतीश सरकार द्वारा रोक लगा दी गई थी। फिलहाल अक्टूबर में पंचायत चुनाव कराने की संभावना बन रही है।

बता दें कि बिहार में पंचायत चुनाव के क्रम में कई पंचायतों का नया नामकरण करना होगा । खासकर, वैसे पंचायत जिनके एक चौथाई हिस्से नगर निकाय में शामिल हो गये हैं तथा पंचायत मुख्यालय वाले गाँव भी नगर निकाय में शामिल कर लिए गये हैं- वैसे  पंचायतों का नया नामकरण करना अनिवार्य होगा।

यह भी जानिए कि बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंचायतों के पुनर्गठन के क्रम में सभी  जिलों के जिला पदाधिकारियों सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को वैसे पंचायतों के नये नाम तय करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका अधिकांश हिस्सा नगर निकाय में शामिल कर लिया गया है। पंचायत के नये वार्डों का गठन भी पंचायत के नामकरण के समय ही कर दिया जाएगा ।

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7 जुलाई से अनलॉक- 4 के दिशा-निर्देश जारी

सभी जान रहे हैं कि कोरोना संक्रमण के कारण अनलाॅक- 3 की समय सीमा 6 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। अतः अनलॉक- 4 के लिए 5 जुलाई को नीतीश सरकार द्वारा आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार-

1. पहली से दसवीं तक के स्कूल फिलहाल बंद रहेंगे, परंतु स्कूल में 50% शिक्षक व कर्मी आ सकेंगे।

2. दसवीं से ऊपर के सभी विद्यालय व शिक्षण संस्थान कुल छात्र संख्या की 50% उपस्थिति के साथ खुलेंगे।

3. 12 जुलाई से 11वीं व 12वीं कक्षा के विद्यालयों से लेकर सूबे के सभी विश्वविद्यालयों के सभी प्रकार के महाविद्यालयों एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों को खोलने का निर्णय लिया गया है, परंतु कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए।

4. विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों द्वारा किसी तरह की परीक्षाएं नहीं ली जाएंगी। वयस्क छात्र-छात्राओं का टीकाकरण सुनिश्चित करना होगा।

5. ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। इन निर्णयों के आलोक में विस्तृत दिशा-निर्देश सभी कुलपतियों, जिलाधिकारियों एवं जिला शिक्षा पदाधिकारियों को राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा भेज दिया गया है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि वर्गारंभ करने से पूर्व सभी संस्थानों को सैनिटाइजेशन अनिवार्य रूप से किया जाना है।

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सीएम नीतीश का जनता दरबार फिर शुरू होगा 12 जुलाई से

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनमानस को बताया कि आगे 12 जुलाई से “जनता दरबार” के अंदर कार्यक्रम फिर से शुरू होगा।

बता दें कि मुख्यमंत्री के पहले के दो कार्यकाल में यह “जनता के दरबार में मुख्यमंत्री” कार्यक्रम के नाम से आयोजित होता रहा था। जानिए कि वर्ष 2016 में लोक सेवा का अधिकार कानून लागू होने के बाद से इसे बंद कर दिया गया।

पुनः यह कि 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद सीएम नीतीश कुमार ने स्वयं घोषित किया कि फिर से “जनता के दरबार में मुख्यमंत्री” कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, लेकिन कोरोना वायरस से शुरू नहीं किया जा सका था।

जानिए कि अगले सोमवार (12 जुलाई) से पुनः इस कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। यह कार्यक्रम पूर्व की भांति प्रत्येक महीने में तीन सोमवार को आयोजित किया जाएगा।

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समाजवादी चिंतक किशन पटनायक की 92वीं जयंती पर बोले डॉ.मधेपुरी

किशन पटनायक 30 जून 1930 को उड़ीसा के भवानीपाटन में जन्म ग्रहण करने वाले समाजवादी चिंतक, लेखक, मासिक पत्रिका “समाजिक वार्ता” के संपादक रहे। किशन पटनायक तृतीय लोकसभा के सांसद बने। वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर संबलपुर चुनाव क्षेत्र से जेल में रहकर ही चुनाव जीत गए थे। तृतीय लोकसभा में किशन पटनायक सबसे कम उम्र के सांसद चुने गए थे। उनकी 92वीं जयंती 30 जून को देश के समाजवादियों ने एक सप्ताह तक मनाने का निर्णय लिया है तथा कई हस्तियों ने किशनजी पर लिखा भी है।

डॉ.राम मनोहर लोहिया, मधु लिमये, भूपेन्द्र नारायण मंडल, बीजू पटनायक, राज नारायण आदि जैसे समाजवादी सोच के धनी चिंतकों के सानिध्य में रहने वाले किशन पटनायक स्वंय भी एक अत्यंत विलक्षण समाजवादी चिंतक रहे हैं। उन्होंने समाजवादी जन परिषद नामक संगठन की स्थापना की तथा दो ऐसी पुस्तकें 1. किसान आंदोलन : दशा और दिशा, 2. भारतीय राजनीति पर एक दृष्टि, लिखी जिसने उन्हें समाज में सर्वाधिक समादृत किया।

वैसे चिंतक किशन पटनायक जी से मधेपुरा के समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी की मुलाकात 70 के दशक में दिल्ली के तीन मूर्ति भवन के सामने तत्कालीन राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र नारायण मंडल के आवास 98, साउथ एवेन्यू में तब हुई और होती रही जब डॉ.मधेपुरी की नियुक्ति सर्वप्रथम कमीशन से सहरसा कॉलेज सहरसा के भौतिकी के व्याख्याता के पद पर हुई थी।

डॉ.मधेपुरी बताते हैं कि दल के गठन के बाद इसके दूरगामी परिणामों पर किशन जी द्वारा लिखित एक विस्तृत लेख से मेरे जैसे ढेर सारे समाजवादी सोच के लोग प्रभावित हुए जिनमें बहुतों का परिचय भी किशन जी से नहीं था। डॉ.लोहिया के बाद समाजवादी आंदोलन के सिद्धांतों के अनुरूप कोई नेता रहा तो वह किशन पटनायक हैं जिन्होंने सत्ता के लिए किसी से समझौता नहीं किया। किशन जी अपने जीते जी देश में सैकड़ों समर्पित एवं संघर्षशील कार्यकर्ता छोड़कर 27 सितंबर 2004 को भुवनेश्वर में अंतिम सांस ली।

आज किशन पटनायक जी की स्मृति को डॉ.मधेपुरी ने नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया है।

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कोविड-19 टीका नहीं लेने वालों के बीच डेल्टा वेरिएंट संक्रमण में तेजी

विश्व स्वास्थ संगठन के निदेशक ने दुनिया के सभी देशों को आगाह करते हुए कहा है कि आने वाले हफ्तों में डेल्टा वेरिएंट समस्त संसार में सबसे हावी स्वरूप धारण कर लेगा। उन्होंने कहा कि डेल्टा स्वरूप के मामले 100 से अधिक देशों में प्रकट हो चुके हैं।

बता दें कि कोविड-19 एपिडेमियोलॉजिकल अपडेट में यही कहा गया कि वायरस के स्वरूप का पता लगाने के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग क्षमताएं सीमित हैं। दुनिया के अनेक देशों ने यह कहा है कि डेल्टा वेरिएंट के कारण वहां कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं तथा अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोरोना केे अब तक जितने भी स्वरूप की पहचान हुई है उनमें डेल्टा सबसे अधिक संक्रामक है, सबसे अधिक खतरनाक है। यह डेल्टा संक्रमण उन लोगों में तेजी से फैल रहा है जिन्हें कोविड रोधी टीका नहीं लगा है।

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने इस खतरनाक डेल्टा संक्रमण से बचने के लिए सबों से अनुरोध किया है कि वे कोविड-19 का टीका लेने में आनाकानी ना करें… अविलंब टीका ले लें और “दो गज दूरी, मास्क है जरूरी” को दिनचर्या का हिस्सा बना लें तथा दिन भर में दर्जनों बार हाथों को साबुन से साफ करते रहें। इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय भी करते रहें।

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दुनिया के सौ से अधिक देशों में पहुंच गया डेल्टा वेरिएंट

भारत में सबसे पहले मिला कोरोना का डेल्टा वेरिएंट अब तक लगभग आधी दुनिया में यानि 100 से अधिक देशों में पहुंच चुका है।

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जारी अपडेट में कहा है कि डेल्टा वेरिएंट को डबल म्युटेंट भी कहा जाता है क्योंकि इसमें दो म्युटेंट होते हैं।

जानिए कि यह अल्फा वेरिएंट की तुलना में 55% अधिक पारगम्य है, जो शुरुआत में यूनाइटेड किंगडम में पाया गया था। वैश्विक स्तर पर यह प्रमुख तनाव बनता जा रहा है। हालांकि, अब तक इस वेरिएंट की पहचान करने की कैपेसिटी अत्यंत लिमिटेड है।

फिरभी अफ्रीका ने वेरिएंट के कई नए प्रकोपों कीसूचना दी है। पहली बार 2020 के अक्टूबर में यह पता चला था कि डेल्टा वेरिएंट में कई स्पाइक म्युटेशन है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने अपील की है कि सितंबर तक दुनिया के प्रत्येक देश की कम से कम 10% आबादी टीकाकरण पूरा कर ले। उन्होंने महामारी को काबू करने एवं अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए टीकाकरण को सर्वश्रेष्ठ उपाय बताया है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया है कि भारत कोरोना वायरस से हर हाल में जीतेगा। पीएम ने इस साल स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट दोगुना कर दिया है। देश में एम्स की संख्या बढ़ाई जा रही है। देश विकास के नए आयाम भी हासिल करेगा। देशवासियों को चाहिए कि वे सदा “दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी” का पालन करें। उठते-बैठते हर समय पालन करें।

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सम्मान के साथ सभी भारतवासी मनाए ‘डॉक्टर्स डे’- डॉ.मधेपुरी

भारत में 1991 से हर वर्ष 1 जुलाई को ‘नेशनल डॉक्टर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बेहतर स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा डॉक्टरों को उनके द्वारा की जाने वाली समर्पित सेवा के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करना है।

बता दें कि जो डॉक्टर चौबीसों घंटे अपनी सेवा देकर मरीजों की रक्षा करने और जान बचाने में लगे रहते हैं वैसे डॉक्टरों को देश में इंसान के रुप में भगवान की तरह देखा जाता है। तभी तो ‘डॉक्टर्स डे’ भारत के चिकित्सकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है, उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करने का दिन है।

यह भी जानिए कि अब सरकार द्वारा भी 1 जुलाई को देश के महान डॉक्टर भारतरत्न डॉ.विधान चन्द्र राय की पुण्य तिथि मनाई जाती है। डॉ.राय महान चिकित्सक ही नहीं बल्कि विद्यार्थी जीवन में वे उच्च कोटि के देशभक्त व स्वतंत्रता सेनानी भी रहे। शुरुआत में उन्हें लोग महात्मा गांधी और   नेहरू जी के डॉक्टर के रूप में जानते थे। गांधी जी के कहने पर उन्होंने राजनीति की ओर कदम बढ़ाया और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रहे। डॉ.राय जो कमाते थे…. सब गरीबों के बीच दान करते रहे।

आज भी डॉ.राय के पथ पर चलने वाले देश में कुछ डॉक्टर्स हैं जो गरीबों पर विशेष ख्याल रखते हैं। वैसे ही डाक्टरों में एक हैं मधेपुरा आईएमए के अध्यक्ष डॉ.मिथिलेश कुमार। मौके पर अति संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ.मिथिलेश कुमार की गरीबों के प्रति संवेदना की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि वे डॉ.मिथिलेश के गुरु रहे हैं। अंत में डॉ.मधेपुरी ने उन डाक्टरों के हौसले, त्याग और बलिदान को सलाम किया जो कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के इलाज के क्रम में बिना रुके,  बिना झुके तथा अविचलित रहकर कर दी अपनी जान तक न्योछावर …।

 

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केवल 10 सेकंड काफी है कोरोनावायरस वेरिएंट से संक्रमित होने के लिए

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महामारी एवं संक्रमण रोग के विशेषज्ञ रमण गंगा खेड़कर ने कोरोनावायरस के डेल्टा प्लस को भी चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि डेल्टा वेरिएंट का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, क्योंकि यह वैरीअंट ऑफ कंसर्न है और डेल्टा प्लस को भी वैरीअंट ऑफ कंसर्न मानना होगा।

बता दें कि खेड़कर ने आगे यही कहा कि डेल्टा प्लस शरीर की एक कोशिका से दूसरी कोशिका में आसानी से जा सकता है। यदि डेल्टा प्लस हमारे मस्तिष्क में प्रवेश कर जाता है तो परिणाम कितने घातक होंगे उसकी केवल कल्पना ही की जा सकती है।

जानिए कि कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमित मरीज के साथ मात्र 10 सेकंड की नजदीकी भी आपको इसकी चपेट में ला सकती है। भारत में मिले इस डेल्टा वेरिएंट के पूर्व में दुनिया के 95 से अधिक देशों में बड़े पैमाने पर फैल जाने के कारण एक बार फिर से विश्व तालाबंदी की ओर बढ़ने लगा है।

चलते-चलते डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सावधानी की अपील के साथ ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य विभाग ने यह दावा किया है कि यह संक्रमण इंडोर शॉपिंग मॉल में एक-दूसरे के पीछे चलने वाले लोगों के बीच लगभग 10 सेकंड की नजदीकी पर ही तेजी से फैल जाता है। मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने दुनिया के लोगों से विनम्र निवेदन करते हुए यही कहा है कि “दो गज दूरी, मास्क है जरूरी” को जीवन का कवच-कुंडल मानें।

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कोरोना के कारण दुनिया के कई देशों में आॅनलाइन शिक्षा का अनुभव खराब रहा

दुनिया के सर्वाधिक देशों में ऑनलाइन एजुकेशन का अनुभव खराब व अत्यंत निराशाजनक रहा है। दुनिया के जापान, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों में सौ के स्केल पर रिमोट लर्निंग के प्रभावी होने के अंक 33%, 46% और 49 % हैं तो भारत कहाँ होगा जहाँ शिक्षा पर रोज-रोज नये प्रयोग होते रहे हैं। जहां बच्चों को स्कूली शिक्षा की ओर आकर्षित करने के लिए मिडडे मील (मध्याह्न भोजन) योजना लागू की जाती है।

बता दें कि मैसाचुसेट्स टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट की टीचिंग सिस्टम्स लैब के जस्टिन रिच यही बताते हैं कि कोरोना के कारण अमेरिका के अधिकतर परिवारों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई निराशाजनक रही।

यह भी जानिए कि कोरोना काल मे मार्च 2021 तक इंग्लैंड में प्राइमरी स्कूलों के छात्रों की पढ़ाई आॅनलाइन के चलते कई महीने पिछड़ गए । नीदरलैंड से यही जानकारी दी गई कि कोरोना काल के पहले छह महीनों में रिमोट लर्निंग के आठ सप्ताहों में बच्चों ने कुछ भी नया नहीं सीखा है। कम पढ़े-लिखे माता-पिता ने बच्चों की सीखने की क्षमता 50% तक ही रही । कुछ लोग मानते हैं कि ऑनलाइन लर्निंग से कुछ होशियार छात्रों को फायदा हुआ है।

चलते-चलते यह जानिए कि समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि जहाँ उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए ऑनलाइन लर्निंग बेहतर साबित होगा, वहीं बच्चों को गुरु के साथ रहने पर ही बेहतर शिक्षा मिलेगी।

 

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