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आईफा 2018: इरफान, श्रीदेवी और ‘तुम्हारी सुलु’ सर्वश्रेष्ठ

भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (आईफा) 2018 में विद्या बालन अभिनीत ‘तुम्हारी सुलु’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार से नवाजा गया। इस फिल्म ने ‘न्यूटन’ और ‘हिन्दी मीडियम’ जैसी फिल्मों को पछाड़कर यह सम्मान पाया। वहीं न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी से जूझ रहे अभिनेता इरफान खान को फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ में उनकी अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और श्रीदेवी को उनकी फिल्म ‘मॉम’ के लिए मरणोपरांत सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया। इरफान के लिए यह पुरस्कार जहां फिल्म ‘हैदर’ की उनकी सहकलाकार श्रद्धा कपूर ने स्वीकार किया, वहीं श्रीदेवी का पुरस्कार बड़े भावुक क्षण में उनके पति बोनी कपूर ने ग्रहण किया।

‘हिन्दी मीडियम’ और ‘मॉम’ के खाते में एक-एक और महत्वपूर्ण पुरस्कार गया। ‘हिंदी मीडियम’ के लिए साकेत चौधरी ने जहां सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार हासिल किया, वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी को ‘मॉम’ के लिए सर्वक्ष्रेष्ठ सहकलाकार (पुरुष) का पुरस्कार दिया गया। सर्वश्रेष्ठ सहकलाकार (महिला) का पुरस्कार ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के लिए अभिनेत्री मेहेर विज ने जीता।

अन्य पुरस्कारों की बात करें तो ऑस्कर में भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर नामित की गई ‘न्यूटन’ को सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार मिला। वहीं अरिजीत सिंह को फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ के गीत ‘हवाएं’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक, मेघना मिश्रा को ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के गीत ‘मैं कौन हूं’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका और फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ के लिए अमाल मलिक, तनिष्क बागची और अखिल सचदेवा की तिकड़ी को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के पुरस्कार से नवाजा गया। इस साल का ‘आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवार्ड’ 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके अनुपम खेर को दिया गया। वहीं इस खास मौके पर बॉलीवुड अपने तीन दिग्गज कलाकारों – श्रीदेवी, विनोद खन्ना और शशि कपूर – को याद करना और उन्हें श्रद्धांजलि देना भी नहीं भूला।

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सऊदी अरब में आज से महिलाएं भी चला सकेंगी गाड़ी

सऊदी अरब की महिलाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। आज से वहां महिलाएं भी गाड़ी चला सकेंगी। 28 साल के अनवरत संघर्ष के बाद हमेशा यात्री सीट पर बैठने वाली महिलाएं भी गाड़ी की स्टियेरिंग थाम सकेंगी, जो कल तक उनके लिए ‘गुनाह’ था वहाँ। गौरतलब है कि सऊदी अरब महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने वाला दुनिया का अंतिम देश है। बाकी देशों में महिलाओं को यह ‘आजादी’ पहले से हासिल थी।

आज राजधानी जेद्दा में महिलाएं जश्न मना रही हैं। उनके चेहरे की चमक और खुशी से उनके भीतर जगा आत्मविश्वास झांक रहा है। लेकिन यह अधिकार उन्हें ऐसे ही नहीं मिला। इसके पीछे लंबे संघर्ष का इतिहास है। 1990 में 47 महिलाओं ने नियम तोड़ते हुए शहर में वाहन चलाए थे। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया था। सर्वोच्च धार्मिक संस्था ने अध्यादेश लाकर प्रतिबंध को सख्त किया, जिससे उन्हें जेल तक जाना पड़ा। इसी तरह महिला सामाजिक कार्यकर्ता मानल अल शरीफ को ड्राइविंग का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करने की वजह से जेल जाना पड़ा था। 2014 में लॉउजैन अल-हथलौल ने यूएई से सऊदी अरब तक ड्राइव करने की कोशिश की, जिसकी वजह से उन्हें 73 दिन तक जेल में रहना पड़ा। 70 साल की कार्यकर्ता अजीजा-अल यूसुफ को भी जेल जाना पड़ा था।

बहरहाल, सऊदी अरब में महिलाओं को मिली इस आजादी के मूल में वहाँ के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन 2030 कार्यक्रम है, जिसके तहत वे सऊदी अरब की तेल-गैस और हज यात्रा से होने वाली आमदनी पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। साथ ही वे अर्थव्यवस्था को विविधता देने के लिए अलग-अलग तरह के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर्स को बढ़ावा भी देना चाहते हैं। हाल ही में सऊदी ने देश में महिलाओं को अपनी मर्जी से बिजनेस शुरू करने के अधिकार दिए हैं। इसके अलावा महिलाओं के स्टेडियम में जाने पर लगे प्रतिबंध को भी सऊदी शासन हटा चुका है। माना जा रहा है कि प्रिंस ज्यादा से ज्यादा लोगों को अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहते हैं। इससे देश की उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, देश के कई कट्टरपंथी संगठनों ने प्रिंस के इन कदमों की आलोचना भी की है।

देखा जाय तो सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है। महिलाओं के प्रति होने वाली घरेलू हिंसा और यौन शोषण को रोकने के लिए वहाँ कोई कानून नहीं है। सऊदी में महिलाएं अकेले प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकतीं, विदेश यात्रा नहीं कर सकतीं, रहने की पसंदीदा जगह नहीं चुन सकतीं और ना ही पासपोर्ट या नेशनल आईडी कार्ड के लिए अप्लाई कर सकती हैं। सऊदी अरब में पुरुषों की तरह महिलाओं को कानूनी तौर पर बराबरी हासिल नहीं है। ऐसे कई काम जिन्हें पुरुष कर सकते हैं, वो महिलाओं के लिए प्रतिबंधित हैं वहाँ। यहाँ तक कि पुरुष गवाह के बिना महिलाओं की पहचान की पुष्टि तक नहीं हो सकती। ऐसे में वहाँ महिलाओं को मिली यह आजादी क्या मायने रखती है, समझना मुश्किल नहीं।

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नहीं रहे झारखंड के गांधी

झारखंड की राजनीति में जीते जी किंवदंती बन जाने वाले बागुन सुम्ब्रुई नहीं रहे। पूरी ज़िन्दगी केवल आधे शरीर को कपड़ा से ढंकने वाले सुम्ब्रुई ‘झारखंड के गांधी’ कहे जाते थे। आज शायद ही कोई यकीन करे लेकिन ये सच है कि पांच बार सांसद, चार बार विधायक और उससे पहले पांच बार मुखिया रहने वाले पूर्व मंत्री और कांग्रेस के अत्यंत वरिष्ठ नेता वस्त्र के नाम पर केवल एक धोती से काम चला लेते थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके निधन के बाद अपने ट्वीट में बिल्कुल सही कहा कि वे झारखंड की सच्चाई, सादगी और विनम्रता के प्रतीक, आदिवासी समाज की आवाज और गांधीजी के विचारों के सच्चे शिष्य थे। शुक्रवार शाम 96 वर्ष की उम्र में टाटा मेमोरियल अस्पताल में उनका निधन हो गया।
बागुन सुम्ब्रुई का जन्म 1924 में पश्चिम सिंहभूम जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव भूता में हुआ था। प्रारंभिक जीवन भूख, अभाव व गरीबी के बीच गुजरा। प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की और फिर जिला स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन गरीबी के कारण बीच में ही स्कूल छोड़ दर्जी का काम शुरू करना पड़ा। इसी बीच 1946 में  22 वर्ष की उम्र में गांव के मुंडा बन गये। यहीं से शुरू हुई राजनीतिक जीवन में कभी न रुकने वाली उनकी यात्रा।
लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय तक सिंहभूम की राजनीति का केन्द्र रहे सुम्ब्रुई की पहचान झारखंड से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक रही। जयपाल सिंह के बाद इन्होंने झारखंड पार्टी की कमान संभाली और झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए चले आंदोलन की अग्रिम पंक्ति के नेता रहे। उनके नेतृत्व वाली झारखंड पार्टी ने 1969 के चुनाव में बिहार में 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 1989 तक उनकी छवि एक ऐसे अपराजेय नेता की थी जिसे चुनाव में हरा पाना असंभव-सा था। सिंहभूम से पांच बार सांसद और चार बार विधायक रहे सुम्ब्रुई वर्ष 1999 में बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद वे झारखंड का पहले विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गए।
सादा जीवन उच्च विचार का आजीवन अनुसरण करने वाले बागुन सुम्ब्रुई ने डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत की थी। अपनी धुन और अपने सिद्धांत के इतने पक्के थे वे कि 1970 में अविभाजित बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय, जिनकी सरकार सुम्ब्रुई की झारखंड पार्टी के 11 विधायकों के समर्थन से चल रही थी, द्वारा बिहार राज्य पथ परिवहन में काम करने वाले एक आदिवासी कंडक्टर के निलंबन को वापस लेने के अपने अनुरोध के नहीं सुने जाने के कारण उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया था। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इसके बाद कर्पूरी ठाकुर की सरकार बनी, जिसमें सुम्ब्रुई परिवहन एवं वन कल्याण मंत्री बने और मंत्री बनते ही उन्होंने सबसे पहले उस कंडक्टर का निलंबन वापस लिया। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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शोधकर्ता श्री सुभाशीष को कोसी नदी में मिला 120 डॉल्फिन !

कल तक सोंस के रूप में प्रचलित कोसी के इलाके का यह जलीय जीव स्वतंत्र शोधकर्ता श्री सुभाशीष डे को कोसी नदी में 120 डॉल्फिन का मिल जाना कोई आम बात नहीं; बल्कि एक खास बात मानी जा रही है | इलाके के लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि इस जलीय जंतु की सुरक्षा एवं संवर्धन की नितांत आवश्यकता है | लगभग 2 वर्ष के अथक प्रयास के बाद कोसी नदी बेसिन गांगेय डॉल्फिन के रूप अब स्थापित होने जा रहा है |

बता दें कि 41 प्रजातियों वाली डॉल्फिन की केवल 5 प्रजातियां साफ पानी में और शेष सभी समुद्री पानी में पायी जाती है | डॉल्फिन का मनुष्य के साथ बरसो से अधिक मित्रतापूर्ण रिश्ता रहा है तथा व्यवहारों एवं भावनाओं में समानता भी |

यह भी जानिए कि प्रो.सुनील कुमार चौधरी, विभागाध्यक्ष- वनस्पति विभाग (टीएम विश्वविद्यालय भागलपुर) के निर्देशन में एक 6 सदस्यीय टीम गठित की गई | अत्याधुनिक कैमरों एवं अन्य आधुनिक यंत्रों के साथ टीम द्वारा सर्वेक्षण का कार्य संपन्न किया गया है |

यह भी बता दें कि दो चरणों में किये गये सर्वे में जहां नदी के बहाव के विपरीत दिशा में 12 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सर्वे का काम किया गया वहीं नदी के बहाव की दिशा में 21 अप्रैल से 23 अप्रैल तक पूर्व में किये गये सर्वे का क्रॉस चेकिंग भी किया गया |

वर्ष 2018 में अबतक जहाँ सहरसा-सुपौल क्षेत्र की कोसी नदी में 168 किलोमीटर सर्वे के दरमियान 120 डॉल्फिन मिली वहीं उसके विकास के साथ-साथ अन्य वन्य जीवों के विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार ने सहरसा एवं सुपौल दोनों 1 प्रमंडलों को अलग-अलग क्रमशः 11 लाख 62 हज़ार एवं 7 लाख 74 हज़ार की राशि आवंटित की है | साथ ही वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सभी धाराओं को सख्ती से लागू करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है |

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगमय हुआ मधेपुरा !

जिला मुख्यालय मधेपुरा के समाहरणालय परिसर से दूर हरे-भरे दरख़्तों से घिरे प्रदूषण रहित कीर्ति नारायण क्रीडा मैदान में आज 21 जून को प्रातः 6:00 से 9:00 बजे तक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया | सवेरे 5:00 बजे से ही योग प्रेमी बच्चे-बूढ़े, माता व बहनें क्रीडा मैदान में पहुंचने लगे जिसे खेल गुरु संत कुमार की देख-रेख में विभिन्न रंगों के झंडों तथा योग से संबंधित बैनरों से सजाया गया था |

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri giving inaugural speech on the occasion of Vishwa Yoga Diwas at Madhepura Kirti Krida Maidan.
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri giving inaugural speech on the occasion of Vishwa Yoga Diwas at Madhepura Kirti Krida Maidan.

बता दें कि जिला पतंजलि समिति द्वारा आयोजित विश्व योग दिवस समारोह का उद्घाटन समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने किया | इस अवसर पर जहाँ डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, डॉ.नंदकिशोर, राजेश कुमार, डॉ.देवप्रकाश, प्रो.रीता कुमारी, किरण कुमारी, डॉ.एन.के.निराला, दीपक कुमार, परमेश्वरी प्रसाद, पशुपति चौरसिया आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया वहीं डॉ.मधेपुरी ने नारियल फोड़कर स्वयं प्रशिक्षक असंग स्वरुप के योगासन-प्राणायाम क्लास में शामिल गये तथा घंटों उस मनभावन वातावरण में पतंजलि द्वारा आपूर्ति की गई सफेद टी-शर्ट व दुपट्टों को पहन-ओढ़कर सभी “करो योग रहो निरोग” को चरितार्थ करते रहे | नेहरू युवा केंद्र के साथ-साथ पतंजलि जिला संरक्षक सुरेश प्रसाद यादव भी इस कार्यक्रम में सहयोगी बने |

Dr.Madhepuri giving certificates to the three best performers of Social Activities from the team of Khelguru Sant Kumar at the end of function.
Dr.Madhepuri giving certificates to the three best performers of Social Activities from the team of Khelguru Sant Kumar at the end of function.

जानिए कि डॉ.मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इतिहास को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जब 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा में दुनिया के सभी देशों को योग करने एवं योग दिवस मनाने हेतु प्रस्ताव दिया गया तो उस प्रस्ताव को 11 दिसंबर 2014 के दिन राष्ट्र संघ के 193 राष्ट्रों में से 177 सदस्यों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की सहमति प्रदान कर दी गयी | उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष का सबसे बड़ा दिन होने के कारण 21 जून को ही पहली बार 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस संपूर्ण विश्व में इसलिए मनाया गया कि योग करने से लोग इसी दिन की तरह बहुत लंबी अवधि तक जीवित रहेंगे, क्योंकि मन-मस्तिष्क और शरीर की मजबूत एकता का प्रतीक है- योग | अंत में अध्यक्षीय भाषण में डॉ.नंदकिशोर एवं धन्यवाद |

यह भी बता दें कि आज के दिन जिले के सर्वाधिक प्रखंडों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के योग को विभिन्न रूपों में उल्लास पूर्वक मनाया गया | विश्व योग दिवस पर योग महुआ मधेपुरा |

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जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने क्यों बदली राह ?

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ भाजपा का तीन साल पुराना बेमेल गठबंधन आखिरकार टूट गया। भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत गठबंधन से अलग होने का कड़ा फैसला लिया और बड़ी सफाई से ठीकरा पीडीपी के सिर फोड़ा। वहां विधानसभा में राजनीतिक दलों की जो शक्ति है उसे देखते हुए यह तयप्राय है कि परिस्थिति सामान्य होने तक राज्य में राज्यपाल शासन ही रहेगा और फिर से चुनाव के बाद ही कोई नई सरकार दिखेगी।
देखा जाय तो जम्मू-कश्मीर में चार महीने के असमंजस और मशक्कत के बाद सरकार गठन के साथ ही उसकी उलटी गिनती भी शुरू हो गई थी लेकिन भाजपा विपरीत विचारधारा के साथ भी सरकार चलाकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाह रही थी। यही कारण है कि संघ की असहमति के बावजूद वह पीडीपी के साथ सरकार में थी। लेकिन तीन साल में जिस तरह मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पीडीपी ने अपना आधार मजबूत करने के लिए अलगाववादियों के प्रति नरमी और जम्मू या लद्दाख की बजाय घाटी पर ध्यान केंद्रित रखा उसने भाजपा को परेशान कर दिया।
भाजपा जम्मू-कश्मीर में किस कदर परेशान हो चली थी इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गठबंधन तोड़ने की घोषणा करने आए राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के तेवर कुछ ऐसे थे जैसे कश्मीर के बारे में विपक्षी दलों के हुआ करते हैं। उन्होंने एक तरफ से आतंकी घटनाएं बढ़ने, कानून व्यवस्था ध्वस्त होने, जम्मू और लद्दाख क्षेत्र को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया। जबकि तीन साल तक भाजपा सरकार का हिस्सा भी रही है और केंद्र सरकार की ओर से आतंकियों के सफाए का दावा भी होता रहा है। यही नहीं कश्मीर में माहौल बदलने के लिए पीठ भी थपथपाई जाती रही है। लेकिन अब राग एकदम अलग है।
दरअसल भाजपा को अपनी गलती का अहसास उस वक्त पूरी तरह हो गया था जब रमजान के वक्त ऑपरेशन रोके जाने के बावजूद आतंकियों ने अपनी बंदूक नहीं छोड़ी और महबूबा इससे ऐतराज जताने की बजाय सस्पेंशन आफ ऑपरेशन को लागू करने की बात करती रहीं। महबूबा एक तरफ पत्थरबाजों को माफ करती रहीं और दूसरी तरफ सेना के मेजर गोगोई पर एफआइआर कर अपने कट्टरपंथी समर्थकों को खुश करने में जुटी रहीं। इतना ही नहीं हाल में कठुआ की घटना के बाद महबूबा सरकार पर सवाल उठा रहे मंत्रियों को भी जाना पड़ा। बताते हैं कि इन घटनाओं के कारण खासतौर से जम्मू क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों में बेहद रोष था।
एक अटकल यह है कि देर सबेर पीडीपी भी गठबंधन तोड़ने के बारे में सोच रही थी। ऐसे में भाजपा के लिए इससे उपयुक्त समय नहीं हो सकता था। गठबंधन तोड़ने के साथ ही भाजपा की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि केंद्र से प्रदेश को 80 हजार से एक लाख करोड़ रुपये का विकास पैकेज दिया गया। लेकिन महबूबा इसका लाभ प्रदेश को नहीं पहुंचा पाई। बताते हैं कि भाजपा में गठबंधन तोड़ने का फैसला एक दिन पहले ही हो गया था लेकिन शीर्ष नेतृत्व स्थानीय नेतृत्व से औपचारिक चर्चा के बाद ही इसकी घोषणा करना चाहता था। बहरहाल, अब भाजपा वहां खुलकर अपना राष्ट्रवाद का एजेंडा अपनाएगी और उसका फायदा 2019 में देश भर में उठाना चाहेगी।

 

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प्रतिदिन 1246 शौचालय निर्माण करने की चेतावनी दी डीएम ने

जहाँ एक ओर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सितंबर 2018 तक में बिहार के 238 मानव रहित रेलवे क्रासिंग को बंद करने की घोषणा की है, वहीं मधेपुरा के डीएम नवदीप शुक्ला ने अपने पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को जिले में प्रतिदिन 1246 शौचालयों का निर्माण करवाकर  अक्टूबर 2018 तक पूरी तरह शौचमुक्त जिला घोषित करने का लक्ष्य दिया है |

बता दें कि समाहरणालय सभागार में सोमवार को विकास योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक डीएम नवदीप शुक्ला (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में हुई | उन्होंने कहा कि बार-बार हिदायत देने के बावजूद जिले में शौचालय निर्माण की स्थिति ठीक नहीं हो रही है | इसके लिए पदाधिकारी एवं कर्मी भी कहीं न कहीं जिम्मेवार हैं | चेतावनी देते हुए डीएम ने कहा कि अधिकारी सहित संलग्न कर्मी अपने-अपने कार्यप्रणालियों में सुधार लायें अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें |

जहाँ बैठक में डीएम ने कहा कि 75% शौचालय का निर्माण होने पर वार्ड को पूर्ण भुगतान कर दिया जायेगा और 95% निर्माण कार्य पूरा होने पर वार्ड पूरी तरह ओडीएफ (Open Defecation Free) घोषित कर दिया जाएगा वहीं उन्होंने यह भी कहा कि जिले के 2242 वार्ड में 416 वार्ड ओडीएफ घोषित कर दिये गये हैं |

अंत में डीएम ने सभी सम्बद्ध पदाधिकारियों को निदेश देते हुए यही कहा कि शौचालय निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए गाँव-समाज के प्रबुद्धजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के साथ मिल-बैठकर निर्माण कार्य को पूरा करें | सुबह से शाम तक 393 सुरक्षाकर्मी फॉलोअप का कार्य कर रहे हैं | पदाधिकारी प्रखंड के सभी पंचायतों में गणमान्यों के साथ इस बाबत बैठक भी करें |

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क्या आपने कभी महिलाओं को बैंड बजाते देखा है?

क्या आपने कभी महिलाओं को बैंड बजाते देखा है? नहीं ना? वैसे भी ये काम परंपरागत तौर पर पुरुषों का माना जाता है। लेकिन जब परिवर्तन की बयार चल रही हो तो रूढ़ियां टूटती हैं और कुछ ऐसा होता है कि दुनिया दांतों तले ऊँगली दबा ले। जी हाँ, कुछ ऐसा ही हुआ है बिहार की  राजधानी पटना के बाहरी हिस्से के एक छोटे से गांव में जहां महिलाओं के एक समूह ने एक संगीत बैंड बनाया है। आप और अधिक चौंकेंगें जब जानेंगे कि ये सभी महिलाएं दलित समुदाय से आती हैं। आज यह बैंड सारी सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ रहा है। ये महिलाएं शादी समारोह में देर रात तक बाहर रहकर बैंड बजाती हैं और न केवल अपने घर बल्कि पूरे समाज के लिए उदाहरण बनकर सामने हैं।

गौरतलब है कि यह बैंड पटना के दानापुर में धिबरा गांव की 10 महिलाओं ने बैंड बनाया है। इस बैंड का नाम उन लोगों ने ‘सरगम बैंड’ रखा है। बैंड की सभी महिलाओं की उम्र लगभग 30 साल है। वे शादी एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं। बता दें कि इस बेहद खास बैंड की अगुआई ‘नारी गूंज’ नाम के एनजीओ की संचालक सुधा वर्गीस कर रही हैं। वे गदगद होकर कहती हैं कि रविदास समुदाय की ये महिलाएं खुद के लिए विशिष्ट पहचान तैयार करने में लगी हैं। बैंड की महिलाएं सुधा को सुधा दीदी कहकर बुलाती हैं।

बकौल सुधा 2016 में वह रविदास समुदाय की महिलाओं के साथ काम कर रही थीं उसी दौरान उन्हें यह आइडिया आया। उनके समुदाय में अधिकांश महिलाएं या तो खेतों में काम करती हैं या मजदूरी करती हैं। जब उन्होंने धिबरी की महिलाओं के साथ अपने विचार साझा किए तब शुरुआत में अविश्वास के रूप में प्रतिक्रिया सामने आयी। यह अस्वाभाविक नहीं था। किसी ने भी यहां महिलाओं के संगीत बैंड के बारे में नहीं सुना था। जो काम उन्हें करने के लिए कहा जा रहा था वह पुरूषों का काम माना जाता है। बहरहाल, काफी काउंसलिंग के बाद कुछ महिलाएं राजी हुईं और वे सुधा के साथ आ गईं।

आज उन महिलाओं के एक सकारात्मक और साहस भरे कदम ने इतिहास रच दिया है। अब तो वे दूर-दूर जाकर भी बैंड बजाती हैं। देश और दुनिया के लिए महिला सशक्तिकरण का अनोखा मिसाल पेश कर रही बिहार की इन महिलाओं को हमारा सलाम।

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नीति आयोग की बैठक में छाए रहे बिहार और नीतीश कुमार

राजधानी दिल्‍ली में रविवार को संपन्‍न नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बिहार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छाए रहे। मुख्यमंत्री ने इस बैठक में बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग एक बार फिर पुरजोर तरीके से रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग के शासी परिषद की चौथी बैठक में अपनी मांग दोहराते हुए उन्होंने विकास के मानकों के साथ-साथ मानव विकास से संबंधित सूचकांक में बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही उन्होंने सात निश्चय के तहत चल रहे कार्यक्रमों तथा सामाजिक अभियान के अंतर्गत शराबबंदी, दहेज उन्मूलन व बाल विवाह के खिलाफ चल रहे अभियान के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि अंतर क्षेत्रीय एवं अंतरराज्यीय विकास के स्तर में भिन्नता से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की जाए तो पाया जाएगा कि कई राज्य विकास के मापदंड, जैसे प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सांस्थिक वित्त एवं मानव विकास सूचकांकों पर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं। ऐसी स्थिति में तर्कसंगत आर्थिक रणनीति वही होगी जो ऐसे निवेश और अंतरण की पद्धति को प्रोत्साहित करे जिससे पिछड़े राज्यों को एक निर्धारित समय सीमा में विकास के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने में मदद मिले।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इससे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के केंद्रांश में वृद्धि होगी और राज्य को अपने संसाधनों का उपयोग, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिलेगा। वहीं केंद्रीय जीएसटी में अनुमान्य प्रतिपूर्ति मिलने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्होंने बीआरजीएफ के लंबित 1651.29 करोड़ के शीघ्र भुगतान की मांग भी गवर्निंग काउंसिल के सामने रखी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में चल रहे सात निश्चय कार्यक्रम के साथ-साथ चल रहे पूर्ण शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाहबंदी जैसे सामाजिक अभियानों की चर्चा भी की और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे इन कार्यक्रमों के लिए नीति आयोग के समर्थन व अतिरिक्त संसाधन की मांग की। आगे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता का उल्लेख राष्ट्रीय दृष्टि पत्र 2030 में स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए।

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भुला दो सारे शिकवे, चलो मनाएं ईद !

ईद 30 रोजे पूरे होने का दिन होता है | पवित्र रमजान के महीने हर बच्चा-बूढ़ा और नौजवान खुदा की इबादत करने हेतु रोजा रखते हैं | अंतिम दिन ईद का चाँद दिखते ही एक दूसरे को तत्क्षण “चाँद मुबारक” कहकर बधाई देने लगते हैं | बड़े-बुजूर्गों का आशीर्वाद लेने लगते हैं | अगली सुबह ईद की नमाज से पूर्व गरीबों को कुछ दान (यानि जकात-उल-फितर) देते हैं |

Samajsevi Sahityakar Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri along with the Present MP of Madhepura Shri Rajesh Ranjan alias Pappu Yadav expressing & explaining the importance of Eid to Muslim Youngters in presence of Dr.Ashok Kumar (Principal Madhepura College) after finishing Eid Namaz near Madhepura Eidgah.
Samajsevi Sahityakar Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri along with the Present MP of Madhepura Shri Rajesh Ranjan alias Pappu Yadav expressing & explaining the importance of Eid to Muslim Youngters in presence of Dr.Ashok Kumar (Principal Madhepura College) after finishing Eid Namaz near Madhepura Eidgah.

बता दे कि ईद के रोज जो नमाज पढ़ी जाती है वो बन्दों की तरफ से अल्लाह को धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए होती है कि उसने उन्हें रोजा रखने की तौफीक दी | फिर बाद में ईद की नमाज पढ़ लेने के बाद सभी एक दूसरे को ईद की बधाई देते हुए “ईद मुबारक” कहते हैं | हिन्दू-मुस्लिम सभी एक दूसरे से गले मिलते हैं | सारे शिकवे भुलाकर ईद मनाते हैं | सारे मैल को धो डालते हैं |

आज सवेरे मुल्क के सभी हिस्से में ईद की नमाज ईदगाह में अदा की गई | मधेपुरा ईदगाह में जहाँ भारी संख्या में मुस्लिम रोजेदारों ने नमाज पढ़ी, वहीं बाहर में मधेपुरा के वर्तमान सांसद पप्पू यादव एवं पूर्व सांसद शरद यादव ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ ईश्वर से अमन-चैन की दुआ मांगी…….. साथ ही नीतीश सरकार के केबिनेट मिनिस्टर रमेश ऋषिदेव भी अपनी टीम के साथ ‘ईद मुबारक’ करते और गले मिलते देखे गये |

Former MP of Madhepura & Senior leader of National Politics Shri Sharad Yadav along with Samajsevi Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri, Ex-MLC Shri Vijay Kumar Verma, Ex-MLA Shri Parmashwari Prasad Nirala, Congress District President Shri Satyendra Singh & others waiting to give Eid Mabarak in front of Madhepura Eidgah.
Former MP of Madhepura & Senior leader of National Politics Shri Sharad Yadav along with Samajsevi Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri, Ex-MLC Shri Vijay Kumar Verma, Ex-MLA Shri Parmeshwari Prasad Nirala, Congress District President Shri Satyendra Singh & others waiting to greet Eid Mabarak in front of Madhepura Eidgah.

मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने सबों से यही कहा – “ईद सिर्फ आपसी मिल्लत, सद्भाव व भाईचारे का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह पर्व अल्लाह द्वारा बन्दों को (दिये गये हुक्म के अनुसार) 30 रोजे रखकर खुद को संतुलित करने तथा समाज को बराबरी पर लाने का मौका है | यह छोटे-बड़े और अमीर-गरीब के दस्तरखान का फर्क मिटाने का अवसर प्रदान करता है | यदि कहीं कोई फर्क रह भी जाय तो हर एक से गले मिलकर ‘बराबरी’ को मजबूत करने का अंतिम मौका देता है | यह बराबरी का पाठ पढ़ाता है, बिछाता है और ओढ़ता है |

यह भी जानिये कि रमजान के महीने में रोजे रखने का फर्ज करार दिया गया है | केवल इसलिए कि इंसान को भूख-प्यास का अहसास हो सके और वह लालच से दूर होकर सही राह पर चल सके….|

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ जिला मुख्यालय के सभी मस्जिदों के आस-पास तथा विभिन्न चौक-चौराहों पर पुलिस बल मुस्तैद रहे तथा शांति व सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाये रखने के लिए डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी बाबूराम अपनी-अपनी टीम के साथ मुस्तैद दिखे, वहीं ईदगाह में इमाम कारी मुस्तकीम तथा बड़ी मस्जिद में मौलाना सगीर नमाज अदा करवाये | साथ ही मो. शौकत अली, ध्यानी यादव आदि साफ-सफाई के अतिरिक्त रोशनी-पानी व्यवस्था हेतु चौकस रहे |

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