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मधेपुरा और भारतीय रेल यानि एक और ‘कोसी’ की गाथा

वर्ष 2008 का अगस्त माह। कुसहा बाँध टूटने से बाढ़ की त्रासदी ने ऐसी धूम मचाई कि कोसी अंचल के जल-प्रलय को तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया। चारों ओर सड़कें टूटीं, बड़े-बड़े पुल बह गए एवं रेल की पटरियाँ ध्वस्त हो गईं। हाल तक मधेपुरा से रेल द्वारा यात्रा करना सपना बना रहा, जबकि यहाँ पर दो दिग्गज सांसद हैं – एक शरद यादव और दूसरे राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और जनता बापू के बन्दर जैसे मुख बन्द किए बैठी है।

हाल में एक ट्रेन चलने लगी है – कोसी एक्सप्रेस। मुरलीगंज से मधेपुरा पहुँचती है सुबह के साढ़े तीन बजे। अब इसे सुबह कहा जाय कि रात, कहना मुश्किल है। बहरहाल, इस ट्रेन में ए.सी. का एक ही डब्बा होता है। मधेपुरा के लोग अपने परिवार के साथ उस ट्रेन से यात्रा करने हेतु कन्फर्म टिकट तो ले लेते हैं परन्तु स्टेशन पर गाड़ी उतनी देर (दो मिनट) भी नहीं ठहरती कि यात्री सपरिवार डब्बे में चढ़ सके। एक ही परिवार के कुछ लोग चढ़ जाते हैं और कुछ देखते हुए रह जाते हैं। कारण यह भी कि ट्रेन बड़ी लाईन वाली और प्लेटफॉर्म छोटी लाईन वाला। ट्रेन और प्लेटफॉर्म में अंतर इतना कि चढाई एवरेस्ट पर चढ़ने जैसी और उस पर तुर्रा यह कि रेल कर्मचारी एक-डेढ़ मिनट लगा देते हैं ए.सी. डब्बे के दोनों गेट खोलने में। तब तक ए.सी. के अधिकांश पैसेंजर को छोड़ गाड़ी सहरसा के लिए खुल जाती है। ऐसे में कुछ लोग तो किसी तरह अगल-बगल के नॉन ए.सी. डब्बे में चढ़ जाते हैं पर चढ़ने में असफल साबित हुए लोगों के सामने अब चुनौती होती है ट्रेन को सहरसा जाकर पकड़ने की।

खैर, कुछ लोग निजी मोटर गाड़ी से तो कुछ भाड़े के टैम्पू से सहरसा पहुँचकर उसी कोसी एक्सप्रेस पर सवार होते हैं परन्तु यहाँ पर उन्हे ट्रेन खुलने का इंतजार करना पड़ता है और वो भी दो-चार मिनट नहीं, लगभग घंटे भर और कई बार उससे भी अधिक। जरा सोचिए, उन यात्रियों को इस परिस्थिति में कैसा लगता होगा जो दौड़ते-हाँफते इस ट्रेन को पकड़ने सहरसा पहुँचे होंगे। कई बार तो सहरसा जाकर कोसी एक्सप्रेस पकड़ने की आपाधापी में यात्री अपनी अंतिम यात्रा पर भी चले गए हैं और सांसद-विधायक उनकी मातमपुर्सी करने और आर्थिक सहयोग देने पहुँचे हैं। पर क्या इन प्रतिनिधियों का कर्तव्य केवल इतना ही है..?

बहरहाल, इस ‘कोसी’ की ‘त्रासदी’ यहीं खत्म नहीं होती। आगे राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर इस ट्रेन को दो मिनट से अधिक रुकना मंजूर नहीं लेकिन यहाँ से पटना जंक्शन की ढाई कि.मी. की दूरी ये आधे घंटे में तय करेगी..! तीन मिनट की दूरी ये तीस मिनट में क्यों तय करती है इसका जवाब कौन देगा..? यदि राजेन्द्र नगर में यह ट्रेन पाँच मिनट रुक जाती तो ज्यादातर यात्री यहीं उतर जाते और पटना जंक्शन पर यात्रियों और मोटर गाड़ियों का लोड स्वत: घट जाता। आखिर इसे कौन देखेगा..? क्या यात्रियों के लिए सब कुछ ‘प्रभु’ भरोसे ही छोड़ दिया जाएगा या हमारे जनप्रतिनिधि भी कुछ करेंगे..?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. मधेपुरी से साभार

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मधेपुरा कॉलेज स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया

मधेपुरा कॉलेज परिवार द्वारा 10 अप्रैल को कॉलेज का 27वाँ स्थापना दिवस समारोह उत्सवी माहौल में मनाया गया | आरम्भ में तीन दिवसीय वार्षिक खेल-कूद प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपने इल्म व अभ्यास के प्रदर्शन से दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि वि.वि. क्रीड़ा पदाधिकारी डॉ.शैलेन्द्र कुमार ने प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार-डॉ.पूनम यादव सहित कार्यक्रम संचालक गौतम कुमार व अन्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की |

स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन मंडल वि.वि. के प्रति कुलपति डॉ.जे.पी.एन.झा, प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार, प्राचार्य डॉ.माधवेन्द्र झा, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, कुलानुशासक डॉ.बी.एन.विवेका, डॉ.पूनम व अन्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया | कॉलेज परिवार द्वारा ‘अतिथि देवो भव:’ को चरितार्थ किया गया |

इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता डॉ.झा ने छात्रों एवं शिक्षकों के लिए विशेष निर्देश देते हुए कहा कि शैक्षणिक माहौल को बनाये रखना हमारी प्राथमिकता है | इसके लिए सबों को मिलकर काम करना होगा | प्रभारी कुलसचिव डॉ.शैलेन्द्र कुमार, कुलानुशासक डॉ.बी.एन.विवेका, पूर्व कुलानुशासक डॉ.शिवनारायण यादव, यू.वी.के.कॉलेज के प्राचार्य डॉ.माधवेन्द्र झा ने कॉलेज स्थापना से अबतक के विकास की गाथा सुना-सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया |

दिनभर के उत्सवी माहौल के अन्त में अविस्मरणीय साँस्कृतिक कार्यक्रमों में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के बेहतरीन प्रदर्शन को चार चाँद लगाने वाले ख्याति प्राप्त गजल गायक संजीव, आगा खां सहित मनोज झा की पूरी टीम दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट में खो गयी… विलीन हो गई….. गुम हो गयी | थोड़ी देर के लिए सबकुछ ठहर सा गया…….लोगों की भूख भी मिट गई…….|

Lokarpan of College Magazine 'Rachnashree' by Guests- From LtoR- Dr.Poonam Yadav, Dr.Madhepuri, Dr.B.N.Viveka, PVC Dr.J.P.N.Jha, Dr.S.N.Yadav, Dr.Shailendra Kumar, Pr.Madhavendra, Dr.Ashok Kumar & others .
Lokarpan of College Magazine ‘Rachnashree’ by Guests- From LtoR- Dr.Poonam Yadav, Dr.Madhepuri, Dr.B.N.Viveka, PVC Dr.J.P.N.Jha, Dr.S.N.Yadav, Dr.Shailendra Kumar, Pr.Madhavendra, Dr.Ashok Kumar & others .

इस सम्पूर्ण उत्सवी माहौल को ऊँचाई प्रदान करने के लिए कॉलेज द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका- ‘रचनाश्री’ का विमोचन अतिथियों ने एक साथ मिलकर किया | स्थापना दिवस समारोह को जीवन्त करने वालों में डॉ.पूनम यादव, डॉ.भगवान मिश्रा, प्रो.मनोज भटनागर, डॉ.अभय कुमार, प्रो.मुस्ताक, रत्नाकर भारती, आरती झा, स्वाती, रानी सहित डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.श्रीकान्त यादव, प्रो.रवि रंजन, अरविन्द कुमार, विजेंद्र मेहता आदि साधुवाद के पात्र हैं जो अन्त तक सतर्क रहे और मौजूद रहे |

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डॉ.रवि ने किया त्रि-दिवसीय भारतीय संस्कृति के महाकुम्भ का उद्घाटन

25 मई 1943 को आम लोगों के बीच जनवादी विचारों को ले जाने के लिए देश के कुछ कलाकारों, रंगकर्मियों एवं वैज्ञानिकों ने जिस संस्था की स्थापना की उसे नाम दिया विश्व प्रसिद्द वैज्ञानिक डॉ.होमी जहाँगीर भाभा ने- I.P.T.A यानी Indian Peoples’ Theatre Association . ie’ भारतीय जन नाट्य संघ |

मधेपुरा इप्टा द्वारा बी.एन.मंडल स्टेडियम में आयोजित त्रि-दिवसीय भारतीय संस्कृति के महाकुम्भ का उद्घाटन पूर्व सांसद व मंडल वि.वि. के संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, डी.एम. मो.सोहैल, डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.योगेन्द्र नारायण यादव, समाज-सेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं अभिषद सदस्य डॉ.नरेश कुमार आदि ने दीप प्रज्वलित कर संयुक्तरूप से किया |

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ.रवि ने विस्तार से शिक्षा मनीषी कीर्ति नारायण मंडल के त्याग एवं शिक्षा के प्रति ललक का आँखों देखा हाल दर्शकों के समक्ष परोसा जिन्हें इप्टा ने यह मंच उनके जन्मशती पर समर्पित कर दिया है | विधान पार्षद श्री वर्मा ने पूर्ण नशाबंदी के लिए सरकार की सराहना की तथा इप्टाकर्मियों द्वारा नशाबन्दी के फायदों को घर-घर तक ले जाने के लिए उन्हें साधुवाद दिया |

मुख्य अतिथि डी.एम. मो.सोहैल ने कहा की इप्टा अपने रास्ते पर अभी भी चल रहा है और जनवादी विचारों को लोगों तक पहुंचा रहा है | मौके पर डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.नायडू, प्रो.सचिन्द्र और डॉ.आलोक ने विचार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के आयोजकों का स्वागत भी किया |

समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने कहा कि कीर्ति बाबू को जानने के लिए महात्मा कबीर को जानना होगा और महात्मा गाँधी को भी जानना होगा | इस शिक्षा मनीषी को जानना हो तो गुरु नानक और पं.मदन मोहन मालवीय को जानना होगा | डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विश्वविख्यात परमाणु ऊर्जा के वैज्ञानिक डॉ.भाभा के ज्ञान-विज्ञानं तथा इप्टा के प्रति समर्पण की विस्तार से चर्चा की |

असम के बिहू एवं बंगाल के ‘कृष्णा’ सहित ज्ञान विज्ञान के सचिव मुरलीधर द्वारा मधनिषेध पर आधारित नाट्य ‘सबक’ का मंचन किया गया | अंत में मो. नौशाद एवं प्रो. योगेन्द्र ना. यादव की पुस्तकों का विमोचन किया गया |

अध्यक्षीय भाषण में कार्यकारी आध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि इप्टा के कार्यक्रमों के माध्यम से इसके लाभकारी विचारों को आम जन तक ले जायेंगे | प्रशान्त कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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पूर्ण नशाबंदी का श्रेय महिलाओं को दिया नीतीश सरकार ने

नीतीश के साहसिक फैसले को सारा बिहार सलाम करता है | चार दिनों में ही शराब न पीने की एक करोड़ सतरह लाख शपथ-पत्र तथा बारह लाख अनठावन हजार लीटर देसी शराब नष्ट किये जाने की जानकारी मिलते ही जहाँ सी.एम. के सचिव चंचल कुमार द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय, आवास एवं बिहार विकास मिशन के पदाधिकारियों-कर्मियों को आजीवन शराब न पीने की शपथ दिलाई गई, वहीँ मधेपुरा जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने बी.एन.मंडल स्टेडियम में मंगलवार को पुलिस एवं प्रशासन से जुड़े पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को आजीवन नशापान नहीं करने की शपथ दिलाई | सबों के द्वारा शराब नहीं पीने का शपथ पत्र पढ़ा गया |

डी.एम. मो.सोहैल ने शपथ पत्र पढाये जाने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि एक भी पुलिस अथवा प्रशासन के कर्मचारी यदि शराब पीकर ड्यूटी पर आते हैं और जाँच के दौरान सही पाये जाते हैं तो उन्हें अविलम्ब नौकरी से निलंबित कर दिया जायेगा तथा अन्य कठोर दण्ड देने की अग्रेतर करवाई आरम्भ कर दी जाएगी | डी.एम. ने यह भी कहा कि जो कर्मचारी उचित कारण के बिना जानबूझकर शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुए – उन पर भी करवाई की जाएगी |

नीतीश सरकार की पूर्ण नशाबन्दी से दलित बस्तियों की महिलाओं में सर्वाधिक प्रसन्नता देखी जा रही है | सारी महिलाएं चहक-चहक कर नीतीश को दुआएं दे रही हैं |

कहीं शहरों में शराब नहीं पीने का संकल्प लिया जा रहा है तो कहीं गाँव को नशामुक्त गाँव बनाने का ग्रामीणों द्वारा शपथ लिया जा रहा हैं | वस्तुतः देसी-विदेशी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध से बिहार के सामाजिक जीवन और सभ्यता-संस्कृति में बड़ा बदलाव होगा | अब ना तो शरीर का नाश होगा और ना आत्मा पथभ्रष्ट होगी | तभी तो शराब बंदी के पक्ष में सात लाख नारे लिखे गये और 84 हजार नुक्कड़ नाटक हुए |

जब नीतीश कुमार के पूर्ण शराबबंदी पर मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से प्रतिक्रिया माँगी गई तो उन्होंने बस यही कहा कि अब बिहार अपनी खोई विरासत वापस पा लेगा और हर मायने में देश का अव्वल राज्य बनेगा |

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खुशहाल बिहार का वादा किया नीतीश कुमार ने

जानकारी के अभाव में लोग नारी को अबला कहते हैं और नारी सशक्तिकरण की चर्चा भी करते हैं | यूँ हर व्यक्ति को क्या चाहिए – शक्ति, विद्या और धन | इन तीनों के लिए हम पूजा करते हैं – माँ दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की | इतना ही नहीं, बिहार की बेटी ‘मैत्रैयी’ की ये पंक्तियाँ भारतीय चेतना का आलोक स्तम्भ और युग-युग तक प्रकाश स्तम्भ बना रहेगा –

तमसो मा ज्योतिर्गमय… असतो मा सद्गमय…!

पटना का एस.के.मेमोरियल हॉल ! वर्ष 2015, तारीख 9 जुलाई और दिन गुरुवार | भाषण समाप्त कर अपने सीट पर बैठने जा रहे थे नीतीश कुमार कि महिलाओं ने जोरदार आवाज लगाई – खुशहाल बिहार बनाने के लिए शराब पर प्रतिबंध लगाने हेतु कुछ तो करिये….| नीतीश ने तत्क्षण कहा कि अगली बार सरकार बनी तो शराब बंद कर देंगे……| उसी का परिणाम है कि एक अप्रैल 2016 से बिहार में, प्रथम चरण में, देशी शराब पूर्णतः बंद है |नीतीश एक बार जो ठान लेता है उसे पूरा करके ही रहता है | नीतीश का संकल्प है –

  • नशापान से अरे बिहारी, हमें दूर ही रहना है |
  • बहुरेंगे अब दिन बिहार के, हर बच्चे को पढ़ना है ||

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने के लिए मधेपुरा जिले के डी.एम. मो.सोहैल, एस.पी. विकास कुमार, डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला आदि सहित शहर के बुद्धिजीवियों ने जागरूकता रैली निकाली जो मेन रोड से होते हुए रासबिहारी उच्च वि. मैदान में पहुँची  | रैली को संबोधित करते हुए डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि 01 अप्रैल 2016 से पूरे बिहार में शराब बंदी लागू हो गयी है | शराब का सेवन करने वाला इंसान हैवान हो जाता है | शराब से शरीर नष्ट होने से साथ-साथ आत्मा भी पथ भ्रष्ट होने लगती है | डी.एम. ने परिवार के सदस्यों के सम्मान के लिए शराब से दूर रहने का संकल्प दिलाया |

एस.पी. विकास कुमार ने कहा कि आज से इस रैली मे शामिल सभी सज्जन शराब सेवन नहीं करने का संकल्प तो ले ही रहे हैं साथ ही दूसरे लोगों को भी शराब से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की सबों ने शपथ भी ली | सभी पदाधिकारियों सहित राजद नेता विजेंद्र प्रसाद यादव, जदयू नेता अनिल कुमार तथा काँग्रेसी नेता विष्णुदेव यादव विक्रम सहित शामिल शिक्षकों ने भी आजीवन शराब सेवन नहीं करने का संकल्प लिया |

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दृष्टि द विजन ने किया छात्रों को पुरस्कृत

नगरपरिषद के लक्ष्मीपुर मुहल्ला (वार्ड न.-17) स्थित दृष्टि द विजन कोचिंग संस्थान के निदेशक पंकज पोद्दार एवं मीनाक्षी पोद्दार के जीवन का यही उद्देश्य रहा है कि कोचिंग के माध्यम से स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण एवं मानकपूर्ण शिक्षा प्रदान किया जाए | इस संस्थान के माध्यम से शहर के विभिन्न विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के छात्र-छात्राओं के बीच बेहतर प्रदर्शन के आधार पर भव्य पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया |

समारोह की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने सम्बोधन में छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों से भारतरत्न डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के जीवन को परोसते हुए यही कहा कि आप नींद में आने वाला सपने नहीं देखें बल्कि वैसे सपने देखें जो आपको रात में नींद भी नहीं आने दें | डॉ.मधेपुरी ने छात्र-छात्राओं को भयमुक्त रहने एवं आत्मविश्वास से भरपूर होने के फायदों पर विस्तार से प्रकाश डाला | निदेशक मीनाक्षी ने कहा कि 6 वर्षों से यह कोचिंग शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है और दर्जनों आईआईटीयन-मेडिकल व इंजीनियरिंग पैदा कर चुका है |

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए प्रो.विजेन्द्र नारायण यादव, प्रो.अशोक कुमार पोद्दार, अधिवक्ता अजय कुमार, सुमन जी एवं ललन यादव सहित जागरण के संवाददातापृथ्वीराज यदुवंशी ने विस्तार से छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित किया |

डॉ.मधेपुरी ने प्रथम आने वाले जिन छात्रों को पुरस्कृत किया वे हैं- रश्मिका रत्न, पीयूष प्रियांशु, जागृति प्रकाश, अंकित कुमार और बिट्टूराज आदि | शेष बेहतर प्रदर्शन वाले छात्र-छात्राओं को निदेशक पंकज पोद्दार एवं मीनाक्षी पोद्दार द्वारा पुरस्कृत किया गया |

सांस्कृतिक कार्यक्रम में गायक रौशन ने खूब तालियाँ बटोरी एवं मीनाक्षी ने मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया |

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अश्लीलता की होलिका जलाई गयी

स्थानीय भूपेन्द्र चौक पर होलिकोत्सव के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार की जिला इकाई के तत्वावधान में होलिका दहन को अश्लीलता निवारण दिवस के रूप में मनाया गया जिसकी अध्यक्षता पी.एस.कॉलेज मधेपुरा के प्रो.अजय कुमार ने की |

सम्पूर्ण कार्यक्रम में होलिका को अश्लीलता के प्रतीक के रूप में जलाने के साथ-साथ नयी पीढ़ी के प्रहलाद को बचाने पर जोर दिया ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी एवं शिक्षा प्रेमी डॉ.रामचन्द्र प्रसाद मंडल, डॉ.गोपाल यादव, पूर्व उपप्रमुख विनयवर्द्धन उर्फ़ खोखा बाबू आदि | मौके पर अश्लील पोस्टरों एवं चित्रों का वहिष्कार करने की अपील प्रो.राम सुन्दर साह, प्रो.जयप्रकाश यादव, ओम प्रकाश यादव, डॉ.नागेन्द्र गुप्ता आदि सुधि जनों ने की |

शिक्षक संघ के नेता प्रो.जयप्रकाश यादव ने कहा कि समाज में तेजी से बढ़ रही विकृति को समाप्त करने के लिए सम्मिलित रूप से हमें लोक संस्कृति एवं लोकचार को बढ़ावा देना होगा अन्यथा यह समाज कमजोर होता चला जाएगा |

गायत्री परिवार को समर्पित चेतन वर्मा ने विकासवाद के साथ अश्लीलतावाद के बाजार को तेजी से फैलता हुआ बताया जिसे उन्होंने सामजिक हिंसा का कारण माना तथा इसे दूर करने के लिए सोच में बदलाव लाने पर बल दिया |

अन्त तक संजय यादव, प्रो.अशोक कुमार पोद्दार, दमयंती देवी, रमेश चन्द्र भगत, दयानन्द यादव, शिवकुमार, किरणवाला, नीलम कुमारी, सरिता सिंह आदि उपस्थित रहे |

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बिहार दिवस मनाया मधेपुरा जिला प्रशासन ने

22 मार्च 1912 के दिन ‘बिहार’ को तत्कालीन ‘बंगाल प्रेसिडेंसी ऑफ फोर्ट विलियम’ से अलग स्वतंत्र अस्तित्व प्राप्त हुआ जिसे आज 104 वर्ष हो गये | बिहार दिवस के अवसर पर जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल एवं अनुभवी आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार सहित अन्य पदाधिकारीगण इसकी सफलता के लिए तत्पर देखे गये | जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक बिहार दिवस की धूम रही | यहाँ तक कि पंचायत स्तर के सरकारी भवनों को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया |

सुबह में स्कूली बच्चों द्वारा प्रभातफेरी निकाला गया | बिहार गौरव गाथा से सम्बन्धित भाषण प्रतियोगिता, गीत-संगीत प्रतियोगिता तथा क्वीज का भी आयोजन किया गया था | इसके साथ ही साफ़-सफाई, रोशनी एवं खेल-कूद की पूरी व्यवस्था की गयी थी | शाम में बी.एन.मंडल स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय स्कूली बच्चों के साथ-साथ पटना से आये सतीश पप्पू आर्केस्ट्रा टीम ने भाग लिया |

कार्यक्रम का श्रीगणेश हर ओर नजर रखनेवाले डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार सहित ए.डी.एम. अबरार अहमद कमर, डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, समाजसेवी शौकत अली, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, माया विद्या निकेतन की प्राचार्या चन्द्रिका यादव आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर बिहार दिवस का उद्घाटन किया |

डी.एम. मो.सोहैल ने अपने संक्षिप्त भाषण में कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के सप्त संकल्पों को अमलीजामा पहनाने के लिए जिला प्रशासन के सभी पदाधिकारीगण व कर्मचारीगण तत्पर रहेंगे |

देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम में शहर के हाली क्रास, माया विद्या निकेतन, केशव कन्या, जगजीवन आश्रम स्कूल, स्वर शोभिता, इप्टा कलाकारों सहित अन्य कई स्कूलों के बच्चे-बच्चियों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया | सतीश पप्पू आर्केस्ट्रा टीम तो होली के कुछ गानों पर युवाओं को थिरकने के लिए विवश कर दिया और खूब तालियाँ बटोरी |

कार्यक्रम का आरम्भ श्रीमती रेखा यादव के स्वागतगान से हुआ तथा मंच संचालन किया स्काउट गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव ने | दस बजे रात्रि में कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा कर दी गई |

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क्या फिर कहलाएगा बिहार का इतिहास समूचे भारतवर्ष का इतिहास..?

भगवान बुद्ध के जन्म यानि ढाई हजार वर्ष पूर्व या बाद या फिर उनके समय में भी सदियों तक ‘बिहार’ नाम का कोई भू-भाग प्रकाश में नहीं आया था। 14वीं शताब्दी यानि 1320 ई. में मौलाना मिनहाजुद्दीन-अबु-उमर-ए—रहमान द्वारा ‘तबकात-ए-नासिरी’ जैसे दस्तावेज में सर्वप्रथम ‘बिहार’ शब्द का उल्लेख मिलता है। आगे इतिहास में उद्धृत तथ्यों के आधार पर कम-से-कम इस आशय को विश्वसनीय और प्रामाणिक माना जा सकता है कि ‘बिहार’ शब्द का उत्स बौद्ध धर्म की ‘विहार’ परम्परा से है। यानि बौद्ध विहारों या मठों की बहुसंख्यकता को देखते हुए ही भारत के एक भू-भाग को ‘बिहार’ की संज्ञा प्रदान की गई है। संक्षेप में ईसा के जन्म के 1200 वर्षों के बाद यानि 13वीं शताब्दी में ‘बिहार’ शब्द का जन्म माना जा सकता है और 15वीं-16वीं शताब्दी में जिस भारतीय भू-भाग को ‘बिहार’ राज्य की संज्ञा मिली वही चलते-चलते आज हमारा और आपका ‘बिहार’ बना है।

ये तो हुई ‘बिहार’ के नामकरण की बात। लगे हाथ इसकी राजधानी पटना के नामकरण की पृष्ठभूमि से भी वाकिफ हो लें। प्रारम्भ में बाग-बगीचे और बड़ी तायदाद में खिलने वाले फूलों के कारण गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर बसे नगर (वर्तमान पटना) को लोगों ने ‘कुसुमपुर’ कहा। आगे चलकर ‘पुत्रक’ नामक राजकुमार और ‘पाटलि’ नामक राजकुमारी ने विवाहोपरान्त संतान नहीं होने के कारण संतति के बिना भी अपने नाम को जीवित रखने के लिए ‘कुसुमपुर’ का नाम ‘पाटलिपुत्रक’ रख दिया। कालक्रम में ‘पाटलिपुत्रक’ से ‘पाटलिपुत्र’ बना और फिर ‘पटन देवी’ नाम से जुड़कर इसने ‘पटना’ का रूप धारण कर लिया।

1707 में औरंगजेब की मृत्यु होने के 25 वर्ष बाद तक ‘बिहार’ मुगल साम्राज्य का एक अलग प्रान्त बना रहा पर 1732 ई. में कुछ विशेष प्रशासनिक कारणों से इसका विलय ‘बंगाल प्रेसिडेन्सी ऑफ फोर्ट विलियम’ में कर दिया गया। इसके बाद अगले 180 वर्षों तक बिहार ‘बंगाल प्रेसिडेन्सी’ के अधीन रहा जब तक कि डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा, मजहरूल हक, अली इमाम आदि के अथक प्रयासों के बाद जॉर्ज पंचम ने 12 दिसम्बर 1911 को अलग बिहार राज्य को मंजूरी नहीं दे दी और 22 मार्च 1912 को बंगाल से अलग होकर बिहार, छोटा नागपुर और उड़ीसा एक प्रदेश के रूप में अस्तित्व में नहीं आ गए।

इस नए प्रदेश को अंग्रेजी में ‘बिहार एंड उड़ीसा प्रोविन्स’ कहा जाता रहा परन्तु आम जनता द्वारा इसे ‘बिहारोत्कल’ के रूप में स्वीकार किया गया। अधिसूचित पाँच प्रमंडल वाले ‘बिहारोत्कल’ प्रान्त में कुल 21 जिलों को शामिल किया गया जो इस प्रकार थे – 1. भागलपुर प्रमंडल – भागलपुर, पूर्णिया, मुंगेर और संथाल परगना (कुल चार जिले), 2. पटना प्रमंडल – पटना, गया और शाहाबाद (कुल तीन जिले), 3. तिरहुत प्रमंडल – मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सारण और चम्पारण (कुल चार जिले), 4. छोटानागपुर प्रमंडल – हजारीबाग, राँची, पलामू, सिंहभूमि और मानभूमि (कुल पाँच जिले) तथा 5. उड़ीसा प्रमंडल – कटक, बालासोर, अंगुल, पुरी और सम्बलपुर (कुल पाँच जिले)। बिहार के सोलह और उड़ीसा के पाँच जिलों को मिलाकर बने ‘बिहार-उड़ीसा’ नामक इस नए सूबे का शासनाधिकार ब्रिटिश हुकूमत के लेफ्टिनेन्ट गवर्नर को सौंपा गया और राजधानी के रूप में अस्तित्व में आया ‘पाटलिपुत्र’ से बना ‘पटना’।

भारत के पहले सम्राट (चन्द्रगुप्त मौर्य) से लेकर पहले राष्ट्रपति (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद) तक की जन्मभूमि है बिहार। एक समय बिहार का इतिहास ही समूचे भारतवर्ष का इतिहास रहा है। शून्य (आर्यभट्ट) से लेकर पहला गणतंत्र (लिच्छवी) तक इसी ने दिया संसार को। माँ सीता का जन्म यहीं हुआ और यहीं महर्षि वाल्मीकि ने ‘रामायण’ की रचना की। बुद्ध और महावीर को यहीं ‘अपने होने का अर्थ’ मिला और यहीं सिक्खों के ‘दसवें गुरु’ गुरु गोविन्द सिंह ने जन्म लिया। महात्मा गांधी ने यहीं के चम्पारण में ‘सत्याग्रह’ का ‘बीज’ बोया और यहीं जयप्रकाश ने सम्पूर्ण क्रान्ति की ‘नींव’ रखी।

वशिष्ठ और विश्वामित्र जैसे मुनि, अशोक और शेरशाह जैसे शासक, विद्यापति और दिनकर जैसे कवि बिहार की मिट्टी की उपज हैं। चाणक्य जैसे गुरु, आर्यभट्ट जैसे खगोलविद्, जीवक जैसे चिकित्सक, पाणिनी जैसे शिक्षाविद्, याज्ञवल्क्य जैसे दार्शनिक, मंडन मिश्र जैसे शास्त्रज्ञ और बाबू कुंवर सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी की कर्मभूमि बिहार ही है। नालन्दा और विक्रमशिला जैसे ज्ञान के केन्द्र यहीं थे जिनसे कभी सारा संसार प्रकाशित होता था। पर आज हम कहाँ हैं..? बिहार के गौरवशाली इतिहास में हमने क्या और कितना जोड़ा है..? पहले ‘विशिष्टता’ में हमारी कोई सानी नहीं थी और आज हमें ‘विशेष राज्य’ की लड़ाई लड़नी पड़ रही है..?

आज हमारा बिहार 104 साल का हो गया। आज का दिन ‘मील’ के तमाम ‘पत्थरों’ को गिनने और उन्हें सहेजने के साथ-साथ उनमें मील के ‘नए’ पत्थरों को जोड़ने के संकल्प का दिन भी होना चाहिए। आज का दिन आत्ममंथन का होना चाहिए कि हमसे कहाँ और क्या चूक हुई। ‘बिहार दिवस’ पर जब पूरा बिहार रोशनी में नहा रहा होगा तब हमें अपने गौरवशाली अतीत के प्रति पूरी श्रद्धा से सिर झुका कर ये प्रण लेना चाहिए कि बिहार की हर शाम ऐसी ही हो, हमारी रोशनी से एक बार फिर पूरी दुनिया जगमगाए और एक बार फिर बिहार का इतिहास समूचे भारतवर्ष का इतिहास कहलाए..!

Bihar Vidhan Sabha decorated with lights on Bihar Diwas.
Bihar Vidhan Sabha decorated with lights on Bihar Diwas.

[डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी से परिचर्चा के आधार पर मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप]

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सिंहेश्वर स्थान में अखिल भारतीय त्रि-दिवसीय सर्वधर्म महासम्मेलन सम्पन्न

ऋष्य श्रृंग की पावन धरती सिंहेश्वर स्थान के मवेशी हाट मैदान में त्रिदिवसीय सर्वधर्म महासम्मेलन का शुभारम्भ शुक्रवार के दिन दीप-प्रज्जवलित कर भू.ना.मंडल वि.वि. के प्रतिकुलपति डॉ.जे.पी.एन.झा, समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.रामचन्द्र मंडल, डॉ.के.एन.ठाकुर, डॉ.बी.एन.विवेका, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.शचीन्द्र एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ.अनिल कुमार सहित प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी के रामनाथ भाई, जैन धर्म के विवेक मुनि, इस्लाम धर्म के मिर्जा दिलदार हुसैन वेग, सिक्ख धर्म गुरु कुलमोहन सिंह, आनंद मार्ग के प्रवक्ता एवं महर्षि मेंहीं के स्थानीय संस्थापक स्वामी विमलानंद महाराज, ईसाई धर्म के फिलिप्स क्राइस्ट, कबीर पंथ के उमा साहब आदि सभी ने सम्मिलित रूप से किया |

BK Ranju Addressing Sarv Dharma Maha Sammelan at Singheshwar Madhepura.
BK Ranju Addressing Sarv Dharma Maha Sammelan at Singheshwar Madhepura.

इस अवसर पर समाज एवं दूसरों की भलाई करने वाले संत-मुनियों की उपस्थिति सर्वाधिक देखी गयी | वैसे खुदा के बंदे तथा ईश्वर के बच्चों के रूप में मधुर वाणी से लैस प्रमुख आत्माएँ जो सदा मंच पर विराजमान रहीं- जैनधर्म अशोक भंत जी, फादर ऑफ़ सैंट, राम सिंह भाईजी, कोडिनेटर हरीश भाईजी, सुमन बहनजी, भाई जगदीश जी, सृजना दीदी, नीरा दीदी, दीदी मंगलवा, भगवती दीदी सहित मधेपुरा की ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी आदि |

Devoted Audience in Lacks from different Districts & States too.
Devoted Audience in Lacks from different Districts & States too.

समाज में सदभाव बनाने हेतु आयोजित इस त्रि-दिवसीय सर्वधर्म महासम्मेलन का आयोजन सिंहेश्वर मेंही आश्रम के संस्थापक स्वामी विमलानन्द महराज, संचालन राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ.अनिल कुमार व छात्र नेता राहुल कुमार ने किया | सम्मेलन में नेपाल सहित कोसी प्रमंडल के अररिया, पूर्णिया एवं सहरसा, मधेपुरा, सुपौल सहित अन्य जिले के लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी | इस धर्म सम्मेलन में स्वास्थ शिविर, नि:शुल्क जांच शिविर सहित धार्मिक पुस्तकों का स्टाल भी लगाया गया है |

उद्घाटन भाषण में प्रतिकुलपति डॉ. झा ने कहा कि गीता के दर्शन के सामने विश्व सिर झुकाता है | गीता ज्ञान से भरा विश्व का प्रथम धर्मग्रन्थ माना जाता है | ज्ञान सर्वाधिक पवित्र विद्या है जो हमारे हृदय को विशालता से भर देता है | उन्होंने कहा कि जब सभी धर्मों का मत एक है तो विभेद कैसा ?

अन्य सभी विद्वान वक्ताओं ने अपने उदगार में ज्ञान प्राप्ति से आत्म तत्व के बोध होने की बातें कहीं तथा शांति एवं संतोष को सर्वश्रेष्ठ मानव धन बताते हुए मानव को मानव होने पर बल दिया | राष्ट्रीय मुस्लिम एकता मंच के मिर्जा बेग ने मुस्लिम धर्म सहित किसी भी धर्म में हिंसा (गो-हत्या) को जायज नहीं कहा | उन्होंने पैगम्बर साहब को उद्धृत करते हुए वृक्ष नहीं काटने की बात कही |

Dr.Bhupendra Madhepuri Addressing Sarv Dharma Sammelan and Sneh Milan Samaroh at Singheshwar, Madhepura
Dr.Bhupendra Madhepuri Addressing Sarv Dharma Sammelan and Sneh Milan Samaroh at Singheshwar, Madhepura

उसी कड़ी में डॉ.मधेपुरी ने राम-रावण संवाद को परोसते हुए श्रद्धालुओं से यूँ कहा कि रावण सबकुछ में राम से श्रेष्ठ होने के बावजूद युद्ध में इसलिए हार गया कि राम का भाई राम का साथ दिया और रावण का भाई उससे अलग रहा | डॉ.मधेपुरी ने खुशियों का इजहार करते हुए कहा कि आज जब सभी धर्मों के लोग एक साथ, एक मंच पर हैं तो हम आतंकवादियों-देश द्रोहियों को सबक सिखाने एवं भारत को विश्व गुरु बनाने में सक्षम सिद्ध होंगे | लम्बे तकरीर के अंत में उन्होंने सर्वधर्म सम्मेलन के जयकारा के साथ लाखों लाख श्रद्धालुओं को अपनी चार पंक्तियाँ भेंट की-

धन आदमी की नींद को हरपल हराम करता ,
जो बांटता दिल खोल उसे युग सलाम करता |
मरने के बाद मसीहा बनता वही मधेपुरी,
जो जिंदगी में अपना सबकुछ नीलाम करता ||

उद्घाटन सत्र के अंत में सभी शिक्षकों एवं संतों के साथ ‘धर्मामृत’ स्मारिका का लोकार्पण किया गया और प्रतिकुलपति डॉ.झा ने कहा कि पुस्तक से बड़ा मित्र संसार में कोई नहीं होता | सम्पादक डॉ.अनिल कुमार ने कहा कि स्मारिका को पढ़ने पर ज्ञान के कपाट खुल जायेंगे |

SP Vikas Kumar giving directions to Police persons from Vihar Hotel Singheshwar sitting with Pro. VC Dr. J.P.N. Jha, Sinior Professor Dr. K.N Thakur & Samaaj Sevi Dr. Madhepuri and others.
SP Vikas Kumar giving directions to Police persons from Vihar Hotel Singheshwar sitting with Pro. VC Dr. J.P.N. Jha, Sinior Professor Dr. K.N Thakur & Samaaj Sevi Dr. Madhepuri .

कार्यक्रम स्थल पर पेयजल, स्वास्थ्य एवं पुलिस शिविर के साथ एस.पी. विकास कुमार को भी क्रियाशील देखा गया | विभिन्न धर्मों के बुक स्टाल पर भीड़ देखी गयी | विभिन्न प्रदेशों के श्रद्धालु भी सम्मेलन में शामिल हुए | सबों को आयोजकों की ओर से डॉ.अनिल ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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